दहेज की शिकायत किससे और कहाँ करें? दहेज निषेध अधिनियम-1961 – नियम, सजा, शिकायत प्रक्रिया

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दहेज प्रथा समाज के लिए कलंक है। आज की तारीख में लड़कियां पढ़ लिख रही हैं एवं हर क्षेत्र में आगे जा रही हैं, किंतु शादी ब्याह की बात आती है तो आज भी दहेज उनकी शादी में एक प्रमुख बाधा बनकर खड़ा रहता है। दहेज हत्याओं में पहले की अपेक्षा कमी अवश्य आई है, किंतु वह बंद नहीं हुई हैं। आज भी देश में हर दूसरे घंटे एक विवाहिता दहेज की बलिवेदी पर चढ़ा दी जाती है।

आज हम आपको इसी महत्वपूर्ण विषय पर जानकारी प्रदान करेंगे। हम निम्न बिंदुओं को कवर करेंगे-दहेज का अर्थ, दहेज निषेध अधिनियम-1961, दहेज अधिनियम में हुए संशोधन, दहेज के संबंध में वर्तमान स्थिति। आशा ही नहीं, अपितु विश्वास है कि दहेज निषेध अधिनियम 1961 पर आधारित यह पोस्ट आपको अवश्य पसंद आएगी।

दहेज क्या है? [What is dowry?]

दहेज प्रथा को हमने कलंक बताया है। क्यों? इस सवाल के जवाब के लिए सबसे पहले जान लेते हैं कि दहेज क्या है? दहेज विवाह के समय वधु के परिवार की ओर से वर को दी जाने वाली संपत्ति है। इसमें नकद के साथ ही अन्य सामान भी शामिल है। इसे वर दक्षिणा के नाम से भी जाना जाता है। इसे उर्दू में जहेज के नाम से भी पुकारा जाता है।

दहेज निषेध अधिनियम-1961 की आवश्यकता क्यों पड़ी?

भारत देश में दहेज प्रथा का लंबा इतिहास रहा है। प्राचीन काल में विवाह के समय कन्या को वर के साथ अन्य सामान देकर विदा करने की प्रथा थी। इसे उसकी गृहस्थी जमाने में मदद करने के तौर पर दिया जाता था, किंतु कालांतर में इस प्रथा ने क्रूर रूप धारण कर लिया। वर पक्ष की ओर से हक से इसकी मांग की जाने लगी। वधु पक्ष की हैसियत कैसी है, इस पर ध्यान दिया जाना बंद हो गया। दहेज के लिए युवतियों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था।

इतना ही नहीं उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप तो हिंसा झेलनी ही पड़ी, उन्हें दहेज के लिए जलाया जाने लगा। इस प्रथा पर रोक लगाने के लिए 1961 में दहेज निषेध अधिनियम पारित किया गया। इसके तहत दहेज के लेन-देन को दंड के दायरे में लाया गया एवं सजा का प्रावधान किया गया।

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दहेज निषेध अधिनियम 1961 में क्या प्रावधान हैं?

दहेज निषेध अधिनियम 1961 के अंतर्गत वधु को सुरक्षा एवं न्याय प्रदान के लिए कई प्रावधान किए गए हैं-

धारा 1-

सबसे पहली बात दहेज लेने, दहेज देने, दहेज के लिए उकसाने अथवा इसके लेन-देन में सहभागी होने पर न्यूनतम पांच वर्ष की कैद एवं 15 हजार रूपए का जुर्माना हो सकता है।

धारा 3-

इस अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता महसूस करते हुए इसकी धारा 2 को 1984 एवं 1986 में संशोधित भी किया गया। इसमें दहेज को पुनः परिभाषित किया गया। इसकी परिभाषा निम्न प्रकार से दी गई-

“दहेज का अर्थ है प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से दी गई कोई संपत्ति अथवा मूल्यवान प्रतिभूति सुरक्षा अथवा उसे देने की सहमति-विवाह के एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को अथवा विवाह के किसी पक्ष को विवाह के समय, पहले अथवा बाद में देने के लिए सहमत होना”।

