NPR क्या है? NPR का प्रावधान क्यों किया गया? यह किस पर लागू होगा?

अनुक्रम

देश भर में अभी CAA और NRC को लेकर चल रहा विवाद थमा भी नहीं है। सरकार इस बीच NPR को लेकर चर्चा में आ गई है। टीवी, रेडियो, इंटरनेट, अखबार, जितने भी सूचना माध्यम हैं, सभी पर एनपीआर को लेकर जबरदस्त बहस मुबाहिसा छिड़ा है। NRC को लेकर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शनों को अंजाम दे रहे लोग अब NPR के नाम से खौफ खा रहे हैं। सरकार ने हालांकि उनको यह कहकर आश्वस्त करने की कोशिश की है कि NPR का NRC से कोई लेना देना नहीं, लेकिन लोग हैं कि किसी बात पर भरोसा नहीं कर पा रहे। वह नहीं जान पा रहे कि आखिर यह NPR क्या है, इसे लागू करने में सरकार इतनी मुस्तैदी क्यों दिखा रही है।

दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि क्या है NPR? अगर नहीं जानते हैं तो भी चिंता की कोई बात नहीं। हम आपको जानकारी देंगे कि NPR क्या है? इसका प्रावधान क्यों किया गया है? यह​ किस पर लागू होगा? आदि सवालों के बारे में। वह भी बिंदुवार। आइए शुरू करते हैं –

NPR क्या है?

NPR का मतलब है National Population Register (नेशनल पापुलेशन रजिस्टर)। इसे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर भी पुकारा जाता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह जनसंख्या का ब्योरा होगा। यानी देश के सामान्य नागरिकों की पूरी जानकारी। यह भी कह सकते हैं कि नेशनल पापुलेशन रजिस्टर में सामान्य नागरिकों का ब्योरा रखा जाएगा। और साधारण शब्दों में कहें तो यह देश के सामान्य नागरिकों की सूची है।

NPR का फुल फॉर्म क्या है?

बात करें NPR के फुलफॉर्म की तो NPR का फुल फॉर्म National Population Register (नेशनल पापुलेशन रजिस्टर) है जिसे हिंदी में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर कहा जाता है।

NPR में शामिल सामान्य निवासी कौन हैं?

NPR के लिए एक सामान्य निवासी वह व्यक्ति है, जो कम से कम छह महीने के लिए या उससे ज्यादा समय के लिए स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है, या वह अगले छह माह या उससे अधिक समय के लिए निवास करने की मंशा रखता है।

NPR किसके लिए जरूरी है?

भारत के हर निवासी के लिए NPR में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। आपको यह भी जानकारी दें कि नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA के कानून बन जाने के बाद पैदा हुए विवाद के चलते पश्चिम बंगाल और केरल ने NPR पर काम रोक दिया है।

NPR कहां लागू होगा?

दोस्तों, आपको बता दें कि असम को छोड़कर यह कवायद अन्य सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में की जाएगी। जनगणना के चरण में हाउस लिस्टिंग होगी। असम को इससे इसलिए बाहर रखा गया है, क्योंकि वहां NRC लागू है। उसकी फाइनल सूची बीती 31 अगस्त को जारी की जा चुकी है। अलबत्ता, सरकार का कहना है कि NPR का NRC से कोई संबंध नहीं है, लेकिन पुराने दस्तावेज बताते हैं कि NPR NRC का ही पहला चरण है।

कब मिली वर्तमान जनगणना प्रस्ताव को मंजूरी?

साथियों, कैबिनेट ने 24 दिसंबर को जनगणना 2021 के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही इससे जुड़े राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर की समीक्षा कर इसे और प्रासंगिक बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

NPR पर खर्च कितना आएगा?

दोस्तों, आइए अब आपको बताएं कि NPR को बनाने में और जनगणना के कार्य पर कितना खर्च आएगा। साथियों, जनगणना के कार्य पर करीब साढ़े आठ हजार करोड़ (8754.23) रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, NPR के काम पर करीब साढ़े तीन हजार करोड़ (3941) रुपये से ज्यादा के खर्च को मंजूरी दी गई है।

NPR कौन तैयार करेगा?

%%title%% नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर - NPR क्या है? What is NPR Full Form In Hindi?

