होम्योपैथिक डॉक्टर कैसे बने? (Homeopathic doctor kaise bane)

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यदि आप डॉक्टर बनने की इच्छा रखते हैं और वो भी होम्योपैथिक तो आप ज्यादा चिंता ना करे। दरअसल आज के समय में डॉक्टर एक ऐसा पेशा हैं जो सातवें आसमान पर है। वैसे भी डॉक्टर का काम ना पहले कभी (Homeopathic doctor banne ke liye kya kare) था और ना आज है और ना ही आगे कभी कम होगा (How to become homeopathy doctor in India in Hindi)। ऐसे में यदि आप होम्योपैथिक डॉक्टर बनने का सोच रहे हैं तो आपने बिल्कुल सही दिशा पकड़ी हैं क्योंकि इसमें आपका भविष्य उज्जवल ही होने वाला है।

हम अक्सर कुछ बनने का सोच तो लेते हैं या फिर उसका सपना देखते हैं लेकिन उसको पाने के लिए या वैसा बनने के लये क्या किया जाए, इसके बारे में सही से पता नही (Homeopathy doctor kaise bane) होने के कारण हमारा वह सपना एक सपना ही बन कर रह जाता हैं।

ऐसे में यदि आप (Homeopathic doctor kaise bante hain) सच में होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको हमारे द्वारा बताये गए हर एक चरण का पालन करना होगा। तभी आप एक सफल होम्योपैथिक डॉक्टर बन पाएंगे।

होम्योपैथिक डॉक्टर कैसे बने (Homeopathic doctor kaise bane)

होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के लिए आपको बहुत पहले से ही अर्थात अपने स्कूल टाइम से ही तैयारी शुरू कर देनी होगी क्योंकि डॉक्टर का काम ही कुछ ऐसा होता हैं जो बहुत मेहनत मांगता है। वह इसलिए क्योंकि एक डॉक्टर के ऊपर अपने मरीज की संपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

ऐसे में यह काम करने के लिए या होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के लिए आपका पूर्ण रूप से पारंगत होना अति आवश्यक हो जाता हैं। आइए चरण दर चरण तरीके से जाने कि आपको होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के लिए क्या क्या करना पड़ेगा।

होम्योपैथिक डॉक्टर कैसे बने? (Homeopathic doctor kaise bane)

दसवीं कक्षा के बाद ले मेडिकल

यदि आप होम्योपैथिक डॉक्टर बनने को लेकर सीरियस हैं तो आपको इसके लिए तैयारी अपनी दसवीं कक्षा से ही शुरू कर देनी होगी। इसके लिए जब आप दसवीं पास कर ले तब आपके पास 11वीं कक्षा में जाने के लिए कई विकल्प होते हैं।

कहने का तात्पर्य यह हुआ कि दसवीं कक्षा तक तो सभी को समान रूप से सभी तरह के विषयों की जानकारी दी जाती हैं लेकिन 11वीं कक्षा से बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार विषय या फील्ड चुनने की अनुमति मिल जाती हैं।

इसमें आपके पास मुख्यतया चार विकल्प होंगे जो हैं:-

  • नॉन मेडिकल
  • मेडिकल
  • कॉमर्स
  • आर्ट्स

इसमें जो विद्यार्थी आगे चलकर इंजिनियर बनना चाहते हैं वे नॉन मेडिकल चुनते हैं, जो डॉक्टर बनना चाहते हैं वे मेडिकल चुनते हैं, जो अकाउंटेंट में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं वे कॉमर्स और जो अध्यापक इत्यादि बनना चाहते हैं वे आर्ट्स चुनते हैं।

इसके अलावा भी आप यह फ़ील्ड्स लेकर अपना भविष्य किसी अन्य फील्ड में बना सकते हैं लेकिन ऊपर जो चार नौकरी या काम बताये गए वह आप इन्हीं फील्ड को चुनकर कर सकते हैं।

कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि आप 11वीं व 12वीं कक्षा में मेडिकल नही ली हुई हैं तो अप आगे डॉक्टर बनने के लिए आवेदन नही कर पाएंगे। किंतु इसमें आप एक अन्य विकल्प चुन सकते हैं। आप चाहे तो 11वीं व 12वीं कक्षा में नॉन मेडिकल ले सकते हैं लेकिन एक्स्ट्रा सब्जेक्ट के तौर पर बायोलॉजी को चुन सकते हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि नॉन मेडिकल व मेडिकल में केवल एक विषय का ही अंतर होता है बायोलॉजी (जीव विज्ञान) या मैथ्स (गणित)। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि यदि आप मेडिकल लेंगे तो आपको मैथ्स की जगह बायोलॉजी पढनी होगी और यदि नॉन मेडिकल लेंगे तो आपको बायोलॉजी की जगह मैथ्स पढनी होगी। बाकि सभी विषय जैसे कि फिजिक्स (भौतिक विज्ञान), केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) तथा कुछ अन्य विषय।

ऐसे में यदि आप 11वीं में नॉन मेडिकल चुनकर एक्स्ट्रा सब्जेक्ट के तौर पर बायोलॉजी ले लेंगे तो भी आप आग्वे चलकर डॉक्टर बनने के लिए आवेदन दे सकते हैं। लेकिन बेहतर रहेगा कि आप मेडिकल का ही चुनाव करें क्योंकि पहले वाले विकल्प का चुनाव करने पर आप एक साथ गणित व जीव विज्ञान दोनों पढ़ने पढ़ेंगे और उनमे नंबर लाने भी बहुत कठिन होंगे।

बारहवीं कक्षा में पीसीबी में लाये न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक

अब जब आपने 11वीं कक्षा में मेडिकल चुन ली हो और बारहवीं में भी आ गए हो तो उसका एग्जाम बहुत ही सावधानी से दे। ऐसा इसलिए क्योंकि आपको आगे होम्योपैथिक डॉक्टर का कौसे करने के लिए सरकारी परीक्षा नीट को क्लियर करना होगा। नीट में बैठने के लिए परीक्षार्थियों को अपनी बारहवीं की कक्षा में पीसीबी में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक लाने होते हैं अन्यथा वे परीक्षा में नही बैठ सकते हैं।

यहाँ आप बारहवीं में पीसीबी में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक लाने को पूरी बारहवीं के 50 प्रतिशक अंकों से ना देखे। दरअसल बहुत से विद्यार्थी इस बात को लेकर भ्रम में रहते हैं कि उनके बारहवीं में तो 50 प्रतिशत से अधिक अंक आये हैं फिर वे क्यों नीट की परीक्षा में नही बैठ सकते। दरअसल पीसीबी का अर्थ हुआ फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी।

अब ध्यान से सुनिए, आपकी बारहवीं कक्षा में चाहे कितने भी अंक आये हो फिर चाहे वो 60 प्रतिशत हो या 70 प्रतिशत लेकिन यदि आपके पीसीबी के तीनों विषयों के अंकों को मिलाकर 50 प्रतिशत नही बने तो आप नीट की परीक्षा में नही बैठ पाएंगे। इसलिए होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के लिए केवल अपनी बारहवीं पर ही नही अपितु इन तीन विषयों पर प्रमुखता से ध्यान दे।

नीट की परीक्षा दे (NEET ka exam)

अब जब आपने बारहवीं तो अच्छे अंकों से पास कर ली हैं और फिर पीसीबी में भी न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक ले आये हैं तो होम्योपैथिक डॉक्टर बनने का अगला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता हैं नीट की परीक्षा में बैठना और उसे उत्तीर्ण करना। नीट एक सरकारी परीक्षा होती हैं जिसे भारत सरकार के द्वारा राष्ट्रीय तौर पर आयोजित करवाया जाता हैं।

इस परीक्षा में आपके साथ देशभर के वे सभी बच्चे बैठते हैं जो डॉक्टर बनने की इच्छा रखते हैं फिर चाहे वे अंग्रेजी डॉक्टर बनना चाहे या आयुर्वेदिक या सर्जन इत्यादि।

