लव मैरिज से होने वाले फायदे व नुकसान क्या क्या हैं? Love Marriage Ke Fayde Aur Nuksan

|| लव मैरिज सही है या गलत, लव मैरिज करने के उपाय, लव मैरिज के फायदे, अरेंज मैरिज के नुकसान, प्रेम विवाह के लिए शिव पूजा, मनचाहे लड़के से शादी के उपाय, भाग के शादी करना सही है या गलत ||

Love marriage ke fayde or nuksan, विवाह एक ऐसा बंधन है जिसे हिंदू धर्म में सबसे पवित्र बंधन की संज्ञा दी गयी है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह बंधन किसी व्यक्ति के लिए उसका परिवार बढ़ाने और एक समाज के कल्याण (Love marriage ke fayde) के लिए बहुत आवश्यक होता है। साथ ही हिंदू धर्म में आठ प्रकार के वुवः बताये गए हैं जिनमे से एक प्रेम विवाह भी है जिसे गंधर्व विवाह की संज्ञा दी गयी (Love marriage ke nuksan) है।

ज्यादातर लोग जो किसी से प्रेम (Love marriage benefits in Hindi) करते हैं और उनके साथ कई वर्षों से रिलेशनशिप में होते हैं उन्हें अपने प्रेमी के साथ विवाह करने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता हैं। यह चुनौतियाँ समाज या घरवालों का डर, रीति-रिवाज, जातिवाद या धर्म को लेकर सामने (Love marriage ke side effects) आता हैं। इसके अलावा बहुत से लोग पप्रेम विवाह या लव मैरिज से होने वाले नुकसान व फायदों के बारे में जानने के लिए भी उत्सुक रहते हैं।

ऐसे में इस लेख के माध्यम से आज हम आपको लव मैरिज करने के फायदों व नुकसान (Love marriage advantages and disadvantages in Hindi) के बारे में विस्तार से बताएँगे ताकि आप स्थिति के अनुसार सही आंकलन कर निर्णय ले सके। साथ ही इसके बारे में किसी अन्य को अपनी उचित राय भी दे सके। तो चलिए जानते हैं लव मैरिज के फायदों और नुकसान के बारे में विस्तार से।

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लव मैरिज से होने वाले फायदे व नुकसान क्या-क्या हैं? (Love marriage ke fayde or nuksan)

लव मैरिज से होने वाले फायदों व नुकसान के बारे में जानने के लिए सबसे पहले आपका यह जानना आवश्यक है कि आखिरकार लव मैरिज होती क्या है और इसे कैसे किया जा सकता है। साथ ही क्या यह वैध भी है या नही। आइए एक एक करके सभी पहलुओं के बारे में जाने।

लव मैरिज से होने वाले फायदे व नुकसान क्या क्या हैं? Love Marriage Ke Fayde Aur Nuksan

लव मैरिज क्या होती है? (Love marriage ka matlab)

जैसा कि नाम से ही चरितार्थ है कि लव अर्थात प्यार या प्रेम व मैरिज मतलब विवाह। इस प्रकार लव मैरिज का मतलब हुआ प्रेम विवाह। जब कोई पुरुष व महिला एक दूसरे से बिना किसी भेदभाव के प्रेम करते हैं और वे इस प्रेम को अब विवाह के बंधन में बांध देना चाहते हैं तो वे एक दूसरे की सहमती से प्रेम विवाह कर लेते हैं जिसे लव मैरिज की संज्ञा दी गयी हैं।

हिंदू धर्म में विवाह को आठ भागों में वर्गीकृत किया गया है जिसमे एक प्रकार प्रेम विवाह का भी है। धर्म में प्रेम विवाह या लव मैरिज को गंधर्व विवाह की संज्ञा दी गयी है। इसके अनुसार जब लड़का व लड़की अपने माता पिता की सहमती के बिना केवल एक दूसरे की सहमती से ही विवाह रचा ले तो उसे गंधर्व विवाह की संज्ञा दी जाती हैं।

