फर्म क्या होता है? फर्म कैसे बनाए? फर्म रजिस्टर कैसे करें?

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बहुत से लोग अपना खुद का बिज़नेस या व्यापार खोलना चाहता है और इसके लिए क्या किया जाए, इस बारे में अनभिज्ञ (Firm registration process in Hindi) होते हैं। यदि आप भी अपने लिए कोई फर्म खोलने का विचार कर रहे हैं और जानना चाह रहे हैं कि एक फर्म कैसे खोली जाए और इसके लिए क्या क्या करना पड़ता है तो आज (Firm register kaise kare) हम आपको वही बताएँगे।

दरअसल फर्म एक व्यापार होता है जिसे एक व्यक्ति या एक से अधिक व्यक्ति भी चला सकते हैं। ऐसे में यदि आप भी एक फर्म बनाने का विचार (How to register firm in India in Hindi) कर रहे हैं तो आज के इस लेख में आपको फर्म बनाने से संबंधित हर एक जानकारी विस्तार से मिलेगी। इसी सहायता से आप अपनी फर्म आसानी से खोल पाएंगे। आइए जाने फर्म कैसे बनाए और उसके लिए क्या क्या किया जाए।

फर्म कैसे बनाए? (Firm kaise banaye)

फर्म बनाने या खोलने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता हैं। इसी के साथ आपको यह भी जानना चाहिए कि आखिरकार एक फर्म होती क्या है और उसको खोलने के लिए किन किन चीजों की आवश्यकता होती है। यदि आपको इन सभी के बारे में विस्तार से पता हैं तो फिर आप आसानी से अपनी एक फर्म खोल पाएंगे और उसके लिए रजिस्टर कर पायेंगे। आइए जाने फर्म कैसे खोले और उसके लिए क्या क्या करें।

फर्म क्या होता है? फर्म कैसे बनाए? फर्म रजिस्टर कैसे करें?

फर्म क्या है (Firm kya hoti hai)

सबसे पहले तो आपका यह जानना आवश्यक हैं कि आखिरकार एक फर्म होती क्या है और उसका काम क्या होता है। दरअसल यदि हम कोई व्यापार करते है या उसे खोलने का सोच रहे है या फिर किसी को कोई सेवा देना चाहते है या (Firm kya hai in Hindi) कोई अन्य संस्था खोल रहे है तो उसके लिए एक दुकान या ऑफिस खोलने की आवश्यकता होती है।

अब वहां बैठकर हम सभी तरह के काम करते हैं। उस कार्यालय को ही फर्म के नाम से जाना जाता है। यहाँ बैठकर हम फर्म (Firm kya hota hai) से संबंधित हर काम को देखते हैं और लाभ अर्जित करते है। यह फर्म चाहे तो केवल हमारे नाम पर ही हो सकती हैं या फिर इसे एक से अधिक व्यक्ति पार्टनरशिप में संभाल सकते हैं। इसलिए आइये जाने फर्म के प्रकार क्या क्या हो सकते हैं।

फर्म के प्रकार (Firm types in Hindi)

अब जब आपने फर्म के बारे में जान लिया हैं तो आपका फर्म के प्रकार के बारे में भी जानना आवश्यक हैं। दरअसल फर्म किसके नाम पर है, यह उसके प्रकार को दर्शाती है। अब यह फर्म किसी एक व्यक्ति के नाम पर भी हो सकती है या ज्यादा व्यक्तियों के (Firm ke prakar) नाम पर भी। ऐसी स्थिति में आइए जाने एक फर्म कितने प्रकार की हो सकती हैं:

#1. प्रोपराइटरशिप फर्म (Proprietorship Firm)

यह सबसे सामान्य फर्म होती है जिसे प्रोपराइटरशिप फर्म के नाम से जाना जाता है। इसमें सामान्यतया उस फर्म का मालिक एक ही व्यक्ति होता है जिसके नाम पर वह संस्थान या फर्म होती है। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि एक प्रोपराइटरशिप फर्म केवल एक ही व्यक्ति कके द्वारा संचालित की जाती हैं और उसके लिए उत्तरदायी भी केवल वही ही होता है।

#2. साझेदारी फर्म (Partnership firm)

