निडर व्यक्ति बनने के बेहतरीन तरीके | मन से डर को दूर भगाने के 14 टिप्स

निडर व्यक्ति बनने के तरीके [ways to be a fearless person] कौन से हैं?, मन से डर को दूर भगाने के 14 टिप्स

आपने बालीवुड की मशहूर फिल्म ‘शोले’ में गब्बर सिंह का यह डायलाॅग जरूर सुना होगा-‘जो डर गया, समझो मर गया।’ इसी से आप डर की पूरी कहानी समझ सकते हैं। इंसान को किसी भी चीज से डर लग सकता है। अंधेरे से डर, आग से डर, ऊंचाई से डर, पानी से डर, सांप से डर, नाकामयाबी का डर, मौत का डर आदि।

एक सीमा तक यह डर बेशक ठीक है, लेकिन जब डर आपके जहन पर हावी हो जाता है तो यह नुकसान पहुंचाने लगता है। डर को दूर करने का सबसे अच्छा उपाय है निडर (fearless) बनना। यदि आप नहीं जानते कि निडर कैसे बना जा सकता है, तो भी कतई चिंता न करें। हम आपके साथ हैं। इस पोस्ट में आज हम आपको निडर व्यक्ति बनने के सबसे बेहतरीन तरीके बताएंगे। तो आइए, शुरू करते हैं-

डर क्या होता है? (What is fear?)

निडर कैसे बनें, यह जानने से पूर्व यह समझ लेना आवश्यक है कि डर क्या होता है? (What is fear?) मित्रों, डर एक नकारात्मक भावना (negative feeling) है। यह केवल मनुष्यों में ही नहीं, बल्कि पशुओं में भी अनुभूत की जाती है। अधिकांश के लिए यह एक अप्रिय भावा होती है। यह किसी व्यक्ति को खतरे की उपस्थिति (presence of danger) का भी अहसास कराती है।

जैसे-स्वास्थ्य संबंधी खतरा, धन संबंधी खतरा, निजी सुरक्षा से जुड़ा खतरा आदि। जब कोई व्यक्ति डरता है तो उसके शारीरिक लक्षण (physical symptoms) भी दृष्टिगोचर होते हैं, जैसे-चेहरा डरा हुआ, मांसपेशियां खिंची हुईं, आंखें फैली हुईं और मुंह खुला हुआ आदि।

दोस्तों, एक सीमा तक डर हर किसी को लगता है। साथ ही कुछ मामलों में यह व्यक्ति को किसी कार्य के लिए प्रेरित भी करता है। लेकिन जब यह तर्कहीन हो जाता है तो इसे फोबिया (fobia) कहा जाता है।

निडर व्यक्ति बनने के बेहतरीन तरीके | मन से डर को दूर भगाने के 14 टिप्स

डर के क्या क्या लक्षण होते हैं? (What are the symptoms of fear?)

साथियों, डर के कई प्रकार के लक्षण होते हैं, जिनसे पता चल जाता है कि अमुक व्यक्ति डरा हुआ है। ये लक्षण डर की प्रतिक्रियास्वरूप सामने आते हैं।

जैसे-दिल की धड़कन बढ़ जाना, पसीना आ जाना, मांसपेशियों में तनाव, सांस लेने की दर का तेज हो जाना, नींद न आना आदि। हरेक व्यक्ति में डर के एक जैसे लक्षण नहीं सामने आते। यद्यपि यह भी सच है कि प्रत्येक व्यक्ति में उसकी ग्राह्य क्षमता के अनुसार अलग प्रकार के लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

डर से क्या मुश्किलें पैदा होती हैं? (What complications arise due to fear?)

