यूपी जनसंख्या कानून क्या है? UP Jansankya Kanoon In Hindi, PDF

उत्तर प्रदेश में इन दिनों यूपी जनसंख्या कानून को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। चुनावी साल से ऐन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाए जाने की घोषणा की है और खुद को सियासत के केंद्र में ला दिया है। समाज शास्त्र विशेषज्ञ सालों से इस कानून को लाए जाने की पैरवी करते रहे हैं। आज इस पोस्ट में हम आपको जनसंख्या नियंत्रण कानून से जुड़े तमाम पहलुओं पर जानकारी देंगे। आइए, शुरू करते हैं-

यूपी जनसंख्या कानून क्या है?

साथियों, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून लाए जाने की घोषणा की है। राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या बिल-2021 का ड्राफ्ट (draft) तैयार कर लिया है। बहुत जल्द ही आयोग इसे अंतिम रूप देने के बाद प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को सौंप देगा। इस ड्राफ्ट में यूपी में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानूनी उपायों के रास्ते सुझाए गए हैं।

इनमें दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन, प्रमोशन पर रोक का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 77 सरकारी योजनाओं और अनुदान से भी वंचित रखने की सिफारिश की गई है। ड्राफ्ट के मुताबिक सरकार को कानून लागू कराने के लिए राज्य जनसंख्या कोष बनाना होगा। उसे हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव की सुविधा देनी होगी। साथ ही स्कूल के पाठ्यक्रम में जनसंख्या नियंत्रण का भी अध्याय होगा।

यूपी जनसंख्या कानून डिटेल्स –

योजनायूपी जनसंख्या नियंत्रण कानून
घोषणामुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ जी द्वारा
मुख्य उदेश्यप्रदेश की जनसंख्या को नियंत्रित करना
लाभकारीउत्तर प्रदेश के नागरिक
आधिकारिक वेबसाइटअभी उपलब्ध नहीं
यूपी जनसंख्या कानून क्या है? UP Jansankya Kanoon In Hindi, PDF

ड्राफ्ट के अनुसार जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू होने पर क्या होगा?

जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू होने के एक साल के भीतर सभी सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय निकाय में चुने गए जन प्रतिनिधियों को इस कानून का उल्लंघन न करने संबंधी शपथ पत्र देना होगा। उन्हें बताना होगा कि कानून लागू होते समय उनके दो ही बच्चे हैं। शपथ पत्र देने के बाद यदि वह तीसरी संतान पैदा करते हैं तो संबंधित प्रतिनिधि का निर्वाचन रद्द करने और चुनाव न लड़ने देने की संस्तुति की जाएगी। सरकारी कर्मचारियों का प्रमोशन तथा बर्खास्त करने तक की सिफारिश आयोग ने ड्राफ्ट में की है‌।

इसके अलावा यदि अभिभावक सरकारी नौकरी में हैं और नसबंदी करवाते हैं तो उन्हें अतिरिक्त वेतन बढ़ोतरी यानी इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सरकार की आवासीय योजनाओं में छूट, प्रोविडेंट फंड यानी पीएफ में नियोक्ता का अंश बढ़ाने जैसी कई सुविधाएं देने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही यदि दो बच्चों वाले अभिभावक सरकारी नौकरी में नहीं हैं तो उन्हें पानी, बिजली, हाउस टैक्स, होम लोन में छूट सहित अन्य सुविधाएं देने का प्रस्ताव किया गया है।

एक संतान पर खुद से नसबंदी कराने वाले अभिभावकों को बच्चे का 20 साल तक मुफ्त इलाज, शिक्षा, बीमा के साथ ही सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है। एक संतान पर मर्जी से नसबंदी कराने वाले अभिभावकों की संतान को 20 साल तक मुफ्त इलाज, शिक्षा व बीमा के साथ नौकरियों में वरीयता दिए जाने की तैयारी है।

इसके साथ ही एक संतान वाले दंपति को सरकारी नौकरी में चार इंक्रीमेंट तक मिल सकते हैं। गरीबी रेखा के नीचे निवास करने वाले ऐसे दंपति को बेटे के लिए 80 हजार रुपये और बेटी के लिए एक लाख रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे।

