आईवीएफ क्या है- प्रक्रिया, फायदे और साइड इफेक्ट्स | आईवीएफ में कितना खर्चा

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आजकल जैसे जैसे तकनीक बढ़ती जा रही हैं उसी हिसाब से मनुष्य ने भी बहुत उन्नति कर ली हैं। अब चीज़े पहले जैसी नही रही और हम में से (IVF kya hota hai) बहुत से लोग आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अपने दैनिक जीवन को सरल बनाने में करने लगे हैं। इसी में एक नाम है आईवीएफ तकनीक का जिसकी सहायता से महिला गर्भधारण करती हैं।

दरअसल कई महिलाओं को बहुत से कारणों की वजह से गर्भधारण करने में समस्या का सामना करना (IVF kaise hota hai) पड़ता हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर के द्वारा उस महिला को आईवीएफ की सलाह दी जाती हैं।

आईवीएफ की सहायता से एक महिला बिना किसी पुरुष से सम्भोग करे गर्भधारण कर सकती हैं और एक बच्चे को जन्म दे सकती हैं। यदि आप भी (What is IVF in Hindi) आईवीएफ के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं और यह कैसे किया जाता हैं।

आईवीएफ के लाभ क्या हैं और (IVF ke fayde aur nuksan) इसके क्या क्या नुकसान हो सकते हैं इत्यादि के बारे में जानना चाहते हैं तो इस लेख में हम आपको आईवीएफ से संबंधित संपूर्ण जानकारी देंगे। आइए जानते हैं आईवीएफ क्या है और यह कैसे होता हैं।

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आईवीएफ क्या है? (IVF kya hai)

आईवीएफ एक ऐसी प्रक्रिया हैं जिसमें महिला बिना किसी पुरुष से सम्भोग किये अपने गर्भाशय में एक शिशु धारण कर लेती हैं। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि इस प्रक्रिया में महिला के गर्भ में डॉक्टरी प्रक्रिया के द्वारा अंडाणुओं व शुक्राणुओं का मिलन करवाया जाता हैं। इसके बाद महिला अपने गर्भ में एक भ्रूण धारण कर लेती हैं और फिर 9 महीने बाद एक स्वस्थ शिशु को जन्म देती हैं।

हालाँकि यह प्रक्रिया महिला के निजी करनी या किसी समस्या के कारण की जाती हैं। ज्यादातर बांझपन की समस्या से जूझ से रही महिला इस प्रक्रिया का पालन करती हैं ताकि वह मातृत्व का सुख प्राप्त कर सके। इसमें महिला व पुरुष दोनों की सहमती के बाद आईवीएफ की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता हैं।

आईवीएफ क्या है- प्रक्रिया, फायदे और साइड इफेक्ट्स | आईवीएफ में कितना खर्चा

आईवीएफ की फुल फॉर्म (IVF full form in Hindi)

आईवीएफ की फुल फॉर्म इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In Vitro Fertilization) होती हैं। हिंदी में इसे टेस्ट ट्यूब बेबी के नाम से भी जाना जाता (IVF ka pura naam) हैं। आपने महाभारत के समय गांधारी के 100 पुत्र होने की कथा तो सुनी ही होगी। तो इसमें आपने देखा होगा कि किस प्रकार गांधारी के पुत्रो को अलग से जन्म दिया जाता हैं जिसमें उन्हें एक प्रयोगशाला में भ्रूण रूप में विकसित किया जाता हैं। इसके पश्चात उसे माँ के गर्भ में डालकर 9 महीने बाद उन्हें जन्म दिया जाता हैं।

तो यह उस समय की आईवीएफ प्रक्रिया थी जो बहुत ही उन्नत थी। दरअसल भारतीय व सनातन संस्कृति हमेशा से ही उन्नत रही हैं और हमारे द्वारा भूतकाल में कई ऐसे प्रयोग किये गए हैं जिनमे से कुछ तो आज के आधुनिक समय में भी रहस्य बने हुए हैं। इसी में एक आईवीएफ प्रक्रिया भी थी। पहले इसे टेस्ट ट्यूब बेबी के नाम से जाना जाता था लेकिन बदलते समय में इसे आईवीएफ के नाम से जाना जाने लगा हैं।

आईवीएफ प्रक्रिया क्या है? (IVF kaise hota hai)

