दाखिल खारिज संशोधन विधेयक 2022 नियम, उद्देश्य, लाभ एंव फीस

दाखिल खारिज संशोधन विधेयक 2022 – जमीनों को लेकर फर्जीवाड़ा कोई नई बात नहीं है। राज्य कोई भी हो, लेकिन संपत्ति से जुड़े झगड़े हर जगह आम हैं। कई लोग तो एक ही जमीन कई खरीदारों को बेच देते हैं तो कहीं बड़े प्लाॅट का एक हिस्सा कोई भाई बेच देता है और दूसरे को खबर नहीं होती।

कई मामलों में तो खरीदार को यह तक पता ही नहीं होता था कि उसकी हिस्से की जमीन किधर है। कब्जा करने जाते थे तो पता चलता था कि जमीन तक जाने का रास्ता ही नहीं है। जमीन से जुड़ी इन सभी मुश्किलों का समाधान करते हुए बिहार राज्य की विधानसभा ने में बिहार भूमि दाखिल खारिज संशोधन विधेयक 2022 को मंजूरी दी है।

इस विधेयक के क्या क्या प्रावधान हैं? इनसे लोगों को किस प्रकार का लाभ होगा? इस संबंध में आज हम आपको इस पोस्ट में विस्तार से जानकारी देंगे। आइए, शुरू करते हैं-

बिहार भूमि दाखिल खारिज संशोधन विधेयक 2022 क्या है?

दोस्तों, सबसे पहले आपको बताते हैं कि यह बिहार भूमि दाखिल खारिज संशोधन विधेयक-2022 क्या है। जान लीजिए कि यह दाखिल खारिज की अर्जी में जमीन के हिस्से के नक्शे को शामिल करने की अनिवार्यता का कानून है। यानी इसमें नाम के साथ ही जमीन का नक्शा भी साथ साथ परिवर्तित हो जाएगा। इससे जमीन की पहचान स्पष्ट हो सकेगी।

विधेयक के प्रावधान के मुताबिक दाखिल खारिज कराने के लिए प्लाट के नक्शे की आवश्यकता होगी। भूखंड एवं उसका नक्शा आनलाइन उपलब्ध होगा। कोई भी देख सकेगा कि भूखंड के किस हिस्से का मालिक कौन है।

दोस्तों, आपको बता दें कि बिहार विधानसभा (bihar legislative assembly) ने एक दिसंबर, 2022 को आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण इस बिहार भूमि दाखिल खारिज संशोधन विधेयक 2022 को मंजूरी दी है। विपक्ष के विरोध एवं उसके कुछ सुझावों को बहुमत से नामंजूर करते हुए सत्ता पक्ष ने इसे बहुमत से पारित किया है।

बिहार भूमि दाखिल खारिज संशोधन विधेयक 2022 डिटेल्स –

योजना का नामबिहार भूमि दाखिल खारिज संशोधन विधेयक 2022
किस ने लांच कीबिहार सरकार
कब लांच हुई1 दिसंबर 2021
लाभभूमि से जुड़े फर्जीवाड़ा खत्म होगा
उद्देश्यभूमि से जुड़े फ्रॉड को खत्म करना

संशोधन विधेयक के प्रावधान लागू होने के बाद क्या व्यवस्था रहेगी

दाखिल खारिज संशोधन विधेयक 2021 नियम, उद्देश्य, लाभ एंव फीस

अब आपको बताते हैं कि संशोधन विधेयक के प्रावधान लागू होने के बाद क्या व्यवस्था रहेगी। दोस्तों, इस नई व्यवस्था के तहत जमीन के दस्तावेज में नाम परिवर्तन के साथ प्लाट का नक्शा यानी स्पेशियल मैप (spatial map) फोटो तो रहेगा ही, इसके साथ ही खाता, खसरा एवं रकबा भी फोटो में होगा।

इससे चाहे छोटे से छोटे जमीन के टुकड़े की खरीद बिक्री चाहे कितनी भी बार हो, इसकी चौहद्दी अपडेट (update) होती रहेगी। यानी इस बात की जानकारी रहेगी कि जमीन के किस हिस्से की बिक्री हुई है। इससे फर्जीवाड़े पर रोक संभव हो सकेगी। इस विधेयक के लागू होने के बाद इसके प्रावधान पूरे बिहार राज्य में लागू हो जाएंगे।

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम सूरत राय ने बिहार राज्य सरकार की इस पहल के बारे में विधानसभा में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर रैयत के स्वामित्व वाले भूखंड का भाग चौहद्दी सहित स्पष्ट रूप से चिन्हित होगा।

