मल्टी लेवल मार्केटिंग क्या है? | यह कैसे काम करता हैं? | Multi level marketing kya hai

Multi level marketing kya hai :– आज हम बात करने वाले हैं मल्टी लेवल मार्केटिंग के बारे में। हमें आशा है कि आपने पहले अवश्य ही इसके बारे में सुन रखा होगा या आपका कोई परिचित इसमें काम करता होगा। पिछले कुछ वर्षों में तो यह तेजी के साथ प्रसिद्ध हुई है। आज से लगभग 10 वर्ष पहले तो इसका बोलबाला था लेकिन आज के समय में यह थोड़ी धीमी अवश्य हो गयी है क्योंकि इसमें अधिकतर फ्रॉड कंपनियां प्रवेश कर गयी थी। अब यह भी जरुरी नहीं है कि हर कंपनी ही फ्रॉड (What is multi level marketing in Hindi) हो।

तो मल्टी लेवल मार्केटिंग एक बहुत ही भारी भरकम शब्द है और इसे समझना उतना ही सरल होता है। साथ ही इसमें काम करना थोड़ा पेचीदा अवश्य हो सकता है। लेकिन यदि आपका काम बन गया तो अवश्य ही आप बहुत सारा पैसा कमाने लग जाते हैं। इसी के साथ ही आप अपने साथ वालों के कारण भी पैसा कमा पाते हैं जो मल्टी लेवल मार्केटिंग की सुंदरता है लेकिन इसी के साथ ही यह अपने साथ कई तरह के जोखिम और खतरे भी लेकर आती (Multi level marketing in Hindi) है।

ऐसे में यह मल्टी लेवल मार्केटिंग होती क्या है और यह किस तरह से काम करती है, इसके बारे में समझना बहुत ही आवश्यक हो जाता है। आज हम आपके साथ इसी मल्टी लेवल मार्केटिंग के बारे में विस्तार से चर्चा करने वाले हैं ताकि आपको इसके बारे में कोई भी शंका ना रहने पाए। आइये जाने मल्टी लेवल मार्केटिंग के बारे (Multi level marketing kya hai in Hindi) में।

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मल्टी लेवल मार्केटिंग क्या है? (Multi level marketing kya hai)

बहुत से लोग मल्टी लेवल मार्केटिंग को गलत समझ लेते हैं लेकिन यह शुद्ध रूप से बिज़नेस करने का ही एक तरीका होता है। अब जैसे कोई व्यक्ति माल बनाता है लेकिन वह उसे सीधे नहीं बेचता है। कहने का अर्थ यह हुआ कि मान लीजिये कि एक फैक्ट्री में माल बन रहा है जो जयपुर में है। अब वह फैक्ट्री वाला व्यक्ति ट्रांसपोर्ट वाले से संपर्क करेगा और उसके जरिये उस माल को दूसरे शहर में पहुंचा देगा जो कि जोधपुर है। तो इस तरह से उस ट्रांसपोर्ट वाले व्यक्ति ने उस माल पर अपना कमीशन कमाया और उसे जोधपुर लेकर चला (Kya hai MLM) गया।

Multi level marketing kya hai

अब जोधपुर में एक बड़ा व्यापारी होगा जिसके पास उस माल को रखने के लिए बड़ा सारा गोदाम होगा। तो वह व्यक्ति उस माल को खरीद लेगा और अपने गोदाम में रख लेगा। अब उस माल को बेचने के लिए वह अपने यहाँ के डिस्ट्रीब्यूटर और डीलर से संपर्क करेगा और उन्हें अलग अलग मात्रा में माल बेच देगा। अब वे डिस्ट्रीब्यूटर उस माल को जोधपुर की अलग अलग दुकानों पर थोड़े और उच्च दाम में बेच देंगे। दुकान पर आने के बाद आप उस माल को खरीदने जाएंगे और वह दुकानदार उस माल को थोड़े और उच्च दाम में अर्थात अपना कमीशन बनाकर आपको बेच (MLM kya hai) देगा।

