साख क्या है? | साख के प्रकार। लाभ, हानि व साख कैसे बढ़ाएं? | Sakh kya hai

|| साख क्या है? | Sakh kya hai | साख कैसे बढ़ाएं? (Sakh kaise badhaye | साख के प्रकार | साख कैसे बढ़ाएं? | साख बढ़ाने के लिए क्या कर सकते हैं? ||

Sakh kya hai :- हमारे लिए हमारा सम्मान, प्रतिष्ठा, मर्यादा बहुत मायने रखती है। ठीक उसी तरह इस दुनिया में काम कर रही हरेक कंपनी के लिए भी उसकी साख बहुत ज्यादा मायने रखती है। कहने का अर्थ यह हुआ कि आज हम जिन कंपनियों पर विश्वास करते हैं, तो उस पर किस वजह से या किस कारण से विश्वास कर पाते हैं, यह भी तो एक मुद्दा है। तो यहाँ मुद्दा किसी और चीज़ का नहीं बल्कि साख का है जो मायने रखता है। आपने भी इस साख शब्द का नाम सुन रखा (Sakh kya hoti hai) होगा।

इस साख का क्या मतलब है और किस तरह से यह कंपनियों से जुड़ा हुआ है? अभी तक तो हम साख को किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखते आये हैं लेकिन अब इसका कंपनी या उद्योगों से क्या संबंध है? ऐसे में आज हम आपके साथ इसी विषय के ऊपर ही बात करने वाले हैं क्योंकि आज के समय में हर कंपनी के लिए उसकी साख बहुत ही ज्यादा जरुरी हो गयी (Sakh kya hai in Hindi) है।

आज का यह लेख आपको ना केवल साख के ऊपर बतायेगा बल्कि उसके क्या कुछ प्रकार होते हैं, उसमें क्या कुछ आता है, यह भी जानने को (Sakh ka kya arth hai) मिलेगा। इसी के साथ ही साख बनाये रखने के लिए क्या कुछ करना होता है और इस साख के क्या लाभ व नुकसान हैं, वह भी आपको इसी लेख के माध्यम से ही जानने को मिलेगा। आइये जाने कि यह साख क्या है?

साख क्या है? (Sakh kya hai)

यहाँ हम सबसे पहले इस साख शब्द के बारे में बात करने वाले हैं। तो साख जिस तरह से किसी व्यक्ति के लिए जरुरी होती है जिसमें उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा का आंकलन किया जाता है, ठीक उसी तरह साख का महत्व एक उद्योग या कंपनी के लिए भी होता है। अब एक कंपनी का बाजार में या लोगों के बीच क्या स्थान है या लोग उस पर किस स्तर तक विश्वास करते हैं या फिर यदि वह आज अपनी कंपनी को बेचने जाए तो उसे कंपनी की संपत्ति से कितनी ज्यादा मुद्रा मिलेगी, वही साख कहलाती (Sakh kya hota hai) है।

Sakh kya hai

अब यदि आप इसे नहीं समझे हैं तो हम इसे उदाहरण से आपको समझाने का प्रयास करते हैं। आपको ध्यान होगा कि कुछ वर्षों पहले फेसबुक कंपनी ने प्रचलित मैसेज कंपनी व्हाट्सऐप को खरीद लिया था। तो उस समय तक व्हाट्सऐप के जरिये कमाई करने का कोई भी स्रोत नहीं था और यदि उसमे खुले अकाउंट को भी देखा जाये तो उसका मूल्य कुछ हज़ार करोड़ रुपये ही था। किन्तु फेसबुक ने व्हाट्सऐप को लाखों करोड़ देकर ख़रीदा है। इसके अनुसार व्हाट्सऐप की साख बहुत ज्यादा थी जिस कारण उसे इतने अधिक मूल्य में ख़रीदा गया (Sakh kise kahate hain) था।

ठीक उसी तरह यदि हम आप आपको कहें कि आपको ऑनलाइन सामान मंगवाना है और उसके लिए पेमेंट भी ऑनलाइन ही करनी है। तो आप अमेज़न, फ्लिप्कार्ट या मीशो पर आँख बंद करके ऑनलाइन पेमेंट कर देंगे और वहां से सामान मंगवा लेंगे लेकिन वहीं यदि आपको किसी कंपनी की वेबसाइट पर सामान खरीदने के बहाने ऑनलाइन पेमेंट करने को कहा जाए तो वह आप नहीं करेंगे। वह इसलिए क्योंकि आपको अमेज़न और फ्लिप्कार्ट जैसी कंपनियों पर विश्वास है और यह उनकी साख के कारण ही संभव हो पाया (Sakh in Hindi) है।

