किराएदार को घर से कैसे बेदखल करें? | किराएदार को घर से बेदखल करने के नियम 2022

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लोग अपने मकान को किराए पर इसलिए देते हैं, ताकि इससे इस महंगाई के जमाने में उनकी कुछ कमाई हो सके। लेकिन दिक्कत तब हो जाती है, जब आवश्यकता पड़ने पर अथवा रेंट एग्रीमेंट (rent agreement) खत्म हो जाने के बावजूद किराएदार मकान खाली नहीं करता। वह उस पर कब्जा करके बैठ जाता है।

कुछ किराएदार लोगों के समझाने एवं थोड़ा दबाव डालने पर मान जाते हैं, लेकिन बहुत से किराएदार ढीठ होते हैं, जो कोर्ट कचहरी की धमकी के बावजूद घर से कब्जा हटाने को तैयार नहीं होते। ऐसे किराएदार को अपने घर से कैसे बेदखल करें? आज इस पोस्ट में हम आपके लिए यही जानकारी लेकर आए हैं।

यदि आपने भी अपनी संपत्ति किराए पर दी है अथवा आप भी घर पर किराएदार के कब्जे को लेकर परेशान हैं तो यह पोस्ट आपके ही काम की है। आपको बस पोस्ट को ध्यान से अंत तक पढ़ते जाना है। आइए, शुरू करते हैं-

किराएदार को घर से बेदखल करने के कारण –

ऐसे बहुत से कारण हैं, जिनको आधार बनाकर मकान मालिक अपने किसी किरायेदार को बेदखल कर सकता है। इसमें रेंट एग्रीमेंट सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। इस दस्तावेज में मकान मालिक एवं किराएदार के बीच किराएदारी की शर्तों का उल्लेख होता है।

आपको बता दें कि यह 11 महीने के लिए बनता है। इसके पूरा होने पर किराएदार को मकान छोड़ना ही होता है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य प्रमुख कारणों से भी किराएदार को बेदखल किया जा सकता है, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं-

किराएदार को घर से कैसे बेदखल करें? | किराएदार को घर से बेदखल करने के नियम 2022
  • यदि किराया देय होने के बाद 15 दिन से अधिक की अवधि हो गई है एवं किराएदार ने तय किराये की राशि का भुगतान न किया हो।
  • मकान स्वामी की लिखित सहमति के बगैर मकान किसी अन्य व्यक्ति को किराए पर दे देना।
  • मकान की चौहद्दी का इस्तेमाल किराए के समझौते में लिखित उद्देश्यों के अतिरिक्त किसी अन्य उद्देश्य के लिए करना।
  • कोई भी ऐसा कार्य करना, जिससे संपत्ति की वैल्यू (value of property) में कमी हो।
  • किराएदार का संपत्ति का किसी गैर कानूनी अथवा अवैध कार्य के लिए इस्तेमाल किया जाना।
  • यदि पड़ोसी लिखित रूप में किराएदार के रहने पर आपत्ति करें।
  • यदि मकान मालिक को अपने स्वयं के व्यवसाय अथवा अपने परिवार के लिए परिसर की आवश्यकता हो।
  • यदि दूसरी इमारत के निर्माण के लिए वर्तमान परिसर को ध्वस्त किया जाना हो।

किराएदार को घर से बेदखल करने की प्रक्रिया –

अब आपको बताते हैं कि किराएदार को अपने घर से बेदखल करने की क्या प्रक्रिया है।

  • घर को किराये पर देते समय 11 महीने का एग्रीमेंट बनवाएं एवं इसका रजिस्ट्रेशन करा लें। यह समय पूरा होने के बाद किराएदार को मकान छोड़ना ही होगा।
  • यदि किराएदार आसानी से घर पर कब्जा छोड़ने को न तैयार हो तो क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के साथ उससे मिलकर बात करें एवं उसे मकान छोड़ने को कहें।
  • यदि वह ऐसा नहीं करता तो उससे स्पष्ट कहें कि आप उसके खिलाफ सिविल कोर्ट (civil court) में मुकदमा (case) करेंगे। दबाव में आकर किराएदार मकान छोड़ देगा।
  • यदि वह ऐसा नहीं करता तो अपने वकील से संपर्क कर उसे ट्रांसफर आफ प्राॅपर्टी एक्ट (transfer of property act) की धारा 106 के अंतर्गत कानूनी नोटिस भेजकर लीज को रद्द कर दें।
  • यदि वह तब भी मकान से कब्जा हटाने के लिए राजी न हो तो डिस्ट्रिक्ट सिविल कोर्ट में उसके खिलाफ बेदखली का वाद दायर करें। वहां से किरायेदार को बेदखली का नोटिस दिया जाएगा। नोटिस प्राप्त होने के बाद सामान्य रूप से किरायेदार मकान छोड़ देगा।
  • यदि इसके बावजूद किरायेदार मकान नहीं छोड़ता तो मकान मालिक को अपने वकील से संपर्क कर सुनवाई के लिए इंतजार करना होगा।
  • यदि मकान मालिक के पास किराएदार की बेदखली को लेकर पर्याप्त सुबूत हैं तो सुनवाई के पश्चात फैसला मकान स्वामी के पक्ष में आएगा। लेकिन आपको बता दें कि यह प्रक्रिया अच्छा खासा समय ले सकती है।