आपको बता दें कि देश के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त की अगुवाई में NPR तैयार किया जाएगा। इसी के जरिये सामान्य निवासी की पहचान के लिए विशेष डाटाबेस तैयार किया जाएगा। NPR का काम हजारों नहीं, बल्कि लाखों अधिकारियों, कर्मचारियों के जिम्मे होगा। जी हां, इस काम को करीब 30 लाख फील्ड अधिकारी मिलकर पूरा करेंगे। यानी वही इस कार्य को अंजाम देंगे। आपको लगे हाथ यह भी बता दें कि 2011 की जनगणना के दौरान इस कार्य में 28 लाख लोगों को लगाया गया था। यानी इस बार इस काम में दो लाख अधिकारी अधिक लगाए गए हैं, जो इस महती कार्य में अपनी ड्यूटी को अंजाम देंगे।

एक अनुमान के अनुसार NPR में स्थानीय स्तर पर 2900 दिनों के लिए 48 हजार लोगों को काम पर लगाया जाएगा। यानी उन्हें रोजगार मिलेगा। इससे करीब ढाई लाख मानव दिवस के रोजगार के अवसर मुहैया होंगे। इस काम के लिए उन्हें दिया जाने वाला मानदेय सीधे उनके खातों में हस्तांतरित होगा यानी डीबीटी, जिसे डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर भी कहते हैं, होगा।

NPR में क्या मोबाइल एप का होगा इस्तेमाल?

जी हां दोस्तों, डाटा संकलन के लिए पहली बार मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। निगरानी के लिए सेंट्रल पोर्टल का प्रयोग होगा। मंत्रालयों के अनुरोध पर जनसंख्या से जुड़ी जानकारियां उन्हें सही, मशीन में पढ़े जाने लायक और कार्रवाई योग्य प्रारूप में उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा इसका जो उपयोग होगा, वह इस प्रकार से है-

  1. जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संगठनों और तमाम उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा।
  2. जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों को गांवों और वार्ड सरीखी प्रशासनिक स्तर की आखिरी इकाईयों के साथ भी साझा किया जाएगा।
  3. जनसंख्या से जुड़े ब्लॉक स्तर के आंकड़े परिसीमन आयोग को भी मुहैया कराए जाएंगे, ताकि लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल हो सके।

NPR किस स्तर पर तैयार किया जाता है?

NPR को ग्राम पंचायत, तहसील, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। नागरिकता कानून 1955 और सिटीजनशिप रूल्स 2003 के प्रावधानों के तहत यह रजिस्टर तैयार होता है। इसे सरकार अपनी योजनाओं को तैयार करने, धोखाधड़ी को रोकने और हर परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में इसका प्रयोग करती है।

यह आगामी जनगणना को पूरा करने और सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभ पहुंचाने में मददगार होगा। इसका डाटा राज्य सरकारों को भी दिया जाएगा। हालांकि एनपीआर को एनआरसी लागू करने की ओर पहला कदम माना जा रहा है।

क्या NPR के तहत Registration जरूरी है?

जी हां दोस्तों, इसका जवाब हां में है। नागरिकता कानून 1955 में आज से 14 साल पहले यानी 2004 में हुए संशोधन के मुताबिक सेक्शन 14 के तहत किसी भी नागरिक के लिए NPR में registration जरूरी है। साथ ही, National Register of citizens के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है। NPR इस दिशा में पहला कदम है।

क्या क्या डाटा एकत्र होगा NPR में?

नाम, माता-पिता का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, पति या पत्नी का नाम (विवाहित होने की स्थिति में), लिंग, जन्म तिथि, जन्म स्थान, राष्ट्रीयता (घोषित), स्थायी और वर्तमान पता (अगर है तो) वहां रहने या निवास करने की अवधि, व्यवसाय, शैक्षिक योग्यता, बायोमीट्रिक ब्योरा आदि। पांच साल से अधिक उम्र के लोगों को ही इसमें शामिल किया जाएगा।

क्या NPR के लिए कोई Form भरना होगा?

मित्रों, अगर केंद्र सरकार के मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की बात पर भरोसा करें तो यह कोई लंबा फॉर्म नहीं होगा। एक मोबाइल एप के जरिये जानकारी भरी जा सकेगी। जैसा कि उन्होंने बताया है किसी भी दस्तावेज, प्रमाण या बायोमीट्रिक की जरूरत नहीं होगी।

NPR प्रश्नावली में कितने सवाल होंगे?

मित्रों, जैसा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि प्रश्नावली में 21 सवाल होंगे। वह भी बेहद आसान से। पहले प्रश्नावली में 15 सवाल पूछे जाते थे।

NRP में गलत जानकारी देने पर क्या होगा?

दोस्तों, अगर किसी को लगता है कि वह NRP के तहत गलत जवाब देकर बच जाएगा तो यह आपकी गलतफहमी है। आपको बता दें कि अगर आप इसमें गलत जानकारी देते हैं तो सिटीजनशिप रूल्स, 2003 के अंतर्गत आपको इसके लिए जुर्माना अदा करना होगा।

क्या NRI भी होंगे इसका हिस्सा?

NRI को देश से बाहर रहने के चलते इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन अगर वह भारत आकर यहां रहने लगते हैँ तो उन्हें भी NPR में शामिल किया जा सकता है। आपको यह भी बता दें कि सरकार NPR के तहत परिचय पत्र जारी करने पर विचार कर रही है। यह एक तरह का स्मार्ट कार्ड होगा, जिसमें आधार का भी जिक्र होगा।

कब उठी नागरिकों के Registration की बात?