अब हम जानेंगे कि आईवीएफ प्रक्रिया कैसे होती हैं या फिर इसे कैसे किया जाता हैं। इसको जानकर आप समझ पाएंगे कि आक्जिर इसमें होता क्या हैं (IVF kaise kiya jata hai) कि एक महिला जो बच्चे को जन्म दे पाने में अक्षम थी वह कैसे एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे पाती हैं। दरअसल यह प्रक्रिया कुल पांच चरणों में होती हैं जिन्हें हम क्रमानुसार (IVF ka process kya hai) समझेंगे।

#1. ओवेरियन स्टिमुलेशन (Ovarian stimulation meaning in Hindi)

इसमें जिस भी महिला का आईवीएफ करना होता हैं उसे डॉक्टर की निगरानी में रखा जाता हैं। इसमें जब भी महिला के पीरियड आने होते हैं उससे पहले ही उसे कुछ इंजेक्शन दिए जाते हैं और उन इंजेक्शन की सहायता से उसके पीरियड आने से रोक लिए जाते हैं। फिर इन इंजेक्शन कर हर दिन दिया जाता हैं और ऐसा लगभग 10 से 15 दिनों तक चलता हैं।

हालाँकि इन इंजेक्शन को लगाने में ज्यादा दर्द नही होता हैं और यह केवल महिला के अंडाणुओं के विकास के लिए किया जाता हैं। दरअसल एक महिला के शरीर में जो तत्व अंडाणु निर्माण में सहायक हिते हैं उन्हें बढ़ावा देने या उनकी शक्ति को बढ़ाने के लिए इन इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता हैं। इसी सहायता से महिला पहले से अधिक व स्वत अंडाणुओं का निर्माण कर पाने में सक्षम हो पाती हैं।

#2. महिला की योनी से अंडाणुओं का निकालना

अब बारी आती हैं महिला के शरीर से उन अंडाणुओं के निकालने की। दरअसल महीले के शरीर में 10 से 15 दिनों तक इंजेक्शन लगाने के बाद जब उसके शरीर में अच्छे खासे अंडाणुओं का निर्माण हो चुका होता हैं तब उसे एक सुई के माध्यम से बाहर निकाला जाता हैं।

हालाँकि आपको इस प्रक्रिया के दौरान डरने की आवश्यकता नही हैं क्योंकि अंडे निकालने के लिए आपके पेट में कहीं भी किसी तरह का कोई चीरा या कट नही लगाया जाता हैं।

बस इसे एक सुई के माध्यम से योनी में प्रवेश करवाया जाता हैं और फिर वहां से अंडाणु निकाल लिए जाते हैं। उसके बाद इसे लैब में स्टोर करके रख लिया जाता हैं ताकि ये ख़राब ना हो।

#3. पुरुष से शुक्राणु लेना

अब महिला के अंडाणु निकालने के बाद आती हैं पुरुष के शरीर से शुक्राणुओं का निकालना। वाग पुरुष महिला का पति भी हो सकता हैं या अन्य कोई स्वस्थ पुरुष भी।

इसमें पुरुष का स्खलन करवाया जाता हैं ताकि वह वीर्य निकाल सके। वीर्य के निकल जाने के पश्चात उसे एक ट्यूब में स्टोर करके रखा जाता हैं ताकि वह ख़राब ना हो जाए।

अब इस वीर्य में से शुक्राणुओं को अलग कर दिया जाता हैं और बाकि बचे वीर्य को फेंक दिया जाता हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वीर्य में से केवल शुक्राणु ही होते हैं जो महिला के अंडाणुओं से मिलन कर एक भ्रूण का निर्माण करते हैं।

#4. महिला के अंडाणु व पुरुष के शुक्राणु का मिलन

अब अगली प्रक्रिया होती हैं महिला की योनी से लिए अंडाणुओं का पुरुष के शुक्राणुओं से मिलन करवाना। इसे पूरी तरह से मेडिकल लैब में एक ट्यूब में करवाया जाता हैं।

इसमें महिला के स्वस्थ अंडाणुओं का पुरुष के स्वस्थ शुक्राणुओं से मिलन करवा दिया जाता हैं। जैसे ही दोनों का मिलन होता हैं वैसे ही एक भ्रूण आकार लेने लगता हैं।

यह प्रक्रिया किसी महिला के गर्भ में ना होकर संपूर्ण रूप से मेडिकल लैब में ही होती हैं। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि जो प्रक्रिया सम्भोग के बाद एक पुरुष के द्वारा महिला की योनी में वीर्य के स्खलन के बाद होती हैं वही प्रक्रिया एक लैब में हो रही होती हैं।

