राजकोषीय घाटा क्या होता है? राजकोषीय घाटा का फार्मूला

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यदि आपने कभी बजट देखा होगा तो राजकोषीय घाटा का नाम अवश्य सुना होगा। या अखबार पढ़ते वक्त इस बात पर आपका ध्यान गया होगा कि इस बार राजकोषीय घाटा फलां फलां रहने का का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। क्या आप जानते हैं कि यह राजकोषीय घाटा क्या होता है?

इसे निकालने का फार्मूला क्या है? इस वर्ष भारत का राजकोषीय घाटा कितना है? यदि नहीं तो भी चिंता न करें, आज इस पोस्ट में हम आपको आपके इन सारे सवालों का जवाब देंगे। आशा करते हैं कि यह पोस्ट आपको पसंद आएगी-

बजटीय घाटा क्या होता है? (What is budgetary deficit?)

राजकोषीय घाटा के बारे में बात करने से पहले आपको बजटीय घाटा के बारे में जानना होगा, क्योंकि राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) इसी का एक रूप है। बजटीय घाटा तीन प्रकार का होता है-

राजकोषीय घाटा क्या होता है? राजकोषीय घाटा का फार्मूला

1. राजस्व घाटा (revenue deficit)-

राजस्व खर्च की तुलना में राजस्व प्राप्ति में कमी को राजस्व घाटा पुकारा जाता है।

2. प्राथमिक घाटा (primary deficit)-

प्राथमिक घाटा चालू वित्त वर्ष (current financial year) में ब्याज भुगतान (interest payment) के बगैर उधार ली गई राशि को दर्शाता है।

3. राजकोषीय घाटा (fiscal deficit)-

जब सरकार का कुल व्यय उधार को छोड़कर उसकी प्राप्तियों यानी राजस्व से अधिक हो जाता है तो उसे राजकोषीय घाटा पुकारा जाता है।

राजकोषीय घाटा क्या होता है? (What is fiscal deficit?)

अब राजकोषीय घाटे के विषय में विस्तार से जान लेते हैं। इसकी गणना सकल घरेलू उत्पाद (gross domestic product) अर्थात जीडीपी (GDP) के प्रतिशत के रूप में की जाती है। यदि सीधे सीधे कहें तो राजकोषीय घाटा निकालने का फार्मूला निम्नवत है-

सरकार का कुल खर्च (पूंजी एवं राजस्व व्यय) – सरकार की कुल आय (राजस्व प्राप्ति+लोन वसूली + अन्य प्राप्तियां)

अब यदि साधारण शब्दों में कहें तो सरकार के कुल खर्च एवं सरकार की कुल आय के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। यानी जब सरकार के खर्च की तुलना में उसकी आय कम होती है तो यह राजकोषीय घाटा पुकारा जाता है। आपको बता दें कि सरकार के कुल खर्च में उसके पूंजी खर्च एवं राजस्व खर्च शामिल होते हैं। जैसे –

वेतन, पेंशन आदि के भुगतान, बुनियादी ढांचे के विकास जैसी परिसंपत्तियों का निर्माण, जबकि उसकी आय में उसकी राजस्व प्राप्तियां, लोन, एडवांस समेत उसकी पूंजीगत प्राप्ति शामिल होती हैं।

सरकार राजकोषीय घाटे की पूर्ति कैसे करती है? (How government fulfills fiscal deficit?)

सरकार पैसा उधार लेकर राजकोषीय घाटे की पूर्ति करती है। इस प्रकार देखें तो एक वित्तीय वर्ष (financial year) में सरकार की कुल उधार आवश्यकता उसके उस साल के राजकोषीय घाटे के बराबर होती है।

क्या अधिक राजकोषीय घाटा अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी हो सकता है?

अभी तक की जानकारी से आपको लग रहा होगा कि राजकोषीय घाटा अर्थात उधार व नुकसान की बात। लेकिन क्या इससे कोई लाभकारी बात भी जुड़ी है? क्या अधिक राजकोषीय घाटा अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी भी हो सकता है? तो जवाब ‘हां’ में है।

यह अर्थव्यवस्था (economy) के लिए लाभकारी हो सकता है यदि सरकार द्वारा खर्च कि गए धन का इस्तेमाल हाईवे, सड़कों, बंदरगाहों, एयरपोर्ट जैसी आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देने वाली परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जाए।

राजकोषीय घाटा अनुमान का क्या महत्व है?

