इस्लामिक बैंक क्या है? | इस्लामिक बैंक कैसे काम करते हैं? | Islamic bank kya hai

|| इस्लामिक बैंक क्या है? | Islamic bank kya ha | Explain Islamic banking in Hindi | क्या इस्लामिक बैंक में कोई भी खाता खुलवा सकता है? | इस्लामिक बैंक के ग्राहकों पर नियम | इस्लामिक बैंकिंग क्या है विस्तार से ||

Islamic bank kya hai :- आपने कई तरह के बैंकों के नाम सुन रखे होंगे जो हमारे देश में चल रहे हैं। इसमें सरकारी बैंक के साथ साथ निजी क्षेत्र के बैंक भी आते हैं तो कुछ बैंकों को अलग थीम पर खोला गया होता है। किन्तु क्या आपने किसी ऐसे बैंक का नाम सुना है जो किसी धर्म के नियमों के तहत चलता हो? जी हां, एक ऐसा बैंक है जो इस्लाम धर्म के नियमों अर्थात शरियत कानून के अनुसार चलता है। इस बैंक को हम सभी इस्लामिक बैंक के नाम से जानते (Explain Islamic banking in Hindi) हैं।

अब बहुत जनों ने इस इस्लामिक बैंक का नाम नहीं सुना होगा तो कईयों ने इसके बारे में थोड़ा बहुत सुन रखा होगा। आपमें से कुछ लोगों को इस्लामिक बैंक के बारे में जानकारी न्यूज़ इत्यादि देखकर पता लगी होगी क्योंकि भारत देश में अभी इस्लामिक बैंक का इतना विस्तार नहीं हुआ है। हालाँकि कुछ राज्यों में इसकी एकाध ब्रांच अवश्य खुल चुकी है लेकिन मुख्य तौर पर यह इस्लामिक देशों में ही कार्य कर रहा (Islamic bank kya hai in Hindi) है।

ऐसे में आज के इस लेख में हम आपके साथ इसी इस्लामिक बैंक के ऊपर चर्चा करने वाले हैं। आज के इस लेख को पढ़कर आपके मन में इस्लामिक बैंक को लेकर जो भी सवाल या प्रश्न है, उन सभी की जानकारी मिलेगी। तो आइये जाने इस्लामिक बैंक क्या होते हैं और किस तरह से कार्य करते (Islamic banking kya hai) हैं।

इस्लामिक बैंक क्या है? (Islamic bank kya hai)

सबसे पहले हम बात करते हैं इस्लामिक बैंक की और जानने का प्रयास करते हैं कि आखिरकार यह इस्लामिक बैंक होता क्या है या फिर इस्लामिक बैंक से हमारा क्या मतलब है। तो बैंक से आप क्या समझते हैं? बैंकिंग प्रणाली का अर्थ होता है एक ऐसी जगह जहाँ पर हम अपने पैसे या फिर जमा पूँजी को जमा करवाते हैं और वहां पर हमारा पैसा सुरक्षित होता है। इसी के साथ ही बैंक के द्वारा हमारे द्वारा जमा की गयी राशि पर वार्षिक तौर पर हर महीने के अनुसार ब्याज दिया जाता (Islamic banking explained in Hindi) है।

Islamic bank kya hai

इसी के साथ ही बैंक से हम तरह तरह के लोन ले सकते हैं और उन लोन को हमें ब्याज सहित अपने बैंक को किश्तों के रूप में चुकाना होता है। बैंकिंग प्रणाली का यही कार्य होता है और वह इसी के जरिये ही पैसा कमाता है। इसमें वह हमारे द्वारा जमा करवाई गयी राशि पर हमें ब्याज देता है तो वहीं हमें दिए गए लोन पर हमें बैंक को उसके मूल धन सहित ब्याज चुकाना होता है किन्तु इस्लामिक बैंक इनमें से ऐसा कुछ नहीं करता (What is Islamic banking in Hindi) है।

