स्टार्टअप कंपनी क्या है? | स्टार्टअप कंपनी कैसे काम करती है? व कैसे शुरू करें? | Startup company kya hai

|| स्टार्टअप कंपनी क्या है? | Startup company kya hai | भारत में स्टार्टअप कंपनी कैसे शुरू करें? | स्टार्टअप कंपनी के उदाहरण | Startup company examples in Hindi | स्टार्टअप कंपनी पैसे कैसे कमाती है? ||

Startup company kya hai :- हम लोगों के मन में कई तरह की आकांक्षाएं व अपेक्षाएं होती हैं और उसके लिए हम क्या कुछ नहीं करते हैं। कोई इसके लिए नौकरी करता है तो कोई व्यापार करता है। हम अपने बचपन से ही अपना करियर बनाने और भविष्य को सुनहरा करने के लिए तरह तरह की चीजें करते रहते हैं। हमारी शिक्षा पद्धति भी हमें कुछ ना कुछ सिखाती है और उसके बाद हम किसी विषय विशेष के क्षेत्र में डिग्री लेकर उसमें अपना काम करना शुरू कर देते (Startup business kya hai) हैं।

अब इस दुनिया में कोई नौकरी कर रहा होता है तो कोई व्यापार लेकिन बहुत ही कम लोग ऐसे होते हैं जो अपनी खुद की कंपनी को खड़ा करने की सोचते हैं। अब खुद की कंपनी को खड़ा करना कोई छोटा या सरल विचार नहीं होता है बल्कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण व कठिन निर्णय होता है। इसके तहत आप नौकरी ले नहीं रहे होते हैं बल्कि दूसरों को नौकरी दे रहे होते हैं। एक तरह से इसमें आपको शुरूआती तौर पर बहुत पैसा व समय खर्च करना होता है ताकि एक बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा (Startup company details in Hindi) सके।

अब अपने दम पर नयी कंपनी खड़ी करने को ही स्टार्टअप कहा जाता है जिसके बारे में आजकल आप बहुत सुनते भी होंगे। ऐसे में यह स्टार्टअप कंपनी क्या है, कैसे काम करती है, इसके मुलभुत तत्व क्या होते हैं और किस किस क्षेत्र में स्टार्टअप कम्पनी को खोला जा सकता है इत्यादि प्रश्न आपके दिमाग में दौड़ रहे होंगे। तो आइये जाने इस स्टार्टअप कंपनी के बारे में शुरू से लेकर अंत तक संपूर्ण जानकारी विस्तार (startup company description in Hindi) से।

स्टार्टअप कंपनी क्या है? (Startup company kya hai)

इस लेख में हम सबसे पहले स्टार्टअप कंपनी के ऊपर या उसकी परिभाषा के बारे में ही बात करेंगे। तो यह स्टार्टअप शब्द दो शब्दों के मेल से बना है जिसमें एक शब्द है स्टार्ट और दूसरा है अप। स्टार्ट का अर्थ होता है शुरू करना और अप का अर्थ होता है ऊपर लेकर जाना। तो इस तरह से स्टार्टअप कंपनी का अर्थ हुआ किसी कंपनी की शुरुआत कर उसे ऊपर लेकर जाना। यही स्टार्टअप कंपनी का मूलभूत उद्देश्य, कार्य व लक्ष्य होता (Startup company kya hoti hai) है।

स्टार्टअप कंपनी क्या है

यदि हम गहनता से स्टार्टअप कंपनी की परिभाषा को समझना चाहें तो किसी एक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के द्वारा सांझेदारी में शुरू की गयी एक ऐसी कंपनी जिसका उद्देश्य किसी क्षेत्र विशेष में काम कर लोगों को लाभान्वित करना हो, तो उसे स्टार्टअप कंपनी कहा जाता है। अब यह स्टार्टअप कंपनी किसी भी क्षेत्र से संबंधित हो सकती है और इसे किसी के भी द्वारा शुरू किया जा सकता है। यह आगे चलकर एक बड़ी कंपनी भी बन सकती है तो वहीं इसके निष्प्रभावी या बर्बाद होने का भी खतरा रहता (Startup company kya hai in Hindi) है।

एक तरह से किसी भी स्टार्टअप कंपनी को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए अपने यहाँ निवेश करवाने की जरुरत होती है और इसके लिए उसे निवेशक ढूंढने होते हैं। इतना ही नहीं, स्टार्टअप कंपनी को कई अन्य तरह की चुनौतियों का भी सामना करना होता है लेकिन इसके तहत मिलने वाले लाभ भी बहुत ज्यादा और बड़े हो सकते हैं। आज हम आपको कुछ स्टार्टअप कंपनी के उदाहरण भी देंगे जिसे पढ़ कर आप समझ पाएंगे कि एक स्टार्टअप कंपनी कहाँ से कहाँ तक पहुँच सकती (Startup company kya hoti hai in Hindi) है।

