उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना ऑनलाइन आवेदन, लाभ एंव पात्रता | UK Tap Water Connection Scheme

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उत्तराखंड की स्थापना को अभी 20 साल हुए हैं। यहां पानी के स्रोत बहुत हैं, लेकिन घरों में नलों के जरिए पानी अभी भी ढेर सारे घरों में नहीं पहुंचा है। खास तौर पर पहाड़ के गांवों में बड़ी आबादी अभी भी पेयजल और अन्य घरेलू कार्यों के लिए पेयजल स्त्रोतों और नदियों से पानी ढोने को मजबूर हैं। जिन गांवों में पेयजल लाइन पहुंची हैं, वहां क्षति पहुंचने पर मरम्मत को मुश्किल से कर्मचारी पहुंचते हैं। ऐसा अधिकांशतः बर्फीले मौसम में होता है।

हालत यह है कि कई गांवों में लोगों के घरों में पानी के कनेक्शन ही नहीं। इसका एक कारण कनेक्शन का महंगा होना भी है। अब इसे देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक रुपये में पेयजल कनेक्शन देने की घोषणा की है। दोस्तों, इस पोस्ट के जरिए आज हम आपको उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना के विषय में विस्तार से जानकारी देंगे। आइए, शुरू करते हैं-

एक रुपये में पानी कनेक्शन योजना क्या है? Uttarakhand 1 rupee tap water connection scheme?

जैसा कि आप सभी लोगों को मालूम है, उत्तराखंड में बहुत से ऐसे लोग है जो कि आर्थिक रूप से बहुत सक्षम नहीं हैं। यहां तक कि उनके घरो में पानी का कनेक्श तक नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के कनेक्शन के लिए 2350 रुपये देने में आम आदमी के सामने बहुत मुश्किल आ रही है। उत्तराखंड राज्य के लोगों की इस दिक्कत को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सिर्फ एक रुपये में पानी का कनेक्शन देने की घोषणा की है।

उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना ऑनलाइन आवेदन, लाभ एंव पात्रता | UK Tap Water Connection Scheme

इससे राज्य के लोगों को अत्यधिक राहत पहुंचेगी। उन्हें अब कनेक्शन के लिए एकमुश्त ढाई हजार रुपये से अधिक भुगतान करने से मुक्ति मिलेगी। इस राशि में वह अपने अन्य जरूरत के कार्य को अंजाम दे सकेंगे।

उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना डिटेल्स – Uttarakhand ₹ 1 water connection scheme details

योजना का नाम उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना
योजना किसके द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री त्रिवेदी सिंह रावत जी के द्वारा
कब लागू हुई 6 जुलाई 2020
लाभ किसे मिलेगा राज्य के नागरिक
योजना का उद्देश्य 1 रूपये में पानी का कनेक्शन प्रदान करना

उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना से प्रदेश के कितने लोग लाभान्वित होंगे – Uttarakhand ₹ 1 water connection scheme benefits

दोस्तों, आपको बता दें कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना से राज्य के लाखों लोग लाभान्वित होंगे। प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत राज्य के 15,647 गांवों में 15,09,758 परिवारों तक पीने का स्वच्छ पानी पहुंचाया जाएगा। अब आपके दिमाग में आ रहा होगा कि योजना को कौन सा विभाग कार्यान्वित करेगा। तो दोस्तों, आपको बता दें कि इस अभियान के लिए उत्तराखंड जल संस्थान, स्वजल और उत्तराखंड पेयजल निगम को कार्यदायी एजेंसी बनाया गया है। यही तीनों मिलकर इस योजना को अमली जामा पहनाएंगे।

इनमें कुल 3,806 राजस्व गांवों में 3,61,654 परिवारों के घर में नल पहुंचाने का जिम्मा उत्तराखंड जल संस्थान का है। वहीं, स्वजल के पास 2,078 राजस्व गांवों के 2,35,994 परिवारों के घरों तक पीने का स्वच्छ पानी पहुंचाएगा। आपको बता दें दोस्तों कि पेयजल निगम के पास सबसे अधिक 9,754 राजस्व गांवों के 9,11,953 परिवारों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी है।

यानी कुल मिलाकर उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना इन तीनों के समन्वय पर आधारित है। तीनों ही पानी की आपूर्ति से जुड़ी सरकारी संस्थाएं हैं। ऐसे में यह उम्मीद तो बंधती ही है कि राज्य वासियों की पानी से जुड़ी वर्षों की बदहाली वाली कहानी बदलने जा रही है।

