सीजीएसटी, एसजीएसटी, यूजीएसटी, आईजीएसटी क्या है? What is CGST, SGST, UGST, IGST

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यह तो आप जानते ही हैं कि टैक्स सरकारों की कमाई का जरिया है। इससे उन्हें राजस्व की प्राप्ति होती है, जिसे वे कल्याणकारी कार्यों एवं योजनाओं पर खर्च करती हैं। आय के लिए सरकारें जनता पर कई तरह के टैक्स का प्रावधान करती हैं, लेकिन आज से पांच वर्ष पूर्व जीएसटी लगाकर अधिकांश करों को इसमें समाहित कर दिया गया।

इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के ऊपर से करों का बोझ कम करना एवं एक राष्ट्र-एक कर की अवधारणा को पुख्ता करना है। जीएसटी के कितने प्रकार हैं एवं सीजीएसटी, एसजीएसटी, यूजीएसटी एवं आईजीएसटी से क्या तात्पर्य है, यही आज हम इस पोस्ट में जानेंगे। आइए, शुरू करते हैं-

जीएसटी क्या है? what is (GST)

दोस्तों, इससे पूर्व कि हम आगे बढ़े सबसे पहले जान लेते हैं कि जीएसटी (GST) क्या है? जीएसटी का अर्थ गुड्स एंड सर्विस टैक्स (goods and service tax) है। आपको बता दें कि देश में वस्तुओं एवं सेवाओं को एक कर के दायरे में लाने की मंशा से जीएसटी लगाने पर विचार किया गया था।

सीजीएसटी, एसजीएसटी, यूजीएसटी, आईजीएसटी क्या है? What is CGST, SGST, UGST, IGST

आज से 22 वर्ष पूर्व सन् 2000 में इसका प्रारूप (format) तैयार करने के लिए एक समिति (committee) गठित की गई थी। इसके 17 वर्ष बाद वन नेशन-वन टैक्स (one nation-one tax) की अवधारणा को पुख्ता करते हुए सन् 2017 में जीएसटी विधेयक (GST bill) संसद में पास हुआ।

एक जुलाई, 2017 को यह कानून जम्मू-कश्मीर (jammu-kashmir) छोड़ पूरे भारत (india) में लागू कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर में इस कानून को बाद में लागू किया गया। आपको बता दें कि जीएसटी बिल को लागू करने वाला सबसे पहला राज्य असम (Assam) था। इस समय दुनिया (world) के 145 से भी अधिक देशों में जीएसटी लागू है।

जीएसटी में टैक्स के कितने स्लैब बनाए गए हैं (how many GST slabs are there)

आपको बता दें कि अलग अलग वस्तुओं एवं सेवाओं (goods and services) के हिसाब से जीएसटी की दर अलग अलग होती है। सामान्य रूप से जीएसटी में टैक्स के पांच स्लैब (slab) बनाए गए है – 0%, 5%, 12%, 18% एवं 28%। अब आपको जानकारी देते हैं कि इन स्लैब में किन किन वस्तुओं को शामिल किया गया है –

0% टैक्स स्लैब – इस स्लैब में सरकार ने देशवासियों की आवश्यकता को देखते हुए रोजमर्रा की कई चीजों को टैक्स से मुक्त रखते हुए शामिल किया है। जैसे-नमक, आटा, फल-सब्जी, अखबार आदि।

सर्विस सेक्टर के अंतर्गत जिन होटलों की एक दिन की फीस एक हजार से कम है, सेविंग एकाउंट एवं जनधन योजना पर लगने वाली बैंक फीस आदि को कर मुक्त रखा गया है।

5% टैक्स स्लैब – वस्तुओं की बात करें तो इस स्लैब में कोयला, खाद आयुर्वेदिक दवाओं, इंसुलिन, काजू, काॅफी, मछली, अगरबत्ती, स्किम्ड मिल्क पाउडर, इथेनाॅल-जैव ईंधन आदि को शामिल किया गया है।

यदि सेवाओं की बात करें तो छोटे रेस्टोरेंट्स, रेलवे एवं हवाई यात्रा, एसी रेस्टोरेंट, नाॅन एसी एवं शराब परोसने वाले रेस्टोरेंट सहित जिस होटल की एक दिन की फीस साढ़े सात हजार रूपये है, उसे इस स्लैब में रखा गया है।

12% टैक्स स्लैब – मक्खन, साॅस, घी अचार, फलों का रस, टूथ पाउडर, नमकीन, इंस्टेंट फूड मिक्स, दवा, छाता सेल फोन, पेंटिंग के लिए बोर्ड, फोटोग्राफ, लोहे के बर्तन, दर्पण आदि के साथ ही सर्विस सेक्टर में बिजनेस क्लास हवाई टिकट एवं 100 रूपये से कम के मूवी टिकट इस टैक्स स्लैब में रखे गए हैं।

