टॉप 10 यूनिवर्सिटी इन इंडिया कौन सी हैं? Indian Top 10 Universities 2020

बारहवीं कक्षा पास करने के बाद हर Student का सपना होता है कि वह देश की Top Universities में जाकर शिक्षा ग्रहण करे। हालांकि इन Top Universities में education पाने के लिए प्रवेश पाने को इतनी मारामारी रहती है कि हर Student का यहां शिक्षा पाने का सपना पूरा नहीं हो पाता। हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर यह Top Universities कौन सी हैं, जहां प्रवेश पाने को उत्सुकता बनी रहती है? दोस्तों, आज इस post के जरिए हम आपको बताएंगे कि भारत यानी India की Top 10 Universities या विश्वविद्यालय कौन से हैं। कई coaching संस्थान class के जरिए इन संस्थानों में प्रवेश के लिए coaching भी देते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में –

टॉप 10 यूनिवर्सिटी इन इंडिया कौन सी हैं? Indian Top 10 Universities 2020

टॉप 10 यूनिवर्सिटी इन इंडिया कौन सी हैं? Indian Top 10 Universities 2020 –

यदि आपका सवाल है कि कौन कौन से नाम हैं India की Top 10 Universities की सूची में शामिल हैं और उनके Points और क्या है उनकी Ranking क्या है तो आप को इसके बारे में नीचे बताया गया है –

india की Top 10 Universities की उनकी rank के आधार पर जो सूची जारी की गई है, उसमें यह नाम शामिल हैं –

S.RName of the UniversityNIRF Ranking 2019NIRF Ranking 2018Ranking 2019
1Indian Institute of Science (IISc), Bangalore1182.28
2Jawaharlal Nehru University (JNU), New Delhi2268.68
3Banaras Hindu University (BHU), Varanasi3364.55
4University of Hyderabad (UoH), Hyderabad4561.85
5Calcutta University51460.87
6Jadavpur University, Kolkata6660.53
7Anna University, Chennai7460.35
8Amrita Vishwa Vidyapeetham, Coimbatore8859.22
9Manipal Academy of Higher Education-Manipal91158.5
10Savitribai Phule Pune University10958.4
11University of Delhi (UoD)7
12Aligarh Muslim University (AMU), Aligarh10

सूची के Top-3 में कोई बदलाव नहीं –

दोस्तों, आपको बता दें कि Indian Top 10 Universities 2020 की लिस्टिंग में Top 3 Universities के स्थान में कोई परिवर्तन नहीं आया। जो Universities पिछले साल यानी 2018 में Top 3 में थीं, उन्होंने इस साल भी अपना स्थान बरकरार रखा है। मिसाल के लिए- इस साल Top 10 की list में सबसे ऊपर रहने वाला indian Institute of science, bengaluru पिछले साल भी 82.16 Points के साथ पहले स्थान पर रहा था।

इस साल देश में दूसरे स्थान पर काबिज jawaharlal university 67.5 Points लेकर तब भी दूसरे स्थान पर थी। ऐसा ही banaras hindu university के साथ है। इस साल तीसरे स्थान पर रहने वाली Banaras hindu university 63.52 Points के साथ बीते साल भी तीसरे स्थान पर रही थी।

कौन जारी करता है Indian Top 10 Universities Ranking की सूची –

आपने देश की Top-10 Universities के बारे में तो जान लिया। अब आपके मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह सूची जारी कौन करता है? तो साथियों, जवाब यह है कि इस सूची को NIRF की ओर से जारी किया जाता है।

NIRF क्या है –

NIRF की full form है National Institutional Ranking Framework. यह MHRD यानी कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय का initiative अर्थात् पहल है। इसे करीब चार साल पहले यानी कि सितंबर, 2015 में अस्तित्व में लाया गया था। यह विभिन्न मानकों के आधार पर Universities, colleges और management, medical, engineering, law संस्थानों की Ranking जारी करता है। उससे पहले उसकी आउट लाइन भी तैयार करने का जिम्मा इसी के पास होता है, जिसे यह एक expert committe के सुझावों के आधार पर तैयार करता है।

आपको यह भी बता दें कि इस expert committe का गठन भी MHRD यानी मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ही ओर से किया गया है। इस साल की Ranking की बात करें तो इस साल इस Ranking को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हमारे देश भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने करीब छह महीने पहले ही एक समारोह के दौरान जारी किया है।

