आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कैसे बनें? शैक्षिक योग्यता, कार्य, भर्ती नियम एंव मानदेय

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कैसे बनें? इन दिनों रोजगार की हालत किसी से छिपी नहीं है। सरकारी नौकरियों की संख्या बेहद सीमित है। और जो नौकरियां उपलब्ध हैं भी उनमें एक एक पद के लिए हजारों लाखों उम्मीदवारों की लाइन लगती है। रोजगार की दर में लगातार गिरावट आ रही है। नई नौकरियां जरूरत के हिसाब से निकल नहीं रही हैं और जिस मात्रा में निकल रही हैं, करीब करीब उतनी ही विभिन्न निजी कंपनियों में छंटनी कर दी जा रही है। आलम यह है कि नौकरियों के लिए मारा मारी मची है। पढे लिखे के बीच बेरोजगारी का आलम यह है कि जिन नौकरियों के लिए योग्यता 10वीं चाहिए, उसके लिए graduate और post graduate यानी PG डिग्री हासिल उम्मीदवार अप्लाई कर रहे हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कैसे बनें? शैक्षिक योग्यता, कार्य, भर्ती नियम एंव मानदेय

महिला हो या पुरुष दोनों अभ्यर्थियों के मामले में यही हालात इन दिनों बने हुए हैं। आंगनबाडी कार्यकर्ता के मामले में भी ऐसा ही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनने के लिए भी ग्रेजुएशन और पीजी की डिग्री हासिल महिला अभ्यर्थी बडे पैमाने पर आवेदन करती हैं। इन अधिक पढी लिखी महिलाओं को डिग्रियों की वजह से भर्ती में तवज्जो भी दी जाती है। उनके लिए साक्षात्कार यानी interview में कुछ अंक अलग से निर्धारित कर दिए गए हैं।

दोस्तों, क्या आपको पता है? ये आंगनबाडी कार्यकर्ता कैसे बनते हैं? अगर आपका जवाब न है तो भी चिंता की कोई बात नहीं। आज इस post के जरिये हम आपको आंगनबाडी कार्यकर्ता क्या करती है और आप आंगनबाडी कार्यकर्ता कैसे बन सकते हैं? इसके बारे में विस्तार से बिंदुवार कदम दर कदम जानकारी देने की कोशिश करेंगेे-

आंगनबाडी क्या होती है –

अनुक्रम

इससे पहले कि हम आपको आंगनबाडी कार्यकर्ता बनने की बुनियादी जानकारी से रूबरू कराएं, जरूरी यह है कि पहले आपको यह पता हो कि आखिर आंगनबाडी क्या है? तो दोस्तों हम आपको बता दें कि आंगनबाडी का सीधा सीधा मतलब है आंगन आश्रय। जैसा कि नाम से ही स्पश्ट है आंगनबाडी केंद्र आंगन आश्रय से जुडी गतिविधियों का केंद्र होता है। यानी वह गतिविधियां जो बच्चे को आंगन में कराई जा सकती हैं। इसमें खेलकूद, खाना पीना, उन्हें अक्षर ज्ञान जैसी गतिविधियां विशेश रूप से शामिल हैं।

आंगनबाडी कार्यकर्ता कौन होती है –

अब आते है आंगनबाडी कार्यकर्ता पर। जैसा कि हम ऊपर आंगनबाडी केंद्र के बारे में जान चुके हैं, तो वह महिला जो आंगनबाडी केंद्र का संचालन करती है उसे आंगनबाडी कार्यकर्ता कहा जाता है। उसे उसके कायों में सहायता देने के लिए आंगनबाड़ी सहायिका को रखा जाता है। कुछ स्थानों पर आंगनबाडी कार्यकर्ता के साथ ही मिनी कार्यकर्ता और सहायिका रखी जाती हैं। इन सभी के लिए सरकार की ओर से अलग अलग मानदेय निर्धारित किया गया है। इसे कुछ ही साल पूर्व बढाया भी गया है। लगे हाथ आपको यह भी बता दें कि आंगनबाडी कार्यकर्ता और सहायिका के मानदेय में दुगुने का अंतर है।