इतिहास का उदाहरण लिया जाए तो श्री कृष्ण का रुक्मणि से हुआ विवाह, अर्जुन का सुभद्रा से हुआ विवाह व पृथ्वीराज चौहान का संयोगिता से हुआ विवाह गंधर्व विवाह या लव मैरिज के अंतर्गत ही आता हैं। आइए अब इसमें क्या क्या चुनौतियाँ आ सकती हैं, इसके बारे में भी जानते हैं।

लव मैरिज कैसे होती है? (Love marriage kaise kare)

यह भी सामान्य शादियों की तरह ही होती हैं बस इसमें परिवार का साथ बहुत मुश्किल से ही मिल पाता हैं। हालाँकि इसको करने के लिए आप दोनों का बालिग होना आवश्यक हैं। यदि आप दोनों में से कोई भी एक नाबालिग हैं तो जो बालिग है उस पर कानून के तहत केस हो सकता है। यह के नाबालिग के घरवाले या माता पिता कर सकते हैं और आपको एक नाबालिग को बहला फुसलाकर शादी करने और बाल विवाह के जुर्म में जेल में डाला जा सकता हैं।

यदि दोनों नाबालिग हैं तो इस केस तो किसी पर नही होगा लेकिन शादी को वैध नही माना जाएगा। ऐसे में यदि लड़के की उम्र 21 वर्ष से अधिक हो और लड़की की उम्र 18 वर्ष से तो आप दोनों वैधानिक तरीके से शादी कर सकते हैं। आप चाहे तो किसी मंदिर में या कोर्ट में जाकर भी शादी कर सकते हैं।

हालाँकि किसी भी शादी को क़ानूनी मान्यता प्रदान करने के लिए आपको विवाह प्रमाण पत्र या मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना ही पड़ेगा। एक बार यह बन गया तो आप दोनों क़ानूनी रोप से पति पत्नी कहलायेंगे।

अब जब आप दोनों लव मैरिज करने का सोच रहे हैं या करने जा रहे हैं तो आपको अवश्य ही इससे होने वाले फायदे व नुकसान के बारे में पता होना चाहिए ताकि बाद में किसी तरह की कोई समस्या ना हो। आइए एक एक करके दोनों चीज़ों के बारे में जाने।

लव मैरिज के फायदे (Love marriage ke fayde)

अरेंज मैरिज की तुलना में लव मैरिज करने के कई फायदे आप दोनों को मिलते हैं जिसका जानना आप दोनों के लिए जरुरी हैं। आइये प्रेम विवाह के फायदे के बारे में विस्तार से जाने (Love marriage benefits in Hindi)।

#1. आपसी समझ में बढ़ोत्तरी –

जहाँ एक ओर अरेंज मैरिज में आपके लिए लड़का या लड़की घरवाले ढूंढते है और आपसे बस आपकी सहमती मांगी जाती है तो वही लव मैरिज में आप दोनों एक दूसरे को बहुत पहले से जानते हैं। एक दूसरे को पहले से जानने के कारण आप दोनों की आपसी समझ भी बहुत बेहतर रहती हैं।

उदाहरण के तौर पर आपको कोई चीज़ अच्छी नही लगती या कोई चीज़ बहुत पसंद हैं तो आपका प्रेमी या प्रेमिका इसके बारे में पहले सही दयां रखेगा क्योंकि वह सब चीज़े उन्हें पहले से ही पता होंगी। ऐसे में शादी के बाद एक दूसरे को समझने में समय व्यर्थ नही करना पड़ता।

#2. लड़ाई झगड़ा नही होना –

अक्सर यह देखने में आता है कि शादी के कुछ समय तक तो नवविवाहित जोड़ा अच्छे से रहता हैं लेकिन कुछ महीने में ही दोनों के बीच में बहुत सी बातों को लेकर लड़ाई झगड़ा शुरू हो जाता हैं। इस कारण दोनों के घरवाले भी परेशान रहते हैं। इस लड़ाई झगड़े वाली बात आसपास या रिश्तेदारों में फैल जाए तो यह उनके परिवार के लिए शर्मिंदगी का कारण बनता है सो अलग।

