पत्नी के अधिकार क्या-क्या हैं? What Are The Rights Of A Wife 2022

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हमारे देश में विवाह एक आवश्यक सामाजिक संस्था है। हर माता पिता का सपना होता है कि उनकी पुत्री शादी करके खुशी खुशी पति के साथ अपने घर यानी ससुराल के लिए विदा हो जाए। विवाह होते ही पत्नी के बतौर लड़की को कानून भी कई तरह के अधिकार देता है। लेकिन समस्या यह है कि अधिकांश पत्नियों को अपने अधिकारों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती।

पत्नी के अधिकार क्या-क्या हैं? What Are The Rights Of A Wife 2022

वे पति एवं परिवार के अन्य सदस्यों की बातों को सिर झुकाकर मानती जाती हैं। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक न होने की वजह से बहुत से घरों में उनका शारीरिक एवं मानसिक शोषण होता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि वे अपने अधिकारों को जानें। उनके प्रति जागरूक बनें। आज इस पोस्ट में हम आपको एक पत्नी के इन्हीं अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। आइए, शुरू करते हैं।

पत्नी के अधिकार क्या-क्या हैं? What Are The Rights Of A Wife
The Rights Of A Wife

1. स्त्रीधन का अधिकार

दोस्तों, आपको बता दें कि पत्नी के पास उसके स्त्रीधन के स्वामित्व से जुड़े सभी अधिकार हैं। जैसे विवाह से पूर्व एवं उसके पश्चात दिए गए सभी उपहार एवं धन पर पत्नी के अधिकार होगा।

जैसे पत्नी को मायके से मिले गहने एवं अन्य सामान। स्त्रीधन को पति अथवा ससुराल पक्ष का कोई व्यक्ति न तो छीन सकता है एवं न ही बेच सकता है।

2. पति के घर में रहने का अधिकार

विवाह के पश्चात पत्नी को अपने पति के घर में रहने का अधिकार है। चाहे यह एक संयुक्त परिवार वाला घर हो अथवा कोई किराये का घर। चाहे आत्मनिर्भर हो अथवा पूर्वजों का घर। जिस भी घर में पति रहता है, उसमें रहने का पत्नी को अधिकार है। पति उसे इस घर से निकाल नहीं सकता।

3. जीवनस्तर के रख-रखाव का अधिकार

पत्नी को अपने जीवन स्तर के अनुसार पति से जीवन के बुनियादी अधिकार का दावा करने का अधिकार है। यानी कि उसे अपनी लिविंग स्टैंडर्ड (living standard) मेंटेन यानी रख रखाव का अधिकार है। यहां तक कि कानून ने एक पत्नी को उसके पति की सैलरी जानने का भी हक दिया है।

4. पति से रिश्ते का अधिकार

मित्रों, आपको बता दें कि यदि तलाक नहीं हुआ है तो एक हिंदू पति जीवनसाथी के जिंदा रहते दूसरा विवाह नहीं कर सकता। यानी पत्नी को पति के साथ रिश्ते का अधिकार है।

पति पत्नी के जीवित रहते यह अधिकार किसी अन्य महिला को नहीं दे सकता। यदि वह ऐसा करता है तो उस पर व्यभिचार का आरोप लगाकर पत्नी तलाक का केस भी कोर्ट में डाल सकती है।

5. गरिमा के साथ जीने का अधिकार

पति के घर में पत्नी को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। वह पति एवं परिवार के अन्य सदस्यों के समान जीवन शैली पाने की अधिकारी है। इसके साथ ही उसे शारीरिक अथवा मानसिक यातना नहीं दी जा सकती।

यदि पति पत्नी को इस तरह की कोई प्रताड़ना देता है तो पत्नी उसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को स्वतंत्र है। इस मामले में पत्नी को न्याय पाने का पूरा अधिकार है।

6. सरनेम यथावत रखने का अधिकार

समाज में चलन है कि शादी के बाद महिलाएं पिता का सरनेम छोड़कर अपने पति का सरनेम अपना लेती हैं। बहुत सी महिलाएं जबकि अपना पुराना सरनेम नहीं छोड़ना चाहती। कानून ने भी उसे यह अधिकार दिया है।