आंगनबाडी केंद्र में क्या होता है –

इस केंद्र में तीन से छह साल तक के बच्चों के पोषण का, उनके स्वास्थ्य का ओर प्रारंभिक शिक्षा का ध्यान रखा जाता है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने का भी काम आंगनबाडी के जिम्मे होता है। आसान शब्दों में कहें तो तीन से छह साल के बच्चों को पोषण, स्कूल पूर्व शिक्षा और स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार आंगनबाड़ी केंद्र चलाती है और इन केंद्रों के संचालन का जिम्मा आंगनबाडी कार्यकर्ता करती है।

इन केंद्रों में पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा से जुडी सुविधा के साथ ही परामर्श भी दिया जाता है यानी councilng भी की जाती है। आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना ज्यादातर गांव या बस्ती के बीच ऐसी किसी जगह पर की जाती है, जहां बच्चे सुरक्षित रहकर खेल सकें और पोषक आहार ग्रहण कर सके। आंगनबाड़ी की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकारें अपने स्तर से कोशिश करती रहती हैं। उदाहरण के लिए उत्तराखंड राज्य को ही लें।

इसी नवंबर माह में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड सरकार ने आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए चार दिन दूध, दो दिन अंडा और दो दिन केला की नई व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। आपको यह भी बता दें सरकार बजट के हिसाब से इस व्यवस्था में इजापफा, कटौती करती रहती है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कैसे बन सकते हैं? आंगनबाडी कार्यकर्ता बनने के लिए सामान्य योग्यता क्या है –

क्या आप भी आंगनबाडी कार्यकर्ता के रूप में काम करना चाहते हैं? जवाब हां है और अगर आपके मन में भी आंगनबाडी कार्यकर्ता बनने की इच्छा जोर मार रही है तो जान लीजिए कि आंगनबाडी कार्यकर्ता कौन बन सकता है? सबसे पहली बात तो यह आंगनबाडी कार्यकर्ता महिला ही बन सकती है। अब आंगनबाडी कार्यकर्ता बनने के लिए भी कुछ आवश्यक योग्यताएं निर्धारित की गई हैं।

आइए, जान लेते हैं कि यह कौन कौन सी योग्यताएं हैं। नीचे लिखी जानकारी को एक नजर पढ लें –

आंगनबाडी कार्यकर्ता बनने के लिए यह आवश्यक है कि –

  1. आवेदन करने वाली महिला संबंधित राज्य की स्थानीय निवासी हो
  2. आवेदन करने वाली महिला की उम्र कम से कम 21 वर्श और अधिक से अधिक 45 साल हो
  3. यह एक आवश्यक शर्त है कि आवेदक महिला अनिवार्य रूप से विवाहित हो

आंगनबाडी कार्यकर्ता बनने के लिए शैक्षिक योग्यता क्या है –

आंगनबाडी बनने के लिए सामान्य योग्यता के लिए अतिरिक्त शैक्षिक योग्यता भी निर्धारित की गई है। आइए जानते हैं कि क्या है यह योग्यता –

आपको बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनने के लिए शैक्षिक योग्यता 10वीं निर्धारित की गई है। यानी केवल वही महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनने के लिए आवेदन कर सकती है, जिसने कि कम से कम 10वीं पास की हो। वहीं, आंगनबाड़ी सहायिका बनने के लिए आवेदन करने के लिए यह योग्यता कम से कम 8वीं पास रखी गई है।

मेरिट के आधार पर होगा आंगनबाडी कार्यकर्ता का चयन कैसे होता है –

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का चयन merit के आधार पर किया जाएगा। इसे तैयार करने के लिए साक्षात्कार के लिए 25 अंक निर्धारित किए गए हैं। यह अंक इस तरह से दिए जाएंगे –

  1. शैक्षिक योग्यता के लिए 10 अंक – इसमें राज्य की ओर से निर्धारित की गई योग्यता के लिए कुल 7 अंक, ग्रेजुएशन की डिग्री के लिए कुल 2 अंक, पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री के लिए 1 अंक शामिल है।
  2. नर्सरी टीचर या बाल सेविका के रूप में 10 माह या इससे अधिक का अनुभव – 3 अंक
  3. पति से सात साल से अलग रह रही एकल महिला या अनाथ आश्रम में रह रही या तलाकशुदा महिला – 3 अंक
  4. 40 फीसदी या इससे अधिक विकलांगता वाली अभ्यर्थी – 2 अंक
  5. एससी/एसटी/ओबीसी से संबंधित अभ्यर्थी – 2 अंक
  6. पर्सनल इंटरव्यू – 3 अंक
  7. अगर अभ्यर्थी के परिवार में दो बेटी हों – 2 अंक