किंतु लव मैरिज में इसकी संभावना ना के बराबर होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि आप दोनों पहले से ही एक दूसरे को समझते हैं और जो भी गिला शिकवा होते हैं वह सब पहले से ही दूर हो चुके होते हैं। ऐसे में लड़ाई या झगड़े का सवाल ही नही उठता। इसलिए लव मैरिज में पति पत्नी आपस में लड़ेंगे यह बहुत ही कम देखने को मिलता है।

#3. एक दूसरे का सम्मान –

अरेंज मैरिज में अक्सर एक समय के बाद पति पत्नी का या पत्नी पति का सम्मान करना कम कर देते हैं और बात बात पर एक दूसरे को ताने मारते हैं वो अलग। ऐसे में दोनों के बीच सम्मान में कमी आती हैं और समाज बाते बनाता है वो अलग।

इनटू लव मैरिज में दोनों के बीच आपसी समझ बेहतर होने से वे एक दूसरे का सम्मान करना अच्छे से जानते हैं। उनेह पता होता हैं कि मेरे पति को या पत्नी को क्या चीज़ पसंद है और क्या नही और किस चीज़ का उन्हें बुरा लग सकता है। ऐसे में दोनों ही एक दूसरे का भरपूर सम्मान करते हैं।

#4. महिलाओं की स्वतंत्रता –

आपने बहुत से घरों में देखा होगा कि जो महिला शादी के पहले नौकरी करती थी या कोई काम करती थी उसे शादी के बाद सब काम छोड़ देना होता है और बस घर का ही उत्तरदायित्व संभालना होता है। ऐसे में उसने आज तक जो मेहनत की, पैसे कमाने के लिए जो भी पढ़ा या लिखा वह सब व्यर्थ चला जाता है।

किंतु लव मैरिज में आप ऐसी चीज़ों को बहुत कम ही देखते होंगे। लव मैरिज में जब दोनों लड़का लड़की एक दूसरे से शादी करने को तैयार होते हैं तो वे पहले से ही सब बातों को क्लियर कर लेते हैं। ऐसे में यदि लड़की शादी के बाद भी अपनी नौकरी या काम को शुरू रखना चाहती हैं तो इसमें लड़का उसका पूरा साथ देता हैं जो उनके वैवाहिक बंधन को और भी मजबूत बनाने का काम करता हैं।

#5. एक मजबूत रिश्ता

किसी बी बंधन को निभाने के लिए उसका मजबूत होना बहुत जरुरी होता है। खासकर तब जब यह बंधन विवाह का हो क्योंकि इसमें जरा सी भी चूक हुई और दोनों के बीच दरार पड़ जाती हैं। किंतु लव मैरिज में ऐसा कुछ नही देखने को मिलता।

वो इसलिए क्योंकि दोनों एक दूसरे को अभी से नही बल्कि बहुत पहले से जानते हैं। ऐसे में उनके बीच किसी बात को लेकर नोकझोंक होती भी हैं तो दोनों यह अच्छी तरह से जानते हैं कि एक दूसरे को कैसे मनाना है।

ऐसे में लव मैरिज में पति व पत्नी दोनों ही एक दूसरे के साथ एक ऐसा रिश्ता निभाते हैं जो बहुत ही मजबूत होता है और किसी के भड़काने पर भी नही टूटता।

#6. अतीत का डर नही

आजकल किसका पास्ट या अतीत नही होता। हम में से ज्यादातर लोग अपने स्कूल या कॉलेज में किसी ना किसी के प्रेम में पड़ ही जाते हैं और बहुत से लोग तो कुछ समय के लिए किसी के साथ रिलेशनशिप में भी रहते है। ऐसे में अरेंज मैरिज करने वाले को हमेशा यह डर सताता हैं कि सामने वाले उसके अतीत को समझ पाएगा या फिर उसे नकार देगा या हमेशा उसके लिए ताने मारेगा या उसे गलत नज़रों से देखेगा।

जबकि लव मैरिज में इसकी संभावना बहुत कम होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों एक दूसरे को बेहतर तरीके से समझते भी है और उन्हें एक दूसरे के पास्ट के बारे में सब कुछ पहले से ही पता होता है। ऐसे में आगे रिश्ता निभाने के लिए उनका अतीत किसी तरह से समस्या खड़ी करेगा इसकी संभावना ना के बराबर होती है।

