मानसिक रूप से मजबूत कैसे बने? मानसिक रूप से मजबूत बनने के उपाय

Mansik roop se majboot kaise bane, क्या आप मानसिक रूप से परेशान हैं या फिर आपको लगता हैं कि आप मानसिक रूप से कमजोर है। दरअसल मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण (Mentally strong kaise bane) व्यक्ति को एक नही बल्कि कई तरह की परेशानियों से दो चार होना पड़ता है। ऐसे में मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति ना तो सही से काम (Mentally strong kaise rahe) कर पाता हैं और ना ही आगे के लिए सही निर्णय ले पाता हैं।

यदि आप भी मानसिक रूप से मजबूत होने के ऊपर खोज रहे हैं तो आज आपको इस लेख के माध्यम से मानसिक रूप से मजबूत बनने और अपने दिमाग को तेज बनाने की (Mansik majbuti ke upay) सभी जानकारी व उपाय विस्तार से जानने को मिलेंगे। इसी के साथ आप जानेंगे (Mansik roop se strong kaise bane) कि मेंटली स्ट्रोंग बनने के लिए क्या क्या किया जा सकता हैं। आइए जाने मानसिक रूप से मजबूत होने के उपाय के बारे में।

मानसिक रूप से मजबूत कैसे बने (Mansik roop se majboot kaise bane)

यदि आप सच में मानसिक रूप से मजबूत बनना चाहते हैं तो उससे पहले आपका यह जानना आवश्यक हैं कि आखिरकार मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति होता कैसा है या फिर उसके क्या लक्षण है। दरअसल यदि आपको मानसिक कमजोरी के बारे में या इसके सही कारण के बारे में ही अच्छे से जानकारी नही हैं तो फिर आप कैसे ही अपने आप को मानसिक रूप से मजबूत रख पाएंगे। इसलिए आइए चरण दर चरण इसके बारे में जाने।

मानसिक रूप से मजबूत कैसे बने? मानसिक रूप से मजबूत बनने के उपाय

मानसिक कमजोरी क्या है (Mansik kamjori kya hai)

मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के कई तरह के लक्षण हो सकते है। इसी के साथ यदि आप सोचते हैं कि आप शारीरिक रूप से मजबूत और हट्टे कट्टे हैं तो इसका मतलब मानसिक रूप से भी मजबूत होंगे तो आप गलत है। दरअसल यह एक तरह से बिल्कुल अलग समय हैं जिसके शारीरिक बल, धन, वैभव, संपदा इत्यादि से कुछ भी लेना देना नही है। यह केवल और केवल हमारे मन पर ही निर्भर करता है।

इसलिए मानसिक कमजोरी का संबंध हमारे शरीर से ना होकर हमारे मन से होता है। एक शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति या निर्धन व्यक्ति भी (Mentally weak meaning in Hindi) मानसिक रूप से मजबूत हो सकता हैं या फिर एक धनी या बलशाली व्यक्ति भी मानसिक रूप से मजबूत हो सकता है।

कुल मिलाकर हमारे कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि आपका मन कमजोर है या कच्चा है तो आप मानसिक रूप कमजोर कहलाएंगे। मानसिक रूप से कमजोर होना (Mansik kamjori ka ilaaj) अर्थात किसी भी चीज़ को सही से नही कर पाना या भावनाओं को अत्यधिक रूप में दिखाना या फिर उन्हें व्यक्त ही नही कर पाना, इत्यादि हो सकते हैं। इसे आप बेहतर तरीके से समझने के लिए मानसिक कमजोरी के कुछ लक्षण भी जान लीजिए।

मानसिक कमजोरी के लक्षण (Mansik kamjori ke lakshan)

