दहेज प्रथा क्या है? | दहेज प्रथा इतिहास, दुष्प्रभाव | दहेज प्रथा दूर करने के उपाय | Dahej pratha in Hindi

Dahej pratha in Hindi :- भारतीय समाज में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में महिलाओं से जुड़ी कई प्रथाएं ऐसी है जिनका अक्सर विरोध होता आया है। आज के समय में तो लगभग हर देश में इन पुरानी प्रथाओं को लेकर कठोर नियम बन चुके हैं जिनका उल्लंघन करने पर कानून के तहत कार्यवाही की जाती है। अब ऐसी ही एक प्रथा है दहेज प्रथा जो भारतीय समाज में आज से नहीं बल्कि कई सदियों से चली आ रही है। हालाँकि यह पहले नहीं थी लेकिन समय के साथ साथ यह समाज का एक हिस्सा बन (Dowry system in India in Hindi) गयी।

भारत सरकार व कई समाज सेवकों ने दहेज प्रथा का अंत करने का भरसक प्रयास किया है और इसके लिए कई तरह के नियम व कानून बनाये गए हैं। इतना ही नहीं, लोगों को जागरूक करने के सभी भरसक प्रयास हुए हैं ताकि दहेज प्रथा का संपूर्ण उन्मूलन किया जा सके। फिर भी यह दुखद बात है कि आज भी भारतीय समाज में दहेज प्रथा फलफूल रही है और लगभग हर दूसरे विवाह में यह देखी जाती है। समाज में परिवार की बुराई ना हो, इसलिए अधिकांश लोग चुप रहते (Dowry system in Hindi) हैं।

आज हम आपके साथ इस लेख के माध्यम से दहेज प्रथा के बारे में समूची जानकारी उपलब्ध करवाने जा रहे हैं। आज के इस लेख को पढ़कर आपको दहेज प्रथा के बारे में सबकुछ पता चल जाएगा। साथ ही भारतीय कानून में दहेज प्रथा को लेकर क्या कार्यवाही सुनिश्चित की गयी है और किस प्रकार इसे दूर किया जा सकता है, इसके बारे में भी आज हम आपको जानकारी (Dowry system kya hai) देंगे।

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दहेज प्रथा क्या है? (Dahej pratha in Hindi)

यहाँ हम सबसे पहले दहेज प्रथा को समझने का प्रयास करते हैं क्योंकि कई लोग इसका गलत अर्थ निकाल लेते हैं तो कोई कुछ समझ लेता है। ऐसे में हम आपको यह भी बताएँगे कि दहेज प्रथा का गलत अर्थ क्या है और इसे सही रूप में कैसे पहचाना जा सकता है। अब यदि कहीं विवाह की बात चल रही है तो विवाह से पहले रिश्ता पक्का करने की बात की जाती है। इसके लिए लड़के के घरवाले लड़की को देखने जाते हैं तो वहीं लड़की के घरवाले लड़के के परिवार वालों के साथ साथ लड़के का घर, दुकान या काम और स्वयं लड़के को देखते (Dahej pratha kya hai) हैं।

Dahej pratha in Hindi

अब सामान्यतया होता तो ऐसे ही है लेकिन कई कई समाज में यह दोनों चीज़ एक साथ भी हो जाती है। तो अब जब रिश्ते की बात चल रही है और विवाह नहीं हुआ है, ऐसे में लड़के के परिवार वालों में से मुख्यतया उसके माता, पिता, दादा, दादी, स्वयं लड़का और इन सभी की सहमति से लड़के का कोई अन्य रिश्तेदार या मित्र, लड़की के परिवारवालों से पैसों, संपत्ति, वस्तु इत्यादि किसी चीज़ की माँग करता है तो उसे दहेज माना जाता (What is dowry system in Hindi) है।

अब यह आवश्यक नहीं है कि यह दहेज विवाह से पहले और रिश्ता पक्का होने के बाद ही माँगा जाए किन्तु मुख्यतया यह इसी समय के दौरान माँगा जाता है। फिर भी यदि विवाह संपन्न हो जाता है और उसके बाद भी दहेज़ की माँग की जा रही है तो यह भी उसी अपराध के अंतर्गत ही आता है। ऐसे में रिश्ता पक्का होने के बाद से विवाह के बीच का समय, विवाह वाले दिन और विवाह के बाद भी यदि लड़के वाले के परिवार जनों की ओर से लड़की वाले के परिवारवालों से पैसों या ऐसी ही किसी चीज़ की माँग की जाती है तो उसे हम सभी दहेज के नाम से जानते (Dahej pratha mein kya hota hai) हैं।

