आचार संहिता क्या होती है? | आचार संहिता के नियम कानून 2022 | Code Of Conduct In Hindi

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हम जिस घर में रहते हैं सामान्य रूप से उसके भी कुछ नियम कायदे होते हैं। जैसे-घर का कोई सदस्य सुबह सात बजे के बाद नहीं सोएगा। दोपहर का खाना दो बजे तक खा लेना होगा। रात 10 बजे के बाद कोई बाहर नहीं रहेगा आदि। इसी प्रकार कार्यालय में आने जाने, वहां कार्य करने एवं बर्ताव के भी कुछ नियम होते हैं, जिन्हें आचार संहिता (code of conduct) पुकारा जाता है।

यदि चुनाव (election) की बात करें तो इससे जुड़े नियम कानूनों को, जिन्हें चुनाव आयोग (election commission) तैयार करता है, चुनावी आचार संहिता पुकारा जाता है। प्रत्येक दल के प्रत्याशी एवं सरकार को भी इस नियमावली का चुनाव के दौरान पालन करना होता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको आचार संहिता (code of conduct) के संबंध में विस्तार से जानकारी देंगे। आइए, शुरू करते हैं-

आचार संहिता क्या होती है? (what is code of conduct)

आचार संहिता (code of conduct) वस्तुतः किसी व्यक्ति अथवा संस्था के आचरण को नियंत्रित (control) करती है। प्रत्येक कार्यालय की अपनी एक आचार संहिता अथवा कोड आफ कंडक्ट (code of conduct) होता है। सामान्य रूप से चुनाव के समय आचार संहिता बहुत चर्चा में रहती है। इसे चुनावी आचार संहिता पुकारा जाता है।

यह वस्तुतः एक नियमावली होती है, जिसे देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग तैयार करता है। राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों के लिए चुनाव के दौरान इस आचार संहिता का पालन करना आवश्यक होता है। इसे आदर्श चुनाव आचार संहिता भी पुकारा जाता है।

अंग्रेजी में इसे माडल इलेक्शन कोड आफ कंडक्ट (model election code of conduct) भी कहा जाता है। चुनाव से ऐन पहले चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता लागू होने की घोषणा करता है। चुनाव पश्चात इसकी समाप्ति हो जाती है।

आचार संहिता क्या होती है? Code Of Conduct In Hindi

आचार संहिता की क्या आवश्यकता क्यों महसूस हुई? (why code of conduct was supposed to be necessary)

मित्रों, एक समय ऐसा भी था, जब चुनाव के दौरान दिन भर और रात भर लाउडस्पीकर बजता था। लोगों के घरों की दीवारें पोस्टरों, बैनरों से पट जाया करती थीं। शराब एवं पैसे के बूते दबंग प्रत्याशी वोट खरीदते थे। कहीं कहीं तो पोलिंग बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाएं भी होती थीं।

उत्तर प्रदेश एवं बिहार इस मामले में खासे बदनाम थे। कई बार लाठी, गोली चल जाती थी। ऐसी घटनाओं को पर रोकथाम के लिए एक आचार संहिता की आवश्यकता महसूस हुई। यद्यपि आचार संहिता लागू होने के बाद भी इस प्रकार की घटनाएं पूरी तरह नहीं रूकीं, लेकिन उनमें बहुत कमी आई है।

सुप्रीम कोर्ट ने आचार संहिता को लेकर क्या कहा है? (what supreme court has said on code of conduct)

आज से करीब 21 वर्ष पूर्व सन 2001 में सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने एक फैसले में साफ कहा कि चुनाव आयोग( election commission) का नोटिफिकेशन (notification) जारी होने की तिथि से चुनावी आचार संहिता को लागू माना जाएगा।

इससे पूर्व आचार संहिता लागू होने की तिथि को लेकर विवाद होता रहा। यद्यपि इसका पालन चुनाव आयोग की ओर से आवश्यक किया गया। इसके उल्लंघन पर दंड प्रावधान भी जोड़े गए।

चुनावी आचार संहिता में क्या क्या शामिल होता है? (what is included in election code of conduct)

