सीआरपीसी Curfew क्या है? कर्फ्यू कब लगाया जाता है? नियम और सजा

कर्फ्यू मीनिंग इन हिंदी – आप अखबार पढ़ते हैं या TV के सामने बैठकर आपका हाथ remote से अक्सर news के channel पलटता रहता है तो आपने पढ़ा-देखा होगा कि जम्मू-कश्मीर में अक्सर Curfew लगा होता है। बहुत दूर न जाएं। कुछ माह पहले ही जम्मू division के किश्तवाड़ में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद जम्मू में Curfew लगा दिया था। और इस राज्य की ही बात लें तो इससे पहले कश्मीर घाटी अक्सर Curfew का दंश झेलती रही। वहां थोड़े से हालात खराब होते ही Curfew लगा दिया जाता रहा।

Curfew क्या है? कर्फ्यू कब लगाया जाता है? नियम और सजा

तीन साल पहले यानी 2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के top commander कहें जाने वाले आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में तीन माह से अधिक कर्फ्यू लगा रहा। कुछ ऐसे ही हालात कई बार बहुत से राज्यों में बने, मसलन उत्तर प्रदेश, राजस्थान, असम आदि। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या को ही लें। इस घटना ने देश भर को हिला दिया था। इस घटना के बाद देश भर में जो हालात बने, उनके बाद दंगे हुए। इन्हें देखते हुए देश में कई जगहों पर Curfew लगा दिया गया। जो कई दिन तक लगा रहा।

लेकिन क्या आपको पता है कि Curfew का मतलब क्या है? Curfew किन हालातों में लगाया जाता है? अगर आपका जवाब न में है तो इस बेहद अहम विषय पर आज हम आपको को इस Post के माध्यम से जानकारी देंगे। बिंदुवार Curfew के बारे में जानने के लिए आपको यह post शब्द दर शब्द पढ़नी होगी।

कर्फ्यू क्या है –

सीधे शब्दों में कहें तो यह एक ऐसा प्रतिबंधात्मक और आपात आदेश है, जिसके जरिये किसी क्षेत्र में गंभीर स्थितियों के मद्देनजर सामान्य जन पर आवाजाही के साथ ही अन्य प्रतिबंध लागू कर दिए जाते हैं। ऐसा इसलिए ताकि किसी भी दंगे या हिंसा जैसी अप्रिय स्थिति में लोगों के जान माल की सुरक्षा की जा सके।

कर्फ्यू क्यों लगाया जाता है –

किसी स्थान पर हिंसा, दंगा या फसाद की वजह से हालात बिगड़ जाते हैं तो वहां कर्फ्यू लगाया जाता है। इससे ऐन पहले धारा 144 लगाकर लोगों से जल्द से जल्द उनके घरों को लौटने को कहा जाता है। विभिन्न प्रचार माध्यमों से लोगों तक Curfew लगाए जाने संबंधी जानकारी पहुंचाई जाती है कि अमुक क्षेत्र में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।

कर्फ्यू कौन लागू कर सकता है –

किसी क्षेत्र में Curfew लगाने का अधिकार वहां के जिला मजिस्ट्रेट यानी डीएम को होता है। वह संबंधित क्षेत्र के हालात को देखते हुए वहां Curfew लगाए जाने का notification यानी अधिसूचना जारी करता है। इस दौरान सारे कानूनी अधिकार उस इलाके के डीएम को ही हासिल होते हैं। साथियों, डीएम पर ही शांति के हालातों को फिर से स्थापित करने की जिम्मेदारी होती है। इसके तहत लोगों पर प्रतिबंध लागू होते हैं। डीएम के पास ही यह शक्ति भी होती है कि वह सभी कार्यालयों और आवश्यक सरकारी इंतजामात का निरीक्षण इस दौरान कर सके। शांति स्थापित करने की प्रक्रिया में वह अपनी तमाम शक्तियों का प्रयोग करते हुए पुलिस बल को भी इस्तेमाल कर सकता है।

कर्फ्यू में घर से बाहर निकलने पर रहती है रोक –

Curfew की सबसे बडी बात है यह है कि इस दौरान किसी को भी घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं होती। हां, अगर किसी को कोई ऐसा काम है, जिसके लिए उसको घर से बाहर निकलकर जाना बेहद जरूरी हो तो इसके लिए उस व्यक्ति को स्थानीय पुलिस से इजाजत लेनी होगी। वह संबंधित व्यक्ति को आने जाने के लिए Curfew pass जारी करेगी। जिसे दिखाकर वह व्यक्ति आवाजाही करने में सक्षम हो सकेगा।

