अध्यादेश क्या होता है? अध्यादेश और विधेयक में अंतर, What is Ordinance in Hindi

What is Ordinance in Hindi: अयोध्या में श्रीराम मंदिर का मामला बड़ा मसला था। यह सालों कोर्ट में चला। इस मामले में लोगों ने सरकार से अध्यादेश लाकर मंदिर बनाने की मांग बड़े पैमाने पर की। वहीं, और जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाया जाना भी ऐसा ही एक काम था। इस पर भी लोगों ने बहुत अभियान चलाया। दोस्तों, आपके दिमाग में यह सवाल जरूर आया होगा कि अध्यादेश क्या है? अगर आप नहीं भी जानते हैं तो कोई दिक्कत नहीं। आज हम आपको अध्यादेश के संबंध में इस पोस्ट के माध्यम से पूरी जानकारी देने की कोशिश करेंगे। आपको बस यह पोस्ट शुरू से अंत तक और बेहद ध्यान से पढ़नी है। आइए शुरू करते हैं-

अध्यादेश क्या होता है? What is an Ordinance?

सबसे पहले जान लेते हैं कि अध्यादेश क्या है? अध्यादेश को अंग्रेजी में Ordinance भी कहा जाता है। भारतीय संसद नए कानूनों का निर्माण करती है, इसी तरह पुराने कानूनों का संशोधन करती है। लेकिन जब संसद सत्र न चल रहा हो तब भारत सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर भारत का राष्ट्रपति जिन कानूनों को लागू करता है, वह अध्यादेश कहलाते हैं।

अध्यादेश क्या होता है? अध्यादेश और विधेयक में अंतर, What is Ordinance in Hindi

अब तक कितने अध्यादेश लाए गए हैं?

दोस्तों, आपको बता दें कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है। लेकिन यदि कोई ऐसा मुद्दा हो, जिस पर तत्काल प्रभाव से कानून लाए जाने की आवश्यकता हो संसद के सत्र की प्रतीक्षा करने की बजाय सरकार अध्यादेश के जरिये उस कानून को लागू करती है। यही वजह है कि 26 जनवरी, 1950 के बाद से अब तक करीब सात सौ से अधिक अध्यादेश लाए जा चुके हैं। और साथियों आपको यह भी बता दें कि इनमें से कई ऐसे भी थे, जिन्हें कतई जरूरी नहीं माना जा सकता।

यह केवल तत्कालीन सरकारों के अपने रणनीतिक फैसलों को लागू करवाने के लिए लाए गए। ये ऐसे फैसले थे, जिनसे सरकार को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ पहुंचना था। सरकार किसी की भी रही हो, हर सरकार अपने फायदे को देखते हुए अध्यादेश लाती रही हैं। और पुख्ता तौर पर यही वजह मानी जा सकती है कि संविधान लागू होने के बाद से अध्यादेशों की संख्या वाकई बड़ी है।

अध्यादेश सरकार को किस कार्य में सक्षम बनाते हैं?

यदि सरल शब्दों में कहें तो ये Ordinance भारत सरकार को तत्काल विधायी कार्रवाई करने में सक्षम बनाते हैं। अध्यादेश की अधिकतम अवधि छह माह होती है। संसद की मंजूरी मिलने की स्थिति में यह छह सप्ताह होती है। यदि निश्चिम सीमा के भीतर संसद उन्हें मंजूर नहीं करती तो अध्यादेश समाप्त माना जाता है। छह माह के भीतर संसद का सत्र होना भी अनिवार्य है। इसके लिए हमारे देश यानी भारत के संविधान के अनुच्छेद 123 में व्यवस्था दी गई है।

पिछली तिथि से भी प्रभावी हो सकता है अध्यादेश

यह अध्यादेश के बारे में एक बेहद महत्वपूर्ण बात है। आपको बता दें कि अध्यादेश विधेयक की तरह ही पूर्ववर्ती हो सकता है। इसका मतलब यह है कि इसे पिछली तिथि से प्रभावी किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि आज कोई अध्यादेश सरकार लागू करती है और वह यह कहती है कि इसे 15 मार्च से लागू माना जाए तो इसके तहत दी गई सारी व्यवस्था 15 मार्च से लागू मानी जाएगी। प्रभावी मानती यह संसद के किसी कार्य या अन्य अध्यादेश को संशोधित या निरस्त कर सकता है। दोस्तों, आपको बता दें कि अध्यादेश के जरिये किसी कर, कानून को भी बदला जा सकता है।

