[धारा 498ए] दहेज के झूठे केस से बचने के उपाय | दहेज केस के नियम 2022

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हम सभी बचपन से पढ़ते आए हैं कि ‘दहेज कलंक है’। आपने ट्रकों के पीछे भी अक्सर लोगों को जागरूक करता संदेश लिखा देखा होगा कि ‘दुल्हन ही दहेज है’। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे देश में दहेज के लिए दुल्हनों को जला देने, मार देने जैसी घटनाएं होती रही हैं। बेटी का पिता अपनी हैसियत से बढ़कर दहेज देता है, फिर भी ससुराल वालों के लालच का घड़ा भरने में नहीं आता। विवाहित महिलाओं को दहेज से जुड़ी भीषण यातना से बचाने के लिए भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 498ए ने एक हथियार प्रदान किया है।

वह अपने पति एवं ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा सकती है, लेकिन वर्तमान में बहुधा देखने में आया है कि महिलाएं इस धारा का दुरूपयोग करती हैं। वह किसी तरह के मतभेद एवं विवाद की स्थिति में पति को फंसाने के लिए इस धारा का सहारा लेती हैं।

नतीजतन पति एवं ससुराल वालों को जेल की हवा खानी पड़ती है। निर्दोष होने के बावजूद उन्हें जमानत मिलने तक तकलीफ झेलनी पड़ती है। यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो हम आपको बताएंगे कि दहेज के झूठे केस से कैसे बचा जा सकता है। आइए, शुरू करते हैं-

आईपीसी 1860 की धारा 498ए क्या है?

दोस्तों, इससे पूर्व कि हम आपको धारा 498ए में बचाव के उपाय बताएं, पहले यह जान लीजिए कि आईपीसी (IPC)-1860 की यह धारा 498ए क्या है। जैसा कि आप जानते ही हैं दहेज प्रथा महिलाओं के लिए एक अभिशाप है। हजारों महिलाओं को दहेज की वेदी पर बलि देनी पड़ी है। ऐसे में उन्हें सशक्त करने के लिए आज से 38 साल पहले सन् 1983 में आईपीसी-1860 में धारा 498ए को शामिल किया गया। माना गया कि आईपीसी के सामान्य प्रावधान महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों से निपटने में नाकाफी थे।

आपको बता दें कि धारा 498ए के तहत महिलाओं को दहेज की मांग के लिए अपने पति एवं उनके रिश्तेदारों की क्रूरता के खिलाफ बचाव की शक्ति प्रदान की गई। यदि विवाहित महिला पर उसके पति अथवा उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता की जाती है या मानसिक, शारीरिक या किसी अन्य तरह से प्रताड़ित किया जाता है तो उस महिला की शिकायत पर इस धारा के तहत केस दर्ज किया जाता है।

[धारा 498ए] दहेज के झूठे केस से बचने के उपाय | दहेज केस के नियम 2022

498ए के तहत क्रूरता एवं प्रताड़ित करने का अर्थ –

मित्रों, सबसे पहले धारा 498ए के तहत क्रूरता एवं प्रताड़ित करने का अर्थ जान लेते हैं। यह है-

  • जिसकी वजह से कोई महिला खुदकुशी करने की हालत तक पहुंच जाए अथवा उसे गंभीर चोट पहुंचने की आशंका हो।
  • उसे जान का खतरा हो।
  • उसके किसी अंग पर खतरा हो। अथवा
  • उसकी शारीरिक मानसिक सेहत पर कोई खतरा हो
  • ऐसी प्रताड़ना जिसका उद्देश्य महिला अथवा उससे जुड़े किसी व्यक्ति को किसी जायदाद अथवा कीमती चीज की गैरकानूनी मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करना हो। अथवा
  • ऐसी किसी मांग को न पूरा कर पाने की हालत में महिला अथवा उससे जुड़े किसी शख्स को प्रताड़ित किया जाना।

धारा 498ए के तहत गैर जमानती अपराध –

इस धारा के तहत दायर अपराध को गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके तहत अपराध की प्रकृति के अनुसार उसे संज्ञेय एवं असंज्ञेय में विभाजित किया जाता है। संज्ञेय अपराध को पुलिस को केस दर्ज करना ही होता है। आपको बता दें कि यह एक गैर जमानती अपराध है।

मामले में मजिस्ट्रेट को जमानत देने से इंकार करने एवं किसी व्यक्ति को ज्यूडिशियल (judicial) अथवा पुलिस रिमांड (police remand) में भेजने की पावर है।

दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन साल तक की सजा का प्रावधान –

मित्रों, आप जान लीजिए कि यदि कोई व्यक्ति धारा 498ए के अपराध का दोषी पाया जाता है तो उसे तीन साल तक की सजा तजवीज की जा सकती है। लेकिन यदि विवाहित महिला की मौत शादी के सात साल के दौरान हो जाती है, तो जब तक यह साबित न हो कि मौत किस वजह से हुई है, तो उसे संदिग्ध मौत मानकर चला जाता है। पुलिस यह मामला आईपीसी की धारा 498ए/ 302/ 304बी के तहत दर्ज करती है।

दहेज केस के नियम 2022 –

  1. 498ए के मामले में सीधे गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। मामले में पहले पत्नी एवं पति के बीच सुलह कराने की कोशिश की जाती है।
  2. पत्नी यदि महिला थाने में केस दर्ज करती है तो आपको वहां काउंसिलिंग के लिए बुलाया जाएगा एवं आपसी मतभेद दूर करने की कोशिश की जाएगी। यहां आप सारी बातें सच-सच बता सकते हैं।
  3. यदि काउंसिलिंग से बात नहीं बनती तो जिन धाराओं में पत्नी ने मुकदमा दर्ज कराया है, उसमें जांच के लिए सीआरपीसी (CRPC) की धारा 41ए के तहत पुलिस आपको नोटिस भेजती है। आप थाने जाकर सारी बातें बता सकते हैं।
  4. बता सकते हैं कि झूठा केस दर्ज कराया गया है। पत्नी की मंशा आपको फंसाने की है। पुलिस बगैर सुबूत एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती।
  5. यदि पत्नी दहेज उत्पीड़न में फंसाने की धमकी देकर घर छोड़कर चली गई हो अथवा मायके से दहेज उत्पीड़न एवं घर से निकालने में फंसाने की धमकी दे रही हो तो आप वैवाहिक अधिकारों की प्रतिस्थापन धारा 9 के तहत उसे अपने पास बुलाने को कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं। यह सुबूत होगा कि आप तो उसे अपने पास रखना चाहते हैं, वह स्वयं अपने घर गई है।

बचाव के लिए पत्नी की धमकी की रिकाॅर्डिंग, चैट आदि सुरक्षित रखें –

यदि पत्नी कभी भी आपको दहेज के झूठे केस में फंसाने की धमकी दे तो आप सतर्कता बरतें। उसकी चैटिंग, कोई आडियो रिकाॅर्डिंग अथवा कोई मैसेज अपने पास अवश्य सुरक्षित रखें। यह प्रमाण आपको कोर्ट से तुरंत जमानत दिलाने में मदद करेंगे। एवं कोर्ट ट्रायल (court trial) के दौरान पुख्ता सुबूत होंगे।

यदि पत्नी ने एफआईआर दर्ज कराई है तो क्या करें?

दोस्तों, यदि पुलिस की मदद से अथवा किसी भी तरह से पत्नी ने झूठी एफआईआर दर्ज करा दी है तो आप यह करें-

  • एफआईआर दर्ज होने के बाद सबसे पहले स्वयं एवं परिवार के सदस्यों के लिए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करें।
  • जब मामला कोर्ट चला जाए तो आप सीआरपीसी के सेक्शन 482 के अंतर्गत एफआईआर निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट का रूख कर सकते हैं। वहां से आपको अरेस्ट स्टे (arrest stay) यानी गिरफतारी पर रोक का आदेश मिल जाता है। इसके अलावा जांच अधिकारी को भी कोर्ट निष्पक्ष जांच के आदेश देती है।
  • पत्नी द्वारा झूठे आरोप लगाए जाने एवं शिकायत के संबंध में नजदीकी थाने में सूचना दें। बेहतर तो यह होगा कि वकील के माध्यम से अपनी शिकायत थाने में दर्ज कराएं। अथवा स्वयं एसपी अथवा किसी उच्चाधिकारी से मिलकर लिखित में शिकायत पत्र दें। इसकी एक रिसीविंग भी अपने पास रख लें।
  • आपको बता दें कि कई बार ऐसे केस में पुलिस एफआईआर के नाम पर डराती है। डरें नहीं वकील से बात करें। पुलिस सुबूत मिलने पर ही आपके खिलाफ केस कर सकती है।
  • आप अपनी पत्नी के खिलाफ काउंटर केस दर्ज कर सकते हैं। उसके खिलाफ आईपीसी 1860 की धारा 120 बी में आपराधिक षड़यंत्र, अथवा धारा 191 के तहत पुलिस स्टेशन/कोर्ट में झूठे सुबूत देने अथवा धारा 500 के तहत बदनामी या मानहानि अथवा धारा 506 के अंतर्गत आपराधिक धमकी, अथवा गलत शिकायत दर्ज करने के लिए 227 के तहत आवेदन कर सकते हैं।
  • झूठी शिकायत पर आईपीसी के तहत शिकायकर्ता गवाह एवं पुलिस पर भी केस दर्ज कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी कानून के दुरूपयोग पर चिंता –