कहने का तात्पर्य यह हुआ कि देश में जो कोई भी डॉक्टर बनने की इच्छा रखता है उसे सबसे पहले नीट की परीक्षा में ही बैठना होता है। ऐसे में आपका इस परीक्षा के बारे में अच्छे से जानना भी आवश्यक हैं ताकि आप सही से यह परीक्षा दे सके।

नीट क्या होती है (NEET ka exam kya hota hai)

अब नीट की परीक्षा देने से पहले इसके बारे में अच्छे से जाना भी आवश्यक हैं ताकि बाद में किसी तरह की कोई समस्या ना होने पाए। तो चलिए समझ लेते हैं। दरअसल नीट का पूरा नाम नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (National Eligibility cum Entrance Test) है। हिंदी में नीट का पूरा नाम राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा होता है।

यह परीक्षा हर वर्ष एक बार भारत की केंद्र सरकार के द्वारा आयोजित करवाई जाती हैं। इसमें राज्य सरकारों का कोई लेनादेना नही होता हैं। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि होम्योपैथिक डॉक्टर या अन्य कोई भी डॉक्टर बनने के लिए सबसे बड़े कॉलेज केंद्र सरकार के अंतर्गत आते हैं। इसमें बने डॉक्टर देश के सबसे बड़े व मान्यता प्राप्त डॉक्टर कहे जाते हैं।

ऐसे में केंद्र सरकार के द्वारा देशभर के विभिन्न मेडिकल कॉलेज में छात्रों के प्रवेश करवाने के लिए नीट की परीक्षा आयोजित करवाई जाती हैं। इसमें छात्रों से विभिन्न तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं जो उनकी 11ब्विन व 12वीं कक्षा में ही पढ़ाये गए विषयों पर आधारित होते हैं। परीक्षा के कुछ दिनों के पश्चात एक कट ऑफ निकलती हैं अर्थात परीक्षा पास करने के न्यूनतम अंक।

जिन छात्रों को ये यह न्यूनतम अंक आते हैं तो उसे अपनी पसंद के कॉलेज का नाम व जिस डॉक्टर का कोर्स वह करना चाहता हैं उसे भरना होता है। अब छात्रों के नंबर व उसकी पसंद के अनुसार कॉलेज व उसको मिलने वाले कोर्स का आवंटन किया जाता है। ऐसे में यदि आपको अपनी मनपसंद के कॉलेज व होम्योपैथिक के कोर्स में नही लिया जाता हैं तो आपको अगले वर्ष फिर से नीट की परीक्षा देनी पड़ती हैं।

होम्योपैथिक डॉक्टर के लिए कौन सा कोर्स चुने (Homeopathic doctor course)

दरअसल जब आप नीट की परीक्षा देंगे तो वहां आपको कई तरह के मेडिकल कोर्स चुनने को मिलेंगे। इसमें सबसे प्रमुख एमबीबीएस की डिग्री या कोर्स होता हैं। इसको करके एक व्यक्ति एलोपैथिक डॉक्टर बनता हैं।

साथ ही इसमें विभिन्न तरह के डॉक्टर के लिए कई तरह के कोर्स होते हैं जैसे कि आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के लिए बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी व दांतों का डॉक्टर बनने के लिए बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी इत्यादि।

उसी प्रकार यदि आप होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के इच्छुक हैं तो आपको बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (Bachelor of Homeopathic Medicine and Surgery) का कोर्स चुनना होगा जिसको शोर्ट फॉर्म में बीएचएमएस (BHMS) कहा जाता है।

कहने का तात्पर्य यह हुआ कि यदि आपको इस कोर्स में अपनी मनपसंद के कॉलेज में प्रवेश मिल गया तो अब आप होम्योपैथिक डॉक्टर बनकर ही बाहर निकलेंगे।

होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के लिए क्या करें (Homeopathic doctor banne ke liye kya kare)

आपने नीट की परीक्षा में बैठकर उसे पास करने के बारे में तो जान लिया लेकिन कैसे? यदि आप बिना तैयारी के ही नीट की परीक्षा में बैठ जाएंगे या फिर आप इस परीक्षा को हलके में ले रहे हैं तो आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं। वह इसलिए क्योंकि हर वर्ष इसमें एक सीमित संख्या में ही सीट होती हैं जो की हजारो में होती हैं जबकि इसमें बैठने वाले छात्रों की संख्या लाखों में।

