फाइनेंस डिपार्टमेंट क्या होता है? | फाइनेंस डिपार्टमेंट के कार्य, उद्देश्य व महत्व | Finance department kya hota hai

Finance department kya hota hai :- हम कई तरह के डिपार्टमेंट या विभाग के बारे में सुनते और पढ़ते हैं लेकिन सभी तरह के विभागों में जो विभाग सबसे महत्वपूर्ण होता है, वह होता है वित्त विभाग। इस वित्त विभाग को अंग्रेजी में फाइनेंस डिपार्टमेंट कहा जाता है। कुछ लोग इसे फाइनेंस विभाग भी कह देते हैं। अब यह विभाग हर जगह होता है क्योंकि पैसों का प्रबंधन किया जाना बहुत ही आवश्यक होता है अन्यथा सारे के सारे प्रयास विफल हो जाते हैं। अब वह चाहे किसी कंपनी या बिज़नेस में हो या राज्य या केंद्र सरकार के (Finance department ka meaning) यहाँ।

फाइनेंस डिपार्टमेंट एक ऐसा विभाग या डिपार्टमेंट होता है जहाँ वित्त से जुड़े हुए सभी तरह के महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। उनकी आज्ञा के बाद ही पैसों से जुड़ा हुआ कोई काम संभव हो पाता है। कोई कंपनी या उद्योग जितना बड़ा होता है, उनके लिए फाइनेंस डिपार्टमेंट को स्थापित करना उतना ही आवश्यक हो जाता है। इसी कारण इसका महत्व और उपयोगिता बहुत अधिक बढ़ (Finance department kya hota hai in Hindi) जाती है।

ऐसे में यह फाइनेंस डिपार्टमेंट क्या होता है और किस तरह से काम करता है और इसमें क्या कुछ किया जा सकता है इत्यादि के बारे में जानना अति आवश्यक हो जाता है। आज का हमारा यह लेख इसी विषय के ऊपर ही प्रकाश डालने के उद्देश्य से लिखा गया है। इस लेख को पढ़कर आपको यह पता चल जाएगा कि फाइनेंस डिपार्टमेंट क्या होता है और यह किस तरह से कार्य कर पाता (Finance department meaning in Hindi) है।

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फाइनेंस डिपार्टमेंट क्या होता है? (Finance department kya hota hai)

यहाँ हम सबसे पहले तो फाइनेंस डिपार्टमेंट क्या होता है या इसमें क्या कुछ होता है, उसके बारे में बात करने वाले हैं। तो फाइनेंस डिपार्टमेंट को हिंदी में वित्त विभाग के नाम से जाना जाता है। वित्त का अर्थ पैसों या धन से होता है और विभाग को हम एक कार्यालय या ऑफिस कह सकते हैं जहाँ वित्तीय पेशेवर बैठते हैं और धन से जुड़े सभी तरह के अहम निर्णय लेते हैं। अब हम अपने घर का भी एक आर्थिक बजट बनाते हैं जो किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा बनाया जाता (Finance department kya hai in Hindi) है।

Finance department kya hota hai

कहने का अर्थ यह हुआ कि आप यदि कमाते हैं तो आप अपने महीने की कमाई को किस तरह से खर्च करना है, कहाँ खर्च करना है, कहाँ निवेश करना है इत्यादि के अनुसार एक योजना का निर्माण करते हैं या बजट बनाया जाता है। वहीं यदि किसी कंपनी या उद्योग या सरकार को यही काम करना हो तो वह किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं होती है। वह इसलिए क्योंकि उन्हें बड़े स्तर पर वित्तीय बजट या आर्थिक योजना को बनाये जाने की जरुरत होती (What is finance department in Hindi) है।

इसी के लिए ही फाइनेंस डिपार्टमेंट स्थापित किया जाता है जो उस कंपनी, उद्योग, संस्था, सरकार इत्यादि के लिए वर्ष भर का या दिन या महीने के अनुसार एक योजना बनाती है और बाकि सभी जरुरी कार्य करती है। यहाँ हम यह कहना चाह रहे हैं कि किसी भी जगह पर यदि कोई वित्त विभाग स्थापित किया गया है तो उस संस्था या कंपनी के लिए पैसों से जुड़ा हर निर्णय वही वित्त विभाग ही करता है, और कोई (Finance department kya hai) नही।