यदि कोई महिला शादी के बाद अपना सरनेम नहीं बदलना चाहती तो उसे इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उसे शादी से पहले वाला सरनेम रखने का पूरा अधिकार है।

7. शादी कंज्युमेट न होने पर उसे निरस्त करने का अधिकार

विवाह के पश्चात पति एवं पत्नी के बीच शारीरिक संबंध न होने की स्थिति में यानी शादी कंज्युमेट न होने पर पत्नी अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। उसे इस आधार पर शादी निरस्त करने का अधिकार है।

हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu marriage act) की धारा 12 (1) के अनुसार उसे इस स्थिति में शादी को अमान्य अथवा निरस्त कराने का अधिकार दिया गया है। इसके लिए उसकी ओर से कोर्ट में केस दायर किया जा सकता है।

ऐसी स्थिति उन मामलों में ज्यादातर आती है, जहां लड़के का अफेयर किसी और लड़की से होता है। वह परिवार के दबाव, दहेज अथवा किसी अन्य कारण से शादी तो कर लेता है, लेकिन लड़की को नहीं अपनाता। उससे दूरी बनाए रखता है।

8. पति की रिहायशी संपत्ति में अधिकार

महिला का अपने पति की रिहायशी संपत्ति पर भी अधिकार होता है। यह पुरखों की संपत्ति की बात है। यदि पति ने अपने प्रयास से कोई संपत्ति अर्जित की है तो उस पर पत्नी का सीधे कोई अधिकार नहीं होता।

पहले वाले केस में, यदि दोनों के बीच तलाक की स्थिति आती है तो पत्नी पति की रिहायशी संपत्ति में भी आधे की हकदार होती है।

9. एलिमनी एवं मेंटेनेंस का अधिकार

पत्नी का यदि पति से तलाक हो गया है और पत्नी दूसरी शादी नहीं रकती तो ऐसे में उसे पूर्व पति से एलिमनी एवं मेंटेनेंस (maintenance) यानी गुजारा भत्ता पाने का पूरा अधिकार है।

अधिकांश महिलाएं एलिमनी के लिए पति के आनाकानी करने पर कोर्ट (court) का दरवाजा खटखटाने से भी नहीं चूकतीं।

10. पति से तलाक का अधिकार

मित्रों, बेशक आपको यह सुनकर अटपटा लगे लेकिन कानून में महिला को अपने पति से तलाक का अधिकार भी दिया गया है। पत्नी इन अवस्थाओं में तलाक ले सकती है, यदि-

  • पति पत्नी को बेवजह दो साल तक छोड़े रहे।
  • पति के किसी अन्य महिला से विवाहेत्तर (post marrital) संबंध हों।
  • पति पत्नी की मर्जी के खिलाफ धर्म परिवर्तन कर ले।
  • पति को पागलपन के दौरे पड़ते हों। अथवा उसे कोढ़, छुआछूत जैसी कोई बीमारी हो या फिर कोई ऐसी बीमारी हो, जिसका इलाज संभव नहीं।
  • पति शारीरिक/मानसिक (physically/mentally) रूप से प्रताड़ित करे।

11. घरेलू हिंसा (domestic violence) के खिलाफ अधिकार

यदि पत्नी के खिलाफ पति अथवा उसके परिवार का कोई सदस्य घरेलू हिंसा करता है तो पत्नी को घरेलू हिंसा अधिनियम (domestic violence act)-2005 के अंतर्गत सुरक्षा प्रदान की गई है। पीड़िता ऐसा करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती है।

यह कानून लाया ही इसीलिए गया था, ताकि महिलाओं को घर के भीतर ही यानी पिता, पति अथवा अन्य सगे संबंधियों के हाथों होने वाली हिंसा से मुक्ति मिले। इस अधिनियम के अच्छे नतीजे भी देखने को मिले हैं।

पहले स्त्रियां पति अथवा पिता समेत अन्य संबंधियों के जुल्म के खिलाफ आगे नहीं आती थीं, लेकिन अब उनमें बदलाव आया है। इसमें इस कानून का भी बड़ा हाथ है।

