डिटेंशन सेंटर क्या है? भारत में डिटेंशन सेंटर कहां हैं? पूरी जानकारी

What Is Detention Center In Hindi – दोस्तों, जैसा कि आप सब देख सुन रहे हैं। इस वक्त देश में राजनीतिक उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। बहुत अनिश्चितता का माहौल देश में घर कर गया है। पहले नागरिकता संशोधन विधेयक यानी कैब, फिर नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए, उसके बाद नेशनल पापुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर और अब डिटेंशन सेंटर को लेकर बवाल छिड़ा है। हर तरफ डिटेंशन सेंटर सबसे ज्यादा चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से नई दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली में डिटेंशन सेंटर का जिक्र किए जाने के बाद अचानक इस पर बवाल और बढ़ गया।

हर कोई Detention Center पर बात कर रहा है। जानकार सत्तासीन सरकार के एक मंत्री के सत्र के दौरान दिए आंकड़ों का हवाला देते हुए डिटेंशन सेंटर की संख्या बता रहे हैं, वहीं, प्रधानमंत्री के बयान पर बहस मुबाहिसे का दौर जारी है। दोस्तों क्या आप जानते हैं कि डिटेंशन सेंटर क्या होता है? Detention Center में किसे रखा जाता है और क्यों? या फिर भारत में कितने डिटेंशन सेंटर हैं? करता कहा नहीं? तो भी चिंता की कोई बात नहीं। आइए, हम आपको इस post के जरिए Detention Center के बारे में पूरी जानकारी दें। आपको करना बस यह है कि इस post को सिलसिलेवार पढ़ते जाना है। आइए शुरू करते हैं।

डिटेंशन सेंटर क्या है?

डिटेंशन सेंटर उस जगह को कहते हैं, जहां अवैध रूप से या यूं कह लीजिए कि गैर कानूनी रूप से (बगैर वैध दस्तावेज के) देश में घुसने वाले विदेशियों को उनकी पहचान हो जाने के बाद रखा जाता है। जब तक कि उन्हें उनके देश वापस नहीं भेज दिया जाता। इसे नजरबंदी केंद्र भी पुकारा जा सकता है। इस तरह के डिटेंशन सेंटर दुनिया के कई देशों में बनाए गए हैं। आपको यह भी बता दें कि विदेशी कानून 1946 की धारा 3 (2)(सी) के तहत भारत सरकार को यह अधिकार है कि वह विदेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेज सकती है और इस कानून की धारा 3 (2) (ई) के अंतर्गत राज्यों को भी अपने यहां डिटेंशन सेंटर बनाने का अधिकार है।

वीजा अवधि से अधिक समय तक देश में ठहरने वाले या फर्जी पासपोर्ट के जरिए देश में घुसने वाले लोगों को भी 1920 के पासपोर्ट एक्ट के मुताबिक भारत सरकार देश से सीधे निकाल सकती है । अवैध वीजा, पासपोर्ट या फिर वैध दस्तावेज के बिना देश में घुसे विदेशी नागरिकों के मामले में भारत सरकार को संविधान के अनुच्छेद 258 (1) और अनुच्छेद 239 के तहत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने की शक्ति प्रदान की गई है।

अवैध नागरिकों को क्यों रखा जाता है Detention Center में –

दूसरे देश से आने वाले अवैध नागरिकों को पहचान होने पर छह माह के भीतर फारेन ट्रिब्यूनल में अपनी बात रखने का मौका मिलता है। वह अदालत में भी जा सकते हैं। यहां से विदेशी घोषित किए जाने पर उन्हें Detention Center में रखा जाता है। सरकार उनके देश से उन्हें लेने के लिए वार्ता करती है। वापसी पर रजामंदी के बाद उन्हें डिटेंशन सेंटर से उनके देश डिपोर्ट कर दिया जाता है।

भारत में कितने डिटेंशन सेंटर हैं?

दोस्तों आपको बता दें कि भारत में इस वक्त नौ डिटेंशन सेंटर हैं। जिनमें से छह डिटेंशन सेंटर असम में हैं। और यह सब सेंट्रल जेल में बनाए गए हैं। यह प्रदेश में ग्वालीपाड़ा, तेजगढ़, जोरहाट, डिब्रूगढ़, सिल्वर और कोकराझार में बने हैं। इसके अलावा बंगलूरू, (कर्नाटक), गोवा और दिल्ली में एक-एक डिटेंशन सेंटर है। बंगाल में भी दो डिटेंशन सेंटर खोले जाने की मंजूरी दी जा चुकी है। आपको यह भी बता दें कि असम की छह जेलों के डिटेंशन सेंटरों में केवल एक हजार अवैध नागरिकों को रखे जाने की क्षमता थी, जबकि इसमें 1133 विदेशी घोषित नागरिकों को रखा गया है।

यह सूचना सरकार की ओर से इस साल 25 जून तक के नागरिकों की दी गई है। असम में पहले तीन सेंटर 2012 में बने गोली पड़ा कोकराझार सिलचर में आगे इसके बाद के 3 सेंटर इसी में कुल 1000 प्रवासियों को रखे जाने की सुविधा है जबकि हां उससे भी ज्यादा रह रहे हैं केंद्र सरकार ने विदेशी कानून की धारा 3 के तहत सभी राज्यों को डिटेंशन सेंटर बनाने का अधिकार दिया था उसी के तहत यह बनाए गए हैं। कुछ को माडल डिटेंशन सेंटर बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

कहां बन रहा भारत का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर?