अब इसमें प्रथा शब्द इसलिए जोड़ दिया गया है क्योंकि इसे रीति रिवाज का नाम दे दिया गया है। कहने का अर्थ यह हुआ कि यह विवाह का ही एक अंग मान लिया गया है। अब यदि कोई चीज़ कई वर्षों से या दशकों से चलती आ रही है तो वह एक प्रथा बन जाती है जो दहेज के मामले में हुआ है। इस कारण इसे दहेज प्रथा के नाम से जाना जाता (Dowry system kya hota hai) है।

दहेज प्रथा का गलत अर्थ (Dahej pratha kya hai)

आज के समय में बहुत लोग दहेज प्रथा का गलत अर्थ भी निकालने लगे हैं। उदाहरण के तौर पर यदि लड़की अपने घर से महँगी वस्तुएं या सामान लेकर आ रही है तो लोग इसे भी दहेज समझ लेते हैं जो कि गलत है। कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि लड़के के घरवाले अपनी ओर से कुछ नहीं मांगते हैं और लड़की के घरवाले स्वेच्छा से अपनी बेटी को उपहार व अन्य मूल्यवान वस्तुएं देकर भेजते हैं तो उसे दहेज नहीं समझा जाता है।

अब कोई माता पिता अपनी बेटी के विवाह होने पर उसे कितना ही रूपया, उपहार व अन्य वस्तुएं अपनी इच्छा से दे, इसे दहेज नहीं समझा जाता है। दहेज उसे समझा जाता है जो लड़के के घरवाले अपनी ओर से जबरदस्ती मांगते हैं या उसकी माँग करते हैं और ऐसा नहीं होने पर विवाह नहीं करने या अपनी पुत्र वधु को सताने की धमकी देते हैं या वाकई में ऐसा करते हैं।

ऐसे में आप आगे से यह मत समझिएगा कि यदि बेटी अपने घर या मायके से महंगा समान लेकर आ रही है तो वह भी दहेज के अंतर्गत ही आता है। यदि उसका पिता अपनी इच्छा और सामर्थ्य से सब कुछ दे रहा है तो वह ना तो समाज की नज़रों में अपराध है और ना ही कानून की नज़रों में।

दहेज प्रथा का इतिहास (Dowry system history in India in Hindi)

अब यदि हम दहेज प्रथा के इतिहास पर नज़र डालें तो यह पुराना तो बहुत है लेकिन इतना नहीं। कहने का अर्थ यह हुआ कि यह भारतीय समाज या धर्म का हिस्सा कभी नहीं रहा था। कहीं भी इसका उल्लेख नहीं किया गया है और किसी भी धर्म ग्रंथ, शास्त्र इत्यादि में कहीं भी इसका वर्णन नहीं मिलता है। यह केवल और केवल समय के साथ साथ लोगों के द्वारा अपना ली गयी एक प्रथा ही कही (Dowry system history in Hindi) जाएगी।

पहले के समय में एक पिता अपनी पुत्री का विवाह होने पर अपनी इच्छा से और सामर्थ्य के अनुसार धन इत्यादि देकर उसे विदा करता था। किन्तु समय के साथ साथ लड़के के घरवालों ने इसे अपना अधिकार मान लिया और फिर वे स्वयं से ही धन व अन्य संपत्ति की माँग करने लगे। धीरे धीरे यह समाज का हिस्सा बनती चली गयी और प्रथा का रूप ले लिया। इसके बाद कई वर्षों तो क्या कई सदियों तक लोग इसी प्रथा का ही पालन करते रहे और लड़की का पिता लड़के के पिता को अपने सामर्थ्य से कई अधिक बढ़कर धन देने (Dahej pratha history in Hindi) लगा।

फिर जब देश स्वतंत्र हुआ तो धीरे धीरे करके भारत सरकार ने दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए कई तरह के कानूनों और नियमों का निर्माण किया। इसके तहत कई धाराएँ लगायी गयी और उनका उल्लंघन करने पर कठोर से कठोर दंड का भी प्रावधान संविधान में जोड़ा गया। इसके बारे में हम आपको नीचे विस्तार से बताने वाले हैं।

दहेज प्रथा पर कानून (Dahej pratha par kanoon)

अब हम भारत सरकार के द्वारा बनाये गए दहेज प्रथा पर कानून की बात कर लेते हैं। तो देश के स्वतंत्र होने के लगभग 15 वर्ष बाद ही इस प्रथा पर रोक लगाने के लिए कानून का निर्माण कर दिया गया था। इसे हम सभी दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के नाम से जानते हैं। इसके तहत किसी भी व्यक्ति के द्वारा दहेज की माँग करने और किसी भी व्यक्ति के द्वारा दहेज को देने, दोनों पर ही कानूनी रोक लगायी गयी (Dowry system act in Hindi) है।