वे कौन से सुबूत हैं, जिनकी बिना पर कोर्ट में आपका पक्ष मजबूत होगा

दोस्तों, जब बात कोर्ट की आती है तो आप जानते ही हैं कि कोर्ट भावनाओं के आधार पर फेसला नहीं लेती। वहां सुबूत (proof) ही काम आते हैं। ऐसे में हम आपको उन दस्तावेजों (documents) के बारे में बताते हैं, जो किराएदार की बेदखली के लिए आपकी दलील का पुख्ता आधार बनेंगे। यह इस प्रकार से हैं-

  • रेंट एग्रीमेंट (rent agreement)
  • लीज एग्रीमेंट (lease agreement)
  • बाउंस हुए चेक (bounce cheque)
  • किराएदार को भेजे नोटिस की काॅपी (copy of notice)
  • किराएदार अथवा गवाहों संग ईमेल (email), टेक्स्ट (text) एवं वाॅइसमेल (voice mail) का आदान प्रदान।
  • क्षतिग्रस्त संपत्ति की तस्वीरें।
  • बेदखली नोटिस की काॅपी एवं रिसीविंग की रसीद का प्रिंट आउट।
  • गवाहों एवं अन्य लोगों के शपथ पत्र (affidavit)। मसलन ठेकेदारों द्वारा नुकसान का अनुमान, पुलिस रिपोर्ट आदि।

अपने राज्य में किराएदार की बेदखली के कानून का पता लगाएं

दोस्तों, आपको बता दें कि प्रत्येक राज्य में किराएदारी के अलग अलग कानून (laws) हैं। ऐसे में आप जिस राज्य में रहते हैं, वहां के स्थानीय कानूनों की जानकारी एवं सहारा लें।

इसमें बेदखली की प्रक्रिया का पता लगाएं एवं इसके पश्चात रेंट एग्रीमेंट को इन्हीं नियमों को आधार बनाते हुए ड्राफ्ट (draft) कराएं। इससे आपको किराएदार को बेदखल करने के लिए अधिक मशक्कत नहीं करनी होगी।

विभिन्न राज्यों में किराएदार को घर से बेदखल करने के कानून

दोस्तों, जैसा कि हमने आपको बताया कि किराएदारी एवं किराएदार की बेदखली को लेकर अलग अलग राज्यों में अलग अलग कानून हैं। आज आपको हम विभिन्न राज्यों में किराएदारी कानून के विषय में विस्तार (details) से जानकारी देंगे। आइए शुरू करते हैं-

राजस्थान में किराएदार को घर से बेदखल करने के नियम –

दोस्तों, आपको बता दें कि राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम (rajasthan rent control act) को 29 नवंबर, 2001 को राज्य के सभी नगरीय क्षेत्रों (urban areas) में लागू किया गया। इसके अनुसार-

  • बगैर लिखित करार के किराएदारी नहीं होगी।
  • न्यूनतम एक हजार रुपये मासिक किराये अथवा इससे अधिक पर किराएदारी पंजीकरण (registration) कराना होगा।
  • किराएदार की बेदखली को छोड़कर अन्य प्रकरण सुनने का अधिकार रेंट अथाॅरिटी (एसडीएम) को होगा।
  • किराया मकान मालिक एवं किराएदार की आपसी सहमति (mutual consent) से तय किया जाएगा।
  • किराएदार को बेदखल करने का अधिकार किराया अधिकरण को होगा।

https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/16859/1/the_documents.in_the-rajasthan-rent-control-act_dated.pdf

दिल्ली, हरियाणा में किराएदार को घर से बेदखल करने के नियम –

दिल्ली, हरियाणा में माॅडर्न टेनेंसी एक्ट (modern tenancy act) लागू करने की तैयारी है। इसके अंतर्गत यदि किराएदार रेंट एग्रीमेंट का उल्लंघन करता है, एवं मकान मालिक के कहने पर मकान खाली नहीं करता तो मकान मालिक के पास यह अधिकार होगा-

