वाहन बीमा ट्रांसफर कैसे करें? नो क्लेम बोनस यानी एनसीबी क्या है?

गाड़ियों के शौकीन कुछ कुछ समय के बाद अपनी गाड़ियां बदलते रहते हैं। वे अपनी पुरानी गाड़ियां बेच देते हैं। उधर, ऐसे लोग भी कम नहीं जो सीखने के लिए अथवा अपनी चौपहिया वाहन की आवश्यकता पूरी करने के लिए सेकंड हैंड गाड़ियां खरीदते हैं। कई लोग ये गाड़ियां खरीद तो लेते हैं, लेकिन वाहन बीमा ट्रांसफर करने को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं होते, जबकि उन्हें यह बीमा अवश्य ट्रांसफर कराना चाहिए।

आज इस पोस्ट में हम आपको वाहन बीमा क्या होता है? उसे ट्रांसफर कराना क्यों जरूरी है? वाहन बीमा ट्रांसफर होने की प्रक्रिया क्या है? इसके लिए कौन कौन से दस्तावेज चाहिए? जैसे बिंदुओं पर आपको जानकारी देंगे-

वाहन बीमा क्या होता है?

जिस प्रकार बीमा व्यक्ति को किसी भी तरह की दुर्घटना आदि के खिलाफ सुरक्षा कवर प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार वाहन बीमा वाहन को किसी दुर्घटना के खिलाफ सुरक्षा कवर प्रदान करता है। इनमें डकैती, चोरी, दंगा, बिजली, विस्फोट आदि के खिलाफ कवर शामिल है।

वाहन बीमा के लाभ [Benefits of auto insurance] –

वाहन बीमा आवश्यक है। इसके कई लाभ हैं। जैसे दुर्घटना की स्थिति में आप वित्तीय हानि अथवा शारीरिक हानि अथवा दोनों सहन करते हैं। मोटर बीमा आपके वित्तीय नुकसान को कम करने में सहायता करता हैं। जब आपका वाहन किसी व्यक्ति या उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है तो कानूनन आपको उसके नुकसान की भरपाई करनी पड़ती है। ऐसे में थर्ड पार्टी बीमा आपके नुकसान को कम करता है।

वाहन बीमा ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया क्या है [process to transfer insurance policy] -

वाहन बीमा के कितने प्रकार हैं [types of vehicle insurance ] –

वाहनों के लिहाज से वाहन बीमा तीन प्रकार का होता है। पहला दोपहिया वाहन बीमा, दूसरा निजी कार इंश्योरेंस एवं तीसरा कामर्शियल वाहन बीमा। इसके अतिरिक्त लाभ के आधार पर भी वाहन बीमा का वर्गीकरण किया गया है। यह भी दो प्रकार का होता है-थर्ड पार्टी बीमा एवं पैकेज पालिसी बीमा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि थर्ड पार्टी बीमा पालिसी तीसरे पक्ष की ओर से आपकी देयता को कवर करती है। यानी यदि आपका वाहन किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाता है तो थर्ड पार्टी बीमा आपके वाहन द्वारा तीसरे पक्ष की संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करता है। भारतीय मोटर वाहन अधिनियम-1988 के मुताबिक सड़क पर वाहन चलाने के लिए इंश्योरेंस अनिवार्य है।

वाहन बीमा ट्रांसफर कैसे होता है?

यदि आपको जानकारी नहीं तो बता दें कि मोटर यान अधिनियम यानी मोटर व्हीकल एक्ट-1988 की धारा 157 में बीमा प्रमाण पत्र के ट्रांसफर की व्यवस्था दी गई है। इसके अंतर्गत वाहन बिक्री के 14 दिन बाद वाहन बीमा ट्रांसफर हो जाना चाहिए। पहले 14 दिन में गाड़ी पर थर्ड पार्टी कवर स्वतः ट्रांसफर हो जाता है। लेकिन ओन डेमेज कवर नए धारक को पालिसी ट्रांसफर होने के बाद ही लागू होता है।