मित्रों, डर से कई प्रकार की मुश्किलें पैदा होती हैं। व्यक्ति तनावग्रस्त हो जाता है। उसका किसी काम में मन नहीं लगता। वह बिखरा बिखरा सा रहता है। यदि किसी को अंधेरे से डर लगता है तो वह रात को होने वाली आहट तक से डर जाता है। इतना ही नहीं मित्रों, डर का रोगों से भी बहुत सीधा संबंध है। डर की वजह से कई प्रकार के रोग भी हो सकते हैं।

जैसे- एंग्जाइटी (anxiety), डिप्रेशन (depression), फोबिया (fobia), पर्सनैलिटी डिसआर्डर (personality disorder) आदि। कई लोगों को इस वजह से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है तो कई का इलाज मनोचिकित्सक (psychiatrist) के पास होता है। उनका लंबा ट्रीटमेंट (treatment) भी चलता है।

मृत्यु का डर सबसे काॅमन होता है (the most common fear is of death)

मित्रों, इस बात से आप भी इत्तेफाक जरूर रखेंगे कि लोगों में मौत यानी मृत्यु का डर (fear of death) सबसे काॅमन (most common) होता है। जैसे कोई व्यक्ति ऊंचाई से डरता है तो इसका अर्थ है कि वह ऊंचाई से गिरकर मरने से डरता है।

इसी प्रकार यदि कोई पानी से डरता है तो इसका भी मतलब यही निकाला जाता है कि वह पानी में डूबकर मरने से डरता है। जाहिर है कि कोई भी व्यक्ति मरना नहीं चाहता। इसीलिए वह मौत के नाम, उसके ख्याल तक से डरता है।

डर व्यक्ति के भविष्य की राह कैसे रोकता है? (How fear close the door of someone’s future?)

दोस्तों, व्यक्ति मौत के साथ ही अनदेखे (unseen) से भी डरता है। ‘इसके बाद पता नहीं क्या होगा‘? यह सवाल उसे सबसे ज्यादा परेशान करता है। यही डर उसे आगे कदम बढ़ाने से रोकता है। जैसे-मान लीजिए किसी व्यक्ति का चयन कैलिफोर्निया की किसी कंपनी के लिए हुआ है।

लेकिन उस व्यक्ति को हवाई यात्रा से डर लगता है। जाहिर है कि ऐसे में उसके मन में सवाल आता है कि उसके साथ पता नहीं क्या होगा। बहुत संभव है कि वह अपना यह अवसर ड्राप कर दे या यात्रा करे भी तो जब तक उसका सफर पूरा न हो जाए उसकी सांस अटकी रहेगी, वह डरता रहेगा। यह भी हो सकता है कि वह देश में ही किसी ऐसी जगह का आफर पसंद करे, जहां उसे हवाई यात्रा नहीं करनी।

निडर बनने के सबसे बेहतरीन तरीके क्या हैं? (What are the best methods to be fearless?)

मित्रों, मन में किसी भी प्रकार का डर हो, उससे निडर (fearless) बनकर ही निपटा जा सकता है। निडर बनने के एक दो नहीं, बल्कि अनेकों तरीके हैं। दोस्तों अब आपको बताएंगे कि निडर बनने के सबसे बेहतरीन तरीके क्या हैं-

1. सबसे पहले डर का कारण जानें फिर उसे दूर करें-

किसी भी डर को दूर करने के लिए सबसे पहला कदम आपको यह उठाना होगा कि सबसे पहले उसका कारण (reason) जानें। आपको कारण पता चल गया तो फिर उस डर को दूर करना आसान हो जाएगा। जैसे कि यदि आपको पब्लिक स्पीकिंग (public speaking) से डर लगता है तो पहले आपको उसका कारण जानना होगा। यह यह लोगों के सामने अच्छा न बोल पाने या फेलियर (failure) का डर हो सकता है।

एक बार आपको यह कारण पता चल जाता है तो आप इससे निजात पाने के उपाय ढूंढ सकते हैं। जैसे कि आप लगातार शीशे के सामने बोलने की प्रैक्टिस कर अपने इस डर पर विजय पा सकते हैं।

पब्लिक स्पीकिंग कोर्स (public speaking course) भी आपकी अच्छी सहायता इस संबंध में कर सकते हैं। आपकी खामियों को दूर कर आपको इफैक्टिव स्पीकिंग (effective speaking) सिखा सकते हैं।