जो इस्लामिक बैंक होते हैं वे पूर्ण रूप से इस्लाम के शरिया कानून या जिसे हम शरियत भी कहते हैं, उस पर काम करते हैं। इस्लामी कानून के अनुसार ब्याज देना और लेना दोनों ही हराम माने जाते हैं। ऐसे में हम जो भी पैसा इस्लामिक बैंक में जमा करवाते हैं, उस पर बैंक के द्वारा हमें किसी भी तरह का ब्याज नहीं दिया जाता है। इसी के साथ ही हम इस्लामिक बैंक से जो भी राशि लोन या ऋण में लेते हैं, उस राशि पर भी हमें बैंक को किसी तरह का ब्याज नहीं देना होता है। हमें बस बैंक को उसका मूल धन ही लौटाना होता (Islamic banking in Hindi) है।

इस तरह से इस्लामिक बैंक उन्हें कहा जाता है जो अपने ग्राहकों के जमा पैसों पर किसी तरह का ब्याज नहीं देते हैं और ना ही अपने ग्राहकों को दिए गए लोन पर किसी तरह का ब्याज लेते हैं। हालाँकि उनके द्वारा जो भी कमाई की जाती है वह पूर्ण रूप से अपने यहाँ उपलब्ध पैसों को विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करके की जाती है। इसी के साथ ही इस्लामिक बैंक में एफडी करवाना या अन्य किसी योजना में पैसे जमा करवाना जिसमें पैसों पर ब्याज मिलता है, वह नहीं होता है। आइये इस्लामिक बैंक के बारे में और इसकी कार्य प्रणाली के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

इस्लामिक बैंक कैसे काम करते हैं? (Islamic bank kaise kaam karte hai)

इस्लामिक बैंक क्या होते हैं, यह तो आपने जान लिया है लेकिन यह इस्लामिक बैंक किस तरह से कार्य करते हैं, इसके बारे में भी तो जानकारी ली जानी जरुरी है। तो आप सभी सोच रहे होंगे कि इस्लामिक बैंक के द्वारा ग्राहकों को ना तो ब्याज दिया जाता है और ना ही उनसे ब्याज लिया जाता है तो वह कमाई कैसे करता होगा। तो इस्लामिक बैंक के द्वारा कमाई करने का मुख्य स्रोत होता है उनके द्वारा पैसों को अलग अलग क्षेत्रों में निवेश किया जाना।

इसके तहत इस्लामिक बैंक में जो भी ग्राहक अपना पैसा जमा करवाता है, उसे वह विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करता है जिसमें जमीन का सौदा करना प्रमुख होता है। अब इस्लामिक बैंक के द्वारा जमीन को पट्टे पर लिया जाता है या लीज पर लिया जाता है और उसे किसी कंपनी या उद्योग को किराये पर या काम करने के लिए दिया जाता है। इसी के साथ ही उनके द्वारा जमीन की खरीदी और बेची के सौदे किये जाते हैं। एक तरह से वह जमीन के सौदागर या दलाल के रूप में कार्य करता है।

इन सभी के अलावा उनके द्वारा अन्य जगहों पर भी निवेश करके पैसा कमाया जाता है। इसमें कई तरह के निवेश शामिल होते हैं जैसे कि किसी कंपनी के शेयर या एसेट में निवेश करना, उद्योग में निवेश करना या किसी संस्थान को बढ़ावा देना इत्यादि। इस तरह से इस्लामिक बैंक कार्य करता है और पैसा कमाने का कार्य करता है। अपने द्वारा की जा रही कार्य प्रणाली का असर उसके अंतर्गत काम कर रहे कर्मचारियों पर नहीं पड़ता है और उन्हें उनका मासिक वेतन मिलता रहता है।

इस्लामिक बैंक किस कानून पर चलता है? (Islamic banking laws in Hindi)