इस तरह अंकों के कुल योग के आधार पर merit list तैयार की जाएगी, जो भर्ती का आधार बनेगी।

अगर मेरिट में दो आवेदकों के अंक समान हों तो क्या होगा –

आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि क्या होगा अगर दो आवेदकों के मेरिट लिस्ट में अंक समान आएं तो? आइए हम आपको इसका जवाब दें। दोस्तों, अगर इस मेरिट लिस्ट में किन्हीं दो महिला आवेदकों के अंक समान यानी बराबर आते हैं तो फिर भर्ती में उस महिला आवेदक को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसकी कि उम्र ज्यादा होगी।

आंगनबाडी योजना कब शुरू हुई –

अब हम आपको आंगनबाडी योजना का इतिहास बताएंगे। दरअसल, आंगनबाडी योजना का शुभारंभ आज से 34 साल पहले 1985 में हुआ था। उस वकत एकीकूत बाल विकास सेवा कार्यक्रम के तहत इसे प्रारंभ किया गया था। आज की तारीख में केंद्र सरकार राज्यों की मदद से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए इस योजना को संचालित करती है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की देख रेख में इस योजना का काम निदेशालय समेकित बाल विकास सेवाएं देखता है। विभाग की ओर से जारी आदेशों पर उसी की ओर से राज्य में योजना को लेकर सभी दिशा निर्देश जारी किए जाते हैं।

आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को मानदेय कितना मिलता है –

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती एक निश्चित मानदेय के आधार पर होती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सहायिका दोनों के लिए एक निश्चित मानदेय मिलता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को 8 हजार रुपये, जबकि आंगनबाड़ी सहायिका को इसका ठीक आधा यानी महज 4 हजार रुपये मासिक मानदेय प्राप्त होता है।

कई बार आंगनबाडी कार्यकर्ता इस मानदेय को कम बताकर इसे बढ़ाए जाने का भी मसला उठा चुकी हैं। उनका कहना यह है कि बेहतर तरीके से जीवन यापन करने के लिए इस मानदेय में इजाफा किए जाने की सख्त जरूरत है।

राज्य अपनी जरूरत के हिसाब से करते हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती –

हर राज्य अपनी जरूरत के हिसाब से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती करते हैं। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से विज्ञापन निकाला जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या और आवश्यकता के लिहाज से भर्ती होती है। उदाहरण के लिए देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को ही लें। उत्तर प्रदेश में 2009 के बाद से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के भर्ती नहीं हुई है। पूरे 10 साल बीत चुके। अब कहा जा रहा है कि यहां पूरे प्रदेश के लिए 31 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती की जाएंगी।

हर जिले में आंगनबाडी के पद अलग अलग संख्या में रिक्त हैं। भर्ती जिला स्तर पर ही अंजाम दी जाएगी। आपको बता दें कि पहले भर्ती बाल विकास परियोजना अधिकारी के जरिये होती थी, लेकिन अब यह जिम्मा जिला कार्यक्रम अधिकारी यानी DPO को सौंपा गया है। तय किया गया है कि जिला स्तरीय समिति के माध्यम से ही आंगनबाडी कार्यकर्ताओं के आवेदन पत्र मंजूर होंगे, इन पर कार्रवाई होगी और interview के बाद भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से अंजाम दिया जाएगा। इससे भर्ती में किसी भी तरह की गडबडी की आशंका कम से कम रह जाएगी।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती के तरीकों में आया है बदलाव –

समय गुजरने के साथ ही आंगनबाडी कार्यकर्ता की भर्ती के तरीके में बदलाव आया है। राजस्थान सरकार का ही उदाहरण लें। राजस्थान सरकार ने आंगनबाडी कार्यकर्ताओं की भर्ती सीधे न कराकर उसके लिए बाकायदा एक नया मूल्यांकन प्रपत्र यानी evaluation form भरवाने का निर्णय लिया है। इस मूल्यांकन प्रपत्र में शैक्षणिक योग्यता, श्रेणी, कार्यानुभव और विशेष योग्यता का उल्लेख किया जाएगा।