ऐसे में आप उन लाखों में से हजारों में आना चाहते हैं तो आपकी तैयारी भी उसी के अनुसार एकदम मजबूत होनी चाहिए। यदि आप अपनी तैयारी को ही पुख्ता नही रखेंगे तो फिर आपको अगले वर्ष के लिए और प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। ऐसे में यदि आप सच में होम्योपैथिक डॉक्टर बनने को लेकर सीरियस हैं तो आपको दसवीं के बाद से ही जी जान से मेहनत पर लग जाना चाहिए।

इसके लिए आप किसी इंस्टिट्यूट से जुड़ जाए जहाँ पर नीट की परीक्षा की तैयारी करवाई जाती हो। यदि आप दसवीं के बाद से ही अपना बेस मजबूत बनाने लग जाएंगे तो इसकी बहुत ज्यादा संभावना हैं कि आप सीधे बारहवीं के बाद ही नीट की परीक्षा को क्लियर कर दे और एक अच्छा होम्योपैथिक कॉलेज प्राप्त कर ले।

इसके अलावा बहुत से छात्र बारहवीं के बाद नीट की परीक्षा की तैयारी करने के लिए राजस्थान के कोटा शहर भी जाते हैं। कोटा एक ऐसा शहर है जहाँ देश विदेश से लाखों की संख्या में छात्र देश के सर्वोच्च मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए आते हैं और वहां बहुत मेहनत करते हैं। तो आप भी एक साल का ड्राप लेकर कोटा जा सकते हैं और वहां जाकर नीट की तैयारी कर सकते हैं।

यदि आप कोटा नही भी जाना चाहते हैं तो आप अन्य मेट्रो सिटी में स्थित अच्छे नीट के संसथान या इंस्टिट्यूट में प्रवेश ले सकते हैं और तैयारी कर सकते हैं। इसके अलावा आपके शहर में भी यदि कोई इंस्टिट्यूट नीट की तैयारी करवाता हैं या उसका रिकॉर्ड अच्छा हैं तो आप उससे भी जुड़ सकते हैं और तैयारी शुरू कर सकते हैं।

नीट की परीक्षा का सिलेबस (NEET ka syllabus in Hindi)

अब यदि आप नीट की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आपको यह भी पता होना चाहिए कि आखिरकार नीट की परीक्षा में आता क्या क्या हैं ताकि आप उसी के अनुसार अपनी तैयारी कर सके। इसलिए अब हम नीट के एग्जाम के पैटर्न के बारे में समझेंगे और आपको बताएँगे कि नीट एग्जाम में किस किस विषय पर प्रश्न पूछे जाते हैं, किस विषय से कितने प्रश्न पूछे जाते हैं और उनके अंक कितने होते हैं।

दरअसल नीट के पेपर में आपसे केवल तीन विषयों पर ही प्रश् पूछे जाएंगे जो हैं पीसीबी अर्थात फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी। इसके बारे में हमने आपको ऊपर ही बताया कि आपके लिए 11वीं व 12वीं में यह तीनों विषय कितने महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इन तीनों विषयों पर पहले ही से अपनी पकड़ मजबूत रखें।

अब नीट की परीक्षा के पैटर्न को समझा जाए तो इसमें 180 प्रश्न आते हैं। इसमें से 45 प्रश्न आपके फिजिक्स विषय से तो 45 केमिस्ट्री से आएंगे जबकि 90 प्रश्न बायोलॉजी से पूछे जाएंगे। हालाँकि इसमें बायोलॉजी को दो भागों में विभाजित कर दिया जाता है जिनके नाम है botany व zoolozy. इन दोनों विषयों में से प्रत्येक से 45-45 प्रश्न आपसे पूछे जाएंगे।