मानसिक कमजोरी को बेहतर तरीके से समझने के लिए आपका इसके लक्षणों के बारे में जानना आवश्यक है। इसी के द्वारा आप अच्छे से समझ (Mansik kamjori ke lakshan in Hindi) पाएंगे कि आखिरकार मानसिक कमजोरी कैसी होती हैं या फिर एक मानसिक कमजोर व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा होता हैं। आइए जाने मानसिक कमजोरी के लक्षण:

#1. भावनाओं पर नियंत्रण नही होना

मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान यही होती हैं कि उसका अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नही होता है। दरअसल ऐसे व्यक्तित्व वाले लोग अक्सर ही किसी भी स्थिति में अपनी भावनाओं को एक सीमा से बाहर व्यक्त करते हैं। या फिर यूँ कहे कि मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को किसी भी चीज़ से ज्यादा फर्क पड़ता हैं।

ऐसे में यदि उसके सामने कोई स्थिति ऐसी बने जो क्रोध करने के लिए हो तो वह अत्यधिक क्रोधित हो जाएगा और सामने वाले पर बहुत गुस्सा करेगा। यदि कोई बात दुःख की हैं तो वह रोने लगे या बहुत ज्यादा भावुक हो जाए। जैसे कि किसी फिल्म में सीरियल में कोई भावुक ससेने आने पर स्वयं भी इमोशनल हो जाना इत्यादि। कहने का अर्थ यह हुआ कि मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति अपनी भावनाओं को सही से व्यक्त कर पाने में अक्षम होते हैं।

#2. सही से उत्तर नही दे पाना

मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति की एक पहचान और भी होती है जो उसके व्यक्तित्व को दिखाती है। दरअसल वह किसी से बात करते समय किसी कटाक्ष का या किसी अन्य चीज़ का सही से उत्तर दे पाने में खुद को असमर्थ पाते हैं। यदि कोई उन पर टोंट मार रहा हैं या मजाक उदा रहा हैं तो वह बदले में उसे सही से उत्तर दे पाने में असमर्थ होते हैं।

ज्यादातर मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति उस स्थिति में या तो चुप रहते हैं या फिर सीधे व स्पष्ट बात कहकर अपना प्रतिरोध दर्ज करवाते हैं। इसे खिजियाने की समस्या भी कहा जा सकता हैं जो मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति की पहचान होती हैं।

#3. जल्दी निर्णय नही ले पाना

मानसिक रूप से कमजोर होना केवल यही तक सीमित नही हैं कि आप दूसरों के सामने सही से बात ना कर पाए या फिर अपनी भावनाओं को सही से व्यक्त ना कर पाए। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति अपनी चीजों को लेकर या अन्य चीज़ों को लेकर हमेशा अनिर्णय की स्थिति में रहता हैं।

जल्दी निर्णय ना ले पाने की स्थिति में यह उसके लिए ही बुरा सिद्ध हो जाती हैं। जब भी उनके सामने कोई चीज़ आती हैं तो वह उसमे उलझ कर रह जाते हैं या फिर निर्णय लेने से घबराते हैं।

#4. आत्म विश्वास की कमी

यह मानसिक कमजोरी के प्रमुख लक्षणों में से एक हैं। एक तरह से हम इसे एक दूसरे का पर्यायवाची भी कह देंगे तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति में आत्म विश्वास की कमी तो देखने को मिलेगी ही मिलेगी। कहने का अर्थ यह हुआ कि बाकि सभी लक्षणों को तो वह धीरे धीरे सही कर देगा या उससे पार पा लेगा लेकिन आत्म विश्वास उसमे तब भी नही होगा।

एक तरह से इसे दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यदि व्यक्ति में आत्म विश्वास जागृत हो जाए तो उसकी मानसिक कमजोरी भी बहुत सीमा तक दूर हो जाएगी। ऐसे में स्वयं पर विश्वास की कमी होना भी मानसिक कमजोरी का एक प्रमुख लक्षण कहा जा सकता हैं।