#5. भ्रूण का महिला के गर्भाशय में प्रवेश करवाना (IVF process in Hindi)

जब यह प्रक्रिया शुरू की जाती हैं तब उसके 3 से 5 दिनों के लिए उस भ्रूण को मेडिकल लैब में ही विकसित होने दिया जाता हैं। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि वह भ्रूण अपने शुरूआती 3 से 5 दिन किसी महिला के गर्भाशय में ना गुजार कर उस मेडिकल लैब में बिताता हैं और वहां उपलब्ध मेडिकल उपकरणों की सहायता से अपना विकास करता हैं।

इसके 3 से 5 दिनों के पश्चात उस महिला को अस्पताल बुलाया जाता है। यह दिन उस महिला के लिए सबसे खास होता हैं क्योंकि आज वह सही मायनों में गर्भधारण करने वाली होती हैं।

अब उस महिला को बेहोश कर एक ट्यूब की सहायता से उस विकसित हुए 5 दिन के भ्रूण को महिला के गर्भाशय में पहुंचा दिया जाता हैं। इसके बाद वह महिला गर्भधारण कर लेती हैं और आधिकारिक रूप से गर्भवती हो जाती हैं।

इसी के बाद से आईवीएफ की प्रक्रिया समाप्त हो जाती हैं और उसके बाद का सारा काम वैसे ही होता हैं जैसे एक महिला सामान्य रूप से गर्भधारण करती हैं (IVF ki prakriya kaise hoti hai)।

किंतु अब आपके मन में यह प्रश्न उठ होगा कि आखिरकार इस प्रक्रिया की आवश्यकता ही क्यों पड़ती हैं जिस कारण एक महिला को आईवीएफ के माध्यम से गर्भधारण करना पड़ता हैं। आइए उसके बारे में भी जाने।

आईवीएफ करने के कारण (IVF kyu karte hai)

आईवीएफ की प्रक्रिया तो हम ने समझ ली लेकिन आखिर इसकी जरुरत ही क्यों पड़ती हैं। दरअसल इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं (IVF kyu hota hai) जैसे कि:

#1. महिला का बाँझपन

कई महिलाओं में यह समस्या देखने को मिलती हैं कि वह गर्भधारण कर पाने में अक्षम होती हैं। बहुत से महिला व पुरुष शादी के कई वर्षों के बाद भी माता पिता नही बन पाते फिर चाहे वे इसके लिए कितनी भी मेहनत क्यों ना कर ले।

ऐसे में महिला का बाँझपन उसके आड़े आता हैं। यदि महिला बाँझ हैं या माँ बन पाने में अक्षम हैं तो वह आईवीएफ का सहारा लेती हैं।

#2. पुरुष की कमजोरी

बहुत से पुरुषों में भी यह समस्या देखने को मिलती हैं कि वे पिता बन पाने में अक्षम नही होते हैं। ऐसा बहुत से कारण से हो सकता हैं जैसे कि देर से विवाह करना, सिगरेट पीना या अन्य कोई कारण।

ऐसे में यदि पुरुष के शुक्राणु ही कमजोर होंगे तो वे महिला के अंडाणु से मिलन ही नही कर पाएंगे और वे यदि मिलन ही नही कर पाएंगे तो फिर एक भ्रूण का निर्माण ही नही हो पाएगा।

#3. महिला की ज्यादा उम्र

आजकल बदलते माहौल में लोग बहुत देर से शादी करने लगे हैं। साथ ही देर से शादी करने के बाद वे बच्चा भी देर से करते हैं। और मान लीजिए यदि पहले बच्चा समय पर कर लिया या 30 या 32 उम्र के पास भी कर लिया तो दूसरा बच्चा करने में वे बहुत देर लगा देते हैं।

इस कारण महिला की बच्चा करने की क्षमता में कमी आने लगती हैं और उसके अंडाणु कमजोर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में भी महिला प्रजनन क्षमता के कम होने कारण आईवीएफ का आश्रय लेती हैं।

#4. फैलोपियन ट्यूब में समस्या

फैलोपियन ट्यूब वह ट्यूब होती हैं जहाँ से महिला के अंडाणु निकल कर पुरुष के शुक्राणु से मिलन करते हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि जब एक महिला व पुरुष सम्भोग करते हैं तो उसके बाद महिला अपने अंडाणुओं को इसी ट्यूब के माध्यम से बाहर निकालती हैं।