इसका अर्थ हुआ आपकी नीट की परीक्षा में फिजिक्स से 45 प्रश्न, केमिस्ट्री से 45 प्रश्न, botany से 45 प्रश्न व zoology से 45 प्रश्न आएंगे। रही बात इनके अंकों की तो वह सभी प्रश्नों के लिए समान होंगे जो हैं 4 अर्थात इसमें प्रत्येक प्रश्न के अंक 4 होंगे। इसी के साथ आपका यह भी जानना जरुरी हैं कि प्रत्येक गल्कत उत्तर के 25 प्रतिशत अर्थात 1 अंक काट लिया जाएगा।

कहने का तात्पर्य यह हुआ कि आप यदि एक प्रश्न का सही उत्तर देते हैं तो आपको उसके 4 अंक मिलेंगे और यदि उत्तर गलत हुआ तो आपका एक अंक काट लिया जाएगा जबकि कोई उत्तर नही देने पर ना कोई अंक मिलेगा और ना कटेगा। इसलिए तुक्का मारने से बचे और जो प्रश्न का उत्तर आपको सही से आता हैं बस उसी का उत्तर दे।

होम्योपैथिक कॉलेज की लिस्ट (Homeopathic college list in India)

यदि आप होम्योपैथिक कॉलेज में BHMS का कोर्स करने जा रहे हैं तो आपको इसमें कुछ बेस्ट मेडिकल कॉलेज के नाम भी पता होने चाहिए ताकि बाद में आप किसी झंझट में ना रहे। तो होम्योपैथिक के कुछ बेस्ट मेडिकल कॉलेज के नाम हैं:

  • लोकमान्य होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, पुणे, महाराष्ट्र
  • सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, बैंगलोर, कर्नाटक
  • बरोदा होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, वडोदरा, गुजरात
  • भारती विद्यापीठ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, पुणे, महाराष्ट्र
  • राष्ट्रीय होम्योपैथिक संस्थान, कलकत्ता, पश्चिम बंगाल
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, रायपुर, छत्तीसगढ़
  • केरल यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंस, थ्रिस्सुर, केरल

तो यह कुछ मेडिकल होम्योपैथिक कॉलेज हैं जो देशभर में सर्वोच्च हैं। इनके अलावा भी कई ऐसे मेडिकल कॉलेज हैं जहाँ आप प्रवेश ले सकते हैं और एक अच्छे होम्योपैथिक डॉक्टर बन सकते हैं।

BHMS में प्रवेश पाने के बाद क्या करें (BHMS doctor kaise bane)

मान लीजिए, आपने नीट पास कर ली हैं, किसी अच्छे सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में प्रवेश भी पा लिया हैं और अब आपका कोर्स शुरू हो गया हैं लेकिन आगे क्या? अब आपके मन में BHMS कोर्स को लेकर भी हजारो प्रश्न उठ रहे होंगे जैसे कि यह कितने साल का होता हैं या इसमें कितना समय लगता हैं और आप कब तक होम्योपैथिक डॉक्टर बन जाएंगे इत्यादि इत्यादि।

तो इसके बारे में जान लीजिए कि एक बार आपका किसी मेडिकल कॉलेज में BHMS के अंदर सिलेक्शन हो गया तो फिर आप होम्योपैथिक डॉक्टर बनकर ही बाहर निकलेंगे। रही बात BHMS कोर्स की अवधि की तो यह कुल साढ़े पांच साल की होती हैं अर्थात 5.5 वर्ष। इसमें शुरूआती साढ़े चार साल तक तो आपको कॉलेज में रहकर BHMS के विभिन्न विषयों की पढ़ाई करनी होगी।

इसमें आपको होमियोपैथी से जुड़े कई तरह के विषय पढ़ाये जाएंगे और उन पर एक्सपेरिमेंट भी करवाए जाएंगे। जब आप 4.5 साल तक होमियोपैथी के हर कोर्स को सफलतापूर्वक पास कर लेंगे तो अंत का एक साल आपकी इंटर्नशिप का होगा। वह इसलिए क्योंकि किसी भी डॉक्टर को सीधे मरीजों का ईलाज नही करने दे सकते। तो आपको पहले एक वर्ष तक किसी अनुभवी होम्योपैथिक डॉक्टर के अंतर्गत काम करना होगा और सबकुछ सीखना होगा।