12. प्रेगनेंसी (pregnancy) एवं अबाॅर्शन (abortion) का अधिकार

आपने देखा होगा कि बहुत घरों में पत्नी के ऊपर पति एवं उसके परिवार वाले प्रेगनेंसी को लेकर दबाव बनाते हैं। जबकि वह ऐसा करने का अधिकार नहीं रखते। कानून ने एक पत्नी को प्रेगनेंसी एवं अबाॅर्शन को लेकर पूरे अधिकार दिए गए हैं। उसे इस संबंध में अपने पति अथवा ससुरालवालों की सहमति की आवश्यकता नहीं है।

द मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेगनेंसी एक्ट (the medical termination of pregnancy act) 1971 के अंतर्गत पत्नी को यह अधिकार दिया गया है कि वह 24 सप्ताह से कम समय में अपनी प्रेगनेंसी कभी भी खत्म कर सकती है।

13. पत्नी द्वारा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अपनाए गए कानूनी तरीके पति के प्रति क्रूरता नहीं

मित्रों, ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें पत्नी का अपने अधिकारों एवं संपत्ति (rights and property) की रक्षा के लिए कानून का सहारा लेना बर्दाश्त नहीं होता। ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट (supreme court) में आया।

इस मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस एस भानुमति एवं जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने यह फैसला दिया कि यदि पत्नी अपने अधिकारों एवं संपत्ति की रक्षा के लिए कानूनी तरीके अपनाती है तो वह पति के प्रति क्रूरता नहीं है।

14. पत्नियां अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक नहीं

भारत की बात की जाए तो यहां शादी (marriage) को एक समझौते के स्थान पर एक पवित्र संस्कार करार दिया गया है। मां बाप का सारा जोर इसी पर रहता है कि शादी के बाद उनकी बेटी एक आदर्श पत्नी एवं आदर्श बहू बने। वे उसे उसके पत्नी के रूप में अधिकारों की जानकारी देने के स्थान पर उसे हर हाल में शादी बचाए रखने का उपदेश देते हैं।

बेटी भले परेशान हो और मां बाप से इसका जिक्र करे एवं पति व ससुराल छोड़ना चाहे लेकिन उनका यही कहना होता है कि बेटी ससुराल में ही अच्छी लगती है। ज्यादातर उसी पुरानी सोच वाले लोग आज भी कम नहीं कि लड़की मायके से डोली में आती है और ससुराल से अर्थी पर विदा होती है। अपने पत्नी के अधिकार के प्रति जागरूकता न होने के उद्देश्य से महिला बतौर पत्नी ससुराल में शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न झेलती रहती है। इसे ही वह अपना भाग्य समझ लेती है।

हालांकि अब बेटियों की पढ़ाई लिखाई से उनमें चैतन्यता आई है एवं स्थिति पहले की अपेक्षा काफी बदली है। इसके बावजूद अभी संपूर्ण समाज की मानसिकता में परिवर्तन आना बाकी है। बेटी को शादी के वक्त पत्नी के अधिकारों की जानकारी दिए जाने की आवश्यकता है।

15. पत्नी के अधिकारों के प्रति पतियों की मानसिकता (mentality) में बदलाव नहीं

पत्नी को बेशक कानून में कई अधिकार दिए गए हों, लेकिन इन अधिकारों को लेकर पतियों की मानसिकता में कोई बदलाव दृष्टिगोचर नहीं हुआ है। मसलन बात स्त्रीधन की करें तो ससुराल में पति समेत हर कोई इस सामान पर अपना हक जताता है। दहेज (dowry) का सामान एवं पैसा उसे अपना हक लगता है।

यही वजह है कि शादी से पहले अब भी दहेज की मांग की जाती है। मिसाल उत्तर प्रदेश की ही लें। यहां के ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी शादियों के रेट तय हैं। मसलन दूल्हा यदि पुलिस में हैं तो उसके दहेज में अमुक राशि एवं कार इत्यादि देना होगा। इसके अलावा शादी के पश्चात पत्नी के शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न की घटनाएं भी कम नहीं। यदि पत्नी कोर्ट का रूख करती है तो उन्हें यह बुरा लगता है। यह फिल्मों का असर दिखाई देने लगता है।

