गाड़ी चोरी हो जाए तो इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें? गाड़ी चोरी होने पर क्या करें? Vehicle Chori Complaint In Hindi

कार लेना तो बेहद आसान है, लेकिन फ़र्ज़ कीजिये अगर आपकी प्यारी, दुलारी कार चोरी चली जाए तो? राहुल की आपबीती सुनिए। राहुल ने कुछ ही महीने पहले नयी कार खरीदी थी। लेकिन एक रात कार चोरों ने घर के आगे खड़ी उसकी खूबसूरत लाल रंग की कार पर हाथ साफ़ कर दिया। राहुल ने पुलिस को तो सूचना दे दी, लेकिन उसको यह समझ नहीं आ रहा कि वह चोरी हुई गाड़ी के लिए बीमे का क्लेम कैसे करे?

गाड़ी चोरी हो जाए तो इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें? गाड़ी चोरी होने पर क्या करें? Vehicle Chori Complaint In Hindi

अगर आप भी राहुल जैसे कुछ लोगों में शुमार हैं जो यह नहीं जानते कि चोरी गई गाड़ी का क्लेम कैसे लें तो हम आपकी मदद के लिए हाज़िर हैं। हम आपको बताएँगे कि meri bike chori ho gayi, gadi chori ho jane par kya kare, bike chori complaint in hindi, bike chori insurance, bike chori ki application in hindi, Vehicle Chori ho jane par Insurance claim kaise kare, और आप बीमे के लिए क्लेम कैसे कर सकते हैं….

Gadi Chori Ho Jane Par Kya Kare? सबसे पहली और सबसे जरुरी बात….

देर न हो जाए कहीं देर न हो जाए…. जी हाँ! पुलिस और बीमा कंपनी को कार चोरी की सूचना देने में देरी कतई न करें। सर्वप्रथम अपने पास के किसी पुलिस स्टेशन में जाकर कर चोरी की सूचना प्राथमिकी यानी एफआईआर दर्ज कराएँ। तुरंत ही बीमा कंपनी को भी कार चोरी की बाबत सूचना दें। दरअसल कई बीमा कम्पनियाँ चोरी की सूचना देरी से दिए जाने को आधार बनाकर क्लेम देने से बचना चाहती हैं। ऐसे में आप जितनी जल्दी पुलिस और बीमा कंपनी को चोरी की सूचना देंगे उतना ही बेहतर होगा। जितनी जल्दी सूचना देंगे उतनी ही जल्दी प्रोसेस भी शुरू होगी।

अपराधिक मामलों में फंसने से बचने के लिए भी जरुरी…..

इसके अलावा जल्दी सूचना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अगर गाड़ी चोरी करने वाला उसका इस्तेमाल अगर किसी आपराधिक वारदात के लिए करता है तो उसमें आपके फंसने के चांस रहते हैं। सामान्य रूप से अगर आप कंपनी को कार चोरी के एक सप्ताह के भीतर इस सम्बन्ध में सूचना दे देते हैं तो गाड़ी के कागज़ जमा करने के लिए 6 महीने का समय मिलता है। अगर आपकी चोरी गई गाडी का बीमा किसी एजेंट के माध्यम से हुआ है तो आप कागजों को एकत्र करने में उसकी मदद ले सकते हैं।

बीमा कंपनी से चोरी हुई गाडी का क्लेम लेने के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट –

बीमा कंपनी से चोरी हुई गाडी का क्लेम लेने में आपको जिन कागजों की जरुरत पड़ेगी, उनका ब्यौरा इस तरह है-

  • गाड़ी चोरी की एफआईआर की कॉपी
  • गाड़ी की आरसी यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की कॉपी
  • वाहन स्वामी के आधार कार्ड या पहचान-पत्र की कॉपी
  • वाहन स्वामी के ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी
  • गाड़ी अगर लोन पर ली गई थी तो लोन एग्रीमेंट की कॉपी
  • गाड़ी के इंश्योरंस की कॉपी
  • कोर्ट के आदेश की कॉपी, जिसमें यह लिखा होगा की पुलिस ने गाड़ी को तलाश
    करने की कोशिश की, लेकिन गाड़ी खोजी नहीं जा सकी।
  • गाड़ी की दोनों चाभी

