धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष में क्या अंतर है? | Dharmnirpeksh aur panthnirpeksh mein antar

Dharmnirpeksh aur panthnirpeksh mein antar : भारत एक बहुत ही विशाल देश है जहाँ कई धर्मों को मानने वाले लोग एक साथ रहते हैं। भारत देश का सबसे बड़ा और मुख्य धर्म हिन्दू है लेकिन इसी के साथ ही यहाँ अन्य धर्मों को मानने वाले लोग भी रहते हैं। इन धर्मों में जैन, बौद्ध, सिख, पारसी, यहूदी, ईसाई, इस्लाम के नागरिक आते हैं। इसी तरह ही हिन्दू धर्म में भी कई तरह की जातियां या वर्ग हैं जैसे कि ब्राह्मण, राजपूत, अग्रवाल, जाट, सुनार इत्यादि। इसी तरह की जातियां अन्य धर्म में भी (Panthnirpeksh aur dharmnirpeksh me antar) है।

भारत देश विविधताओं से भरा हुआ देश है जहाँ कई धर्मों, जातियों, भाषाओं, संस्कृतियों को मानने वाले लोग एक साथ रहते हैं। जब भारत देश स्वतंत्र हुआ था तब उसके संविधान में धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष जैसे कोई शब्द नहीं थे लेकिन 73वें संविधान संशोधन के जरिये इन दोनों शब्दों को ही संविधान का अंग बना लिया गया। आज इन शब्दों का उपयोग भारत देश की हरेक राजनीतिक पार्टी के द्वारा किया जाता है जो राजनीति के प्रमुख शब्द तक बन चुके (Dharmnirpeksh aur panthnirpeksh in Hindi) हैं।

अब यदि हम धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष के अंग्रेजी शब्द की बात करें तो इसे सेक्युलर के नाम से बोला जाता है किन्तु इन दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर देखने को मिलता है। अब कहने को तो इसे हम अंतर भी कह सकते हैं लेकिन यह एक ही चीज़ भी कही जा सकती है। ऐसे में धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष में क्या कुछ अंतर होता है और इसे किस तरह से परिभाषित किया जा सकता है, आइये उस पर एक नज़र डाल लेते (Difference between dharmnirpeksh and panthnirpeksh in Hindi) हैं।

धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष में क्या अंतर है? (Dharmnirpeksh aur panthnirpeksh mein antar)

धर्मनिरपेक्ष में धर्म शब्द का उपयोग किया जाता है जबकि पंथनिरपेक्ष में पंथ शब्द का। अब जो धर्म होता है, उसके बारे में किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सभी किसी ना किसी धर्म का पालन करते हैं। वहीं पंथनिरपेक्ष शब्द में पंथ शब्द का अर्थ विभिन्न जातियों, सम्प्रदाय इत्यादि से होता है। ऐसे में दोनों के बीच का अंतर समझना है तो पहले आपको धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष की परिभाषा को विस्तार से समझना (What is dharmnirpeksh and panthnirpeksh in Hindi) होगा।

Dharmnirpeksh aur panthnirpeksh mein antar

कहने का अर्थ यह हुआ कि इस लेख में हम आपको धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष के बीच के अंतर को तो समझायेंगे ही लेकिन उसके लिए पहले आपको दोनों की क्या कुछ परिभाषा होती है या इससे हमारा क्या तात्पर्य होता है, उसके बारे में जान लेना सही रहेगा। इसे समझ कर ही आप धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष के बीच के अंतर को सही रूप में समझ पाएंगे। तो आइये जाने धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष क्या होता (Dharmnirpeksh aur panthnirpeksh kya hai) है।

धर्मनिरपेक्ष क्या है? (Dharmnirpeksh kya hai)

अंग्रेजी में धर्मनिरपेक्ष को सेक्युलर कहते हैं जो आज के समय में हिन्दू धर्म की अवहेलना और मुस्लिम तुष्टिकरण का अभिप्राय बनती जा रही है जबकि वास्तविकता बहुत अलग है। धर्मनिरपेक्ष का अर्थ कहीं से भी हिन्दू धर्म की अवहेलना करना और मुस्लिम या किसी अन्य ख़ास वर्ग को खुश करने से नहीं होता है बल्कि यह तो सभी धर्मों के लोगों को एक समान रूप से देखना होता (What is dharmnirpeksh in Hindi) है।