स्टार्टअप कंपनी के उदाहरण (Startup company examples in Hindi)

सबसे पहले आप यह जान लीजिये कि हम अपने आसपास जो भी कंपनी के उत्पाद देखते हैं या जिनकी सेवाओं का उपभोग करते हैं, एक समय पहले तक वे स्टार्टअप कंपनी ही थी। अब यह जरुरी नहीं है कि उनमे से हरेक कंपनी स्टार्टअप कंपनी ही हो क्योंकि किसी किसी को विशाल स्तर पर भी शुरू किया जाता है या उसे एक बड़ी कंपनी शुरू करती है। स्टार्टअप कंपनी वह होती है जिसे एक दम स्क्रैच से शुरू किया गया हो और उसके बाद धीरे धीरे आगे बढ़ी हो।

अब आप बायजूस कंपनी को ही ले लीजिये जो बच्चों व छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने का एक माध्यम है। इसके जरिये बच्चे लगभग सभी विषयों पर ऑनलाइन कक्षाएं अटेंड कर सकते हैं और उसके जरिये अपनी बुद्धि बढ़ा सकते हैं। एक तरह से यह बिना स्कूल या कॉलेज जाए घर बैठे ही शिक्षा ग्रहण करने से संबंधित है। तो पहले यह कंपनी स्टार्टअप कंपनी के तौर पर ही शुरू हुई थी जो आज एक बहुत बड़ी कंपनी बन चुकी है।

ऐसे ही सैकड़ों उदाहरण आपको अपने आसपास ही मिल जाएंगे जो पहले छोटे स्तर पर या स्टार्टअप के तौर पर शुरू हुई कंपनी थी लेकिन समय के साथ साथ उन्होंने बहुत प्रगति की और आज उनकी पहचान हम सभी के बीच में है। वहीं इसके साथ ही आपको ऐसे लाखों उदाहरण देखने को मिल जाएंगे जो स्टार्टअप के तौर पर शुरू तो हुई थी लेकिन एक समय के बाद वे बर्बाद हो गयी या बंद हो गयी। ऐसे में स्टार्टअप खोलने में जितना लाभ मिलने की संभावना होती है, उतना ही इसमें रिस्क भी होता है।

स्टार्टअप कंपनी कैसे काम करती है?

अब यदि हम यह देखें कि कोई स्टार्टअप कंपनी किस तरह से काम करती है या फिर इसका कॉन्सेप्ट क्या होता है तो वह भी बहुत सरल है लेकिन लम्बा है। कहने का अर्थ यह हुआ कि जो भी स्टार्टअप कंपनी होती है उसका काम करने का तरीका बहुत ही सरल होता है लेकिन यह काम बहुत ज्यादा होता है। उदाहरण के तौर पर आप किसी बड़ी कंपनी में काम करते हैं तो वहां पर आपका काम करने के लिए अन्य बहुत से कर्मचारी हो सकते हैं जिस कारण आपके ऊपर काम का दबाव नहीं रहता है जबकि स्टार्टअप के साथ ऐसा नहीं है।

यदि आप स्टार्टअप में हैं या उसमे काम कर रहे हैं तो आपके ऊपर काम का दबाव रहता है। आपके साथ अन्य तरह के कर्मचारी नहीं होते हैं जो आपका काम कर सकें या आपकी सहायता कर सकें। ऐसे में आपको अपना काम स्वयं ही करना होता है और इसके लिए आप किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर नहीं कर सकते हैं। यही स्टार्टअप के काम करने का फॉर्मूला होता है जो बहुत लोगों को पसंद नहीं आता है।

अब स्टार्टअप में कोई एक व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह उसे शुरू करता है जो किसी एक क्षेत्र से संबंधित होता है। उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति बच्चों से जुड़े कंटेंट को प्रकाशित करना चाहता है या माँ व बच्चे की देखभाल कैसे की जाए और बच्चों को कब किस समय क्या दिया जाए और क्या नहीं, इसके बारे में एक वेबसाइट या ऐप बनाना चाहता है तो वह उसके लिए एक स्टार्टअप को शुरू करता है। मूल रूप से यह एक ऐसी वेबसाइट या ऐप होगी जहाँ पर नयी माँ व छोटे बच्चों की देखभाल, शिक्षा, स्वास्थ्य, फैशन, इत्यादि के बारे में जानकारी दी गयी होगी।