इस तरह से जो माल फैक्ट्री में 100 रुपये में तैयार हुआ है, वह आपको 200 या 300 रुपये तक में मिलेगा। तो कुछ इसी तरह का काम मल्टी लेवल मार्केटिंग में भी होता है लेकिन इसमें रेफरल के तौर पर पैसा दिया जाता है। इसमें जो डिस्ट्रीब्यूटर होता है, वही उस कंपनी के लिए ग्राहक भी होता है। कहने का अर्थ यह हुआ कि वह उन उत्पादों का स्वयं भी उपयोग कर रहा होता है और दूसरों को भी उसका उपयोग करने को प्रोत्साहित करता है। इसी के साथ ही वह अपने नीचे लोगों को जोड़ता चला जाता (Multi level marketing explained in Hindi) है।

एक तरह से कहा जाए तो इसमें जो व्यक्ति कंपनी का माल खरीद रहा होता है, वह उसका इस्तेमाल तो करता ही है। साथ ही वह अपने नीचे एक व्यक्ति को जोड़ता है और उसे भी कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बना लेता है। तो मल्टी लेवल मार्केटिंग में जो कंपनी के ग्राहक होते हैं, वही कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर भी कहलाते हैं। इस तरह से कंपनी बाकि डिस्ट्रीब्यूटर, दुकानदार, दलाल इत्यादि से पैसा बचा लेती है और ग्राहकों को उसका लाभ मिलता (Network marketing kya hai) है।

मल्टी लेवल मार्केटिंग कैसे काम करता है? (Network marketing kaise ki jati hai)

आपने ऊपर मल्टी लेवल मार्केटिंग क्या होती है, इसके बारे में पढ़ा लेकिन अभी भी आपको अच्छे से समझ नहीं आया होगा। तो आइये हम इसे उदाहरण सहित आपको समझा देते हैं ताकि आप इसे अच्छे से समझ सकें और आपको पता चल सके कि आखिरकार यह मल्टी लेवल मार्केटिंग काम कैसे करती है। तो मान लीजिये कि एक कंपनी साबुन बनाने का काम करती है और अब उसे अपनी साबुन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का काम करना है। उस साबुन का मूल्य 50 रुपये है जिसमें वह ग्राहकों को बेचे जा रही (Multi level marketing kaise ki jaati hai) है।

हालाँकि कंपनी ने इसे केवल 30 रुपये में ही बनाया है लेकिन ग्राहकों के लिए उसकी कीमत 50 रुपये है। तो होगा क्या कि एक व्यक्ति राम, उस कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर है जो उस साबुन का इस्तेमाल करता है। अब राम तो साबुन इस्तेमाल करता ही है लेकिन उसने अपने नीचे श्याम और मोहन को भी जोड़ लिया है जो उस साबुन का इस्तेमाल करने लग गए हैं। तो भविष्य में श्याम और मोहन के द्वारा जितनी भी साबुन खरीदी जाएगी, उसका कुछ कमीशन राम को मिलेगा। मान लीजिये यह कमीशन 5 रुपये (Multi level marketing example in Hindi) है।

अब श्याम ने अपने नीचे नरेश और सुरेश को भी जोड़ लिया है। इस तरह से नरेश और सुरेश भविष्य में जितनी भी साबुन खरीदेंगे तो उसका कमीशन श्याम और राम दोनों को मिलेगा। हालाँकि श्याम को 5 रुपये कमीशन मिलेगा लेकिन राम को थोड़ा कम मिलेगा जो कि 2 या 3 रुपये होगा। वहीं मोहन को कुछ नहीं मिलेगा। उसे कमीशन तभी मिलेगा, जब वह अपने नीचे किसी को जोड़ेगा। तो इसी तरह से यह कमीशन बनता चला जाता है।

मल्टी लेवल मार्केटिंग में पैसा कैसे बनता है? (Network marketing me paise kaise kamaye)

ऊपर आपने यह पढ़ा कि मल्टी लेवल मार्केटिंग काम कैसे करती है लेकिन इसमें पैसा किस तरह से बनता (Multi level marketing me paise kaise kamaye) है, इसके बारे में स्पष्ट रूप से जानना है तो हम ऊपर वाले उदाहरण को ही आगे तक लेकर जाते हैं। आइये पहले एक चित्र के माध्यम से इसे समझ लेते हैं।