तो इस तरह से साख उसे कहा जाता है जो एक कंपनी अपने कार्य और वर्षों के अनुभव के आधार पर बाजार में और लोगों के बीच एक विश्वास बनाकर एकत्रित करती है। इसे केवल और केवल लोगों का भरोसा जीत कर या अपनी संपत्तियों या एसेट का मूल्य बढ़ा कर अर्जित किया जा सकता (Sakh ke bare mein bataiye) है। हालाँकि इसके बारे में विस्तार से समझने के लिए अभी आपको यह लेख पूरा पढ़ना होगा, तो आइये समझें इसके बारे में।

साख कैसे बढ़ाएं? (Sakh kaise badhaye)

अब किसी कंपनी को बाजार में अपनी साख बढ़ाने का कार्य करना है या इस क्षेत्र में कार्य करना है तो उसे कई तरह के काम करने होते हैं। सीधे तौर पर कहा जाये तो किसी भी कंपनी की साख यूँ ही नहीं बढ़ जाती है और इसके लिए उसे तरह तरह के पापड़ बेलने पड़ते (Sakh badhane ka tarika) हैं। ऐसे में आज जिन कंपनियों की साख बनी हुई है, वह आखिरकार किस कारण से बनी है या फिर उन्होंने ऐसा क्या अलग किया है जिस कारण से आज लोगों के बीच में उनकी साख इतनी बनी हुई है, आइये इसके बारे में जान लेते हैं।

  • किसी कंपनी या बिज़नेस के लिए अपनी साख बढ़ाने का सबसे पहला और सही उपाय है, उसके द्वारा जो भी कार्य किया जा रहा है और जो भी सेवा लोगों को दी जा रही है, उसको लेकर एकदम स्पष्टता होनी चाहिए। कहने का अर्थ यह हुआ कि लोगों में उसकी सेवा को लेने के लिए किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।
  • कंपनी की नीतियाँ एकदम स्पष्ट होने के साथ साथ सरल और यूजर फ्रेंडली भी होनी चाहिए ताकि लोग उसके साथ आसानी से कनेक्ट कर सकें। अब यदि लोगों को उस कंपनी के बारे में पता ही नहीं होगा तो अवश्य ही वे किसी अन्य कंपनी की ओर मुड़ जाएंगे।
  • कंपनी को केवल लाभ कमाने के उद्देश्य से ही कार्य नहीं करना चाहिए। यदि उसे अपनी साख बढानी है तो उसे जन कल्याण के कार्य भी करने होंगे और इसके लिए जरुरत मंद लोगों की सहायता करने से लेकर समय समय पर कई तरह की योजनाएं या स्कीम लानी होगी।
  • कंपनी के द्वारा यदि किसी तरह का उत्पाद या प्रोडक्ट बनाया जाता है तो उसमे किसी भी तरह के हानिकारक तत्व या लोगों को लूटने वाले कार्य नहीं होने चाहिए। यदि लोगों को सही और उत्तम गुणवत्ता के उत्पाद मिलेंगे तो अवश्य ही वे इनका उपभोग फिर से करेंगे।
  • कंपनी जितनी ज्यादा पुरानी होती चली जाती है, उसकी साख भी उतनी ही बढ़ती चली जाती है। ऐसे में कंपनी यह सोचकर आश्वस्त ना हो जाए कि वह पुरानी हो गयी है तो उसकी साख बढ़ ही जाएगी। अपनी साख को बनाये रखने के लिए उसका इतिहास एकदम साफ और बिना दाग के होना चाहिए।
  • उसकी अकाउंटिंग या बही खातों में किसी तरह की गड़बड़ नहीं होनी चाहिए और वह लोगों के सामने एक दम सपष्ट रूप में होनी चाहिए।
  • कंपनी को अपनी साख बनाये रखने के लिए अपने क्षेत्र से जुड़ी पूरी तरह से रिसर्च करनी चाहिए क्योंकि किसी भी कंपनी की साख उसके क्षेत्र में किये गए कामों पर ही निर्भर करती है।

इस तरह से किसी कंपनी की साख पूर्ण रूप से उसी की हाथ में होती है। अब वह इसे किस तरह से बनाती है और किस तरह से इसे बनाये रखती है, यह दोनों ही कारक किसी कंपनी की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि कोई कंपनी कुछ ही वर्षों में लोगों के बीच बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो जाती है तो कुछ अर्श से फर्श तक भी पहुँच जाती है।

साख के प्रकार (Sakh ke prakar)

अब इस साख को बनाने का जो कार्य करते हैं या जो इसमें मुख्य भूमिका में होते हैं, वही इसके प्रकार कहलाये जाते हैं। एक तरह से किसी कंपनी की साख को बनाना या बिगाड़ना उसी के हाथ में ही होता है। तो जो भी कंपनी साख को बनाने पर कार्य कर रही है, उसके प्रकार कुछ इस तरह के होते हैं:

सर्विस व प्रोडक्ट्स

साख को बनाने के लिए जो पहला प्रकार होता है वह कंपनी के द्वारा उपलब्ध करवायी गयी सर्विस या प्रोडक्ट ही होता है। अब हम किसी कंपनी का साबुन या तेल क्यों खरीदते हैं? इसके पीछे का कारण यह है कि उस कंपनी की साख अर्थात विश्वास हमारे लिए अच्छा है और इसी विश्वास के कारण ही हम उस कंपनी का साबुन या तेल खरीदते हैं। जिस दिन वह साख खत्म हो गयी तो हम उस कंपनी के तेल की बजाये किसी अन्य कंपनी का तेल खरीदना शुरू कर देंगे।

ग्राहकों का फीडबैक

जो कंपनी लगातार अपना काम ही कर रही होती है और केवल सेवाओं को बेचने या प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग करने का ही काम करती है, वह कभी भी सफल नहीं हो सकती है। एक सफल कंपनी की पहचान होती है कि उसके जो लॉयल ग्राहक हैं या जो नए ग्राहक हैं, उनके बीच उस कंपनी की क्या पहचान है। एक तरह से इसके माध्यम से कंपनी अपने ग्राहकों के फीडबैक के आधार पर अपने यहाँ मूल परिवर्तन कर साख को बचाने का या बढ़ाने का कार्य करती है।

मार्केटिंग व प्रोमोशन

आज के समय में बहुत सी कंपनियों या यूँ कहें कि ज्यादातर कंपनियों के द्वारा अपनी साख को बढ़ाने के लिए जिस एक प्रकार का सहारा लिया जा रहा है, वह है मार्केटिंग व प्रमोशन। आप चाहे टीवी देख लें या सोशल मीडिया चला लें या घर से बाहर निकल जाएं या अख़बार पढ़ लें, आपको हर जगह अलग अलग कंपनियों, दुकानों या व्यवसायों के ऐड मिल जाएंगे जहाँ पर आपको उस उत्पाद या सेवा के बारे में जानकारी दी गयी होगी। तो एक तरह से यह भी अपनी साख बढ़ाने का एक प्रकार होता है।

सोशल सर्विसेज

जैसा कि हमने आपको ऊपर ही बताया कि किसी कंपनी के द्वारा किस तरह की सोशल सर्विस की जाती है या किस तरह का कार्य किया जाता है, यह भी उसकी साख बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कार्य होता है। उदाहरण के तौर पर मान लीजिये कि किसी कंपनी के मालिक के द्वारा किसी ऐसे बच्चे को सहयोग किया जाता है जो एथलेटिक्स बहुत अच्छा खेलता है तो देश विदेश में उसकी बहुत तारीफ की जाती है। ठीक इसी तरह की तकनीक कई तरह की कंपनियां निभाती है।

अकाउंटिंग

कंपनी की अकाउंटिंग अर्थात लेखा जोगा कैसा है और वह अपने ग्राहकों के साथ किस तरह का व्यवहार कर रही है, इस पर भी उसकी साख बहुत ज्यादा मायने रखती है। उदाहरण के तौर पर टाटा की नए वैरिएंट की गाड़ियों में कुछ दिक्कत आ गयी तो यदि टाटा उसे वैसे ही छोड़ देगी या उसके लिए ग्राहकों से पैसे लेगी तो यह उसकी साख को बिगाड़ देगा लेकिन टाटा ऐसा बिल्कुल नहीं करेगी। वह एक जिम्मेदार कंपनी होने के नाते, अपनी गलती मानते हुए सभी गाड़ियों को वापस बुलाकर उसमें वह कमी सुधारेगी तो यही उसकी अकाउंटिंग होती है।

सरकार

साख को बनाने में किसी देश की सरकार का भी अहम योगदान होता है। अब यदि कंपनी के द्वारा उस देश की सरकार के साथ मिलकर काम नहीं किया जाता है देश हित में काम नहीं किया जाता है तो फिर यह उसकी साख को उस देश में गिराने का ही कार्य करता है। उदाहरण के तौर पर चीन की हरेक कंपनी की साख भारत देश में गिर चुकी है और लोग उसके सभी तरह के प्रोडक्ट्स व सेवाओं का बहिष्कार कर रहे हैं।

मैनेजमेंट

कंपनी का अंदरूनी मैनेजमेंट कैसा है और वहां शीर्ष पर किस तरह के अधिकारी बैठे हैं, उनकी नीतियाँ कैसी है, वे किस तरह के लोगों को महत्व दे रहे हैं, उनके द्वारा क्या नए निर्णय लिए जा रहे हैं, यह भी किसी कंपनी की साख को बनाने या बिगाड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

साख के लाभ (Sakh ke labh)