अब भारत देश में कई धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। हर 10 वर्ष में भारत सरकार अलग अलग धर्मों के लोगों का आंकड़ा भी जारी करती है और यह बताती है कि भारत देश में किस धर्म को मानने वाले लोग कितने प्रतिशत हैं या उनकी कुल जनसँख्या में कितनी भागीदारी है। ऐसे में भारत के कुछ प्रमुख धर्म और उनका आंकड़ा इस प्रकार है:

  • हिन्दू – 79.80 प्रतिशत
  • मुसलमान – 14.23 प्रातिशत
  • ईसाई – 2.30 प्रतिशत
  • सिख – 1.72 प्रतिशत
  • बौद्ध – 0.70 प्रतिशत
  • जैन – 0.36 प्रतिशत
  • अन्य – 0.9 प्रतिशत

इस तरह से भारत देश में लगभग 80 प्रतिशत हिन्दू धर्म के लोग हैं तो वहीं 15 प्रतिशत के आसपास मुसलमान रहते हैं और बाकि 5 प्रतिशत में अन्य सभी धर्मों के लोग आ जाते हैं। ऐसे में भारत के संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द को जोड़कर इस भावना को प्रधानता दी गयी है कि यहाँ पर किसी भी व्यक्ति को उसके धर्म के अनुसार प्रताड़ित नहीं किया जाएगा, उसके साथ धर्म के नाम पर किसी तरह का भेदभाव नहीं किया (Dharmnirpeksh ke bare mein bataiye) जाएगा।

कहने का अर्थ यह हुआ कि धर्मनिरपेक्ष का अर्थ होता है हर धर्म को एक समान दृष्टि से देखा जाना या सर्वधर्म की भावना को रखना। भारत सरकार, राज्य सरकार, प्रशासन, न्यायपालिका, पत्रकारिता या अन्य किसी भी सरकारी या निजी विभाग, कंपनी, संस्था, उद्योग इत्यादि में किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। यदि कहीं पर ऐसा होता है तो उस व्यक्ति के साथ कानूनी कार्यवाही हो सकती है।

हालाँकि यह व्यक्ति को अपने निजी कार्यों को करने से नहीं रोक सकती है। कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि आपको अपना घर किराए पर देना है या किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखना है तो यह आप पर निर्भर करेगा कि आप किस धर्म के व्यक्ति को नौकरी पर रखेंगे लेकिन आप किसी व्यक्ति को सार्वजनिक या लिखित रूप में इसलिए नहीं निष्कासित कर सकते हैं कि वह किसी अन्य धर्म को मानता है। यही धर्मनिरपेक्ष की परिभाषा होती है जो भारत देश इतने टुकड़े होने के बाद भी सहता आ रहा है और पता नहीं कब तक सहेगा।

पंथनिरपेक्ष क्या है? (Panthnirpeksh kya hai)

अब जब आपने धर्मनिरपेक्ष शब्द की परिभाषा को जान लिया है तो बारी आती है पंथनिरपेक्ष शब्द के बारे में जानने की। यदि आप गूगल पर पंथनिरपेक्ष शब्द का अंग्रेजी नाम ढूढेंगे तो उसके लिए आपको धर्मनिरपेक्ष शब्द की तरह ही सेक्युलर शब्द ही दिखाई देगा जो एक सीमा तक सही भी है लेकिन पूरी तरह से नहीं। हालाँकि दोनों की मूल भावना तो एक जैसी ही है लेकिन दोनों के बीच एक महीन अंतर देखने को मिलता है जिसके बारे में अब हम आपको बताने वाले (What is panthnirpeksh in Hindi) हैं।