लेकिन दोस्तों, यहां एक बात याद रखने लायक है और वो ये कि यदि देश के राष्ट्रपति चाहें तो Ordinance का विरोध भी कर सकते हैं। यानी कि वह अध्यादेश पर अपने हस्ताक्षर करने से मना भी कर सकते हैं। उसमें संशोधन की बात भी कह सकते हैं। जैसा कि हम पहले ही जान चुके हैं कि इसके लिए राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होना आवश्यक है।

अध्यादेश और विधेयक में क्या अंतर होता है? What is the difference between an Ordinance and a bill?

कई लोगों को यह लगता है कि अध्यादेश और विधेयक का एक ही मतलब होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। अध्यादेश और विधेयक में कई अंतर है। अब हम आपको अध्यादेश और विधेयक का अंतर समझाने की कोशिश करेंगे। आइए शुरू करते हैं-

  • 1-अध्यादेश केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा तत्काल लागू किए जाते हैं। वहीं, विधेयक सदन के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद ही लागू किया जा सकता है।
  • 2-अध्यादेश अस्थायी होता है। विधेयक स्थायी होता है।
  • 3-अध्यादेश पारित करने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी नहीं। विधयेक को पारित करने के लिए संसद की सहमति जरूरी हे।
  • 4-अध्यादेश तत्कालीन परिस्थिति को नियंत्रित करने के लिए जारी किए जाते हैं, लेकिन विधयेक स्थायी कानून बनाने के लिए पेश किया जाता है।
  • 5-अध्यादेश की अवधि न्यूतनम छह सप्ताह तथा अधिकतम छह मास होती है, जबकि विधेयक की अवधि निर्धारित नहीं होती।
  • 6-अध्यादेश केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर राष्ट्रपति जारी करता है, वहीं विधेयक संसद की स्वीकृति के बाद राष्ट्रपति जारी करते हैं।
  • 7-अध्यादेश तत्कालीन कानून लागू करने का आदेश होता है। विधेयक कानून बनाने का एक प्रस्ताव होता है।

स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले में आया है ताजा अध्यादेश

दोस्तों, आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों के ऊपर हो रहे हमले को देखते हुए केंद्र सरकार करीब 15 दिन पहले ही एक अध्यादेश लाई है। यह अध्यादेश मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर लाया गा है। अध्यादेश के अनुसार स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला अब गैर जमानती अपराध होगा। ऐसी किसी भी घटना की जांच 30 दिन में पूरी करनी होगी। एक साल में फैसला आएगा और दोषी को तीन महीने से लेकर पांच साल तक की सजा हो सकेगी। 50 हजार रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।

स्वास्थ्य कर्मी पर गंभीर हमले हमले के मामले में छह महीने से लेकर सात साल तक की सजा संभव है। इसके अलावा एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं डाक्टरों के वाहन, क्लीनिक जैसी संपत्ति को नुकसान पहुंचने पर आरोपी से दोगुना जुर्माना वसूल किए जाने का प्रावधान किया गया है।

अध्यादेश से जुड़े कई मामले बेहद विवादित भी रहे

Ordinance से जुड़े कई मामले बेहद विवादित भी रहे। यह हर काल से जुड़े रहे। कभी कांग्रेस के शासनकाल में तो कभी सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल से तो कभी किसी और सरकार के समय। मोटे तौर पर देखें तो ऐसे अध्यादेश से जुड़े विवाद कुछ इस तरह रहे। आइए इनके बारे में जानते हैं-

अध्यादेश से जुडी विवादित घटना –

आज से करीब सात साल पहले यानी सन् 2013 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक अध्यादेश की कापी भी फाड़ी थी, जो बेहद चर्चा में रहा। कुछ ही समय पहले योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने बताया कि उस वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस प्रकरण से बहुत चोट पहुंची थी। उन्होंने उनसे पूछा था कि क्या उन्हें (मोंटेक को) लगता है कि उन्हें (मनमोहन सिंह को) इस्तीफा दे देना चाहिए। दरअसल, यह अध्यादेश दागियों को चुनाव लड़ने से रोक लगाने के संबंध में था। इसे राहुल गांधी ने सरासर बकवास बताते हुए कहा था कि इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए। राहुल गांधी ने नई दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह बात कही थी। किसी को उनसे इस बात की उम्मीद नहीं थी।