#7. एक दूसरे पर भरोसा

अक्सर जब हम किसी के साथ विवाह के बंधन में बंधते है तो हमेशा हमारे दिमाग में एक ख्याल आता हैं या मन में एक बैचेनी से रहती हैं कि सामने वाला हमारे साथ लॉयल रहगा भी या नही या फिर वो हमे धोखा दे देगा। क्या वह किसी ओर से तो प्यार नही करता है या करती है या वह किसी मज़बूरी में तो शादी नही कर रहे है। ऐसे हजारों शक हमे सोने नही देते और हमारी रातों की नींद उदा देते हैं।

जबकि लव मैरिज में तो इसका सवाल ही नही उठता। वे तो एक दूसरे को ही प्यार करते हैं और इसी कारण शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। इसलिए लव मैरिज में एक दूसरे पर भरोसा अरेंज मैरिज की तुलना में कहीं अधिक होता है।

#8. अलग होने की संभावना कम

अरेंज मैरिज में जहाँ बस 2 से 3 बार की मुलाकात में ही रिश्ता फाइनल कर दिया जाता हैं। इसमें भी लड़का अच्छा दिखता है या नही और वह काम क्या करता है, उसके घरवाले कैसे है, घर की आमदनी क्या है, क्या लड़की को वहां किसी चीज़ की कमी होगी या नही इत्यादि चीजों को ही देखा जा सकता है। लड़के या लड़की को एक दूसरे को पूरी तरह से जानने या समझने का अवसर ही नही मिल पाता।

ऐसे में जब वे शादी के बंधन में बंधते हैं तो अक्सर ऐसा दिखने को मिलता हैं कि एक पूर्व है तो दूसरा पश्चिम। यदि [पति पत्नी के बीच स्वभाव में बिल्कुल नही बनती या दोनों की पसंद हर चीज़ में अलग हैं तो इसकी संभावना बहुत ज्यादा हैं कि वे लंबे समय तक एक साथ ना रह पाए और बात तलाक तक पहुँच जाए। जबकि लव मैरिज में तो दोनों एक दूसरे की पसंद नापसंद को पहले से ही ध्यान में रखकर शादी करते हैं।

#9. दहेज़ प्रथा का अंत

भारत देश में दहेज़ प्रथा सैकड़ों वर्षों से चलती आ रही हैं जिसमे वर पक्ष के द्वारा शादी करने के लिए वधु पक्ष दे कीमती सामान, पैसों इत्यादि की मांग की जाती हैं और लड़की का पिता ना चाहकर भी यह सब देने को बाध्य होता है। फिर चाहे उसे कर्जा लेना पड़े या अपना घर तक गिरवी रखना पड़े।

जबकि लव मैरिज में तो यह संभव ही नही। इसमें तो ज्यादातर दोनों घरों की असहमति ही होती हैं। अब जिस शादी में घरवाले ही ना हो तो दहेज़ की मांग ही कौन करेगा। ऐसे में लव मैरिज में दहेज़ या पैसों के लेनदेन की प्रक्रिया होती ही नही है और सिर्फ लोगों का मिलन होता है।

#10. आत्म निर्भरता

एक तरह से लव मैरिज का निर्णय लेना पुरुष व महिला को आत्म निर्भर बनाने में बहुत सहायक होता है। जहाँ एक ओर अरेंज मैरिज में दूल्हा व दुल्हन मस्ती करते हैं और शादी ब्याज की रीति रिवाज का खूब आनंद उठाते हैं और सारा काम उनके घरवाले, भाई बहन, दोस्त, रिश्तेदार इत्यादि ही देखते हैं तो वही लव मैरिज में ऐसा कुछ नही होता और सब काम दूल्हा दुल्हन को ही देखना होता है।

