डीबीटी ट्रांसफर क्या है? | डीबीटी ट्रांसफर के लाभ, नुकसान व उदाहरण | DBT transaction meaning in Hindi

DBT transaction means in Hindi:- जब से देश में भाजपा सरकार आयी है, तब से ही कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पहले तो भारत सरकार के द्वारा देश के करोड़ो लोगों के बैंक खाते खोले गए ताकि उन्हें देश की बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जा सके। इससे देश के करोड़ों लोगों को मुख्य धारा में लाने में सफलता मिली जिसका लाभ आज वे सभी ही उठा रहे हैं। अब भारत सरकार के द्वारा इतने करोड़ों खाते खोले जाने के पीछे भी एक उद्देश्य था और वह था उन्हें सीधे तौर पर पैसे (DBT kya hai) भिजवाना।

भारत सरकार के द्वारा समय समय पर कई तरह की योजनाएं चलायी जाती है। इन योजनाओं के माध्यम से लाभार्थियों को पैसे दिए जाते हैं। इसी के साथ ही लोगों को उनकी पेंशन का पैसा या किसी अन्य चीज़ का पैसा जैसे कि सब्सिडी इत्यादि का पैसा पहुँचाना होता है। पहले तो इसके लिए लोगों को अधिकारी के पास जाना होता था या बैंक के चक्कर काटने होते थे। ऐसे में उसमें भ्रष्टाचार चरम पर था और उन्हें कुछ पैसे कम करके ही मिलते थे। इसी की काट के लिए ही भारत सरकार डीबीटी ट्रांसफर योजना को लेकर (DBT kya hoti hai) आयी।

अब आप सोच रहे होंगे कि यह डीबीटी ट्रांसफर योजना क्या है और किस तरह से यह देश के लोगों के लिए लाभदायक होती है। तो आज हम आपके साथ इसी डीबीटी ट्रांसफर के बारे में ही बात करने वाले हैं और आपको इसके बारे में शुरू से लेकर अंत तक हरेक जानकारी देने वाले हैं। तो आइये जाने डीबीटी ट्रांसफर के बारे में विस्तार (DBT kya hai smjhaie) से।

डीबीटी ट्रांसफर क्या है? (DBT transaction meaning in Hindi)

डीबीटी ट्रांसफर के बारे में जानने से पहले तो आपको डीबीटी की फुल फॉर्म के बारे में पता होना चाहिए। तो डीबीटी की फुल फॉर्म डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (Direct Benefit Transfer) होती है। वहीं यदि हम डीबीटी के हिंदी नाम की बात करें तो इसे हिंदी में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के नाम से जाना जाता है। अब आप डीबीटी के पूरे नाम से ही इसके अर्थ को समझ गए होंगे कि इसके माध्यम से भारत सरकार के द्वारा किस तरह का काम किया जा रहा (DBT kya matlab hai) है।

DBT transaction meaning in Hindi

तो इसमें डायरेक्ट अर्थात प्रत्यक्ष का अर्थ हुआ सीधे तौर पर अर्थात उस व्यक्ति से सीधा सम्पर्क जिसको पैसे भेजे जाने हैं। वहीं बेनिफिट अर्थात लाभ का अर्थ हुआ, उन पैसों से जो उस व्यक्ति को मिलने वाले हैं। वहीं ट्रांसफर अर्थात हस्तांतरण का अर्थ है भेजा जाना। इस तरह से भारत सरकार के द्वारा देश के करोड़ों लाभार्थियों को लाभ के तौर पर पैसे भेजे जाने को ही डीबीटी ट्रांसफर या डीबीटी के नाम से जाना जाता (Direct benefit transfer scheme in Hindi) है।