यदि 14 दिन के भीतर वाहन बीमा ट्रांसफर नहीं किया जाता तो 15वें दिन से थर्ड पार्टी कवर समाप्त हो जाता है। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथारिटी आफ इंडिया (insurance regulatory and development authority of India) यानी आईआरडीएआई (IRDAI) के नियमों के मुताबिक वाहन बीमा क्लेम करते वक्त रजिस्ट्रेशन एवं बीमा दस्तावेजों पर एक ही नाम और पता होना आवश्यक है। अन्यथा क्लेम स्वीकार नहीं होता।

वाहन बीमा ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया क्या है [process to transfer insurance policy] –

बीमा पालिसी ट्रांसफर करने के लिए गाड़ी खरीदने के प्रमाण पत्र पेश करने सबसे जरूरी हैं। ट्रांसफर आरसी, फार्म-29 यानी मोटर वाहन मालिकाना हक हस्तांतरण का नोटिस, एवं फार्म 30 intimation एप्लीकेशन एवं मोटर वाहन मालिकाना हक का हस्तांतरण भरें। इस पर गाड़ी बेचने वाले के भी साइन होने आवश्यक हैं। वाहन बीमा ट्रांसफर फीस के साथ ही पुरानी बीमा पालिसी की कापी भी अटैच करनी होगी। आरसी में बदलाव के समय कुछ समय आरटीओ आफिस में भी लगता है। ट्रांसफर प्रक्रिया एक नजर में-

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अपने स्टेट आरटीओ की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं –

सबसे पहले आपको अपने स्टेट की आरटीओ की वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट से आपको से फार्म-28, 29 एवं फार्म 90 डाउनलोड करें। और इन फॉर्म का प्रिंट आउट निकाल ले। डाउनलोड फॉर्म 28, डाउनलोड फॉर्म 29
वाहन बीमा ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया क्या है [process to transfer insurance policy]

फार्म भरे –

फार्म लेकर आपको इन्हें सावधानीपूर्वक सभी पूछी गई जानकारी भरनी है। सभी जानकारी आपको सही-सही करनी है ताकि आपका फार्म किसी प्रकार से रिजेक्ट ना हो। फार्म भरकर संबंधित आरटीओ में सभी दस्तावेज संलग्न कर जमा करें।
वाहन बीमा ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया क्या है [process to transfer insurance policy]

क्लीयरेंस सर्टिफिकेट ले –

आरटीओ से आप फार्म जमा करने और बिक्री के सुबूत के तौर पर क्लियरेंस सर्टिफिकेट ले लें।

इंश्योरेंस कंपनी ऑफिस में दस्तावेज जमा करें –

आगे आपको अपने सभी दस्तावेजों को इंश्योरेंस कंपनी की ऑफिस में जमा करने की आवश्यकता है । आप अपने इंश्योरेंस एजेंट के माध्यम से अथवा स्वयं ऑफिस में जाकर सभी दस्तावेज जमा कर सकते हैं।

फीस जमा करें –

सारी प्रक्रिया पूरी करने के लिए आपको निर्धारित फीस जमा करना होगा। आप विभाग द्वारा निर्धारित फीस जमा कर दें।

पॉलिसी बॉन्ड प्राप्त करें

अब आपको आपके नाम की पालिसी एक ईमेल अथवा कूरियर के माध्यम से भेज दी जाएगी।

वाहन बीमा ट्रांसफर करने के लिए आवश्यक दस्तावेज –

यद्यपि अपने नाम पर पालिसी ट्रांसफर करने के लिए वे दस्तावेज बहुत हैं, जिनका जिक्र हमने उपर किया है। एक नजर में देख लीजिए, वाहन बीमा ट्रांसफर करने के लिए इन दस्तावेजों की आवश्यकता है-

  • पंजीकरण प्रमाण पत्र यानी आरसी, फार्म 29 की नई प्रति।
  • पुरानी पालिसी के नए कागजात।
  • पुराने policy holder से नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी।
  • नया एप्लीकेशन फार्म।
  • बीमा कंपनी द्वारा जारी जांच रिपोर्ट।
  • नोक्लेम बोनस की डिफरेंस रकम।

नो क्लेम बोनस यानी एनसीबी क्या है?

