योग क्या है? इसके लाभ, नियम प्रकार एवं योगासन

सबसे पहले बात योग के अर्थ की। ‘योग’ का अर्थ होता है जुड़ना अथवा मिलना। ऐसी प्रक्रिया, जिसके माध्यम से शरीर, मन एवं आत्मा साथ मिल जाते हैं उसे योग कहा जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार योग शब्द संस्कृत के ‘युज’ से निकला है। इसका भी शाब्दिक अर्थ मिलना है। योग व्यक्तिगत चेतना का आत्मा से सार्वभौमिक मिलन है।

आपको बता दें कि योग एक प्राचीन जीवनपद्धति (ancient lifestyle) है। इसका इतिहास करीब पांच हजार साल पुराना माना जाता है। इस समय दुनिया भर में लोग योग के पीछे दीवाने हैं। भारत को योग में विश्व गुरु का दर्जा हासिल है। उत्तराखंड राज्य के शहर ऋषिकेश को योगनगरी कहकर संबोधित किया जाता है। वहां हर साल मार्च में योग फेस्टिवल भी आयोजित किया जाता है।

योग के क्या क्या लाभ हैं? [What are the benefits of yoga?]

दोस्तों, आपको बता दें कि योग के शारीरिक (physical) एवं मानसिक (mental) लाभ दोनों होते हैं। सबसे पहले बात करते हैं योग के शारीरिक लाभों की, जो कि इस प्रकार से हैं-

  • 1. योग करने से व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी पावर (immunity power) बेहतर होती है।
  • 2. योग से व्यक्ति के ब्लड प्रेशर (blood pressure), कोलेस्ट्राल (cholesterol) के लेवल एवं हृदय गति में भी सुधार देखने को मिलता है।
  • 3. योगासन शरीर पर उम्र के असर को कम करने में सहायक हैं।
  • 4. योग से श्वसन बेहतर होता है। इससे फेफड़ों (lungs) को ताकत मिलती है एवं रक्त शुद्ध होता है।
  • 5. शरीर लचीला बनता है एवं मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है।
  • 6. योग रीढ़ की हड़डी/मेरू दंड को लचीला बनाने में भी सहायक है।
  • 7. योग वजन को कम करने (weight loss) एवं शरीर को दृढ़ बनाने (strong body) में सहायक है।

योग के मानसिक लाभ [mental benefits of yoga]

मित्रों अब आपको योग के मानसिक लाभों के बारे में जानकारी देंगे, जो कि इस प्रकार से हैं-

योग क्या है? इसके लाभ, नियम प्रकार एवं योगासन
  • -योग मानसिक शांति प्रदान करने एवं तनाव (tension) दूर करने में सहायक है।
  • -योग व्यक्ति की एकाग्रता में वृद्धि करता है, जिससे वह अपने कार्य को मन लगाकर करता है।
  • -योग से व्यक्ति की ध्यान (meditation) एवं श्वसन शक्ति बेहतर होती है, जिससे वह भीतर से बेहतर महसूस करता है।
  • -मन शांत होने व्यक्ति को बेहतर नींद आती है एवं वह तरोताजा महसूस करता है।
  • -योग से वह भीतर से मजबूत होता है। उसकी संकल्प शक्ति तीव्र होती है।

योग के कितने प्रकार हैं? types of yoga

मित्रों, योग के चार प्रकार हैं। अधिकांश आसन इन्हीं के भीतर आते हैं। इनका विस्तार से ब्योरा इस प्रकार से है-

1. राज योग-

दोस्तों, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, राज का अर्थ शाही है एवं योग का अर्थ है जुड़ना। इस योग के आठ अंग हैं, जिसकी वजह से महर्षि पतंजलि ने इसका नाम अष्टांग योग रखा। ‘योगसूत्र’ में महर्षि पतंजलि ने इनका उल्लेख किया है ये इस प्रकार से हैं-

  • a) यम यानी शपथ लेना
  • b) नियम आचरण अथवा आत्मानुशासन।
  • c) आसन, प्राणायाम।
  • d) श्वास नियंत्रण।
  • e) प्रत्याहार यानि इंद्रियों का नियंत्रण।
  • f) धारण अर्थात एकाग्रता
  • g) ध्यान यानी मेडिटेशन
  • h) समाधि यानी परमानंद, मुक्ति