                राम
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      श्याम             मोहन
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नरेश        सुरेश

तो मल्टी लेवल मार्केटिंग में राम सबसे पहले जुड़ा और फिर उसने श्याम और मोहन को जोड़ा। फिर श्याम ने नरेश और सुरेश को जोड़ा। तो इसमें जैसे जैसे व्यक्ति समान खरीदता जाता है, तो उससे ऊपर वालों को उसका कमीशन मिलता चला जाता है क्योंकि वह उनके द्वारा ही जुड़ा है। किन्तु ऊपर वाले से मतलब जिसका उससे सीधा संबंध है। उदाहरण के तौर पर यदि पोता कोई सामान खरीद रहा है तो उसका कमीशन उसके पिता, दादा, परदादा इत्यादि को मिलेगा लेकिन उसके चाचा, ताऊ, मामा, फूफा, चचेरे दादा या परदादा को नहीं मिलेगा।

साथ ही यह कमीशन पापा को ज्यादा मिलेगा, दादा को उससे कम और परदादा को उससे कम। अब ऊपर वाले उदाहरण के अनुसार यदि नरेश वह साबुन खरीदता है तो उसके पापा अर्थात श्याम को 5 रुपये मिलेंगे और उसके दादा राम को 2 रुपये मिलेंगे। उसके द्वारा सामान खरीदने पर सुरेश और मोहन को कुछ नहीं मिलेगा। इसी तरह यदि नरेश भी नीचे किसी को जोड़ लेता है तो उसके द्वारा सामान खरीदने पर नरेश को 5 रुपये, श्याम को 2 रुपये और राम को 1 रुपये कमीशन मिलेगा।

तो मल्टी लेवल मार्केटिंग यूँ ही नीचे की ओर चलती जाती है और हर पीढ़ी के साथ खुद को मिलने वाला कमीशन कम होता चला जाता है लेकिन वह मिलता जरुर है। एक समय या पीढ़ी के बाद वह कमीशन खत्म भी हो जाता है क्योंकि फिर कंपनी को अपनी उन्नति भी देखनी होती है। ऐसे में व्यक्ति का जोर सीधे अपने नीचे ही और लोगों को जोड़ने पर होता है।

मल्टी लेवल मार्केटिंग की शोर्ट फॉर्म क्या है? (MLM full form in Hindi)

अब हम बात करते हैं मल्टी लेवल मार्केटिंग की शोर्ट फॉर्म की। तो मल्टी लेवल मार्केटिंग को अंग्रेजी में Multi Level Marketing के रूप में लिखा जाता है और यह अंग्रेजी भाषा का ही शब्द है। ऐसे में इसके तीनो शब्दों के पहले पहले अक्षर को निकाल लिया जाए तो वह MLM बनता है। तो इस तरह से मल्टी लेवल मार्केटिंग की शोर्ट फॉर्म MLM कही जाती है।

इसे यदि हिंदी में लिखना हो तो हम उसे एमएलएम लिख सकते हैं। अब लोगों को मल्टी लेवल मार्केटिंग बोलना बहुत बड़ा लगता है, ऐसे में वे इसकी शोर्ट फॉर्म MLM ही बोल देते हैं जो कि आसान है। आपको बहुत सी कंपनियां इसी MLM स्ट्रेटेजी के तहत आगे बढ़ते हए दिख जाएगी जैसे कि RCM।

मल्टी लेवल मार्केटिंग को और क्या कहते हैं? (Multi level marketing other names in Hindi)