इसकी अन्य धाराएं इस प्रकार से हैं-

धारा 3-

दहेज लेने अथवा देने के अपराधी को न्यूनतम पांच वर्ष के कारावास के साथ ही न्यूनतम 15 हजार रूपये अथवा उपहार की कीमत, इनमें से जो भी अधिक हो, के जुर्माने की सजा लगाई जा सकती है। इसके अंतर्गत यह भी तय किया गया है कि विवाह के समय वर अथवा वधु को जो भी उपहार दिया जाएगा, उनकी नियमों के मुताबिक एक लिस्ट बनाई जाएगी। यह दहेज की परिभाशा से बाहर होगा।

धारा 4-

यदि किसी पक्षकार के मां-बाप, अभिभावक अथवा रिश्तेदार किसी भी तरह प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से दहेज की मांग करते हैं तो उन्हें कम से कम छह माह एवं अधिकतम दो वर्ष के कारावास की सजा। इसके साथ ही 10 हजार रूपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

धारा 4ए-

किसी भी व्यक्ति के द्वारा प्रकाशन अथवा मीडिया के जरिये अपने पुत्र अथवा पुत्री के विवाह के एवज में व्यवसाय, संपत्ति अथवा हिस्से का कोई भी प्रस्ताव दहेज की ही श्रेणी में आता है। ऐसे में संबंधित व्यक्ति को न्यूनतम छह माह एवं अधिकतम पांच वर्ष का कारावास हो सकता है। इसके साथ ही उस पर 15 हजार रूपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

धारा 6-

वधु के अतिरिक्त यदि किसी अन्य व्यक्ति को दहेज मिलता है तो उसे तीन माह के भीतर वधु के खाते में रसीद संग जमा करना होता है। यदि वधु नाबालिग है तो उसके बालिग होने के तीन माह के भीतर संपत्ति को ट्रांसफर करना होगा। यदि वधु की इस तरह के प्रापर्टी हस्तांतरण से पूर्व ही मृत्यु हो जाती है तो समान शर्तों के साथ प्रापर्टी उसके उत्तराधिकारी को हस्तांतरित कर दी जाएगी। ऐसा न होने पर दहेज अधिनियम के अंतर्गत इसे दंडनीय माना जाएगा।

धारा 8ए –

यदि घटना के एक वर्ष के भीतर शिकायत की गई हो तो कोर्ट पुलिस रिपोर्ट अथवा वादी द्वारा शिकायत किए जाने पर अपराध का संज्ञान ले सकती है।

धारा 8बी –

इस धारा के अंतर्गत प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकार द्वारा दहेज निषेध पदाधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इस पदाधिकारी पर दहेज से संबंधित नियमों का अनुपालन कराने अथवा दहेज की मांग के लिए उकसाने, लेने से रोकने अथवा अपराध कारित करने संबंधित साक्ष्य जुटाने का जिम्मा रहेगा।

दहेज निषेध अधिनियम में महिला आयोग ने कुछ बदलावों की सिफारिश की

दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों को और अधिक धारदार बनाने हेतु राष्ट्रीय महिला आयोग (national women commission) अर्थात एनडब्ल्यूसी (NWC) ने कुछ बदलावों की भी सिफारिश की थी। इन सिफारिशों पर एक अंतर मंत्रालयी बैठक (inter ministry meeting) में विचार विमर्श किया गया तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय की सलाह से दहेज निषेध संशोधन विधेयक 2010 की रूपरेखा तैयार की गई। इसमें यह व्यवस्थाएं की गईं –