इस फर्म में मुख्यतया एक व्यक्ति ना होकर बल्कि कई व्यक्ति उस फर्म के मालिक होते है। कहने का अर्थ यह हुआ कि साझेदारी फर्म में उक्त फर्म के एक से अधिक व्यक्ति साझेदारी में मालिक होते है। ऐसे में यदि किसी व्योअर को आपने किसी के साथ पार्टनरशिप में झोला है तो उसे साझेदारी फर्म के नाम से जाना जाएगा।

अंग्रेजी में साझेदारी फर्म को पार्टनरशिप फर्म के नाम से जाना जाता है। यह एक तरह से सबसे प्रचलित फर्म में से एक है। हालाँकि इसमें उस फर्म के कितने पार्टनर है यह निर्भर करता है। यदि उसके दो या तीन मालिक है तो इसे सामान्य पार्टनरशिप फर्म कहा जाएगा। जबकि उसके 3 से अधिक मालिक है तो उसे एसोसिएशन ऑफ पार्टनर्स फर्म का नाम दिया जाएगा।

पार्टनरशिप फर्म क्या होती है (Partnership firm kya hota hai)

अब जब हमने आपको साझेदारी फर्म के बारे में बताया तो आपका यह जानना आवश्यक हैं कि आखिर यह होती क्या है। यह तो आपने जान लिया कि साझेदारी फर्म को ही पार्टनरशिप फर्म के नाम से जाना जाता है। ऐसे में इसमें जो भी निवेशक या मालिक होते है उनमे सभी का हिस्सा निर्धारित होता है। इसलिए इसका निर्धारण जब फर्म को रजिस्टर करवाया जाता है, उसी समय देख लिया जाता है।

एक तरह से इसके बाद फर्म में जितनी भी कमाई होगी, उसके पार्टनर को उसमे से उतना ही हिस्सा मिलेगा जो फर्म को रजिस्टर करवाते समय दिखाया गया है। इसमें से किसी को भी इससे ज्यादा या कम हिस्सा नही मिलेगा।

फर्म रजिस्टर कैसे करें (Firm registration process in Hindi)

अब बारी आती है फर्म को रजिस्टर करवाने की। दरअसल ऊपर आपने दो तरह के फर्म के प्रकार जाने। तो अब उन्हें रजिस्टर करवाने की प्रक्रिया भी अलग अलग होती है। दरअसल यदि आप अपनी फर्म के एकलौते मालिक हैं तो ऐसे में फर्म की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सरल होती है लेकिन यदि आप फर्म को पार्टनरशिप फर्म के रूप में रजिस्टर करवाना चाहते हैं (Firm kaise banaye in Hindi) तो इसकी प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती हैं। आइए जाने दोनों रूप में किसी फर्म रजिस्टर कैसे करवाया जा सकता हैं।

प्रोपराइटरशिप फर्म रजिस्टर कैसे करें (Proprietorship firm kaise banaye)

यदि आप प्रोपराइटरशिप फर्म को रजिस्टर करवाना चाहते हैं अर्थात किसी  फर्म या संस्था को अपने नाम पर रजिस्टर करवाना चाहते हैं तो उसके लिए (Proprietorship firm registration in Hindi) आपको मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट ऑफिस की वेबसाइट पर जाना होगा या फिर उनके ऑफिस में जाकर व्यक्तिगत रूप से आवेदन करना होगा। आइए प्रोपराइटरशिप फर्म को पंजीकृत करवाने की प्रक्रिया के बारे में जाने।