सीधे और स्पष्ट शब्दों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना को समझा जाए तो यह एक ऐसी योजना है जिसके माध्यम से भारत सरकार बिना किसी तीसरे व्यक्ति की सहायता के लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्ति के बैंक खाते में ही सीधा उस राशि को जमा करवा देती है। इसके माध्यम से ना तो भ्रष्टाचार हो पाता है और ना ही उस लाभार्थी को किसी सरकारी अधिकारी या बैंक या विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। साथ ही ना उसे किसी तरह का नुकसान होता है और समय की भी बचत होती (Direct benefit transfer in Hindi) है।

अब इस योजना को बहुत ही बड़े स्तर पर शुरू किया जा रहा है और करोड़ो लोगों को इसके माध्यम से पैसा भेजा जाना भी शुरू हो चुका है। हालाँकि हर चीज़ के अपने अपने लाभ और नुकसान होते हैं और उसी तरह से इस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के भी अपने कुछ नुकसान तो कुछ फायदे हैं। तो आज के इस लेख में हम आपको डीबीटी ट्रांसफर के बारे में सबकुछ बताने वाले (What is DBT in Hindi) हैं।

डीबीटी का एक उदाहरण (DBT example in Hindi)

सबसे पहले तो आप डीबीटी को बेहतर तरीके से समझने के लिए इसे एक उदाहरण से समझें। हम आपको गैस सिलिंडर का उदाहरण देने जा रहे हैं क्योंकि लगभग हर मध्यम या जरूरतमंद परिवार के लोगों ने गैस पर मिल रही सब्सिडी का लाभ उठाया है। यह योजना कई वर्षों तक चली भी है और अभी तक करोड़ो लोग इसके माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का लाभ उठा चुके हैं।

भारत सरकार गैस सिलिंडर पर सब्सिडी प्रदान करती है। इसके तहत मान लीजिये कि एक समय में गैस सिलिंडर का दाम एक हज़ार रूपए है लेकिन भारत सरकार उस पर 300 रुपये की सब्सिडी देती है। ऐसे में जब आप सिलिंडर खरीदते हैं तो उस समय तो आपको भारत सरकार को पूरे के पूरे एक हज़ार रुपये चुकाने होंगे। अब यदि आपने सब्सिडी चुनी हुई है तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से कुछ ही दिनों में आपके बैंक खाते में 300 रुपये आ जाएंगे।

इस तरह से आपको वह गैस सिलिंडर मात्र 700 रुपये में पड़ता है और एक हज़ार में से 300 रुपये सीधे आपके बैंक खाते में आ जाते हैं। यह सबकुछ डीबीटी ट्रांसफर के कारण ही संभव हो पाया है जिसका लाभ करोड़ो लोगों को मिल रहा है। यह तो बस एक योजना का उदाहरण था। ऐसे ही अन्य किसी योजना के फलस्वरूप जिस भी व्यक्ति को पैसा भेजना है, वह डीबीटी के माध्यम से सीधे उसके बैंक खाते में जमा हो जाता है।

डीबीटी ट्रांसफर के लिए क्या चाहिए? (DBT transfer process in Hindi)

अब आप सोच रहे होंगे कि आप भी इस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का लाभ उठा लें लेकिन उसके लिए आपके पास कुछ चीज़ों का होना अत्यंत आवश्यक है। बिना इसके आप चाहकर भी डीबीटी ट्रांसफर का लाभ नहीं उठा सकते हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि आपका बैंक खाता ही नहीं है या फिर वह आपके मोबाइल नंबर से ही लिंक नहीं है तो उस स्थिति में भारत सरकार आपको किस आधार पर डीबीटी के तहत पैसा भेजेगी। तो आपके पास यह सब चीज़े होनी आवश्यक है।