एक तरह से वे दोनों ही इस शादी को करने और करवाने के लिए उत्तरदायी होते है। इसके साथ ही शादी के बाद जीवन को कैसे आगे बढ़ाया जाए और उसके लिए क्या किया जाए, इन सभी चीज़ों का उत्तरदायित्व उन दोनों पर ही होता है। बेशक इसमें समस्या जरुर आती हैं लेकिन यह समय से पहले ही दोनों को परिपक्व व मजबूत बना देती हैं जो उनके भविष्य के लिए बहुत अच्छा रहता है।

#11. बच्चा करने का दबाव नही

अक्सर यह देखने में आता हैं कि शादी हुई नही और उसके अगले दिन से ही घरवालों का दोनों के ऊपर बच्चा करने का दबाव। पहले जो माता पिता शादी से पहले तक कहते रहते थे कि एक बार टू शादी कर ले और उसके बाद हम कुछ नही कहेंगे वही शादी के बाद एकदम से बदल जाते हैं और अब उन्हें एक प्यारा सा पोता या पोती चाहिए होती हैं।

ऐसे में लड़का या लड़की अपने इन लम्हों को सही से एन्जॉय भी नही कर पाते और कई तो दबाव के कारण जल्दी बच्चा भी कर लेते हैं।

जबकि लव मैरिज में ऐसा कोई दबाव नही होता। सबसे पहले तो घरवालों को इस शादी को पचाने में ही एक दो साल से ज्यादा का समय निकल जाता हैं। फिर जब बच्चा करने की बात आती हैं तो लड़का व लड़की भी दोनों राजी होते हैं। इसलिए लव मैरिज में लड़का व लड़की दोनों को जूच साल शांति से रहने को मिल जाते हैं।

#12. प्राइवेसी

शादी के बाद एक लड़की अपने ससुराल चली जाती हैं जहाँ केवल उसका पति ही नही अपितु कई तरह कजे लोग होते हैं जैसे कि सास, सौर’, देवर, जेठ, भाभी, ननद, और भी रिश्तेदार। अब सभी को घर में न्यु बहु के आने और उसके साथ बात करने का चाव होता है। हर कोई चाहता हैं कि वह अपनी नयी बहु या भाभी के साथ कुछ समय बिताये और उनसे जी भरकर बातें करें लेकिन सभी यह भूल जाते हैं कि वह जिसके लिए यहाँ आई हैं क्या वह उसके साथ सही से समय बिता पा भी रही हैं या नही।

ऐसे में लव मैरिज में तो ज्यादातर लड़का लड़की या तो घरवालों से दूर रहने लगते हैं या फिर शुरू में उनसे कोई बात करना या ज्यादा बात कराना पसंद नही करता। ऐसे में दोनों के पास एक दूसरे के साथ समय बिताने का भरपूर समय होता हैं जिसे वे खुलकर एन्जॉय भी करते हैं।

#13. पति का सहयोग

शादी के बाद अक्सर महिला को घर की कामवाली बाई समझ लिया जाता हैं और उससे यह अपेक्षा की जाती हैं कि अब से वह घर का खाना बनाने से लेकर, कपड़े धोना, बर्तन मांजना, साफ-सफाई करना इत्यादि वही करेगी। फिर चाहे वह सुबह की बापूजी की चाय हो या पति को ऑफिस के लिए तैयार होना या मम्मी जी के पैर दबाना इत्यादि।

एक तरह सेकहा जाए तो लड़के के घरवाले और खुद लड़का सोचता हैं कि वे एक बहु या पत्नी नही बल्कि फ्री में एक कामवाली लेकर आये हैं जो कि बिल्कुल गलत है। ऐसे में यदि आपकी लोएव मैरिज हुई हैं तो आपको हर काम में पति का पूर्ण सहयोग मिलेगा। वे आपको ना केवल अच्छे से समझेंगे बल्कि हर काम में आपकी सहायता करेंगे वो अलग।

लव मैरिज के नुकसान (Love marriage ke nuksan)

अब जब हमने लव मैरिज में मिलने वाले फायदों के बारे में इतनी सब बातें कर ली हैं तो इसका मतलब यह नही कि यह हर मामले में अरेंज मैरिज से बेहतर हैं। हर चीज़ के अपने-अपने फायदे व नुकसान होते हैं और ऐसा लव मैरिज के साथ भी है।