यदि विवाह करने के लिए लड़के के घरवाले लड़की के घरवालों से दहेज की माँग करते हैं या उसके लिए प्रताड़ित करते हैं तो भारतीय कानून के अनुसार उन्हें 15 हजार का जुर्माना या 5 वर्ष का कारावास या दोनों ही हो सकता है। वहीं लड़की के घरवालों के द्वारा दहेज देने पर उन पर भी कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। ऐसा दहेज लेने और देने दोनों को रोकने के लिए किया गया है क्योंकि कई बार यह देखने में आता है कि लड़की के घरवाले लड़के के घरवालों को बचाने के लिए उनका पक्ष लेने का प्रयास करते हैं।

वहीं यदि विवाह हो जाता है और उसके बाद पति या ससुराल वालों के द्वारा अपनी बहु के साथ दहेज के लिए उत्पीड़न किया जाता है, उसे परेशान किया जाता है और पैसों की माँग की जाती है तो भारतीय कानून की धारा 498-अ के तहत उन्हें 2 से 3 वर्ष का कारावास हो सकता है तथा ऐसी ही कोई अन्य कार्यवाही की जा सकती है। इसके अलावा एक अन्य धारा भी दहेज़ प्रथा के लिए जोड़ी गयी है जो लड़की की मृत्यु से संबंधित है।

धारा 304-ब के अनुसार यदि विवाह के 7 वर्ष के अंदर अंदर लड़की की संदेहास्पद मृत्यु हो जाती है और लड़की के घरवाले उसकी मृत्यु दहेज के कारण हुई सिद्ध कर देते हैं तो उस स्थिति में भारतीय कानून के अनुसार लड़के के घरवालों सहित अन्य दोषियों को 7 वर्ष के कारावास से लेकर आजीवन कारावास का दंड दिया जा सकता है। भारत में हर दिन लगभग 20 लड़कियां दहेज के कारण मारी जाती है।

वर्तमान में दहेज प्रथा की स्थिति (Dowry system present status in Hindi)

अब यदि हम वर्तमान समय में दहेज प्रथा के ऊपर नज़र डालें तो इस पर कठोर नियम व कानून तो बन चुके हैं लेकिन दुखद बात यह है कि आज भी यह धड़ल्ले से समाज का हिस्सा बना हुआ है। लगभग हर दूसरे विवाह में दहेज की माँग की जाती है और यह दिया भी जाता है। लड़के के घरवाले रिश्ता ही दहेज की माँग के आधार पर तय करते हैं और लड़की के घरवाले अपने सामर्थ्य के अनुसार उसे हां करते हैं। आप भी अपने आसपास नज़र घुमाएंगे तो आपको यह बीमारी दिख जाएगी।

इतना ही नहीं, आज भी देशभर में लगभग 20 के आसपास महिलाएं प्रतिदिन दहेज के कारण मारी जा रही हैं। अब या तो उनकी हत्या कर दी जाती है या फिर वे स्वयं ही मृत्यु की गोद में समा जाती हैं अर्थात आत्महत्या कर लेती हैं। प्रतिदिन सैकड़ों केस दहेज प्रथा के विरुद्ध पंजीकृत होते हैं लेकिन कानून का रवैया बहुत ही ढीला है। ना तो लड़के के घरवाले सामने आते हैं और ना ही लड़के के घरवाले कभी इस बात को मानते हैं कि उन्होंने दहेज माँगा है या लिया है। ऐसे में आज भी दहेज प्रथा भयावह स्थिति में समाज में व्याप्त है।

दहेज प्रथा के दुष्प्रभाव (Dahej pratha ke dushprabhav)

अब हम आपके साथ दहेज प्रथा से होने वाले नुकसान या दुष्प्रभावों के बारे में बात करने वाले हैं। इन्हें पढ़कर आपको यह समझ में आएगा कि आखिरकार क्यों दहेज प्रथा समाज पर एक अभिशाप है और किस तरह से यह महिलाओं के जीवन को बदल देती है। वैसे तो इसके दुष्प्रभाव आपको भी समझ में आते होंगे लेकिन इसे आप विस्तृत रूप से समझेंगे तभी आपको इस बुराई के बारे में पता चलेगा।