फिर यहाँ से पुरुष के स्पर्म में उपस्थित शुक्राणु महिला के अंडाणु से मिलन कर एक भ्रूण का निर्माण करते हैं। फिर यही भ्रूण महिला के गर्भाशय में चला जाता हैं। अब यदि महिला की इसी ट्यूब में समस्या आ गयी हैं तो उसका माँ बनना असंभव हो जाता हैं।

#5. PCOD की समस्या

महिलाओं को प्रजनन अंगों की कई तरह की सम्स्यें परेशान करती हैं। इसी में एक सबसे मुख्य समस्या हैं PCOD की समस्या। PCOD का पूरा नाम पॉलिसिस्टिक ओवरी डिजीज होता है।

इसमें महिला के हार्मोन में कमी आ जाती हैं और ओवरी में छोटी छोटी गाँठ बन जाती हैं। यह गाँठ महिला के अंडाणु को पुरुष के शुक्राणु से मिलन में बाधक बनती हैं और वह महिला गर्भधारण नही कर पाती हैं।

तो यह कुछ प्रमुख कारण थे जिस कारण एक महिला गर्भ धारण नही कर पाती हैं या माँ नही बन पाती हैं। हालाँकि इनके अलावा भी महिला के अनुसार या उसकी स्थिति के अनुसार कई तरह के कारण हो सकते हैं लेकिन ज्यादातर आईवीएफ करवाने वाली महिलाओं में यही 5 कारण प्रमुख रूप से पाए जाते हैं जो उन्हेंआईवीएफ करने के लिए मजबूत कर देते हैं।

आईवीएफ के फायदे क्या है (IVF benefits in Hindi)

अब जब आपने आईवीएफ की संपूर्ण प्रक्रिया अच्छे से जान ली हैं, यह क्यों किया जाता हैं इसके बारे में भी पता लग चुका हैं तो आपके मन में अवश्य ही ख्याल आ रहा (IVF ke fayde) होगा कि आखिर इसे करने के क्या क्या फायदे हो सकते हैं। या फिर यह हमें किस कारण से करना चाहिए जिससे की हम लाभ में रहे। दरअसल आईवीएफ करने के भी कई लाभ हमें मिलते हैं जिनमे से कुछ मुख्य लाभ इस प्रकार हैं।