अब वह निर्णय कर्मचारियों को वेतन देने का हो, कुछ नया खरीदना हो, कहीं निवेश करना या कुछ और, हर चीज़ में उनका ही निर्णय माना जाता है या उन्हें परामर्श दिया जाता है। हालाँकि वे उस कंपनी के सर्वेसर्वा नहीं होते हैं, क्योंकि उन्हें अपने या कंपनी के मैनेजर की बात को मानना होता है। एक तरह से आप उन्हें उस कंपनी के पैसों का प्रबंधक कह सकते हैं, ना कि मालिक। अब इसके बारे में बेहतर तरीके से समझना है तो आपको फाइनेंस डिपार्टमेंट के कार्यों के बारे में समझना होगा।

फाइनेंस डिपार्टमेंट के क्या कार्य होते हैं? (Finance department ke karya)

आपको फाइनेंस डिपार्टमेंट के बारे में तब तक सही से समझ नहीं आएगा जब तक आप इसके विभिन्न कार्यों के बारे में अच्छे से नहीं जान लेते हैं। फाइनेंस डिपार्टमेंट के द्वारा दिन प्रतिदिन में जो कार्य किये जाते हैं, वही उसका महत्वपूर्ण अंग होते हैं और उसकी उपयोगिता को सिद्ध करते हैं। ऐसे में यदि कहीं भी वित्त विभाग को स्थापित किया जाता है, तो उसके क्या कुछ कार्य होते हैं या उनके द्वारा क्या कुछ किया जाता है, आइये उस पर एक नज़र डाल लेते हैं।

कर्मचारियों को वेतन देना

यदि कहीं भी वित्त विभाग स्थापित किया जाता है, तो उस कंपनी या उद्योग में कई तरह के कर्मचारी या अधिकारी काम कर रहे होते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि कोई प्राइवेट कंपनी के यहाँ फाइनेंस डिपार्टमेंट बनाया गया है तो उस कंपनी में विभिन्न पदों पर लोग काम कर रहे होंगे। ठीक उसी तरह सरकार में भी तरह तरह के अधिकारी अलग अलग विभागों में काम कर रहे होंगे।

तो वहां पर या उससे संबंधित अन्य किसी विभाग में जो लोग भी काम कर रहे हैं, उन सभी को सही समय पर वेतन देने का कार्य फाइनेंस डिपार्टमेंट का ही होता है। इसी तरह यदि कोई कर्मचारी नौकरी को छोड़ देता है तो उसके सभी बकाया को देखना और उसको पदमुक्त करते समय क्या कुछ किया जाना है, वह भी यही विभाग देखता है। कोई कर्मचारी नया जुड़ता है तो उससे संबंधित सभी तरह की कार्यवाही करना भी इन्हीं का ही काम होता है।

कंपनी के सभी संसाधनों पर खर्च

अब कंपनी के द्वारा समय समय पर कई तरह के संसाधनों पर खर्च किया जाता है। यह खर्च कई तरह का हो सकता है, जैसे कि कंपनी के कार्यालय का प्रबंधन किया जाना, दैनिक दिनचर्या पर होने वाला खर्च, कर्मचारियों की यात्रा पर खर्च, कोई सामान नया लेना है तो उसका खर्च, कुछ ख़राब हो गया है या वापस करना है तो उसे देखना इत्यादि।

इस तरह से कंपनी के द्वारा दिन प्रतिदिन के तौर पर जो भी खर्चा किया जाता है, फिर चाहे वह किसी भी तरह का हो, उन सभी की विस्तृत जानकारी फाइनेंस डिपार्टमेंट के पास होती है। यदि किसी को इसके लिए पैसा चाहिए होता है तो उसे देने का काम यही वित्त विभाग ही करता है।

अकाउंटिंग का काम करना

यह जो काम होता है वह फाइनेंस डिपार्टमेंट का दिन प्रतिदिन का कार्य होता है और सबसे महत्वपूर्ण भी होता है। इसके लिए उस कंपनी के द्वारा अपने यहाँ कई तरह के अकाउंटेंट, सीए इत्यादि को काम पर रखा जाता है। वे कंपनी के हर दिन का अकाउंट्स देखते हैं और उसे ऑनलाइन दर्ज करते चले जाते हैं।

इसके माध्यम से कंपनी के उच्च प्रबंधक और अन्य डायरेक्टर व उच्च पदस्थ लोगों को समय समय पर वित्त से जुड़ी हरेक महत्वपूर्ण जानकारी व अपडेट मिलती रहती है। इसी के अनुसार ही आगे के निर्णय लिए जाते हैं और पीछे किये गए कार्यों की समीक्षा की जाती है। तो अकाउंटिंग का कार्य भी फाइनेंस डिपार्टमेंट का एक महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है।