चुनाव पारदर्शी एवं नियम कानूनों के अनुसार हों, इसके लिए चुनावी आचार संहिता का पालन आवश्यक किया गया है। एक चुनावी आचार संहिता में निम्न चीजें शामिल होती हैं-

  • सरकार द्वारा कोई लोक लुभावना घोषणा नहीं की जा सकती। इसमें लोकार्पण, शिलान्यास जैसे तमाम कार्यक्रम शामिल हैं।
  • किसी भी राजनीतिक दल एवं उनके उम्मीदवारों द्वारा सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग पर प्रतिबंध रहेगा। इसका अर्थ यह है कि सरकारी वाहन, विमान अथवा किसी सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं होगा।
  • राजनीतिक दलों एवं उम्मीदवारों द्वारा जाति, धर्म एवं क्षेत्र से जुड़े मुद्दे उठाने पर रोक रहेगी। यानी वे रैली में धर्म, जाति आदि के नाम पर वोट नहीं मांग पाएंगे।
  • चुनाव के दौरान बाहुबल, धन बल के इस्तेमाल पर रोक।
  • किसी भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार अथवा समर्थकों को रैली से पहले पुलिस की इजाजत लेना आवश्यक होगा।
  • निर्वाचन से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े अधिकारियों, पदाधिकारियों के स्थानांतरण (transfer) पर रोक रहेगी। यदि उसका ट्रांसफर अथवा तैनाती आवश्यक है तो आयोग से इजाजत लेनी आवश्यक होगी।
  • आपातकालीन अथवा अप्रत्याशित आपदा की स्थिति में सरकार को कल्याणकारी उपायों की घोषणा को निर्वाचन आयोग से अनुमति लेनी होगी।
  • मतदान समापन के लिए निर्धारित समय के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटे की अवधि के दौरान जनसभाओं एवं जुलूसों पर रोक।
  • किसी भी प्रकार के ओपीनियन पोल (opinion poll) अथवा एग्जिट पोल (exit poll) पर रोक।
  • सरकार के अपनी उपलब्धियों के बखान वाले विज्ञापनों पर रोक।
  • सोशल मीडिया पर उन्मादी पोस्ट लिखे जाने पर रोक।
  • मतदान केंद्रों से सौ मीटर की दूरी पर चुनाव प्रचार पर रोक।
  • मतदान के दिन एवं इससे 48 घंटे पूर्व शराब देने, वितरित करने पर रोक।
  • निर्वाचन आयोग के मान्य पास बगैर पोलिंग बूथ (polling booths) के भीतर प्रवेश पर रोक।
  • मतदाता पर्ची पर किसी भी प्रतीक, अभ्यर्थी के नाम पर अथवा दल के नाम पर प्रतिबंध।
  • मतदाताओं को दलों अथवा प्रत्याशियों द्वारा मतदान केंद्र तक वाहन उपलब्ध कराने पर रोक।
  • किसी व्यक्ति की इजाजत के बगैर उसकी जमीन, इमारत, परिसर की दीवारों पर प्रचार सामग्री लगाने पर रोक।

देश में फिलहाल आचार संहिता कहां कहां लगी है? (in the country where the code of conduct is imposed at present)

दोस्तों, यह तो आप जानते ही होंगे कि देश के पांच राज्यों में इस समय चुनाव चल रहे हैं। ये प्रदेश हैं-देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश, मणिपुर, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड। इनमें से उत्तराखंड में 14 फरवरी को वोट पड़ चुके हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में अभी कई चरणों का मतदान बाकी है।

इन प्रदेशों में आचार संहिता अभी लागू है। वोटों की गिनती हो जाने यानी चुनाव के नतीजे आने के बाद आचार संहिता स्वतः हट जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन प्रदेशों में चुनाव का नतीजा 10 मार्च, 2022 को आएगा। ऐसे में स्पष्ट है कि यहां 10 मार्च, 2022 तक आचार संहिता लागू रहेगी।

चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन पर मुकदमे, जेल का प्रावधान

मित्रों, आपको जानकारी दे रहे हैं कि यदि कोई राजनीतिक व्यक्ति अथवा दल चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो उस पर एफआईआर यानी मुकदमे के साथ ही जेल का भी प्रावधान हो सकता है। यदि वर्तमान चुनावों की बात करें तो आपदा जैसे विभिन्न अधिनियमों का हवाला देकर कई नेताओं पर केस किया गया है। रूड़की का ही उदाहरण लें।