हर कालम अलग होगा और हर कालम में प्रदत्त अंकों के आधार पर merit list तैयार की जाएगी। पहले ऐसा नहीं था। लिहाजा इन पदों पर सिफारिश का खेल खूब चला करता था। शिकायतें बढीं तो अधिकारियों की आंख खुली। यह तय किया गया कि सबसे पहले इस पद के लिए शैक्षिक योग्यता को बढाया जाए। लिहाजा, जो इस पद के लिए न्यूनतम योग्यता थी आठवीं पास, उसे बढ़ाकर पद के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता को 10वीं पास कर दिया गया।

इसके साथ ही नियुक्ति के लिए बाकायदा आवेदन पत्र निकालकर उन्हें रखे जाने का फैसला लिया गया। इसमें जिला समिति को ही यह जिम्मा दिया गया कि वह आवेदन पत्रों पर निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक merit list तैयार करे और उस merit list के आधार पर ही आंगनबाडी कार्यकर्ताओं की तैनाती आंगनबाडी केंद्रों के लिए की जाए।

तीन साल पहले किया गया आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भर्ती के नियमों में बदलाव –

ज्यादातर राज्यों में आंगनबाडी कार्यकर्ताओं की शैक्षिक योग्यता में बदलाव किया गया था, जो कि तीन साल पहले हुआ था। राजस्थान की ही बात करें तों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की शैक्षिक योग्यता और आवेदन प्रक्रिया में 2016 में बदलावकर दिया गया था। योग्यता में बदलाव की वजह धांधलियों की शिकायत थी।

आंगनबाडी कार्यकर्ताओं की भर्ती में पंच और सरपंचों को भी हस्तक्षेप का पूरा अधिकार था। ऐसे में होता यह था कि लोग भाई भतीजावाद, परिवारवाद चलाते थे। परिवार की ही महिलाओं की भर्ती आंगनबाडी केंद्रों में करा दी जाती थी‌। जयादातर महिलाएं दसवीं पास भी नहीं होती थीं। इनमें से कई आंगनबाडी केंद्रों तक जाती ही नहीं थी और घर बैठे मानदेय पा रही थीं इन नियुक्तियों में बडे पैमाने पर गडबडी की शिकायतों के बाद आखिरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता के सााथ ही पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही बदल दिया गया।

प्रशासन रखता है आंगनबाड़ी केंद्रों पर नजर –

आंगनबाडी केंद्रों पर प्रशासन की पूरी नजर रहती है। उप जिलाधिकारी यानी एसडीएम अक्सर इलाके के आंगनबाडी केंद्रों पर छापा मारकर इनकी monitoring करते हैं। देखते हैं कि बच्चों को कापी, किताबें ठीक से मिल रही हैं या नहीं। दवाओं के हालात क्या हैं। उपस्थिति के क्या हाल हैं। इसके लिए वह उपस्थिति पंजिका यानी attendence register का भी निरीक्षण करते हैं।

अव्यवस्था पाए जाने पर संबंधित आंगनबाडी कार्यकर्ता को चेतावनी जारी की जाती है, जबकि किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर जांच बिठाई जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर बाद में संबंधित लोगों पर विधि सम्मत कार्रवाई भी की जाती है। कई राज्यों में इस तरह की कार्रवाई आंगनबाडी कार्यकर्ताओं पर हुई है।

तो दोस्तों यह भी आंगनबाडी के अर्थ से लेकर आंगनबाडी कार्यकर्ता बनने तक की पूरी जानकारी। कोशिश की गई है कि आंगनबाडी कार्यकर्ता से जुडा कोई भी जरूरी बिंदु इस post से न छूटे। हमें पूरी उम्मीद है कि आपको यह जानकारी जरूर पसंद आई होगी। अगर आपके दिमाग में इस post को पढने के बाद आ रहा है कोई भी सवाल तो यहां आपका स्वागत है। आप बगैर हिचक के यहां comment करके अपना सवाल पूछ सकते हैं। कोशिश रहेगी कि आपको उसका सटीक जवाब देकर आपकी जिज्ञासा को शांत किया जा सके।। धन्यवाद ।।

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