कंपनी का आयकर भरना

चाहे कोई भी हो, हर किसी को वित्तीय वर्ष के अंत में मूल्याङ्कन के समय अपनी कंपनी का आयकर समय पर भरना आवश्यक होता है अन्यथा उसके विरुद्ध भारतीय आयकर विभाग के द्वारा उचित कार्यवाही की जाती है। ऐसे में एक वर्ष में उस कंपनी के द्वारा कितना पैसा कमाया गया है और उसकी नेट वैल्यू कितनी है, इत्यादि को देखना फाइनेंस डिपार्टमेंट का ही कार्य होता है।

अब उसे भारतीय आयकर कानून के अनुसार कितना पैसा कर के रूप में चुकाना है और उसके लिए किस तरह से ITR फाइल करनी है, यह वित्त विभाग के द्वारा ही देखा जाता है। इसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाती है और यह समय पर किया जाना भी जरुरी होता है।

कंपनी का आर्थिक बजट बनाना

हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले हर कंपनी के द्वारा अपने फाइनेंस डिपार्टमेंट को कहा जाता है कि वह सभी जरूरतों और आगे की रणनीति के तहत एक आर्थिक बजट तैयार करे। इसी बजट के अनुसार ही कंपनी आगे बढ़ती है और उन्नति करती है। इसमें फाइनेंस डिपार्टमेंट के द्वारा पिछले वर्ष के कार्यों और उन्नति की समीक्षा तो की ही जाती है और साथ ही भविष्य की संभावनाओं को भी देखा जाता है।

इसके तहत वह कंपनी का आर्थिक बजट तैयार करने का काम करती है। इसके तहत यह बताया जाता है कि कंपनी किस क्षेत्र में और किस समय अवधि में कितना पैसा खर्च करने का सोच रही है, उसके लिए कैसे पैसा आवंटित किया जाएगा और किस रूप में किया जाएगा इत्यादि।

क्लाइंट्स से पैसा लेना

फाइनेंस डिपार्टमेंट को ना केवल व्यय के बारे में देखना होता है बल्कि कहाँ कहाँ से और किस रूप में आय हो रही है, इसके बारे में भी देखना होता है। तो यदि कोई कंपनी या उद्योग पैसा कमाता है तो उसका मुख्य स्त्रोत उसके क्लाइंट ही होते हैं जो उसे कार्य देते हैं। अब उस कार्य को करने के बदले में उन क्लाइंट्स के द्वारा कंपनी को पैसा दिया जाता है।

इन्हीं पैसों से ही कंपनी उन्नति करती है और सभी का वेतन देती है। तो क्लाइंट्स से सही समय पर पैसा लेना, उनसे डील करना, उनके साथ नेगोशिएट करना इत्यादि फाइनेंस डिपार्टमेंट का ही काम होता है। हालाँकि इसमें उनके साथ ब्रांड मैनेजर और मार्केटिंग वाले भी काम करते हैं क्योंकि यही लोग क्लाइंट्स के साथ निरंतर संपर्क में बने होते हैं किन्तु अंतिम काम फाइनेंस डिपार्टमेंट का ही होता है।

निवेश करना

अब कंपनी के द्वारा तरह तरह के क्षेत्रों में निवेश किया जाता है ताकि बढ़ी हुई आय को और बढ़ाया जा सके। कहने का अर्थ यह हुआ कि जिस प्रकार हमारे पास पैसा बच जाता है और हम उसे अपनी इच्छा के अनुसार तरह तरह के क्षेत्रों में निवेश कर ज्यादा पैसा कमाते हैं तो इसी तरह का कार्य कंपनियों के द्वारा भी किया जाता है।

ऐसे में कंपनी को किस क्षेत्र में कितना निवेश करना है, किस रूप में करना है, उसकी लेनदारी क्या रहेगी, उसकी रिपोर्ट तैयार करना इत्यादि सब भी वित्त विभाग के कार्य के अंतर्गत ही आता है। इस तरह निवेश से संबंधित सभी तरह के कार्य करना भी फाइनेंस डिपार्टमेंट का ही काम होता है।

ऊपर बताये गए सभी कार्यों के अलावा भी फाइनेंस डिपार्टमेंट के कई तरह के कार्य होते हैं। एक तरह से आप यह समझ लें कि किसी कंपनी या उद्योग में पैसों से जुड़ा कोई भी काम हो रहा है या होने जा रहा है तो उसके लिए फाइनेंस डिपार्टमेंट की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी कारण ही उस जगह पर वित्त विभाग को स्थापित किया गया होता है।

फाइनेंस डिपार्टमेंट का उद्देश्य क्या है? (Purpose of finance department in Hindi)

