एक मां के क्या अधिकार हैं? जानिए मां को मिले तमाम अधिकारों के बारे में | Rights of a Mother 2023

हमारी संस्कृति में मां का दर्जा बहुत ऊंचा है। मां शब्द को बहुत महिमामंडित किया गया है। उसे त्याग की प्रतिमूर्ति माना गया है। अक्सर मां की इर्द गिर्द ही किसी भी परिवार की धुरी घूमती है। लेकिन यदि बात मां के अधिकारों की आती है तो अधिकांश लोग इससे अनभिज्ञ होते हैं कि मां के क्या अधिकार हैं। स्वयं महिलाएं ही बतौर मां अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं। यदि आप भी ऐसे ही लोगों में हैं तो आज हम आपको बताएंगे कि एक मां के क्या अधिकार होते हैं? आइए शुरू करते हैं-

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अधिकार क्या होता है? (What is right?)

हम लोग अक्सर बात करते हैं कि फलां के यह यह अधिकार हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि अधिकार से क्या आशय है? आइए, सबसे पहले यही जान लेते हैं कि अधिकार क्या होता है? मित्रों, यदि परिभाषा की बात करें तो अधिकार से आशय राज्य द्वारा किसी व्यक्ति को प्रदान की जाने वाली उन सुविधाओं से है, जिनका प्रयोग कर वह अपनी शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक शक्तियों का विकास करता है।

सच तो यह है कि अधिकारों के बिना मानव जीवन के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसीलिए वर्तमान में प्रत्येक राज्य अपने नागरिकों को अधिकार प्रदान करता है। अधिकार दो प्रकार के होते हैं-नैतिक एवं कानूनी। यहां हम कानूनी अधिकार की बात कर रहे हैं। ये वे अधिकार हैं जो किसी व्यक्ति को कानून द्वारा प्रदान किए गए हैं।

एक मां के क्या अधिकार हैं? (What are the rights of a mother?)

एक मां के क्या अधिकार हैं? जानिए मां को मिले तमाम अधिकारों के बारे में | What are the rights of a mother?

मित्रों, आज हम बात एक मां के अधिकारों की कर रहे हैं। आइए विस्तार से जान लेते हैं कि एक मां के कानून सम्मत कौन कौन से अधिकार हैं-

1. बच्चे को जन्म देने का अधिकार:

बतौर मां एक महिला का सबसे पहला अधिकार बच्चे को जन्म देने का है। दोस्तों, जान लीजिए कि किसी भी गर्भवती महिला की मर्जी के खिलाफ अथवा उसे बताए बगैर उसका गर्भपात यानी अबॉर्शन (abortion) नहीं कराया जा सकता। यदि कोई ऐसा करेगा तो वह कानूनन जुर्म होगा। ऐसा करने वाले पर इंडियन पीनल कोड (Indian penal code) यानी आईपीसी (IPC) की धारा (section) 313 के तहत मामला बनेगा। आरोपी को दोष सिद्ध होने पर 10 साल तक कैद हो सकती है।

इसके अतिरिक्त यदि बगैर सहमति कराए अबॉर्शन के दौरान महिला की मौत हो जाए तो दोषी को उम्रकैद तक का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त आपको यह भी बता दें कि हमारा कानून बच्चे को मां से उसकी मर्जी के खिलाफ दूर करने का अधिकार नहीं देता। यदि कोई ऐसा करता है तो वह क्रूरता की श्रेणी में आएगा। ऐसे में उसे आईपीसी की धारा 498 (ए) के तहत दोषी माना जाएगा। वह दंड का भागी होगा।

2. बच्चे गोद लेने का अधिकार:

मित्रों, एक मां के रूप में महिला को गोद लेने का भी अधिकार है। वह अपने पति की सहमति से बच्चा गोद ले सकती है। विशेष बात यह है कि यदि महिला के पति की मौत हो चुकी है अथवा वह तलाकशुदा है तो भी बच्चा गोद ले सकती है। मां की संपत्ति में उसकी इस गोंद ली संतान का भी वैसा ही अधिकार होता है, जैसा कि उसकी जैविक यानी बायोलॉजिकल (biological) संतान का।

3. बच्चों से भरण पोषण लेने का अधिकार :

साथियों, आपको बता दें कि एक मां को बच्चों से भरण पोषण लेने का अधिकार है। यदि बच्चे अपनी मां का ढंग से भरण-पोषण नहीं कर रहे हैं तो मां सीआरपीसी (CRPC) की धारा-125 के अंतर्गत उनके खिलाफ कोर्ट जा सकती है। आपको बता दें दोस्तों कि सरकार ‘द मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स ऐंड सीनियर सिटिजन एक्ट (the maintenance and welfare of parents and senior citizens act) -2007 भी ला चुकी है।

इस एक्ट के जरिए मां बच्चों से गुजारा भत्ता ले सकती है। यदि मां शिकायत करती है तो ट्रिब्यूनल द्वारा उसके बच्चों को नोटिस जारी किया जाता है। वह अधिकतम तीन माह यानी 90 दिनों के भीतर अर्जी को निपटाता है। इसके अंतर्गत प्रत्येक माह 10 हजार रुपए तक गुजारा भत्ता दिए जाने का प्रावधान है। मित्रों, विशेष बात यह है कि बच्चे ट्रिब्यूनल (tribunal) के फैसले के खिलाफ अपील (appeal) नहीं कर सकते लेकिन यदि मां ट्रिब्यूनल के फैसले से संतुष्ट नहीं तो वह अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने अपील कर सकती है।

4. प्रताड़ना के खिलाफ शिकायत का अधिकार :