#5. किसी चीज़ का डर सताना

जो व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर होते हैं उनमे किसी अनजान चीज़ का भय भी सताता रहता हैं। दरअसल यह ऊपर बताये गए लक्षणों के कारण ही होता हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को हमेशा यही डर लगा रहता हैं कि क्या उसके द्वारा लिया गया निर्णय सही रहेगा या उससे कुछ उल्टा हो जाएगा, क्या वह प्रतिरोध करेगा तो सही रहेगा या कोई बुरा मान जाएगा इत्यादि।

ऐसे में अनजान चीज़ का डर, सम्मान ना मिल पाने का डर, अपनों का साथ छूट जाने के डर, किसी चीज़ के गलत हो जाने का डर, इत्यादि कई तरह के डर मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के व्यक्तित्व का भाग होते हैं।

मानसिक कमजोरी के कारण (Mansik kamjori ke karan)

अब जब आप मानसिक कमजोरी के बारे में इतना सब जान चुके हैं और मानसिक कमजोरी के क्या क्या लक्षण होते हैं इसके बारे में भी अच्छे से जान चुके हैं तो अब हम आपको मानसिक कमजोरी के कारण भी बताएँगे। दरअसल मानसिक मजबूती के उपाय जानने से पहले आपका यह भी जानना आवश्यक हैं कि आखिरकार मानसिक कमजोरी के क्या क्या कारण हो सकते हैं। यदि आपको इसके कारण ही सही से नही पता होंगे तो फिर आप इसके लिए उपाय भी कैसे कर पाएंगे।

#1. सम्मान की कमी

मानसिक रूप से जिनका व्यक्तित्व कमजोर होता हैं अक्सर उनमे या उनके परिवार में यह देखा जाता हैं कि उन्हें मिलने वाला सम्मान उतना नही मिल पाता जिसके वे हक़दार हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति की परिवार में उपेक्षा की जाती है। कई बार तो यह उपेक्षा उसके दोस्तों या अपनों के द्वारा भी की जाती हैं।

इसी उपेक्षा के कारण ही या खुद को मिलने कम सम्मान के कारण वह व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है। यही कारण हैं कि वह किसी से बातकरते समय अपनी भावनाओं को सही से व्यक्त नही कर पाता हैं या फिर उन्हें व्यक्त कर पाने में असमर्थ होता हैं।

#2. करियर में असफलता

मानसिक रूप से कमजोर रह जाने या इसके कारणों में एक प्रमुख कारण करियर में मिली असफकता भी होती हैं। दरअसल यह कई बार होता हैं कि हम अपने करियर में सफल नही हो पाते या फिर इसमें दूसरों से ज्यादा समय लगता हैं। ऐसी स्थिति में करियर में मिली असफलता के कारण भी मनुष्य को नीचे आँका जाने लगता हैं।

ऐसे लोगों की पहचान समाज के असफल लोगों में होने लगती है। इसी के कारण ही परिवार में मिलने वाला सम्मान भी धीरे धीरे कम होने लगता है। यह भी मानसिक रूप से कमजोर रहने का एक प्रमुख कारण बन जाता है।

#3. पारिवारिक दबाव

कई लोगों के माता पिता या अन्य परिवार वाले अपने घर के बच्चों पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं। जैसे कि उन्हें अकेले बाहर नही जाने देना, कोई स्वतंत्रता नही देना, दोस्तों के साथ इतना समय नही देना, स्कूल या कॉलेज से सीधा घर आना, किसी भी निर्णय को बड़ो से पूछकर ही लेना इत्यादि।

कहने का अर्थ यह हुआ कि उन्हें पूरी तरह से परिवार पर ही आश्रित रखा जाता हैं और स्वयं से कोई काम नही करने दिया जाता है। उन्हें पूर्व निर्धारित सभी नियमों का पालन करना होता हैं। यह भी व्यक्ति के मानसिक रूप से कमजोर रह जाने का एक प्रमुख कारण बन जाता है।