यूपी जनसंख्या कानून ड्राफ्ट पर जनता से 19 जुलाई तक राय मांगी गई है

मित्रों, आपको बता दें कि विधि आयोग यानी law commission की ओर से ने जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट सरकारी वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इस पर 19 जुलाई तक प्रदेश की आम जनता से राय यानी आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। इन तमाम आपत्तियों और सुझावों को शामिल करते हुए राज्य विधि आयोग फाइनल ड्राफ्ट राज्य सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद सरकार विधेयक को सदन में पेश कर कानून के बतौर लागू कर देगी।

फिलहाल आयोग ने उप्र जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण) विधेयक-2021 का जो मसौदा तैयार किया है, उसमें लोगों की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही राज्य सरकार के दायित्व भी तय किए गए हैं। इसके अलावा ड्राफ्ट को कई जजों को भेजकर उनके सुझाव भी लिए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद तथा नगरीय निकाय (नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत) से पहले इस नए कानून को लागू किया जा सकता है।

दूसरी डिलीवरी में जुड़वां बच्चे हुए तो उन्हें एक ही माना जाएगा

दोस्तों, लोगों के मन में जुड़वां बच्चों को लेकर भ्रम रहता है। उन्हें लगता है कि एक बच्चा यदि पहले से है और दूसरी डिलीवरी में यदि जुड़वां बच्चे हुए तो उनकी तीन संतान हो जाएंगी। जबकि ऐसा नहीं है। जनसंख्या नियंत्रण कानून के मसौदे में साफ किया गया है कि यदि दूसरी प्रेग्नेंसी में किसी के दो या उससे अधिक बच्चे होते हैं, तो उन्हें एक ही माना जाएगा।

इसके अलावा यदि पहला, दूसरा या दोनों ही बच्चे नि:शक्त हैं तो वह तीसरी संतान पर सुविधाओं से वंचित नहीं होगा। इसके अतिरिक्त उसे तीसरे बच्चे को गोद लेने की भी छूट होगी। किसी बच्चे की असमय मृत्यु पर तीसरे बच्चे को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। नसबंदी के असफल होने पर अनचाहे गर्भ में छूट मिलेगी। इसके अलावा नसबंदी आपरेशन के फेल होने से के चलते पैदा हुआ तीसरा बच्चा भी कानून के दायरे से बाहर होगा।

राज्य विधि आयोग ने बहु-विवाह पर भी ध्यान केंद्रित किया है

राज्य विधि आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण कानून के ड्राफ्ट में बहु-विवाह का भी ध्यान रखा है। इसके तहत धार्मिक या पर्सनल ला के तहत एक से अधिक विवाह करने वाले दंपति भी कानून के दायरे में होंगे। एक से अधिक विवाह करने वाले व्यक्ति के सभी पत्नियों से यदि दो से अधिक बच्चे हैं तो उसे सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा।

हालांकि हर पत्नी उसके दो बच्चे होने पर सुविधाओं का लाभ ले सकेगी। ऐसे ही यदि किसी महिला के एक से अधिक विवाह करने पर उसके अलग-अलग पतियों से दो से अधिक बच्चे होंगे तो उसे भी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा। यह तो हम बता ही चुके हैं कि सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मियों से सीमित परिवार का शपथपत्र लेने तथा नियम तोडऩे पर उसका प्रमोशन रोकने के साथ ही सेवा से बर्खास्त किए जाने तक की सिफारिश की गई है। इसके अतिरिक्त मातृत्व और पितृत्व के लिए पूरे वेतन एवं भत्तों समेत 12 माह का अवकाश प्रदान किए जाने की भी सिफारिश की गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने जनसंख्या नीति घोषित की

जनसंख्या नियंत्रण कानून लाए जाने से ठीक पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 जुलाई, 2021 को विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर नई जनसंख्या नीति (2021-30) भी घोषित कर दी है। इसमें जन्म दर को कम करने का लक्ष्य रखा गया है। आपको बता दें कि जनसंख्या के मामले में उत्तर प्रदेश संसार के केवल पांच देशों से पीछे है। नई जनसंख्या नीति से वर्ष 2052 तक उत्तर प्रदेश में जनसंख्या स्थिरीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

जनसंख्या नीति के तहत उत्तर प्रदेश सरकार अब परिवार नियोजन कार्यक्रम पर थ्यान केंद्रित करेगी। वह गर्भ निरोधक उपायों की सुलभता को सुनिश्चित करेगी। साथ ही, सुरक्षित गर्भपात की समुचित व्यवस्था भी करेगी। अपग्रेडेड स्वास्थ्य सुविधाओं के जरिए नवजात जन्म दर, मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर को कम करने का प्रयास रहेगा। इसके साथ ही नपुंसकता या बांझपन की समस्या के सुलभ समाधान उपलब्ध कराने की भी कोशिश होगी।