अब जो लव मैरिज अपने साथ इतने सारे फायदे लेकर आई हैं वह कुछ नुकसान (Love marriage ke side effects) भी लेकर चलती हैं। चल्किये अब प्रेम विवाह के नुकसान के बारे में जाना जाए।

#1. घरवालों का साथ नही मिलना

जहाँ एक ओर अरेंज मैरिज में सभी घरवालों की सहमती होती हैं तो लव मैरिज उनके खिलाफ जाकर की जाती हैं। ऐसे में हमे अपने प्यार को पाने के लिए अक्ज्सर अपने घरवालों का बलिदान देना पड़ता हैं। कई मामलों में तो बात इतनी बढ़ जाती हैं कि बात एक दूसरे के परिवारों के बीच लड़ाई झगड़े तक पहुँच जाती हैं। यहाँ तक कि मामला कोर्ट तक ले जाने की भी धमकी दी जाती हैं।

यदि विवाह किसी दूसरे धर्म में या जाति में हो रहा हैं तो और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता हैं। लड़का व लड़की को अपने घरवालों से दूर रहना पड़ता हैं। कभी कभी यह नाराज़गी कुछ समय के बाद दूर हो जाती हैं या इसे कम होने में कुछ सालों का समय भी लग जाता हैं लेकिन किसी किसी मामले में तो दोनों के घरवाले उन्हें जीवनभर के लिए माफ नही करते।

ऐसे में लड़का व लड़की को अपने घरवालों और समाज से हमेशा के लिए दूर रहना पड़ता हैं और सिर्फ एक दूसरे के भरोसे जेवान्यापन करना पड़ता हैं।

#2. सभी रिश्तेदारों से भी दूर हो जाना

इसे हम एक उदाहरण देकर समझाएंगे। मान लीजिए आपकी लव मैरिज से ज्यादातर लोग नाराज़ हैं खासकर घर के बड़े बुजुर्ग लेकिन आपकी मौसी का लड़का या लड़की आपको अच्छे से समझता हैं और वह इस शादी के साथ भी था लेकिन दबी आवाज़ में।

ऐसे में आप सभी के विरुद्ध जाकर अपने प्रेमी या प्रेमिका से लव मैरिज भी कर लेते हैं तो आपको अपने परिवार के साथ-साथ उस भाई या बहन से भी दूर होना पड़ेगा जो आपके साथ था और आपको समझता भी था।

आप चाहे तो उनसे ऑनलाइन या सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क में रह सकते हैं या किसी बहाने छुपके से उनसे मिल सक्ज्तेहैन लेकिन जिस प्रकार आप दोनों का पहले रिश्ता था वह नही रह पाएगा।

साथ ही आगे चलकर कभी उनकी शादी हो या उनका जन्मदिन मनाया जाएगा तब आप चाहकर भी वहां नही जा पाएंगे क्योंकि आपको पता हैं कि आपके वहां जाने से अवश्य ही हंगामा हो जाएगा। और आप कभी नही चाहेंगे कि आपके प्रिय भाई या बहन के फंक्शन में आपकी वजह से कोई हंगामा हो।

#3. पैसों की तंगी

जैसा कि हमने आपको ऊपर बता दिया कि लव मैरिज में ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता हैं कि उसमे दोनों के घरवालों की सहमती हो और वे बाद में उन्हें मदद करें। कम से कम शुरूआती कुछ वर्षों तक तो इसकी संभावना बहुत कम ही दिखती हैं। ऐसे में दोनों को अपने बलबूते ही सब करना पड़ता हैं।

लव मैरिज करने के बाद आपको अपने घर से दूर कोई घर खुद से लेकर रहना पड़ता हैं। कभी कभार तो अपने घरवालों और रिश्तेदारों के डर के कारण आपको किसी दूसरे शहर में रहना पड़ता हैं और वह भी छिप-छिप कर। ऐसे में आपके सामने पैसों की कमी का संकट आ जाता हैं क्योंकि आपको अपने नए घर का किराया भरने से लेकर रोजाना की जरुरी चीज़े इत्यादि सब मैनेज करनी पड़ती हैं।