आवश्यक सेवाओं को रखा जाता है cufew से मुक्त –

अक्सर Curfew लगाते हुए आम लोगों की जरूरत की चीजों को देखते हुए दूध, दवाएं, चिकित्सा आदि आवश्यक सेवाओं को Curfew से मुक्त रखा जाता है। इस दौरान movement के लिए उन्हें बाकायदा pass जारी किया जाता है।

इन हालातों में लागू नहीं होता Curfew –

कई ऐसे हालात हैं, जिनमें Curfew के दौरान भी restrictions यानी प्रतिबंध नहीं लगाया जाता। इसमें शामिल है-किसी का विवाह समारोह, कोई शव यात्रा, धार्मिक उत्सवों का आयोजन और कोई परीक्षा और उसके परीक्षार्थी।

क्या क्या restrictions या प्रतिबंध लागू होते हैं Curfew लगने के बाद –

Curfew के दौरान कई तरह के प्रतिबंध लागू होते हैं। मसलन, कोई भी व्यक्ति रैली और जुलूस नहीं निकाल सकता। इस दौरान अनशन, प्रदर्शन, और चक्का जाम करने पर भी पूरी तरह रोक होती है। कोई भी व्यक्ति यह सब नहीं कर सकता। Curfew के दौरान कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह का अस्त्र, weapon यानी हथियार जैसे कि चाकू, रिवाल्वर, राइफल, लाठी, डंडे, बल्लम आदि लेकर नहीं चल सकता। भले ही किसी व्यक्ति के पास शस्त्रों का लाइसेंस क्यों न हो। यहां यह भी साफ कर दें कि इन अस्त्रों को लेकर किसी भी कार्यालय में भी प्रवेश नहीं किया जा सकता।

Curfew के दौरान न तो तेज आवाज में पटाखे बजाए जा सकते हैं और न ही पटाखे बेचे जा सकते हैं। Curfew लग जाता है तो इस दौरान उत्तेजना पैदा करने वाले, हिंसा भडकाने वाले या जाति, संप्रदाय विशेष पर टिप्पणी करने वाले भाषणों और विज्ञापनों पर भी रोक लगी होती है। Curfew के दौरान बगैर इजाजत कोई भी डीजे या लाउडस्पीकर नहीं बजाया जा सकता। आपको बता दें कि इस दौरान परीक्षा केंद्रों के इर्द गिर्द 200 गज की दूरी पर निषेधाज्ञा लागू होती है।

लिहाजा, प्रावधान के अनुसार यहां पांच या उससे ज्यादा लोग जमा नहीं हो सकते। इतना ही नहीं, इसके साथ ही Curfew के दौरान शादी- बारातों में भी कोई भी शौकिया हथियारों को लेकर नहीं चल सकता। इनके प्रदर्शन पर भी रोक होती है।

हालात देखकर दी जाती है Curfew में ढील –

हालात देखकर पुलिस, प्रशासन की ओर से Curfew में ढील भी दी जाती है। दरअसल, Curfew एक निश्चित अवधि के लिए लागू किया जाता है। इसमें प्रशासन हालात का जायजा लेकर कुछ घंटे की ढील भी देता है। ताकि, लोग खरीदारी जैसे आवश्यक कार्य निपटा सकें। अगर प्रशासन को लगता है कि स्थिति में सुधार होता है तो कर्फ्यू को पूरी तरह हटा लिया जाता है। अन्यथा इसकी अवधि में बढ़ोत्तरी कर दी जाती है।

Curfew के दौरान अब mobile phone और internet के इस्तेमाल पर भी असर –

दोस्तों, information technology के बढ़ते इस्तेमाल के मद्देनजर अब यह होने लगा है कि अगर Curfew लगता है तो प्रशासन mobile phone के प्रयोग या और internet के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा देता है। इसकी वजह यह है कि इनके इस्तेमाल से किसी भी तरह की अफवाह को आसानी से फैलाया जाता है। जिसकी वजह से दंगे या हिंसा को बढ़ावे की पूरी पूरी आशंका होती है। अप्रिय स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। ऐहतियात के कदम के तौर पर प्रशासन की ओर से यह कदम उठाया जाता है।

Curfew के वक्त कानून व्यवस्था बनाए रखने को पुलिस, प्रशासन के पास होते हैं यह विशेष अधिकार भी –

