[धारा 278] धूम्रपान की FIR कहाँ दर्ज कराएं? धूम्रपान पर सजा का प्रावधान

धूम्रपान एक ऐसी आदत है, जो लोगों को भीतर से खोखला बना रही है। उन्हें फेफड़े एवं जबड़े का कैंसर अता फरमा रही है। इसके बावजूद धूम्रपान करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं है। यदि आप स्वयं धूम्रपान नहीं करते तो भी आपके इर्द-गिर्द धूम्रपान करने वाले लोग आपको भी जहरीले धुएं का शिकार बनाकर आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। वह धुएं के छल्ले बनाकर उड़ाना अपनी शान समझते हैं।

सरकार की ओर से तंबाकू उत्पादों के सेवन को प्रतिबंधित करने के लिए सिगरेट आदि के पैकेज पर कैंसर जैसे रोग होने की बड़ी सी चेतावनी छापी जा रही है, इसके बावजूद लोग संभल नहीं रहे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धुएं के ये छल्ले उड़ाने के लिए एफआईआर भी हो सकती है?

जी हां, इसके लिए भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी 1860 के तहत प्रावधान किया गया है। इसके तहत एफआईआर के साथ ही इस अपराध के लिए दंड का भी प्रावधान किया गया है। आज इस पोस्ट में हम आपको इसी संबंध में विस्तार से जानकारी देंगे। आइए, शुरू करते हैं-

धूम्रपान के लिए आईपीसी की धारा 278 के तहत एफआईआर दर्ज हो सकती है?

साथियों, आपको बता दें कि भारतीय दंड संहिता (Indian penal code) यानी आईपीसी (IPC) 1860 की धारा 278 के तहत धूम्रपान के लिए एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। इसी धारा के तहत धूम्रपान को परिभाषित किया गया है। साथ ही धूम्रपान को अपराध मानते हुए इसके लिए दंड का प्रावधान किया गया है।

दोस्तों, आपको बता दें कि इस धारा के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति दंडित किया जाएगा, यदि वह निम्न कार्यों में संलग्न है-

  • वायुमंडल को प्रदूषित करना।
  • वायुमंडल अथवा हवा को इस प्रकार प्रदूषित किया जाना कि वह जनसाधारण के लिए नुकसानदायक हो।
  • सार्वजनिक स्थानों जैसे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, दुकानों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, सिनेमाघरों, पार्कों बस-स्टाॅप एवं रेलवे स्टेशन आदि पर धूम्रपान करना।

धूम्रपान अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय [Smoking offense non-cognizable and bailable]

मित्रों, आपको बता दें कि यह अपराध संज्ञेय नहीं है। धूम्रपान करने पर जेल भेजे जाने का प्रावधान नहीं किया गया है। यह अपराध असंज्ञेय है। इससे स्पष्ट है कि यह अपराध जमानतीय है। यानी इस अपराध में जमानत हासिल की जा सकती है। यह अलग बात है कि लोग धूम्रपान को बहुत हल्के में लेते हैं।

धूम्रपान की FIR कहाँ दर्ज कराएं? धूम्रपान पर सजा का प्रावधान

ज्यादातर लोग इस संबंध में शिकायत करने की भी जहमत नहीं उठाते। वे धूम्रपान को लोगों की एक आदत मानकर नजरअंदाज करते हैं। यदि आप मानते हैं कि यह सच है कि यह आदत है तो निश्चित रूप से आप यह भी स्वीकारने में कोई गुरेज नहीं करेंगे कि यह एक बुरी आदत है।

धूम्रपान के लिए दंड और जुर्माना क्या है?