मल्टी लेवल मार्केटिंग को और भी कई नामों से जाना जाता है या उनसे संबंधित माना जाता है। अब आप में से बहुत लोग मल्टी लेवल मार्केटिंग की परिभाषा को पढ़कर यह सोच रहे होंगे कि यह तो कुछ कुछ नेटवर्क मार्केटिंग के जैसी ही है। तो आप गलत नहीं हैं। कई लोग मल्टी लेवल मार्केटिंग को नेटवर्क मार्केटिंग भी कह देते हैं तो कुछ लोग इसे पिरामिड मार्केटिंग भी कहते हैं। हालाँकि पिरामिड मार्केटिंग मल्टी लेवल मार्केटिंग की तुलना में बहुत अलग होती है और पिरामिड मार्केटिंग में अधिकतर गलत काम ही किया जाता है, जिसके बारे में हम आपको नीचे (Other names for multi level marketing in Hindi) बताएँगे।

अब यदि हम मल्टी लेवल मार्केटिंग के अन्य नामों के बारे में बात करें तो इसके सही नाम नेटवर्क मार्केटिंग या रेफरल मार्केटिंग हो सकते हैं। मल्टी लेवल मार्केटिंग में आप अन्य लोगों को किसी कंपनी से जुड़ने के लिए रेफर कर रहे होते हैं जिस कारण इसे रेफरल मार्केटिंग कहा जाता है। वहीं इसके जरिये आप अपना एक नेटवर्क भी बना रहे होते हैं जिस कारण इसे नेटवर्क मार्केटिंग भी कह दिया जाता है।

मल्टी लेवल मार्केटिंग और पिरामिड मार्केटिंग में क्या अंतर है? (Multi level marketing or pyramid scheme difference in Hindi)

अब ऊपर हमने आपको बताया कि बहुत से लोग मल्टी लेवल मार्केटिंग को पिरामिड मार्केटिंग ही समझ लेते हैं लेकिन यह दोनों कई मायनों में एक दूसरे से अलग होती है। पिरामिड मार्केटिंग में अक्सर ऐसे काम होते हैं जो गैर कानूनी होते हैं और इसमें लोगों के साथ धोखाधड़ी करने का प्रयास किया जाता है। आइये दोनों के बीच के अंतर को समझ लेते हैं।

  • मल्टी लेवल मार्केटिंग में कंपनी के द्वारा पैसों के बदले में अपने उत्पाद या सेवाएं बेची जाती है और यह असली होती है जबकि पिरामिड मार्केटिंग में सदस्य बनने के लिए ही पैसा लिया जाता है या फिर केवल ऑनलाइन रूप से ही सेवाएं दी जाती है जो कि एक स्कैम होता है। उदाहरण के तौर पर विदेशी ट्रिप या ऐसा ही कुछ।
  • मल्टी लेवल मार्केटिंग में व्यक्ति अपने नीचे कितने भी लोगों को जोड़ सकता है और इसकी कोई सीमा नहीं होती है जबकि पिरामिड मार्केटिंग में व्यक्ति अपने नीचे केवल दो लोगों को ही जोड़ सकता है। अब उसे और लोग जोड़ने हैं तो वह अपने नीचे जोड़े गए दो लोगों के नीचे जोड़ सकता है।
  • इस तरह से पिरामिड मार्केटिंग में एक के नीचे दो, फिर दो के नीचे 4 और चार के नीचे 8, ऐसे चलता है। जबकि मल्टी लेवल मार्केटिंग में तो पहला व्यक्ति ही अपने नीचे 8 या 80 लोगों को जोड़ सकता है।
  • मल्टी लेवल मार्केटिंग में पूर्ण रूप से कानूनी काम होता है और इसमें बहुत सी बड़ी बड़ी कंपनियां भी काम कर रही हैं जैसे कि RCM जबकि पिरामिड मार्केटिंग में अधिकतर काम गैर कानूनी होते हैं और इनके मालिक भी कभी सामने नहीं आते हैं।
  • मल्टी लेवल मार्केटिंग में सभी तरह की प्रक्रिया पारदर्शी रूप से की जाती है और पैसों का लेनदेन भी सभी के सामने होता है जबकि पिरामिड मार्केटिंग में इसे छुपाया जाता है या इसमें हेरफेर किया जाता है।

