चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक क्या है? विधेयक की खास बातें, विधेयक के प्रावधानों का क्या असर होगा?

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां चुनाव को एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। अगले वर्ष के आरंभ में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इसी बीच केंद्र सरकार चुनाव प्रक्रिया में सुधार एवं इसे साफ-सुथरी तथा बेहतर बनाने के नाम पर चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक लेकर आई है, जिसने सियासत का पारा चढ़ा दिया है। आज इस पोस्ट में हम आपको इसी विधेयक के विषय में विस्तार से जानकारी देंगे। आइए, शुरू करते हैं-

चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक क्या है?

दोस्तों, आपको बता दें कि इस बिल यानी चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट (cabinet) की मंजूरी के बाद लोकसभा एवं राज्यसभा में भी हरी झंडी मिल चुकी है। इसके अंतर्गत जन प्रतिनिधित्व अधिनियम -1950 एवं 1951 में संशोधन (ammendment) का प्रस्ताव किया गया है।

मुख्य रूप से आधार कार्ड (aadhar card) को वोटर आईडी (voter ID) से लिंक (link) करने का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे मतदाता का पता वेरिफाई करने में सहायता मिलेगी, जिससे मतदान (voting) में फर्जीवाड़े (fraud) पर रोक लगेगी। फिलहाल उसके अनुसार ऐसा करना ऐच्छिक होगा, अनिवार्य नहीं।

चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक की खास बातें

राज्यसभा एवं लोकसभा से पारित होने के बाद अब राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही चुनाव सुधार संशोधन विधेयक कानून बन जाएगा। इससे जुड़ी अन्य खास बातें इस प्रकार से हैं-

  • आधार कार्ड के वोटर आईडी से लिंक होने से वोटर लिस्ट में दोहराव नहीं होगा, ऐसे में फर्जी वोटिंग नहीं हो सकेगी। आपको बता दें कि बहुत सारे लोग एक से अधिक जगह रजिस्ट्रेशन (registration) कराकर वोट डालने का मौका पा लेते थे। अब मतदान अधिकारी वोटर की पहचान करने के लिए आधार कार्ड का इस्तेमाल करेंगे एवं इससे संबंधित डाटा बेस (data base) केवल चुनाव आयोग (election commission) के पास रहेगा। इसे सार्वजनिक (public) नहीं किया जाएगा।
  • यह कानून सैन्य वोटरों (army voters) को लैंगिक निरपेक्ष बनाएगा। दरअसल, अभी तक किसी भी सैन्यकर्मी की पत्नी सैन्य मतदाता के रूप में पंजीकरण यानी रजिस्ट्रेशन (registration) कराने की पात्र है, लेकिन महिला सैन्यकर्मी का पति नहीं। अब महिला सैन्यकर्मी का पति भी सैन्य मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन करा सकेगा। जाहिर सी बात है कि यह लैंगिक भेदभाव दूर हो सकेगा। नए प्रावधान के बाद यह लैंगिक भेदभाव (sexual difference) समाप्त हो जाएगा। आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने विधि मंत्रालय (law ministry) से जन प्रतिनिधित्व कानून में सैन्य मतदाताओं से संबंधित प्रावधानों (provisions) में पत्नी शब्द को बदलकर स्पाउस (spouse) यानी जीवनसाथी (life partner) करने को कहा था।
  • वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए चार कट आफ डेट (cut off date) की सुविधा मिलेगी। ये तिथियां एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई एवं एक अक्टूबर किए जाने का प्रस्ताव है। अभी तक हमारे देश के कानून में यह त्रुटि थी कि किसी नए वोटर ने यदि वोटर लिस्ट में नाम दर्ज नहीं कराया तो उसके लिए उसे पूरे साल इंतजार करना होता था। क्योंकि कट आफ डेट केवल एक जनवरी थी। इस दिन 18 वर्ष पूरा करने वाले मतदाताओं को ही उस वर्ष वोटिंग का मौका मिलता था। डेढ़ करोड़ से अधिक युवाओं ने इसका नुकसान झेला है। नए कदम से युवा वोटरों को राहत होगी। आपको बता दें कि भारतीय निर्वाचन आयोग काफी समय से इसकी सिफारिश कर रहा था।
  • इस विधेयक में चुनाव की अधिघोषणा के साथ ही चुनाव अधिकारी (election officer) को मतदान केंद्र एवं मतदान अधिकारियों के लिए परिसर लेने का अधिकार भी प्रदान कर दिया गया है। इससे पूर्व इस औपचारिकता (formalities) में काफी वक्त गुजर जाता था, जिसका असर तैयारियों पर पड़ता था।

जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 एवं 1951 में क्या प्रावधान हैं?

चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक क्या है? विधेयक की खास बातें, विधेयक के प्रावधानों का क्या असर होगा?

जन प्रतिनिधित्व कानून-1950 मुख्य रूप से वोटर लिस्ट (voter list) की तैयारी एवं संशोधन संबंधी मामलों से संबंधित है। इसके अंतर्गत निर्वाचक के फोटो सहित फोटो निर्वाचक सूचियां तैयार करने के लिए निर्वाचन आयोग को अधिकार दिया गया है। वहीं, जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत चुनाव का वास्तविक आयोजन कराने संबंधी तमाम मामले आते हैं।

इसी कानून की धारा-169 के तहत चुनाव आयोग के परामर्श से केंद्र सरकार (central government) ने निर्वाचक पंजीकरण नियम (voter registration laws)-1961 बनाए थे।

इस कानून में सभी चरणों के चुनावों के आयोजन, अधिसूचना, नामांकन पत्र दाखिल किए जाने, नामांकन पत्रों की जांच, प्रत्याशी के नाम वापस लेने, चुनाव कराने, काउंटिंग एवं रिजल्ट (counting and result) के आधार पर सदन गठन के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं।

विपक्ष बिल का विरोध क्यों कर रहा

साथियों, आपको बता दें कि विपक्षी पार्टियों कांग्रेस, डीएमके, नेशनलिस्ट कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिव सेना बसपा ने इस चुनाव सुधार कानून (संशोधन) बिल का विरोध किया है। विपक्ष के अनुसार आधार कार्ड को वोटर कार्ड से लिंक करना जनता की निजता (privacy) का हनन है।

विपक्ष का कहना है कि आधार कार्ड केवल पते का सुबूत है, यह नागरिकता का प्रमाण (proof of citizenship) नहीं है। ऐसे में बहुत से बाहरी जैसे बांग्लादेशी नागरिक भी वोट डालने के हकदार हो जाएंगे। उसका यह भी आरोप है कि सरकार स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक गुप्त मतदान की प्रक्र्रिया में छेड़-छाड़ कर सकेगी।

विपक्ष ने बिल को लोकसभा में लाए जाने के तरीकों पर भी सवाल उठाते हुए उसका विरोध किया। उसका सवाल था कि सरकार किस वजह से इतनी हड़बड़ी में बिल लाकर बगैर लंबी बहस इसे बस पास कराना चाहती है।

विधेयक पास कराने में सरकार ने जल्दबाजी क्यों दिखाई

विपक्ष सहित बहुत सारे लोगों का आरोप है कि चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक पास कराने में सरकार ने हबड़-तबड़ मचाई। इसका एक कारण जो सामने आ रहा है, वो ये कि अब संसद (parliament) के शीतकालीन सत्र को समाप्त होने में कुछ ही दिन बचे हैं।

ऐसे में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार तमाम बचे विधेयकों को फौरन से पेशतर पास कराना चाहती है। यह अलग बात है कि राज्यसभा में जब विधेयक पास होने के लिए लाया गया तो सदन से विपक्षी सांसदों ने वाॅक आउट (walkout) किया।

