रजिस्ट्री में गलती कैसे सुधारें, करेक्शन इन बैनामा – Correction In Sale Deed 2022

रजिस्ट्री में गलती कैसे सुधारें, करेक्शन इन बैनामा (correction in conveyance deed), करेक्शन इन सेल डीड (correction in sale deed), रजिस्ट्री में नाम गलत हो गया है को कैसे सुधारें? जमीन रजिस्ट्री होने के बाद, बैनामा कितने वर्ष के लिये मान्य है

यह तो आप जानते ही हैं कि प्राॅपर्टी लेन-देन में बैनामा एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसी से साबित होता है कि बेचने वाले ने संपत्ति के सभी मालिकाना खरीदार को ट्रांसफर कर दिए हैं। इसे ही कानूनी सुबूत भी माना जाता है। लेकिन कई बार इस अहम दस्तावेज को लिखते हुए इबारत में गलती हो जाती है, जिसे सही कराना भी बेहद जरूरी होता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको यही बताएंगे कि आप रजिस्ट्री में करेक्शन कैसे कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इसमें होने वाली गलती को कैसे ठीक कर सकते हैं। आइए, शुरू करते हैं-

रजिस्ट्री में किस तरह की गलतियां होती हैं? रजिस्ट्री में नाम गलत हो गया है को कैसे सुधारें

मित्रों, इससे पहले कि आपको रजिस्ट्री में होने वाली गलतियों को ठीक करने का तरीका बताएं, सबसे पहले जान लेते हैं कि रजिस्ट्री में किस प्रकार की गलतियां होती हैं। यह इस प्रकार से हैं-

  • खरीदार अथवा विक्रेता के नाम में होने वाली गलती।
  • जमीन के गाटा संख्या/ खसरा संख्या अथवा क्षेत्रफल के उल्लेख में होने वाली गलती।
  • अचल संपत्ति जैसे कि जमीन, खेत, प्लाॅट अथवा अन्य किसी चौहद्दी की माप में गलती।
  • मित्रों, आपको बेशक यह लगे कि नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी मामूली बात है, लेकिन ऐसा नहीं है। मामूली गड़बड़ी से बैनामा बेकार हो सकता है। इसका लाभ कोई और उठा सकता है। इसलिए पहले ही यह सावधानी बरतें-
  • नाम आधार कार्ड में दर्ज नाम के अनुसार लिखें। नाम की स्पेलिंग पहले ही चेक कर लें।
  • जमीन का क्षेत्रफल, खसरा संख्या आदि चेक कर लें।
  • बैनामा के ड्राफ्ट (draft) को अच्छी तरह पहले ही पढ़ लें। यदि इसमें दी गई जानकारी में कोई गलती दिखे तो इसे फाइनल करने से पहले ही उसे ठीक करा लें।
रजिस्ट्री में गलती कैसे सुधारें, करेक्शन इन बैनामा - Correction In Sale Deed

बैनामे में होने वाली गलतियों को ऐसे सही करें? रजिस्ट्री में नाम गलत हो गया है को कैसे सुधारें

दोस्तों, तमाम सावधानी बरतने के बावजूद आपके बैनामे में गलती हो सकती है। बैनामे में होने वाली गलतियों के प्रकार बताने के बाद आए अब आपको बताते हैं कि आप इन गलतियों को सही कैसे कर सकते हैं।

मित्रों, आपको बता दें कि बैनामे में यदि कोई गलती रह जाए तो उसे ठीक करने के लिए एक नई डीड तैयार करनी होती है, जिसे करेक्शन डीड पुकारा जाता है। गलतियां सही करने की इस प्रक्रिया को टिटिंबा कहते हैं। इसे अंग्रेजी में करेक्शन इन सेल डीड भी कहा जाता है। सुधार प्रक्रिया इस प्रकार होती है-

  • रजिस्ट्री में हुई गलती के सुधार को बैनामे की प्रक्रिया फिर से की जाती है।
  • स्टांप पेपर (stamp paper) पर फिर से वही बातें लिखी जाएंगी, जो पूर्व के बैनामे में लिखी गईं थीं। जिस गलती का पता चला है, उसका सुधार कर नया बैनामा बनाया जाएगा।
  • इस बैनामे पर संपत्ति से जुड़े दोनों पक्षों यानी खरीदार एवं विक्रेता के हस्ताक्षर समेत गवाहों के हस्ताक्षर कराए जाएंगे।
  • अब सब रजिस्ट्रार आफिस (sub registrar office) में जाकर इस नए बैनामे को रजिस्टर कराना होगा।

करेक्शन डीड (correction deed) की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

मित्रों, हमने आपको बताया कि रजिस्ट्री यानी सेल डीड एक कानूनी दस्तावेज होता है। इसमें छोटी सी भी गलती को भी ठीक करना आवश्यक होता है। कानूनी कागजात में कटिंग नहीं की जा सकती, इसलिए एक और डीड तैयार की जाती है। इसे कन्फर्मेशन (confirmation) अथवा रेक्टिफिकेशन डीड (rectification deed) भी कहा जाता है।