दोस्तों, आपको बता दें कि आज से 19 साल पहले 2000 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तहत कारगिल समीक्षा समिति ने नागरिकों और गैर नागरिकों के अनिवार्य पंजीकरण की सिफारिश की थी। इन सिफारिशों को 2001 में मंजूर किघ्या गया था और 2003 के नागरिकता (जिनमें पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने के नियम) नियम पारित किए गए थे। नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करके वाजपेयी सरकार ने इसमें अवैध प्रवासी की एक नई कैटेगरी जोड़ी। संशोधन के बाद NPR को पहली बार 2004 में यूपीए सरकार में अधिकृत किया गया।

इस संशोधन के तहत NPR के प्रावधान जोड़े गए। इसी संशोधन ने केंद्र को भारत के प्रत्येक नागरिक को अनिवार्य रूप से पंजीकृत करने और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने की अनुमति और अधिकार दिया। इसके तहत यह प्रावधान किया गया कि सरकार देश के हर नागरिक का register तैयार कर सकती है। और इसके लिए नेशनल रजिस्ट्रेशन अथारिटी भी गठित की जा सकती है।

कब से कब तक चला पायलट प्रोजेक्ट?

मित्रों, आपको बता दें कि नागरिकों के सत्यापन और उन्हें परिचय पत्र जारी करने के लिए साल 2003 से 2009 तक चुनिंदा सीमावर्ती क्षेत्रों में एक पायलट प्रोजेक्ट चला। NPR के तहत सन् इस अभियान को सन् 2009 से 2011 तक तटीय क्षेत्रों में भी चलाया गया। इसका उपयोग मुंबई हमलों के बाद सुरक्षा बढ़ाने के लिहाज से भी किया गया था। उस दौरान लगभग 66 लाख निवासियों को निवासी पहचान पत्र भी जारी किए गए।

कब हुई इसकी विधिवत शुरुआत –

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में 2010 में NPR बनाने की शुरुआत की गई। तब 2011 के लिए हुई जनगणना के साथ ही NPR का डाटा एकत्र किया गया, जिसे 2015 में घर-घर जाकर update किया गया।

भारत में पहली जनगणना कब हुई?

दोस्तों, आपको बता दें कि देश में हर दस साल में जनगणना होती है। पहली जनगणना 1872 में की गई थी और यह देश की 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी। इसे लेकर तैयारी बड़े पैमाने पर चल रही है। जनगणना को आधार बनाकर ही सरकार अपनी तमाम योजनाएं बनाती हैं। इसमें विभिन्न वर्गों से जुड़ी सारी जानकारी रहती है। इसके अलावा विभिन्न वर्गों को आरक्षण का लाभ भी इसी के आंकड़ों के आधार पर दिया जाता है। यह आंकड़े बहुत अहम होते हैं।

क्या इसे फिर Update किया जाएगा?

आपको बता दें कि 2021 की जनगणना से पहले अप्रैल 2020 से सितंबर 2020 के बीच NPR यानी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट किया जाएगा। असम को छोड़कर अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में NPR को update किया जाएगा। इसे तैयार करने में जुटे कर्मी घर घर जाकर डाटा जुटाएंगे। उसके बाद इलेक्ट्रानिक डाटा बेस तैयार किया जाएगा। फोटो, फिंगर प्रिंट जैसी चीजों को इसमें शामिल किया जाएगा।

यह पूरी प्रक्रिया एनपीआर तैयार करने के लिए नियुक्त किए गए अफसरों की देख रेख में की जाएगी। दूसरे चरण में आने वाली नौ फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक पूरी जनसंख्या की गणना का काम किया जाएगा।

NPR का विरोध क्यों हो रहा?

आइए दोस्तों, अब आपको बता दें कि इसका विरोध क्यों हो रहा है? दरअसल, NPR एनआरसी लागू होने की गारंटी नहीं देता, लेकिन उसके लिए राह जरूर बनाता है। यही कारण है कि इसका विरोध हो रहा है। NRC का विरोध कर रहे बंगाल, केरल आदि राज्यों ने इसीलिए विरोध स्वरूप NPR के काम को आगे बढ़ने से रोक दिया है। देश भर में इसके खिलाफ घोर आवाज उठ रही हैं। विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी है।

दोस्तों, तो यह थी NPR से जुड़ी जानकारी। उम्मीद है कि आपको NPR से जुड़ी यह post आपको पसंद आई होगी और NPR से जुड़ी आपकी तमाम जिज्ञासाओं का समाधान हो गया होगा। अगर इसके बावजूद आपके मन या मस्तिष्क में NPR को लेकर कोई सवाल खड़ा हो रहा है या इससे जुड़े किसी अन्य बिंदु पर आप जानकारी पाना चाहते हैं तो उसके लिए आप नीचे लिखे comment box में comment करके हमसे अपने सवाल साझा कर सकते हैं। हमारी ओर से उसका जवाब देने का पूरा पूरा प्रयास किया जाएगा।

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