हमने ऊपर नो क्लेम बोनस (no claim bonus) यानी एनसीबी (ncb) का जिक्र किया। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि बीमाकर्ता के द्वारा पालिसी होल्डर को दी गई छूट है। यह तब मिलता है, जब कार बीमा की पालिसी अवधि में मोटर बीमा कंपनियों द्वारा एक भी क्लेम न दिया जाए। इसे पालिसी होल्डर के लिए एक तरह का इनाम भी समझ सकते हैं। पालिसी रिन्यूअल के वक्त दिए जाने वाले कार बीमा प्रीमियम पर यह इनाम यानी डिस्काउंट मिलता है।

यदि पालिसी होल्डर बीमित कार बेच दे व नई गाड़ी खरीद ले तो भी पालिसी रीन्यू कराने पर एनसीबी उसी के पास रहेगा। यानी नो क्लेम बोनस पालिसी होल्डर के नए कार खरीदने पर उस पर ट्रांसफर हो जाएगा। यदि पालिसी होल्डर दूसरी कंपनी से बीमा कराना चाहता है तो यह नो क्लेम बोनस एक कंपनी से दूसरी कंपनी को भी ट्रांसफर किया जा सकता है।

एनसीबी को कैसे ट्रांसफर किया जा सकता है?

इसे ट्रांसफर करना बेहद आसान है। सबसे पहले पालिसी होल्डर को यह तय करना होगा कि वह नई पालिसी आनलाइन लेना चाहता है, आफलाइन लेना चाहता है अथवा एजेंट से लेना चाहता है। यदि वह इंश्योरेंस आनलाइन लेना चाहता है तो इसे ट्रांसफर करने के लिए उसे अपनी नई बीमा कंपनी को सही एनसीबी, अपनी पुरानी इंश्योरेंस कंपनी का नाम, पूरा पालिसी नंबर बताना होगा।

कंपनी स्वतः एनबीसी को पुरानी से नई कार इंश्योरेंस पॉलिसी (insurance policy) को ट्रांसफर कर देगी।
यदि कार का मालिक नई पालिसी एजेंट अथवा आनलाइन लेना चाहता है तो उसे इन steps को फालो करना होगा-

  • पुरानी बीमा कंपनी से संपर्क करना होगा।
  • एनसीबी ट्रांसफर करने के लिए आवेदन करना होगा।
  • अपने सभी दस्तोवज सबमिट करने होंगे।
  • बीमा कंपनी एनसीबी सर्टिफिकेट देगी।
  • एनसीबी सर्टिफिकेट नई बीमा कंपनी को दे दें।
  • यह कंपनी एनसीबी ट्रांसफर कर देगी।

एनसीबी ट्रांसफर के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • ट्रांसफर की एप्लिकेशन
  • कार इंश्योरेंस की कापी
  • लेनदार-खरीदार समझौता फार्म यानी फार्म 29 व 30
  • पुरानी आरसी ट्रांसफर की कापी, मालिकाना हस्तांतरण प्रमाण पत्र
  • डिलीवरी नोट की कापी
  • बुकिंग रसीद की कापी
  • एनसीबी सर्टिफिकेट

एनसीबी को एक उदाहरण से ऐसे समझें

मान लीजिए कि किसी गाड़ी की आईडीवी यानी इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (insured decleared value) चार लाख रुपए है। ऐसे में उसका पहले साल का डेमेज प्रीमियम 12 हजार रूपये होगा। यदि पालिसी होल्डर ने कोई क्लेम नहीं किया तो उसे 20 प्रतिशत डिस्काउंट मिलेगा। उसका प्रीमियम 12 हजार के स्थान पर 9600 रह जाएगा।

इस प्रकार आपने देखा कि पालिसी होल्डर ने क्लेम न करके ढाई हजार रूपये की बचत करी। इसी प्रकार ओडी यानी ओम डेमेज प्रीमियम पर बचत की गई धनराशि हर साल डिस्काउंट के साथ बढ़ता रहता है।