  • सबसे पहले तो आपके पास अपना खुद का आधार कार्ड होना चाहिए। जिस व्यक्ति का आधार कार्ड नहीं बना हुआ है, वह किसी भी स्थिति में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का लाभ नहीं उठा सकता है क्योंकि भारत सरकार आधार कार्ड के जरिये ही किसी योजना का लाभ उठाने देती है।
  • आधार कार्ड के बाद आपके पास अपना खुद का बैंक खाता होना भी आवश्यक है। अब यदि आपका बैंक खाता ही नहीं है तो फिर भारत सरकार डीबीटी के माध्यम से किसके खाते में पैसा भेजेगी? इसलिए यदि आपका बैंक खाता नहीं है तो आज ही जाकर सबसे पहले अपना बैंक खाता खुलवाएं।
  • इन दोनों के पश्चात आपके पास अपना मोबाइल नंबर होना भी आवश्यक है क्योंकि इसी के माध्यम से ही आप सभी चीज़ों को ट्रैक कर सकते हैं और उनके बारे में जानकारी ले सकते हैं।
  • चौथे चरण के रूप में आपको अपने आधार कार्ड को अपने बैंक खाते से लिंक करवाना होगा। ऐसे में यदि आपका बैंक खाता बहुत पहले का बना हुआ है और आपने अभी तक उसे आधार कार्ड से लिंक नहीं करवाया हुआ है तो आज ही उसे लिंक करवा लें।
  • पांचवें और अंतिम चरण के रूप में आपको अपने मोबाइल नंबर को भी आधार कार्ड और बैंक खाते के साथ लिंक करवाना होगा। सबसे सही तो यह होगा कि आपके बैंक में ऑनलाइन इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग की सुविधा चालू हो ताकि आप घर बैठे ही सब कुछ ऑनलाइन देख सकें और अपडेटेड रह सकें।

ऐसे में यदि आपको भी भारत सरकार के द्वारा शुरू की गयी इस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का लाभ लेना है तो उसके लिए आपके पास ऊपर बताई गयी पाँचों चीज़ों का होना या किया जाना आवश्यक हो जाता है। इसी के बाद ही आप भी बाकियों की तरह डीबीटी ट्रांसफर का लाभ ले पाएंगे।

डीबीटी ट्रांसफर के लाभ (DBT benefits in Hindi)

अभी तक का लेख पढ़कर आपको थोड़ा बहुत तो पता चल ही गया होगा कि आखिरकार भारत सरकार के द्वारा इस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर को क्यों शुरू किया गया है और इसके पीछे उनका क्या उद्देश्य निहित (DBT transfer benefits in Hindi) है। फिर भी हम आपके सामने डीबीटी ट्रांसफर योजना के तहत जो जो लाभ मिलते हैं और उससे देश को और हमें क्या कुछ फायदा हो रहा है, उसके बारे में एक एक करके जानकारी रख देते हैं।

भ्रष्टाचार में कमी

डीबीटी ट्रांसफर को लाने से सबसे बड़ा लाभ तो यही हुआ है कि इसके माध्यम से भ्रष्टाचार को कम करने में बहुत ज्यादा सहायता मिली है। पहले के समय में जब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की सुविधा नहीं थी तब लाभार्थी को अधिकारी के पास जाकर पैसे मांगने पड़ते थे। ऐसे में उनके द्वारा रिश्वत की माँग की जाती थी जो बहुत ही अनुचित था। ऐसे में भ्रष्टाचार पर असली चोट इस डीबीटी के माध्यम से भी हुई है।

लाभार्थियों तक सीधे पहुँच

इस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना के तहत भारत सरकार की पहुँच सीधे लाभार्थियों तक भी हुई है। पहले तो भारत सरकार ने करोड़ो ऐसे लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा जिन्होंने आज तक अपना बैंक खाता तक नहीं खुलवाया था। फिर उनके खाते में सीधे पैसे पहुंचा कर उन तक सीधे पहुँच बनाने का काम किया है। यह एक बहुत ही सराहनीय कदम माना जाएगा।