Curfew के दौरान हालात बिगड़ने की आशंका रहती है। ऐसी कोई स्थिति बनने से रोकने को जिला मजिस्ट्रेट को Curfewके दौरान कुछ विशेष अधिकार भी प्राप्त होते हैं। ऐसा ही एक अधिकार है दोस्तों फायरिंग से जुड़ा अधिकार। इसके तहत कानून व्यवस्था की स्थिति खराब करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति, भीड़ या किसी संगठन पर फायरिंग का अधिकार भी मजिस्ट्रेट के पास होता है। आपको यह भी बता दें कि SI यानी sub inspector रैंक से ऊपर का कोई अधिकारी भी इस संबंध में यानी फायरिंग के संबंध में आदेश दे सकता है। ऐसा करने वाले किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत दर्ज यूं ही नहीं की जा सकती, बल्कि मुकदमा दर्ज कराने के लिए बाकायदा सरकार की अनुमति लेनी होगी।

कर्फ्यू उल्लंघन पर यह हो सकती है सजा –

किसी भी क्षेत्र में कर्फ्यू CRPC की धारा 144 के तहत ही लगाया जाता है। ऐसे में यदि कोई भी व्यक्ति धारा 144 का उल्लंघन करता है या वह इस धारा के प्रावधानों का पालन नहीं करता है तो जैसा कि धारा 144 में प्रावधान है, उसे धारा 107 या धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है। ऐसे मामले में अधिकतम तीन साल तक की सजा हो सकती है। अलबत्ता, आपको बता दें कि यह धारा जमानती धारा है। आरोपी व्यक्ति को सजा के अलावा जुर्माना भी हो सकता है। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि दोनों सजा साथ साथ भुगतनी पड़ सकती हैं। यह दरअसल, परिस्थितियों के साथ ही सजा का फैसला निर्णय देने वाले जज के विवेक पर भी निर्भर करेगा।

कर्फ्यू का इतिहास क्या है –

यूं तो Curfew शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले कब और कहां हुआ,इसका कोई साफ साफ या सटीक उल्लेख नहीं मिलता। लेकिन कुछ अवधारणा हैं, जिनके आधार पर इसकी उत्पत्ति की बात कही जाती है। ऐसी ही एक अवधारणा के तहत कहा जाता है कि Curfew की शुरुआत सबसे पहले England में विलियम द कांकरर ने विपक्षियों के राजनीतिक दमन के लिए की थी। 16वीं सदी से यही अवधारणा प्रचलित है। हालांकि अभी तक कोई historical दस्तावेज इस संबंध मे उपलब्ध नहीं हो
सके हैं। लिहाजा इस संबंध में बहुत सटीक जानकारी अभी तक संभव नहीं हो सकी है।

Curfew Meaning In Hindi –

दोस्तों, देश में जम्मू कश्मीर को छोड भी दें तो कई ऐसे राज्य हैं, जहां प्रशासन को Curfew लगाने की नौबत कई बार पेश आई है। हाल ही में आए राम जन्मभूमि मंदिर को लेकर फैसले को ही लें। जिस वक्त 6 दिसंबर, 1996 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया,उसके बाद हालात बहुत खराब हो गए। देश भर में कई स्थानों पर दंगा हुआ और बताया जाता है कि 2000 से अधिक लोगों की मौत इन दंगों में हो गई।

उस वक्त दंगों वाली सभी जगहों पर Curfew लगा दिया गया, जो कि लगातार कई दिन तक लगा रहा। उस वक्त लोग जरूरी चीजों के लिए भी परेशान हो गए थे। कई दिनों बाद पुलिस, प्रशासन ने दौरा कर हालातों का जायजा लिया, जिसके बाद लोगों को Curfew से निजात मिल सकी। कुछ इसी तरह की स्थिति राजस्थान में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान बनी, जब हिंसा के बाद बीकानेर समेत राजस्थान प्रदेश के कई इलाकों में Curfew लगा दिया गया। इसका उल्लंघन करने वालों पर भी उस दौरान विधि सम्मत कार्रवाई की गई।

तो साथियों, यह थी कपर्यू को लेकर छोटी से छोटी जानकारी आपके लिए बिंदुवार तरीके से। आशा करते है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। अगर आप Curfew को लेकर कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो यहां comment करके पूछ सकते हैं। आपको जानकारी प्रदान करने की पूरी कोशिश की जाएगी।। धन्यवाद ।।

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