आईआरडीएआई के एनसीबी के लिए निर्धारित नियम है, यह उसी के अनुसार हर वर्ष इस प्रकार बढ़ती है-

  • पहले क्लेम के नवीनीकरण के समय-20 प्रतिशत
  • दूसरे क्लेम के नवीनीकरण के वक्त-25 फीसदी
  • तीसरे क्लेम के मुफृत नवीनीकरण के वक्त-25 प्रतिशत
  • चैथे क्लेम के मुफत नवीनीकरण के समय-45 प्रतिशत
  • पांचवे क्लेम फ्री रिन्यूअल के समय-50 फीसदी

एनसीसी कब खत्म होगा

कुछ ऐसी भी स्थितियों का निर्धारण किया गया है, जिनमें एनसीबी खत्म हो जाता है। अर्थात पालिसी होल्डर को उसका लाभ नहीं मिलता। ये इस प्रकार हैं-

  • यदि पालिसी के एक साल के भीतर क्लेम नहीं किया तो अगले साल यह नहीं मिलेगा।
  • यदि पालिसी खत्म होने की निर्धारित तिथि से अगले तीन माह के भीतर पालिसी रिन्यू नहीं कराई तो यह नहीं मिलेगा।

इन स्थितियों में बीमा कंपनी क्लेम देने को बाध्य नहीं, यदि-

  • दुर्घटना होने के 15 दिन के भीतर कंपनी को सूचना न दी जाए।
  • बीमा कंपनी से अनुमति बिना वैकल्पिक fuel किट जैसे सीएनजी लगाई गई हो
  • दुर्घटना के समय चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस न हो।
  • दुर्घटना के वक्त चालक नशे में हो
  • प्राइवेट वाहन को व्यावसायिक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा हो।
  • दुर्घटना के वक्त वाहन में क्षमता से अधिक लोग सवार हों

दुर्घटना होने पर वाहन बीमा लेने की प्रक्रिया

  • सबसे पहले दुर्घटना होते ही बीमा कंपनी को सूचित करें।
  • सूचना पर कंपनी सर्वेयर को नुकसान की जांच के लिए भेजेगी।
  • इसके बाद सर्वेयर जांच रिपोर्ट तैयार कर कंपनी को सौंपेगा।
  • इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कंपनी एक निश्चित राशि को मंजूरी देगी।

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वाहन बीमा ट्रांसफर के संबंध में सवाल-जवाब

वाहन बीमा क्यों आवश्यक है?

दुर्घटना की स्थिति में नुकसान कम करने के लिए गाड़ी का बीमा आवश्यक है।

पुरानी गाड़ी बेचते समय बीमा ट्रांसफर क्यों आवश्यक है?

ऐसा न होने पर कोई दुर्घटना होने पर गाड़ी का पहला मालिक ही जिम्मेदार होगा। इसलिए इसे ट्रांसफर करना जरूरी है।

एनसीबी की फुल फॉर्म क्या है?

एनसीबी की फुल फॉर्म नो क्लेम बोनस है।

एनसीबी कब मिलता है?

यदि पहले साल के भीतर कोई इंश्योरेंस क्लेम नहीं किया जाता तो एनसीबी मिलता है।

वाहन के अनुसार बीमा कितने प्रकार का होता है?

वाहन के अनुसार बीमा तीन प्रकार का होता है-दोपहिया वाहन बीमा, प्राइवेट कार बीमा एवं व्यावसायिक वाहन बीमा। ​

हमने आपको वाहन बीमा कैसे ट्रांसफर करें विषय पर उपयोगी जानकारी प्रदान की। आशा है कि इस पोस्ट से आपको यह पूरी तरह क्लियर हो गया होगा कि वाहन बीमा कितना आवश्यक है एवं इसे ट्रांसफर करना भी कितना आवश्यक है। आप इस पोस्ट को अधिकाधिक शेयर करें ताकि अधिक से अधिक लोग वाहन बीमा के प्रति जागरूक हो सकें।। धन्यवाद।।

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