मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना ऑनलाइन आवेदन, लाभ, पात्रता मापदंड – UP Bal Shramik Vidya Yojana

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शिक्षा प्राप्त करना हर बच्चे का अधिकार होता है। संपन्न अभिभावक अपने बच्चों को बड़े से बड़े स्कूल में दाखिल कराते हैं। लेकिन कई बच्चे ऐसे होते हैं, जिन्हें पढ़ाई-लिखाई दूर, परिवार का खर्च बंटाने के लिए श्रम करने पर मजबूर होना पड़ता है। दूसरे सभी राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश राज्य में भी ऐसे बहुत से ऐसे बाल मजदूर हैं, जो परिवार की विपन्न आर्थिक स्थिति की वजह से काम करने के लिए मजबूर हैं।

ऐसे ही बाल मजदूरों तक शिक्षा का प्रकाश फैलाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या धन योजना का शुभारंभ किया है। दोस्तों, आज इस post के माध्यम से हम आपको इसी महत्वपूर्ण योजना की जानकारी देंगे। आइए शुरू करते हैं।

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना क्या है? What is the UP Bal Shramik Vidya Scheme?

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के अनाथ बच्चों तथा मजदूरों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत राज्य के बालकों को 1000 रूपये प्रतिमाह और बालिकाओ को 1200 रूपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। वहीं, कक्षा 8, 9 और 10वीं पास करने वाले छात्रो और छात्राओं को अतिरिक्त 6000-6000 रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना की शुरुआत कब हुई? When did the Chief Minister Bal Shramik Vidya Yojana start?

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना ऑनलाइन आवेदन, लाभ, पात्रता मापदंड - UP Bal Shramik Vidya Yojana

12, जून 2020 को ऐन बाल श्रमिक निषेध दिवस के दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने श्रमिक परिवारों के बच्चो को अच्छा जीवन प्रदान करने के मुख्य उद्देश्य के साथ इस योजना का शुभारंभ किया। योजना के जरिए इन बाल श्रमिकों को खाना और शिक्षा दोनों प्रदान किए जाने का प्रयास है, ताकि वह अपना भविष्य सुधार सकें। साथियों, आपको यह भी बता दें कि यह मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना मार्च के अंत में शुरू की जानी थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण इसमें देरी हुई।

पहले यह थी योजना, फिर बदला नाम

आपको बता दें कि इससे पहले श्रम विभाग की ओर से 8000 रूपए प्रति वर्ष लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर किए जाते थे। साथ ही इसमें सौ रूपए हर महीने स्कालरशिप के रूप में भी योगदान दिया जाता था। इसी को बदल कर अब नई मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना का नाम दे दिया गया है। पहले योजना की शर्तो के कठिन होने से योजना के तहत लाभार्थी बेहद सीमित संख्या में मिल सके थे।

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना के पहले चरण में 2000 बाल मजदूरों को लाभ होगा

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना योजना के पहले चरण में इसका लाभ 2000 बाल श्रमिकों तक पंहुचाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मित्रों आप यह भी जान लीजिए कि इससे पहले राज्य सरकार ने ट्रायल के आधार पर उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में एक सशर्त नकद हस्तांतरण परियोजना भी शुरू की थी।

आठ से 18 साल तक के लाभार्थी मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना में शामिल –

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना का लाभ 8 साल से लेकर 18 साल की उम्र तक के बच्चों, किशोरों और युवाओं को प्राप्त होगा। मजदूरों के बच्चों की पहचान का कार्य श्रम विभाग को दिया गया है। योजना के तहत उत्तर प्रदेश के श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, ग्रामीण विकास विभाग से सर्वेक्षण तथा निरीक्षण के बाद बच्चों को चिन्हित किया जायेगा।

जिसके बाद, ग्राम पंचायतों, स्थानीय निकायों, चाइल्ड लाइन, आंगबाड़ी जैसी सरकारी छोटी इकाइयों के जरिए बच्चों का इस योजना के लिए चयन किया जायेगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने पर ई-ट्रैकिंग सिस्टम की वेबसाइट पर अपलोड किया जायेगा।

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना के लाभार्थी कौन होंगे

आपको बता दें कि यह योजना अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल है, जिनमें बाल श्रम से संबंधित मामलों की संख्या आज भी सबसे अधिक है। योजना का लाभ उन बच्चों को दिया जाएगा, जिनकी माता नहीं है, या पिता नहीं हैं। या दोनों नहीं है। यानी वह अनाथ हैं। साथ ही उन बच्चों को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा, जिनके माता पिता किसी भयंकर बीमारी से पीड़ित हैं।