Ranking के Parameters क्या हैं –

NIRF जब किसी शिक्षण संस्थान की Ranking करता है तो उसे कुछ parameters के आधार पर अंक देता है। इन अंकों का योग ही उन संस्थानों की rank तय करता है। सामान्य रूप से ये parameters होते हैं-teaching, learning resources, graduation outcome, research और professional practice, inclusivity, outreach programmes और संस्थान का placement record आदि।

किस Category में घोषित की जाती है Ranking –

NIRF केवल Universities की ही Ranking घोषित नहीं करता, बल्कि कुल मिलाकर यह Ranking 9 categories में घोषित की जाती है। जैसे कि overall, Universities, colleges, engineering, management, pharmacy, medical, architecture और law. इससे फायदा यह होता कि मसलन किसी को law college में प्रवेश लेना है तो वह केवल law colleges की category देख Top law college की जानकारी हासिल कर सकता है। यही फायदा अलग category की अलग list की वजह से medical, engineering या management आदि colleges में दाखिला चाहने वालों को होता है।

इस Ranking का क्या लाभ है –

अब एक वाजिब सवाल, जो किसी के भी जहन में उठ सकता है वो यह कि आखिर इस Ranking का लाभ क्या है? दोस्तों, अगर आप भी इसी सवाल से दो चार हो रहे हैं तो हम आपको बता दें कि Ranking के आधार पर ही विभिन्न Universities को नए Courses शुरू करने की इजाजत के साथ ही funding पर भी फैसला लिया जाता है। लगे हाथ आपको यह भी बता दें कि UGC यानी university grants commission के अधिकार में कटौती करके अब उच्च शिक्षा आयोग को इसकी ज्यादातर जिम्मेदारी सौंपी जा रही हैं।

Top 10 Universities में शुमार JNU में बवाल क्यों है –

Top 10 Universities में शुमार नई दिल्ली की Jawahar Lal nehru University यानी JNU में इन दिनों जबरदस्त बवाल चल रहा है। इसकी शुरुआत वहां fee बढ़ोतरी के फैसले के बाद हुआ था। इसकी मुखालफत में यहां के Students जबरदस्त विरोध पर उतर आए। पुलिस ने भी लाठीचार्ज किया और कई छात्रों को हिरासत में लिया गया। JNU की दुनिया में प्रतिष्ठा है। इस Universitiy में प्रवेश पाना भी हर scholar का ख्वाब होता है। Research की बात करें तो यहां तमाम देशों के scholars research के लिए अड्डा जमाए रहते हैं।

तमाम Students के बीच इस Universitiy में प्रवेश पाने को भी एक बड़ी बात माना जाता है। यहां admission के लिए यही वजह है कि Students के बीच मारामारी रहती है। एक लंबी चयन प्रक्रिया के बाद यहां प्रवेश मिल पाता है। यहां से शिक्षा प्राप्त छात्रों को आगे रोजगार के क्षेत्र में भी कई संस्थाएं प्राथमिकता देती हैं। इस Universitiy की alumnai का भी अपना असर है। वह तकरीबन हर field में है। इस बेहतरीन alumnai का लाभ भी यहां पढ़ने वाले करीब करीब तमाम छात्र छात्राओं को प्राप्त होता है, जो इनको आगे बढ़ने, अपनी जगह बनाने में मदद करता है।

कितनी अवधि पर जारी होती है Ranking –

दोस्तों, अब आपके दिमाग में यह सवाल उठ रहा होगा कि NIRF Ranking कितनी अवधि बाद जारी होती है? तो इसका जवाब यह है कि NIRF अपनी Ranking हर एक साल बाद जारी करता है। यह अब तक चार Ranking जारी कर चुका है-2016, 2017, 2018 और 2019। यहां एक बात और साफ कर दें कि इस Ranking का accrediation यानी मान्यता से कोई लेना देना नहीं। कई लोग इन दोनों चीजों में confusion करते हैं। आपको बता दें कि किसी भी accrediation हर पांच साल बाद होता है।

यह भी हो सकता है कि accrediation के बाद किसी Institute की Ranking सुधर जाए या फिर यह भी हो सकता है कि इसके बाद उसमें गिरावट दर्ज की जाए। एक और बात आपको बता दें कि NIRF Ranking के लिए अपने तय parameters में से कुछ में मामूली बदलाव भी करता है, लेकिन यह बिल्कुल nominal होते हैं। मुख्य parameter वही हैं, जो NIRF Universities और Institutes की Ranking के लिए शुरू से ही इस्तेमाल कर रहा है।