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  • 1. घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के लिए नियुक्त सुरक्षा अधिकारियों को दहेज सुरक्षा अधिकारी का दायित्व निभाने को भी अधिकृत किया जाए।
  • 2. स्थायी अथवा अस्थायी तौर पर महिला जहां भी रह रही है, उसे वहीं से दहेज की शिकायत दर्ज करने की इजाजत हो।
  • 3. दहेज देने के लिए कम एवं दहेज लेने के लिए अधिक दंड की व्यवस्था हो। ऐसा इसलिए क्योंकि वधु के माता-पिता अपनी मर्जी के लिए खिलाफ दहेज के लिए मजबूर किए जाते हैं। यानी न चाहते हुए भी उन्हें वर पक्ष को दहेज देना पड़ता है।
  • 4. वधु पक्ष को शिकायत करने से हतोत्साहित करने के लिए भी समान दंड की व्यवस्था हो।
  • 4. स्वैच्छिक तौर पर दिए गए उपहारों एवं दबाव अथवा मजबूरी वश दिए गए उपहारों में साफ साफ अंतर किया जाए।
  • 5. वर वधु के लिए शपथ पत्र के फार्मेट में विवाह के संबंध में लिए एवं दिए गए उपहारों की सूची बनाई जाए। इसके साथ ही दहेज निषेध अधिकारी द्वारा सूची को नोटरी के माध्यम से प्रमाणित कराया जाए।
  • 6. उपरोक्त नियमों का अनुपालन न किए जाने पर वर, वधु एवं उनके अभिभावकों के लिए दंड का प्रावधान हो।

दहेज के केस में फैसले का अधिकार फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट को

दोस्तों, दहेज के केस में फैसले का अधिकार मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अथवा प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट को ही होता है। इतना ही नहीं, दहेज के अपराध का संज्ञान मजिस्ट्रेट स्वयं भी ले सकता है।

दहेज प्रथा का समाज एवं कन्याओं पर प्रभाव –

आज दहेज प्रथा की वजह से समाज पर बुरा असर पड़ा है। इन्हें इस प्रकार गिनाया जा सकता है-

  • 1. दहेज प्रथा का सबसे बड़ा एवं महत्वपूर्ण असर यह है कि महिलाओं को दूसरे दर्जे का प्राणी माना जाता है।
  • 2. लड़कियों के साथ शिक्षा एवं अन्य सुविधाओं को लेकर भेदभाव किया जाता है।
  • 3. दहेज देने में माता पिता के सक्षम न होने की वजह से कई कन्याओं अविवाहित रहने के लिए विवश होना पड़ता है।
  • 4. अधिक दहेज न देने की स्थिति में युवतियों को ससुराल में प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। कई मामलों में उनकी मौत तक हो जाती है।
  • 5. दहेज देने के चक्कर में कई युवतियों के मायके वाले कर्जदार हो जाते हैं। वे जीवनभर कर्ज की चक्की में पिसते रहते हैं। कई अभिभावक इस कारण तनाव में जीवन गुजारने पर विवश होते हैं।
  • 6. कन्या भ्रूण हत्या को भी इस प्रथा की वजह से बढ़ावा मिलता है।

दहेज में ली गई धन-संपत्ति ना लौटाने पर सजा [Punishment for not returning money and property taken in dowry]

यदि दहेज में ली गई धन-संपत्ति वापस नहीं की जाती है तो दोषी को निम्न सजा हो सकती है –

  • 6 महीने से 2 साल तक की जेल
  • 5000 से ₹10000 तक जुर्माना या फिर जुर्माना और जेल दोनों

किन परिस्थितियों में हुई मृत्यु को दहेज हत्या माना जाएगा?

यदि नीचे बताई गई परिस्थितियों में किसी लड़की की मृत्यु हो जाती है तो उसे दहेज हत्या माना जाएगा –

  • यदि किसी लड़की को मृत्यु से पहले दहेज की मांग की गई थी। और उसे दहेज के लिए लगातार तंग किया जा रहा था। तो ऐसी परिस्थिति में लड़की की होने वाली मृत्यु को दहेज हत्या के रूप में माना जाएगा।
  • इसके साथ ही लड़की की मृत्यु शादी के 7 साल के अंदर हो गई हो।
  • लड़की की मृत्यु असाधारण मौत हो।

दहेज हत्या के दोषी के लिए क्या सजा है?

ईद किसी को दहेज हत्या के लिए दोषी पाया जाता है। और उसके खिलाफ की गई शिकायत सही साबित होती है तो दहेज हत्या के दोषियों को निम्नलिखित सजाएं दी जा सकती हैं –

  • कम से कम 7 साल की जेल
  • या फिर उम्रकैद

दहेज हत्या के मामले में क्या कार्रवाई करनी चाहिए?