पारदर्शिता का आना

इस डीबीटी योजना के तहत पारदर्शिता भी देखने को मिलती है क्योंकि यदि लाभार्थी के खाते में सीधे तौर पर पैसा भेजा जा रहा है तो इससे ज्यादा पारदर्शी काम और क्या ही होगा। पहले के समय में लाभार्थी का पैसा बीच में कौन खा जाता था, इसके बारे में स्वयं लाभार्थी को ही नहीं पता होता था। ऐसे में सरकार के इस कदम से देश में पारदर्शिता लाने में भी बहुत सहायता मिली है।

बिचौलियों को हटाना

अब इस भ्रष्टाचार की जड़ में केवल सरकारी अधिकारी ही नहीं आते थे बल्कि कई तरह के बिचौलिए भी आते थे। कहने का अर्थ यह हुआ कि यह जरुरी नहीं था कि भारत सरकार सीधे अधिकारी के माध्यम से ही लोगों तक पैसा पहुंचाती थी बल्कि उसमें कई तरह के बिचौलिए भी होते थे। ऐसे में सरकार के इस कदम से इन बिचौलियों को भी हटाने में सहायता मिली और इनका खर्चा भी कम हो गया।

समय की बचत

इससे एक और चीज़ जो देखने को मिली, वह है समय की बचत। पहले जब डीबीटी नहीं थी तो लाभार्थी को बैंक या सरकारी विभाग के चक्कर लगाने पड़ते थे। जो लोग दूर क्षेत्र या गाँव में रहते थे, उन्हें बार बार शहर या तहसील जाना पड़ता था और इस कारण उनका बहुत सारा समय व्यर्थ हो जाता था। अब जब पैसे सीधे ही बैंक खाते में आ रहे हैं तो इससे लाभार्थी और सरकार दोनों का ही समय बच रहा है।

योजनाओं का उचित क्रियान्वयन

जब से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर को शुरू किया गया है तब से ही योजनाओं के समय पर पूरा होने और प्रभावी तरीके से होने की संभावना भी बहुत ज्यादा बढ़ गयी है। अन्यथा पहले तो बहुत समय पैसों के लेनदेन में ही चला जाता था और बाकि के काम के लिए इतना समय ही नहीं मिल पाता था। डीबीटी के बाद योजनाओं का सही से क्रियानव्यन भी संभव हो पाया है।

सुविधाजनक व सुरक्षित

यह डीबीटी ट्रांसफर कोई ऐसी वैसी कार्यप्रणाली नहीं है बल्कि यह पूर्ण रूप से सुरक्षित और सुविधाजनक है। इसमें किसी भी तरह से पैसों की हेराफेरी नहीं हो सकती है क्योंकि सबकुछ ऑनलाइन ही होता है। ऐसे में कुछ भी समस्या आती है या ऐसा कुछ होता है तो उसकी शिकायत की जा सकती है। यही चीज़ इसे सुरक्षित व सुविधाजनक बनाने का काम करती है।

तो इस तरह से डीबीटी ट्रांसफर को शुरू करने के एक नहीं बल्कि कई तरह के लाभ हैं जो धीरे धीरे करके सामने आ रहे हैं। यही कारण है कि भारत सरकार के द्वारा पहले देश के लोगों के बैंक खाते खोले गए और फिर धीरे धीरे उनके खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से पैसे भेजने शुरू किये गए।

डीबीटी ट्रांसफर के नुकसान (DBT disadvantages in Hindi)

अब कोई भी योजना या चीज़ पूरी तरह से परफेक्ट या उत्तम नहीं होती है और हर किसी में कोई ना कोई कमी होती ही है। यही कारण है कि इस डीबीटी में भी कुछ ना कुछ कमी देखने को मिलती है जो इसके नुकसान के रूप में सामने आयी है। हालाँकि सरकार इन पर काम कर रही है लेकिन आपके लिए इन नुकसान के बारे में भी जानना जरुरी है।