इसलिए लव मैरिज का निर्णय लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति का आंकलन अवश्य से कर ले क्योंकि इसमें घरवालों का साथ मिलने की संभावना ना के बराबर होगी। यदि आप दोनों में से कोई नौकरी करता हैं या पैसे कमाने की काबिलियत रखता हैं तभी ऐसा निर्णय ले।

अन्यथा जब तक आप दोनों में से कोई इस लायक नही हो जाता कि वह कुछ वर्षों तक दोनों का पालन पोषण कर सके तब तक के लिए लव मैरिज का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दे।

#4. बोरियत हो जाना

वो कहते हैं ना कि परिवार आखिर प्यार ही होता है और हम हमेशा एक व्यक्ति का चेहरा देखकर या केवल उनसे बात करके अपने जीवन नही गुजार सकते। आप चाहे एक दूसरे से कितना ही प्रेम क्यों ना करते हो या एक दूसरे से बातें करते हुए थकते ना हो लेकिन एक समय आएगा जब आप दोनों एक दूसरे से उब जाएंगे। फिर आपको अपने परिवार की याद सताने लगेगी।

जब हम परिवार के साथ रहते हैं तब हमे उनकी इतनी महत्ता नही पता चलती जितनी उनसे अलग होने के बाद। आप अपने प्रेमी के साथ हंसी खुशी एक सप्ताह बिता देंगे या एक महीना या फिर ज्यादा से ज्यादा एक वर्ष लेकिन रिश्तों में केवल एक ही रिश्ता रह जाने से आपके स्वभाव में चिढ़चिढ़ापन आने लगेगा। इससे आप दोनों ही रक दूसरे से बोर महसूस करने लगेंगे।

#5. लड़ाई झगड़ा बढ़ जाना

घरवालों की याद सताना, वित्तीय संकट, कोई अन्य बात करने को नही होना और हमेशा एक दूसरे के साथ रहना भी लड़ाई झगड़े की वजह बन सकता हैं। वो कहते हैं ना कि हम चाहे किसी से कितना ही प्रेम क्यों ना करते हो या उन्हें कितनी ही अच्छी तरह से क्यों ना समझते हो लेकिन यदि हम दिन रात केवल उन्हीं का ही चेहरा देखेंगे और उन्ही से बात करेंगे तो अवश्य ही हमारे स्वभाव में उग्रता आने लगेगी और हम उस व्यक्ति से चिढने लग जाएंगे।

ऐसे में धीरे-धीरे यह चिढ़चिढ़ापन एक लड़ाई का रूप ले लेगा और आप दोनों एक दूसरे को फूटी आँख नही सुहाओगे। साथ ही यह लड़ाई झगड़ा सुलझाने को कोई बड़ा भी पास में नही होगा जिस कारण यह सुलझने की बजाए और बढ़ती ही चली जाएगी।

#6. बड़ों के मार्गदर्शन की कमी

हम चाहे कितने ही समझदार क्यों ना हो जाए हमेशा अपने से बड़ों से कम ही समझदार कहलायेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें जीवन जीवने का अनुभव हम से ज्यादा हैं। हमने इतनी जिंदगी नगी देखी जितनी वे देख चुके हैं या जी चुके हैं। हम भी तो दैनिक तौर पर कितने ही नए अनुभवों और चुनौतियों को देखकर या उनका सामना कर सीखते रहतेहैं फिर हमसे बड़े तो यह सब देख चुके हैं।

ऐसे में शादी के बाद ऐसी बहुत सी स्थितयां आती हैं जब हमे बड़ों का मार्गदर्शन चाहिए होता हैं और सही मार्गदर्शन हमे केवल अपने परिवार से ही मिल सकता हैं क्योंकि उन्होंने ही हमें बचपन से पला व पोसा हैं। वे हमें बाकियों की तुलना में बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और सबसे उत्तम राय दे सकते हैं। ऐसे में हमे उनके मार्गदर्शन की कमी महसूस हो सकती हैं।