निर्वाचन आयोग ने 22 जनवरी, 2022 तक किसी भी प्रकार की जनसभा पर रोक लगाई थी। चुनावी आचार संहिता संग कोविड गाइडलाइन (COVID guidelines) भी जारी है। निर्वाचन आयोग ने गाइड लाइन के उल्लंघन में आजाद समाज पार्टी भीम आर्मी एवं अन्य के विरूद्ध आचार संहिता के उल्लंघन के साथ ही आपदा प्रबंधन अधिनियम (disaster management act) के अंतर्गत आठ नामजद के साथ ही अन्य के खिलाफ मुकदमा (case) दर्ज कराया।

वहीं, इससे पूर्व पडरौना कोतवाली पुलिस की ओर से उदित नारायण पीजी कालेज के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष गौरव तिवारी समेत डेढ़ सौ से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज किया। आरोप यह था कि उन्होंने बगैर इजाजत नगर में रैली निकाली थी।

इससे पहले हरदोई में आचार संहिता के उल्लंघन में एक भाजपा नेता सहित करीब 60 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई थी।

चुनाव आयोग में कौन कौन होता है?

दोस्तों, हमने आपको बताया कि चुनावी आचार संहिता की घोषणा चुनाव आयोग करता है। आज आपको बताते हैं कि चुनाव आयोग में कौन कौन होता है। दोस्तों, जहां तक भारतीय चुनाव अथवा निर्वाचन आयोग (election commission of India) की बात है, इसमें तीन पदाधिकारी होते हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त यानी चीफ इलेक्शन कमिश्नर (chief election commissioner) और उनकी सहायता करने के लिए दो चुनाव आयुक्त यानी इलेक्शन कमिश्नर (election commissioner)। इस समय देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा (Sushil Chandra) हैं, जबकि उनके साथ बतौर चुनाव आयुक्त राजीव कुमार (Rajeev Kumar) एवं अनूप चंद्र पांडेय (Anoop chandra Pandey) की तैनाती की गई है।

आचार संहिता में कौन कौन से काम नहीं रूकते

मित्रों, हमने आपको बताया कि चुनावी आचार संहिता लगने के पश्चात नए कार्य की मंजूरी नहीं दी जा सकती। लेकिन बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जो चुनावी आचार संहिता का बहाना बनाकर लोगों के वर्तमान एवं आवश्यक कार्यों को अटकाने से नहीं चूकते। आपको जानकारी दे दें कि आचार संहिता लगे जाने के बावजूद आपके यह कार्य नहीं रूकेंगे-

  • आधार कार्ड बनवाना।
  • जाति प्रमाण पत्र बनवाना।
  • पेंशन की प्रक्रिया से जुड़े कार्य।
  • बिजली-पानी से संबंधित कार्य।
  • सेनिटरी से जुड़े कार्य।
  • सड़कों की मरम्मत।
  • पहले से जारी परियोजनाएं।
  • इलाज के लिए आर्थिक सहयोग।
  • यदि मकान का नक्शा पास कराने का आवेदन पूर्व में कर चुके हैं तो उसे पास करना।

आचार संहिता से जुड़ी खास खास बातें –

दोस्तों, आइए, अब आपको चुनावी आचार संहिता से जुड़ी जुड़ी खास बातें बताते हैं, जो कि इस प्रकार से हैं-

  • चुनावी आचार संहिता का प्रावधान भारतीय संविधान (indian constitution) में नहीं किया गया है। यह एक प्रक्रिया के रूप में राजनीतिक दलों की आपसी सहमति से विकसित हुई है।
  • पहली बार 1960 में केरल विधान सभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता बनाई गई। प्रत्याशियों एवं दलों को बताया गया कि उन्हें क्या करना होगा और क्या नहीं।
  • यदि लोकसभा चुनाव की बात करें तो पहली बार 1962 में चुनाव आयोग ने आचार संहिता को सभी राजनीतिक दलों के बीच वितरित किया।
  • 1967 के लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में पहली बार राज्य सरकारों से राजनीतिक दलों से इसका पालन कराने को कहा गया।