#4. बार बार निर्णयों का गलत हो जाना

एक व्यक्ति का आत्म विश्वास तब गिर जाता है जब उसके द्वारा लिए गए सभी निर्णय या ज्यादातर सभी निर्णय गलत होने लगते हैं या फिर वे दूसरों के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं। ऐसे में उसे लगने लगता हैं कि वह जो भी निर्णय लेगा या करेगा वह गलत ही होगा। यह भावना उसके मन में घर कर जाती हैं।

यदि व्यक्ति के निर्णय बार बार गलत होने लगे और यह दूसरों की नज़र में भी आने लगे तो उस व्यक्ति का आत्मविश्वास स्वतः ही गिर जाता है। अब जैसा कि हमने आपको ऊपर ही बताया कि जिस व्यक्ति का स्वयं पर ही विश्वास नही रहता, वह मानसिक रूप से कमजोर बनेगा ही बनेगा।

#5. गलत दिनचर्या

अब आपको लगता होगा कि मानसिक रूप से कमजोर रहने का शरीर से कोई संबंध नही हैं। तो यह सही भी है और गलत भी। दरअसल यह आवश्यक नही कि आप दुबले या मोटे हैं तो आप मानसिक रूप से अलग अलग व्यवहार करेंगे। कहने का अर्थ यह हुआ कि यह आपके शरीर के आकार व वजन पर तो निर्भर नही करेगी लेकिन हां आपकी दिनचर्या पर अवश्य निर्भर करेगी।

कहने का अर्थ यह हुआ कि आप प्रतिदिन क्या काम करते हैं, कैसे जीते हैं, खुश रहने के लिए क्या करते हैं या किन लोगों के साथ रहते हैं, कैसा भोजन करते हैं, व्यायाम करते हैं या नही, कैसी नौकरी करते हैं, इत्यादि कई तरह के कारक आपकी मानसिक कमजोरी व मजबूती के लक्षण बन सकते हैं। इसलिए इस पर भी ध्यान देना शुरू कर दीजिए।

मानसिक रूप से मजबूत रहने का सबसे बढ़िया तरीका (Mentally strong kaise bane)

अभी तक आपने जाना कि मानसिक रूप से कमजोर रह जाने के क्या क्या कारण हो सकते हैं या फिर उनके क्या क्या लक्षण हो सकते हैं। साथ ही मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा होता है और वह किस तरह से व्यवहार करता है। तो अब (Mansik roop se strong kaise bane) आप यह भी जानना चाहेंगे कि आखिरकार मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए एक व्यक्ति को क्या करना चाहिए।

वैसे तो मानसिक रूप से मजबूत रहने के कई सारे तरीके होते हैं और आप उन तरीको को अपना भी सकत हैं। यह सब तरीके हम आपको बताएँगे भी लेकिन सबसे पहले तो आपका यह जानना आवश्यक हैं कि आखिरकार मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए आपको किस तरीके को सबसे पहले अपनाना चाहिए। दरअसल बाकि सभी तरीको को भी आपको अपनाना चाहिए लेकिन जो तरीका आपको सबसे पहले जानना चाहिए वह सबसे महत्वपूर्ण होता हैं।

मानसिक रूप से मजबूत रहने का सबसे बढ़िया उपाय है योग। जी हां, सही सुना आपने। आप चाहे जिम में बॉडी बनाते हो या अखाड़े में पसीना बहते हो, यह सब आपको शारीरिक रूप से सक्षम बनायेंगे लेकिन यदि आप मानसिक रूप से स्वत बने रहना चाहते हैं तो फिर आपको अनिवार्य रूप से योग को आज से ही शुरू करना चाहिए।

योग से ना केवल आप शारीरिक रूप से मजबूत बनेंगे अपितु यह आपको शारीरिक रूप से भी एकदम स्वत रखेगा। इसी के साथ यह आपके अंदर भावनात्मक रूप भी प्रसारित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। कहने का अर्थ यह हुआ कि योग करने से आप शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक तीनो रूपों से एक दम स्वत रहेंगे और किसी तरह की दुविधा का सामना नही करेंगे।