यदि आपके किसी सगे-संबंधी, नाते-रिश्तेदार में या आसपास कोई दहेज हत्या का मामला आता है तो आपको निम्न कार्रवाई करनी चाहिए –

  • दहेज हत्या की सूचना मिलते ही आपको नजदीक की मजिस्ट्रेट को तुरंत इसकी जानकारी देनी चाहिए।
  • जिसके पश्चात पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर जाकर मृत्यु के कारणों की जांच पड़ताल करेंगे।
  • पुलिस द्वारा शव का पोस्टमार्टम करा कर मृत्यु के कारणों का पता लगाया जाएगा।
  • इसके साथ ही पुलिस घटनास्थल पर दो प्रतिष्ठित जाने-माने व्यक्तियों के सामने जांच करके एक रिपोर्ट बनाएगी रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी एवं वहां पर उपलब्ध लोगों की सिग्नेचर लिए जाएंगे।

दहेज लेने आ देने की क्या सजा है?

दहेज लेने आ देने पर आपको नीचे बताई गई सजाएं हो सकती हैं –

  • 5 साल की जेल
  • ₹15000 का जुर्माना
  • दहेज की रकम अगर 15,000 से ज्यादा हो तो उस रकम के बराबर जुर्माना

दहेज की शिकायत कौन कर सकता है?

किसी महिला को दहेज लेने देने अथवा दहेज के लिए उत्पीड़न किए जाने पर निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है –

  • दहेज की शिकायत दहेज की मांग से पीड़ित महिला उनके माता-पिता अथवा अन्य रिश्तेदार इसकी शिकायत कर सकते हैं।
  • इसके साथ ही दहेज उत्पीड़न की शिकायत कोई पुलिस अधिकारी अथवा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई स्वयंसेवी संस्था भी कर सकती हैं।
  • दहेज उत्पीड़न के मामले में यदि अदालत को जानकारी मिलती है। तो वह खुद भी कार्रवाई शुरू कर सकती है।
  • दहेज के मामले में रिपोर्ट लिखाने की कोई समय सीमा नहीं निर्धारित है। इसकी शिकायत कभी भी की जा सकती है। लेकिन कोशिश करनी चाहिए। कि आप जल्द से जल्द मामले की शिकायत की जाए
  • यदि एक बार दहेज मामले की शिकायत अथवा मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। तो समझौता होने पर भी शिकायत वापस नहीं ली जा सकती है।

दहेज लेने देने में सहायता करने वालों के लिए सजा क्या है?

यदि कोई व्यक्ति रिश्तेदार अथवा शादी में सहायता करने वाले बिजोलिया दहेज लेने छोड़ देने की बात करते हैं। अथवा दहेज लेने देने में सहायता करते हैं। तो ऐसे व्यक्तियों को भी कानून के दायरे में लाया गया है। ऐसे व्यक्तियों के लिए कम से कम 5 साल तक की जेल अथवा ₹15000 तक का जुर्माना हो सकता है।

दहेज विज्ञापन देने के लिए क्या सजा है?

आजकल ऑनलाइन / ऑफलाइन और अखबारों में शादी के रिश्ते के लिए काफी विज्ञापन दिए जाते हैं। यदि विज्ञापन में शादी के एवज में नगद धन-संपत्ति लेने देने की बात कही गई तो इस विज्ञापन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा सकती हैं। ऐसे विज्ञापन सेवा प्रदान करने वाली एजेंसी को निम्नलिखित सजा हो सकती है –

  • कम से कम 6 महीने से लेकर 5 साल तक की जेल
  • ₹15000 तक का जुर्माना

क्या शादी में दिए जाने वाले सभी उपहार दहेज हैं?

शादी में अक्सर वधु वर पक्ष द्वारा एक दूसरे को काफी उपहार दिए जाते हैं। यह सारे उपहार दहेज की श्रेणी में नहीं आते हैं। लेकिन इन उपहारों को दिए जाने के बारे में निम्नलिखित नियम है। जिनका पालन करना आवश्यक है –

  • दिए गए बहारों की एक लिखित सूची बनाई जाए
  • सूची में दिए गए उपहारों की अनुमानित अथवा वास्तविक कीमत का विवरण हो
  • सूची पर वर तथा वधू के हस्ताक्षर किए जाएं

स्त्री धन क्या है? [What is feminine wealth?]