इस तरह से आप लोग मल्टी लेवल मार्केटिंग या MLM को पिरामिड मार्केटिंग समझने की गलती ना करें। आप दोनों के बीच इसी बात से ही अंतर कर सकते हैं कि आपको मल्टी लेवल मार्केटिंग से जुड़ने पर या उसका सदस्य बनने पर पैसों के बदले में उतना ही सामान दिया जा रहा है तो वह सही है और केवल बड़े बड़े प्रलोभन दिए जा रहे हैं तो वह फ्रॉड है।

मल्टी लेवल मार्केटिंग के फायदे (Multi level marketing ke fayde)

अब हम आपके सामने मल्टी लेवल मार्केटिंग से होने वाले तरह तरह के फायदों के बारे में बात कर लेते हैं ताकि आपको इसके बारे में बेहतर तरीके से समझ में आ (Multi level marketing benefits in Hindi) सके। बहुत से लोग इसके काम करने के तरीके से समझते हैं कि अवश्य ही यह एक फ्रॉड होता है क्योंकि कौन सी कंपनी कमीशन के तौर पर इतने सारे लोगों को पैसा देगी। तो आप इसके पीछे छुपे हुए मॉडल को पहचानने के लिए इसके लाभ को पढ़िए।

  • जो कंपनियां मल्टी लेवल मार्केटिंग में नहीं होती है, वे अपने प्रोडक्ट और सर्विस को बेचने के लिए विज्ञापनों पर मोटा पैसा खर्च करती है। अब यदि आप एक कोल्ड ड्रिंक की बोतल 35 रुपये में लेते हैं तो उसमें 5 से 10 के आसपास रूपया तो केवल और केवल विज्ञापन पर हुए खर्च के लिए आपसे लिया जाता है।
  • ऐसे में जो कंपनियां मल्टी लेवल मार्केटिंग में हैं, वे अपना यह 5 से 10 रूपया विज्ञापन में खर्च करने की बजाये सीधा अपने ग्राहकों को ही देती है। तभी आपको वो कंपनियां ऐड में नही दिखेगी जो मल्टी लेवल मार्केटिंग में काम करती हैं क्योंकि वो अपना विज्ञापन तो लोगों के जरिये ही करवा रही होती (Network marketing benefits in Hindi) हैं।
  • अब जो कंपनियां ऐड में पैसा खर्च करती हैं, उनका लोगों पर प्रभाव कम पड़ता है जबकि जो कंपनियां मल्टी लेवल मार्केटिंग में हैं, वे सीधा लोगों के जरिये ही अपनी बात को दूसरों तक पहुंचाने का काम करती हैं। इससे माउथ पब्लिसिटी ज्यादा होती है जो उनके हित में है।
  • मल्टी लेवल मार्केटिंग में काम कर रही कंपनियां अपने ग्राहकों की एकमात्र कंपनियां बन जाती हैं क्योंकि जो ग्राहक उसके सामान को बेचने का काम कर रहा होता है तो अवश्य ही वह खुद भी उसके बनाये सामान का इस्तेमाल करता रहेगा।
  • इसके जरिये कंपनी बीच के दलालों, डिस्ट्रीब्यूटर इत्यादि पर खर्च होने वाला पैसा भी बहुत हद्द तक बचा लेती है क्योंकि उसके ग्राहक ही उसके लिए डिस्ट्रीब्यूटर, गोदाम, दुकानदार इत्यादि बन जाते हैं।

इस तरह से मल्टी लेवल मार्केटिंग करने के अपने बहुत फायदे देखने को मिलते हैं जो कंपनी और उसके ग्राहक दोनों के लिए ही होते हैं। जहाँ कंपनी अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों के जरिये बेच रही होती है तो वहीं उसके ग्राहक भी हर उत्पाद की बिक्री पर कमीशन को कमा रहे होते हैं।

मल्टी लेवल मार्केटिंग के नुकसान (Multi level marketing ke nuksan)

अब मल्टी लेवल मार्केटिंग के अपने फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। जब भी किसी चीज़ के फायदे होते हैं तो अवश्य ही उससे कुछ नुकसान भी सामने आते हैं। ऐसे में मल्टी लेवल मार्केटिंग के क्या कुछ नुकसान देखने को मिलते हैं, आइये उन पर एक नज़र डाल लेते हैं।