अब आप सोच रहे होंगे कि किस तरह के योग करने से आप संपूर्ण रूप से स्वस्थ रहेंगे या दिमागी रूप से मजबूत बनेंगे या आपका मानसिक स्वास्थ्य ठीक हो जाएगा। तो इसके लिए कोई निर्धारित योग नही हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि योग की विभिन्न क्रियाओं को आप प्रतिदिन करें लेकिन बस योग करें।

इसके लिए आपको सुबह जल्दी उठाना होगा और मुख्यतया सूर्योदय के समय। इसके बाद आपको कम से कम एक घंटा योग करना होगा। इसमें मुख्यतया सूर्य नमस्कार, कई तरह के आसान, फिर प्राणायाम व अंत में ध्यान करना होगा। यदि आप सही से सभी योग करेंगे तो आपको एक से डेढ़ घंटा लग जाएगा। यदि आप सुबह जल्दी नही भी उठ पाते हैं तो आप अपने रोजाना के उठने के समय से एक घंटा पहले उठ जाए।

यदि यह भी संभव ना हो तो आप दिन के किसी अन्य समय भी योग कर सकते हैं। हालाँकि सुबह के समय खाली पेट किया गया योग सबसे ज्यादा लाभदायक होता है। इसलिए यदि आप आज से ही प्रतिदिन एक घंटा भी योग करने का नियम बना लेंगे तो फिर देखिये महीने दो महीने में आप स्वयं को मानसिक रूप से कितना मजबूत पाते हैं।

मानसिक रूप से मजबूत बनने के उपाय (Mansik majbuti ke upay)

अब जब आपने मानसिक रूप से मजबूत बनने का सबसे सरल व प्रभावी उपाय जान लिया हैं तो इसके साथ ही आपको अन्य उपाय जानने भी आवश्यक हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि आप योग करके बहुत हद्द तक मानसिक कमजोरी को दूर तो कर लेंगे लेकिन योग का तब क्या फायदा जब आप अपने दिन के बाकि 23 घंटो में मानसिक स्वास्थ्य को कमजोर करने का काम कर रहे होंगे।

इसलिए अपने आप को जल्दी से जल्दी (Mentally strong banane ka tarika) मानसिक रूप से मजबूत बनाने और कमजोरी को पूरी तरह से दूर कर देने के लिए आपको अपने जीवन व दिनचर्या में कुछ अन्य बदलाव भी लाने होंगे। आइए जाने मानसिक मजबूती के कुछ अन्य उपायों के बारे में विस्तार सहित।

#1. अपनी बात कहना सीखें

यदि आप मानसिक रूओप से मजबूती का उपाय खोज रहे हैं तो सबसे पहली और मुख्य बात यह हैं कि आपको अपनी बात कहना सीखना होगा। फिर चाहे आप अपनी बात को सीमित शब्दों में रखे या किसी किसी के समक्ष ही रखे। यदि आप यह सोचते रहेंगे कि सामने वाले पर आपकी कही बात का क्या प्रभाव पड़ेगा या क्या वह उसका बुरा मान जाएगा इत्यादि तब तक आप उनसे कुछ नही कह पाएंगे।

इसलिए यदि आपको उनकी किसी बात का बुरा लग रहा हैं तो आप उन्हें भी अलग अंदाज में कह दे। यह आप शुरू में थोड़ा बहुत कोशिश करें और फिर देखे कि सामने वाला व्यक्ति कैसा व्यवहार करता हैं। इससे धीरे धीरे यह करना आप सीख जाएंगे।