किसी भी व्यक्ति को मामले में दोषी पाए जाने तक पांच सौ रूपये तक के जुर्माने का दंड लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि आपको बता दें कि जुर्माना वसूलने के लिए भी विशेष नियम निर्धारित किए गए हैं। पुलिस कांस्टेबल तभी जुर्माना वसूल सकते हैं, जब उनके साथ इंस्पेक्टर से बड़े स्तर का अफसर हो।

इसके अतिरिक्त राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर, डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी के अफसर, पंचायत राज संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं सीएमओ (CMO) यानी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी कुछ क्षेत्रों में जुर्माना लगाने का अधिकार है। इसके अलावा लोगों का यह अधिकार है कि वे जुर्माना लगाए जाने पर चालान की काॅपी मांग सकते हैं।

कोर्ट की ओर से राज्यों को धूम्रपान पर पूर्ण रोक के निर्देश दिए गए हैं-

दोस्तों, आपको बता दें कि कोर्ट की ओर से राज्य सरकारों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 (1) (क) के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। ऐसा इसलिए ताकि धूम्रपान से होने वाले नुकसानों से लोगों को बचाया जा सके।

यह तो आप जानते ही हैं कि यदि कोई स्वयं धूम्रपान नहीं करता, लेकिन परोक्ष रूप से वह किसी अन्य धूम्रपान कर रहे व्यक्ति की वजह से धुएं का शिकार होता है, वह भी उसके लिए नुकसानदायक होता है।

सिगरेट एंड अदर टोबैको प्राॅडक्ट्स एक्ट के सेक्शन-4 में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक –

दोस्तों, आपको बता दें कि सिगरेट एंड अदर टोबैको प्राॅडक्ट्स एक्ट (cigarette and other tobacco products act) यानी सीओटीपीए (COTPA) की धारा यानी सेक्शन-4 में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान की रोक लगाई गई है। इसके अंतर्गत कई प्रावधान किए गए हैं। जैसे-

  1. सार्वजनिक स्थानों पर जगह-जगह नो स्मोकिंग एरिया (No smoking area) का बोर्ड लगा हो।
  2. जगह-जगह नो स्मोकिंग एरिया के 60 गुना 30 सेंटीमीटर के चित्र लगे हों।
  3. नो स्मोकिंग के बोर्ड पर उस अधिकारी का भी नाम हो, जहां इस संबंध में शिकायत की जा सके।

किस स्थिति में सेक्शन-4 का उल्लंघन माना जाएगा

अब हम आपको बताएंगे कि किन स्थितियों में सीओटीपीए की सेक्शन-4 का उल्लंघन माना जाएगा-

  1. यदि सार्वजनिक स्थानों पर नो स्मोकिंग के संकेतक चित्र न लगाए गए हों।
  2. सार्वजनिक स्थानों पर ऐश-ट्रे, लाइटर आदि रखा हो।
  3. स्मोकिंग एरिया एंट्री गेट के पास ही हो।
  4. स्मोकिंग एरिया में अन्य सुविधाएं दी जा रही हों।
  5. स्मोकिंग एरिया में सही एयर फ्लो (air flow) न हो।
  6. यदि सक्षम अधिकारी का नाम नो स्मोकिंग बोर्ड पर न लिखा हो।

दोस्तों, आपको बता दें कि COTPA की सेक्शन-4 के उल्लंघन पर 200 रूपये का जुर्माना हो सकता है। क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (criminal procedure code) यानी सीपीसी (CPC) के तहत यदि कोई व्यक्ति जुर्माना देने के लिए तैयार न हो तो उसके खिलाफ मुकदमा भी चलाया जा सकता है। यह तो हम आपको बता ही चुके हैं कि यह अपराध असंज्ञेय है, एवं ऐसे अपराधों में जमानत दे दी जाती है।

धूम्रपान से हर साल आठ लाख लोगों की मौत

साथियों, धूम्रपान करना किस कदर खतरनाक है, यह इसी बात से समझा जा सकता है कि इससे अपने देश भारत में हर साल आठ लाख लोगों की मौत तंबाकू एवं इससे जुड़े उत्पाद के सेवन से हो जाती है। इस पर रोक लगाने एवं लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष नो टोबैको डे (No tobacco day) यानी तंबाकू निषेध दिवस का आयोजन किया जाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (ministry health and family welfare) के साथ ही कई गैर सरकारी संस्थाएं यानी एनजीओ (NGO) इस अवसर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। हालांकि, अभी भी इस संबंध में बड़ी संख्या में जन जागरूकता की आवश्यकता है।