  • वैसे तो भारत सरकार देश के करोड़ो लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ चुकी है लेकिन अभी भी देश के करोड़ो लोग ऐसे हैं जिनके बैंक खाते खुले नहीं हैं या खुलने बाकि हैं। ऐसे में वे अभी भी डीबीटी ट्रांसफर का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
  • अब जिन लोगों के बैंक खाते खोले भी जा चुके हैं, उन्हें इसके बारे में समूची जानकारी हो यह आवश्यक नहीं है। कहने का अर्थ यह हुआ कि लोगों के कम पढ़े लिखे होने के कारण भी उन्हें इसके बारे में इतना पता नहीं होता है।
  • अब लोगों को बैंकिंग सेवा का सही से इस्तेमाल करना नहीं आता है और वे सोचते हैं कि ऑनलाइन उनका पैसा नहीं आएगा या फंस जाएगा, इस कारण वे आज भी पुराने सिस्टम के तहत ही पैसे लेने जाते हैं।
  • जो लोग डीबीटी ट्रांसफर के जरिये पैसा मंगवाते भी हैं लेकिन उन्हें पैसा निकालने या इस्तेमाल करने के बारे में उतनी जानकारी नहीं होती है। ऐसे में यदि उनके खाते में पैसा पड़ा है तो हैकर उन्हें फोन करके या मैसेज भेजकर भी उनके खाते से पैसे उड़ा सकते हैं। अब यह तो देशभर में पढ़े लिखे और गणमान्य लोगों के साथ भी हो रहा है तो अनपढ़ लोगों का तो क्या ही कहना।
  • डीबीटी ट्रांसफर का एक नुकसान इसके बारे में लोगों का जागरूक नहीं होना भी है। ऐसे में लोगों को यदि इसके बारे में पता ही नहीं होगा तो फिर कैसे ही वे इसका लाभ उठा पाएंगे।
  • इसमें तकनीकी समस्या भी हो जाती है जिस कारण लाभार्थी को कई बार समय पर पैसा नहीं मिलता है या किसी कारणवश अटक जाता है। इस कारण भी लाभार्थी इससे मुहं मोड़ लेता है।
  • कई क्षेत्रों में इंटरनेट या बैंक की सुविधा भी उतनी अच्छी नहीं होती है या दूर होती है। इस कारण भी लोगों के द्वारा इसका लाभ नहीं लिया जाता है।

तो इस तरह से डीबीटी ट्रांसफर की भी अपनी कुछ समस्याएं हैं जो भारत सरकार की नज़र में है। इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए भरसक प्रयास किये जा रहे हैं ताकि डीबीटी ट्रांसफर का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाया जा सके।

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डीबीटी ट्रांसफर क्या है – Related FAQs

प्रश्न: डीबीटी की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर: डीबीटी के द्वारा सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं को लाभार्थियों तक सीधे ही ट्रांसफर किया जाता है।

प्रश्न: डीबीटी योजना क्या है 2024?

उत्तर: यह एक ऐसी योजना है जिसके माध्यम से भारत सरकार बिना किसी तीसरे व्यक्ति की सहायता के लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्ति के बैंक खाते में ही सीधा उस राशि को जमा करवा देती है।

प्रश्न: बैंक खाते में डीबीटी कैसे करें?

उत्तर: इसकी प्रक्रिया हमने ऊपर के लेख में विस्तार से दी है जो आपको पढ़नी चाहिए।

प्रश्न: डीबीटी योजना लाभ क्या है?

उत्तर: डीबीटी योजना के लाभ हमने ऊपर के लेख में विस्तार से दिए हैं जो आपको पढ़ने चाहिए।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने डीबीटी ट्रांसफर क्या है यह जान लिया है। साथ ही आपने जाना कि डीबीटी ट्रांसफर के लिए क्या चाहिए और डीबीटी ट्रांसफर के लाभ और नुकसान क्या हैं इत्यादि। आशा है कि जो जानकारी लेने के लिए आप इस लेख पर आए थे वह आपको मिल गई होगी। फिर भी यदि कोई प्रश्न आपके मन में शेष है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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