डिटेंशन सेंटर क्या है? भारत में डिटेंशन सेंटर कहां हैं? पूरी जानकारी

भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर असम में ग्वालीपाड़ा जिले के मटिया में बन रहा है। इसका निर्माण बीते साल यानी 2018 के दिसंबर माह में आरंभ हुआ था। आपको यह भी बता दें कि इसका अब तक 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। बताया जाता है कि यह डिटेंशन सेंटर ढाई एकड़ जमीन पर बन रहा है, जिसमें तीन हजार लोगों को एक साथ रखा जा सकेगा। इसके अलावा महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग अलग सेल की व्यवस्था की गई है। आपको यह भी बता दें कि इसे 31 दिसंबर, 2019 तक बनना था, लेकिन अब बारिश और बाढ़ की वजह से इसमें देरी हो चुकी है 300 मजदूर इस निर्माण कार्य को पूरा करने में लगे हैं।

इसलिए अब इसके लिए जो 31 दिसंबर की डेडलाइन रखी गई थी, उसे बढ़ाकर अब 31 मार्च 2020 कर दिया गया है इसके निर्माण में कुल 46 करोड रुपए खर्च किया जा रहा है, जिस पैसे को केंद्र अपने पास से खर्च कर रहा है। बताया जाता है कि मटिया वाले इस सेंटर में चार-चार मंजिलों वाली 15 इमारतें बन रही हैं, जिनमें से 13 इमारतों में पुरुष रहेंगे, जबकि बाकी की 2 महिलाओं के लिए बनाई जा रही हैं। इस कैंपस में इतना ही नहीं स्कूल और अस्पताल का भी निर्माण किया जा रहा है, ताकि अगर कोई नागरिकता नहीं भी साबित कर सकता हो तो भी उसे इंसान के तौर पर मूलभूत सुविधाओं के लिए कम से कम दिक्कत ना उठानी पड़े।

अब तक कितने विदेशी घोषित हुए –

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि असम राज्य में सन् 1985 से लेकर इस साल अक्टूबर तक 1,29,000 लोगों को विदेशी घोषित किया जा चुका है। लेकिन इनमें करीब 72,000 लोगों का कोई पता ठिकाना ठिकाना नहीं है । जबकि असम एनआरसी की सूची से 19 लाख लोगों को बाहर रखा गया है। ये 72,000 लोग देश के अलग-अलग प्रदेशों में पहुंच गए हैं या कहां हैं, उनका किसी के पास कोई भी रिकॉर्ड ही नहीं है। जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं असम की जेलों में बनाए गए छह Detention Center में 1133 विदेशी अवैध नागरिकों को रखा गया है।

दुनिया का पहला डिटेंशन सेंटर कहां खुला था?

दोस्तों, आपको बता दें कि दुनिया का पहला डिटेंशन सेंटर आज से करीब छह सौ साल पहले 14वीं सदी में फ्रांस के चार्ल्स पंचम ने बनवाया था। उस वक्त इसमें युद्ध बंदियों को या दूसरे देश से घुसने वाले विदेशी लोगों को रखा जाता था। 1789 की फ्रांस क्रांति के दौरान यह आंदोलन का केंद्र बिंदु रहा। हालांकि बाद में इसे ढहा दिया गया। अब यहां द पैलेस बेसिल की इमारत खड़ी है। दोस्तों, आइए अब आपको बताते हैं कि यूएसए यानी अमेरिका में पहला डिटेंशन सेंटर कब बना। मित्रों, इसे सन् 1892 में बनाया गया था। न्यूजर्सी में इसको बनाया गया था। इसे एलिस आईलैंड भी पुकारा जाता है।

अब बात करें यूरोप की। यहां पर डिटेंशन सेंटर 1970 में बनाया गया। दक्षिण अफ्रीका में डिटेंशन सेंटर 1982 में खोला गया। दोस्तों, आपको यह भी बता दें कि अमेरिका में पहला फैमिली डिटेंशन सेंटर वहां पर 2014 में बना है। जिसको राष्ट्रपति बराक ओबामा की सरकार के वक्त बनवाया गया। आपको इस बात की भी जानकारी दी जानी भी जरूरी है कि अमेरिका से बड़ी संख्या में दूसरे देश के नागरिकों को वापस भेजने का काम किया गया है। अगर हम लोग संख्या की बात करें तो वह 30 लाख से भी अधिक बताई जाती है। इसी तरह दुनिया के अन्य देशों में भी डिटेंशन सेंटर का निर्माण किया गया है।

दुनिया का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर कहां है?

