सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम 2020: मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना क्या है, Soil Health Card Yojana in hindi

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केंद्र सरकार किसानों की आय डबल यानी दुगुनी करना चाहती है। इसके लिए उसने किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इनमें से एक योजना है मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना। दोस्तों, क्या आप इस योजना के बारे में जानकारी रखते हैं? यदि नहीं तो भी चिंता की कोई बात नहीं। आज आपको इस पोस्ट के माध्यम से हम राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की जानकारी देंगे। आपको इस पोस्ट के हर बिंदु को बस ध्यान से पढ़ते जाना है। आइए शुरू करते हैं-

स्वस्थ मृदा का क्या अर्थ है? What does healthy soil mean?

इससे पहले कि हम आपको मृदा स्वास्थ्य कार्ड की जानकारी दें, आइए जानते हैं कि स्वस्थ मृदा का क्या अर्थ है। साथियों, इसका मतलब है कि मिट्टी में पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्व मसलन कार्बनिक पदार्थ, मुख्य और सूक्ष्म तत्वों की भरपूर मात्रा और नमी रोकने की क्षमता हो। इससे अधिक फसल उत्पादन संभव होता है।

मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना क्या है? What is Soil Health Card Scheme?

सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम 2020: मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना क्या है, Soil Health Card Yojana in hindi

मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना के तहत किसानों को एक हेल्थ कार्ड दिया जाएगा। इसमें किसान जमीन की मिट्टी की जानकारी इस कार्ड में दी जाएगी, ताकि वह इसके आधार पर खेती से बेहतर फसल तैयार कर सके। दरअसल, मिट्टी की जांच करने से खेती के खर्च में कमी आती है, क्योंकि जांच के बाद सही मात्रा में उर्वरक दिए जाते हैं। इस तरह उपज बढ़ती है। बेहतर खेती से किसानों की आय भी बढ़ती है। गांव स्तर पर भी कृषि उद्यमियों को मिट्टी की जांच करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आपको यह भी बता दें कि योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की है।

योजना का नामसॉइल हेल्थ कार्ड योजना
किसके द्वारा शुरू की गयीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी
कब शुरू की गयीवर्ष 2015
उद्देश्यदेश के किसानो को लाभ पहुँचाना
विभागकृषि और किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार
ऑफिसियल वेबसाइटhttps://soilhealth.dac.gov.in/

मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना की शुरुआत कब की गई – When did the plan start

आज से चार साल यानी पहले 19 फरवरी, 2015 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में राष्ट्रीय मृदा सेहत कार्ड योजना का शुभारंभ किया गया। इसका मुख्य लक्ष्य देश भर के किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए जाने में राज्यों का सहयोग करना है। यानी देश के किसानों की जमीन की मिट्टी की गुणवत्ता का अध्ययन करके अच्छी फसल प्राप्त करने में मदद दिए जाना है। इस योजना की थीम रखी गई थी स्वस्थ धरा, खेत हरा।

मृदा परीक्षण के तहत किन तत्वों की जांच होती है? Which elements are tested under soil testing?

मृदा स्वास्थ्य कार्ड दरअसल मृदा परीक्षण जांच रिपोर्ट है। इसे किसानों को हर जोत के लिए दिया जाता है। इसमें 12 पैरामीटर की जानकारी होती है। जैसे पीएच, ईसी, जीवांश कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फेट, पोटाश, गंधक, जस्ता, लोहा, तांबा, मैगनीज और बोरोन। इन जांच के बाद ही रिपोर्ट मुफ्त किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। योजना के तहत अब 3.33 करोड़ सैंपल की जांच की जा रही है। पहले यह मात्रा केवल 1.78 करोड़ ही थी।

मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड पर कौन-कौन सी जानकारी दी जाती है? What information is given on the card?

जैसा कि हम बता चुके हैं कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिट्टी परीक्षण का रिपोर्ट कार्ड है। यानी कि इस कार्ड पर किसानों के पास उनकी भूमि की पूरी रिपोर्ट होगी। जैसे कि उस मिट्टी में कौन कौन से तत्व विद्यमान हैं। साथ ही उस मिट्टी में कौन-कौन से तत्त्व नहीं हैं। कौन से तत्व की मिट्टी को जरूरत है आदि। एक नज़र में कार्ड पर बिंदुओं की जानकारी रहती है-

  • मिट्टी की सेहत
  • किसान के खेत की उत्पादक क्षमता
  • मिट्टी में पोषक तत्वों की मौजूदगी और कमी
  • खेत में पानी की मात्रा यानी नमी
  • मिट्टी में अन्य पोषक तत्व
  • खेतों की गुणवत्ता सुधारने के लिए दिशा निर्देश

मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना के तहत कुल कितना बजट रखा गया है? What is the total budget under the scheme?

