स्कूल प्रधानाचार्य कैसे बने? | योग्यता, कार्य व सैलरी | School principal kaise bane

|| स्कूल प्रधानाचार्य कैसे बने? | School principal kaise bane | प्रधानाचार्य का वेतन कितना होता है? (Principal ki salary kitni hoti hai | Govt principal kaise bane | Government principal kaise bane | School principal ke karya ||

School principal kaise bane :- बहुत से लोगों का अध्यापक या शिक्षक बनने का सपना होता है और वे बन भी जाते हैं। अब कोई प्राइमरी स्कूल में पढ़ा रहा होता है तो कोई बड़े बच्चों को। हर किसी के अपने अलग विषय होते हैं और बच्चों को पढ़ाने का स्तर भी। अब कोई विज्ञान का अध्यापक होता है तो कोई शारीरिक शिक्षा का तो कोई किसी अन्य चीज़ का। इसी के साथ ही वह किस कक्षा के बच्चों को पढ़ा रहा है, यह भी निर्भर करता (Principal kaise bane) है।

जो भी शिक्षक बच्चों को पढ़ाता है, वह स्कूल में ही पढ़ाता है। अब इस स्कूल को हम पाठशाला या विद्यालय के नाम से भी जानते हैं। हालाँकि आज के समय में इसे स्कूल ही कहा जाने लगा है। अब इस स्कूल में तरह तरह के बच्चे पढ़ते हैं और तरह तरह के शिक्षक उन्हें पढ़ाते हैं। ऐसे में स्कूल का प्रबंधन देखना और सभी चीज़ों को मैनेज करना वहां के प्रधानाचार्य का काम होता (Sarkari principal kaise bane) है। अब इन प्रधानाचार्य को प्रधानाध्यापक या प्रिंसिपल के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसे में यदि आप भी शिक्षा की श्रेणी में काम करते हैं या शिक्षक है और बच्चों को पढ़ाते हैं तो अवश्य ही आपका सपना एक ना एक दिन अपने स्कूल या किसी अन्य स्कूल का प्रधानाचार्य बनने का होगा। किसी भी स्कूल का मुखिया वहां का प्रधानाचार्य ही होता है जो पूरे स्कूल को संभालने का कार्य करता है। तो यह प्रधानाचार्य कैसे बने या प्रिंसिपल बनने के लिए क्या कुछ करना होता है, वह सब आपको इस लेख में जानने को (Government principal kaise bane) मिलेगा।

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स्कूल प्रधानाचार्य कैसे बने? (School principal kaise bane)

प्रधानाचार्य बनना कोई आसान या सरल सा दिखने वाला कार्य नहीं होता है क्योंकि यह एक बहुत ही अहम व उत्तरदायित्व वाला पद माना जाता है। अब हम एक शिक्षक के ऊपर ही इतना काम सौंप देते हैं और उसी शिक्षक के ऊपर ही भविष्य की पीढ़ी का निर्माण करने का दायित्व होता है तो प्रधानाचार्य तो उससे बहुत ऊपर का पद हो (Govt principal kaise bane) गया। कहने का अर्थ यह हुआ कि किसी भी छात्र या बच्चे के विकास में उसके स्कूल के शिक्षक की भूमिका बहुत ही अहम मानी जाती है।

स्कूल प्रधानाचार्य कैसे बने योग्यता, कार्य व सैलरी School principal kaise bane

अब शिक्षक की भूमिका ही इतनी अहम है तो सोचिये उस स्कूल के प्रिंसिपल की भूमिका कितनी जरुरी हो जाती है। यदि किसी स्कूल को एक अच्छे प्रिंसिपल के द्वारा संभाला जा रहा है तो स्कूल के सभी छात्रों का विकास होता है और वे आगे बढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल प्रिंसिपल बनने के लिए मेहनत भी उतनी ही करनी होती है और यह प्रक्रिया भी लंबी होती है जिसमें शिक्षा के साथ साथ अनुभव भी जुड़ा हुआ होता (Sarkari school me principal kaise bane) है। आइये जाने स्कूल प्रिंसिपल बनने की प्रक्रिया के बारे में।