यह तो आप जानते ही हैं कि प्राॅपर्टी से जुड़ी जो भी डील होती है, मसलन सेल, लीज आदि। इनके कागजात काफी लंबे होते हैं। इनमें अक्सर नाम की स्पैलिंग, संपत्ति की नापजोख, लोकेशन अथवा रकम जैसे छोटी-बड़ी गलती होने की गुंजाइश रहती है। इन्हें सही करने के लिए करेक्शन डीड जरूरी होती है। दोस्तों, हालांकि यह स्पष्ट कर दें कि यह गलतियां केवल तथ्यों से जुड़ी होनी चाहिए।

सभी पक्षों की सहमति के बाद ही रजिस्टर्ड हो सकती है –

दोस्तों, आपको यह जानकारी दे दें कि करेक्शन डीड को भी द इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट (the indian registration act) की धारा 17 के अनुसार रजिस्टर्ड कराना आवश्यक है। यदि मूल कागजात रजिस्टर्ड हैं तो भी। इस पर स्टांप ड्यूटी (stamp duty) भी चुकानी होती है। आपको बता दें कि स्टांप ड्यूटी की दर गलतियों के अनुसार होती है।

स्पेलिंग की गलती के लिए अलग तो नाम, रकम आदि गलतियों के लिए अलग। यह डीड मूल कागजों के सभी पक्षों की सहमति के पश्चात ही रजिस्टर्ड हो सकती है। इस पर भी सभी पक्षों के हस्ताक्षर होने जरूरी होते हैं। आपको बता दें कि यदि कोई पक्ष करेक्शन डीड पर सहमत नहीं तो दूसरे पक्ष स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट (specific relief act) 1963 के तहत मुकदमा दर्ज कर सकते हैं।

रेक्टिफिकेशन डीड (rectification deed) के लिए भी कोर्ट से इजाजत जरूरी

साथियों, आपको बता दें कि रेक्टिफिकेशन डीड के लिए भी कोर्ट से इजाजत आवश्यक है। यह तो हम आपको बता ही चुके हैं कि इस पर सभी पक्षों के हस्ताक्षर एवं सहमति होना भी आवश्यक है। इसके बगैर इसे रजिस्टर नहीं किया जा सकेगा।

बहुत सारे लोगों को रेक्टिफिकेशन डीड के बारे में अधिक जानकारी नहीं होती, लेकिन क्योंकि बैनामा लिखने जैसी चीजें विशेषज्ञ, वकील की निगरानी में संपन्न होती हैं, लिहाजा यह लोग इस बाबत पूरी सावधानी बरतते हैं।

फर्जी बैनामे के केस भी आते रहे हैं –

मित्रों, आपको बता दें कि विभिन्न राज्यों में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़े जमीन से जुड़े केसों में ही होते हैं। यहां दस्तावेजों अथवा फोटो में हेर-फेर कर जमीन कब्जा ली जाती है। उत्तर प्रदेश जनसंख्या की दृश्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य होने के नाते यहां इस तरह के केसों की भरमार रहती है।

हालांकि 2017 से राज्य सरकार ने बैनामे की कापी आनलाइन निकाले जाने की व्यवस्था कर दी है। इसके बावजूद, लोगों के जागरूक न होने की वजह से उनके नाम पर खेल कर दिया जाता है। बहुत से लोगों को तो इस खेल का पता तब चलता है, जब वह अपनी जमीन को लेकर तहसील अथवा लेखपाल के यहां पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी सुनवाई के लिए अफसरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

उदाहरण के तौर पर ललितपुर की तहसील महरौनी के गांव बानपुर में एक महिला राजकुमारी पत्नी शिवशंकर डीएम के पास पहुंचीं। उनका आरोप था कि उनके ससुर की पुश्तैनी जमीन का गांव के ही कुछ लोगों ने मिलीभगत से बैनामा करा लिया है। उनके ससुर मानसिक रूप से बीमार थे एवं उनका इलाज चल रहा था। उन्हें बच्चों के पालन पोषण में दिक्कत हो रही थी। उन्होंने डीएम से बैनामा की जांच कर कार्रवाई की मांग की।

ऐसा न होने की सूरत में घंटाघर पर आमरण अनशन की चेतावनी दी। उनकी शिकायत सही पाई गई। डीएम ने अपने स्तर से कार्रवाई की। यह मामला तो बस नजीर है। जमीन को लेकर धोखाधड़ी उरूज पर है। इसीलिए यह कहा जाता है कि जमीन से जुड़े सौदों में बहुत सावधानी बरती जाए।

आजकल आनलाइन खसरा, खाता-खतौनी देखने की सुविधा है। लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्हें केवल किसी के बातों के भरोसे न रहकर पहले जमीन से जुड़े सारे कागज पुख्ता कर लेने चाहिए।