  1. यदि महिला की फैलोपियन ट्यूब में किसी भी तरह की समस्या हैं जैसा कि हम ने आको ऊपर ही बताया तो आईवीएफ इसमें बहुत मददगार सिद्ध हो सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आईवीएफ की प्रक्रिया में फैलोपियन ट्यूब का कोई काम ही नही होता हैं। इसमें मेडिकल लैब में टेस्ट ट्यूब की सहायता से महिला के अंडाणु व पुरुष के शुक्राणुओं का मिलन करवा कर उसे सीधा महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता हैं। ऐसे में महिला आसानी से गर्भधारण कर लेती हैं।
  2. यदि किसी महिला के अंडाणु इतने सक्षम नही हैं कि वह स्वत्य्म बच्चा पैदा कर सके तो भी आईवीएफ इसमें बहुत मददगार सिद्ध हो सकता हैं। ऐसी स्थिति में वह महिला किसी और महिला के अंडाणुओं का अपने पति के शुक्राणुओं से मिलन करवा कर अपने गर्भ में स्थानांतरित कर सकती हैं और गर्भधारण कर सकती हैं। इसमें यह आवश्यक नही कि वह इस बारे में सभी को बताये। इस तरह उसका काम भी बन जाता हैं और दोनों खुश भी रहते हैं। हालाँकि इसमें अपने अंडाणुओं को देने वाली महिला की सहमती होना आवशयक होता हैं और साथ ही कुछ कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होता हैं।
  3. अब यह आवश्यक तो नही कि एक महिला के अंडाणु ही कमजोर हो। क्या पता उसके पति के शुक्राणु भी कमजोर हो सकते हैं। कई बार ऐसा देखने को मिलता हैं कि पुरुष की कमजोरी के कारण महिला गर्भधारण कर पाने में अक्षम होती हैं। ऐसी स्थिति में वह महिला किसी अन्य पुरुष के स्पर्म लेकर गर्भधारण कर सकती हैं। इसके लिए एक फिल्म भी आई थी जिसका नाम था विक्की डोनर। उसमे आयुष्मान खुराना ने स्पर्म डोनर की ही भूमिका निभाई थी जो की कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त भी हैं। इसलिए यदि पुरुष महिला को गर्भधारण करवा पाने में अक्षम होता हैं तो आईवीएफ की प्रक्रिया के तहत किसी अन्य पुरुष के शुक्राणुओं का उपयोग किया जा सकता हैं।
  4. कई बार यह देखें को मिलता हैं कि एक महिला का गर्भाशय बच्चा पैदा करने के लिए सक्षम ही नही होता या फिर उसके गर्भाशय में समस्या होती हैं। ऐसी स्थिति में वह गर्भ तो धारण कर लेती हैं लेकिन फिर कुछ ही दिनों में उसका गर्भपात हो जाता हैं। इसमें महिला के अंडाणु या पुरुष के शुक्राणु कमजोर नही होते बस महिला का गर्भाशय एक समस्या होता हैं। ऐसी स्थिति में वह महिला किसी अन्य महिला की सहायता से अपना बच्चा करवाती हैं। इसमें ;पति व पत्नी किसी अन्य महिला को उसकी कोख में अपना बच्चा रखने को राजी करते हैं जो 9 महीने तक उनके बच्चे को अपने पेट में रखती हैं व फिर बच्चा होने पर उन्हें सौंप देती हैं। इस पर तो कई तरह फिल्म भी बन चुकी हैं जिसमें से एक लेटेस्ट फिल्म मिमी हैं।
  5. बहुत बार ऐसा भी देखने को मिलता हैं कि एक महिला गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याओं या प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा को सहन नही करना चाहती हैं या फिर उसे अपने फिगर के बिगड़ जाने का खतरा रहता हैं लेकिन वह माँ भी बनना चाहती हैं। ऐसी स्थिति में भी वह अपने पति की अनुमति से किसी अन्य महिला को गर्भधारण करने के लिए राजी करती हैं जिसमें उस अन्य महिला की कोख में पति व पत्नी के भ्रूण को स्थानांतरित किया जाता हैं। भारतीय सिनेमा में कई अभिनेत्रियों ने इस तकनीक को अपनाया हैं।
  6. यदि कोई शादी नही करना चाहता हैं लेकिन एक बच्चे का सुख प्राप्त करना चाहता हैं तो भी इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकता हैं। मान लीजिए आप शादी करके किसी और व्यक्ति के साथ अपना जीवनयापन नही करना चाहते हैं और ना ही शादी के बाद के उत्तरदायित्व निभाना चाहते हैं लेकिन आप अपने लिए एक बच्चा चाहते हैं। बच्चा भी आप किसी और का गोद लेने की बजाए अपना ही चाहते हैं। तो ऐसे में आप बिना किसी महिला या पुरुष के साथ सम्भोग किये आईवीएफ प्रक्रिया के तहत एक बच्चा प्राप्त कर सकते हैं। लेटेस्ट में बॉलीवुड के प्रसिद्ध डायरेक्टर कारण जौहर इसका उदाहरण हैं।

इसके अलावा भी आईवीएफ की प्रक्रिया के कई अन्य फायदे हैं जो एक पुरुष व महिला उठा सकते हैं। जैसे कि शारीरिक कमजोरी होने पर अपने दांपत्य जीवन का समाज के सामने मजाक उड़वाने से (IVF benefits and risks in Hindi) अच्छा आईवीएफ की प्रक्रिया के तहत माँ बनना व माता पिता का सुख उठाना, अपनी बीमारी को माँ बनने की प्रक्रिया में आड़े नही आने देना इत्यादि सम्मिलित हैं।

ज्यादातर वे महिलाएं भी आईवीएफ प्रक्रिया का लाभ उठाती हैं जो उम्रदराज हो चुकी हैं। जैसे कि यदि आप 35 की उम्र के बाद माँ बनना चाहती हैं तो इसमें बहुत जोखिम रहता हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि 35 की उम्र के बाद महिला की प्रजनन क्षमता बहुत कम हो जाती हैं। इस स्थिति में वह आईवीएफ प्रक्रिया के माध्यम से माँ बनने का सुख प्रप्त्नकर सकती हैं।

आईवीएफ के नुकसान क्या है? (IVF ke side effects in Hindi)