बारहवीं कक्षा अच्छे अंकों से पास करें

सबसे पहले तो आपको अपनी बारहवीं कक्षा को अच्छे अंकों के साथ पास करना होगा और इसके लिए आपको किसी ना किसी स्ट्रीम का चुनाव करना होगा। अब आप अपनी पसंद की स्ट्रीम का चुनाव कर सकते हैं लेकिन आगे जाकर यदि आपको स्कूल प्रिंसिपल बनना है तो उसके लिए पहले शिक्षक बनना होता (Sarkari school ke principal kaise bane) है। अब इसके लिए आपको कॉमर्स या आर्ट्स में ही अपनी बारहवीं कक्षा करनी चाहिए क्योंकि उसके लिए स्नातक इसी विषय में ही की जाती है।

ऐसे में आपको मेडिकल या नॉन मेडिकल लेने की कोई जरुरत नहीं है और आप कॉमर्स या आर्ट्स लेकर आगे बढ़ सकते हैं। हालाँकि यदि आप प्रधानाचार्य बनने को लेकर गंभीर हैं तो आपको बिना सोचे समझे ही आर्ट्स ले लेनी चाहिए और उसमे अपनी पढ़ाई करनी चाहिए।

स्नातक पूरी करें

अब जब आपकी बारहवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी हो गयी है और आपने उसमे अच्छे अंक भी प्राप्त कर लिए हैं तो अब बारी आती है स्नातक की डिग्री लिए जाने की। प्रधानाचार्य बनने से पहले शिक्षक बनना जरुरी होता है और उसके लिए चाहिए संबंधित विषय में स्नातक की डिग्री जिसे हम ग्रेजुएशन करना भी कह सकते हैं। तो इसके लिए आपको बीए, बीकॉम, बीएससी इत्यादि में से किसी एक विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी करनी होगी।

हालाँकि शिक्षक बनने के लिए यह सब डिग्री ही जरुरी मानी जाती है और आप अपनी पसंद के अनुसार इसमें से किसी भी एक विषय में अपनी डिग्री ले सकते हैं। किन्तु आज के समय में अलग अलग क्षेत्रों के अनुसार कुछ अन्य डिग्री को भी इसमें जोड़ा जा सकता है जिनके बारे में आप पहले ही पता कर लेंगे तो बेहतर रहेगा।

किसी विषय में बीएड करें

अब जब आपकी स्नातक पूरी हो चुकी है तो अब बारी आती है बीएड किये जाने की। बीएड की डिग्री को करने से पहले आपका ऊपर बताई गयी डिग्री में से किसी एक डिग्री का होना जरुरी होता है और उसके बाद ही बीएड की डिग्री में आगे बढ़ा जा सकता है। कहने का अर्थ यह हुआ कि जब तक आपके पास बीए, बीकॉम या बीएससी की डिग्री नहीं होगी तब तक आप बीएड की डिग्री नहीं कर सकते हैं।

अब आपने अपनी स्नातक कहीं से भी की हो लेकिन बीएड करने के लिए अच्छे कॉलेज का चुनाव करेंगे तो बेहतर रहेगा। यह आपको तेज गति से प्रधानाचार्य की गद्दी तक पहुंचाने का कार्य करेगा। इसलिए अपनी स्नातक करते हुए ही बीएड के अच्छे कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए तैयारी शुरू कर देंगे तो बेहतर रहेगा।

एमएड भी करें

जो लोग केवल शिक्षक की नौकरी करना चाहते हैं और उन्हें आगे चलकर स्कूल प्रधानाचार्य नहीं बनना होता है तो उनके लिए तो बीएड की डिग्री ही पर्याप्त होती है लेकिन आपका लक्ष्य तो आगे चलकर प्रधानाचार्य बनने का है तो उसके लिए एमएड की डिग्री का लिया जाना भी जरुरी हो जाता है। यह बीएड से बड़ी डिग्री होती है और एक तरह से हम इसे पोस्ट ग्रेजुएशन करना भी कह सकते हैं।

बहुत से लोग अपनी बीएड व एमएड को एक साथ भी कर लेते हैं ताकि आगे चलकर दिक्कत ना हो। साथ ही इन दोनों को एक साथ करने से आपका एक वर्ष भी बच जाता है। इसलिए आप पहले ही अपना निर्णय पक्का कर लें और उसी के अनुसार ही आगे की राह का चुनाव करें।