#7. सास ससुर से अनादर

बहुत से घरवाले ऐसे होते हैं जो इतने उग्र नही होते और किसी ना किसी तरीके से शादी के लिए मान ही जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें समाज में अपनी इज्जत का अहसास होता हैं और उन्हें समझ में भी आ जाता हैं कि अब उनका बेटा नही मानने वाला हैं। ऐसे में बेटे व बहु को लाग करने की बजाए नियति के साथ समझौता कर लिया जाए।

ऐसे में लड़के को तो कोई समस्या नही होती लेकिन जो लड़की शादी करके नए घर में आती हैं उसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने ससुराल वालों का अत्याचार सहना पड़ता हैं। यह अत्याचार किसी भी रूप में हो सकता हैं जैसे कि उसे सही से समझाना नही, उसका काम बिगाड़ देना, किसी ना किसी तरीके से उसे ताने मरते रहना और उसे परेशान करते रहना ताकि वह तंग आकर घर छोड़कर चली जाए।

#8. अकेले रह जाना

यदि किसी कारणवश लड़का या लड़की में शादी के बाद नही बनती हैं और वे अलग होने का फैसला करते हैं या होना चाहते हैं तो उन्हें समझ नही आता कि अब वे क्या करेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने यह शादी ही घरवालों के खिलाफ जाकर की थी और अब वे स्वयं ही इस शादी से खुद नही हैं तो किसी और क्या दोष देंगे।

ऐसे मामलों में तो बहुत से लड़का या लड़की अपनी किस्मत से समझौता कर लेते हैं क्योकि उन्हें आगे का कोई विकल्प सूझता ही नही और ना ही उनके पास अपने घर वापस जाने का विकल्प रहता हैं क्योंकि वहां भी उन्हें नही अपनाया जाएगा बल्कि उन्हें उनके निर्णय के लिए और ताने ही मारे जाएंगे।

प्रश्न: लव मैरिज क्यों नहीं करना चाहिए?

उत्तर: लव मैरिज इसलिए नही करनी चाहिए क्योंकि इसमें अपने माता-पिता व नाने घरवालों से दूर होना पड़ता है।

प्रश्न: लव मैरिज शादी करने से क्या फायदा है?

उत्तर: लव मैरिज करने का सबसे बड़ा फायदा यह हैं कि आप एक-दूसरे को पहले से ही बेहतर तरीके से समझते व जानते हैं।

प्रश्न: भाग कर शादी करने से क्या होता है?

उत्तर: यदि आप अपने प्रेमी या प्रेमिका से भागकर शादी कर रहे हैं तो इसका अर्थ हुआ कि अब से आप दोनों को ही अपने परिवार से दूर अलग रहना पड़ेगा।

प्रश्न: लव मैरिज करने के लिए क्या करना होगा?

उत्तर: लव मैरिज के लिए आप किसी मंदिर में शादी कर ले और उसके बाद कोर्ट में जाकर अपने विवाह का पंजीकरण करवा ले।

प्रश्न: क्या प्रेम विवाह करना उचित है?

उत्तर: प्रेम विवाह करना अनुचित नही है और हिंदू धर्म में भी इसे गंधर्व विवाह के रूप में मान्यता दी गयी है।

प्रश्न: कोर्ट मैरिज के लिए लड़के की उम्र कितनी होनी चाहिए?

उत्तर:कोर्ट मैरिज के लिए एक लड़के की उम्र कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए।

प्रश्न: प्रेम विवाह का अर्थ क्या है?

उत्तर: प्रेम विवाह का अर्थ हुआ जिसमे लड़का व लड़की अपने घरवालों की सहमती के बिना केवल एक-दूसरे की सहमती से विवाह के बंधन में बंध जाएँ।

1 thought on “लव मैरिज से होने वाले फायदे व नुकसान क्या क्या हैं? Love Marriage Ke Fayde Aur Nuksan”

  1. लव मैरिज से होने वाले फायदे व नुकसान बारे में आप ने बहुत प्रशंसनीय जानकारी लिखी है। धन्यवाद ! एक नजर प्रेम विवाह सफल कैसे करे? इस आर्टिकल पर भी डाले।

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