46 साल पहले धूम्रपान को हानिकारक घोषित किया गया था

दोस्तों, आपको बता दें कि 1975 में यानी आज से 46 साल पहले सिगरेट का उत्पादन, पूर्ति, वितरण, एवं नियमन अधिनियम आया। इसके पश्चात सिगरेट के पैकेट पर यह लिखना आवश्यक कर दिया गया कि सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके पश्चात आज से 18 वर्ष पूर्व सन 2003 में सिगरेट एवं तंबाकू उत्पाद विज्ञान का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय एवं वितरण, विनिमय अधिनियम लाया गया।

इसका नाम संक्षेप में सीओटीपीए यानी सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट एक्ट-2003 लिखा गया। आपको बता दें कि यह कानून जम्मू-कश्मीर समेत संपूर्ण देश में लागू किया गया। इसके पश्चात अगले ही साल सन 2004 में छात्रों में धूम्रपान की प्रवृत्ति पर रोक के मद्देनजर शिक्षण संस्थानों के सौ गज के दायरे में सिगरेट की बिक्री पर रोक लगाई गई।

इसके बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर दो अक्तूबर, सन 2008 को एक नया कानून आया। इसका नाम था- सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध कानून। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर कानूनी रूप से रोक लगा दी गई। इसके साथ ही लोगों को धूम्रपान से दूर रखने के लिए सीओटीपीए के सेक्शन-7 के अनुसार सिगरेट के पैकेट के ऊपर 40 प्रतिशत स्थान पर दो भाषाओं में फोटो सहित चेतावनी भी आवश्यक कर दी गई।

धूम्रपान के नजरिये से सार्वजनिक स्थानों का दायरा इस प्रकार से है

मित्रों, अब हम आपको समझाएंगे कि सार्वजनिक स्थानों से क्या अर्थ है। नाम से ही स्पष्ट है कि इसके तहत वे स्थान आते हैं, जहां सर्व जन अर्थात सभी लोगों के लिए हैं, जहां सभी आते-जाते हैं।

जैसे- सिनेमाहाॅल, अस्पताल, रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, आडिटोरियम, एयरपोर्ट, पब, सरकारी कार्यालय, लाइब्रेरी, कोर्ट, पोस्ट आफिस, मार्केट, शाॅपिंग माॅल, कैंटीन, रिफ्रेशमेंट रूम, बैंक्वेज हाॅल, काॅफी हाउस, डिस्को, स्कूल, पार्क, एम्यूजमेंट सेंटर आदि को शामिल किया गया है।

धूम्रपान पर रोक को सरकार ने भी उठाए हैं प्रभावी कदम

केंद्र सरकार की ओर से धूम्रपान पर प्रभावी रोक के लिए कई कदम उठाए गए हैं। रेलवे एक्ट 1989 के अंतर्गत ट्रेनों में धूम्रपान पर रोक लगा दी गई। इसी तरह तंबाकू उत्पादों के प्रचार प्रसार पर भी रोक लगाई गई।

धूम्रपान हेल्पलाइन नंबर [smoking helpline number] –

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 2009 में धूम्रपान कानून के उल्लंघन की शिकायतों को दर्ज करने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 1800110456 भी शुरू किया। हालांकि यह बात अलग है कि इस हेल्पलाइन का उपयोग किसी बड़े पैमाने पर नहीं किया जाता। आपको बता दें कि इसका कारण भी वहीं है कि लोगों ने दूसरों की इस आदत को स्वीकार लिया है। उन्हें इसमें अपराध जैसा कुछ नजर नहीं आता।

धूम्रपान को स्टेटस सिंबल मानने, तनाव दूर करने के लिए इस्तेमाल से बढ़़ रहे नुकसान

धूम्रपान को युवा पीढ़ी स्टेटस सिंबल की तरह इस्तेमाल करती है। उनकी नजर में यह ‘कूल’ है। धुएं के छल्ले बना पब में डांस करते युवा स्वयं को कूल समझते हैं। ऐसा नहीं कि उन्हें इसके खतरे का इल्म नहीं, लेकिन वे इसे दरकिनार कर इसके कश लगा नशे में झूमने को प्राथमिकता देते हैं।