प्राइवेट स्कूल में नौकरी लें

अब जब आपने अपनी बीएड व एमएड दोनों को ही पूरा कर लिया है तो अब बारी आती है स्कूल में नौकरी लेने की। यदि आपको सरकारी शिक्षक नहीं बनना है या उसमे दिक्कत आ रही है या समय लग रहा है तो पहले आप अपने पास के ही किसी स्कूल से संपर्क कर वहां शिक्षक की नौकरी ले लें। आज के समय में आसपास कई तरह के स्कूल होते हैं और उन स्कूलों में बहुत से शिक्षक पढ़ा रहे होते हैं।

ऐसे में आपको केवल उस स्कूल में जाकर संपर्क करना है और वहां अपनी डिग्री दिखानी है। इसी के साथ ही वहां पर आपको अपना कौशल और विषय में ज्ञान भी दिखाने को कहा जाएगा। अब यदि सब सही रहता है तो आपको उस स्कूल में शिक्षक के तौर पर रख लिया जाएगा।

TET की परीक्षा दें

यदि आप सरकारी स्कूल में शिक्षक और फिर आगे चलकर वहां के प्रधानाचार्य बनना चाहते हैं तो उसके लिए ज्यादा परिश्रम किये जाने की जरुरत होती है। इसके लिए आपको अपने राज्य के स्कूल में शिक्षक बनने के लिए TET की परीक्षा तो वहीं केंद्र के स्कूल में शिक्षक बनने के लिए CTET की परीक्षा देनी होती है। इसके लिए राज्य सरकार व भारत सरकार के द्वारा अधिसूचना निकाली जाती है और फिर शिक्षक भर्ती के पेपर आयोजित करवाए जाते हैं।

इसके लिए आपको बहुत तैयारी करनी होती है और उसके बाद पूरी तैयारी के साथ इस TET की परीक्षा में बैठना होता है और परीक्षा देनी होती है। अब यदि आप इसमें पास हो जाते हैं तो फिर आपको सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद पर रख लिया जाएगा।

शिक्षक के तौर पर अनुभव लें

अब जब आप शिक्षक बन जाते हैं फिर चाहे वह सरकारी स्कूल में हो या प्राइवेट, आपको वहां जी जान से काम करना होता है। एक तरह से आपको वहां अच्छा शिक्षक बनना होता है, अपना रिजल्ट अच्छा देना होता है, बच्चों के साथ अच्छे से व्यवहार करना होता है और अपने स्कूल को आगे ले जाना होता है। प्रधानाचार्य बनने के लिए असली परीक्षा आपकी अब शुरू होती है और यह परीक्षा आपकी 5 वर्ष से लेकर 20 वर्षों तक भी चल सकती है क्योंकि शिक्षक तो सैकड़ों होते हैं लेकिन प्रधानाचार्य तो एक ही होता है।

अब मान लीजिये कि आपके स्कूल में 50 शिक्षक पढ़ा रहे हैं लेकिन उन पर प्रधानाचार्य तो एक ही होगा ना। इसका अर्थ यह हुआ कि अनुभव लेने के बाद भी अंत में जाकर केवल एक व्यक्ति ही रिटायर होने से पहले प्रधानाचार्य की कुर्सी पर बैठ पायेगा। ऐसे में आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है और स्कूल के नियमों के अनुसार ही कार्य करना होता है। यदि सब कुछ सही रहता है तो फिर आपको एक दिन प्रधानाचार्य की कुर्सी पर बैठा दिया जाएगा।

प्रधानाचार्य के कार्य क्या होते हैं? (School principal ke karya)

अब यदि आप स्कूल के प्रधानाचार्य बन जाते हैं तो आपका काम बहुत बढ़ जाता है। एक तरह से किसी स्कूल के शिक्षक के ऊपर इतना उत्तरदायित्व नहीं होता है जितना उस स्कूल के प्रधानाचार्य के ऊपर होता (Principal ke karya) है। उस प्रधानाचार्य को बहुत कुछ देखना होता है। एक तरह से उस पूरे स्कूल का प्रबंधन ही उसका उत्तरदायित्व होता है और वही सभी के प्रति जवाबदेह भी होता है। उसे ही स्कूल की पूरी व्यवस्था का आंकलन करना होता है और कार्य करना होता है।