कई बार अधिकारियों की मिलीभगत आ चुकी सामने

फर्जी बैनामे बनवाकर धोखाधड़ी के मामले में अधिकारियों की भी मिलीभगत कई बार सामने आ चुकी है। ऐसा ही एक मामला दो साल पहले उत्तर प्रदेश के बस्ती में सामने आया। यहां फर्जी खुश्की बैनामा के आधार पर 16 बिस्वा जमीन किसी दूसरे के नाम ट्रांसफर कर दी गई। मामले में आरोपी नायब तहसीलदार बलरामपुर के खिलाफ केस दर्ज के आदेश किए गए। इसकी इजाजत राजस्व परिषद के अध्यक्ष की ओर से दी गई।

मामला इस तरह था-तत्कालीन नायब तहसीलदार साऊंघाट के कोर्ट में 23 मार्च, 1337 को एक खुश्की बैनामा पेश किया गया। दस्तावेजों के आधार पर एक दयाराम नाम के व्यक्ति ने दशरथ प्रसाद नाम के व्यक्ति को अपनी जमीन बेच दी। कोर्ट से दयाराम के नाम सम्मन जारी हुआ, जिसे जाहिद अली नाम के चपरासी से प्राप्त करना दिखा दिया गया।

दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो प्रह्लाद श्रीवास्तव ने रिपोर्ट लगाई। तत्कालीन नायब तहसीलदार साऊंघाट राम नवन मिश्र ने नामांतरण को अंजाम दिया एवं 16 बिस्वा जमीन दशरथ प्रसाद मिश्र के नाम हो गई। डीएम कोर्ट (dm court) में मामले की अपील हुई। मुकदमा 21 साल तक चला।

इस दौरान साक्ष्यों की जांच करने पर पता चला कि जब खुश्की बैनामा लिखा गया, उससे 13 साल पहले यानी 1984 में ही दयाराम की मौत हो गई थी। जिस व्यक्ति रामदुलारे को गवाह दिखाया गया, उसकी मौत भी 1995 हो चुकी थी। वहीं, जिस चपरासी के हाथ से सम्मान देना दिखाया गया, उसकी भी मौत हो चुकी थी।

डीएम कोर्ट ने जुलाई, 2018 में बैनामे को फर्जी मानते हुए निरस्त कर दिया। मामले में आरोपियों पर आईपीसी (IPC) 1860 की धारा 419, 420, 467, 468, 471 एवं 120बी के तहत अभियोग दर्ज किया गया।

क्या बैनामा खारिज भी किया जा सकता है?

साथियों, आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि क्या बैनामा को खारिज भी किया जा सकता है? तो हम आपको बता दें कि पर्याप्त तथ्यों एवं सुबूतों के आधार पर बैनामा को खारिज भी किया जा सकता है। आप बैनामा खारिज कराने का वाद कोर्ट में डाल सकते हैं। यह दीवानी कोर्ट में होगा। आपको बैनामा के मूल्य पर कोर्ट फीस भी देनी होगी।

हालांकि बैनामा खारिज कराने संबंधी वाद बहुत नहीं आते। इससे जुड़े विवाद पारिवारिक झगड़े, वसीयत आदि के मामले में अधिक सामने खड़े दिखाई देते हैं।

बैनामे में कोई गलती हो जाने पर क्या करना होगा?

बैनामे में कोई गलती हो जाने पर आपको नए सिरे से बैनामा लिखवाना होगा।

गलती सुधार के पश्चात के पश्चात नए बैमाने का क्या करना होगा?

गलती सुधार के पश्चात नए बैमाने को सब रजिस्ट्रार आफिस में जमा करवाना होगा।

बैनामे में सुधार क्यों आवश्यक है?

यही एक कानूनी दस्तावेज है, जो इस बात का सुबूत है कि बेचने वाले ने संपत्ति का संपूर्ण मालिकाना हक खरीदार को ट्रांसफर कर दिया है। इसमें किसी भी तरह की गलती आपको इस हक से वंचित करने का रास्ता खोल सकती है।

क्या बैनामे की गलती स्वयं सुधारी जा सकती है?

जी नहीं, इसके लिए बैनामा लेखक की आवश्यकता पड़ती है।

बैनामे में किस प्रकार की गलतियां देखने को मिलती है?

बैनामे में नाम में अक्षर, क्षेत्रफल के एरिया आदि में गलती देखने को मिलती है।

दोस्तों, हमने आपको बैनामे में गलती सुधार संबंधी जानकारी दी। यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी, ऐसी उम्मीद है। यदि आप इस पोस्ट पर कोई प्रतिक्रिया या सुझाव भेजना चाहते हैं तो उसके नीचे दिए गए कमेंट बाॅक्स में कमेंट करके हमें बता सकते हैं। इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि अधिक से अधिक लोग इस जानकारी से जागरूक हो सकें। ।।धन्यवाद।।

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