2. जिस काम से आप डरते हैं, उसे जरूर करें-

डर को मारने का इलाज डर के ही भीतर है। यानी आपको वह काम जरूर करना चाहिए, जिससे आप डरते हैं। आपका डर तभी खत्म होगा। जैसे-आपको पानी से डर लगता है तो आपको किसी प्रशिक्षित कोच के साथ तैराकी सीखनी चाहिए। एक बार आपने अच्छे तरीके से तैराकी सीख ली और पानी के भीतर समय बिताने लगे तो पानी को लेकर आपका डर खत्म हो जाएगा।

इसी प्रकार यदि आपको ऊंचाई से डर लगता है तो ट्रेकिंग पर जाएं। धीरे-धीरे ऊंचाई को लेकर आपका भय खत्म हो जाएगा और आप निचाई के बर्ड व्यू (bird view) का लुत्फ उठा सकेंगे।

3. डर से बाहर आने के लिए इमेजिनेशन थेरेपी यूज करें-

साथियों, इमेजिनेशन थेरेपी (imagination therapy) डर को दूर भगाने का एक कारगर उपाय है। दरअसल, इस थेरेपी में हम अपने आपको अपने डर के पिंजरे से बाहर आते देखते हैं।

जैसे-यदि हमें अंधेरे से डर लगता है तो हम खुद को बड़ी मशाल लेकर अंधेरे पर विजय पाते देखते हैं। इससे हमारा खुद पर विश्वास पनपता है और धीरे धीरे हम अंधेरे से डरना बंद कर देते हैं।

4. प्रतिदिन मेडिटेशन/योगाभ्यास/व्यायाम अवश्य करें

मित्रों, योगाभ्यास के साथ ही व्यायाम भी काम की चीज है। आप गहरी सांस लें और छोड़ें। इससे आपका अपनी सांसों पर कंट्रोल (control on breath) स्थापित होगा। जब भी आपको डर लगेगा और किसी किस्म का तनाव आप पर हावी होगा तो आप श्वसन संबंधी इस क्रिया से तनावमुक्त होने की कोशिश कर सकते हैं।

एक्सरसाइज (exercise) से आप शारीरिक रूप से चुस्त दुरूस्त रहेंगे। यह तो आपने सुना ही होगा कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन निवास करता है।

स्वस्थ्य शरीर (healthy body) रहेगा तो स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार का डर आपके मन में घर नहीं करेगा। मेडिटेशन (meditation) भी आपको एकाग्रता (focus) बनाने में मदद करेगा और आपका ध्यान इधर उधर नहीं भटकेगा।

5. अपनी सोच को पाजिटिव रखें-

जब हमें डर लगता है तो चारों ओर से नकारात्मकता (negativity) घेर लेता है। जैसे-कोई बीमारी हो जाए तो मरने का डर सताने लगता है। ऐसे में अपनी सोच को पाजिटिव (positive) रखने से बड़ी कोई दवा नहीं। सकारात्मकता (positivity) में इतनी ताकत होती है कि व्यक्ति रोग में भी लड़ जाता है।

मेडिकल साइंस (medical science) में ऐसे कई उदाहरण (example) हैं, जहां रोगी ने अपनी इच्छाशक्ति एवं पाजिटिव सोच (positive thinking) से अपनी बीमारी पर फतह हासिल की। अपने डरों को मात दी। आप भी फिल्म अभिनेता ऋतिक रोशन के एक कोल्ड ड्रिंक के एड की टैगलाइन ‘डर के आगे जीत है‘ हमेशा याद रखें।

6. काउंसलर की मदद से अपना डर दूर भगाएं-

अपना डर दूर भगाने के लिए यदि आप चाहें तो काउंसलर (counsellor) की भी मदद ले सकते हैं। वह आपको कई ऐसे तरीके सुझा सकते हैं, जिनकी सहायता से आप निडर बन सकते हैं। वे आपके डर का कारण जानने में मदद कर सकते हैं, इसके साथ ही इसके निजात के उपाय करने में आपकी सहायता कर सकते हैं।