अब उसे इसके लिए अपने यहाँ पर लेखकों, ग्राफ़िक्स डिज़ाइनर, वीडियो एडिटर, कंटेंट मैनेजर, ब्रांड मैनेजर इत्यादि को रखना होगा या फिर वह अपने धन के अनुसार यह निर्णय ले सकता है लेकिन उसे काम सुचारू रूप से रखना होगा। कहने का अर्थ यह हुआ कि वह स्टार्टअप किस तरह से शुरू होता है, किस स्तर पर शुरू होता है, उसमे कितनी फंडिंग की जाती है, यह सब कुछ उस व्यक्ति पर तथा स्थिति पर निर्भर करता है। तो इसी तरह से किसी स्टार्टअप के काम करने के पीछे उसको शुरू करने वाले व्यक्ति का निर्णय होता है।

क्या एक स्टार्टअप में एक से अधिक फाउंडर हो सकते हैं?

अवश्य, किसी भी स्टार्टअप में यह जरुरी नहीं कि उसे किसी एक ने ही शुरू किया हो। यदि आप आज के समय की बड़ी बड़ी कंपनी के इतिहास को जाकर पढ़ेंगे तो पाएंगे कि उन्हें भी किसी एक व्यक्ति ने नहीं शुरू किया था बल्कि उनके फाउंडर दो या दो से अधिक लोग होते हैं। हालाँकि समय के साथ साथ उसमे अधिकतर एक ही मालिक देखने को मिलता है क्योंकि परिस्थितियां कब बदल जाती है, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। साथ ही इसमें किस व्यक्ति ने कितनी सांझेदारी की है और किसका क्या पद है, यह भी निर्भर करता है।

तो मुख्य मुद्दे की बात यह है कि किसी भी स्टार्टअप कंपनी में एक या एक से अधिक कितने भी फाउंडर हो सकते हैं। यह सांझेदारी में भी शुरू किया जा सकता है जैसे कि किसी स्टार्टअप में किसी फाउंडर की इतनी हिस्सेदारी है तो दूसरे की इतनी और तीसरे की इतनी इत्यादि। इसी हिसाब से ही आगे चलकर वह स्टार्टअप जितनी कमाई करता है, उसका बंटवारा होता है।

स्टार्टअप की चुनौतियाँ (Startup company challenges in Hindi)

अब आपको स्टार्टअप कंपनी शुरू करने के अंतर्गत होने वाली चुनौतियों के बारे में भी जानकारी ले लेनी चाहिए ताकि इसमें किसी तरह की कमी ना रहने पाए। तो स्टार्टअप शुरू करना कोई सरल निर्णय नहीं होता है और ना ही यह दो दिन का या पलक झपकते का काम है। इसके लिए वर्षों की या महीनो की मेहनत लगती है और साथ ही बहुत सारी रिसर्च करनी होती (What are the challenges faced by startups in Hindi) है।

इस तरह से जो व्यक्ति किसी भी स्टार्टअप कंपनी को शुरू करता है तो उसे कई तरह की चुनौतियों का सामना करना होता है। अब वह चुनौतियाँ हर व्यक्ति की स्थिति और उसके स्टार्टअप के प्रकार के अनुसार भिन्न भिन्न हो सकती है लेकिन यहाँ हम कुछ प्रमुख चुनौतियों को आपके सामने रखने जा रहे (Startup company issues in Hindi) हैं।