2. कर्म योग

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह आपके जीवन में किए गए कार्यों से संबंधित शाखा है। यह माना जाता है कि आज हम जो भी कुछ हैं, अपने भूत में किए गए कार्यों का प्रतिफल है। वस्तुतः कर्मयोग का अर्थ अपना जीवन निस्वार्थ रूप से कर्म करते हुए जीवना एवं दूसरों की सेवा करना है।

3. भक्ति योग

भक्ति योग को मन का योग कहा जाता है। यह भावनाओं को नियंत्रित करने का एक सकारात्मक एवं प्रभावी तरीका है। हम अपने समस्त कार्यों को प्रभु को अर्पित करते चलते हैं। भक्ति का मार्ग सभी के प्रति स्वीकार्यकता एवं सहिष्णुता की राह दिखाता है।

4. ज्ञान योग

मित्रों, यदि भक्ति योग मन का योग है तो ज्ञान योग बुद्धि का योग। इस पथ पर चलना बेहद कठिन माना गया है। इस राह के लिए ग्रंथों का अध्ययन एवं इसके माध्यम से बुद्धि का विकास बेहद आवश्यक माना गया है।

योगासन के प्रकार [types of Yoga] –

दोस्तों, आपको बता दें कि योगासन योग का ही एक हिस्सा हैं। शरीर की अवस्था के अनुसार इसके कुल 46 प्रकारों के विषय में हम आपको जानकारी देंगे। यह इस प्रकार हैं-

1. खड़े होकर किए जाने वाले आसन-

सबसे पहले बात खड़े होकर किए जाने वाले योग आसनों की करेंगे, जो कि इस प्रकार से हैं-

  • ताड़ासन
  • हस्तोसत्ताकनासन
  • कटिचक्रासन
  • अर्द्धचक्रासन
  • त्रिकोणासन
  • पार्श्वकोणासन
  • वृक्षासन
  • गरूड़ासन

2. बैठकर करने वाले योग आसन

साथियों, अब आपको बैठकर किए जाने वाले आसनों के बारे में बताते हैं, जो कि इस प्रकार से हैं-

  • पद्मासन
  • सिद्धासन
  • वज्रासन
  • भद्रासन
  • सिद्धासन
  • गोमुखासन
  • वक्रासन
  • अर्द्धमत्स्येंद्रासन
  • गोरक्षासन
  • गर्भासन
  • पश्चिमोत्तोनासन
  • कूर्मासन
  • उत्तानमंडूकासन
  • उष्ट्रासन
  • योगासन
  • सुप्तनवज्रासन
  • शशांकासन
  • मंडूकासन

3. पेट के बल लेटकर करने वाले आसन-

अब आपको बताते हैं कि आप कौन कौन से आसन पेट के बल लेटकर कर सकते हैं। ये इस प्रकार से हैं- –

  • मकरासन
  • भुजंगासन
  • शलभासन
  • धनुरासन

4. पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन-

अब आपको उन आसनों के बारे में जानकारी देंगे, जिन्हें पीठ के लेटकर किया जा सकता है-

  • उत्तासनपदासन
  • सेतुबंध सर्वांगासन
  • अर्द्धहलासन
  • हलासन
  • पवनमुक्तासन
  • शवासन

5. आधुनिक आसन

  • विपरीतकरणी
  • सर्वांगासन
  • शीर्षासन
  • उत्थितपद्मासन
  • नौकासन
  • कुक्कुटासन
  • बकासन
  • मयूरासन
  • नटराजासन

विभिन्न रोगों में कौन से आसन करना लाभदायक है –

मित्रों, अब हम आपको जानकारी देंगे कि आप किस रोग में कौन सा आसन कर सकते हैं। इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि कोई भी आसन किसी गुरू/विशेषज्ञ की निगरानी/परामर्श में ही करें। अन्यथा आपको नुकसान भी हो सकता है-