मित्रों, आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट तक इस कानून के दुरूपयोग पर चिंता जता चुकी है। आज से सात वर्ष पूर्व अनेश कुमार नाम बिहार सरकार के मामले में 498ए पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की थी कि महिलाएं 498ए का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। जिस वजह से झूठे केस दर्ज किए जाते हैं।

झूठे केस में पत्नी को भरना पड़ा 50 हजार रूपये का जुर्माना –

साथियों, यह सच है। झूठे केस में एक पत्नी को 50 हजार का जुर्माना भरना पड़ा। दक्षिण मुंबई के एक बिजनेसमैन के खिलाफ पत्नी ने दहेज एवं आपराधिक मामले का केस दर्ज कराया था। पति का आरोप था कि पत्नी ने प्रताड़ित करने के लिए दहेज का झूठा आरोप लगाया है।

पति ने कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाते हुए कहा था कि एक दशक के लंबे साथ के दौरान पत्नी के अत्याचारों से उसकी एवं उसके परिवार की प्रतिष्ठा समाज में खराब हुई है। हाईकोर्ट ने पुरूष को पत्नी से तलाक दिलाया। साथ ही पत्नी को 50 हजार रूपये का जुर्माना भरने के आदेश दिए।

दहेज के केस अब भी झूठे केस से अधिक –

बेशक महिलाओं का अपने पति एवं ससुरालवालों को दहेज के झूठे केस में फंसाने का ट्रेंड चल पड़ा हो, लेकिन हकीकत में दहेज के केस अब भी झूठे केस से कहीं अधिक हैं। लोगों की घर में शादी करके आई किसी की बेटी से अधिक से अधिक पाने का लालच कम नहीं हुआ है।

यहां कि मुस्लिम वर्ग में जहां, मेहर देकर निकाह का चलन है, वहां भी दहेज का असुर घर कर गया है। दो ही दिन पहले 16 नवंबर, 2021 को दहेज के लिए हत्या का केस सामने आया है। मामला दनकौर में कोतवाली क्षेत्र के चूहड़पुर बांगर गांव का है। यहां एक विवाहिता फरमीना का शव फंदे से लटका हुआ मिला था।

पुलिस ने मृतका फरमीना के पिता उमर मोहम्मद के पिता निवासी रबूपुरा कोतवाली क्षेत्र के मेहंदीपुर गांव की तहरीर पर फरमीना के पति आजाद समेत नौ ससुराल वालों पर केस दर्ज किया। उन्होंने फरमीना के पति और ससुराल वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

बाॅलीवुड में दहेज को केंद्र में रख कई फिल्मों का निर्माण किया गया –

दोस्तों, कहते हैं कि फिल्में समाज का आइना होती हैं। बाॅलीवुड में दहेज को केंद्र में रख कई हिंदी फिल्मों का निर्माण किया गया। इसमें फिल्म अभिनेता राजबब्बर की ‘दूल्हा बिकता है’, फिल्म अभिनेता सुनील दत्त की बतौर निर्माता बनाई गई ‘ये आग कब बुझेगी’ जैसी फिल्मों के नाम शामिल हैं।

इसके अलावा विभिन्न फिल्मों में ऐसे दृश्य दिखाए गए, जब दहेज न मिलने पर अथवा कम मिलने पर लड़के वालों ने रिश्ता ठुकरा दिया अथवा रिश्ता हो जाने पर भी विवाह करने से इन्कार कर दिया।

दहेज न देना पड़े, इसलिए भ्रूण हत्या, कई गांव ऐसे जहां शादी के लिए लड़की नहीं मिलती –