दाखिल खारिज संशोधन विधेयक को इस उदाहरण से समझ सकते हैं –

अब हम आपको नई व्यवस्था को एक उदाहरण से समझाने का प्रयास करते हैं। मान लीजिए कि कोई रकबा-खसरा सौ डिसिमल का है। इसमें से स्वामी ने 30 डिसिमल किसी को बेच दिया है, तो म्यूटेशन के साथ साथ नक्शा भी तुरंत अपडेट हो जाएगा।

यानी इससे कोई भी व्यक्ति डिजिटल मैप के जरिये यह पता कर लेगा कि खरीदे जाने वाली जमीन की चौहद्दी किधर से बिक चुकी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पोर्टल (portal) पर प्लाॅट नंबर डालने से नक्शे समेत सारी जानकारी मिल सकेगी।

दाखिल खारिज के लिए दाखिल खारिज पूर्व खाका नत्थी करना होगा

साथियों, आपको जानकारी दे दें कि दाखिल खारिज के लिए आवेदक को दाखिल-खारिज पूर्व खाका (रेखा चित्र) संलग्न करना आवश्यक होगा। इसके साथ ही, निबंधन कार्यालयों में दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन के वक्त ही दाखिल खारिज पूर्व नक्शा रैयतों को संलग्न करना होगा।

इसकी काॅपी रजिस्टर्ड दस्तावेजों के साथ ही दाखिल-खारिज के लिए अंचल कार्यालयों को मुहैया कराई जाएगी। दाखिल-खारिज की मंजूरी के साथ ही आनलाइन सर्वे (online survey) राजस्व मानचित्र (revenue map) में नाम-नक्शा परिवर्तित किया जाएगा।

दाखिल खारिज पूर्व खाका के लिए सरकार एजेंसी की सेवा लेगी

आपको बता दें कि बिहार राज्य सरकार दाखिल खारिज से पहले खाका रिवेन्यू मैप तैयार करने में सक्षम व्यक्ति अथवा एजेंसी की सेवा लेगी। राजस्व विभाग अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (all india council for technical education) यानी एआईसीटीई (AICTE) द्वारा मान्यता प्राप्त सिविल इंजीनियरिंग (civil engineering) में डिप्लोमा अथवा डिग्री हासिल अभ्यर्थियों का एक जिलावार पैनल (panel) तैयार करेगा।

आपको बता दें कि पैनल में शामिल इंजीनियरों की संख्या सरकार ही तय करेगी। यही पैनल दाखिल खारिज से पूर्व नक्शे का निर्माण करेगा। आपको बता दें कि इस कार्य के लिए रैयतों को फीस चुकता करनी होगी। इंजीनियरों अथवा एजेंसियों को जमीन की माप के लिए ईटीएस (ETS) यानी इलेक्ट्रानिक टोटल स्टेशन के साथ ही लैपटाॅप रखना होगा। संबंधित उपकरणों को विभाग की ओर से अनुमोदित किया जाएगा।

फीस का निर्धारण राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग करेगा

नक्शे के लिए कितनी फीस लगेगी, इस फीस का निर्धारण भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के द्वारा किया जाएगा। जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि निबंधन कार्योलयों में जमीन की रजिस्ट्री के वक्त प्री-म्युटेशन स्केच रैयत की ओर से निबंधन कार्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा।

इसे रजिस्ट्री (registry) के कागजों के साथ नत्थी कर आनलाइन (online) दाखिल खारिज के लिए संबंधित अंचल कार्यालय को मुहैया कराया जाएगा। यहां से म्यूटेशन के पश्चात अनुमोदित दाखिल खारिज प्री म्यूटेशन स्केच की काॅपी भी आवेदक को दे दी जाएगी।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद विधेयक पूरे राज्य में लागू हो जाएगा

साथियों, आपको जानकारी दे दें कि विधेयक को विधान परिषद एवं राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के साथ ही यह एक्ट पूरे बिहार राज्य में लागू हो जाएगा। इसके प्रावधान के अनुसार नई व्यवस्था में म्यूटेशन की पूरी प्रक्रिया टेक्सचुअल एंड स्पेटियल डाटा इंटीग्रेशन आफ लैंड रिकाॅर्ड (textual and spatial data integration of land record) आधारित हो जाएगी।

रजिस्ट्री के साथ आनलाइन दाखिल-खारिज एवं नक्शा भी अपडेट हो जाएगा। आपको बता दें कि इसे भूमि विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक अहम कदम करार दिया जा रहा है।