पंथनिरपेक्ष शब्द में पंथ शब्द का अर्थ धर्म से ना होकर बल्कि एक ही धर्म में अलग अलग मतों से लेकर होता है। इसे हम हिन्दू धर्म का उदाहरण देकर समझाने का प्रयास करते हैं। हिन्दू धर्म तो सनातन काल से चला आ रहा है और इसमें कई तरह की संस्कृतियों और मतों को मानने वाले लोग सदियों से एक साथ रहते आ रहे हैं। अब आपको हिन्दू धर्म में कई तरह की जातियां सहित अन्य अन्य मत भी देखने को मिलेंगे।

हिन्दू धर्म में भक्ति या संप्रदाय के आधार पर कुछ प्रमुख मत हैं:

  • शैव
  • वैष्णव
  • शाक्य
  • स्मार्त
  • वैदिक

इसी तरह यदि आप वर्ण के आधार पर देखेंगे तो कुल 4 प्रकार के वर्ण बताये गए हैं, जो हैं:

  • ब्राह्मण
  • क्षत्रिय
  • वैश्य
  • शुद्र

अब इसी तरह इन वर्ण में भी कई तरह की जातियां हो जाती है, ऐसे में कुछ जातियों के नाम हैं:

  • राजपूत
  • जाट
  • गुर्जर
  • अग्रवाल
  • खंडेलवाल
  • सुनार
  • मीणा इत्यादि।

ठीक इसी तरह इन जातियों में भी अलग अलग उपनाम की जातियां हो जाती है। अब ऐसे में ही हम वैश्य वर्ण की अग्रवाल जाति के उपन्म देखें तो वे हैं:

  • बंसल
  • मित्तल
  • गर्ग
  • गुप्ता
  • कंसल 
  • गोयल इत्यादि।

इस तरह एक ही धर्म में अलग अलग मतों को मानने वाले कई तरह के लोग होते हैं। अब यह केवल हिन्दू धर्म में ही नहीं अपितु इस्लाम, ईसाई धर्म इत्यादि में भी देखने को मिलते हैं। उदाहरण के तौर पर इस्लाम धर्म में शिया, सुन्नी इत्यादि जातियां होती है तो ईसाई धर्म में भी कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट इत्यादि जातियां देखने को मिल जाती (Panthnirpeksh in Hindi) है।

तो पंथनिरपेक्ष शब्द का अर्थ होता है वह किसी एक धर्म के अंदर किसी भी तरह का भेदभाव ना करे। कहने का अर्थ यह हुआ कि भारत देश में हिन्दू धर्म के अंदर ही ब्राह्मण या वैश्य समुदाय में किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा और सभी सम्प्रदायों, जातियों, वर्णों इत्यादि को एक ही दृष्टि से देखा जाएगा। देश में धर्म के अंदर किसी भी जाति के साथ भेदभाव नहीं करना ही पंथनिरपेक्ष शब्द का परिचायक है।

धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष के बीच मूल अंतर (Dharmnirpeksh or panthnirpeksh me antar)

अब जब आप धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष दोनों शब्दों के बारे में जान चुके हैं तो अब बारी आती है दोनों के बीच अंतर को पहचानने की। आपने अवश्य ही धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष की परिभाषा को जान लिया है लेकिन फिर भी आपको इन दोनों के बीच के अंतर को समझने में परेशानी हो रही होगी। ऐसे में अब हम चरण दर चरण धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष शब्दों के बीच के अंतर को आपके सामने रखने जा रहे हैं।