उन्होंने मामले पर अपने स्टैंड को दोहराया भी। तीन साल पहले सन् 2017 में राजस्थान में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के शासनकाल में एक अध्यादेश बेहद विवादित रहा। इसमें कहा गया था कि सरकार की मंजूरी के बगैर सरकारी अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई केस दर्ज नहीं करा सकता है। इसके खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। विधानसभा के बाहर और भीतर भी इसका विरोध हुआ। वहीं भाजपा के भी कुछ विधायक इसे काला कानून की संज्ञा दे रहे थे।

जल्लीकट्टू की घटना –

वहीं, 2017 में ही एक Ordinance के जरिये तमिलनाडु में जल्लीकट्टू को मंजूरी दी गई। जल्लीकट्टू एक खतरनाक खेल माना जाता है और इस खेल में शामिल होने वाले और देखने वाले लोगों की जान के लिए खतरनाक मानते हुए इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में रोक लगा दी थी। यह अलग बात है कि आयोजनकर्ता और तमिलनाडु के स्थानीय नागरिक भी इसे परंपरा पर रोक मानते हुए इस खेल को फिर से शुरू किए जाने की इजाजत दिए जाने को लेकर अभियान चलाते रहे।

Ordinance और Ordnance में होता है बेहद बारीक अंतर, दोनों के अर्थ अलग

कई लोग Ordinance और Ordnance में अंतर नहीं कर पाते। उन्हें लगता है कि दोनों एक ही हैं। वह अध्यादेश को ordnance पुकारते हैं। लेकिन असल में यह सही नहीं है। यह केवल i का अंतर नहीं है। इन दोनों शब्दों के अर्थ की बात करें तो इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है।

ordinance का अर्थ जहां अध्यादेश होता है, वहीं ordnance का अर्थ होता है तोप या तोपखाना। देश में कई आयुध निर्माणी यानी ordnance फैक्ट्री भी हैं। यहां तोप समेत अन्य रक्षा अस्त्रों का निर्माण होता है। इसे ट्रायल के बाद यह संस्थान देश को समर्पित करते हैं।

अध्यादेश के बारे में कानून में पढ़ाया जाता है

दोस्तों, आपको यह भी बता दें कि कानून की पढ़ाई करने वालों को Ordinance के बारे में पढ़ाया जाता है। लॉ का करीब करीब हर छात्र इस शब्द के साथ ही इसके संबंध में विस्तृत जानकारी रखता होगा, ऐसा मानकर चला जाता है। दोस्तों, आपको बता दें कि इस विषय पर कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी प्रश्न पूछे जाते हैं। और पीसीएस ज्यूडीशियल परीक्षा में भी कई बार अध्यादेश से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। किसी परीक्षा में कभी वस्तुनिष्ठ के तौर पर यह सवाल आता है तो किसी परीक्षा में इस पर विस्तार से भी लिखना होता है।

तो दोस्तों, यह थी अध्यादेश क्या होता है? अध्यादेश और विधेयक में अंतर, What is Ordinance in Hindi के सम्बन्ध में जानकारी। उम्मीद है कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी। आप जान गए होंगे कि अध्यादेश क्या होता है। यदि इस किसी अन्य विषय पर आप हमसे पोस्ट चाहते हैं तो उसके लिए भी हमें नीचे दिए गए कमेंट बाक्स में कमेंट करके बता सकते हैं। कोई सुझाव आप हमें देना चाहते हैं तो उसका भी स्वागत है। आप उसे भी कमेंट बाक्स में कमेंट करके हम तक पहुंचा सकते हैं। हम आपको आश्वस्त करते हैं कि हम आपके सुझाव पर अमल करने का पूरा प्रयास करेंगे। आपकी प्रतिक्रियाओं का हमें इंतजार है। देर मत करिये। लिख डालिए। ।।धन्यवाद।।

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