जिन बच्चों के माता पिता की आय का कोई स्रोत नहीं है। उनको इस योजना का लाभ दिया जायेगा। जिसके लिए मुख्य चिकित्साधिकारी यानी सीएमओ की ओर से जारी किया गया असाध्य रोग का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। इसके अलावा भूमिहीन और महिला प्रधान परिवार के बच्चों को भी इस योजना का लाभ दिया जायेगा। जो बच्चे घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बाल श्रम करते हैं। उनको इस योजना में शामिल किया ही गया है।

57 जिलों में दी जाएगी लाभार्थियों को आर्थिक सहायता

दोस्तों, आपको बता दें कि साल 2011 की जनगणना के आंकड़ो के आधार पर उत्तर प्रदेश के 57 जिलों में से इन बाल श्रमिक लाभार्थियों को सहायता दी जाएगी। इस योजना के माध्यम से गरीब एंव आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा हासिल करने का मौका मिलेगा। पढ़ाई करने और भरण पोषण के लिए धन राशि दी जाएगी। इस तरह प्रदेश में पढ़े- लिखे लोगों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना का लाभ लेने के लिए आवश्यक शर्त और दस्तावेज –

दोस्तों, अब आपको बता दें कि योजना का लाभ लेने के लिए क्या आवश्यक शर्त है और आपके पास कौन-कौन से दस्तावेज होने चाहिए। एक नज़र में यह इस प्रकार हैं-

  • सबसे पहली शर्त यह है कि आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी हो।
  • आवेदक की आयु आठ साल से कम और 18 वर्ष से अधिक न हो।
  • राशन कार्ड
  • आधार कार्ड
  • पहचान पत्र
  • निवास प्रमाण पत्र
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो

इसके अतिरिक्त असाध्य रोग की स्थिति में सीएमओ की ओर से जारी प्रमाण पत्र भी लगाना होगा।

यूपी बाल श्रमिक विद्या योजना 2020 ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

दोस्तों, आपको यह भी बता दें कि अभी मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना का लाभ लेने के लिए आनलाइन आवेदन शुरू नहीं हुए हैं। जैसे ही यह प्रक्रिया शुरू होगी, सबसे पहले हम आपको उसके संबंध में जानकारी देंगे।

प्रबंध समिति, स्थानीय प्रतिनिधि को भी संस्तुति का अधिकार

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत लाभार्थियों तक योजना का सही लाभ पहुंचाने के लिए एक और कदम उठाया गया है। अब विद्यालय प्रबंध समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी यह अधिकार दिया गया है कि वह मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना के लिए लाभ लेने की शर्त पूरी करने वाले बच्चों के नामों की संस्तुति कर सकें। इससे बच्चों के योजना का लाभ लेने से चूकने की गुंजाइश बेहद कम रह जाएगी।

बाल मजदूरी के खिलाफ कई कानून, सख्ती जरूरी

श्रम विभाग तमाम बड़े कानूनों के बावजूद बाल मजदूरी पर लगाम लगाने में बहुत समर्थ नहीं रहा है। ऐसे में बाल श्रम बच्चों की पढ़ाई में बाधा न बने, इसे सरकार सुनिश्चित करने में जुटी है। मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना इसी की एक कड़ी है। इससे मजदूरी करने वाले बच्चों को किताबों की शरण नसीब होगी। देश में पहले ही बालश्रमिकों की बड़ी संख्या है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है।

ऐसे में यहां की स्थिति पर चिंता स्वाभाविक है। यह बच्चे सुबह सवेरे से काम पर लगते हैं और दिन ढले तक काम करते हैं। कई जगह रात को भी इन्हें काम में झोंक दिया जाता है। पैसे के नाम पर बेहद कम भुगतान होता है। न्यूनतम मजदूरी की बात तो छोड़ ही दीजिए। दूसरे, बच्चे उनके आदेश का प्रतिकार करने में भी सक्षम नहीं होते। ऐसे में वह शोषण का शिकार आसानी से हो जाते हैं। कई जगह से उन पर कई बार नियोक्ता के जुल्मों की भी शिकायत आती है।

ऐसे नियोक्ताओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग की सख्ती हर नियोक्ता पर जरूरी है। उन्हें कानून के शिकंजे से निकलने का मौका नहीं मिलना चाहिए। केवल कड़ी से कड़ी कार्रवाई ही ऐसे लोगों के भीतर बच्चों से मजदूरी करने के खिलाफ डर बैठा सकती है।