एक रुपये में कनेक्शन देने वाला उत्तराखंड पहला राज्य-

आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि उपभोक्ताओं को केवल एक रुपये में पानी का कनेक्शन देने वाला उत्तराखंड पहला राज्य होगा। यह दावा खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित डोईवाला ब्लाक के दूधली के नांगल बुलंदावाला गांव में बीती छह जुलाई को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किया। यह वही कार्यक्रम था दोस्तों, जिसमें मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के कनेक्शन के लिए पैसे दे पाना आम आदमी के लिए मुश्किल हो रहा है।

गांव में पेयजल कनेक्शन का शुल्क 2350 रुपये है। पिछले दिनों एक बैठक में जब मुझे गांवों में पानी के कनेक्शन का शुल्क बताया गया तो मुझे लगा कि यह तो बहुत ज्यादा है। बस इसलिए हमने तय किया है कि गांवों में पानी का कनेक्शन एक रुपये में देंगे। उन्होंने कहा कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर घर को पानी पहुंचाने का सपना भी साकार होगा।

दोस्तों, जैसा कि आप जानते ही हैं कि उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है और केंद्र की सत्ता में भी मुख्य पार्टी भाजपा ही है, ऐसे में उसके एजेंडे को राज्य में लागू करना और उसे पूरा कराना भी मुख्यमंत्री के प्रमुख उद्देश्य में से एक उद्देश्य है।

प्रधानमंत्री का है हर घर को पानी का सपना-

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर गरीब के कल्याण की योजना बनाई है। इसी में एक जल जीवन मिशन के तहत आने वाले 2024 तक हर घर को नल देने की योजना भी है। नल देने का मतलब पीने का स्वच्छ पेयजल देना है। जिसमें मानक के हिसाब से पानी उपलब्ध कराना है।

प्रदेश में भी इसी जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश के 15,647 गांवों में 1509,758 परिवारों तक पीने का स्वच्छ पानी पहुंचाया जाएगा। यह तो हम पहले ही बता चुके हैं कि इस अभियान के लिए उत्तराखंड जल संस्थान, स्वजल और उत्तराखंड पेयजल निगम को कार्यदायी एजेंसी बनाया गया है।

उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना के लिए पात्रता – Eligibility for Uttarakhand ₹ 1 water connection scheme

प्रत्येक सरकारी योजना की तरह उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना का लाभ लेने के लिए भी कुछ पात्रता निर्धारित की गई है। उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है, लिहाजा निवास से जुड़ी एक बड़ी शर्त है। आइए, अब हम आपको बता देते हैं कि यह पात्रता यानी शर्तें क्या क्या है-

1- दोस्तों इस योजना की सबसे पहली शर्त यह है कि योजना का लाभ उठाने वाला व्यक्ति यानी लाभार्थी मूल रूप से उत्तराखंड का निवासी हो।

2- योजना के आवेदक को उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्र से होना चाहिए।

3- योजना के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति की सालाना आय अधिक नही होनी चाहिए।

उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज – Documents required for Uttarakhand ₹ 1 water connection scheme –

इस एक रुपये में पानी का कनेक्शन लेने से जुड़ी उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना का लाभ उठाने के लिए व्यक्ति के पास कुछ दस्तावेज होने जरूरी हैं, जो कि इस प्रकार से हैं-

  1. मूल निवास प्रमाण पत्र
  2. आधार कार्ड
  3. मोबाइल नंबर

उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना में आवेदन कैसे करें? How to apply for Uttarakhand ₹ 1 water connection scheme?

आपको बता दें कि इस एक रुपये में पानी का कनेक्शन लेने वाली योजना का लाभ उठाने के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों प्रकार से आवेदन किया जा सकता है। हालांकि आपको यह भी बता दें कि अभी उत्तराखंड ₹1 पानी कनेक्शन योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। दोस्तों, जैसे ही यह आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी हम आपको इसके बारे में अवगत कराएंगे। और उसके बाद आप योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

नदियां, ग्लेशियर और ढाई लाख जलस्त्रोत पर प्यास बड़ी

दोस्तों, आपको बता दें कि राज्य में आठ बड़े जलग्रहण क्षेत्र, 1250 के आस-पास छोटे वाटरशेड है। नदियों, ग्लेशियर के अलावा ढाई लाख से भी अधिक प्राकृतिक जलस्रोत हैं, लेकिन यह सब इस पहाड़ी राज्य की प्यास बुझा पाने में सक्षम नहीं। वर्षा जल संग्रहण की पुरानी तकनीक का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। मित्रों, जैसा कि आप जानते ही हैं कि किसान छोटी जोत वाले हैं तो खेती से उनका अपना ही पेट भर पाता है।