आज से लगभग 1400 वर्ष पहले इस दुनिया ने अपने यहाँ इस्लाम का जन्म होते देखा। मक्का मदीना में मोहम्मद पैगम्बर ने स्वयं को अल्लाह का दूत बताया और इस्लाम धर्म की नींव रखी। उसके बाद देखते ही देखते यह दुनिया के कई देशों में फैल गया और आज यह विश्व का ईसाई धर्म के बाद दूसरा सबसे बड़ा धर्म है। तो हर धर्म का एक कानून होता है जो उनकी पवित्र पुस्तक में लिखा होता है। उसी तरह इस्लाम धर्म जिस कानून पर चलता है उसे उनकी कुरान में लिखा हुआ है जिसे हम सभी शरिया कानून के नाम से जानते हैं।

दुनिया के बहुत से मुस्लिम देशों में यह शरिया कानून काम कर रहा है और वहां के लोगों को उस पर चलना पड़ता है। यहाँ तक कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में भी सिविल मामलों के लिए मुस्लिमों पर भारतीय कानून नहीं चलता है और उन्हें शरिया कानून का पालन करना होता है। ऐसे में यह इस्लामिक बैंक भी इसी शरिया कानून पर ही चलता है और कुरान में बताई गयी बातों का पालन करता है। इसी कारण इस बैंक का नाम भी इस्लामिक बैंक रखा गया है।

इस्लामिक बैंक के ग्राहकों पर नियम (Islamic banking rules and regulations in Hindi)

अब आपने यह तो जान लिया है कि यदि आप इस्लामिक बैंक में अपना खाता खुलवाते हैं तो आपको उस पर जमा करवायी गयी राशि पर किसी तरह का ब्याज नहीं मिलता है। ठीक उसी तरह यदि आप इस्लामिक बैंक से किसी तरह का लोन लेते हैं तो उस पर आपको किसी तरह का ब्याज नहीं चुकाना होता है। किन्तु इसके अलावा एक और चीज़ के माध्यम से इस्लामिक बैंक अपने ग्राहकों को प्रभावित करता है।

अब आपने यह भी जाना कि इस्लामिक बैंक के द्वारा दुनिया के कई क्षेत्रों में निवेश किया जाता है और लाभ कमाया जाता है। तो इस्लामिक बैंक के द्वारा जगह जगह निवेश करने पर जो लाभ कमाया जाता है, उसका एक अंश वह बैंक अपने ग्राहकों के साथ उनके द्वारा निवेश किये गए पैसों के आधार पर वितरित करता है। इसी तरह यदि उसे किसी क्षेत्र में निवेश करने पर नुकसान होता है, तो वह अपने ग्राहकों के पैसे काट कर उस निवेश की भरपाई भी करता है।

यह कुछ कुछ किसी कंपनी के शेयर खरीदने के जैसा हो गया। हम किसी कंपनी में निवेश करने के लिए उसके शेयर खरीदते हैं। उसके बाद वह कंपनी जिस तरह से काम करती है, उसके अनुसार उस कंपनी के शेयर का मूल्य या तो बढ़ता है या घटता है। ऐसे में उस व्यक्ति के शेयर का मूल्य भी उसी गति के साथ बढ़ता या घटता चला जाता है। तो कुछ इसी तरह की कार्य प्रणाली इस्लामिक बैंक में पैसा जमा करवाने वालों के साथ देखने को मिलती है।

इस्लामिक बैंक में क्या है निषेध

अब हमने आपको ऊपर ही बताया कि इस्लामिक बैंक पूर्ण रूप से शरिया कानून के अनुसार चलता है। शरिया कानून या इस्लाम में बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें निषेध माना गया है। इसमें से एक तो ब्याज था जो इस्लामिक बैंक ना ही लेता है और ना ही देता है। किन्तु इस्लामिक बैंक के द्वारा जो निवेश किया जाता है, उसमें भी शरिया कानून के अनुसार कई चीज़ों में निवेश करने की सख्त मनाही होती है क्योंकि उन्हें इस्लाम में वर्जित माना गया है।

ऐसे में इस्लामिक बैंक के द्वारा किसी भी तरह के नशा बाजार में, वैश्यावृत्ति, पोर्नोग्राफी, सट्टे बाजार या इससे संबंधित किसी भी क्षेत्र में निवेश नहीं किया जाता है। इनके अलावा जो कंपनियां इस्लाम में प्रतिबंधित की गयी है या जिन्हें वह सही नहीं मानता है, उनमे भी इस बैंक के द्वारा किसी तरह का निवेश नहीं किया जाता है। इस तरह से इस्लामिक बैंक को बहुत सी चीज़ों में निवेश करने की मनाही होती है।

क्या इस्लामिक बैंक में कोई भी खाता खुलवा सकता है?