  • जब किसी व्यक्ति के द्वारा स्टार्टअप को शुरू किया जाता है तो उसे अपनी आय के लिए कहीं और निर्भर रहना होता है। कहने का अर्थ यह हुआ कि वह शुरुआत में ही स्टार्टअप से पैसा नहीं कमा सकता है। ऐसे में उसे अपनी रोजी रोटी चलाये रखने के लिए कहीं और से पैसे कमाने की जरुरत होती (What are the problems faced by startups in India in Hindi) है।
  • इसी के साथ ही उस व्यक्ति को अकेले ही अपने दम पर एक नया आईडिया निकालना होता है जो दूसरों से भिन्न हो ताकि वह एक नयी चीज़ लोगों को प्रदान कर सके।
  • इसके लिए व्यक्ति विशेष को अपने स्टार्टअप पर बहुत ज्यादा रिसर्च व अध्ययन करना होता है और इसमें शायद ही उसका कोई साथ देता है क्योंकि सभी के अपने अपने निहितार्थ होते हैं। यदि उसका कोई साथ देता है तो निश्चित तौर पर वह उस स्टार्टअप कंपनी में अपना हिस्सा मांगता है।
  • इसमें उस व्यक्ति को अपना बहुत सा समय स्टार्टअप को देना होता है और यह समय कभी समाप्त ही नहीं होता है। एक तरह से कहा जाए तो उसे दिन रात इसी में ही लगे रहना होता है।
  • अब जो व्यक्ति नौकरी करता है या जो व्यापार करता है वह तो एक निश्चित अवधि के बाद फ्री हो जाता है या फिर शनिवार या रविवार के दिन को आनंद के साथ व्यतीत करता है लेकिन जो व्यक्ति स्टार्टअप में काम करता है, उसके लिए हर दिन, हर घंटा एक जैसा ही होता है।
  • स्टार्टअप में व्यक्ति शुरुआत में कुछ कमाता तो नहीं है लेकिन उसे स्टार्टअप को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए लोगों को काम पर रखने की जरुरत होती है। ऐसे में उसे उन व्यक्तियों को वेतन के रूप में भुगतान करना होता है।
  • स्टार्टअप में काम करने के लिए उसे लोगों को ढूंढने या अपने यहाँ पर काम पर रखने के लिए भी बहुत परिश्रम करना होता है क्योंकि लोग जल्दी से किसी स्टार्टअप में काम नहीं करते हैं या जो स्टार्टअप थोड़ी आगे बढ़ चुकी है, उसमे जाना पसंद करते हैं।
  • जिस क्षेत्र में उस व्यक्ति के द्वारा अपनी स्टार्टअप कंपनी शुरू की गयी है, उसे उसके सामानांतर अन्य बड़ी कंपनियों से भी जूझना पड़ता है।
  • इसी के साथ ही उसे यह भी डर लगा रहता है कि कोई अन्य व्यक्ति उसके जैसे ही स्टार्टअप कंपनी को ना शुरू कर दे जिस कारण प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ जाती है।
  • आज के समय में हर क्षेत्र में बहुत प्रतिस्पर्धा है और सभी एक दूसरे से आगे निकलने के लिए हाथ पैर मार रहे हैं जिस कारण स्टार्टअप को शुरू करना और उसे बड़ा बनाना बहुत ही मुश्किल सिद्ध होता जा रहा है।

ऐसी ही कई अन्य तरह की चुनौतियाँ भी आती हैं जिसका एक व्यक्ति सामना कर रहा होता है। तभी हमने आपको पहले ही कहा कि स्टार्टअप शुरू करना अवश्य ही रोमांचक लग सकता है लेकिन सरल बिल्कुल भी नहीं (What problems do startups face in Hindi) है। इसके लिए किसी भी व्यक्ति को बहुत ज्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता होती है।

भारत में स्टार्टअप कंपनी कैसे शुरू करें? (Business startup kaise shuru kare)

अब यदि आपके दिमाग में किसी बात को लेकर आईडिया है या आप किसी क्षेत्र में अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करने को इच्छुक हैं तो इसके लिए भी एक निश्चित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा जाए तो आपके लिए ही सही (Startup company kaise shuru kare) रहेगा। कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि आप बिना किसी योजना के ही अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करने का सोच रहे हैं तो बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। आइये जाने इसके लिए आपको क्या कुछ करने की जरुरत होगी।

  • यदि आप स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं तो सबसे पहले यह देखें कि आप किस क्षेत्र में अपनी स्टार्टअप कंपनी शुरू करना चाहते हैं और उसमे क्या कुछ काम पहले से ही हो चुका है। क्या आपका आईडिया दूसरों से भिन्न है और लोगों को यह आकर्षित कर सकता है या नहीं।
  • एक तरह से आपको पहले से ही पूरी योजना बनानी होगी और उसी योजना के तहत ही आगे बढ़ना होगा। बिना मुहं पैर के बनायी गयी योजना बिल्कुल भी सफल नहीं होगी और आप औधे मुहं गिरेंगे वो अलग।
  • इसी के साथ ही आप यह भी देखें कि उस स्टार्टअप कंपनी को शुरू करने और उसे जारी रखने में पैसा कहाँ से आएगा। हर स्टार्टअप कंपनी पैसा मांगती है और इसके लिए आपको पहले से ही सोच समझ कर तैयारी करनी होगी।
  • आपके यहाँ काम करने के लिए जो कर्मचारी रखे जाएंगे, उनके बारे में भी सोचना होगा क्योंकि यदि आपने गलत निर्णय लिया या गलत कर्मचारी को रख लिया तो यह आपके स्टार्टअप को ही नुकसान पहुंचाएगा।
  • आपको अपने स्टार्टअप के लिए एक अच्छा सा नाम सोच कर रखना होगा क्योंकि किसी भी स्टार्टअप कंपनी के लिए उसका नाम बहुत ही मायने रखता है जो उसकी मुख्य पहचान होता है।
  • अब जब आपने अपनी स्टार्टअप कंपनी का नाम रख लिया है तो उसका पंजीकरण भी करवा लेना चाहिए। यदि आप उसका समय रहते पंजीकरण नहीं करवाते हैं तो उसी नाम से कोई अन्य व्यक्ति स्टार्टअप को शुरू कर सकता है।
  • इसी के साथ ही आपको स्टार्टअप को जारी रखने के लिए निवेश करवाने की भी जरुरत होगी। यदि आपके पास इतना पैसा है तो बहुत अच्छी बात है लेकिन यदि आप निवेशकों को उसके लिए खींच लाये तो इससे आपके स्टार्टअप को तेज गति से आगे बढ़ने में बहुत मदद मिलेगी।