अब बात करते हैं फाइनेंस डिपार्टमेंट के उद्देश्य के बारे में। आपमें से बहुत लोग सोच रहे होंगे कि जब कंपनी में तरह तरह के अन्य विभाग हैं तो अलग से फाइनेंस डिपार्टमेंट को स्थापित करने की क्या ही आवश्यकता है। तो यहाँ हम आपको बता दें कि कंपनी के अन्य जो विभाग हैं, उन्हें अपने अपने क्षेत्र में काम करना होता है। उदाहरण के तौर पर टेक्निकल टीम को कंपनी की वेबसाइट या ऑनलाइन उपस्थिति के बारे में देखना होता है, कंटेंट टीम को कंपनी के बारे में लिखकर प्रचार करना होता है, ब्रांड टीम को कंपनी के लिए क्लाइंट्स लाने होते हैं तो इसी तरह ही अन्य टीम के भी अपने अपने काम होते हैं।

अब कोई भी कंपनी यह सब काम क्यों कर रही होती है? सभी का एक ही उत्तर होगा, यह सब काम पैसा कमाने के लिए ही तो किया जाता है। ऐसे में पैसों का प्रबंधन किया जाना बहुत ही आवश्यक हो जाता है अन्यथा वह कंपनी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाती है। तो फाइनेंस डिपार्टमेंट का उद्देश्य ही यही होता है कि वह उक्त कंपनी के पैसों का सही से प्रबंधन करने का काम कर सके।

वित्त विभाग के द्वारा ही उस कंपनी के सभी तरह के महत्वपूर्ण निर्णयों का लेखा जोगा रखा जाता है। अब जिस तरह पहले के समय में एक छोटी सी दुकान पर भी बही खाता रखा जाता था जिसमें उसका दिन प्रतिदिन का हरेक लेखा जोगा लिखा होता था, ठीक उसी तरह का उद्देश्य इस फाइनेंस डिपार्टमेंट का होता है। ऐसे में यह उस कंपनी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण व अहम भूमिका रखता है।

फाइनेंस डिपार्टमेंट का महत्व (Finance department ka mahatva)

अब यदि आप फाइनेंस डिपार्टमेंट के महत्व के बारे में जानने को इच्छुक हैं तो उस पर भी हम प्रकाश डाल लेते हैं। दरअसल यदि किसी कंपनी में फाइनेंस डिपार्टमेंट नहीं है या सही से नहीं बना हुआ है तो उस कंपनी के अन्य सभी विभाग भी धीरे धीरे करके निष्क्रिय होते चले जाएंगे। साथ ही वह कंपनी भी घाटे में चली जाएगी और एक दिन बंद हो जाएगी। वित्त विभाग की किसी भी कंपनी में बहुत जरुरत होती है और बिना इसके कोई काम हो ही नहीं सकता (Importance of finance department in Hindi) है।

अब कंपनी में जो भी काम हो रहा है, फिर चाहे वह कैसा भी काम क्यों ना हो, उसके लिए पैसों की जरुरत पड़ती ही है। अब पैसा चाहे लेना हो या देना हो लेकिन पैसों का तो काम होता ही है। अब इन पैसों को देखने का काम तो फाइनेंस डिपार्टमेंट का होता है और यदि वही नहीं है तो कंपनी के सभी विभाग बंट जाएंगे और लड़ाईयां होने लगेगी। इसी कारण ही फाइनेंस डिपार्टमेंट का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है क्योंकि वह कंपनी के सभी विभागों में आपसी सामंजस्य बिठाने का काम करता है।

फाइनेंस डिपार्टमेंट में नौकरियां

अब आपको यह भी जान लेना चाहिए कि आखिरकार फाइनेंस डिपार्टमेंट में किस किस तरह की नौकरियां निकलती है ताकि यदि आपको भी उसमें नौकरी लगनी हो तो आप सही दिशा में आगे बढ़ सकें। वैसे तो इसमें कुछ पद ही महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन कई ऐसे पद भी होते हैं जिन पर नौकरी लगना बहुत ही सरल होता है। तो आइये जाने फाइनेंस डिपार्टमेंट के अंतर्गत आने वाली नौकरियों के बारे में।

फाइनेंस मैनेजर

यह फाइनेंस डिपार्टमेंट का एक तरह से प्रमुख माना जाता है जिसके अंतर्गत सभी तरह के वित्तीय कर्मचारी आते हैं। इसका काम सभी को निर्देशित करना और कार्यों को सही समय पर पूरा करके देना होता है। कंपनी के पैसों से जुड़े जो भी बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं, उस पर फाइनेंस मैनेजर की अनुमति ली जानी आवश्यक होती है।