अब यदि आप सोच रहे हैं कि केवल इस्लाम धर्म को मानने वाले या मुस्लिम धर्म के लोग ही इस्लामिक बैंक में अपना खाता खुलवा सकते हैं या उसकी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं तो आप गलत हैं। अवश्य ही यह बैंक इस्लाम के बनाये गए कानूनों पर चलता है लेकिन इसकी सेवाओं का इस्तेमाल दुनिया में किसी भी धर्म का व्यक्ति कर सकता है।

ऐसे में आप चाहे किसी भी धर्म से संबंध क्यों ना रखते हो, आप भी इस्लामिक बैंक में अपना खाता खुलवा सकते हैं या इस बैंक से लोन लेने के लिए अपना आवेदन दे सकते हैं। यही कारण है कि भारत देश में भी इस्लामिक बैंक के द्वारा अपनी शाखाएं खोलने के लिए जोर दिया जा रहा है और जल्द ही यह शायद खुल भी जाए।

भारत में इस्लामिक बैंक की स्थिति (Islamic bank in India in Hindi)

अब यदि हम भारत में इस्लामिक बैंक की स्थिति या उसकी शाखाओं को लेकर बात करें तो अभी यह शुरूआती स्थिति में ही है। भारत के कोच्ची शहर जो कि केरल राज्य में है, वहां पर इसकी शाखा खोली जा चुकी है। चूँकि केरल राज्य में इस्लाम धर्म को मानने वालों की संख्या बहुत ज्यादा हो गयी है और वहां की सरकार भी पूर्ण रूप से इसका समर्थन करती है और वामपंथी भी है, इसलिए उसे उनका सहयोग भी प्राप्त है।

अब इस्लामिक बैंक के द्वारा भारत के एक और राज्य गुजरात में अपनी शाखा खोलने की बात चल रही है और इसके लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से बातचीत भी की जा रही है। अब यदि भाजपा के द्वारा यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो वह गुजरात सहित अन्य राज्यों में अपने इस्लामिक बैंक की शाखाएं खोल सकती है अन्यथा उसे देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।

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इस्लामिक बैंक क्या है – Related FAQs 

प्रश्न: इस्लामिक बैंकिंग क्या है विस्तार से

उत्तर: इस्लामिक बैंकिंग की पूरी जानकारी आपको विस्तार से इस लेख में मिलेगी जो आपको पढ़ना चाहिए।

प्रश्न: क्या इस्लामिक बैंक ब्याज देते हैं?

उत्तर: नहीं, इस्लामिक बैंक ब्याज देना और लेना हराम की कमाई मानते हैं इसीलिए इस्लामिक बैंक ब्याज नही देते हैं।

प्रश्न: इस्लामिक बैंक पैसे कैसे कमाते हैं?

उत्तर: इस्लामिक बैंक के द्वारा कमाई करने का मुख्य स्रोत होता है उनके द्वारा पैसों को अलग अलग क्षेत्रों में निवेश किया जाना।

प्रश्न: क्या मैं इस्लामिक बैंक से पैसे उधार ले सकता हूं?

उत्तर: इस्लामिक बैंक हर धर्म के लोगों को लोन देता है तो इस्लामिक बैंक से कोई भी व्यक्ति पैसे ले सकता है।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने इस्लामिक बैंक के बारे में जानकारी प्राप्त कर ली है। आपने जाना कि इस्लामिक बैंक क्या है इस्लामिक बैंक कैसे और किस कानून पर काम करते हैं इस्लामिक बैंक में क्या निषेध है इत्यादि। आशा है कि जो जानकारी लेने के लिए आप इस लेख पर आए थे वह आपको मिल गई होगी। फिर भी यदि कोई प्रश्न आपके मन में शेष है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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