अक्सर लोग स्त्री धन के बारे में बात करते हैं। लेकिन काफी लोग इसका वास्तविक आज तुम नहीं समझ पाते हो स्त्री धन से आशय है कि शादी से पहले शादी के समय या शादी के बाद लड़की को दिए गए उपहार या कोई भी संपत्ति उसकी अपनी संपत्ति है। इसी को स्त्री धन कहा जाता है। स्त्रीधन के लिए निम्न नियम बनाए गए हैं।

  • स्त्री धन पर सिर्फ लड़की का अधिकार होगा।
  • वधू अपना स्त्रीधन जिसे चाहे दे सकती है।
  • शादी में मिला उपहार एवं धन लड़की के अलावा किसी दूसरे के पास केवल अमानत के तौर पर है। साथी उस व्यक्ति की यह जिम्मेदारी है। कि शादी के सामान अथवा संपत्ति क्यों व सुरक्षित रखें और मांगे जाने पर वह लड़की को वापस करें
  • जिस व्यक्ति के पास सामान अमन के तौर पर रखा है। उससे सामान्य संपत्ति वापस लेने से पहले लड़की की किसी भी कारण से मृत्यु हो शक्ति है। तो ऐसी परिस्थिति में लड़की के वारिस उस व्यक्ति से संपत्ति मांग सकते हैं।
  • यदि ऐसे व्यक्ति द्वारा सामान अथवा संपत्ति वापस नहीं की जाती है। तो उसके खिलाफ अमानत में खयानत का अपराधिक मामला दर्ज कराया जा सकता है। जिसे नियम के अनुसार सजा भी दी जा सकती है।

दहेज प्रथा को जड़ से कैसे नष्ट कैसे किया जा सकता है?

दहेज प्रथा को जड़ से नष्ट करने के लिए सबसे आवश्यक है देश के नागरिकों की मानसिकता में परिवर्तन लाया जाना। यदि माता पिता अपनी कन्या को आत्मनिर्भर बनाएं एवं विवाह को जीवन के लिए बेहद आवश्यक संस्कार न समझें, बेटी को पराया धन मानने की अवधारणा से बाहर निकलें तो इस समस्या का काफी हद तक निवारण संभव है।

सरकारों की ओर से दुल्हन की दहेज है, जैसे कई स्लोगन बनाए गए हैं। इन्होंने लोगों में चेतना अवश्य जगाई है, किंतु अभी भी दहेज को लेकर लोगों के ब्रेनवाश में लंबा समय लग सकता है। यह कहना अनुचित न होगा कि कई लोगों ने दहेज को एक स्टेटस सिंबल (status simble) भी बना लिया है।

लड़के को विवाह में कितना दहेज मिला है, वे इस बात का खुले स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करते हैं। इससे अन्य अभिभावकों पर भी अपनी कन्या को अधिक से अधिक दहेज देने एवं लड़के के अभिभावकों के भीतर अधिक से अधिक दहेज लेने की इच्छा बवलती होती है, जिसका प्रतिकार बेहद आवश्यक है।

देश में केरल एवं पंजाब में दहेज का सर्वाधिक चलन –

केरल देश का सर्वाधिक साक्षर राज्य माना जाता है, किंतु वास्तविकता यह है कि केरल एवं पंजाब में दहेज का सर्वाधिक चलन है। वहीं, उड़ीसा, पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र जैसे अनेक राज्यों में दहेज मांगे जाने के चलन में कर्मी दृष्टिगोचर हुई है। कुछ ही समय पूर्व विश्व बैंक के एक अध्ययन में इस संबंध में खुलासा हुआ है। अध्ययन सन् 1960 से लेकर सन् 2008 तक यानी कुल 48 वर्ष के दौरान ग्रामीण भारत में हुई 40 हजार शादियों पर आधारित है।