नोट – अगर कोई चाभी चोरी गई है तो एफआईआर में इसका भी स्पष्ट उल्लेख करना कतई न भूलें। बीमा नियामक प्राधिकरण यानी इरडा का ऐसा कोई हार्ड एंड फ़ास्ट रूल नहीं, लेकिन बीमा कंपनियों ने अपने बचाव के लिए अब इसे जरुरी सा बना दिया है। इसमें लोग अक्सर लापरवाही बरतते हैं।

भारत में गाड़ी चोरी की वारदातें –

जिस रफ़्तार से वाहन चोरी की घटनाएँ बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए वाहन चोरी का बीमा एक बहुत संवेदनशील विषय है। अकेले देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहाँ २०१७ के मुकाबले २०१८ में गाड़ी चोरी की घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं। दिल्ली पुलिस विभाग से जुड़े आंकड़ों पर जरा एक नज़र दाल लीजिये-दो साल पहले यानी सन 2017 में वाहन चोरी का आंकड़ा 39 हज़ार से ज्यादा था, जो एक साल के भीतर ही मतलब कि 2018 में करीब 45 हज़ार पर पहुँच गया। गाड़ी चोरी की घटनाओं में लगभग 13 % की बढ़ोतरी दर्ज की गयी। इसमें भी चोरी गई कारों की संख्या 8 हज़ार से ज्यादा थी। बीमा चोरी से हुए नुकसान की एक कवायद भर है।

यह भी जान लें….

आपको यह भी बता दें कि कार बीमा सबसे पहले 1930 में यूनाइटेड किंगडम में लागू किया गया था। अपने देश में थर्ड पार्टी बीमा १९८८ से जरुरी किया गया है। इस वक़्त निजी व्हीकल, दोपहिया और कमर्शियल व्हीकल श्रेणी में बीमा होता है।

अब तो बिमा खरीदने की ऑनलाइन सुविधा –

इस वक़्त ऑनलाइन बीमा और भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही कई कंपनियां ग्राहकों को यह सुविधा भी दे रही हैं की वो प्रीमियम की तुलना कर अपने लिए बेहतर बीमा का चुनाव कर सकें। बीमा के पालिसी दस्तावेजों को भी ठीक से पढना न भूलें। इनकी कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें। चोरी गई गाड़ी के लिए क्लेम करते वक़्त ऐसी कोई कागजी कमी न रखें जिसकी वजह से क्लेम रिजेक्ट हो।

गाड़ी चोरी हो जाए तो इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें?

यदि आपकी, आपके परिवार या किसी दोस्त की कोई कार या बाइक चोरी हो गई है। और आपने अपने वाहन का बीमा करा रखा था तो आपके वाहन चोरी से जो छति हुई है उसकी भरपाई बीमा कंपनी करेगी। लेकिन बीमा कंपनी से क्लेम लेने के लिए आपको समय पर इन्सुरेन्स क्लेम करना होगा। आप नीचे बताये गए तरीके से गाड़ी चोरी होने पर बीमा क्लेम कर सकतें हैं –

  • कोई भी वाहन चोरी होने पर सबसे पहले आपको उस वाहन के सभी डाक्यूमेंट्स – रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, पोलूशन सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस, Insurance कॉपी, अपना एक फोटो ID और Polution Certificate इकट्ठा करना होगा।
  • सभी दस्तावेज इकट्ठा करने के बाद आपको Bike या Car चोरी होने की FIR [ First Information Report ] जल्द से जल्द पुलिस स्टेशन जाकर दर्ज करायें।
  • FIR में आपको गाड़ी कहां पर चोरी हुई है, कितने बजे चोरी हुई है, और किस तरह से चोरी हुई इसकी जानकारी देनी है।
  • FIR दर्ज कराने पर आपको पुलिस स्टेशन द्वारा एक FIR की एक कॉपी भी दी जाएगी। पुलिस स्टेशन से FIR की कॉपी नहीं दी जाती है तो आप स्वंय मांग लें।
  • FIR दर्ज कराने के बाद भी यदि पुलिस आपकी कार या बाइक सर्च नहीं कर पाती है। तो अब आपको  Insurance कम्पनी में क्लेम करने की बारी आती है ।