फाइनेंस एडवाइजर

अब यह जो फाइनेंस एडवाइजर होता है, वह फाइनेंस मैनेजर के नीचे रहकर काम करता है। इसका काम फाइनेंस मैनेजर को और कंपनी के अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों और कर्मचारियों को वित्तीय परामर्श देना होता है। यह देखता है कि किस तरह का काम करने से कंपनी को लाभ हो सकता है।

चार्टेड अकाउंटेंट

इसका काम कंपनी के लिए समय पर ITR फाइल करना, अकाउंटेंट की टीम को मैनेज करना, सभी लेखा जोगा का हिसाब रखना इत्यादि होता है। यह कंपनी के लिए रीढ़ की हड्डी होता है और एक तरह से यह क्लाइंट्स के साथ भी संपर्क में बना रहता है।

अकाउंटेंट

अकाउंटेंट मुख्य तौर पर सीए के अंतर्गत ही काम करते हैं लेकिन ये लोग फाइनेंस डिपार्टमेंट के सैनिक होते हैं। दिन प्रतिदिन में जो भी काम वित्त से जुड़ा हो रहा है, उसको रिपोर्ट में लिखना इन्हीं का ही काम होता है। तरह तरह की रिपोर्ट तैयार करना, वित्तीय बजट बनाना इत्यादि सब भी इन्हीं का ही काम होता है।

ऑडिटर

यह कंपनी में ऑडिट करने का काम करते हैं अर्थात पैसा कहाँ गया और कैसे आया, इत्यादि के बारे में देखना इन्हीं का ही काम होता है। एक तरह से जो काम अकाउंटेंट का होता है, उसके होने के बाद उस पर एक्सपर्ट लेवल पर काम करना इन्हीं का ही काम होता है।

एनालिस्ट

ये लोग मुख्य तौर पर ऑडिटर के साथ ही काम कर रहे होते हैं और फाइनेंस एडवाइजर को अपनी रिपोर्ट्स देते हैं। एक तरह से ऑडिटर ने जो भी रिपोर्ट्स बनायी है, उनका एनालिसिस करना, उस पर मंथन करना और आगे के निर्णय लेना इन्हीं का ही काम होता है।

एचआर

हम सभी अपनी कंपनी के एच आर को अच्छे से जानते हैं क्योंकि उन्हीं से ही हमारा नित्य रूप से मिलना झुलना होता है। अब यह एक ऐसा व्यक्ति होता है जो कंपनी के फाइनेंस डिपार्टमेंट और अन्य विभागों के बीच एक सेतु का काम करता है। कंपनी के अन्य सभी कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना, उनके लिए पैसों से जुड़ा कोई अन्य काम देखना और उसे फाइनेंस डिपार्टमेंट तक पहुँचाना इसी एच आर का ही काम होता है।

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फाइनेंस डिपार्टमेंट क्या होता है – Related FAQs

प्रश्न: फाइनेंस डिपार्टमेंट क्या होता है?

उत्तर: फाइनेंस डिपार्टमेंट को हिंदी में वित्त विभाग कहा जाता है जो किसी कंपनी, उद्योग और फर्म इत्यादि का पूरा बजट संभालता है।

प्रश्न: वित्त विभाग के सबसे महत्वपूर्ण कार्य क्या है?

उत्तर: वित्त विभाग का कार्य किसी कंपनी, उद्योग और फर्म इत्यादि का पूरा बजट संभालना होता है अधिक जानकारी के लिए आप हमारे द्वारा लिखा गया यह लेख पढ़ सकते हो।

प्रश्न: किसी कंपनी में वित्त विभाग कैसे काम करता है?

उत्तर: वित्त विभाग कैसे काम करता है यह जानने के लिए आप ऊपर का लेख ध्यान से पढ़ना।

प्रश्न: फाइनेंस डिपार्टमेंट के उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर: फाइनेंस डिपार्टमेंट का उद्देश्य यह होता है कि वह उक्त कंपनी के पैसों का सही से प्रबंधन करने का काम कर सके।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने फाइनेंस डिपार्टमेंट के बारे में जानकारी हासिल कर ली है। आपने जाना कि फाइनेंस डिपार्टमेंट क्या है फाइनेंस डिपार्टमेंट के कार्य क्या हैं और फाइनेंस डिपार्टमेंट का उद्देश्य और महत्व क्या है इत्यादि। आशा है कि जो जानकारी लेने के लिए आप इस लेख पर आए थे वह आपको मिल गई होगी। फिर भी यदि कोई प्रश्न आपके मन में शेष है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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