यह तो हम आपको बता ही चुके हैं कि यह सरकार के कुल खर्च से उसकी कमाई निकालकर बचता है। सरकार अपना खर्च पूरा करने के लिए कितना उधार पैसा लेगी, इसे इससे निर्धारित किया जा सकता है। अब बात राजकोषीय घाटा के महत्व की।

दरअसल, किसी भी देश का राजकोषीय घाटा उसकी सही आर्थिक तस्वीर प्रस्तुत करता है। इसी पर शेयर बाजार के निवेशकों से लेकर रेटिंग एजेंसियों तक की पैनी नजर रहती है। इसी के आधार पर सरकार को उधार की प्राप्ति होती है।

भारत का राजकोषीय घाटा कितना है? (What is India’s fiscal deficit?)

अब हम बात करते हैं भारत के राजकोषीय घाटे की। आपको जानकारी देते हैं कि भारत का राजकोषीय घाटा कितना है। वित्तीय वर्ष 2021-22 देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (finance minister nirmala sitaraman) ने राजकोषीय घाटे के 6.8 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया था।

यद्यपि एक फरवरी को देश का आम बजट (general budget) पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चालू वित्त वर्ष (current financial year) के लिए राजकोषीय घाटा 6.9 प्रतिशत पर संशोधित किया। ऐसा कोरोना यानी कोविड-19 (COVID-19) की वजह से किया गया।

क्योंकि इस दौरान सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए कई प्रकार के प्रावधान किए थे, जिस पर उसका बड़ा व्यय हुआ। लेखा महानियंत्रक (CAG) कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी, 2022 के अंत तक भारत का वास्तविक राजकोषीय घाटा 9,37,868 करोड़ रूपये था।

विशेष बात यह है कि निर्मला सीतारमण ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने अगले वित्तीय वर्श अर्थात 2022-23 में राजकोषीय घाटे को 6.4 प्रतिशत पर सीमित करने का लक्ष्य रखा है।

राजकोषीय नीति का अर्थ क्या है? (What is the meaning of fiscal policy?)

राजकोषीय नीति (fiscal policy) से आशय वित्त प्रबंधन (financial management) के लिए विशेष उपायों को अपनाने से है, ताकि राजकोषीय घाटा कम किया जा सके। इसकी सहायता से सरकार खर्चों के स्तर एवं टैक्स की दरों (rates of tax) को समायोजित (adjust) करती है।

इसका अर्थव्यवस्था (economy) पर व्यापक असर देखने को मिलता है। जिस प्रकार भारतीय रिजर्व बैंक (reserve Bank of India) मौद्रिक नीति (monetary policy) बनाता है, उसी प्रकार राजकोषीय नीति सरकार बनाती है। इन दोनों ही नीतियों को मिलाकर देश के आर्थिक लक्ष्य (economic targets) प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।

राजकोषीय नीति कितने प्रकार की होती है? (Fiscal policy is of how many types?)

राजकोषीय नीति कई प्रकार की होती है, हम अब आपको इसी के बारे में जानकारी देंगे। इसके निम्न चार प्रकार हैं-

  • 1. विस्तारवादी राजकोषीय नीति
  • 2. प्रतिबंधित राजकोषीय नीति
  • 3. तटस्थ राजकोषीय नीति
  • 4. उपकरण राजकोषीय नीति

राजकोषीय नीति से जुड़ी खास खास बातें क्या हैं? (Main features of fiscal policy?)

आशा है कि राजकोषीय नीति का अर्थ आपके समक्ष स्पष्ट हो गया होगा। अब हम आपको राजकोषीय नीति (fiscal policy) से जुड़ी खास खास बातें रखेंगे। इनसे आपको राजकोषीय नीति को एक नजर में समझने में सहायता मिलेगी-

  • राजकोषीय नीति के जरिए सरकार के खर्च को नियंत्रित (control) एवं कम करने का प्रयास किया जाता है ताकि राजकोषीय घाटे को कम किया जा सके।
  • इसके माध्यम से किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास (economic development) पर बल दिया जाता है।
  • टैक्स कटौती (tax deduction) का प्रावधान, ताकि उ़द्योग उत्साहित हों। अधिक लोगों को नौकरी दें एवं रोजगार (employment) के अवसर बढ़ें। इसके अतिरिक्त उपभोक्ताओं के हाथ में अधिक पैसे आएं एवं वे उपभोग का अधिक सामान क्रय कर सकें।
  • सरकार के खर्च पर नजर। क्योंकि सरकार योजनाबद्ध तरीके से सब्सिडी, कल्याणकारी योजनाओं, आधारभूत ढांचाओं आदि पर व्यय करती है।
  • राजकोषीय नीति का असर हर किसी पर एक जैसा नहीं होता। जैसे टैक्स कटौती का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग पर पड़ता है। इसी प्रकार जब सरकार अपने खर्च समायोजित करने का निर्णय करती है तो उसका असर भी किसी विशेष वर्ग पर अधिक पड़ता है, अन्य वर्गों पर कम।