  • a) खांसी (cough) – सूर्य नमस्कार, सिद्धासन
  • b) डायबिटीज (diabetes)- पश्चिमोत्तानासन, वक्रासन, मंडूकासन, भुजंगासन, गोमुखासन, शीर्षासन
  • c) पीठ दर्द (back pain)- पवनमुक्तासन, सुप्तशवज्रासन, भुजंगासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन
  • d) दमा (asthma)- ताड़ासन, गोमुखासन, सर्वांगासन, भुजंगासन, मकरासन
  • e) गुस्सा (anger)- कूर्मासन, बालासन, मकरासन, शलभासन, शवासन, उष्ट्रासन
  • e) एसिडिटी (acidity)- हलासन, वज्रासन, मयूरासन, पवनमुक्तासन
  • f) थकान (fatigue)- सूर्यनमस्कार, भुजंगासन, चक्रासन, धनुरासन, मकरासन, शवासन
  • g) स्लिप डिस्क (slip disk)- सरल भुजंगासन, मकरासन, शवासन

छात्र हैं तो वृक्षासन एकाग्रता एवं सर्वांगासन याददाश्त बढ़ाएगा

यदि आप छात्र हैं अथवा किसी परीक्षा (exam) में शिरकत कर रहे हैं और आपका पढ़ाई पर फोकस नहीं बन पा रहा है, ध्यान इधर उधर भटक रहा है तो वृक्षासन आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। इसे ट्री पोज (tree pose) भी कहते हैं। इसके अलावा सर्वांगासन याददाश्त बढ़ाने में लाभकारी होगा। अब हम आपको यह दोनों आसन करने की विधि बताएंगे।

पहले वृक्षासन (vrikshasana) की विधि-

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैरों पर सीधे खड़े हो जाएं।
  • -अब अपने बाएं पैर पर संतुलन बनाएं एवं अपने दाएं पैर को मोड़ते हुए उसका तलवा बाएं पैर की अंदरूनी जांघ पर ले जाकर रख दें।
  • -याद रहे कि इस अवस्था में आपके दाएं पैर का पंजा जमीन की ओर हो।
  • -इसी पोज में कुछ समय संतुलन बनाकर खड़े रहें।
  • -अब हाथों को जोड़कर सिर के ऊपर ले जाएं।
  • -कुछ देर इसी स्थिति में रहें एवं दूसरे पैर से भी यही क्रिया दोहराएं।

सर्वांगासन (sarvangasana) करने की विधि –

मित्रों, अब हम आपको सर्वांगासन (sarvangasana) करने की विधि बताएंगे-

  • -सबसे पहले सीधे पीठ के बल लेट जाएं।
  • -दोनों हाथों को जमीन पर पैरों की दिशा में रखें।
  • -अब अपनी आंखें बंद कर लें।
  • -शरीर के भीतर की ओर गहरी सांस लें।
  • -इसके साथ ही दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाएं।
  • -पैरों के साथ ही कमर को भी धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाएं।
  • -पैर ऊपर की ओर 90 डिग्री के कोण पर हों तो कमर एवं पीठ ऊपर उठाएं। इसके लिए अपने दोनों हाथों का सहारा लें।
  • -हाथों की कोहनियों को जमीन पर ही रखें।
  • -हथेलियों से पीठ को सहारा देते हुए याद रहे कि दोनों हाथ के अंगूठे पेट की ओर रहें। इसके अतिरिक्त हाथों की चार उंगलियां पीठ पर आमने सामने रहें।
  • -इस स्थिति में थोड़ी देर रहने के बाद धीरे धीरे अपने हाथों एवं कंधों के सहारे को हटाकर कमर को नीचे लाएं।
  • -पैरों को जमीन पर वापस लाएं।

योग करने का बेहतरीन समय कौन सा है?

दोस्तों, अब हम आपको बताएंगे कि योग करने का बेहतरीन समय कौन सा है। दोस्तों, जिस तरह सुबह उठकर पढ़ना बेहतर माना जाता है, उसी प्रकार योग को भी सुबह के वक्त करना बेहतर माना जाता है। आपको सुबह (morning) जल्दी उठकर नाश्ते से पूर्व एवं स्नान से पहले अथवा बाद में योग करना चाहिए।

परंतु यदि आपके पास सुबह के वक्त योग का समय नहीं तो आप शाम को सूर्यास्त यानी सूरज डूबने के पश्चात भी योग कर सकते हैं। केवल इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि योग करते समय आपका पेट खाली हो। अर्थात आप खाना खाने के दो-तीन घंटे बाद योग करें। योग को मैट अथवा चटाई पर बैठकर ही करें।