दोस्तों, आपको बता दें कि दुनिया का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर अमेरिका में ही है। इजरायल में हालांकि सहोरीनिम के नाम से भी पुकारा जाने वाला एक डिटेंशन सेंटर 2012 में खोला गया था। यहां एक साथ करीब 10 हजार लोगों को रखे जाने की व्यवस्था की गई है। और सच यह है कि इस तरह के Detention Center में क्षमता से अधिक लोगों को ठूंसा जाता है। ऐसे में यहां रह रहे लोगों को पूरी तरह पेयजल, अस्पताल आदि की सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

मानवाधिकार संगठन कई बार मानव अधिकारों की बात उठाते हुए यहां मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल खड़े करते हैं तो वहीं कई दफा अदालतें भी स्वत: संज्ञान लेकर Detention Center में रह रहे लोगों को सुविधाएं दिए जाने के बाबत निर्देश देती हैं। इतना ही नहीं, इन्हें सुनिश्चित किए जाने को लेकर भी निर्देशित करती हैं।

डिटेंशन सेंटर क्यों चर्चा में है?

डिटेंशन सेंटर इसलिए चर्चा में है, क्योंकि असम में NRC के तहत कुल 19 लाख लोगों को अवैध अप्रवासी घोषित किया गया है। इन लोगों में से जो खुद की नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे Detention Center में ही रखा जाएगा। और अगर NRC पूरे देश में लागू हुई तो पूरे देश में अवैध अप्रवासियों को Detention Center में ही रखा जाएगा। आपको बता दें कि सन् 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध तरीके से भारत में रहने पर सजा काट चुके अवैध अप्रवासियों को भी इन केंद्रों में रखे जाने और सुविधा मुहैया कराने की बात कही थी।

माना जा रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान से एक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में डिटेंशन सेंटर को लेकर झूठ बोला है। उन्होंने कहा कि भारत में कहीं कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है, यह केवल अफवाह है, जबकि सच यह है कि कांग्रेस के सांसद शशि थरूर के एक सवाल के जवाब में खुद सरकार के मंत्री जी रेड्डी ने बताया कि असम में छह डिटेंशन सेंटर हैं, जो यहां के केंद्रीय कारागारों में चल रहे हैं।

अलबत्ता, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम में स्वीकारा कि असम में एक डिटेंशन सेंटर है। हालांकि उन्होंने यह बात भी जोड़ी कि लेकिन वह फंक्शनल नहीं है। उनका कहना यह भी था कि वह भी उनकी सरकार ने नहीं बनाया है। इस वक्त सीएए, एनपीआर और डिटेंशन सेंटर को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष भी पूरी तरह हमलावर है। डिटेंशन सेंटर को लेकर सोशल मीडिया भी केंद्र के कदम पर क्रिया प्रतिक्रिया से भरा पड़ा है।

तमाम गतिरोध के बावजूद केंद्र सरकार अपने फैसले, अपने कदमों पर अडिग है। मटिया में वृहद डिटेंशन सेंटर बनना जारी है। इन्हें बनवाने वालों में बहुत से युवा मजदूर भी शामिल हैं, जिन्हें खुद यह लग रहा है कि अगर वह अपने पक्के काग़ज़ नहीं दिखा पाए तो कहीं उनको ही तो इस Detention Center में नहीं रहना पड़ेगा।

Detention Center पर क्या कोई मैनुअल भी है?

डिटेंशन सेंटर को लोग अक्सर जेल समझते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। डिटेंशन सेंटर को लेकर केंद्र सरकार ने समय समय पर राज्य सरकार को मैनुअल भी जारी किए हैं। इसी साल के जनवरी माह में केंद्र की तरफ से राज्य सरकारों को जो मैनुअल जारी किए गए हैं, उनके मुताबिक Detention Center में लोगों के पास अपने दूतावास से या वकील से संपर्क की सुविधा, उनके बच्चों के लिए लालन पालन सुविधा केंद्र यानी क्रेच, साथ ही स्किल डेवलपमेंट डेवलपमेंट सेंटर भी होने चाहिए, ताकि नागरिकों को अपने देश और अपने परिजनों से संपर्क करने की सुविधा के साथ ही उनके परिजनों को भी सुविधा रहे।

यह जेल जैसे कतई नहीं होते हैं। जेल और इन सबसे बड़ा अंतर यह भी है कि जेल में अपराध करने वाले लोगों को रखा जाता है, जबकि Detention Center में बगैर जरूरी और वैध दस्तावेज वाले अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे लोगों को रखा जाता है।

तो साथियों, यह थी Detention Center के बारे में वह सारी जानकारी, जो आप जानना चाहते हैं। उम्मीद है कि हमारी यह post आपको पसंद आई होगी। अगर आपके दिमाग में भी उठ रहा है कोई सवाल तो आप हमको comment box में लिखकर comment कर सकते हैं। इसके अलावा अगर कोई और अलग विषय पर भी आप जानकारी चाहते हैं तो उसके बारे में comment box में comment करके हम तक पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही हमेशा की ही तरह आपके दिए सुझावों का भी स्वागत है। आपके सुझाव हमारे लिए अमूल्य हैं। तो दोस्तों, इंतजार किस बात का? हमें लिख डालिए अपने सवाल। ।।धन्यवाद।।

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