स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? स्मार्ट मीटर के फायदे, रीडिंग, चेक बैलेंस

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इन दिनों मोबाइल फोन से लेकर शहर तक स्मार्ट हो रहे हैं, ऐसे में अब आपके घरों के बिजली के मीटरों के स्मार्ट होने की बारी है। जी हां, आपने सही सुना। अब पूरे देश में स्मार्ट मीटर लगाए जाने की तैयारी है। केंद्र के बिजली मंत्रालय ने मार्च, 2025 तक यह प्रक्रिया पूरी करने की बात कही है।

हमारे देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही इस संबंध में घोषणा कर चुकी हैं। विभिन्न राज्यों में वर्तमान में बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लग भी चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि यह स्मार्ट मीटर क्या हैं? एवं कैसे काम करते हैं? यदि नहीं जानते तो भी परेशान न हों। हम हैं न।

आज इस पोस्ट में हम आपको स्मार्ट मीटर के संबंध में संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। आपको बताएंगे कि स्मार्ट मीटर क्या होता है? यह परंपरागत मीटर से कैसे अलग है? स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? स्मार्ट मीटर से क्या क्या सुविधाएं होंगी? आदि आदि। आइए, शुरू करते हैं-

स्मार्ट मीटर क्या होता है? (What is smart meter?)

दोस्तों, सबसे पहले जान लेते हैं कि स्मार्ट मीटर क्या होता है? (What is smart meter?) आपको बता दें दोस्तों कि एक स्मार्ट मीटर (smart meter) एक इलेक्ट्रानिक डिवाइस (electronic device) है, जो बिजली (electricity) यानी ऊर्जा की खपत (energy consumption), वोल्टेज लेवल (voltage level), करेंट (current) एवं पावर फैक्टर (Power factor) आदि की इंफार्मेशन रिकार्ड (information record) करती है।

इस इंफार्मेशन को कस्टमर बिलिंग (customer billing) के लिए, उपभोक्ता एवं खपत व्यवहार consumer and (consumption behaviour) के साथ ही सिस्टम मानिटरिंग (system monitoring) के लिए बिजली सप्लायर कंपनी (electricity supplier company) को भेजा जाता है।

स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? स्मार्ट मीटर के फायदे, रीडिंग, चेक बैलेंस

प्रीपेड स्मार्ट मीटर क्या होता है? (What is prepaid smart meter)

दोस्तों, जब हम बात बिजली के संदर्भ में स्मार्ट मीटर की करते हैं तो उसका आशय प्रीपेड स्मार्ट (prepaid smart meter) मीटर से होता है। प्रीपेड (prepaid) शब्द का अर्थ ही है पूर्व में जिसका भुगतान हो चुका हो। यही इसकी सबसे खास बात है। यानी कि कोई भी बिजली उपभोक्ता स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली का इस्तेमाल रिचार्ज (recharge) कराने के बाद ही कर पाएगा।

इसे आप यूं भी कह सकते हैं कि कोई उपभोक्ता जितनी राशि का रिचार्ज कराएगा, वह केवल उतनी ही बिजली खर्च कर पाएगा।

स्मार्ट मीटर को एक उदाहरण के समझें (know about smart meter through an example)

मित्रों, हम आपको स्मार्ट मीटर (smart meter) को एक उदाहरण से समझाने का प्रयास करते हैं। स्मार्ट मीटर रिचार्ज (smart meter recharge) किए जाने की प्रक्रिया (process) ठीक वैसी ही है, जैसे कि आपको अपने मोबाइल के प्रीपेड सिम (mobile’s prepaid sim) का रिचार्ज खत्म हो जाने पर उसे रिचार्ज कराना पड़ता है।

यदि आप उसे रिचार्ज नहीं कराते तो न ही बात कर सकते हैं और न ही इंटरनेट चला सकते हैं। इसी प्रकार यदि स्मार्ट मीटर का रिचार्ज खत्म हो जाता है तो आपके घर की बिजली आटोमेटिकली कट (automatically cut) जाती है। यह जरूर है कि इस संबंध में एक मैसेज (message) भी आपके फोन पर आएगा।

इसके पश्चात यदि आप रिचार्ज कराते हैं तो आपके घर का मीटर फिर से दौड़ने लगेगा। स्मार्ट मीटर लग जाने के बाद बिजली के लिए उपभोक्ता अपनी मनपसंद कंपनी का चुनाव कर सकता है।

वही कंपनी उसे बिजली प्रदान करेगी। इस प्रकार एक कंपनी की सेवा ठीक न होने पर उसके पास दूसरी कंपनी से बिजली प्राप्त करने का भी विकल्प रहेगा।

स्मार्ट मीटर परंपरागत यानी पोस्ट पेड मीटर से किस प्रकार अलग है? (How smart meter is different from traditional meter?)