स्थान ऐसा हो, जो ऊबड़ खाबड़ न हो, समतल हो। चाहे घर हो अथवा पार्क ऐसे स्थान का चुनाव करें, जो खुला हो, यानी वहां वेंटिलेशन (ventilation) बेहतर हो एवं आप बेहतर तरीके से सांस ले सकें। इस दौरान हो सके तो अपने मोबाइल फोन को स्वयं से दूर ही रखें। यदि आपके साथ कोई साथी भी योग करे तो और बेहतर।

इससे सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त यदि आप योग किसी विशेषज्ञ (specialist) की निगरानी में करेंगे तो और बेहतर होगा। अथवा पहले सीखकर उसके पश्चात घर में स्वयं योग करें।

योगारंभ के समय इन बातों का ध्यान रखें

यदि आप अभी beginner हैं तो निम्न बातों का ध्यान रखें-

  • -शुरूआत में सिर्फ वही आसान करें, जो आप आसानी से कर पा रहे हों।
  • -अपने शरीर के साथ चलें। उसके साथ जबरदस्ती अथवा जल्दबाजी कतई न करें।
  • -यदि शरीर में लचीलापन कम है तो आपको शुरूआत में कुछ कठिनाई आ सकती है, लेकिन आसनों के दोहराव के साथ यह समस्या धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी।
  • -आरंभ में दो आसन के बीच कुछ सेकंड के लिए आराम अवश्य करें। यह अवधि अपनी शारीरिक जरूरत के हिसाब से तय करें।

योगासन से जुड़ी कुछ आवश्यक बातें-

अब हम आपको योगासन से जुड़ी कुछ अहम बातें बताएंगे, जो कि इस प्रकार से हैं-

  • -10 साल से कम उम्र के बच्चों को अधिक मुश्किल आसन न कराएं।
  • -महिलाएं गर्भावस्था में योग किसी गुरू के निर्देशन में करें।
  • -यदि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को योग सूट नहीं करता तो इस अवधि में कोई आसान न करें।
  • -अपने खान-पान में परहेज बरतें। बेसमय खाना-पीना न करें।
  • -तंबाकू (tobacco) एवं धूम्रपान (smoking) की आदत को छोड़ने का प्रयास करें।
  • -कम से कम छह घंटे की नींद अवश्य लें।
  • -दिन में छह गिलास पानी अवश्य पीने की आदत डालें।

इस स्थिति में योगासन न करें

योग करना कुछ स्थितियों में अवाइड (avoid) भी करना चाहिए। आप योग न करें-

  • यदि आपकी हड्डी टूट गई हो।
  • यदि आप हर्निया (harniya) के रोगी हों।
  • यदि आप हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure) के मरीज हों।
  • यदि आपका आपरेशन (operation) हुआ हो।
  • यदि आपको अल्सर (ulcer) अथवा टीबी (TB) हुआ हो।

21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया गया

योग की महिमा को इसी बात से समझा जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 21 जून को विश्व योग दिवस (world yoga day) के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। भारत में इस अवसर पर कार्य्रकमों का सरकारी स्तर पर आयोजन किया जाता है। तमाम राजनेता भी अपने अपने स्तर से योग का प्रचार प्रसार करने में जुटते हैं।

इससे होने वाले लाभों की आम जनता को जानकारी दी जाती है, ताकि अधिक से अधिक लोग योग को अपनाएं। दुनिया भर में योग के क्रेज के बारे में तो हम आपको जानकारी दे ही चुके हैं। विदेशों से बड़ी संख्या में लोग योग सीखने के लिए हमारे देश भारत का रूख करते हैं। वे साधु सन्यासियों से भी बहुत प्रभावित रहते हैं।

खास तौर पर उत्तराखंड में योग सीखने के इच्छुक ऐसे लोगों की आवाजाही बड़ी संख्या में देखी जा सकती है। बहुत से विदेशी तो ऐसे भी हैं, जो योग सीखने के बाद भारत में ही ठहर गए हैं। उन्हें यहां की संस्कृति इस कदर भाती है कि वे यहां रच बस गए हैं।