इसमें आपने अभी तक के 4.5 सालों में जो भी BHMS कोर्स के अंतर्गत सखा हैं वह सब अपनी इंटर्नशिप पर अप्लाई करना होगा। एक वर्ष तक जब आप सही तरीके से इंटर्नशिप कर लेंगे तो उस अनुभवी होम्योपैथिक डॉक्टर के द्वारा आपको एक इंटर्नशिप का सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा। इसके बाद आपका अंतिम टेस्ट लिया जाएगा और सरकार की और से आपको होम्योपैथिक की डिग्री मिल जाएगी।

होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के बाद क्या करें (Homeopathic doctor banne ke baad kya kare)

अब जब आपने BHMS का कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया हैं और इंटर्नशिप भी पूरी हो गयी हैं तो अंत में आपको भारत सरकार के द्वारा BHMS की डिग्री दे दी जाएगी और अब आप मान्यता प्राप्त होम्योपैथिक डॉक्टर बन चुके होंगे। अब यह आप पर निर्भर करता हैं कि आप आगे अपना करियर कैसे बनाना चाहते हैं।

आप भारत के कई बड़े अस्पताल जहाँ होम्योपैथिक डॉक्टर भी बैठते हैं वहां के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि आप सरकारी होम्योपैथिक डॉक्टर बनने कीच्चा रखते हैं तो आपको भारत सरकार के द्वारा आयोजित होम्योपैथिक डॉक्टर की परीक्षा में बैठना होगा और यदि आप किसी निजी अस्पताल में होम्योपैथिक डॉक्टर का काम करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको अलग से आवेदन करना होगा।

यदि आप किसी अस्पताल में नौकरी ना करके अपना स्वयं का एक क्लिनिक खोलना चाहते हैं तो आप वह भी खोल सकते हैं। बहुत से होम्योपैथिक इसी विकल्प का चुनाव करते हैं और स्वतंत्र रूप से अपने मरीजो को देखते हैं। आप चाहे तो कोई जगह पर एक अलग से क्लिनिक बना सकते हैं या फिर अपने घर के ही बाहरी कमरे में लोगों को देख सकते हैं।

होम्योपैथिक डॉक्टर कैसे बने – Related FAQs

प्रश्न: BHMS कितने साल का होता है?

उत्तर: BHMS कुल 5.5 वर्ष की होती है जिसमे 4.5 वर्ष पढ़ाई के तो 1 वर्ष इंटर्नशिप का होता है।

प्रश्न: बीएचएमएस करने में कितना खर्च आता है?

उत्तर: बीएचएमएस करने में आपका लगभग 1 लाख से लेकर 15 लाख तक का खर्च हो सकता है।

प्रश्न: एलोपैथी और होम्योपैथी में क्या अंतर है?

उत्तर: एलोपैथी में आपको अंग्रेजी दवाई दी जाएगी जो उस रोग का उपचार तुरंत कर देगी जबकि होमियोपैथी में उस रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए उपचार किया जाता है।

प्रश्न: होम्योपैथी का मतलब क्या है?

उत्तर: होमियोपैथी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति होती हैं जिसमें किसी रोग को जड़सहित समाप्त करने के लिए लंबे समय तक उपचार किया जाता है।

प्रश्न: BHMS कैसे करे?

उत्तर: BHMS करने के लिए सबसे पहले केंद्र सरकार द्वारा आयोजित नीट की परीक्षा दे और उसके बाद अपनी पसंद के कॉलेज में BHMS कोर्स के लिए आवेदन करें।

प्रश्न: बीएएमएस बीएचएमएस में क्या अंतर है?

उत्तर: बीएएमएस आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने के लिए की जाती हैं जबकि बीएचएमएस होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के लिए।

तो यह थी संपूर्ण जानकारी एक होम्योपैथिक डॉक्टर बनने की (How to become homeopathic doctor in India in Hindi)। आशा हैं अब आपको होम्योपैथिक डॉक्टर बनने के ऊपर सब जानकारी मिल गयी होगी और आपके मन की सभी शंकाएं दूर हो गयी होंगी।

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