अब प्रत्याशियों पर डिजिटल तकनीक से निगाह रहती है –

जमाना हाईटेक है तो चुनाव आयोग भी पीछे क्यों रहे। उसने आचार संहिता को यूजर फ्रेंडली (user friendly) बनाने एवं राजनीतिक दलों (political parties) तथा प्रत्याशियों (candidates) पर निगाह रखने की मंशा से कुछ साल पूर्व C-vigil app लांच किया है।

इसका इस्तेमाल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मिजोरम राजस्थान आदि के चुनाव में भरपूर हुआ। अब 2022 में पांच राज्यों के चुनाव में भी इसका भरपूर उपयोग हो रहा है। इसके लाभ इस प्रकार से हैं-

  • चुनाव वाले राज्यों में कोई भी व्यक्ति आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट (report) कर सकता है। इसके लिए उसे उल्लंघन प्रदर्शित करती केवल एक फोटो अथवा अधिकतम दो मिनट की वीडियो रिकाॅर्ड करके (video recording) अपलोड (upload) करनी होगी।
  • संबंधित अधिकारियों को जीपीएस (GPS) के माध्यम से इस बात की जानकारी आटोमेटिकली (automatically) मिल जाती है कि चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन कहां हुआ है
  • शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखी जाती है। उसे रिपोर्ट के लिए एक यूनिक आईडी (unique id) दी जाती है। शिकायत सही पाई जाने पर एक निश्चित अवधि के अंतर्गत उस पर कार्रवाई की जाती है।
  • मित्रों, आपको बता दें कि इसके अतिरिक्त चुनाव आयोग ने नेशनल कंप्लेंट सर्विस (national complaint service), सुगम (SUGAM), इलेक्शन मानिटरिंग डैशबोर्ड (election monitoring dashboard), इंटीग्रेटेड कांटेक्ट सेंटर (integrated contact centre) आदि सुविधाएं भी मुहैया कराई हैं।

आचार संहिता क्या है?

चुनाव की बात करें तो आचार संहिता वह नियमावली है, जिसका पालन राजनीतिक दलों, सरकार एवं प्रत्याशियों को करना आवश्यक होता है

आचार संहिता कौन तैयार करता है?

आचार संहिता निर्वाचन आयोग तैयार करता हैं।

आचार संहिता की आवश्यकता क्यों है?

चुनाव को पारदर्शी, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए आचार संहिता की आवश्यकता होती है।

भारतीय निर्वाचन आयोग में कौन कौन पदाधिकारी होते हैं?

भारतीय निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के साथ ही दो निर्वाचन आयुक्त होते हैं।

वर्तमान में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त कौन हैं?

वर्तमान में सुशील चंद्रा देश के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।

इस समय देश के किन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं? आचार संहिता कब तक लागू रहेगी?

इस समय देश के पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर एवं गोवा में चुनाव हो रहे हैं। आचार संहिता 10 मार्च, 2022 को चुनाव के नतीजे आने तक लागू रहेगी

आचार संहिता कब से लागू मानी जाती है?

चुनाव आयोग के चुनाव कार्यक्रम लागू करने के साथ ही आचार संहिता को लागू माना जाता है।

आचार संहिता के उल्लंघन पर क्या प्रावधान है?

आचार संहिता के उल्लंघन पर एफआईआर एवं जेल का प्रावधान किया गया है।

वर्तमान में आचार संहिता के साथ ही कौन सा अधिनियम लागू है?

वर्तमान में आचार संहिता के साथ ही कोविड महामारी को देखते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम भी लागू है।

दोस्तों, इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको आचार संहिता क्या होती है? Code Of Conduct In Hindi के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उम्मीद है कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित हुई होगी। यदि आप इसी प्रकार की जानकारीप्रद पोस्ट हमसे चाहते हैं तो उसके लिए हमें नीचे दिए गए कमेंट बाक्स में कमेंट करके बता सकते हैं। आपकी प्रतिक्रियाओं एवं सुझावों का हमें हमेशा की तरह इंतजार है। ।।धन्यवाद।।

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