भारत के प्रसिद्ध योग गुरू yoga (guru) कौन कौन हुए हैं

भारत के प्रसिद्ध योगगुरूओं की बात करें तो बीकेएस आयंगर (bks ayanger), स्वामी शिवानंद (swami shivanand) आदि की ख्याति संपूर्ण जगत में विद्यमान है। आयंगर ने योगदर्शन पर कई किताबें लिखीं। इनमें लाइट आन योगा (light on yoga), सूत्राज आफ पतंजलि (sutras of Patanjali) आदि प्रमुख हैं।

आपको बता दें मित्रों कि सन् 1918 में पैदा हुए आयंगर बेहतर गरीब परिवार के बताए जाते हैं। वे कई रोगों से परेशान होकर योग की शरण में गए। इसके पश्चात स्वस्थ होकर उन्होंने योग के प्रचार प्रसार में ही अपना जीवन लगा दिया। वहीं, स्वामी शिवानंद के नाम पर तो ऋषिकेश में आश्रम है। इसके अतिरिक्त यहां का प्रसिद्ध रामझूला भी पहले स्वामी शिवानंद के नाम पर ही था। बाद में स्थानीय लोगों ने इसे लक्ष्मण झूला से जोड़ते हुए रामझूला पुकारना शुरू कर दिया।

योग पर भारत में अनेक ग्रंथों की रचना की गई

मित्रों, महर्षि पतंजलि (maharishi Patanjali) की योगसूत्र का नाम तो तकरीबन सभी ने सुना होगा। किंतु इसके अतिरिक्त भी योग पर अनेक ग्रंथ रचे गए। इनमें वेदव्यास का योग भाष्य, वाचस्पति मिश्र का तत्ववैशारदी, महर्षि याज्ञवल्क्य का योग याज्ञवल्क्य, राजा भोज का भोजवृत्ति, विज्ञान भिक्षु का योग वार्तिक एवं योग सार-संग्रह, नागेश भट्ट का योगसूत्रवृत्ति, स्वामी स्वात्माराम का हठयोग प्रदीपिका, जयतराम का जोग प्रदीपिका, स्वामी सत्यपति परिव्राजक का योगदर्शनम आदि योग ग्रंथों के नाम प्रमुख रूप से लिए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त शिव संहिता में भी योग के विषय में प्रकाश डाला गया है।

कोरोना काल में असंख्य लोगों ने योग की शक्ति को अपनाया

साथियों, यह तो आप जानते ही हैं कि लोगों को पिछले दो साल में जितना तनाव कोरोना (corona) नाम की महामारी ने दिया है, उतना उन्हें अपनी जिंदगी में शायद ही किसी चीज से हुआ होगा। लोगों के काम धंधे छूट गए, वे लाॅकडाउन (lockdown) की वजह से घर ही में कैद होकर रह गए।

ऐसे में कई लोग तनाव के भी शिकार हो गए, जिन्हें योग की शक्ति ने तनाव से दूर करने का काम किया। इस दौरान योग पर बने कई वीडियो भी बहुत वायरल हुए। लोगों ने अपनी इच्छज्ञशक्ति एवं संकल्पशक्ति को मजबूत करने के लिए भी योग का भरपूर सहारा लिया।

योग के क्षेत्र में देश विदेश में बढ़े रोजगार के विकल्प

योग इन दिनों बेहद लोकप्रिय है। श्रीलंका, चीन, जापान, अमेरिका आदि हर देश योग के पीछे भाग रहा है। ऐसे में भारत से भी बड़ी संख्या में युवाओं ने योग के क्षेत्र में रोजगार पाने के लिए विदेश की राह पकड़ी है। इसके अलावा वे अपने घर के आस पास ही योग सेंटर खोलकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य युवाओं को भी रोजगार के अवसर मुहैया करा रहे हैं।

आपको बता दें कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों (universities) में योग को एक रोजगार परक कोर्स के रूप में पढ़ाया जा रहा है। यह अलग बात है कि कई जगह इसे स्व वित्त पोषित पाठ्यक्रम (self finance course) की श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा विद्यालयों में योग शिक्षकों (yoga teachers) के पद भी अलग से सृजित किए गए हैं।