मित्रों, यह तो आप पोस्ट पेड (post paid) शब्द के इस्तेमाल से ही समझ गए होंगे। बिजली विभाग द्वारा पूर्व में पोस्ट पेड बिजली के मीटर ही लगाए गए थे। यानी माह में जितनी बिजली आप खर्च करते थे, उसका बिल जनरेट (bill generate) होता था।

इसके पश्चात बिजली विभाग (electricity department) ये बिल तमाम बिजली उपभोक्ताओं तक वितरित (distribute) कराता था। उपभोक्ता इसका आफलाइन अथवा आनलाइन भुगतान (offline or online payment) कर देते थे।

परंपरागत मीटर यानी पोस्ट पेड मीटर प्रणाली के क्या क्या नुकसान हैं? (What are the disadvantages of traditional meter system?)

कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है। पोस्ट पेड मीटर प्रणाली (post paid meter system) की खामियां ही स्मार्ट मीटर के सामने आने की वजहें बनीं। इसका सबसे बड़ा खामियाजा बिजली विभाग ही भुगतता था। बहुत से ऐसे उपभोक्ता होते थे, जो बिजली बिल का भुगतान (electricity bill payment) ही नहीं करते थे।

कई बार यह बिल बहुत बड़े हो जाते थे। इस तरह बिजली विभाग का बकाया बढ़ जाता था। बिजली काटने की नौबत आने पर ग्राहक कुछ राशि जमा करके कनेक्शन को बचाए रहता था। बकाएदारों से बिल वसूली (bill recovery) एक बड़ी चुनौती (big challenge) थी।

दूसरे, लोगों में पसंद की बिजली कंपनी चुनने का विकल्प नहीं था। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में बड़ी मात्रा में बिजली चोरी (electricity theft) की शिकायतें सामने आती थीं। उम्मीद की जा रही है कि प्री पेड स्मार्ट मीटर लग जाने के बाद इस तरह की दिक्कतों से आजादी मिलेगी।

स्मार्ट मीटर लगने से क्या क्या सुविधा होगी? (What facilities one will get through smart meter?)

साथियों, अब एक नजर डाल लेते हैं, स्मार्ट मीटर (smart meter) से होने वाले लाभों पर। ये इस प्रकार से हैं-

  • आप किसी भी कंपनी से बिजली का कनेक्शन ले सकते हैं। आपको किसी एक ही जगह से कनेक्शन लेने की बाध्यता नहीं होगी।
  • इस मीटर का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि कोई भी अपनी जरूरत के अनुसार बिजली का इस्तेमाल कर सकेगा। यह तो आप जानते ही हैं कि अभी भी भारत में ऐसे बहु से गरीब हैं, जो भारी-भरकम बिजली का बिल चुकाने में असमर्थ हैं। ऐसे में वे अपनी हैसियत के अनुसार रिचार्ज करा सकेंगे, उतनी ही बिजली इस्तेमाल करेंगे।
  • स्मार्ट मीटर लग जाने के पश्चात ऊर्जा की बचत होगी। लोग अनावश्यक रूप से बिजली खर्च नहीं करेंगे।
  • बिजली विभाग पर किसी प्रकार का बकाया भार नहीं होगा। लिहाजा, बिजली विभाग का कोई भी कर्मचारी आपके घर बिल वसूल करने नहीं पहुंचेगा।
  • मैनुअल मीटर रीडिंग (manual meter reading) की आवश्यकता नहीं होगी। लिहाजा, इस प्रकार की रीडिंग में होने वाली चूक से भी पीछा छूटेगा।
  • जब बिजली का कोई बिल ही जनरेट नहीं होगा तो बिल का भुगतान करने की चिंता भी नहीं रहेगी। इसके साथ ही अनावश्यक बिजली केंद्र के चक्कर काटने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
  • बिजली चोरी पर लगाम लगेगी। दरअसल, इस मीटर में कैमरा लगा है। जैसे ही कोई व्यक्ति मीटर से बिजली चोरी करने की कोशिश करेगा, यह कैमरा उसकी फोटो खींचकर विभाग को भेज देगा।
  • बिजली विभाग का बिल भेजने में होने वाला खर्च और सिरदर्द बचेगा।
  • रिचार्ज के आधार पर बिजली उपभोक्ताओं को 24 घंटे के भीतर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
  • यदि घर में बिजली का लोड (load of electricity) अधिक हो अथवा बैटरी बैलेंस (battery balance) पर्याप्त न हो तो इसका अलार्म अलर्ट दे देता है। इससे उपभोक्ता को रिचार्ज करने का अलर्ट मिल जाएगा।
  • स्मार्ट मीटर पर लगी डिस्प्ले स्क्रीन (display screen) के जरिए कोई भी बिजली उपभोक्ता आसानी से बिजली बिल बैलेंस, पिछले माह की खपत आदि के बारे में जान सकता है।

स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? (How does smart meter work?)