  • मकान मालिक किराएदारों पर दो माह के लिए किराया दोगुना कर सकता है।
  • यदि किराएदार फिर भी मकान खाली नहीं करता तो दो माह बाद मकान मालिक किराया चार गुना कर सकता है।
  • यदि किराएदार फिर भी नहीं मानता तो मकान मालिक उसे मकान अथवा दुकान खाली करने का नोटिस (notice) दे सकता है।
  • इसके पश्चात लिखित (written) में मेल (mail), मैसेज (message) आदि कर सकता है।
  • दोनों में बीच किसी भी विवाद पर फैसला किराया अधिकरण यानी रेंट अथारिटी करेगी।
  • टेनेंसी एक्ट में साफ किया गया है कि मकान मालिक को घर का मुआयना (inspection), मरम्मत से जुड़े काम कराने अथवा किसी अन्य उद्देश्य से आने के लिए 24 घंटे पहले लिखित में नोटिस देना होगा।
  • इस कानून में यह साफ कर दिया गया है कि कोई किराएदार मकान मालिक की संपत्ति पर कब्जा नहीं कर सकता।
  • मकान मालिक भी किराएदार को परेशान करके घर खाली करने के लिए नहीं कह सकता।
  • यदि किराएदार एवं मकान मालिक के बीच किसी प्रकार का विवाद खड़ा होता है तो उसका निपटारा रेंट अथारिटी (rent authority) यानी किराया अधिकरण में होगा।
  • इससे पूर्व रेंट एग्रीमेंट के लिए भी मकान मालिक एवं किराएदार दोनों को रेंट अथाॅरिटी के सामने उपस्थित होना होगा। अथवा दोनों पक्षों को एग्रीमेंट होने के दो माह के भीतर अथाॅरिटी को सूचित करना होगा।
  • यदि किराएदार दो माह तक किराए का भुगतान नहीं करता तो उसे मकान खाली करना होगा। माना जाएगा कि ऐसा कर वह प्राॅपर्टी का गलत इस्तेमाल कर रहा है।
  • आवासीय भवनों के लिए सिक्योरिटी मनी (security money) दो माह का किराया होगी, जबकि व्यावसायिक इमारतों के लिए अधिकतम छह महीने का किराया बतौर एडवांस (advance) देना होगा।

उत्तराखंड में किराएदार को घर से बेदखल करने के नियम –

उत्तराखंड में सप्ताह भर पहले किरायेदारी अधिनियम – 2021 पास हो गया है। इस संबंध में अभी अधिसूचना (notification) जारी होनी अलबत्ता बाकी है। अधिनियम लागू होने के बाद मकान मालिक एवं किरायेदारों के बीच विवादों में कमी आने की संभावना है। इसमें निम्नलिखित व्यवस्था दी गई है-

  • मकान मालिक एवं किराएदार के बीच लिखित अनुबंध (contract in writing) होगा।
  • मकान मालिक मनमर्जी से मनमाना किराया नहीं बढ़ा सकेंगे।
  • किराया अवधि पूरी होने के बाद किराएदार को नियमानुसार मकान खाली करना होगा।
  • किराया आपसी सहमति से तय किया जाएगा।
  • मकान की पुताई से लेकर बिजली की वायरिंग, स्विच बोर्ड, पानी का नल ठीक करने के लिए जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
  • किराए से संबंधित विवाद एवं शिकायतें सिविल कोर्ट में दायर नहीं होंगी।
  • ऐसे मामलों की सुनवाई किराया प्राधिकरण में होगी।
  • इस अधिनियम के दायरे में केवल आवासीय ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक भवनों को भी शामिल किया गया है।
  • इसमें साफ किया गया है कि जो जितना अधिक किराया वसूलेगा, उसे उसी हिसाब से सुविधाएं भी देनी होंगी।

उत्तर प्रदेश में किराएदार को घर से बेदखल करने के नियम –

उत्तर प्रदेश में भी मकान मालिक एवं किरायेदार के बीच होने वाले विवादों के निपटारे के लिए किरायेदारी कानून लागू होने का रास्ता खुल गया। यहां अगस्त में उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन विधेयक-2021 पेश किया गया। इसकी खास बातें इस प्रकार से हैं-