इससे पूर्व लोकसभा में हंगामे का बाजार गर्म रहा था। विपक्ष ने पर्याप्त रिसर्च (research) एवं ठोस वजह बगैर ये बिल लाने का सरकार पर आरोप लगाया था।

चुनाव सुधार कानून (संशोधन) बिल से चुनाव प्रक्रिया साफ सुथरी एवं त्रुटि रहित होगी

केंद्र सरकार का दावा है कि चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक चुनाव प्रक्रिया में सुधार की दृष्टि से ही लाया गया है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भारत को एक लोकतांत्रिक देख बताते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया तभी साफ सुथरी होगी, जबकि वोटर लिस्ट में कोई त्रुटि न हो।

उन्होंने विपक्ष पर यह कहते हुए आरोप भी जड़ा कि किसी भी सही आदमी को इस प्रावधान का विरोध क्यों करना चाहिए? इसका विरोध केवल वे लोग कर रहे हैं, जो फर्जी मतदान कराना चाहते हैं अथवा इसके जरिये चुनाव कराना चाहते हैं।

नगर निकाय चुनाव तक में फर्जी मतदान हुआ

सरकार चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक के जरिये फर्जी मतदान पर रोक की बात कह रही है। यह बात काफी हद तक सच भी है कि देश में चाहे विधानसभा चुनाव हों या फिर निकाय चुनाव, फर्जीवाड़े के आरोप लगते रहे हैं। इसकी एक बानगी इसी से देखिए कि बेशक मामला निकाय चुनाव का है, लेकिन किस हद तक पहुंचा।

बात 21 दिसंबर, 2021 की है। भिलाई में जिले के चारों निकायों भिलाई, रिसाली, भिलाई चरोदा एवं जामुल नगर पालिका परिषद के लिए हुई वोटिंग के आखिरी चरण में फर्जी वोटिंग भी जमकर हुई। शाम को चार बजे वोटिंग खत्म होने तक पुलिस के पास कई बूथों से लगातार फर्जी वोटिंग की शिकायत पहुंची।

कुछ ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें पुलिस ने मौके पर पहुंच फर्जी वोटरों को पकड़ा भी। खुर्सीपार वार्ड-47 स्थित राधाकृष्ण मंदिर के एक बूथ में फर्जी वोटरों के पकड़े जाने के बाद भाजपा, कांग्रेस एवं अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच विवाद हो गया। मामला इस कदर बिगड़ा कि वहां पुलिस को लाठी तक भांजनी पड़ी।

केरल में फर्जीवाड़े की शिकायत, एक ही व्यक्ति के नाम पांच वोटर कार्ड थे

दोस्तों, आपको बता दें कि कुछ ही समय पूर्व केरल (Kerala) के कासरगोड जिले में एक ही व्यक्ति के पांच वोटर कार्ड पाए थे। इस घटना के बाद एक चुनाव अधिकारी को सस्पेंड (suspend) कर दिया गया था। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) टीआर मीणा ने कासरगोड जिले में कंप्यूटर सिस्टम में एक ही व्यक्ति के नाम पांच मतदाता पहचान पत्र (voter ID) पाए जाने की जानकारी दी थी।

जिसके बाद चुनावी ड्यूटी (election duty) पर तैनात एक उप तहसीलदार स्तर के अधिकारी को निलंबित (suspend) कर दिया गया था। उम्मीद की जा रही है कि आधार कार्ड को वोटर आईडी से लिंक करने के बाद इस तरह की शिकायतों पर लगाम लग सकेगी।

फर्जी वोट मामले में हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा था

मित्रों, आपको जानकारी दे दें कि केरल हाईकोर्ट ने कुछ महीने पहले चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि जिन वोटरों के नाम फर्जी हैं अथवा जिनके नाम बार बार दर्ज हैं, वे केवल एक ही बार वोट कर सकें। आपको बता दें कि केरल के कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने केरल हाईकोर्ट (High court) में एक याचिका दर्ज की थी।