#2. क्रोध को रखें नियंत्रण में

भावनाओं में जिस चीज़ पर सबसे पहले नियंत्रण रखने की आवश्यकता हैं वह है क्रोध। कहने का अर्थ यह हुआ कि यह आपका सबसे बड़ा शत्रु है जो जीती हुई बाजी भी हरवा सकता हैं। आप सामने वाले की छाल को समझेंगे भी नही और वह अपना काम बनवा लेगा। कहने का अर्थ यह हुआ कि मान लीजिए किसी वाद विवाद में या बात में आप सामने वाले पर हावी पड़ रहे हैं लेकिन सामने वाला जानता हैं कि आप जज्बाती हैं।

ऐसे में वह आपको और उकसाने वाला काम करेगा ताकि आप आग बबूला हो जाए और उसी में अत्यधिक क्रोध करने लगे। एक बार आपको क्रोध आ गया तो आप गुस्से में वे सब बाते भी बोल सकते हैं जो आपको नही बोली चाहिए। इस स्थिति में सामने वाला अच्छा बन जाता हैं और आप बुरे। इसलिए आपको अपने क्रोध पर नियंत्रण पाना सीखना होगा।

#3. गलतियों से डरे नही बल्कि सीखें

आपको लगता होगा कि आप कोई गलती करेंगे तो वह बहुत बुरी हो सकती है लेकिन ऐसा नही है। दरअसल हर मनुष्य गलती करता है और गलती ही एक मनुष्य को मनुष्य बनाती है। जिससे कोई गलती ही ना हो तो वह तो ईश्वर की ही उपाधि प्राप्त कर ले। ऐसे में इस दुनिय का हर सफल व्यक्ति भी अपनी गलतियों से सीख सीखकर ही आगे बढ़ा है।

ऐसे में महत्वपूर्ण यह हैं कि आप गलती होने पर उससे सीख क्या रहे हैं बजाए कि इसके आप उस पर केवल पछतावा ही करते रह जाए। यदि आप हमेशा पछतावे में ही रहेंगे तो फिर कोई लाभ नही। इसलिए बेशक चाहे आपसे किनती ही गलतियाँ हो लेकिन आप हर उस गलती से सीखें और जाने का प्रयास करें कि आखिर वह गलती हुई तो हुई क्यों और उसका कारण क्या था। यही आपको फिर से वही गलती करने से बचाएगी।

#4. लक्ष्य निर्धारित करें

मानसिक रूप से कमजोर बने रहने का एक कारण होता हैं कि आपके जीवन का कोई निर्धारित लक्ष्य नही होता। ऐसे में आप इधर उधर भटकते रहते हैं और ना तो आपका सफलता मिल पाती हैं और ना ही वैसा सम्मान। ऐसे में मानसिक मजबूती के लिए आवश्यक हैं कि आप आगे के लिए एक लक्ष्य निर्धारित करें और उस पर डटकर काम करें।

यदि आप अपने लक्ष्य को निर्धारित कर लेंगे तो इससे आपके अंदर उत्साह का संचार होगा। उसी संचार के कारण आपको आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा मिलेगी। इसी के बलबूते आप वह निर्णय ले पाएंगे जो आपको लेने चाहिए। इसलिए अपने हौसले को किसी भी स्थिति में कम ना होने दे।

#5. स्वयं को कमजोर समझना बंद करें

यदि आप मानसिक रूप से मजबूत बनना चाहते हैं तो उसके लिए अपने मन को समझना सबसे ठीक रहेगा। दरअसल मानसिक रूप से कमजोर होना या मजबूत बनना एक तरह से सब आपके मन का ही खेल है। यदि आपका मन ही यही मानकर बैठा है कि आप मानसिक रूप से कमजोर है तो फिर आप कैसे ही मजबूत बन पाएंगे?

