धारा 144 क्या है? धारा 144 कब लगाई जाता है? IPC Section 144 In Hindi

IPC Section 144 In Hindi – आपने कभी न कभी धारा 144 का नाम जरूर सुना होगा। खास तौर पर परीक्षा के वक्त, चुनाव के दौरान या फिर कोर्ट की ओर से किसी महत्वपूर्ण निर्णय को सुनाए जाते वक्त। आपने देखा होगा कि जब चुनाव का दौर चलता है तो कुछ मतदान केंद्रों को संवेदनशील घोषित करती है। ऐसे में उन मतदान केंद्रों के बाहर एक निश्चित परिधि तक धारा 144 लगा दी जाती है। इसी तरह दंगे या हिंसा के लिहाज से संवेदनशील किसी स्थान पर परीक्षा आयोजित कराई जाती है तो परीक्षा केंद्र के इर्द गिर्द परीक्षा के दौरान धारा 144 लगा दी जाती है। और दोस्तों, बहुत दूर जाने की भी जरूरत नहीं।

धारा 144 क्या है? धारा 144 कब लगाया जाता है? IPC Section 144 In Hindi

इसी महीने बीती नौ नवंबर को आए रामजन्म भूमि विवाद में अयोध्या मामले पर फैसले को ही लें। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही ज्यादातर जगहों पर धारा 144 लगा दी गई थी। इसकी वजह यह थी कि सरकार किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने के लिए पूरी तरह सतर्क थी कि कहीं इस मामले पर निर्णय के बाद कोई दंगा न हो, अशांति न फैले। ऐसे में पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकटृठा होने, रैली, जुलूस निकालने पर रोक लगा दी गई। स्कूल कालेज बंद कर दिए गए।

ऐसे में आपके जहन में यह सवाल तो जरूर उठ रहा होगा कि आखिर यह धारा 144 क्या है? यह कब अस्तित्व में आई? इसे क्यों लागू किया जाता है? इसे कौन लगा सकता है? क्या इस धारा के तहत गिरपतार होने वालों को जमानत मिल सकती है? इन सब सवालों के जवाब हम आपको इस post के माध्यम से देने की कोशिश करेंगे। आपको करना बस इतना है कि इस post को शब्द दर शब्द पढते चले जाना है.. आइए जानते हैं धारा 144 के बारे में –

CrPC की धारा 144 क्या है? IPC Section 144 In Hindi –

जी हां, आपके इस सवाल का जवाब हां में है। यह CrPC की यानी आपराधिक प्रक्रिया संहिता, जिसे Code of Criminal Procedure (CrPC) भी पुकारा जाता है, की ही एक धारा है। CrPC से जुडा कानून 1973 में पास हुआ था और आपको बता दें कि इसे ठीक एक साल बाद यानी 1974 में लागू कर दिया गया था। इस कानून में अपराध को लेकर आरोपी और पीडित दोनों ही के संबंध में व्यवस्था दी गई है। इसी क्रम में धारा 144 की भी व्यवस्था दी गई है। यह धारा किसी भी क्षेत्र या इलाके में शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लगाई जाती है।

धारा 144 कौन लागू करता है –

जैसा कि स्पष्ट है कि किसी भी क्षेत्र में दंगे, लूटपाट, आगजनी, हिंसा मारपीट आदि की आशंका को देखते हुए धाराा 144 को लागू किया जाता है। किसी इलाके में इसे प्रभावी करने के लिए बाकायदा जिला मजिस्ट्रेट या डीएम की ओर से अधिसूचना या नोटिपिफकेशन जारी किया जाता है। पुलिस यह सुनिश्चित करती है कि धारा का उल्लंघन न होने पाए। अगर कोई व्यक्ति इसका उल्लंघन करता पाया जाता है तो CrPC के तहत प्रभावी धाराओं में गिरपतार कर लिया जाता है।

धारा 144 लागू होने के बाद क्या होता है –

धारा 144 के लागू होने के बाद उस इलाके में पांच या उससे ज्यादा लोगों के एकत्र होने पर रोक होती है। उस इलाके में कोई बैठक नहीं हो सकती और न ही रैली या जुलूस ही निकाला जा सकता है। इतना ही नहीं, इस धारा के लागू हो जाने के साथ ही उस इलाके में हथियार भी नहीं ले जाए जा सकते हैं। यातयात संचालन यानी traffic की आवाजाही पर भी रोक रहती है। इसके साथ ही प्रशासन internet सेवाओं को भी इस धारा के लागू होने के बाद ठप करा सकता है।