ढेर सारे लोग ऐसे हैं, जो महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली कार्यकर्ताओं को अच्छी नजर से नहीं देखते। उनका मानना होता है कि ऐसी महिलाएं स्त्रियों को बरगला कर उनका घर तोड़ रही हैं। ऐसे में अधिक जरूरत पुरूष एवं पति मानसिकता में बदलाव की है, जिसमें अभी लंबा समय लगना अवश्यंभावी है।

16. स्कूल-कालेजों में वर्कशाॅप से बताए जा रहे स्त्री अधिकार

मित्रों, आप जानते ही हैं कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनने का सबसे बड़ा तरीका कानूनों के प्रति जानकारी ही है। इसी उद्देश्य को सामने रख कई गैर सरकारी संस्थाएं (NGO) स्कूल कालेजों में वर्कशाॅप आयोजित कर रही हैं, ताकि बालिकाओं को उनके स्त्री अधिकारों की जानकारी हो सके। इन अधिकारों का वह शादी के पश्चात पत्नी बनने पर इस्तेमाल कर सकेंगी एवं अपने अधिकारों को सुरक्षित कर सकेंगी।

इस तरह की भी कई कार्यशालाएं इन दिनों आनलाइन भी आयोजित की जा रही हैं, जिनमें महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जाती है। इनमें पत्नी के अधिकार भी प्रमुख हैं। इसकी वजह यह है कि शादी के पश्चात युवती दूसरे घर में जाती है। वहां पत्नी के रूप में उसकी जिम्मेदारियां बढ़ती हैं तो दूसरे घर में सामंजस्य बिठाने की चुनौती भी।

ऐसे में वे पति अथवा परिवार के किसी दूसरे सदस्य द्वारा सताई न जाएं, इस मकसद से उन्हें कानूनी अधिकारों की जानकारी बेहद अहम बन जाती है।

एक पत्नी के अधिकार क्या-क्या होते हैं?

पत्नियों को कानून में स्त्रीधन पर अधिकार, पति के घर में रहने का अधिकार, रख रखाव का अधिकार, तलाक का अधिकार जैसे कई अधिकार दिए गए हैं।

स्त्रीधन से क्या तात्पर्य है?

स्त्रीधन शादी से पूर्व अथवा शादी के पश्चात पत्नी को मिला धन है। इसे वह अपनी स्वेच्छा से कहीं भी प्रयोग कर सकती है। किसी को भी इस धन को लेने अथवा बेचने का अधिकार नहीं है।

पत्नी किन स्थितियों में पति से तलाक का अधिकार रखती है?

यदि पति किसी विवाहेत्तर संबंध में हो, पति शारीरिक अथवा मानसिक रूप से प्रताड़ित करता हो, जैसी कई स्थितियों में पत्नी पति से तलाक का अधिकार रखती है।

क्या पत्नी को प्रेगनेंसी एवं अबाॅर्शन संबंधी अधिकार भी प्राप्त है?

जी हां, यह अधिकार भी पत्नी को है। प्रेगनेंसी अथवा अबाॅर्शन के लिए उसे पति अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य की सहमति की आवश्यकता नहीं है।

क्या पति की सैलरी जानना पत्नी के अधिकार में आता है?

जी हां, पति की सैलरी जानना भी पत्नी के अधिकार में आता है।

यदि पत्नी अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए यदि कानूनी तरीके आजमाती है तो क्या वह पति के प्रति कू्रता है?

जी नहीं, ऐसा करना पति के प्रति क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट एक महत्वपूर्ण फैसला भी दे चुकी है।

दोस्तों, हमने आपको इस पोस्ट में पत्नी के अधिकार क्या-क्या हैं? What Are The Rights Of A Wife 2022 की जानकारी दी। उम्मीद है कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी। यदि आपके आस पास अथवा परिचय में कोई महिला हैं तो उनसे यह पोस्ट जरूर शेयर करें ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें। यदि इस पोस्ट पर आपकी कोई प्रतिक्रिया अथवा सुझाव है तो उसे हमारे साथ साझा करना न भूलें। अपनी बात आप हमें नीचे दिए गए कमेंट बाक्स में कमेंट करके बता सकते हैं। ।।धन्यवाद।।

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