ऐसी स्थिति में अपने मन को भी तो नियंत्रण में करना सीखे। इसके लिए पहले आपको मन में यह ठानना होगा या मन पक्का करना होगा कि आप कमजोर नही है। जब आप अपने मन से यह मानने लगेंगे तभी आपके अंदर आत्म विश्वास की भावना जागृत होगी। और जब आत्म विश्वास मजबूत होगा तो अवश्य ही आपका मन भी मजबूत बनेगा। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।

#6. खुद से चीज़े करना सीखें

जब तक आप हर चीज़ के लिए दूसरों पर निर्भर रहेंगे या दूसरों की राय जानने को बेताब रहेंगे तो फिर कैसे ही आप स्वयं को मानसिक रूप से मजबूत बना पाएंगे। हम यह नही कह रहे कि आप सभी चीज़े खुद से ही करें या दूसरों से पूछना ही बंद कर दे लेकिन अप कुछ चीज़े तो खुद के निर्णय पर कर ही सकते हैं या इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

साथ ही हर चीज़ में दूसरों से राय लेना भी सही नही रहता हैं। इसका यह मतलब निकलता है कि आप स्वयं से निर्णय ले पाने में असमर्थ है। ऐसे में हर छोटी या बड़ी चीज़ के लिए दूसरों से यह जानने की  कोशिश करना कि क्या आपको वह करना चाहिए या नही या फिर आपको क्या करना चाहिए, यह गलत व्यवहार है। कुछ चीजों में अपने विचार स्वयं रखे और उस पर अमल भी करें।

#7. नए लोगों से मिले

अब यदि आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा बनाना चाहते हैं या मानसिक रूप से मजबूत बनना चाहते हैं तो उसके लिए यह भी आवश्यक हैं कि आप नए लोगों से मिले और उनके बारे में जाने। उनके साथ कुछ समय व्यतीत करे और जाने कि वे कैसे अपना जीवनयापन करते हैं या किन परिस्थितियों में कैसा व्यवहार करते हैं।

दरअसल नए लोगों से मिलने पर आपको यह पता चलेगा कि किस तरह का व्यवहार अन्य लोगों के साथ किया जा सकता हैं। कई बार ऐसा होता हैं कि हम अपनों के साथ या अपने जानने वालों के साथ उतना खुलकर व्यवहार नही करते जितना हम किसी अनजान व्यक्ति के साथ कर लेते हैं। इसलिए नए लोगों से मिले और उनके साथ मेलजोल बढ़ाये।

#8. अपना वातावरण बदले

अब जब आप मानसिक रूप से मजबूत बनने के इतने उपाय कर रहे हैं तो उसके लिए यह भी आवश्यक हैं कि आप मानसिक मजबूती के लिए अपने आसपास की चीजों पर कितना ध्यान दे रहे हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि क्या आपके आसपास ऐसी चीज़े हैं जिन्हें देखकर आपको निराशा होती हैं या जो आपको आपके गलत होने का अनुभव कराती हो।

यदि ऐसा हैं तो आज से ही इसमें परिवर्तन लेकर आये। यदि आप रोजाना ऐसी चीजों को देखेंगे तो अवश्य ही आपका आत्म विश्वास बढ़ने की बजाए कम होता जाएगा। इसलिए आत्म विश्वास की बढ़ोत्तरी के लिए यह भी बहुत आवश्यक हैं कि आपके आसपास की चीज़े ऐसी हो जो आपके अंदर सकारात्मकता का भाव जागृत करें।

#9. दूसरों से प्रतिस्पर्धा की भावना को छोड़े

यह मानसिक कमजोरी का एक प्रमुख कारण कहा जा सकता है जिनकी नींव हमारे बचपन से ही पड़ जाती है। इस भावना को जागृत करने का मुख्य काम हमारे माता पिता या परिवार वाले ही करते हैं। जैसे कि हमारे परिवार में ही किसी अन्य व्यक्ति का बेटा या बेटी हमसे ज्यादा सफल हैं तो उसका उदाहरण देना या हमारे दोस्तों की ही हमसे तुलना करना इत्यादि।