बिहार दाखिल खारिज संग नक्शा देने वाला पहला राज्य होगा

साथियों, इस विधेयक के प्रावधान लागू होने के साथ ही बिहार के नाम एक खास उपलब्धि जुड़ जाएगी। खास बात यह है कि इस विधेयक के प्रावधान लागू होने के साथ ही बिहार अब दाखिल खारिज के साथ नक्शा देने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। इस कदम से फायदा यह होगा कि किसी भी जमीन की बिक्री होगी तो किस जमीन का कौन सा भूखंड किसके नाम बिक चुका है, उसे डिजिटल नक्शे पर देखा जा सकेगा।

दाखिल खारिज के साथ ही नक्शे के म्यूटेशन के क्या लाभ होंगे

बिहार सरकार के इस कदम से आम जनता को कई लाभ होंगे, जो कि इस प्रकार से है-

  • 1-जमीन की खरीद से पहले चेक हो सकेगा कि संबंधित प्लाट बिका है अथवा नहीं। दरअसल, जमीन के कागजों में नाम बदलने के साथ ही खरीदी जाने वाली जमीन का नक्शा यानी spatial मैप के फोटो के साथ ही खाता, खसरा व रकबा का भी फोटो में होगा। अभी तक की व्यवस्था में जमीन खरीद पर केवल नए खरीदार का नाम, खाता, ख्सरा एवं रकबा ही दर्ज होता है।
  • 2-यह तो आप जानते ही हैं कि प्लाट की चौहद्दी का जिक्र न होने से विवाद की संभावना रहती है। ऐसे में नई व्यवस्था के लागू हो जाने से संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी आएगी।
  • 3-फर्जी विक्रेताओं पर नकल कस सकना संभव होगा।
  • 4-जमीन से जुड़े पक्षों, मसलन खरीदार व विक्रेता के समय की बचत होगी।
  • 5-बिचैलियों एवं दलालों की मनमानी को रोकने में मदद मिलेगी।
  • 6-प्रापर्टी विवाद की वजह से होने वाली हिंसक घटनाओं में भी कमी आएगी।

राज्य सरकार ने तकनीक विकसित करने में आईआईटी रुड़की की सहायता ली

दोस्तों, हमने आपको बताया कि यह spatial म्यूटेशन तकनीक पर आधारित है। बिहार राज्य सरकार ने इस तकनीक को विकसित करने में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (indian institute of technology) यानी आईआईटी (IIT) रूड़की की सहायता ली है।

आईआईटी के विशेशज्ञों को बिहार भूमि विभाग के अधिकारियों ने अपनी आवश्यकता से अवगत कराया। जिसके बाद उन्होंने साथ मिलकर आधुनिक सर्वेक्षण के माध्यम से इस spatial map को तैयार करने की कवायद की है।

2017 में एक दिसंबर को ही शुरू हुआ था आनलाइन म्यूटेशन

मित्रों, यह एक रोचक जानकारी है। आपको बता दें कि बिहार में आज से चार साल पहले यानी 2017 में एक दिसंबर के दिन ही आनलाइन म्यूटेशन (online mutation) यानी आनलाइन दाखिल खारिज का प्रावधान लागू किया गया था। आपको बता दें कि इससे पूर्व दाखिल खारिज में नक्शे का म्यूटेशन नहीं होता था, लेकिन अब इसका भी म्यूटेशन होगा।

प्लाट का दाखिल-खारिज नहीं किए जाने की वजह से 50-60 फीसदी विवाद थाने पहुंचते हैं

साथियों, बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री राम सूरत राय ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया है कि थाने पहुंचने वाले 50-60 प्रतिशत विवादों की वजह प्लाट यानी जमीन का दाखिल खारिज न किया जाना है। उन्होंने बिहार विधानसभा के तमाम विधायकों से भी इस बात की अपील की कि वे अपने अपने भूखंडों (plots) का दाखिल खारिज कराएं।

जाहिर सी है बात है कि विधासभा सदस्यों के पास ऐसे अनेक भूखंड हैं, जिनका दाखिल खारिज नहीं हुआ है। यह बात केवल बिहार विधानसभा के सदस्यों के लिए ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश समेत तमाम विधानसभाओं में मौजदूगी दर्ज कराने वाले विधायकों के लिए कही जा सकती है।

दबंग विधायक तो जमीन कब्जाने में आगे रहते हैं। ऐसे में जमीन की दाखिल खारिज की बात कौन कहे। ऐसे ही हालात अन्य राज्यों में भी हैं। वहां सत्ता की धौंस दिखाकर आम लोगों की जमीन को हड़पने वालों की कमी नहीं।