  • सबसे पहले तो आपको रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर अपनी फर्म का नाम रजिस्टर करवाना होगा। कहने का अर्थ यह हुआ कि एक ही नाम पर दो फर्म नही बन सकती हैं। इसलिए सबसे पहले यह देखे कि आप जिस भी नाम से अपनी फर्म खोलने जा रहे हैं, क्या उसके नाम से पहले कोई अन्य फर्म बनी हुई हैं या नही।
  • अब जब आपकी फर्म का नाम रजिस्ट्रार कार्यालय से कन्फर्म हो जाए तो वहां यह नाम लिखवा ले। इसके बाद आपको मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट ऑफिस व्यक्तिगत रूप से जाना होगा। वहां जाकर आपको फॉर्म 16 भरना होगा।
  • यह फॉर्म 16 कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत आता है। इसके तहत ही कोई फर्म रजिस्टर करवाई जाती हैं। इसलिए इस फॉर्म को पूरा भरें।
  • इसके साथ ही आपको फॉर्म 18 भी भरना होगा जिसमें आपको फर्म से संबंधित हर जानकारी विस्तृत रूप में देनी होगी जैसे कि कंपनी का नाम, इसे खोलने का उद्देश्य, नियम, कार्यालय का पता, लाभ, हानि इत्यादि।
  • अंत में आपको अपने व कंपनी से संबंधित सभी दस्तावेज जमा करवाने होंगे। इसमें आपका पहचना पत्र, कंपनी का प्रमाण पत्र, बिजली बिल या पानी का बिल या गैस का बिल, पैन कार्ड, आधार कार्ड, आवास प्रमाण पत्र इत्यादि आवश्यक दस्तावेज।
  • यह सब भर कर आपको सभी फॉर्म सबमिट कर देने होंगे। उसके बाद मिनिस्ट्री ऑफ ऑफिस के द्वारा आपके फॉर्म के सत्यापन के लिए कुछ समय लिया जाएगा। अंत में आपकी फर्म को मान्यता दे दी जाएगी और इसके लिये एक सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया जाएगा।

पार्टनरशिप फर्म रजिस्टर कैसे करें (Partnership firm kaise banaye)

अब यदि आप किसी के साथ मिलकर या कई व्यक्तियों के साथ मिलकर पार्टनरशिप में किसी फर्म को रजिस्टर करवाना चाहते हैं तो उसके लिए भी एक प्रक्रिया है जिसका पालन आपको करना पड़ेगा। हालाँकि इसके लिए भी संपूर्ण प्रकृया को मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट एसोसिएशन के अंतर्गत ही करना पड़ेगा लेकिन इसमें आपको कुछ अन्य चीजों के बारे में भी देखना होगा ताकि बाद में कोई समस्या ना हो। आइए जाने पार्टनरशिप फर्म को पंजीकृत करवाने के लिए क्या क्या चीजों की आवश्यकता पड़ती हैं।

पार्टनरशिप डीड जमा करें (Partnership deed in Hindi)

अब आपकी फर्म में चाहे दो पार्टनर हो या उससे अधिक। उन सभी के बीच में एक अग्रीमेंट बनेगा जिस पर सभी की हिस्सेदारी लिखी होगी। दरअसल बाद में जाकर उस फर्म में जितना लाभ या हानि हुई हैं, वह सभी पार्टनर्स को अपनी हिस्सेदारी के रूप में ही मिलेगा या उठाना पड़ेगा। ऐसे में उसके लिए एक अग्रीमेंट बनाया जाता है जिसे पार्टनरशिप डीड के नाम से जाना जाता है।

हिंदी में पार्टनरशिप डीड को साझेदारी विलेख के रूप में जाना जाता है। एक तरह से इसमें सभी पार्टनर की जानकारी, फर्म में उनकी हिस्सेदारी (Partnership deed kaise banaye) समेत उनके हस्ताक्षर होते हैं। यह फॉर्म आपको मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट में सबूत के तौर पर जमा करवाना होता है। इसके आधार पर उस फर्म के लिए सभी पार्टनर्स को कानूनी पहचान मिल जाती हैं।

साझेदारी विलेख क्यों जरुरी है

अब यदि आप जानना चाहे कि किसी पार्टनरशिप फर्म को रजिस्टर करवाने के लिए साझेदारी विलेख की आवश्यकता क्यों पड़ती हैं तो हम आपको बता दे कि सोलो फर्म एक व्यक्ति विशेष के नाम पर होती हैं। ऐसी स्थिति में वह उसी व्यक्ति के नाम पर ही रजिस्टर की जाती हैं जबकि यदि कोई फर्म एक से अधिक व्यक्ति चलते हैं या उनके मालिक एक से अधिक हैं। तो ऐसी स्थिति में उसे रजिस्टर करवाने के लिए उन सभी व्यक्तियों के नाम इसी साझेदारी विलेख में लिखे जाते हैं।