किंतु आप इस बात का ध्यान रखें कि ना तो आप कभी सभीसे सफल बन सकते हैं क्योंकि कोई ना कोई आपसे ऊपर रहेगा ही रहेगा फिर चाहे आप कितने ही सफल क्यों ना हो जाये और ना ही आप सभी से नीचे होंगे क्योंकि उसमे भी कोई ना कोई आपसे ज्यादा परिश्रम कर रहा होगा। ऐसे में आप दूसरों से अपनी प्रतिस्पर्धा करने की बजाए स्वयं के साथ ही तुलना करें। आप यह देखें कि आप पहले की तुलना में कितने बेहतर हुए और अभी आपमें क्या क्या बदलाव की आवश्यकता हैं।

#10. चिंता करना छोड़ दे

अब जो चीज़ेआपके बस में नही हैं या आप चाहकर भी उसे नही बदल सकते तो उस चीज़ के बारे में अनावश्यक रूप से सोचना या दिमाग में बार बार वही बात लाना, क्या उस चीज़ को सही कर देगा? नही ना!! चिंता तो केवल उस चीज़ को बढ़ाएगी ही और आपको मानसिक रूप से और कमजोर बनाएगी। ऐसे में दिमाग को मजबूत बनाए रखने के लिए आपको उस चीज़ के बारे में सोचना छोड़ देना होगा।

यदि आप चाहते हैं कि आप मानसिक रूप से मजबूत बने तो आप ऐसी चीजों के बारे में सोचना छोड़ दे और जो चीज़े आपके बस में हैं केवल उसी पर ध्यान दे। श्रीकृष्ण ने भी भगवत गीता में कहा हैं कि कर्म करते जाओ और फल की इच्छा मत करों। तो आप भी उसी सिद्धांत पर चलेंगे तो अवश्य ही जीवन में बहुत सफलता पाएंगे।

मानसिक रूप से स्वस्थ होने के लिए क्या करें – Related FAQs

प्रश्न: मानसिक रूप से मजबूत होने का क्या मतलब है?

उत्तर: मानसिक रूप से मजबूत होने का मतलब आप अपने निर्णय स्वयं ले पाएंगे और अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रख पाएंगे।

प्रश्न: दिमाग को क्या मजबूत बनाता है?

उत्तर: दिमाग को मजबूत बनाने में सबसे बड़ा योगदान हमारे मन का ही होता है। यदि हमारा मन मजबूत हैं तो अवश्य ही दिमाग भी मजबूत बनेगा।

प्रश्न: मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत कैसे बनें?

उत्तर: मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनने के लिए आपको योग व ध्यान करना शुरू कर देना चाहिए। यह आपको दोनों रूप से मजबूत बनाने का काम करेगा।

प्रश्न: मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत कैसे बनें?

उत्तर: मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनने के लिए आपको अपने मन को नियंत्रण में रखना सीखना होगा। इसमें अप्रत्याशित रूप से आपकी सहायता योग कर सकता है।

प्रश्न: दिमाग की कमजोरी के क्या लक्षण होते हैं?

उत्तर: दिमाग की कमजोरी के प्रमुख लक्षणों में स्वयं निर्णय नही ले पाना, आत्म विश्वास की कमी व भावनाओं पर नियंत्रण नही रख पाना सम्मिलित है।

तो यह थे कुछ उपाय जो आपको ना केवल मानसिक रूप से सफल बनायेंगे बल्कि आपके दिमाग को भी मजबूत करेंगे। यदि आपने हमारे द्वारा बताये गए सभी उपायों व तरीको का पालन किया तो अवश्य ही आपको इसका सकारात्मक प्रभाव कुछ ही समय में दिखाई देने लग जाएगा। इस बात को हमेशा याद रखिए कि एक बार आप मानसिक रूप से मजबूत बन गए तो फिर आपको सफल होने से कोई नही रोक सकता हैं।

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