ऐसा जम्मू कश्मीर में अधिकांशत देखने को मिला है। वहां आतंकियों के छिपे होने की स्थिति में सेना के सर्च आपरेशन चलने के वक्त संबंधित क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी जाती है, जिसके तहत internet की सर्विस को या तो ठप कर दिया जाता है या पिर उसकी service को कम करके 2जी पर ला दिया जाता है। ऐसा ही तब किया गया था, जबकि बीती पांच अक्तूबर को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के लिए फैसला किया गया था। ऐसा खराब हालात होने की आशंका के मदृदेनजर सावधानी बरतने के लिए किया जाता है। जम्मू डिवीजन भी इसकी चपेट में था। करीब एक माह बाद वहां लोगों को internet की सुविधा सामान्य रूप से बहाल की गई।

कितनी अवधि के लिए लगाई जाती है धारा 144 –

साथियों, आपको बता दें कि धारा 144 किसी क्षेत्र में दो माह के लिए लगाई जा सकती है। लेकिन अगर क्षेत्र में दंगा फैलने और हालात बिगडने की आशंका हो तो इसे छह महीने तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इसे छह महीने से आगे बढ़ाए जाने का अभी तक फिलहाल कोई प्रावधान नहीं आया है। दिनों की गणना धारा 144 प्रभावी होने के तुरंत बाद से ही प्रारंभ मानी जाती है।

क्या Dhara 144 नागरिक सुरक्षा से जुडी धारा है –

जी हां, यह धारा नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करती है।दरअसल, यह धारा ऐसे हालातों पर नियंत्रण करने के लिए इस्तेमाल में लाई जाती है, जिनकी वजह से दंगे भडक सकते हैं। मसलन पंचायत या अन्य किसी स्तर के चुनाव का ही ले लें। मतदान और मतगणना वाले दिन प्रशासन मतदान/मतगणना स्थल से कुछ दूरी तक धारा 144 लगा देता है। उसका सीधा सा मकसद उस स्थल तक ऐसे उपद्रवी या शरारती तत्वों का जमावडा रोकना है या ऐसे तत्वों की आवाजाही को नियंत्रित करना है, जो किसी भी तरह की अफवाह फैला सकते हैं, दंगा करा सकते हैं या मतदान/मतगणना गतिविधि को प्रभावित करने का कार्य कर सकते हैं।

क्या धारा 144 जमानती धारा है? क्या Dhara 144 में जमानत हो सकती है –

जी हां, यह एक जमानती धारा है। इसका मतलब यह है कि धारा 144 के उल्लंघन में गिरफ्तार किए गए लोगों को जमानत मिल सकती है। इसके लिए उन्हें कोर्ट के अनुसार निर्धारित मुचलके भरने होते हैं या आवश्यक शर्त पूरी करनी होती है। कई बार यह भी होता है कि पुलिस कोई अहम मसला देखते हुए शांति भंग की आशंका में पहले ही कुछ लोगों को उठाकर नजरबंद कर लेती है। अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद को लेकर इसी नौ नवंबर को आए फैसले से पहले भी ऐसा ही किया गया।

यहां तक कि भारत बंद जैसे पुराने बवाल में सोशल मीडिया पर पोस्ट अपलोड करने के मामले में जिनके नाम आए थे, उन्हें भी पुलिस ने पहले ही नजरबंद कर लिया था। इसके अलावा जिन पर गंभीर धाराएं थीं, उन्हें उठा भी लिया गया था। बाद में ऐसे लोगों को छोड दिया गया। यह अलग बात है कि मेरठ, बिजनौर आदि कई जगहों पर कुछ को फैसला आने के बाद सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट अपलोड करने के लिए उठाया गया।

Dhara 144 से कितनी हो सकती है सजा?

इस धारा का उल्लंघन करने वालों पर मसलन दंगे या बवाल जैसी गतिविधियों में शामिल होने वालों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जाता है। इन गतिविधियों के तहत आरोपी व्यक्ति को धारा 107 या 151 के तहत गिरफ्तार किया जाता है। आपको यह भी बता दें कि दोष सिद्ध होने पर उसे अधिकतम तीन साल तक की कैद हो सकती है।

धारा 144 का इतिहास क्या है –

आइए, अब आपको धारा 144 के इतिहास की जानकारी दें। दोस्तों जब आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता का निर्माण किया जा रहा था तो उस वक्त यह भी ध्यान रखा गया कि दंगे या अप्रिय स्थिति की स्थिति में दंड की व्यवस्था हो, लेकिन उससे पहले उसे टालने के लिए ऐसा कोई प्रावधान हो, जिसे प्रभावी कर इन स्थितियों से बचा जा सके। यही वजह है कि धारा 144 अस्तित्व में आई। इसे सीआरपीसी का एक हिस्सा बनाया गया। जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं कि इसे आज से करीब 45 साल पहले यानी 1974 में लागू किया गया।