अब हम बात करेंगे कि जिस कंपनी की साख अच्छी होती है, उसे किस तरह के लाभ या फायदे देखने को मिलते हैं। तो इसका लाभ तो प्रत्यक्ष है और वह है कंपनी आर्थिक रूप से संपन्न होती चली जाती है। लोगों का उसके अंदर विश्वास बढ़ता है और कंपनी का वास्तविक मूल्य उसकी संपत्ति से बहुत अधिक हो जाता है। कहने का अर्थ यह हुआ कि कंपनी की सभी संपत्तियों का मूल्य चाहे 100 करोड़ हो लेकिन यदि उसे बेचने के लिए निकाला जाए तो लोग उसे एक हज़ार करोड़ में भी खरीदने को तैयार हो जाएंगे।

इस तरह से हर कंपनी के लिए उसकी साख बहुत ही ज्यादा महत्व वाली होती है जो बहुत ही मुश्किल से कमाई जा सकती है। एक तरह से देखा जाए तो साख वाली कंपनी के अंदर लोगों का भरोसा बढ़ता चला जाता है और वे इसमें अपने पैसों का निवेश बिना किसी हिचक के कर पाते हैं। उदाहरण के तौर पर आप डाबर कंपनी का या पतंजलि का तेल बिना सोचे समझे खरीद लेंगे लेकिन यदि आपके सामने कोई नयी तेल वाली कंपनी आती है तो आप उसका उत्पाद लेने में हिचकिचाएंगे। तो यही तो साख का लाभ होता है जो विश्वास पर टिका होता है।

साख की हानि

अब यदि किसी कंपनी की साख बुरी है या बुरी हो जाती है तो उसका बहुत नुकसान भी देखने को मिलता है। वो कहते हैं ना कि रिश्ते बनाने में सालों लग जाते हैं लेकिन उनके बिगड़ने में कुछ पल भी नहीं लगते हैं। अब चाहे किसी कंपनी की साख कितनी ही अच्छी क्यों ऩा हो लेकिन यदि वह कुछ ऐसा काम कर दे जो लोगों की नज़र में बुरा हो तो उसकी साख चुटकियों में मिट्टी में मिल जाती है।

उदाहरण के तौर पर आप प्रसिद्ध अभिनेता आमिर खान का ही उदाहरण ले लें। कुछ वर्षों पहले तक लोगों के बीच में उनकी विश्वनीयता बहुत ज्यादा थी लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद उन्होंने जिस तरह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत देश को बदनाम करने का प्रयास किया, उस कार्य ने उनकी जीवनभर की बनायी हुई साख को मिट्टी में मिला दिया। तो कुछ ऐसा ही नुकसान सभी तरह की कंपनियों और उद्योगों को भी देखने को मिलता है।

ऐसे में जो साख किसी कंपनी को फर्श से अर्श तक पहुंचा सकती है, वही साख बुरी हो जाने पर उसे फिर से फर्श पर लेकर आ जाती है और फिर उसे वापस ऊपर जाने में पहले से कई गुणा अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

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साख क्या है – Related FAQs 

प्रश्न: साख से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: एक कंपनी का बाजार में या लोगों के बीच क्या स्थान है या लोग उस पर किस स्तर तक विश्वास करते हैं या फिर यदि वह आज अपनी कंपनी को बेचने जाए तो उसे कंपनी की संपत्ति से कितनी ज्यादा मुद्रा मिलेगी, वही साख कहलाती है।

प्रश्न: अर्थशास्त्र में साख क्या होता है?

उत्तर: साख उसे कहा जाता है जो एक कंपनी अपने कार्य और वर्षों के अनुभव के आधार पर बाजार में और लोगों के बीच एक विश्वास बनाकर एकत्रित करती है।

प्रश्न: साख बढ़ाने के लिए क्या कर सकते हैं?

उत्तर: साख बढ़ाने के लिए आपको क्या करना चाहिए यह जानने के लिए आप ऊपर हमारे द्वारा लिखा गया लेख पढ़ सकते हो जिसमे हमने साख बढ़ाने के ऊपर शुरू से लेकर अंत तक संपूर्ण जानकारी दी है।

प्रश्न: साख के प्रकार क्या हैं?

उत्तर: साख के प्रकारों के बारे में विस्तार से जानकारी ऊपर लिखे हुए लेख के माध्यम से मिल जायेगी।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने साख के बारे में जानकारी हासिल कर ली है। आपने जाना कि साख क्या है साख बढ़ाने के लिए क्या कर सकते हैं साख के प्रकार क्या हैं और साख के लाभ और हानि क्या हैं इत्यादि। आशा है कि जो जानकारी लेने के लिए आप इस लेख पर आए थे वह आपको मिल गई होगी। फिर भी यदि कोई प्रश्न आपके मन में साख को लेकर शेष है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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