bike chori ki application in hindi –

  • INSURANCE क्लेम करने के लिए आपको बीमा करने वाली कम्पनी के ऑफिस जाना होगा। ऑफिस में जाकर आपको गाड़ी चोरी होने के क्लेम करने के लिए आपको एक क्लेम फॉर्म लेना है। यदि आपने बीमा किसी एजेंट क्र द्वारा करवाया था तो आप यहाँ पर उस बीमा एजेंट की हेल्प ले सकतें हैं।
  • फॉर्म को सही सही भरकर आप उसमे आवश्यक दस्तावेज संलग्न करके ऑफिस में जमा कर दें।
  • जो काम आपने बीमा ऑफिस में जाकर किया है आपको वही काम अपने जिला के RTO ऑफिस में जाकर भी करना है।
  • इसके बाद आपको कुछ टाइम के लिए वेट करना होगा। और इस बिच आप बिमा ऑफिस और पुलिस स्टेशन जाकर अपनी गाड़ी सर्च करने की प्रोसेस के जानकारी लेते रहें।
  • यदि पुलिस आपकी गाड़ी चोरी होने के 90 दिनों के बाद भी सर्च नहीं कर पाती है, तो आप पुलिस से नो ट्रेस सर्टिफिकेट ले लीजिये।
  • अब आपको ये नो ट्रेस सर्टिफिकेट Insurance कंपनी के ऑफिस में जाकर जमा कर दें। इसके बाद बीमा कम्पनी इस मैटर के लिए एक सर्वेयर नियुक्त करेगी। और घटना की रिपोर्ट तैयार करवाएगी।
  • यहाँ ध्यान दें – सर्वेयर द्वारा पूछी गई सभी बैटन का सही सही जवाब दें। किसी भी तरह का कोई तथ्य छुपायें नहीं।
  • सर्वेयर द्वारा अपनी रिपोर्ट कम्पनी में भेजने के बाद आपको आपकी गाड़ी का क्लेम दे दिया जायेगा। आम तौर पर इस प्रक्रिया में एक महीने तक का टाइम लगता है। लेकिन अलग अलग कंपनी की अपनी अपनी कार्य प्रणाली के कारन ये टाइम कम ज्यादा हो सकता है।

मोटर इंश्‍योरेंस होने के बाद भी बीमा कंपनी क्‍लेम न दे तो क्या करें? क्लेम में लोचा हो तो ये भी रास्ता –

अगर फिर भी ऐसा होता है तो आपके पास उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खुला है। यहाँ हमेशा उपभोक्ता की सुनी जाती है। फोरम कई बार बीमा कम्पनियों को सेवा में कमी का दोषी पाते हुए फैसले सुना चुका है। बीमा कंपनियों को उनका जायज हक देने को मजबूर कर चुका है। यहाँ भी आपके पास फैसले से संतुष्ट न होने पर अपील के रास्ते खुले हैं। मसलन अगर जिला उपभोक्ता फोरम के फैसले से आप संतुष्ट नहीं तो राज्य उपभोक्ता फोरम के पास अपनी फ़रियाद लेकर जा सकते हैं। थोडा वक़्त तो लगेगा लेकिन आपकी बात जरूर सुनी जाएगी।

अब वह समय नहीं जब गाड़ी खरीद लेना ही काफी था और गाड़ी चोरी चले जाने पर लोग हाथ पर हाथ धर कर पुलिस के सहारे बैठ जाते थे। एक उपभोक्ता के तौर पर जागरूक होना बेहद जरुरी है। यह जानना तो बेहद जरुरी है अगर आपकी गाडी चोरी चली जाए तो फिर अपने कौन कौन से जरुरी कागजात जल्द से जल्द जुटाएं, जिससे आपको जल्द से जल्द आपकी चोरी गयी गाड़ी के क्लेम का भुगतान हो सके।

तो दोस्तों ये थी गाड़ी चोरी हो जाए तो इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें? Vehicle Chori Complaint In Hindi के बारे में आवश्यक जानकारी। यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगे तो आप अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें। साथ ही यदि आपका किसी प्रकार का कोई सवाल हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करें। हम जल्द ही आपके सवालों के जवाब देगें ।। धन्यवाद ।।

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