क्या Institute की दी जानकारी चेक होती है –

साथियों, आपको लग रहा होगा कि किस तरह से NIRF विभिन्न संस्थानों से जुडे s, data हासिल करता है। विभिन्न संस्थानों की ओर से संस्थान के teaching resource , research practice, graduation outcome आदि बिंदुओं पर आधारित data feeding के बाद एक certificate भी दिया जाता है। इसमें संस्थान की ओर से यह certify किया जाता है कि यह सारा data सही है। इसके बावजूद NIRF की ओर से इस data को भी चेक किया जाता है। वह संस्थान की ओर से दी गई आशंका भरी जानकारी पर भी check बिठा सकता है।

इसे यूं भी समझ सकते हैं कि मान लीजिए किसी Institute ने अपने सालाना fee 10 लाख रुपये बताई है। और वह यह दावा करता है कि उसके यहां 80 प्रतिशत से अधिक लोग निर्धन या निम्न वर्ग के पढ़ते हैं तो निश्चित रूप से यह आंकड़ा गले नहीं उतरेगा और इस पर inspection होगा। उसके द्वारा दिए गए तमाम data को लेकर जांच बैठ जाएगी।

क्यों पड़ी एक Framework की जरूरत –

NIRF की जरूरत इसलिए पड़ी, ताकि सारे Institutes की Ranking में समरूपता आ पाए। इसी वजह से कुछ खास parameters तय किए गए। सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि engineering, management, law आदि की Ranking का आधार भी समान हे। एक ही Framework के आधार पर इन सबकी Ranking किए जाने से उनका performance evaluation का काम भी बेहद आसान हो गया है।

Students पर होता है Parents, Peer Group का Pressure –

इसे अच्छा कहें या बुरा। बच्चों की शिक्षा को माता पिता और अभिभावक अपने status या यूं कहें कि रुतबे से भी जोड़कर देखने लगते हैं। देश की बेहतरीन या यूं कहिए कि Top 10 university में प्रवेश को कई अभिभावक और माता पिता अपने status से भी जोड़ते हैं। ऐसे में सामान्य रूप से चलने वाले ug, pg और other Courses में अगर दाखिला नहीं मिल पाता तो वह इन Universities से जुड़े self finance कोर्स का रुख करते हैं।

उनका केवल एक ही ध्येय होता है कि किसी भी तरह इन Course में दाखिला हो जाए। इसके लिए वह पैसा फेंकने से भी नहीं चूकते। 12वीं के बाद Course और university चुनने की दौड़ में छात्र छात्राओं पर माता पिता या अभिभावकों का बनाया pressure भी काम करता है। इस दौड़ में कई बार parents यह भी नहीं देखते कि उनका बेटा या बेटी संबंधित Course करना भी चाहते हैं या नहीं। उनकी दिलचस्पी किस subject में है, वह यह जानने का प्रयास तक नहीं करते। वह उन पर हर हालत में apply करने के लिए दबाव बनाते हैं। ताकि बाद में society में यह कहकर अपनी नाक ऊंची कर सकें कि उनका बेटा या बेटी अमुक university या Institute में फलां फलां Course की पढ़ााई कर रहा है।

कुछ छात्रों पर peer group का भी pressure होता है। मसलन वह साथियों को देखकर, उनकी performance देखकर भी pressure में आते हैं। कुछ इस दबाव को झेल जाते हैं और कुछ इसे नहीं झेल पाते। यही वह छात्र होते हैं जो Course तो ज्वाइन कर लेते हैं, लेकिन या तो आधे में उसे छोड़कर मजबूरन घर आ जाते हैं या फिर अपनी जिंदगी को ही कह देते हैं – I Quit.

दोस्तों, यह थी देश की Top 10 Universities, इनकी रैंकिंग कौन जारी करता है? उसके parameters क्या होते हैं, जैसे बिंदुओं पर आधारित पूरी जानकारी। उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। अगर आपको इस post से जुड़ी कोई अन्य जानकारी चाहिए तो आप यहां comment करके बता सकते हैं। साथ ही यह भी बता सकते हैं कि आपको यह जानकारी कैसी लगी। हमें आपके response का इंतजार रहेगा। किसी भी सुझाव, सलाह का स्वागत है। जरूर बताइएगा कि आपको यह post कैसी लगी।।-धन्यवाद-।।

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