अब तक आपने आईवीएफ की प्रक्रिया के केवल फायदे ही जाने और सब कुछ अच्छा अच्छा ही जाना लेकिन किसी भी चीज़ को संपूर्ण रूप से जानने के लिए (IVF ke nuksan) उसके नुकसान या जोखिम पर बात करना भी उतना ही आवश्यक होता हैं अन्यथा आपको बाद में पछतावा हो सकता हैं। इसलिए अब हम आईवीएफ के नुकसान के बारेमे चर्चा करेंगे।

  1. आईवीएफ का सबसे बड़ा नुकसान यही हैं कि इसमें आपके एक से अधिक बच्चे हो सकते हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि आईवीएफ की प्रक्रिया के तहत एक महिला का जुड़वाँ बच्चों की माँ बनने की संभावना अधिक होती हैं। ऐसे में जो महिला व पुरुष एक बच्चे का सपना लेकर बैठे होते हैं उनके ऊपर एकदम से दो बच्चों के पालन पोषण का भार आ जाता हैं।
  2. आईवीएफ की प्रक्रिया के तहत एक बच्चा समय से पहले भी हो सकता हैं जिसे आज की मेडिकल की भाषा में Premature Baby या असामायिक शिशु या समयसे पहले हुआ शिशु कहा जा सकता हैं। यदि माँ की premature डिलीवरी होती हैं तो उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं। इसमें बच्चे की देखभाल सबसे महत्वपूर्ण होती हैं।
  3. आईवीएफ की प्रक्रिया के तहत एक ओर नुकसान यह हैं कि इसमें बच्चे का जन्म के समय वजन कम रह सकता हैं। ऐसे में बच्चा कमजोर होगा तो उसे बहुत ज्यादा देखभाल की आवश्यकता होती हैं। कुछ स्थितियों में तो बच्चे को कुछ दिनों के लिए डॉक्टर की ही निगरानी में रखा जाता हैं।
  4. कई बार ऐसा देखने को आता हैं कि जब आईवीएफ की प्रक्रिया के तहत भ्रूण को छोड़ा जाता हैं तो वह गर्भाशय में ना रहकर उसके बाहर रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में भ्रूण गर्भाशय में ना रहकर बाहर विकसित होता हैं।
  5. इससे महिला के प्रजनन अंगों में किसी तरह का संक्रमण या इन्फेक्शन होने का भी खतरा बना रहता हैं। यह इन्फेक्शन किसी भी तरह का हो सकता हैं।
  6. आईवीएफ की प्रक्रिया की शुरुआत में महिला के अंडाणुओं के विकास के लिए कई तरह की प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं का प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया जाता हैं। इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी उस महिला में देखने को मिल सकते हैं।
  7. इसके अलावा महिलाओं में आईवीएफ के दुष्प्रभावों के तहत योनी से अधिक रक्तस्राव का होना, ब्रेस्ट में दर्द होना या उनका सख्त हो जाना, सिर दर्द होना या जी मिचलाना इत्यादि समस्याएं देखने को मिलती हैं।

आईवीएफ कब करवाना चाहिए (IVF kab karna chahiye)

आईवीएफ करवाने का निर्णय आप दोनों को तभी करना चाहिए जब आपको यह यकीन हो जाए कि आप दोनों किसी भी तरह से माता पिता बन पाने में अक्षम हैं। साथ ही यदि आपके विवाह को बहुत समय हो गया हैं और बहुत मेहनत करने के बाद भी आप दोनों माता पिता बन पाने में असमर्थ हैं तो इस बारे में पहले अपने डॉक्टर से विचार विमर्श कर ले और उनसे आईवीएफ के बारे बात करें।

डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार सही सलाह देगा क्योंकि उसे पता होगा कि आप दोनों के किस कारण से बच्चा नही हो पा रहा हैं। साथ ही वह आप दोनों के कुछ टेस्ट भी करेगा जिससे यह पता चल सकेगा कि आप दोनों के बच्चा नही हो पाने का कारण क्या हैं और क्या आप आईवीएफ के द्वारा गर्भधारण कर पाएंगी या नही। सब कुछ पक्का हो जाने के बाद ही आईवीएफ करवाने का निर्णय ले।

आईवीएफ का खर्च कितना है (IVF ka kharcha)

यह एक जटिल प्रक्रिया हैं और उसमे बिना सम्भोग के महिला को गर्भधारण करवाने में सहायता की जाती हैं। ऐसे में इसे करवाने की प्रक्रिया भी आमतौर पर महँगी होती हैं। सामान्य तौर पर आईवीएफ की प्रक्रिया में 1 से 5 लाख तक रुपए खर्च हो सकते हैं। यह पूरी तरह से इस पर निर्भर करता हैं कि आप किस शहर से और किस अस्पताल से और किस डॉक्टर से यह प्रक्रिया करवाने जा रहे हैं।