यदि आपके मन के भीतर परीक्षा संबंधी डर (exam related fear) समाया है तो खास तौर पर काउंसलर की मदद (help of counsellor) से आप इस डर को दूर भगाकर निडर बन सकते हैं।

7. जो लोग डर को पीछे छोड़ चुके हैं, उनकी कहानियां पढ़ें-

दोस्तों, निडर बनने के लिए ऐसे लोगों की कहानियां पढ़ना आपके लिए बेहद लाभदायक होगा, जिन्होंने अपने जीवन में डर को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का रास्ता चुना। इन निडर लोगों की जीवनी आपको भी निडर बनने के नुस्खे सिखा सकती है।

8. डर से निकलकर जो मिलेगा, उस पर फोकस कीजिए-

निडर बनने के लिए यह भी एक अच्छा तरीका है कि आपको उस पर फोकस (focus) करना होगा, जो आपको डर से निकलकर मिलने वाला है।

जैसे-आपको खूबसूरत नजारों का शौक है और बहुत ऊंचाई से बहुत सुंदर नजारा देखने को मिलता है, लेकिन आपको ऊंचाई से डर लगता है तो आप उस नजारे पर फोकस करें और चढ़ाई पर चल दें। आप पाएंगे कि आपने रास्ता भी तय कर लिया और ऊपर पर जाकर आपको जो नजारा दिखा, वहां आप ऊंचाई वगैरह सब भूल गए।

9. डर का सामना करें, उससे भागे नहीं-

मित्रों, निडर बनने के लिए आपको अपने डर का मुकाबला करना होगा। डरकर भागने से कुछ नहीं होगा। आपके भीतर जिस चीज का भी डर समाया है, उससे दो दो हाथ करके ही आप उससे निजात पा सकते हैं और निडर बन सकते हैं।

जैसे कि आपको हवाई जहाज में बैठने से डर लगता है तो आपको इस डर से मुकाबले के लिए हवाई यात्रा करनी होगी। एक बार आप यात्रा कर लेंगे तो पाएंगे कि इस यात्रा को लेकर आपका डर निर्मूल था।

10. जोखिम लेने से कतई न डरें-

यदि आप कोई कार्य करना चाहते हैं, लेकिन आपको नाकामयाबी का डर सता रहा है तो सबसे पहले एक बात गांठ बांध लीजिए कि जोखिम (risk) ही आपको कामयाब बनाता है। आप जितना रिस्क (risk) लेंगे, उतना गेन (gain) करेंगे। लेकिन आपका रिस्क कैलकुलेटेड (calculated) होना चाहिए।

मान लीजिए कि आप कोई नया बिजनेस (new business) शुरू करना चाहते हैं, लेकिन आपके मन में ही नाकामयाबी (unsuccessful) का डर है, इसलिए आप रिस्क लेने से कतरा रहे हैं तो आपको सबसे पहले बिजनेस के लिए अच्छे से रिसर्च (research) आदि पूरी तैयारी करनी होगी।

इससे जुड़े हर पहलू पर काम करना होगा। इस तरह आपका रिस्क कम होगा और जब आप कामयाब होंगे तो नाकामयाबी को लेकर आपका डर भी खत्म हो जाएगा।

11. पुरानी बातों को भूलने की कोशिश करें-

बहुत से लोगों के मन में डर गुजरी बातों की वजह से भी बैठ जाता है। मान लीजिए कि कोई बच्चा नदी में नहाते समय धारा में बहा और लोग उसे बामुश्किल बचाकर बाहर लाए तो यह बहुत संभव है कि उसके मन में जीवन भर के लिए पानी और तैराकी को लेकर डर बैठ जाए। इस डर से निकलने का तरीका यह है कि पुरानी बातों को भूलने की कोशिश की जाए।