ताकि जो छात्र पढ़कर निकलें, उन्हें तो रोजगार मिले ही, वे भविष्य के योग विशेषज्ञ भी तैयार कर सकें। न केवल छात्रों, बल्कि छात्राओं का भी इस दिशा में अच्छा रूझान है। यदि बात बुजुर्गों की करें तो वे भी योग के लाभ देखते, समझते हुए इसकी शरण में बड़ी संख्या में जा रहे हैं।

योग सीखने के लिए आनलाइन ट्यूटोरियल की भी भरमार

मित्रों, लाॅकडाउन के दौरान लोगों ने योग की आनलाइन कक्षाएं (online classes) बड़े पैमाने पर लीं। अब भी इनका क्रेज कम नहीं हुआ है। वे रोजमर्रा के तनाव को दूर रखने के लिए योग की शरण में हैं। अपने रूटीन के कार्यों के बाद वे इन (ट्यूटोरियल्स tutorials) के जरिये अपने जीवन को बेहतर बनाने का कार्य कर रहे हैं।

बहुत से ऐसे युवा हैं, जो पहले तनावग्रस्त (depressed) थे, लेकिन योग को अपनाने के पश्चात उन्होंने स्वयं को तनाव दूर होने की बात स्वीकारी। इसके अतिरिक्त श्वास क्रिया में सुधार से भी वे बेहतर स्वास्थ्य (better health) की ओर भी अग्रसर हुए।

योग क्या है?

योग का अर्थ है जोड़ अथवा मिलना। वस्तुतः यह एक ऐसी क्रिया को व्यक्ति के शरीर, मन एवं आत्मा को साथ जोड़ती है। इसका उसके स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर होता है।

क्या योग एवं योगासन में अंतर है?

योगासन योग का ही एक हिस्सा हैं।

योग के कितने प्रकार हैं?

योग के चार प्रकार हैं-राजयोग, कर्म योग, भक्ति योग, ज्ञान योग।

योग के कौन कौन से प्रसिद्ध गुरू हुए हैं?

योग गुरू बीकेएस आयंगर, स्वामी शिवानंद आदि दुनिया भर में मशहूर योग गुरू हुए हैं।

योग दिवस किस दिन मनाया जाता है?

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2014 में 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाए जाने की मान्यता दी है। पहला विश्व योग दिवस 2015 में मनाया गया।

क्या विभिन्न योगासनों से रोगों का भी इलाज संभव है?

जी हां, विभिन्न रोगों से दूर रखने के लिए अलग अलग योगासन निर्धारित हैं।

योग करने के लिए कौन सा समय उत्तम है?

यूं तो आप योग के लिए दिन का कोई भी समय नियत कर सकते हैं, किंतु सुबह सवेरे का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

क्या सभी योग खलाी पेट किए जाते हैं?

जी हां, योग से दो तीन घंटे पहले आपने कुछ खाया न हो।

किन स्थितियों में योग करने की मनाही है?

यदि आपका आपरेशन हुआ हो, यदि आप हर्निया से पीड़ित हों, यदि आप टीबी अथवा अल्सर के शिकार हों, यदि आपकी हड्डी टूट गई हो अथवा आपको हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हो तो ऐसी स्थितियों में योग की मनाही है।

उत्तराखंड के किस शहर को योग नगरी पुकारा जाता है?

उत्तराखंड के ऋषिकेश शहर को योगनगरी के नाम से पुकारा जाता है। यहां के नए बने रेलवे स्टेशन का नाम भी योगनगरी ऋषिकेश (yognagri rishikesh) ही रखा गया है।

मित्रों, हमने आपको इस पोस्ट के माध्यम से योग, उसके अर्थ, लाभ, नियम, प्रकार एवं योगासन पर जानकारी दी। उम्मीद है कि यह पोस्ट आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। आप अपनी प्रतिक्रियाओं से हमें अवश्य अवगत कराएं। इसके लिए आप नीचे दिए गए कमेंट बाॅक्स में कमेंट करके हमें भेज सकते हैं। योग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आप इस पोस्ट को अपने मित्रों, परिचितों के साथ साझा करें, ताकि वे भी इसका लाभ उठा सकें। ।।धन्यवाद।।

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