उन्होंने अपनी याचिका में राज्य के 131 विधानसभा क्षेत्रों में वोटरों के फर्जी एवं बार बार दर्ज नामों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की थी। याचिका में ऐसे करीब साढ़े चार लाख फर्जी वोटरों का जिक्र किया गया था। चेन्निथला के वकील के जल्द सुनवाई के अनुरोध पर विचार करते हुए कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर चुनाव आयोग से जवाब मांगा था।

यह अकेला मामला इस बात का साफ परिचायक है कि चुनाव के वक्त वोट डालने में किस कदर फर्जीवाड़ा होता है। संभवतः केंद्र सरकार का इरादा चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक के माध्यम से इस स्थिति को बदलने का है।

वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने को वोटर हेल्पलाइन मोबाइल एप का सहारा लें

साथियों, चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक में वोटर लिस्ट को त्रुटिरहित बनाने पर भी फोकस किया गया है। यदि अभी तक आपका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हुआ है तो आपको बता दें कि भारतीय चुनाव आयोग ने वोटर हेल्पलाइन (voter helpline) नाम से मोबाइल एप (mobile app) भी लांच किया हुआ है।

यह एप मतदाताओं के लिए बेहद मददगार है। वे इसके माध्यम से बतौर वोटर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। यानी वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। एवं चुनाव के वक्त मतदान कर सकते हैं।

इस एप को गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) से डाउनलोड (download) किया जा सकता है। यह एप 33 एमबी का है। इसे चार स्टार मिले हैं। अभी तक इसके 10 मिलियन (million) से अधिक डाउनलोड्स (downloads) हो चुके हैं।

केंद्र सरकार चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक क्यों लाई है?

केंद्र का इस विधेयक को लाने का मकसद चुनाव प्रक्रिया को साफ-सुथरी और बेहतर बनाना है।

चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक का सबसे खास प्रावधान क्या हैं?

चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक में आधार कार्ड को वोटर आईडी से लिंक करने का प्रावधान किया गया है, जो सबसे खास है। इसे लेकर ही विपक्ष मुखर है।

आधार कार्ड को वोटर आईडी से लिंक करके क्या लाभ होगा?

केंद्र सरकार का दावा है कि आधार कार्ड को वोटर आईडी से लिंक करके फर्जी मतदान का रोक लगा पाना संभव होगा।

विपक्ष इस कदम का विरोध क्यों कर रहा है?

विपक्ष का कहना है कि आधार कार्ड केवल पते के सुबूत के तौर पर मान्य है। यह नागरिकता का दस्तावेज नहीं। लिहाजा, बाहरी लोग भी आसानी से वोट कर सकेंगे।

चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक में युवा मतदाताओं को क्या राहत दी गई है?

चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक में केंद्र ने नए मतदाताओं के लिए चार कट आफ डेट तय की हैं। एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई एवं एक अक्टूबर।

इससे पूर्व नए वोटरों के लिए कट आफ डेट क्या निर्धारित थी?

पहले केवल एक जनवरी को 18 साल पूरा करने वालों को ही वोट का मौका मिल पाता था।

सैन्य मतदाताओं के लिए चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक में क्या प्रस्ताव किया गया है?

अब महिला सैन्यकर्मी का पति भी सैन्य मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन करा सकेगा। इससे पूर्व केवल सैन्य वोटर की पत्नी को सैन्य मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने की सुविधा थी।

मित्रों, हमने आपको चुनाव सुधार कानून (संशोधन) विधेयक-2021 के संबंध में जानकारी दी। यदि आप इसी प्रकार की पोस्ट से अपना ज्ञानवर्धन करना चाहते हैं तो हमें नीचे दिए गए कमेंट बाक्स में कमेंट करके बता सकते हैं। आपकी तमाम प्रतिक्रियाओं एवं सुझावों का स्वागत है। ।।धन्यवाद।।
—————————————–

Contents show
Spread the love:

Leave a Comment