मित्रों, आपको बता दें कि दहेज न देना पड़ा इस खास वजह समेत लड़कियों को बोझ समझे जाने की वजह से कई गांवों में भ्रूण हत्या इस कदर उफान पर रही कि अब वहां शादी के लिए भी लड़कियां नहीं मिलतीं। राजस्थान का जिक्र इस संबंध में खास तौर पर किया जा सकता है।

पुरूषों को दहेज के झूठे केस में फंसाए जाने के खिलाफ एक महिला की लड़ाई –

मित्रों, आपको सुनकर सुखद आश्चर्य होगा कि दहेज के झूठे केस में फंसाए गए पुरूषों की लड़ाई एक महिला दीपिका नारायण लड़ रही हैं। उनके चचेरे भाई की शादी 2011 में तीन महीने में ही टूट गई थी। उसकी पत्नी ने भाई समेत पूरे परिवार पर मारपीट एवं दहेज मांगने का आरोप लगा झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया।

इसके बाद वे 498ए के खिलाफ खड़ी हो गईं। वह मानती हैं कि पुरूष भी पीड़ित हो सकते हैं। दीपिका कभी इंफोसिस में साॅफ्टवेयर इंजीनियर थीं। वे अचानक नौकरी छोड़कर डाॅक्यूमेंट्री बनाने लगीं। उन्होंने 2012 में पुरूषों को दहेज प्रताड़ना के झूठे केस में फंसाए जाने के मामलों में रिसर्च शुरू की थी। पाया कि अधिकांश मामले झूठे हैं।

झूठे केस में फंसे पतियों के माता-पिता के आत्महत्या के भी मामले –

दोस्तों, दहेज के झूठे केस में फंसाए जाने के कई ऐसे साइड इफेक्ट भी थे, जिनकी ओर किसी की नजर नहीं गई। ऐसे कई मामले भी निकले, जिनमें पतियों के माता-पिता ने बदनामी के डर से आत्महत्या कर ली। समाज में अपनी प्रतिष्ठा खोने का भय जिंदा रहने की जिजीविशा से बड़ा निकला। ऐसे में मरना ही भला लगा।

इसके अलावा दहेज के खिलाफ खड़े होने वाले एनजीओ पर भी मुफ्त की लाइम लाइट लेने, कानून एवं सरकार को अपनी ओर झुकाने के साथ ही मुफ्त की तारीफ लेने के आरोप लगते रहे हैं।

दहेज उत्पीड़न का मामला किस धारा में दर्ज होता है?

दहेज उत्पीड़न का मामला आईपीसी की धारा 498ए के तहत दर्ज किया जाता है।

आईपीसी 1860 की धारा 498ए के तहत दर्ज अपराध कौन सी श्रेणी में आता है?

आईपीसी 1860 की धारा 498 के तहत दर्ज अपराध गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

क्या यह गैर जमानतीय अपराध है?

जी हां, यह गैर जमानतीय अपराध है। मजिस्ट्रेट के पास जमानत देने से इन्कार करने एवं व्यक्ति को ज्यूडिशियल अथवा पुलिस रिमांड पर देने की पावर होती है।

इस अपराध के दोषी को कितनी सजा दी जा सकती है?

इस धारा में अपराध के दोषी को तीन साल तक की सजा दी जा सकती है।

क्या धारा 498ए के तहत झूठे केस भी दर्ज किए जाते हैं?

जी हां, ऐसे बहुत से मामले सामने आए हैं, जिनके आधार पर यह कहा जा रहा है कि धारा 498ए के तहत झूठे केस भी दर्ज किए जा रहे हैं।

झूठे केस में फंसने से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

यदि पत्नी झूठे केस में फंसाने की धमकी तो पति को सावधानी बरतते हुए इस संबंध में किए गए मैसेज, आडियो अथवा वीडियो काॅल रिकाॅर्डिंग को सुरक्षित रखना चाहिए। वह इन्हें कोर्ट ट्रायल में सुबूत के तौर पर पेश कर सकता है।

यदि किसी व्यक्ति एवं उसके परिवार के खिलाफ इस धारा में मुकदमा दर्ज हुआ तो वह क्या करे?

उसे संबंध पहले अग्रिम जमानत के लिए कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए वह हाईकोर्ट से स्टे ला सकता है।

क्या 498ए में सीधे गिरफ्तारी का प्रावधान है?