ऐसे में दिक्कत यह भी उठ खड़ी हुई है कि मौसम चक्र बदल गए हैं। बारिश अपने निश्चित समय पर नहीं आ रही। जो बारिश हो रही है, वह इतनी भारी है कि खेत के खेत उसमें बह गए हैं। बारिश के साथ मलबा आने से जल स्त्रोत क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जो नहरें छतिग्रस्त हैं उनकी मरम्मत समय पर नहीं हो सकी। सबसे ज्यादा दिक्कत पेयजल स्त्रोतों के क्षतिग्रस्त होने की वजह से खड़ी हुई है।

हर दूसरे दिन खरीदते हैं पीने का पानी-

उत्तराखंड की जब हम बात कर रहे हैं तो आपको यह भी बता दें कि राज्य में ऐसे नौले और धारे भी बड़ी संख्या में थे, जिनको विकसित और सुरक्षित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही थी। यह पहाड़ के लोगों की प्यास बुझाने का बड़ा जरिया थे। लेकिन धीरे-धीरे खत्म होते चले गए। आज उनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है। हाल यह है कि पेयजल लाइन टूटने की स्थिति में गांवों के घर-घर में टैंक पहुंचाए जा रहे हैं, जिनसे गांव वाले महीने में हर दूसरे दिन घर की जरूरतों के लिए डेढ़ सौ रुपए का पानी खरीदने के लिए मजबूर हैं।

इससे उनका महीने में हजारों का खर्च होता है। जो कि गांव की गरीब जनता के लिए सहन करना बेहद मुश्किल है। वह भी ऐसी जगह जहां पर एक ही आदमी के रोजगार पर पूरे परिवार की आर्थिकी टिकी हुई है। कई जगह तो बच्चे स्कूल छोड़कर नदियों से पीने का पानी ढोने के लिए मजबूर होते हैं या नदी से खच्चरों के जरिए गांव में पानी ढोया जाता है।

उत्तराखंड में वाटर डाटा सेंटर नहीं –

बेशक यह जानकारी आपको झटका देगी। आपको बता दें कि उत्तराखंड सरकार की ओर से 975 करोड़ रुपये की लागत से एक पेयजल नीति का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। इतना ही नहीं, उत्तराखंड प्रदेश का कोई वाटर डाटा सेंटर भी नहीं है। नीति आयोग खुद भी इनतथ्यों का जिक्र बाकायदा अपनी रिपोर्ट में कर चुका है। यह जानना आपके लिए बेहतर है कि उत्तराखंड राज्य में अब तक उत्तराखंड जल प्रबंधन एवं नियमन अधिनियम- 2013 ही लागू है। और आपको यह भी बता दें दोस्तों कि प्राचीन काल से पहाड़ की पहचान और रीढ़ रहे नौले-धारे के उल्लेख के बगैर ये अधिनियम एक महज अति सीमित दस्तावेज बनकर रह गया है। इसका बहुत मतलब नहीं रह गया है।

और आप यह भी जान लीजिए कि इसके आधार पर किसी भी जल से जुड़ी परियोजना का निर्माण किसी प्रयोजन को सिद्ध नहीं करेगा। दोस्तों, एक और बात। जिस तरह से अभी तक प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार के ज्यादातर फैसले हवा-हवाई साबित हुए हैं, उन्हें देखते हुए ज्यादातर विपक्षी इस योजना से भी बहुत उम्मीद नहीं बांध रहे। उनका यही मानना है कि एक बार यह योजना धरातल पर आ जाए, उसके बाद ही इसके वास्तविक गुण दोष के संबंध में कुछ भी कह पाना संभव हो सकेगा।

मित्रों, यह थी उत्तराखंड में एक रुपए में जल कनेक्शन मिलने से जुड़ी सारी जानकारी। उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि आप अपने मनपसंद किसी विषय पर हम से जानकारी चाहते हैं तो उससे हमें अवगत करा सकते हैं‌। इसके लिए आपको नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना होगा। यदि आपको हमें कोई सुझाव और प्रतिक्रिया देनी है तो उसके लिए भी आपको इसी तरह से कमेंट बॉक्स में कमेंट करके अपनी बात हम तक पहुंचानी होगी। हम आपकी प्रतिक्रिया के इंतजार में हैं। ।।धन्यवाद।।

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