स्कूल में कितने बच्चे पढ़ रहे हैं, कौन से बच्चे किस कक्षा में हैं, एक कक्षा में कितने बच्चे हैं, शिक्षक कितने हैं, वे कितने मेधावी हैं, उनका पढ़ाने का स्टाइल कैसा है, वे बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, स्कूल का टाइम क्या रहेगा, छुट्टी कब होगी, स्कूल का परिणाम कैसा है, मैनेजमेंट कैसा है इत्यादि सब एक प्रधानाचार्य को ही देखना होता है। एक तरह से स्कूल के शुरू होने से लेकर बंद होने के बाद भी प्रधानाचार्य का कार्य खत्म नहीं होता है और वह स्कूल उसी के ही जिम्मे होता है।

प्रधानाचार्य का वेतन कितना होता है? (Principal ki salary kitni hoti hai)

अब बात करते हैं प्रधानाचार्य को मिलने वाले वेतन के बारे में। अब एक प्रधानाचार्य इतना अधिक काम कर रहा है तो अवश्य ही उसका वेतन भी तो अच्छा होना चाहिए। हालाँकि यह बात कई कारकों पर निर्भर करती है और खासतौर पर उस स्कूल की कार्यप्रणाली (Sarkari school principal salary) पर। कहने का अर्थ यह हुआ कि वह स्कूल सरकारी या है प्राइवेट, और किस स्तर का स्कूल है अर्थात वह प्राइमरी है या सेकेंडरी या दोनों इत्यादि। इसी के साथ ही जिस व्यक्ति को प्रधानाचार्य के पद पर नियुक्त किया गया है उसका अनुभव कितना है।

आमतौर पर एक प्रिंसिपल को बाकि शिक्षकों की तुलना में दोगुनी या तीन गुनी सैलरी मिलती (Government school principal salary per month) है। यदि कोई सरकारी स्कूल का प्रधानाचार्य है तो उसकी सैलरी डेढ़ लाख तक हो सकती है और वहीं निजी स्कूल के प्रिंसिपल की सैलरी 50 हज़ार से लेकर दो लाख तक भी हो सकती है। यह पूर्ण रूप से स्कूल के प्रकार और आपके अनुभव पर ही निर्भर करने वाला है कि आपको कितनी सैलरी मिलेगी।

स्कूल प्रधानाचार्य कैसे बने – Related FAQs 

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प्रश्न: स्कूल में प्रिंसिपल का क्या काम होता है?

उत्तर: स्कूल में प्रिंसिपल का काम पूरे स्कूल का प्रबंधन करना होता है अर्थात् पूरे स्कूल का उत्तरदायित्व एक प्रिंसिपल के ऊपर ही होता है।

प्रश्न: स्कूल प्रिंसिपल को हिंदी में क्या बोलते हैं?

उत्तर: स्कूल प्रिंसिपल को हिंदी में प्रधानाचार्य बोलते हैं।

प्रश्न: प्रिंसिपल बनने के लिए कौन सा सब्जेक्ट लेना पड़ता है?

उत्तर: प्रिंसिपल बनने के लिए किसी भी सब्जेक्ट में डिग्री करनी जरूरी होती है और उसके बाद बीएड की हुई होनी चाहिए।

प्रश्न: प्रिंसिपल की सैलरी कितनी होती है?

उत्तर: प्रिंसिपल की सैलरी 70000 से लेकर 2 लाख तक हो सकती है जो कि कई कारकों पर निर्भर करती है।

प्रश्न: गवर्नमेंट प्रिंसिपल बनने के लिए क्या करना पड़ता है?

उत्तर: गवर्नमेंट प्रिंसिपल बनने के लिए पहले CTET या फिर TET की परीक्षा देकर टीचर बनना होगा और फिर 5 से 10 साल का अनुभव लेकर प्रिंसिपल बन सकते हो।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने जाना कि अगर आपको प्रधानाचार्य बनना हुआ तो वह आप कैसे बन सकते हो। इसकी प्रक्रिया हमने चरण दर चरण आपको बता दी है और साथ ही प्रधानाचार्य के क्या कार्य होते हैं और सैलरी कितनी होती है इसके बारे में भी बताया। आशा है कि जो जानने के लिए आप इस लेख पर आए थे वह जानकारी आपको मिल गई होगी। यदि आपके मन में कोई सवाल है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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