एक मां को अपने बच्चों की प्रताड़ना के खिलाफ शिकायत का अधिकार है। यदि बच्चे किसी तरह से भी मां को प्रताड़ित करते हैं, उसे कोई शारीरिक नुकसान पहुंचाते हैं अथवा धमकाते हैं तो मां उनके खिलाफ संबंधित पुलिस थाने (police station) में शिकायत दर्ज (complaint register) करा सकती है। यदि यहां यानी पुलिस स्टेशन में इस मां की बात नहीं सुनी जाती और कोई कार्रवाई नहीं की जाती तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।

5. पुश्तैनी संपत्ति में अधिकार :

एक मां का पुश्तैनी संपत्ति पर भी अधिकार होता है। वह उस हिस्से को अपने लिए इस्तेमाल कर सकती है। यदि इच्छा हो तो वह उसे बेच भी सकती है। उसे इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। दोस्तों, यहां आपको यह भी बता दें कि यदि संपत्ति महिला की खुद की अर्जित की हुई है तो उसकी मालकिन वह खुद होती है। इस संपत्ति के इस्तेमाल एवं उसे बेचने का अधिकार उसका स्वयं होता है। बतौर मां इस अधिकार में उसका कोई बच्चा दखल नहीं दे सकता।

यदि ऐसी संपत्ति में वह अपने बेटे-बहू के साथ रह रही है। एवं वे उसे प्रताड़ित करते हैं तो महिला अपनी संपत्ति से बेटे को बेदखल भी कर सकती है। इसके अतिरिक्त महिला चाहे तो अपनी संपत्ति की वसीयत किसी को भी कर सकती है। साथियों, यह भी जान लीजिए कि एक मां को भी अपने मृत बेटे की संपत्ति में उतना ही हिस्सा विरासत में मिलता है, जितना कि उसकी पत्नी एवं बच्चों को। अगर पिता की मृत्यु के पश्चात बच्चे परिवार की संपत्ति का बंटवारा करते हैं, तो मां भी प्रत्येक बच्चे के समान ही संपत्ति में हकदार होती है।

6. मातृत्व अवकाश लाभ अधिकार :

मित्रों, आपको जानकारी दे दें कि मातृत्व लाभ अधिनियम (maternity benefits act)- 2017 के अनुसार गर्भवती महिला 26 सप्ताह के मातृत्व अवकाश (maternity leave) की अधिकारी होती है। लेकिन यहां शर्त यह है कि वह अपनी दो गर्भावस्था के लिए ही यह अवकाश ले सकती है। दोस्तों, खास बात यह है कि नए संशोधन अधिनियम (ammendment act) में उन मांओं को भी कानून में 12 सप्ताह का अवकाश देने का प्रावधान किया गया है, जिन्होंने तीन माह अथवा उससे छोटे शिशु को गोद लिया हो।

हमारे देश में मां के अधिकारों के प्रति कितनी जागृति है? (To which extent there is awareness to mother’s rights in our country?)

मित्रों, शहरीकरण के पश्चात से निश्चित रूप से हमारे देश की महिलाएं जागरूक हुई हैं और अपने अधिकारों के प्रति सचेत हुई हैं। लेकिन बात यदि मां के अधिकारों की करें तो हमारे देश की मांएं अभी भी अपने अधिकारों के प्रति अभी बहुत जागरूक नहीं हैं। ऐसी ढेरों महिलाएं हैं जो अपने बच्चों की प्रताड़ना की शिकार होती हैं और बजाय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट या कोर्ट कचहरी के वृद्ध आश्रमों में जाकर अपना जीवन यापन करती हैं।

इसके लिए हमारा सामाजिक सिस्टम (social system) भी बहुत हद तक जिम्मेदार है। यहां मां बाप को तो बच्चों की ग़लत परवरिश के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, लेकिन बच्चों के लिए कोई मजबूत चेक सिस्टम नहीं विकसित किया गया है। हमारे देश के लोग इस बात पर भरोसा करते हैं कि ‘पूत कपूत सुने हैं पर न माता सुनी कुमाता’। मां को लगता है कि एक दिन उनकी ममता बच्चों को सही राह पर ला देगी। वे कोर्ट के लफड़ों में पड़ने से बचती हैं। उनकी यह सोच और रुख उनकी जिंदगी की दिशा बिगाड़ने में बहुत हद जिम्मेदार होते हैं।

एक मां के क्या क्या अधिकार हैं?

इन अधिकारों की सूची हमने आपको ऊपर पोस्ट में दी है। आप वहां से देख सकते हैं।

क्या एक मां का पुश्तैनी संपत्ति में अधिकार होता है?

जी हां, एक मां का पुश्तैनी संपत्ति में अधिकार होता है।

मां का सबसे बुनियादी अधिकार क्या है?

एक मां का सबसे बुनियादी अधिकार बच्चे को जन्म देने का है।

क्या मां बच्चों से भरण पोषण मांग सकती है?

जी हां, मां को बच्चों से आश्रय एवं भरण पोषण का अधिकार है।

यदि बच्चे मां को प्रताड़ित करते हैं तो वह क्या कर सकती है?

यदि बच्चे मां को प्रताड़ित करते हैं तो वह नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकती है।

यदि बच्चे मां को भरण पोषण से इंकार करते हैं तो उसके पास क्या रास्ता है?

यदि बच्चे मां को भरण पोषण से इंकार करते हैं तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।

मित्रों, हमने आपको इस पोस्ट (post) में बताया कि एक महिला के क्या क्या अधिकार होते हैं। स्त्री अधिकारों के प्रति जागरूकता के मद्देनजर इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें। यदि इस पोस्ट के संबंध में आपका कोई सुझाव अथवा सवाल है तो उसे बेहिचक नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स (comment box) में कमेंट (comment) कर हम तक पहुंचा सकते हैं। ।।धन्यवाद।।

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