अब आपके दिमाग में सवाल उठ रहा होगा कि मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना के तहत कितना बजट है। आपको बता दें कि इस योजना के तहत 568 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था, लेकिन 751.42 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। योजना के तहत वर्ष्ज्ञघ् 2014-15 में 23.89, 2015-16 में 96.47, 2016-17 में 133.66, 2017-18 में 152.76, 2018-19 में 237.40, जबकि 2019-20 में 107.24 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

अब तक 429 स्थायी मृदा जांच प्रयोगशालाएं, 102 नई चलती मृदा जांच प्रयोगशालाएं और 8752 लघु जांच प्रयोगशालाएं मुहैया कराई गई हैं। 1562 जांच प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी गई है और 800 प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया गया है। केंद्र सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण के पहले चरण में यानी 2015 से 2017 के बीच 10.74 कार्ड बांटे हैं। वहीं, इस योजना के दूसरे चरण में वर्ष 2017 से लेकर 2019 तक 11.69 करोड़ कार्ड वितरित किए गए हैं।

खाद के उपयोग से मिट्टी का संतुलन बनाने की कोशिश – Trying to balance the soil using manure

केंद्र सरकार हर तीन साल में किसानों को यह कार्ड देती है। कार्ड किसानों को उनके खेतों की गुणवत्ता के अनुसार दिया जाता है। यानी कि अगर किसान मिट्टी की क्वालिटी के हिसाब से फसल लगाएंगे तो इसकी उत्पादक क्षमता बढ़ेगी। और इसके साथ ही किसानों की आय में भी बढ़ोत्तरी होगी। खाद के उपयोग से मिट्टी के आधार और संतुलन को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों को कम कीमत में अधिक पैदावार मिल सकेगी।

देश के सभी किसान इस योजना में शामिल हैं? Are all the farmers of the country involved in this scheme?

जैसा कि हम आपको ऊपर बता चुके हैं कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना मुख्य मकसद देश के किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच करके मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान करना। है, आपको बता दें कि देश के सभी किसानों को इस योजना में शामिल किया गया है। सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड का लाभ देश के 14 करोड़ किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यानी कि बहुत बड़े पैमाने पर किसानों को उनके खेतों की मिट्टी के अनुसार फसल लगाने का सुझाव दिया जाएगा।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड देने की प्रक्रिया क्या है? What is the procedure for giving soil health card?

अब हम आपको बताएंगे कि मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना के तहत कार्ड कैसे दिया जाता है। इसे क्रमवार जान लेते हैं-

  • सबसे पहले अधिकारी आपके खेत की मिट्टी का सैंपल लेंगे।
  • इसके लिए जिस खेत या क्षेत्र का सैंपल लेना है, उसमें आठ या दस स्थानों पर करीब 15 सेंटीमीटर गहराई का एक गड्ढा खोद लिया जाता है। इसकी दीवार से करीब ढाई सेंटीमीटर की परत से नीचे की मिट्टी जांच के लिए ली जाती है।
  • इस मिट्टी को साफ कपड़े, कागज या बर्तन में डालकर अच्छी तरह मिला लिया जाता है।
    इसके बाद मिट्टी का ढेर बनाया जाता है और उसके चार भाग किए जाते हैं। आमने-सामने के दो भाग फेंककर दो भाग फिर अच्छी तरह मिलाए जाते हैं। फिर ढेर बनाए जाते हैं और इस प्रक्रिया को दोहराया जाता है।
  • यह प्रक्रिया तब तक की जाती है, जब तक कि मिट्टी आधा किलो न रह जाए। इसके बाद मिट्टी को साफ थैली में भर दिया जाता है।
  • इसके बाद दो लेबल लेकर इनमें किसान का नाम, खेत की पहचान, खसरा संख्या, आधार, मोबाइल नंबर, क्षेत्रफल, ब्लॉक का नाम, तहसील और जिले का नाम लिख लिया जाता है।
  • एक लेबल थैली के भीतर और एक लेबल इसके ऊपर चस्पा कर दिया जाता है।
  • सैंपल भेजते समय यह भी अवश्य अंकित किया जाता है कि में खेत में कौन सी फसल ली जानी चाहिए। उसी के अनुसार मिट्टी का संतुलन बनाए रखने के लिए उर्वरक की संस्तुति की जाती है।
  • इसके बाद मिट्टी को टेस्ट के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।
  • प्रयोगशाला में विशेषज्ञ मिट्टी की जांच करते हैं और इससे जुड़ी सारी जानकारियां नोट करते हैं।
  • इसके बाद विशेषज्ञ मिट्टी के सैंपल की खूबी और कमी की एक लिस्ट तैयार करते हैं।
  • यदि विशेषज्ञों को मिट्टी में कुछ कमी दिखती है तो उसमें सुधार के लिए सुझाव देते हैं और लिस्ट बनाते हैं।
  • इसके बाद इस रिपोर्ट को एक-एक करके किसान के नाम के साथ ऑनलाइन अपलोड किया जाता है।
  • यहां से किसान अपनी मिट्टी की रिपोर्ट देख सकते हैं। इसके साथ ही उनके मोबाइल पर भी यह ब्योरा भेज दिया जाता है।