बिहार हो अथवा उत्तर प्रदेश, कोर्ट में सबसे ज्यादा मामले जमीन से जुड़े

इस वक्त कोर्ट में सबसे ज्यादा केस जमीन से जुड़े हुए ही सामने आते हैं। खास तौर से उत्तर प्रदेश एवं बिहार में। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े हुए लोगों का एक पांव कचहरी में ही रहता है। कोरोना काल में लाॅक डाउन को देखते हुए इसमें थोड़ी कमी देखने को मिली थी, लेकिन अब एक बार फिर कोर्ट खुलने के साथ ही इस तरह के मामलों में इजाफा देखने को मिला है।

बिहार में जमीनों का फर्जीवाड़ा इस उदाहरण से समझें

दोस्तों, बिहार में जमीनों का फर्जीवाड़ा एक उदाहरण से समझ सकते हैं। हाल ही में बोधगया में एक ऐसी जमीन पर फर्जी मालिक को खड़ा कर न केवल रजिस्ट्री करा ली गई, बल्कि अंचल कार्यालय में बैठे कर्मचारियों की मिलीभगत से उसका म्यूटेशन भी करा लिया गया। बोधगया के एसडीपीओ द्वारा मामले का खुलासा किया गया।

मामले के अनुसार गया के रामपुर थाने के तहत अनुग्रहपुरी कालोनी में आशा देवी रहती थीं। उनके पति पाॅल आनंद की मौत हो गई थी। उनकी जमीन मगध विश्वविद्यालय थाने तुरी कला गांव के पास थी। इसका खाता संख्या 49, प्लाॅट संख्या 492, थाना नंबर 423 एवं एसजी 92 डिसिमल थी। इसी गांव के संजय पांडेय ने एक अन्य गांव की महिला को जमीन की मालकिन आशा देवी का नाम दे दिया।

इसके बाद अपने नाम से 85 हजार 892 रूपए का भारी भरकम टैक्स देकर रजिस्ट्री करवा ली। बाद में इस जमीन को कम कीमत में कई लोगों को बेच दिया गया। मामले की जानकारी आशा देवी तक पहुंची तो वे तुरंत थाने पहुंचीं और उन्होंने ठगी करने वालों के खिलाफ नामजद एफआईआर कराई।

पता चला कि आरोपित संजय पांडेय, इंदर पासवान एवं ललिता यादव ने जमीन से 30 लाख रुपए बना चुके थे। यह तो केवल एक उदाहरण हैं। बिहार में इस तरह के न जाने कितने फर्जीवाडे हुए हैं, जिसमें किसी और जमीन को किसी और बताकर बेच दिया गया। विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से ही यह सब कुछ संभव हो सका। पैसे के लिए हर किसी ने धोखाधड़ी को अंजाम देने में सहयोग किया।

अब समझा जा रहा है कि बिहार भूमि दाखिल खारिज संशोधन विधेयक-2022 के प्रावधानों के लागू होने के बाद इस तरह के फर्जीवाड़ों पर नकेल कस सकेगी।

बिहार विधानसभा में दाखिल खारिज संशोधन विधेयक कब पास हुआ है?

दाखिल खारिज संशोधन बिहार विधानसभा में एक दिसंबर, 2021 को पारित हुआ है।

दाखिल खारिज संशोधन विधेयक में क्या प्रावधान किया गया है?

इसमें आनलाइन म्यूटेशन के साथ ही आनलाइन नक्शे को भी अपडेट किए जाने का प्रावधान किया गया है।

इस नई व्यवस्था से क्या लाभ होगा?

नई व्यवस्था से प्लाट की चौहद्दी स्पष्ट हो जाएगी। मैप पर कोई भी देख सकेगा कि किसकी जमीन कहां तक है। इससे जमीन से जुड़े फर्जीवाड़ों पर रोक लग सकेगी।

क्या दाखिल खारिज संशोधन विधेयक लागू हो गए हैं?

राज्यपाल के स्वीकृति देने के साथ ही ये विधेयक कानून का रूप ले लेंगे एवं लागू माने जाएंगे।

एक्ट का बिल विधानसभा में किसने पेश किया?

एक्ट का बिल विधानसभा में बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री राम सूरत राय ने पेश किया।

मित्रों, हमने आपको इस पोस्ट में बिहार भूमि दाखिल खारिज संशोधन विधेयक-2022 के संबंध में जानकारी दी। उम्मीद है कि इस पोस्ट से आपका खासा ज्ञानवर्धन हुआ होगा। यदि आप इसी प्रकार के किसी जनहित से जुड़े मुद्रदे पर जानकारी चाहते हैं तो हमें नीचे दिए गए कमेंट बाॅक्स में कमेंट करके बता सकते हैं। ।।धन्यवाद।।

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