क्या धारा 144 और कर्फ्यू एक ही चीज हैं? धारा 144 और कर्फ्यू में क्या अंतर है –

दोस्तों कई बार लोग धारा 144 और कर्फ्यू एक ही बात समझते हैं। जबकि ऐसा है नहीं. कर्फ्यू सर्वथा एक अलग चीज है। कर्फ्यू तो दरअसल, बहुत ही खराब हालात में लगाया जाता है। इस दौरान लोगों को एक निश्चित अवधि तक घर में रहने के कहा जाता है। दूध, सब्जी, चिकित्सा जैसी कुछ बेहद जरूरी चीजों में ही छूट दी जाती है। बाजार, स्कूल कालेज आदि बंद रहते हैं। किसी भी यातायात के साधन को मूवमेंट की इजाजत नहीं होती। पुलिस के साथ ही आवश्यकता के अनुसार अर्धसैनिक बलों आदि
की भी तैनाती की जाती है। हालात बेहद खराब होते हैं तो दंगाइयों को गोली मारने तक के आदेश होते हैं। आइए आपको कुछ उदाहरण से कर्फ्यू के बारे में विस्तार से जानकारी दे दें –

जैसे कि आप 1984 का साल याद करें। जब देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उन्हीं के अंगरक्षकों के हत्या कर देेने के बाद पूरे देश में हालात इतने खराब हो गए थे कि ज्यादातर जगह कर्फ्यू लगा दिया गया था। इसके अलावा कुछ समय पहले जम्मू कश्मीर के राजोरी जिले में भाजपा नेताओं की हत्या के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया था। यह चार दिन लगा रहा था। बीच बीच में आवश्यक सामान की खरीदारी के लिए कुछ घंटे की ढील भी दी जाती थी।

कर्फ्यू हालात सामान्य होने तक लगाया जाता है। हालात का जायजा लेने के बाद पुलिस प्रशासन के अधिकारी कर्फ्यू में ढील देते हैं और स्थिति पूरी तरह सामान्य होने के बाद कर्फ्यू हटा लिए जाने संबंधी फैसला लेते हैं।

एलान, मुनादी करते हैं, विज्ञापन से बताते हैं –

किसी भी क्षेत्र में धारा 144 लागू होने का प्रचार प्रसार किया जाता है। ताकि लोग किसी भी जगह एकत्र होने की या बैठक, रैली, जुलूस आदि निकालने की कोशिश न करे। पहले ढोल पर मुनादी कराई जाती थी। पिर लाउडस्पीकर का सहारा लिया जाने लगा. अब टेलीविजन, अखबारों यहां तक कि सोशल मीडिया के जरिये भी किसी क्षेत्र में धारा 144 लागू होने का प्रचार किया जाता है ताकि सभी लोगों को पता चल जाए कि उन्हें इस काल के दौरान क्या सावधानी बरतनी है।

हालांकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार तंत्र के अभाव में अब भी मुनादी और लाउडस्पीकर के जरिये ही इस संबंध में जानकारी दिए जाने का चलन है। कुछ जगह अलबत्ता पुलिस वालों ने स्थानीय नागरिकों संग व्हाटृसएप ग्रुप बनाए हुए है, जिन्हें वह किसी भी तरह की जानकारी साझा करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह ग्रुप किसी अपराध को सुलझाने में भी कई जगह अहम भूमिका अदा कर रहे हैं।

धारा 144 संक्षेप में –

तो दोस्तों, यह है धारा 144 के बारे में पूरी जानकारी। उम्मीद है आपको कर्फ्यू और धारा 144 के बीच का अंतर स्पष्ट हो गया होगा। हम यह भी उम्मीद करते हैं कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी। कई बार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धारा 144 की बाबत प्रश्न पूछा जाता है तो यह भी पूछ लिया जाता है कि धारा 144 और कर्फ्यू में क्या अंतर है। लोग इसमें अक्सर कन्फयूज हो जाते हैं। वह कर्फ्यू को ही धारा 144 समझकर जवाब देते हैं और अपने अंकों से हाथ धो बैठते हैं। दोस्तों अब परेशान होने की जरूरत नहीं होगी, ऐसी उम्मीद है।

यूं तो आपको धारा 144 के हर पहलू के बारे में बताने की हमने अपनी ओर से पूरी कोशिश की है। इसके बावजूद अगर आपको भी किसी तरह की कोई जिज्ञासा मन में है या कोई कन्फ्यूजन सिर उठा रहा है या किसी भी तरह का अन्य कोई सवाल दिमाग में कुलबुला रहा है तो आप भी अपना सवाल यहां पूछ सकते हैं। इसमें कोई हिचक न करें। आपकी किसी भी जिज्ञासा को दूर करने की, आपके इस post से जुडे किसी भी सवाल का जवाब देने की हमारी ओर से पूरी पूरी कोशिश की जाएगी।। धन्यवाद ।।

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