  • मल्टी लेवल मार्केटिंग पर आधारित कंपनियां पूर्ण रूप से अपने ग्राहकों के द्वारा की जा रही पब्लिसिटी पर ही निर्भर करती है। ऐसे में ऑनलाइन, डिजिटल, सोशल मीडिया, टीवी, अख़बार इत्यादि पर उसकी उपस्थिति ना के बराबर ही होती है।
  • अब यदि वह ऑनलाइन रूप से अपना कहीं प्रचार ही नहीं कर रही है तो वह ग्राहकों के एक बड़े तबकों से वंचित रह जाती है। ऐसे में मल्टी लेवल मार्केटिंग के ग्राहक भी सीमित होते हैं।
  • अब ऐसी कंपनियां ऑनलाइन नहीं होती हैं और साथ ही उनका मॉडल पिरामिड मार्केटिंग से मिला जुला होने के कारण लोग इसे शक की नज़र से भी देखते हैं। इस कारण इनकी छवि नकारात्मक बन जाती है।
  • इसी कारण लोग इनके उत्पाद खरीदने से कतराते हैं या इसके सदस्य नहीं बनते हैं। ऐसे में उसके लिए काम करने वाले लोगों को खासी समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • अन्य फेमस कंपनियों के सामने जो लगातार अपनी ऐड करती हैं, उनके सामने मल्टी लेवल मार्केटिंग के बिज़नेस पर आधारित कंपनियों के सामान को लोग कमतर आंकते हैं और उनकी गुणवत्ता पर भी शक करते हैं।

तो यह मल्टी लेवल मार्केटिंग में लिप्त कंपनियों की अपनी अलग समस्याएं हैं जिनसे हर कोई जूझ रहा है। ऐसे में कंपनियों ने भी अपने ग्राहकों को अच्छे से ट्रेनिंग देने का काम किया है ताकि वे लोगों को इसके बारे में अच्छे से समझा सकें और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर सकें

मल्टी लेवल मार्केटिंग क्या है – Related FAQs

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प्रश्न: मल्टी लेवल मार्केटिंग का मतलब क्या होता है?

उत्तर: मल्टी लेवल मार्केटिंग में जो व्यक्ति कंपनी का माल खरीद रहा होता है, वह उसका इस्तेमाल तो करता ही है। साथ ही वह अपने नीचे एक व्यक्ति को जोड़ता है और उसे भी कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बना लेता है।

प्रश्न: मल्टी लेवल मार्केटिंग के क्या फायदे हैं?

उत्तर: मल्टी लेवल मार्केटिंग के फायदे आप ऊपर का लेख पढ़ कर विस्तार से जान सकते हो।

प्रश्न: मल्टीलेवल मार्केटिंग कैसे काम करती है?

उत्तर: मल्टी लेवल मार्केटिंग कैसे काम करती है यह समझाने के लिए हमने ऊपर के लेख में एक उदहारण दिया है आप वो ध्यान से पढ़ लीजिए।

प्रश्न: भारत की नंबर वन नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी कौन सी है?

उत्तर: भारत की नंबर वन नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी Amway है।

प्रश्न: मल्टी लेवल मार्केटिंग खराब क्यों है?

उत्तर: मल्टी लेवल मार्केटिंग केवल कुछ ग्राहकों तक ही सीमित है और इसके प्रोडक्ट खरीदते समय ग्राहक संशय में रहते हैं यह इसके कुछ नुकसान हैं।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने जाना कि मल्टी लेवल मार्केटिंग क्या है। साथ ही आपने जाना कि मल्टी लेवल मार्केटिंग कैसे काम करता है इसमें पैसे कैसे बनते हैं और इसके फायदे और नुकसान क्या हैं इत्यादि। आशा है कि आपको मल्टी लेवल मार्केटिंग के बारे में सारी जानकारी इस लेख के माध्यम से मिल गई होगी। फिर भी यदि कोई प्रश्न आपके मन में शेष है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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