श्रम विभाग की टीमें कई बार कर चुकीं कार्रवाई

ऐसे में पहले से ही खाने तक के लिए परेशानी झेल रहे मां-बाप अपने जिगर के टुकड़ों को काम की इस भट्टी में झोंकने को मजबूर हो जाते हैं। हालांकि श्रम विभाग की टीमें निरीक्षण कर कई बाल मजदूरों को मुक्त कराती हैं और उनसे काम लेने पर नियोक्ताओं पर कार्रवाई भी करती हैं। लेकिन इसके बावजूद नियोक्ता विभाग की आंखों में धूल झोंककर इनसे काम लेते रहते हैं।

ज्यादातर चाय आदि की दुकानों और छोटी फैक्टरियों में बाल मजदूर काम करते दिख जाते हैं। कई बच्चे पारिवारिक मजबूरी के चलते मजदूरी करने लगते हैं तो कुछ ऐसे होते हैं, जो घरों से भाग जाते हैं और दूसरे शहरों में जाकर किसी दुकान या प्रतिष्ठान में काम धंघा करने लगते हैं। यह बच्चे सबसे ज्यादा शोषण के शिकार भी होते हैं। कई बार नियोक्ताओं को केवल जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है। ऐसी स्थिति में वह लापरवाह हो जाते हैं।

कई बार यह भी होता है कि एक जगह कार्रवाई होती है तो फोन के जरिये निरीक्षण या छापे की खबर दूसरी जगह पहुंच जाती है और नियोक्ता होशियार हो जाते हैं। वह उन बच्चों को घर भेज देते हैं, जिनसे वह काम ले रहे होते हैं। ऐसे में निरीक्षण की कार्रवाई प्रभावी नहीं रह जाती। इससे निजात पाने के लिए कई बार टीम सदस्य दुकानों पर ग्राहक बनकर भी पहुंचते हैं, ताकि नियोक्ता को श्रम विभाग की कार्रवाई से किसी भी तरह से बचने का मौका न मिल सके।

मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना से जीवन में बदलाव की संभावना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से शुरू की गई इस योजना से बाल मजदूरों के जीवन मे बदलाव आने की संभावना जताई जा रही है। माना जा सकता है कि शिक्षा के जरिये उनका भविष्य उज्जवल बन सकेगा। वह अपने मनपसंद क्षेत्र में अपना भविष्य बना पाने में सक्षम हो सकेंगे। यही नहीं, आर्थिक स्थिति खराब होना या अभिभावकों का न होना कम से कम उनके शिक्षा प्राप्त करने के मार्ग में बाधा नहीं बन सकेगा। पढ़ाई लिखाई के बाद बच्चे एक बेहतर नागरिक बनने में सक्षम होंगे।

ऐसा माना जा रहा है। वरना कई बार पैसे के लिए छोटे मोटे अपराध के दलदल में भी बच्चे फंसते देखे गए हैं, जो आगे चलकर उनके साथ ही समाज के लिए समस्याभरा साबित होता है। खास तौर से बालिकाओं के लिए इस योजना में बालकों से अधिक राशि का प्रावधान किया गया है। वह यह भी बताता है कि उत्तर प्रदेश सरकार बालिकाओं की शिक्षा को लेकर किस कदर चिंतित और गंभीर है।

ऐसे में इस योजना का भविष्य बेहतर करार दिया जा सकता है। बाकी इसके कार्यदाय विभाग पर निर्भर करेगा कि वह किस तरह वास्तविक लाभार्थियों को चिन्हित कर उन्हें योजना का लाभ दिलाकर मुख्यमंत्री के सपने को पूरा करने में कितना सक्षम होता है।

साथियों, तो यह थी मुख्यमंत्री बाल श्रमिक विद्या योजना के बारे में जानकारी। दोस्तों, उम्मीद है कि यह पोस्ट आपको बहुत पसंद आई होगी। मित्रों, यदि इसी तरह की किसी विषय या योजना पर आप जानकारी चाहते हैं तो उसका नाम हमें नीचे दिए गए comment box में comment करके बता सकते हैं आपके सभी तरह का सुझावों और प्रतिक्रियाओं का हमें इंतजार है। तो देर किस बात की। टाइप कीजिए और हमें अपना कमेंट लिख भेजिए। ।।धन्यवाद।।

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