  • जब धर्मनिरपेक्ष की बात आती है तो उसमें पंथनिरपेक्ष भी समाहित हो जाता है। कहने का अर्थ यह हुआ कि धर्मनिरपेक्ष शब्द की व्याख्या के अंतर्गत पंथनिरपेक्ष भी आ जाता है जबकि पंथनिरपेक्ष की व्याख्या में धर्मनिरपेक्ष आये, यह आवश्यक नहीं है।
  • जो राष्ट्र धर्मनिरपेक्ष होता है, वह आवश्यक तौर पर पंथनिरपेक्ष होगा ही होगा लेकिन यदि कोई राष्ट्र पंथनिरपेक्ष है तो यह आवश्यक नहीं है कि वह धर्मनिरपेक्ष भी हो।
  • उदाहरण के तौर पर यदि भारत देश हिन्दू धर्म के लिए पंथनिरपेक्ष होता लेकिन धर्मनिरपेक्ष नहीं होता तो यहाँ पर हिन्दू धर्म के सभी लोगों को एक समान दृष्टि से देखा जाता, फिर चाहे वे हिन्दू धर्म की किसी भी जाति, वर्ण या समुदाय से क्यों ना हो लेकिन अन्य धर्मों के व्यक्तियों को महत्व नहीं दिया जाता क्योंकि तब भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं होता।
  • वहीं यदि कोई देश धर्मनिरपेक्ष होता है तो वहां तो सभी धर्मों के लोगों को एक जैसा महत्व देने की बात कही गयी है फिर चाहे वे किसी भी नीति या संस्कृति को क्यों ना मानते हो। ऐसे में वह अपने आप ही पंथनिरपेक्ष भी बन जाता है।
  • अब आप इसका उदाहरण ईराक, ईरान, सऊदी अरब इत्यादि देशों को देखकर ले सकते हैं। यहाँ कुछ देशों में सुन्नी मुसलमान बहुतायत में है तो किसी देश में शिया मुसलमान बहुतायत में है। ऐसे में ये राष्ट्र ना ही धर्मनिरपेक्ष हैं और ना ही पंथनिरपेक्ष क्योंकि यहाँ एक ही धर्म में भी जातियों के आधार पार भेदभाव किया जाता है।
  • अब ईरान शिया प्रधान देश है और वहां पर इसी जाति को ही महत्व दिया जाता है जबकि सऊदी अरब सुन्नी जाति को महत्व देता है।
  • ऐसे में धर्मनिरपेक्ष के अंतर्गत धर्म व पंथ दोनों को ही कवर कर लिया जाता है जबकि पंथनिरपेक्ष के अंतर्गत केवल पंथ को ही कवर किया जाता है और धर्म का इससे कोई लेनादेना नहीं होता है।

आशा है कि अब आपको धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष के बीच के महीन अंतर को समझने में मदद मिली होगी। विश्व के सभी देश किसी ना किसी धर्म का पालन करते हैं। पूरी दुनिया में चार प्रमुख धर्म हैं और वे हैं हिन्दू, ईसाई, बौद्ध व इस्लाम। ऐसे में हिन्दू धर्म को छोड़कर सभी अन्य तीन धर्मों के एक नहीं बल्कि कई देश हैं और इतना ही नहीं, इन धर्मों की जातियों के आधार पर भी कई देश बने हुए हैं।

वहीं हिन्दू धर्म के नाम पर दुनिया में केवल दो ही देश थे जो थे भारत व नेपाल किन्तु अब उन पर भी सेक्युलर अर्थात धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष का ठप्पा लग चुका है। ऐसे में आज के समय में पूरी दुनिया में हिन्दू देश कोई भी नहीं है और भारत व नेपाल को धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में जाना जाता है।

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धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष में क्या अंतर है – Related FAQs 

प्रश्न: पंथनिरपेक्षता का अर्थ क्या होता है?

उत्तर: देश में धर्म के अंदर किसी भी जाति के साथ भेदभाव नहीं करना ही पंथनिरपेक्ष शब्द का परिचायक है।

प्रश्न: धर्मनिरपेक्ष कितने देश हैं?

उत्तर: धर्मनिरपेक्ष देश अब तक लगभग 96 हैं।

प्रश्न: धर्म और पंथ में क्या अंतर है?

उत्तर: धर्म और पंथ के बीच के अंतर को हमने ऊपर के लेख में विस्तार से समझाया है जो आप पढ़ सकते हो।

प्रश्न: धर्मनिरपेक्ष देश कौन सा है?

उत्तर: भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष के बीच क्या अंतर है यह जान लिया है। हमने आपको धर्मनिरपेक्ष और पंथनिरपेक्ष क्या है इसके बारे में पूर्ण जानकारी भी इस लेख के देने का प्रयास किया है। आशा है कि जो जानकारी लेने के लिए आप इस लेख पर आए थे वह आपको मिल गई होगी। फिर भी यदि कोई प्रश्न आपके मन में शेष है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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