इसके अलावा बहुत सारे लोग मानते हैं कि इस धूम्रपान से उनका तनाव दूर होता है। कई बार जरूरी मीटिंग से पहले, बड़े शो से पहले लोगों को लगातार धूम्रपान करते देखा जा सकता है। इसके पीछे वही सोच जिम्मेदार है कि धूम्रपान से तनाव दूर होता है।

नुकसान होने के बावजूद सरकार तंबाकू उत्पादों का उत्पादन बंद क्यों नहीं करती

साथियों, आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि तमाम नुकसान के बावजूद सरकार तंबाकू उत्पादों का उत्पादन बंद क्यों नहीं करती। दरअसल, ऐसा इसलिए है, क्योंकि ये उत्पाद सरकार के राजस्व (revenue) का बड़ा जरिया है। उसे इन उत्पादों से राजस्व की प्राप्ति करोड़ों में होती है।

आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि भरत तंबाकू आधारित उत्पादों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक एवं उपभोक्ता है। इससे बेशक कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, दिल के रोग समेत कई बीमारियां होती हैं। यहां तक दुनिया भर में तंबाकू के सेवन से होने वाली मौतों के छइे हिस्से का जिम्मेदार भी है।

लेकिन कमाई के चक्कर में सरकार इसके उत्पादन को बंद न कर इसके उपभोग को नियंत्रित एवं प्रतिबंधित करने का प्रयास करती है। शहरों में लोग पहले की अपेक्षा थोड़े संभले हैं, लेकिन खास तौर पर गांवों में आज भी धूम्रपान को लेकर जनजागरूकता का सर्वथा अभाव है।

बाॅलीवुड कलाकारों की लाइफ स्टाइल देती है धूम्रपान को बढ़ावा

मित्रों, ढेरों ऐसे बाॅलीवुड कलाकार हैं, जो चेन स्मोकर (chain smoker) हैं। इनकी लाइफ स्टाइल भी इनकें प्रशंसकों की जिंदगी को प्रभावित करती है। वे भी उसी को फाॅलो करते हुए धूम्रपान के शिकार हो जाते हैं। इस संबंध में सबसे बड़ा नाम शाहरूख खान का लिया जा सकता है।

शाहरूख खान की कामयाबी चमत्कृत करने वाली है। उन्होंने एक साधारण परिवार से आकर मुंबई बाॅलीवुड में कामयाबी की अनोखी कहानी गढ़ी। लेकिन यह हर कोई जानता है कि शाहरूख चेन स्मोकर हैं। उनकी कामयाबी से प्रभावित होकर उनकी सभी आदतों को अपनाने वाले उनकी स्मोकिंग की आदत को भी अपनाने में पीछे नहीं हटते।

धूम्रपान आईपीसी की किस धारा के तहत दंडनीय है?

धूम्रपान आईपीसी की धारा 278 के अंतर्गत दंडनीय है?

इस धारा के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करते पाए जाने पर कितनी सजा का प्रावधान है?

इस धारा के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करते पाए जाने पर 500 रूपये के जुर्माने का प्रावधान है।

क्या धूम्रपान करना एक संज्ञेय अपराध है?

धूम्रपान करना एक असंज्ञेय एवं जमानतीय अपराध है।

शिक्षण संस्थानों से कितनी दूरी के दायरे में धूम्रपान प्रतिबंधित है?

शिक्षण संस्थानों से सौ गज की दूरी के दायरे में धूम्रपान प्रतिबंधित है।

कोर्ट ने धूम्रपान के संबंध में राज्य सरकारों को क्या निर्देश दिए हैं?

कोर्ट ने धूम्रपान के संबंध में राज्य सरकारों को पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं।

दोस्तों, हमने आपको इस पोस्ट में बताया कि धूम्रपान करने पर आईपीसी की किस धारा के तहत एफआईआर दर्ज होती है। उम्मीद है कि यह पोस्ट आपके लिए बेहद उपयोगी रहेगी। यदि आप रोचक एवं जानकारीपरक विषयों पर हमसे ऐसे ही पोस्ट चाहते हैं तो नीचे दिए गए कमेंट बाॅक्स में कमेंट करके अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं। आपकी प्रतिक्रियाओं का हमें हमेशा की तरह इंतजार है। ।।धन्यवाद।।

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