वर्ष 2030 तक जन्म दर को 1.9 तक लाने का लक्ष्य

मित्रों, आपको बता दें कि नई जनसंख्या नीति में वर्ष 2026 तक जन्म दर को प्रति हजार आबादी पर 2.1, जबकि वर्ष 2030 तक 1.9 तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 11 से 19 वर्ष के बीच किशोरों के पोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य के बेहतर प्रबंधन के अलावा, बुजुर्गों की देखभाल के लिए व्यापक व्यवस्था भी की जाएगी। नई नीति में आबादी स्थिरीकरण के लिए स्कूलों में हेल्थ क्लब बनाये जाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत प्रदेश में नवजातों, किशोरों व बुजुर्गों की डिजिटल ट्रैकिंग भी कराने की योजना है।

जागरूकता और जनसांख्यिकीय संतुलन का प्रयास किया जाएगा

नई जनसंख्या नीति की अपने आवास पर घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो बच्चों के बीच गैप को आवश्यक बताते हुए कहा है कि अगर दो बच्चों के बीच एक अच्छा अंतराल नहीं होगा तो उनके पोषण पर भी असर पड़ेगा। गरीबी और बढ़ती आबादी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयास करते हुए हमें यह ध्यान भी रखना होगा कि इससे देश का जनसांख्यिकीय संतुलन न प्रभावित हो। जनसंख्या नीति को कारगर बनाने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री ने समाज के विभिन्न तबकों के बीच जागरूकता फैलाने और विभागों के बीच समन्वय बनाने पर भी जोर दिया।

1977 के बाद से जनसंख्या नियंत्रण किसी पार्टी के घोषणा पत्र का हिस्सा नहीं

दोस्तों, आपको बता दें कि 1975 में कांग्रेस ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कार्रवाई की थी, लेकिन 1977 के बाद कोई सरकार इसे अपने घोषणापत्र में शामिल करने की हिम्मत नहीं कर सकी। कई बार आबादी नियंत्रण को धार्मिक आस्था से जोड़कर भी देखा जाता है। लिहाजा, समस्या के समाधान के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।

खुद राज्य के चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रस्तावित नए कानून में यदि दंडात्मक व्यवस्था की जगह प्रोत्साहनो पर अधिक जोर दिया जाए तो यह ज्यादा कारगर साबित हो सकता है। उन्होंने इस संबंध में जल्द ही राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष से मिलकर उन्हें अपने सुझाव देने की भी बात दोहराई है।

यूपी जनसंख्या कानून जुड़े सवाल

जनसंख्या नियंत्रण कानून क्यों लाया जा रहा है?

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, जनसंख्या नियंत्रण कानून का मकसद जनसंख्या को नियंत्रित करना है। ऐसा जन्म दर पर लगाम लगाकर करने की योजना है

यूपी जनसंख्या कानून के ड्राफ्ट में क्या खास है?

जनसंख्या नियंत्रण कानून के ड्राफ्ट में सबसे बड़ी सिफारिश दो से अधिक बच्चों वालों के सरकारी आवेदन और चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के प्रावधान की है‌।

क्या जनसंख्या नियंत्रण कानून का फाइनल ड्राफ्ट तैयार है?

जी नहीं, इस कानून के मसौदे को सरकारी वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। जनता से इस पर 19 जुलाई तक आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद फाइनल ड्राफ्ट सरकार को सौंपा जाएगा।

उत्तर प्रदेश में नई जनसंख्या नीति कब घोषित हुई?

उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नीति 11 जुलाई, 2021 को विश्व जनसंख्या दिवस पर घोषित की गई है।

जनसंख्या नीति की घोषणा किसने की है? इसका क्या लक्ष्य है?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या नीति की घोषणा की है। इसका लक्ष्य प्रदेश में जन्म दर को करना है।

दोस्तों, यह थी जनसंख्या नियंत्रण कानून की जानकारी। उम्मीद है आपके लिए यह जानकारी उपयोगी साबित होगी। यदि आप इसी प्रकार के किसी जनहित के विषय या योजना के संबंध में हमसे जानकारी चाहते हैं तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें बता सकते हैं। आपकी प्रतिक्रियाओं और सुझावों का हमें इंतजार रहेगा। ।।धन्यवाद।।

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