लैंगिक असमानता

दहेज प्रथा के कारण जो सबसे पहला और बड़ा दुष्प्रभाव देखने को मिलता है वह है लड़का व लड़की में लैंगिक या लिंग के आधार पर भेदभाव किया जाना। अब यदि दहेज प्रथा लागू है तो इससे लड़की को कमतर आँका जाता है जबकि लड़के को महान समझा जाता है। इससे लड़की के मन में स्वयं के प्रति हीन भावना पनपती है जो समय के साथ साथ बढ़ती चली जाती है। यह उसे आत्म हत्या करने तक भी विवश कर सकती है जो कि सही नहीं है।

लड़की के पिता पर कर्ज

इसका एक दुष्प्रभाव जो देखने को मिलता है वह है लड़की के पिता पर कर्जा बढ़ जाना। वह इसलिए क्योंकि वह अपने दामाद के घरवालों को देने के लिए अपने सामर्थ्य से ज्यादा पैसा दे देता है, विवाह में भी उसका बहुत खर्चा होता है और फिर दहेज के लिए अलग से पैसा देना। ऐसे में उसकी सारी जमा पूँजी तो समाप्त हो ही जाती है और अलग से कर्जा लेना पड़ता है वो अलग। एक तरह से यह लड़की के घरवालों की स्थिति को दयनीय कर देता है।

लड़की पर जुल्म होना

अक्सर लड़की के ऊपर अपने ससुराल वालों से ज्यादा से ज्यादा दहेज लाने का दबाव डाला जाता है, उस पर तंज कसे जाते हैं, उसे सभी के सामने जलील किया जाता है, तरह तरह से प्रताड़ित किया जाता है और भी बहुत कुछ। कई घरों में लड़की को दहेज के लिए मारा पीटा तक जाता है और उन्हें घर से निकाल तक दिया जाता है। इस तरह से यह दहेज प्रथा लड़कियों पर जुल्म का एक प्रमुख साधन बन गयी है।

विवाह की गरिमा समाप्त होना

हिन्दू धर्म में विवाह को बहुत ही पवित्र बंधन माना जाता है और यह दो लोगों के बीच पूरे जीवन का अटूट बंधन होता है। अब यदि किसी रिश्ते की नींव ही पैसों पर टिकी हो और उसी के अनुसार ही आगे बढ़ी हो तो अवश्य ही विवाह की गरिमा को ठेस पहुंचेगी। इससे ना तो लड़की के मन में विवाह को लेकर इतनी उत्सुकता देखने को मिलती है और ना ही लड़के के मन में। यह एक तरह से पैसों पर बनाया गया एक गठबंधन होता है।

लड़की का मानसिक दबाव में आना

अब यदि लड़की को प्रताड़ित किया जा रहा है और उसे दहेज लाने के लिए विवश किया जा रहा है तो अवश्य ही वह जल्द से जल्द मानसिक दबाव में आ जाएगी। वह अपने पिता का घर छोड़कर पति के घर गयी है तो वहां उसका मन नहीं लगेगा। वह वहां पर किसी से बात नहीं करेगी और अकेले ही अकेले घुटने लगेगी। इससे उसका किसी काम में मन नहीं लगेगा और यह मानसिक दबाव के रूप में सामने आएगा।

लड़की होने पर दुःख होना

दहेज प्रथा के कारण विवाह होने के बाद भी लोग अपनी संतान होने पर उसके लड़का होने की कामना करते हैं। वह इसलिए क्योंकि लड़की होती है तो उन्हें पता होता है कि आगे चलकर इसका विवाह होने पर बहुत सारा पैसा दहेज के रूप में लड़के के घरवालों को देना होगा। इससे लड़की के होने पर लोग शोक मनाते हैं या दुखी हो जाते हैं।

रिश्तों में खटास उत्पन्न होना

दहेज के मांगे जाने पर लड़की की अपने घरवालों के साथ साथ अपने पति के घरवालों के साथ भी खटास उत्पन्न होगी। अब वह मानसिक तनाव में है तो अवश्य ही उसका किसी से बात करने का मन नहीं करेगा। उसका ना केवल अपने पति के साथ बल्कि अपने पति के घरवालों के साथ भी रिश्ता अच्छा नहीं होगा और वह पहले ही खटाई में पड़ जाएगा।

दहेज प्रथा दूर करने के उपाय (Dahej pratha ko rokne ke upay)

अब यदि आप वाकई में दहेज प्रथा का समूल नाश करने के उपाय करना चाहते हैं तो इसके लिए स्वयं के स्तर से लेकर समाज, राज्यता, देश व्यापी स्तर पर प्रयास करने होंगे। कहने का अर्थ यह हुआ कि दहेज प्रथा को दूर करने के लिए सभी का प्रयास आवश्यक है और तभी इसका समूल नाश किया जा सकता है। आइये जाने दहेज प्रथा को दूर करने के सभी प्रभावी उपायों के बारे में।