राजकोषीय संकेतकों का मासिक एवं सालाना विश्लेषण कौन करता है? (Who does monthly and annual analysis of fiscal indicators?)

अब हम आपको जानकारी देंगे कि राजकोषीय संकेतकों अर्थात fiscal indicators का मासिक एवं सालाना विश्लेषण किसके द्वारा किया जाता है? यह कार्य नियंत्रक-महालेखा परीक्षक अर्थात सीजीए (CGA) द्वारा किया जाता हैं। यह पद वित्त मंत्रालय (finance ministry) के व्यय विभाग के अंतर्गत आता है।

वह भारत सरकार का प्रधान लेखा सलाहकार (principal account advisor) होता हैं। सीजीए कार्यालय द्वारा ही भारत सरकार के लिए खर्च, राजस्व एवं उधार का विश्लेषण किया जाता है।

राजकोषीय घाटा क्या है?

सरकार के खर्च में से उसकी कमाई का अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है।

राजकोषीय घाटा निकालने का फार्मूला क्या है?

राजकोषीय घाटा निकालने का फार्मूला है- सरकार का कुल खर्च (पूंजी एवं राजस्व व्यय)- सरकार की कुल आय (राजस्व प्राप्ति+लोन वसूली+अन्य प्राप्तियां)

सरकार के खर्च एवं कमाई में क्या क्या शामिल होता है?

सरकार के कुल खर्च में उसके उसके खर्च एवं राजस्व खर्च शामिल होते हैं, जबकि उसकी आय में उसकी राजस्व प्राप्तियां, लोन, एडवांस समेत उसकी पूंजीगत प्राप्ति शामिल होती हैं।

अगले वित्तीय वर्ष 2022-23 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य कितना रखा गया है?

अगले वित्तीय वर्ष 2022-23 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 6.4 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

वर्तमान वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा कितना रखने का लक्ष्य है?

वर्तमान वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा 6.8 प्रतिशत रहने का लक्ष्य था, लेकिन एक फरवरी को बजट के दौरान सरकार ने इसमें संशोधित कर 6.9 पर लाने का लक्ष्य रखा।

वर्तमान राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में संशोधन क्यों किया गया?

ऐसा कोविड-19 के मद्देनजर किया गया। सरकार ने कोरोना काल के दौरान किए खर्च का हवाला देते हुए यह प्रावधान किया है।

राजकोषीय नीति का क्या अर्थ है?

राजकोषीय नीति से अर्थ वित्तीय प्रबंधन के विशेष उपायों का इस्तेमाल करना है, ताकि राजकोषीय घाटा कम किया जा सके।

राजकोषीय नीति से मुख्य रूप से क्या प्रयास किया जाता है?

जिस प्रकार मौद्रिक नीति के जरिए सेंट्रल बैंकिंग सिस्टम में पैसे की आपूर्ति को नियंत्रित किया जाता है, उसी प्रकार राजकोषीय नीति से देश के आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने का प्रयास किया जाता है।

राजकोषीय नीति कौन बनाता है?

राजकोषीय नीति सरकार बनाती है।

राजकोषीय नीति कितने प्रकार की होती है?

राजकोषीय नीति मुख्यतः चार प्रकार की होती है। इसमें विस्तारवादी राजकोषीय नीति, प्रतिबंधित राजकोषीय नीति, तटस्थ राजकोषीय नीति एवं उपकरण राजकोषीय नीति शामिल हैं।

हमने आपको इस पोस्ट में राजकोषीय घाटा के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। यदि आप अर्थशास्त्र में रूचि रखते हैं अथवा देश की आर्थिक स्थिति को जानना चाहते हैं तो निश्चित रूप से इस पोस्ट ने आपकी सहायता की होगी। लोगों की जानकारी के लिए इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करना न भूलें। धन्यवाद।

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