इसमें सभी पार्टनर के नाम और पूरी जानकारी लिखी होती हैं। एक तरह से उस फर्म में किस व्यक्ति का कितना हिस्सा हैं और क्या वह इसका उत्तरदायित्व लेता हैं इत्यादि इत्यादि। इसके बाद सब जानकारी भर कर उसमे जिन जिन पार्टनर के नाम सम्मिलित हैं, उन सभी के हस्ताक्षर लिए जाते हैं ताकि बाद में कोई भी विवाद ना होने पाए।

इसके बाद सभी प्रक्रिया पहले जैसे ही है जैसा आपने एक सोलो फर्म करवाते समय की थी। बस उसमे एक व्यक्ति का नाम दिया गया था जबकि इसमें सभी व्यक्तियों के नाम पर साझेदारी विलेख को जमा करवाया जाएगा। इसी के साथ उसमे केवल एक व्यक्ति के ही कागजात दिए गए थे जबकि इसमें सभी पार्टनर्स के कागजात लगेंगे।

उसके बाद मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट ऑफिस की ओर से इन सभी दस्तावेजों व पार्टनर्स डीड के सत्यापन के लिए कुछ समय लिया जाएगा। यह समय 5 दिनों से लेकर 15 दिन तक का हो सकता हैं। अंत में उस फर्म के नाम का एक प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि अंत में सरकार की ओर से उस फर्म को कानूनी मान्यता दे दी जाएगी।

फर्म खोलने के फायदे (Firm kholne ke fayde)

अब जब आप फर्म खोलने का सोच रहे हैं और इसके लिए इतनी लंबी चौड़ी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं तो अवश्य ही आपके मन में यह भी आ रहा होगा कि आखिरकार अपनी कंपनी को एक फर्म के रूप में मान्यता दिलवा कर आपको क्या लाभ मिलेगा। तो आइए इसके बारे में भी जान लेते हैं।

  • सबसे पहले और प्रमुख बात तो आपके व्यापार या काम को कानूनी रूप से मान्यता मिल जाएगी। अर्थात आपके द्वारा किया गया सब काम कानूनी रूप से मान्य कहलाया जाएगा और कोई भी आप पर ऊँगली नही उठा पाएगा।
  • बहुत बार यह देखने में आता हैं कि किसी व्यापार में जब हानि होती हैं या ज्यादा लाभ हो जाता हैं तो उसके पार्टनर्स के बीच में उसको लेकर लड़ाई झगड़ा होने लगता हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए उसको फर्म के रूप में पंजीकरण करवा देना सबसे उत्तम मार्ग होता है।
  • फर्म में जो भी व्यक्ति या कर्मचारी काम कर रहे हैं उनके साथ डील करना भी बहुत आसान हो जाता है।
  • एक फर्म को सरकार के द्वारा कई तरह के कर में भी छूट प्रदान की जाती है और कई तरह की कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत सहायता राशि भी प्रदान की जाती है।
  • लाभ व हानि का बंटवारा कानून के दायरे में रहकर किया जा सकता हैं व इसमें किसी के शक की कोई गुंजाईश नही रह जाती।

फर्म कैसे बनाए – Related FAQs

प्रश्न: पार्टनरशिप फर्म कैसे बनाये?

उत्तर: पार्टनरशिप फर्म बनाने के लिए आपको पहले साझेदारी विलेख बनाना होगा और फिर उसे लेकर मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट ऑफिस में जाना होगा।

प्रश्न: फर्म कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: फर्म दो प्रकार की होती हैं एक सोलो फर्म व दूसरी साझेदारी फर्म।

प्रश्न: किसी फर्म का रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

उत्तर: किसी फर्म का रजिस्ट्रेशन करने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ ऑफिस में जाकर वहां फॉर्म सबमिट करें।

प्रश्न: फर्म का पंजीयन क्या है?

उत्तर: फर्म का पंजीयन अर्थात कानूनी रूप से मान्यता दिलवाना होता है।

इस तरह से आज आपने जाना कि किसी फर्म रजिस्टर कैसे करवाया जा सकता है, उस फर्म का क्या काम होता है, फर्म कितने तरह की होती है, उसमे किसका क्या क्या हिस्सा होता है, उसको रजिस्टर करवाने के लिए क्या क्या चीज़ की आवश्यकता पड़ती है और फर्म बनाने के क्या-क्या लाभ मिलते हैं इत्यादि।

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