स्टार्टअप कंपनी पैसे कैसे कमाती है?

अब हरेक स्टार्टअप कंपनी की स्थिति अलग होती है। कोई उत्पाद बनाने का काम करती है तो कोई सर्विस देने का। अब जो स्टार्टअप कंपनी उत्पाद बनाने का काम कर रही है तो उसका तो सीधा सा कॉन्सेप्ट हुआ और वो है उत्पाद को बेच कर पैसा कमाना। किन्तु शुरुआत में अपने उत्पाद बेचना भी मुश्किल भरा हो सकता है क्योंकि कोई भी व्यक्ति नयी कंपनी के उत्पाद खरीदने से हिचकिचाता है। ऐसे में आपको कई तरह की योजना बनानी होगी ताकि वह बिक सके।

इसके लिए आपको दुकानदारों से संपर्क करना होगा और उन्हें आकर्षक मार्जिन देना होगा, शुरूआती ग्राहकों को डिस्काउंट या मुफ्त में देना होगा इत्यादि। इस तरह से आप कई तरह की योजनाओं के जरिये अपने उत्पाद की बिक्री को बढाकर पैसा कमा सकते हैं। वहीं यदि आप किसी तरह की सेवा देते हैं तो उसमे पैसे कमाने के जरिये भिन्न भिन्न होते हैं। इसमें यह भी निर्भर करता है कि आप किस तरह की सेवा दे रहे हैं।

अब यदि आप हेयर सैलून, ब्यूटी पार्लर जैसी सेवा दे रहे हैं तो आपको बस काम करना है और उसका पैसा आपको मिल जाएगा। वहीं यदि आप कोई जानकारी देने या ऑनलाइन सेवा दे रहे हैं तो आपको दूसरों की ऐड देनी होगी, पेड ऐड लानी होगी, adsense का इस्तेमाल करना होगा इत्यादि। इसमें भी कई तरह के साधन होते हैं जिनके जरिये आप पैसा कमा सकते हैं।

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स्टार्टअप कंपनी क्या है – Related FAQs 

प्रश्न: स्टार्ट अप का मतलब क्या होता है?

उत्तर: स्टार्टअप का मतलब स्टार्ट मतलब शुरू और अप मतलब ऊपर लेकर जाना अर्थात किसी काम को शुरू करके उसको ऊपर उठाना

प्रश्न: अपना खुद का स्टार्टअप कैसे शुरू करें?

उत्तर: इसके बारे में संपूर्ण जानकारी को हमने इस लेख के माध्यम से देने का प्रयास किया है जो आपको पढ़ना चाहिए।

प्रश्न: स्टार्टअप कैसे काम करता है?

उत्तर: इसके बारे में जानकारी आपको ऊपर के लेख में मिल जायेगी।

प्रश्न: स्टार्टअप कितने समय तक चलते हैं?

उत्तर: स्टार्टअप कंपनी को चलाने में समय और मेहनत दोनो की ही जरूरत होती है।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने स्टार्टअप कंपनी के बारे में जानकारी प्राप्त कर ली है। आपने जाना कि स्टार्टअप कंपनी क्या है यह कैसे काम करती है स्टार्टअप कंपनी की चुनौतियां क्या हैं और स्टार्टअप कंपनी शुरू करने के तरीके इत्यादि। आशा है कि जो जानकारी लेने के लिए आप इस लेख पर आए थे वह आपको मिल गई होगी। यदि आपके मन में कोई शंका शेष रह गई है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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