12. व्यस्त रहें, मस्त रहें डर पास नहीं फटकेगा-

दोस्तों, आपने देखा होगा कि बहुत से डर हमारी कल्पना की उपज होते हैं। जब इंसान खाली रहता है तो उसके दिमाग में तरह तरह की कल्पनाएं जन्म लेती हैं, कई बार यह व्यक्ति के मन में किसी चीज को लेकर डर अथवा आशंका उत्पन्न कर देती हैं। यह तो आपने भी सुना होगा कि ‘खाली दिमाग शैतान का घर‘। ऐसे में इससे बचने का सरल उपाय यह है कि आप व्यस्त रहें (be busy) और मस्त रहें।

दिमाग को खाली मत रहने दें। कल्पनाएं व्यक्ति को कैसे डराती हैं, इसका उदाहरण आपने कई बार सुना होगा कि एक व्यक्ति एक खेत में जाता है। उसके पैर के ऊपर से सांप गुजर जाता है।

व्यक्ति सांप को देखकर ही डर जाता है और उसे हार्ट अटैक (heart attack) हो जाता है। यानी कि सांप ने व्यक्ति को काटा तक नहीं, लेकिन उसके मन में सांप को लेकर ऐसा डर बैठा जो उसकी जान लेकर गया।

13. कुछ डर नाॅर्मल हैं, उन्हें स्वीकारें

साथियों, कुछ डर बेहद नाॅर्मल (normal) हैं। आपको इस डर को स्वीकारना चाहिए। जैसे- यदि आप पहली बार अकेले घूमने जा रहे हों तो स्वाभाविक है कि आपके मन में अकेले दूसरे शहर में जाने का डर होगा ही।

इसी प्रकार यदि आप पहली बार बंजी जंपिंग करने जा रहे हों तो लाजिम है कि आप डरें हों। लेकिन ये डर सामान्य हैं। जैसे ही आप अकेले शहर घुमाई पूरी कर लेंगे अथवा बंजी जंपिंग कर लेंगे तो आपका डर स्वतः समाप्त हो जाएगा और आप दूसरी बार इन चीजों को ट्राई करने के लिए पूरी तरह उत्साहित होंगे।

14. सोच लें-एक दिन तो संसार से जाना ही है फिर डरना कैसा-

दोस्तों, निडर बनने का यह आखिरी मंत्र है। आप जिस चीज से भी डरते हैं, उससे डरना यह सोचकर छोड़ दें कि एक दिन तो इस संसार से जाना ही है। जब तक हैं तब तक अपने मन का जिएंगे और खाएंगे-पिएंगे। डर को अपनी जिंदगी के रास्ते में नहीं आने देंगे। हर दिन को आखिरी मानकर जिएं और हर सुबह को नई जिंदगी मानें।

हर सुबह ईश्वर का शुक्रिया अदा करें कि उसने आपको नई जिंदगी बख्शी है। आपका डर कहां काफूर हो जाएगा, आपको पता भी नहीं चलेगा। प्रेरणा देने वाले गीत (inspirational songs) सुनकर भी आप अपने को मन को काफी हद तक डर से उबार सकते हैं।

कुछ सीमा तक डर परफार्मेंस बेहतर करने में मददगार

मित्रों, हमने आपको निडर बनने एवं डर को दूर भगाने के संबंध में जानकारी प्रदान की, लेकिन आपको बता दें कि काउंसलर्स के मुताबिक कुछ सीमा तक डर आपकी परफार्मेंस (performance) बेहतर (better) करने में मददगार होता है।

जैसे कि आपको कोई प्रेजेंटेशन (presentation) देना है तो ‘कोई कमी न रह जाए‘ वाला डर आपको बेहतर प्रेजेंटेशन में सहायक साबित होगा। इसी प्रकार यदि परीक्षा (exam) को लेकर आप कुछ हद तक डर रहे हैं तो यह आपको अच्छी तरह पढ़ने एवं तैयारी करने में फायदेमंद होगा।

लेकिन जैसा कि हमने आपको बताया कि इसका सीमा से अधिक होना खतरनाक (risky) है और फोबिया का रूप भी धारण कर सकता है।