हमारे देश भारत के 17 राज्यों पर हुए अध्ययन की इस रिपोर्ट में पंजाब का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लड़की का परिवार है गरीब है, किंतु बगैर दहेज शायद ही कोई विवाह होता हो। इस रिपोर्ट एक और रोचक बात सामने आई है और वो ये कि गांवों में दहेज के मामलों में कमी दर्ज की गई है। इसे खाप पंचायतों का प्रभाव भी माना जा सकता है।

उत्तर प्रदेश में एवं हरियाणा में अनेक खाप पंचायतों ने इस दिशा में काफी सख्त रूख अपनाया हुआ है। कभी यहां भी दूल्हे के कार्य, नौकरी आदि के हिसाब से उसकी शादी के रेट तय किए जाते थे। मसलन लड़का सरकारी नौकरी में है तो उसका रेट ज्यादा होगा।

इसी तरह प्रशासन, पुलिस की नौकरी, डाक्टर एवं इंजीनियर आदि के लिए भी अलग अलग रेट तय होते थे। लेकिन अब इस प्रथा में काफी हद तक कमी देखने को मिली है। यानी दहेज के लेन देन में कमी। यह प्रथा अभी भी पुख्ता तरीके से समाज में अपने कदम जमाए हुए है।

दहेज निषेध अधिनियम 1961 पीडीएफ डाउनलोड करें –

यदि आपको दहेज निषेध अधिनियम 1961 की पीडीएफ फाइल की आवश्यकता है। तो आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके यह आदेश पीडीएफ फाइल में डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रख सकते हैं । और इसका उपयोग कर सकते हैं-

दहेज की शिकायत किससे और कहाँ करें?

दहेज उत्पीड़न की शिकायत प्रताड़ित महिला उनके सगे-संबंधियों एवं आसपास के व्यक्तियों द्वारा नीचे दिए गए टोल फ्री नंबर पर कर सकते हैं –

  • अपने नजदीकी पुलिस थाने से
  • नजदीकी कार्यपालक मजिस्ट्रेट से
  • राज्य या राष्ट्रीय महिला आयोग से
  • तहसील, जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क परामर्श/विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
टोल फ्री/हेल्पलाइननम्बर
समाधान शिकायत निवारण प्रकोष्ठ18001805220
वूमेन्स पावर लाइन1090 
पुलिस100 
निःशुल्क विधिक सहायता 18004190234, 15100

दहेज निषेध अधिनियम-1961 से जुड़े प्रश्नोत्तर-

दहेज से क्या आशय है?

दहेज से आशय विवाह के समय वधु पक्ष की ओर से वर पक्ष की ओर से दी जाने वाली संपत्ति अथवा अन्य उपहारों से है।

क्या दहेज के अन्य नाम भी हैं?

जी हां, दहेज को वर दक्षिणा कहकर भी पुकारा जाता है। इसे अंग्रेजी में dowry कहते हैं।

दहेज निषेध अधिनियम 1961 क्यों पारित किया गया था?

देश में दहेज निषेध अधिनियम 1961 अपने नाम के अनुसार दहेज प्रथा के उन्मूलन के लिए पारित किया गया था।

क्या दहेज प्रथा हमारे देश में जड़ से समाप्त हो चुकी है?

जी नहीं, दहेज प्रथा का हमारे देश में अभी समूल नाश नहीं हो सका है।

क्या दहेज निषेध अधिनियम-1961 में संशोधन भी हुए हैं?

जी हां, समय की आवश्यकता को देखते हुए दहेज निषेध अधिनियम-1961 में भी बदलाव किए गए हैं। बदलाव का ब्योरा हमने उपरोक्त पोस्ट में दिया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में दहेज के मामलों में कमी क्यों आई हैं?

पश्चिम उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा आदि राज्यों में खाप पंचायतें इस संबंध में कई सख्त कदम उठा रही हैं। इस वजह से इन राज्यों में दहेज के मामलों में कमी आई है।

पाठकों, हमने आपको उपरोक्त पोस्ट में दहेज निषेध अधिनियम-1961 के विभिन्न प्रावधानों के विषय में अवगत कराने की कोशिश की है। आप इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए अधिक से अधिक शेयर करें ताकि आम जनता इन प्रावधानों के प्रति जागरूक हो सके एवं दहेज प्रथा का समूल नाश हो सके।

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