  • मकान मालिक बगैर रेंट एग्रीमेंट के किराएदार नहीं रख सकेंगे।
  • किराएदारों से जुड़ी सभी जानकारी ट्रिब्यूनल (tribunal) प्राधिकारी को देनी होगी।
  • तीन माह के भीतर रेंट एग्रीमेंट की जानकारी भी ट्रिब्यूनल प्राधिकारी को देना आवश्यक किया गया है।
  • आवास विभाग को एक डिजिटल प्लेटफाॅर्म (digital platform) तैयार करने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • मकान मालिक को हर वर्ष आवासीय (residential) में पांच प्रतिशत एवं गैर आवासीय (non residential) में सात प्रतिशत की दर से किराया बढ़ोत्तरी का अधिकार होगा। साफ किया गया है कि यह बढ़ोत्तरी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से की जाएगी।
  • मकान मालिक आवासीय के लिए किराएदार से दो महीने का एडवांस एवं गैर आवासीय के लिए किराएदार से छह माह का एडवांस ले सकेंगे।
  • किराए के घर को छोड़ते वक्त मकान मालिक किराएदार को यह एडवांस वापस देंगे अथवा इसे समायोजित (adjust) किया जाएगा।
  • आवश्यकता के आधार पर मकान मालिक किरायेदार के घर की मरम्मत कराएगा। उसे ही घर की सफेदी एवं खिड़की, दरवाजों का पेंट कराना होगा। बिजली खराब होने पर ठीक कराने का जिम्मा मकान मालिक का ही होगा।
  • नल का वाॅशर खराब होने पर उसे ठीक कराने अथवा बदलवाने, नाली की सफाई, टाॅयलेट की मरम्मत, बाथटब (bathtub) ठीक कराने, स्विच साॅकेट (switch socket) की मरम्मत, दरवाजे-खिड़कियों आदि की मरम्मत किराएदार को करानी होगी।
  • मकान मालिक एवं किराएदार के बीच किसी भी विवाद का निपटारा किराया प्राधिकरण करेगा एवं उसका फैसला अंतिम होगा।

किराया प्राधिकरणों के गठन से क्या क्या लाभ होंगे –

दोस्तों, आपको बता दें कि किराया प्राधिकरणों के गठन से कई लाभ होंगे, जो कि इस प्रकार से हैं-

  • कोर्ट का बोझ कम होगा। इसके तहत हर जिले में किराया प्राधिकारी डिप्टी कलेक्टर (deputy collector), रेंट कोर्ट के लिए अतिरिक्त कलेक्टर होंगे। -हाईकोर्ट (high court) के परामर्श से सभी जिलों में किराया प्राधिकरण के संचालन के लिए जिला न्यायाधीश अथवा अतिरिक्त जिला न्यायाधीश नियुक्त किए जाएंगे।
  • मकान मालिक बगैर डर के मकान किराए पर दे सकेंगे
  • मकान मालिक एवं किराएदार का करार नामा उनकी मृत्यु के पश्चात उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होगा।
  • किराएदार की मृत्यु के पश्चात उसके उत्तराधिकारी से जबरन मकान खाली नहीं कराया जा सकेगा।
  • मकान मालिक एवं किराएदार के बीच किराया आपसी सहमति से तय होगा।
  • मकान मालिक मनमर्जी से किराए में बढ़ोत्तरी नहीं कर सकेंगे।
  • एक्ट लागू होने के बाद सिविल कोर्ट में वाद अथवा अपील (appeal) दायर नहीं की जा सकेगी।

किराएदार एवं मकान मालिक के बीच किराएदारी से संबंधित शर्तों का दस्तावेज कौन सा है?

किराएदार एवं मकान मालिक के बीच किराएदारी से संबंधित शर्तों का दस्तावेज रेंट एग्रीमेंट होता है।

यदि किराएदार रेंट एग्रीमेंट के अनुसार अवधि पूरी होने पर मकान खाली नहीं करता तो मकान मालिक के पास उसकी बेदखली के क्या उपाय हैं?

यदि किराएदार मकान खाली नहीं करता तो मकान मालिक उसे वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेज सकता है, उसके पास कोर्ट का दरवाजा भी खुला है।

भविष्य में किराएदार एवं मकान मालिक के बीच विवाद कहां निपटाया जाएगा?

भविष्य में किराएदार एवं मकान मालिक के बीच के विवाद बजाय सिविल कोर्ट के, किराया अधिकरण में निपटाए जाएंगे।

किराएदारी से जुड़े मामले किस अधिनियम के तहत आते हैं?

किराएदारी से जुड़े मामले संबंधित राज्यों में लागू किराया अधिनियम के तहत आते हैं। मसलन राजस्थान की ही बात करें। वहां किराएदारी व्यवस्था के लिए राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम- 2001 में प्रावधान किए गए हैं।

रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड कराना क्यों आवश्यक है?

ऐसा कराना हमेशा लाभप्रद होता है, क्योंकि इसके पश्चात यह वैधानिक रूप धारण कर लेता है।

मित्रों, हमने आपको इस पोस्ट (post) में किराएदार को अपने घर से बेदखल किए जाने संबंधी तरीके की जानकारी दी। यदि आप ऐसे ही किसी जनहित से जुड़े विषय पर हमसे जानकारी चाहते हैं तो उसके लिए हमें नीचे दिए गए कमेंट बाॅक्स (comment box) में कमेंट करके भेज सकते हैं। आपकी प्रतिक्रियाओं (reactions) एवं सुझावों (suggestions) का हमेशा की तरह स्वागत है। ।।धन्यवाद।।

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