तमाम बालीवुड अभिनेता भी हैं किसी न किसी डर/फोबिया के शिकार

साथियों, डर या फोबिया (fear/fobia) एक ऐसी चीज है, जो आम आदमी हो या खास, किसी को भी अपनी गिरफ्त में ले सकती है। आज हम आपको बालीवुड अभिनेताओं के डर और उनके फोबिया के बारे में तफसील से बताएंगे। मित्रों, बात शाहरूख खान (shahrukh khan) से शुरू करते हैं।

कभी शाहरूख ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें डर लगता है कि एक दिन वे अंधे हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त वे इक्विनोफोबिया (equinofobia) के भी शिकार हैं। यानी उन्हें घोड़ों से डर लगता है। वहीं, बात बालीवुड के भाई यानी सलमान खान (Salman Khan) की करे तो उन्हें क्लिथ्रोफोबिया है।

उन्हें अपनी इंद्रियों को खो देने का डर सताता है। अब आते है अच्छी अभिनेत्रियों में शुमार की जाने वाली आलिया भट्ट (Alia bhatt) की। वे अंधेरे से डरती हैं। यह उनका डर बन गया है। उनके नए नवेले पति रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की बात करें तो उनके मन में काॅकरोच को लेकर डर बैठा हुआ है।

इसी प्रकार बालीवुड दिवा सोनम कपूर (Sonam Kapoor) को लिफ्ट में फंसने से डर लगता है। अभिनेता विकी कौशल (Vicky kaushal) को डूबने का डर सताता है। वहीं, मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) को सांपों से डर लगता है। वह पटकथा में भी देखती और सुनिश्चित कराती हैं कि कोई सांपों से जुड़ा सीन (scene) तो नहीं है।

इसी प्रकार फिल्म अभिनेता अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) को सीलिंग फैन से डर लगता है कि कहीं ये टूट न जाए। वे पंखे वाले कमरे में नहीं रहते। अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी (siddhant chaturvedi) को बचपन से ही पानी से डर लगता था कि कहीं वे डूब न जाएं।

लेकिन जब एक फिल्म में उन्हें अंडर वाटर सीक्वेंस (under water sequence) करना था तो उन्होंने इस डर को दूर करने की ठानी। तैराकी सीखकर अपने इस डर पर काबू पाया। हाल ही में आमिर खान की पुत्री आइरा खान (Ira Khan) ने भी उन्हें एंग्जाइटी (anxiety) का शिकार होने की बात स्वीकारी थी।

डर क्या है?

यह व्यक्ति के मन के भीतर उत्पन्न होने वाली नकारात्मक एवं अप्रिय भावना है।

डर के लक्षण क्या क्या हैं?

व्यक्ति को पसीना आ जाता है। उसकी मांसपेशियों में तनाव हो जाता है, सांस की दर एवं दिल की गति तेज हो जाती है आदि।

निडर बनने के क्या क्या उपाय हैं?

इनके बारे में हमने आपको विस्तार से ऊपर पोस्ट में बताया है। आप वहां से देख सकते हैं।

क्या डर किसी प्रकार के रोग को भी जन्म देता है?

जी हां, डर की वजह से फोबिया, एंग्जाइटी जैसे रोग हो जाते हैं।

डर फोबिया कब हो जाता है?

जब व्यक्ति के भीतर समाया डर तर्कहीन हो जाता है तो उसे फोबिया की संज्ञा दे दी जाती है।

दोस्तों, हमने आपको इस पोस्ट (post) में निडर व्यक्ति बनने के बेहतरीन तरीकों की जानकारी दी। उम्मीद है कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी (useful) साबित होगी। यदि आप इसी प्रकार के जानकारीपरक विषय पर हमसे पोस्ट चाहते हैं तो हमें नीचे दिए गए कमेंट बाक्स (comment box) में कमेंट (comment) करके बता सकते हैं। आपकी प्रतिक्रियाओं का हमें इंतजार है। ।।धन्यवाद।।

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