साथियों, अब आते हैं आज की सबसे मुख्य बात पर। अब हम जानेंगे कि स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? आपको बता दें कि स्मार्ट मीटर (smart meter) में एक ऐसी डिवाइस (device) लगी होती है, जो मोबाइल टावरों (mobile towers) के माध्यम से सिग्नल (Signal) प्राप्त करती है तथा उसे बिजली कंपनियों में लगे रिसीवर (receiver) तक पहुंचाती है।

इस प्रकार से बिजली कंपनियों के कार्यालय से मीटर रीडिंग की मानिटरिंग (meter reading monitoring) संभव हो जाती है। यह पता चल जाता है कि बिजली की खपत (consumption) कितनी हो रही है।

स्मार्ट मीटर को कैसे रिचार्ज किया जाता है? (How a smart meter is recharged?)

दोस्तों, अब हम आपको जानकारी देंगे कि स्मार्ट मीटर को कैसे रिचार्ज किया जा सकता है। मित्रों, सबसे सरल आप्शन (easiest option) तो यह है कि आप आनलाइन (online) अथवा सीधे (direct) बिजली विभाग जाकर रिचार्ज कूपन (recharge coupon) ले लें और अपने मीटर को रिचार्ज कर लें।

आपको स्पष्ट कर दें कि यदि आप स्मार्ट मीटर को ऑनलाइन रिचार्ज करना चाहते हैं तो यह विकल्प पेटीएम (Paytm) मुहैया करा रहा है। आपको पेटीएम के जरिए अपने स्मार्ट मीटर को ऑनलाइन रिचार्ज (online recharge) करने के लिए यह प्रक्रिया अपनानी होगी-

  • सबसे पहले अपने मोबाइल फोन/कंप्यूटर के जरिए पेटीएम एप (Paytm app) पर जाएं।
  • स्क्रीन पर होम पेज खुल जाने पर आपको जितनी राशि का रिचार्ज कराना है, उसके लिए इलेक्ट्रिसिटी बिल (electricity bill) के ऑप्शन पर क्लिक करें।
  • इसके पश्चात आपको सेलेक्ट स्टेट (select state) के आप्शन पर जाकर ड्राप डाउन मेन्यू (drop down menu) से अपना राज्य चुनना है।
  • इसी प्रकार सेलेक्ट बोर्ड (select board) के आप्शन पर जाकर अपना बिजली बोर्ड (electricity board) चुनें और प्रोसीड (proceed) के आप्शन पर क्लिक कर दें।
  • निर्धारित राशि के पेमेंट के पश्चात आपके मोबाइल फोन (mobile phone) पर पेटीएम से इस बाबत एक एसएमएस (SMS) पहुंचेगा। यह इस बात का सुबूत है कि आपका प्रीपेड स्मार्ट मीटर रिचार्ज हो चुका है।

यदि भुगतान के पश्चात कन्फर्म का मैसेज न आए तो क्या करें? (What if you don’t get the confirmation message?)

दोस्तों, बहुधा यह भी होता है कि बिजली उपभोक्ता प्रीपेड स्मार्ट मीटर के लिए भुगतान कर देता है, लेकिन कन्फर्मेशन (confirmation) का मैसेज नहीं आता। यदि आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो आपको इस प्रक्रिया को अपनाना होगा-

  • सबसे पहले पेटीएम (Paytm) पर जाएं।
  • यहां होम पेज पर आर्डर्स एंड बुकिंग्स (orders and bookings) के आप्शन पर जाकर अपना बिजली बिल निकालना होगा।
  • अब आपको इस बिल पर 18-20 नंबर का आपरेटर रेफरेंस नंबर (operator reference number) दिखाई देगा। यही आपका कूपन कोड (coupan code) होगा।
  • इसके पश्चात आपको मीटर में इस आपरेटर रेफरेंस नंबर यानी कूपन कोड को दर्ज करना होगा। इसके लिए आपको सबसे पहले * दबाकर कोड लिखना है।
  • कोड दर्ज करने के बाद आपको # को दबाना होगा।
  • इस प्रकार आपका प्रीपेड स्मार्ट मीटर रिचार्ज हो जाएगा।

स्मार्ट मीटर में बैलेंस कैसे चेक करें? (How to check balance in smart meter?)