दहेज कानून का और कठोर करना

सबसे पहले तो दहेज के लिए जो कानून बनाया गया है, उसे सही और कठोरता से लागू करना आवश्यक है। केवल कानून बनाने से ही कुछ नहीं हो जाता है बल्कि उसे किस तरह से लागू किया गया है और वह कितना कठोर और स्पष्ट है, यह भी मायने रखता है। इसलिए दहेज निशेष अधिनियम को अपडेट किये जाने की जरुरत है।

लड़कियों को शिक्षित करना

लड़कियों को पढ़ाया लिखाया जाएगा तभी तो वे शिक्षित होंगी और अपने अधिकारों के बारे में जानेंगी। अब लड़की को अपने अधिकार ही नहीं पता होंगे तो वह किस मुहं से उसके लिए आवाज उठा पायेगी। इसलिए हर पिता को अपनी बेटी को बोझ ना मान कर उसे शिक्षित करने पर ध्यान देना चाहिए। इसी के साथ ही दहेज प्रथा जैसी बुराई आधी समाप्त हो जाएगी।

दहेज मांगने पर रिश्ता ठुकराना

अब यदि लड़के के घरवालों के द्वारा दहेज माँगा जाता है या ऐसी इच्छा प्रकट की जाती है तो लड़की के घरवालों को बिना सोच विचार किये उस रिश्ते को ठुकरा देना चाहिए। अब जिस रिश्ते की नींव ही पैसों पर पड़ रही है वह रिश्ता आगे कैसे चलेगा, इस बारे में तो सोचिये। सही रिश्ता ढूंढने में थोड़ा समय लग जाए लेकिन आप उस लड़के के साथ अपनी बेटी का रिश्ता कदापि ना करें जो दहेज की माँग कर रहा हो।

सामाजिक जागरूकता का लाना

इसके लिए कानून बनाने के साथ साथ समाज में जागरूकता लानी भी बहुत आवश्यक है। वह इसलिए क्योंकि यदि लोगों को कानून के बारे में सही से जानकारी ही नहीं होगी या उन्हें अपने अधिकार ही नहीं पता होंगे तो फिर क्या ही लाभ। इसलिए दहेज प्रथा के विरुद्ध समाज में जागरूकता लाने का काम भी होते रहना चाहिए।

सोच में बदलाव लाना

इसके लिए हम सभी को अपनी सोच में भी बदलाव लाना होगा। अब एक ही व्यक्ति की दो दो सोच होती है। कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि किसी व्यक्ति के एक लड़का और लड़की है तो वह लड़के के विवाह में तो दहेज चाहता है लेकिन लड़की के विवाह में दहेज देना नहीं चाहता है। ऐसे में हम सभी को ही अपनी सोच में आज से ही परिवर्तन लाना होगा, तभी जाकर इस बुराई से लड़ा जा सकता है।

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दहेज प्रथा क्या है – Related FAQs 

प्रश्न: दहेज प्रथा क्या है इसे समझाइए?

उत्तर: दहेज उसे समझा जाता है जो लड़के के घरवाले अपनी ओर से जबरदस्ती लड़की वालों से मांगते हैं या उसकी माँग करते हैं और ऐसा नहीं होने पर विवाह नहीं करने या अपनी पुत्र वधु को सताने की धमकी देते हैं या वाकई में ऐसा करते हैं।

प्रश्न: दहेज में कितनी धाराएं हैं?

उत्तर: दहेज में 2 धाराएं लगती है जिसके बारे में जानकारी हमने ऊपर के लेख में विस्तार से दी है।

प्रश्न: दहेज की सजा क्या है?

उत्तर: दहेज लेने वालों के खिलाफ 15 हजार रूपए जुर्माना और 5 साल का कारावास हो सकता है।

प्रश्न: दहेज की समस्या के समाधान क्या हैं?

उत्तर: दहेज की समस्या के समाधान आप अच्छे से ऊपर का लेख पढ़ कर जान सकते हो।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने दहेज प्रथा के बारे में जानकारी हासिल कर ली है। आपने जाना कि दहेज प्रथा क्या है दहेज प्रथा पर कानून कौन सा लगता है दहेज प्रथा के दुष्प्रभाव क्या हैं और दहेज प्रथा को दूर करने के उपाय क्या हैं इत्यादि। आशा है कि जो जानकारी लेने के लिए आप इस लेख पर आए थे वह आपको मिल गई होगी। फिर भी यदि कोई शंका आपके मन में शेष है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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