जी नहीं, 498ए में सीधे गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है।

मित्रों, इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको दहेज के झूठे केस से बचने के उपाय 2022 एंव दहेज केस के नियम 2022 की जानकारी दी। हमें पूरी उम्मीद है कि यह पोस्ट आपके लिए बेहद काम की साबित होगी। यदि आप ऐसी ही जानकारीपरक पोस्ट हमसे चाहते हैं तो नीचे दिए गए कमेंट बाॅक्स में कमेंट करके बता सकते हैं। आम जन जागरूकता के लिए इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करना भी न भूलें। ।।धन्यवाद।।

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8 thoughts on “[धारा 498ए] दहेज के झूठे केस से बचने के उपाय | दहेज केस के नियम 2022”

  1. Sir mere wife ne 9/5/22 complane case kiea 498a,406jab kina 2017 se alag apne maa ke pas maa ka tabieat kharab bol ke rahata aur mujhe apne maa aur bhatija bhatihee jiske maa pitaji parlok gaman kar chuke ko chor ke unke pas rahane bolte sath mer kafi rupaye le ke bete ko leke maike me rahate hai aur mujhe bae bar divorse ke bare bolte hai kya upay.

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  2. Sir Mere bhai ki shadi 16.1.2018 ko hui, vo dono bahar banglore rahte the , dono main bahut jhagre hote rahte the , pahle month se uski patni ne uspe hath utha shuru ker diya tha , mera bhai usko bar bar samghata raha , lekin vo har bar kehti thi ki mera hisab ker de, ye bat mere bahi ne humko kabhi nahi batayi , lekin karona lagne ke bad mera bhai or uski pani hamre ghar aa gaye , mera bhai apne ghar se hi kam ker raha tha , yah bhi humne kai bar dekha ki uski patni us per kai bar hath utha deti thi , meri maa or meri patni usko kai bar samghya, bhai ke sasural walo ko bhi batya , lekin unho ne bhi apni beti ko nahi samghya, vo larki har choti bat per chilllati thi , meri maa ke sath uchha uchaa bolti thi , bhai ke sath ladai or marpit krti thi, kai bar chalti gari main hand break ko uthna ye sab activity kerti thi , last year usne jhagra kerke apne maa ,bap, ko ghar bulaya or unke sath apne ghar chali gayi , bhai do bar usko phone ker ke bulaya or ghar chalne ko ko kha, lekin vo mana ker gayi abh mer bhai ko apni compnay ke kam se bahar jana para, usne isko bola tha ki usko bahar jana jo bhi kerna hai ker lo, larki or uske maa and baap uske bhai ne us samay to kuch nahi kiya , jab mera bhai yaha se chala gaya , vo larki apne maa baap ke ghar main 1 years se reh rahi hai , to piche meri maa meri patni or mer bhai per marpit or dahej ka complain ker di, abh mer bhai 2 years ke liye USA gaya hai , jo ki usne larki ko usne bataya tha , jiski whatsapp chatt mere pass hai, jisme mere bhai ke patni ne mer bhai ko jane ki permission di thi , abh police bar bar larke ko bulane ke liye kehte hai is condition main kay keru, abhi usko gaye 2 mahine hui hai , please suggest kero kaise main apne bhai ko vapse bulane ke liye stay le sakta hu.
    awaiting for your suggestion
    thanks

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  3. Sir
    Meri sadi 12.05.2018 ko hui thi mera 1 beta h meri patni mujhe or mere pariwar
    balo ko mansik rup se ptadit karti thi isliye mene use apne ghar 1.10.2020 pahucha diya usne 498a or 125 ki dhara laga di ab kesh cord me h me usse divorce chahata hu . Or ab Mujhe dahej bapshi ka notice mila h jo notice me mang ki gai h bo jhuti h kya karu ?

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  4. Bhai jaan apse meri ek request h meri shadi ko 8mahine ho gae h mere sath frod kiya Gaya h larki ke hip ka gulla garbar h wo baith kr kuch nhi kr sakti h unke ghr wale kh rhe h k koi dikkat nhi h maine jaanch krwai to hip ka gulla garbar nikla operation k baad larki normal nhi ho Sakti report me dikkat kaafi purani nikli jaanch krwae hue 4mahine ho chuke h life ka mamla h mai kya krun deworc kase milegi larki apne maaike me h mujhe dar h k koi jhoota case na bana de is liye koi solution den meharbani hogi

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    • Sabse pahle aap proof ke sath galat jankari dekar shadi kiye jane ki fir karayen. Sath hi ek legal notice serve karen

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