दरअसल अस्पताल के नाम व उसमे उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार आईवीएफ की प्रक्रिया में होने वाला खर्च भी अलग अलग होता हैं। ऐसे में आपको अपना बजट पहले से ही बनाकर चलना होगा क्योंकि इसमें आपका कम से कम 1 लाख रूपया तो लगेगा ही लगेगा, इससे ज्यादा चाहे लग जाए। इसलिए आईवीएफ की प्रक्रिया में आगे बढ़ने से पहले इसके लिए परिवार में अच्छे से विचार विमर्श अवश्य कर ले।

आईवीएफ की सफलता दर क्या है (IVF success rate in India in Hindi)

अब जब आप इतना खर्चा कर रहे हैं तो आपके मन में यह प्रश्न भी उठेगा कि आखिरकार इतना खर्चा होने के बाद भी उसका सफल परिणाम नही मिला तो क्या होगा। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि आईवीएफ की प्रक्रिया के बाद भी यदि आप भ्रूण धारण नही कर पायी यह प्रयोग असफल हो जाए तो फिर। इसके ;लिए आपको आईवीएफ की सफलता दर भी जान लेनी चाहिए ताकि आप उसी के अनुसार अपना निर्णय ले सके।

आईवीएफ की सफलता दर बहुत सीमा तक एक महिला की उम्र पर निर्भर करती हैं। जैसे जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती हैं वैसे वैसे ही आईवीएफ की सफलता की दर भी कम होने लगती हैं। सीधे शब्दों में कहे तो ज्यादा उम्र की महिलाओं में आईवीएफ की सफलता का दर कम होता हैं जबकि सामान्य उम्र की महिलाओं में इसकी सफलता का प्रतिशत अधिक होता हैं।

यदि कोई महिला 35 वर्ष से कम उम्र की हैं तो उसमे आईवीएफ की सफलता का दर 50 प्रतिशत होगा अर्थात सामान्य उम्र की महिला में भी आईवीएफ सफल हो इसकी संभावना आधी होती हैं। इसके बाद उम्र दर उम्र आईवीएफ की सफलता का प्रतिशत कम हो जाता हैं जो ४१ की उम्र के बाद तो 10 से 20 प्रतिशत तक ही रह जाता हैं। ऐसे में कोई महिला यदि 40 की उम्र के बाद आईवीएफ करवाने का सोच रही हैं तो उसे बहुत सोच समझ कर व डॉक्टर की सलाह पर ही यह निर्णय लेना चाहिए।

आईवीएफ के बाद सावधानी (IVF ke baad savdhaniya)

अंतिम और सबसे मुख्य बात, अब जब आपने आईवीएफ करवा लिया हैं या पक्का कर लिया हैं कि आप आईवीएफ करवाएंगी ही तो आईवीएफ करवाने के बाद क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए, इसके बारे में भी पता होना चाहिए। ताकि आपकी कोई गलती की वजह से कुछ अनहोनी ना होने पाए।

इसलिए आईवीएफ के बाद अपनी गर्भावस्था को सुचारू रूप से चलाये रखने के लिए आपको निम्नलिखित चीज़ों का आवश्यक रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता हैं:

  • सबसे पहले तो आईवीएफ के बाद आप अपने पति से या अन्य किसी पुरुष से सम्भोग करने से बचें क्योंकि ऐसा करने से गर्भपात की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती हैं।
  • किसी भी भारी चीज़ को उठाने से बचे फिर चाहे वह आपके नहाने की बाल्टी ही क्यों ना हो। ऐसा इसलिए क्योंकि भारी चेज़ उठाने के कारण आपके पेट में दबाव बढ़ेगा और गर्भपात हो जाएगा।
  • दोपहिया वाहन को खुद ना चलाये क्योंकि इसमें ब्रेक मरते समय पेट पर दबाव रहता हैं। इसके साथ ही यदि आप कार या अन्य किसी वाहन से बाहर जाती हैं तो गड्डों का ध्यान रखे क्योंकि किसी भी गड्डे पर एक जोर का झटका लगा नही कि उसी समय आपका गर्भपात हो जाएगा।
  • ऐसे व्यायाम करने से बचे जिनमे शारीरिक मेहनत ज्यादा लगती हो। यदि आप जिम इत्यादि जाती हैं तो आज से ही जाना बंद कर दे व किसी भी भारी व्यायाम को करने से बचे। आप चाहे तो योग कर सकती हैं क्योंकि इससे ना केवल आप बल्कि आपके गर्भ में पल रहा बच्चा भी एकदम स्वत अनुभव करेगा।
  • यदि आपको धुम्रपान या अल्कोहल पीने की आदत हैं या फिर आप समय समय पर इन नशीले पदार्थों का सेवन करती रहती हैं तो आज से ही इसे छोड़ दे। इन्हें तो आपको गर्भधारण करने से पहले और फिर बच्चा पैदा होने के कम से कम 1 साल तक छोड़ना होगा। यदि आप यह नही छोड़ सकती हैं तो आपको किसी भी स्थिति में गर्भधारण नही करना चाहिए।
  • तनाव को किसी भी स्थिति में अपने ऊपर हावी ना होने दे। यदि आप मंरिक तनाव लेंगी या किसी बात को मन में रखकर चिंता में रहेगी तो यह आपके अजन्मे बच्चे के लिए घातक सिद्ध हो सकता हैं। ज्यादा तनाव में तो महिला को गर्भपात तक हो सकता हैं।

आईवीएफ क्या है – Related FAQs

प्रश्न: आईवीएफ कैसे किया जाता है?

उत्तर: आईवीएफ में एक महिला के गर्भाशय में परखनली के द्वारा अंडाणुओं व शुक्राणुओं का मिलन करवा कर एक भ्रूण का स्थानान्तरण करवाया जाता है।

प्रश्न: आईवीएफ कब किया जाता है

उत्तर: किसी कारणवश जब एक महिला व पुरुष माता पिता बन पाने में असमर्थ होते हैं या महिला गर्भधारण नही कर पाती हैं तब उस स्थिति में आईवीएफ का आश्रय लिया जाता है।

प्रश्न: आईवीएफ प्रक्रिया में कितना समय लगता है?

उत्तर: आईवीएफ की पूरी प्रक्रिया में 2 से 3 सप्ताह का समय लग सकता है। हालाँकि यह महिला की जटिलता के अनुसार ज्यादा भी हो सकता है।

प्रश्न: एम्ब्र्यो ट्रांसफर के कितने दिन बाद प्रेगनेंसी होती है?

उत्तर: सामान्य तौर पर जब एक महिला के शरीर में भ्रूण डाला जाता है तो उसके 9 से 10 दिनों के बाद उसकी गर्भावस्था का परिक्षण किया जाता है।

प्रश्न: भ्रूण के स्थानांतरण के बाद आगे क्या?

उत्तर: एक महिला के गर्भाशय में सफलतापूर्वक भ्रूण के स्थानान्तरण के बाद कुछ दिनों के लिए उस पर नज़र रखी जाती है। एक बार गर्भावस्था पक्का हो जाने के पश्चात आईवीएफ प्रक्रिया समाप्त हो जाती है।

प्रश्न: आईवीएफ ट्रीटमेंट में कितना खर्चा आता है?

उत्तर: सामान्य तौर पर आईवीएफ के ट्रीटमेंट में 1 लाख से लेकर 5 लाख तक का खर्चा दंपत्ति को उठाना पड़ सकता है।

प्रश्न: टेस्ट ट्यूब बेबी और आईवीएफ में क्या अंतर होता है?

उत्तर: दरअसल दोनों में कोई अंतर नही है क्योंकि यह दोनों एक ही चीज़ हैं जिसे दो नामो से जाना जाता है।

प्रश्न: सरकारी हॉस्पिटल में आईवीएफ होता है क्या?

उत्तर: आप भारत के सरकारी या निजी किसी भी अस्पताल में आईवीएफ की प्रक्रिया को करवा सकते हैं।

प्रश्न: टेस्ट ट्यूब बेबी में खर्च कितना आता है?

उत्तर: टेस्ट ट्यूब बेबी में अनुमानित खर्चा 1 लाख से लेकर 5 लाख तक का होता है।

तो यह कुछ चीज़े थी जो एक महिला को आईवीएफ के बाद ध्यान रखनी चाहिए। इसके अलावा, एक सामान्य गर्भधारण के बाद महिला को जिन नियमों का पालन करना होता हैं उन्हीं नियमों का आपको भी पालन करना होगा ताकि आप नौ माह बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सके।

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