यदि आप स्मार्ट मीटर में बैलेंस चेक करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अपने मीटर में # को दबाना होगा। इतना करने के बाद आपके स्मार्ट मीटर (smart meter) में जितना भी बैलेंस (balance) होगा, वह आपको प्रदर्शित होने लगेगा।

बहुत से लोग बैलेंस (balance) जानने के इस तरीके को नहीं जानते। ऐसे में परेशान रहते हैं कि पता नही स्मार्ट मीटर का प्रीपेड रिचार्ज कूपन (smart meter prepaid recharge coupon) कितने दिन में समाप्त हो जाएगा।

स्मार्ट मीटर की कीमत कितनी होती है? (What is the cost of a smart meter?)

मित्रों, अब आते हैं स्मार्ट मीटर की कीमत पर। आपको बता दें कि लोकल स्मार्ट मीटर की कीमत (price of smart meter) 4000-6000 रुपए से शुरू होकर 7500-12000 रुपए तक हो सकती है।

करीब दो साल पहले यह माना जा रहा था कि भारत में परंपरागत मीटर (traditional meter) बदले जाने की लागत करीब 18 हजार करोड़ रुपए आएगी। जिसमें अर्थव्यवस्था (economy) की चाल एवं महंगाई को देखते हुए वर्तमान में और अधिक बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।

प्रीपेड स्मार्ट मीटर के क्या क्या नुकसान हैं? (What are the disadvantages of smart meter?)

मित्रों, हमने आपको प्रीपेड स्मार्ट मीटर के फायदे गिनाए, अब हम आपको बताएंगे कि इस मीटर के क्या क्या नुकसान हैं, जो कि इस प्रकार से हैं-

  • जैसा कि हमने आपको बताया कि स्मार्ट मीटर रिचार्ज होने पर ही आपको बिजली मिलेगी, ऐसे में जिन लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं और जो रिचार्ज नहीं करा पाएंगे, उन्हें अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ेगा।
  • उपभोक्ता को कई निजी कंपनियों के बिजली क्षेत्र में उतरने से उन्हें चुनने में आसानी होगी और सेवाओं में भी सुधार आएगा, लेकिन इससे उनकी मनमानी भी बढ़ जाएगी।
  • अभी तक शनिवार अथवा रविवार के दिन रिचार्ज खत्म होने पर बिजली कटने का प्रावधान नहीं है, लेकिन यदि इस नियम में बदलाव होता है तो लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ सकती है।

स्मार्ट मीटर क्या होता है?

यह एक इलेक्ट्रानिक डिवाइस होती है, जो बिजली खपत, मीटर रीडिंग, बिलिंग, उपभोक्ता व्यवहार आदि से जुड़ी सारी इंफार्मेशन रिकार्ड करती है।

प्रीपेड स्मार्ट मीटर क्या है?

प्रीपेड स्मार्ट मीटर से आशय यह है कि बिजली का इस्तेमाल मीटर को रिचार्ज कराने के बाद ही हो पाएगा।

स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है?

स्मार्ट मीटर में एक ऐसी डिवाइस होती है, जो मोबाइल टावर के जरिए सिग्नल प्राप्त करती है एवं उसे बिजली कंपनियों में लगे रिसीवर तक पहुंचाती है।

क्या रिचार्ज खत्म होने के बाद भी बिजली का यूज किया जा सकेगा?

जी नहीं, बिजली का इस्तेमाल करने के लिए रिचार्ज आवश्यक होगा।

स्मार्ट मीटर से क्या सुविधा होगी?

इससे बिजली उपभोक्ता अपना जरूरत भर का रिचार्ज कराकर आवश्यकता भर की बिजली खर्च कर सकेगा। साथ ही बिजली विभाग को मैनुअल रीडिंग कराने तथा बिल भेजने से छुटकारा मिलेगा। बिजली चोरी पर भी लगाम लगेगी।

स्मार्ट मीटर के क्या नुकसान हैं?

जिन बिजली उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं है, यदि वे रिचार्ज नहीं करा पाएंगे तो उन्हें अंधेरे में रहना होगा। दूसरे बिजली कंपनियों की मनमानी बढ़ेगी।

स्मार्ट मीटर कैसे रिचार्ज कराते हैं?

इसकी प्रक्रिया के बारे में हमने आपको ऊपर पोस्ट में जानकारी दी है। आप वहां से देख सकते हैं।

दोस्तों, हमने आपको इस पोस्ट (post) में स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है? विषय पर अहम जानकारी प्रदान की। यदि इस पोस्ट के अथवा स्मार्ट मीटर के संबंध में आपका कोई सवाल है तो उसे आप हम तक नीचे दिए गए कमेंट बाक्स (comment box) में कमेंट (comment) करके पहुंचा सकते हैं। आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है। ।।धन्यवाद।।

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