मिट्टी की जांच किस समय होती है?

खरीफ, रबी एवं जायद की फसलों की बुवाई से खेत खाली होते हैं। ऐन इसी वक्त पर मिट्टी का सैंपल लिया जाता है। क्योंकि बाकी समय खेत में फसल होने की वजह से सैंपल लिया जाना बेहद मुश्किल होता है। आपको यह भी बता दें कि मिट्टी का सैंपल ठीक तरह से लिया जाना बेहद आवश्यक है। क्योंकि यह जमीन के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधि सैंपल होता है। इसकी ही जांच करके मिट्टी के लिए उर्वरकों का निर्धारण किया जाता है। यह जानकारी भी आपके लिए बेहद जरूरी है कि मिट्टी की जांच के लिए खेत के विभिन्न हिस्सों से करीब आधा किलो मिट्टी का नमूना इकट्ठा किया जाता है।

छह फसलों के लिए दो तरह के उर्वरकों की सिफारिश

मृदा स्वास्थ्य कार्ड में छह फसलों के लिए दो तरह के उर्वरकों की सिफारिश की गई है। इसमें जैविक खाद भी शामिल है। अतिरिक्त फसल के लिए भी किसानों की ओर से सुझाव मांगे जा सकते हैं। किसानों को इस योजना के बारे में जानकारी हो, इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ ही प्रदर्शनी और किसान मेलों का भी आयोजन किया जाता है। योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 8898 किसान प्रशिक्षण और 7425 किसान मेलों को को स्वीकृति दी गई है।

आदर्श ग्राम विकास प्रोजेक्ट के तहत भी लिए जा रहे सैंपल

दोस्तों, आपको बता दें कि 2019-20 के दौरान एक आदर्श ग्राम विकास पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गयाघ् है। इसके तहत खेतों से सैंपल लिए गए हैं। इसके अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक से एक गांव को लिया जाता है। उसें मिट्टी के सैंपल जमा किए जाते हैं और उनकी जांच होती है। इस तरह हर गांव में एक हेक्टेयर रकबे की जमीन से सैंपल लिए जाते हैं। किसान अपने सैंपल के बारे में हर तरह की जानकारी www.soilhealth.gov.in से ले सकते हैं।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लिए कैसे आवेदन करें? How to apply for soil health card?

  • सबसे पहले विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://soilhealth.dac.gov.in/ पर जाएं। आप यहाँ क्लीक करके डायरेक्ट जा सकतें हैं।
  • होम पेज पर आपको login के option पर click करना होगा।

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  • इसके बाद आपके सामने आगे का पेज खुलेगा। इस पेज पर आपको अपने राज्य का चयन करना होगा।
  • राज्य का चयन करने के बाद आपको continue पर click करना होगा। इसके बाद एक और पेज आपके सामने खुलेगा।
  • इसके पश्चात पेज पर आपके सामने login का form खुल जाएगा।
  • इसमें new registration के option पर click करके आपके सामने registration form खुल जाएगा।

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  • इस registration form में आपको सारी जानकारी भरनी होगी। जैसे- user organisation, language, user details, user login details आदि जानकारी भरनी होगी।

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  • सभी जानकारी भरने के बाद आपको submit पर click करना होगा।
  • registration के बाद आपको login करना होगा। होम पेज पर login form खोलना होगा।
  • इस login form में आपको अपना user name और passwaord भरना होगा।
  • इस तरह आप मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

तो दोस्तों, इस पोस्ट के जरिये हमने आपको मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में जानकारी दी। यदि आप ऐसे ही किसी अन्य विषय पर विस्तृत जानकारी चाहते हैं तो हमसे बता सकते हैं। इसके लिए आपको नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स पर कमेंट करना होगा। आपके किसी भी सुझाव या प्रतिक्रिया का हमें इंतजार है। तो देर किस बात की, हमें लिख भेजें। ।।धन्यवाद।।

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