18% टैक्स स्लैब – चीनी, पास्ता, पेस्ट्री, काॅर्नफ्लेक्स, केक-डिटर्जेंट, कांच के बने सामान, सेफ्रटी ग्लास, चादरें, पंप, पंखे, कंप्रेसर, लाइट फिटिंग, चाॅकलेट, आइसक्रीम, 68 सेंटीमीटर तक के टीवी, मारबल-ग्रेनाइट, पेंट, हेयर शेवर, लिथियम आयन बैटरी, हेयर कलर, हेयर ड्रायर, वैक्यूम क्लीनर, सैनिट्री वेयर, चमड़े के कपड़े, कुकर, स्टोव, कलाई घड़ी, कटलरी, दूरबीन, चश्मा, आयल पाउडर, आर्टिफिशियल फ्लावर आदि।

यदि सर्विस सेक्टर की बात करें तो होटलों के अंदर स्थित रेस्टोरेंट, जो साढ़े सात हजार रूपये से अधिक की फीस लेते हैं, 100 रूपये से अधिक की मूवी टिकट, आईटी एवं टेली कम्युनिकेशन सेवाएं, ब्रांडेड कपडे़ आदि इस टैक्स स्लैब में रखे गए हैं।

28% टैक्स स्लैब – यह टैक्स मूलतः लग्जरी आइटम्स एवं ऐसी वस्तुओं पर लगता है, जिनके इस्तेमाल को सरकार हतोत्साहित करना चाहती है। इस टैक्स के दायरे में सीमेंट, सनस्क्रीन, डिशवाशर, आटोमोबाइल, मोटरसाइकिल आदि आते हैं।

जीएसटी से जुड़े खास बिंदु –

अब आपको जानकारी देते हैं, जीएसटी के उन बिंदुओं की, जिनकी वजह से इस टैक्स के लागू किए जाने का इंतजार किया जा रहा था –

  • जनता पर करों (taxes) का बोझ कम किया गया।
  • पूरे देश को एक टैक्स के दायरे में लाया गया।
  • टैक्स चोरी रोकने में कारगर।
  • कारोबार करने में आसानी के लिए आनलाइन प्रोसेस को बढ़ावा।
  • विभिन्न वस्तुओं के कंपीटीटिव मूल्य निर्धारण (competitive price fixation) को बढ़ावा।
  • एक बेहतर फूड एंड डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (food and distribution system) का निर्माण।
  • अधिकांश अप्रत्यक्ष करों (indirect taxes) को समाहित करना।
  • टैक्सपेयर्स (taxpayers) का आधार बढ़ाने के लिए।

सीजीएसटी, एसजीएसटी, यूजीएसटी एवं आईजीएसटी क्या है (CGST, SGST, UGST IGST)

आपको बता दें कि जब भी आप कोई सामान खरीदते हैं अथवा किसी प्रोफेशनल (professional) की सेवा लेते हैं तो रसीद (receipt) में जीएसटी नहीं लिखा दिखता। उसके स्थान पर सीजीएसटी, एसजीएसटी, यूजीएसटी अथवा आईजीएसटी लिखा दिखता है।

यह जीएसटी के ही प्रकार हैं, जिन्हें लेन देन में शामिल राज्यों एवं जीएसटी पाने वाली सरकारों के लिहाज से नाम दिए गए हैं। यहां यूजीएसटी का अर्थ यूनियन टेरीटरी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (union territory goods and service tax) है। एसजीएसटी को स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स (state goods and service tax) के नाम से जाना जाता है।

सीजीएसटी को सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (Central goods and service tax) कहा जाता है एवं आईजीएसटी को इंटिग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स (integrated goods and service tax) के नाम से पुकारा जाता है। आइए, अब हम इनके बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं –

सीजीएसटी (CGST)

सीजीएसटी (CGST) की फुल फार्म (Central goods and service tax) है। इसे हिंदी में केंद्रीय माल एवं सेवा कर भी पुकारा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसे केंद्र सरकार (Central Government) लगाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो किसी भी सामान अथवा सर्विस के लेन देने में टैक्स का जो हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाता है, उसे सीजीएसटी (CGST) पुकारा जाता है।

जब किसी ट्रांजेक्शन में बेचने वाला एवं खरीदार दोनों पक्ष एक ही राज्य के हैं तो उस पर सीजीएसटी (CGST) एवं एसजीएसटी (SGST) दोनों वसूला जाता है। इसमें सीजीएसटी सेंटर (center) का हिस्सा होता है, जबकि एसजीएसटी स्टेट (State) का।

इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि यदि किसी भी सामान पर यदि 5% जीएसटी लगता है, तो उसमें सीजीएसटी एवं एसजीएसटी बराबर काटा जाता है। इस प्रकार यह 2.5% -2.5% होगा।

यूजीएसटी (UGST)

यूजीएसटी (UGST) की फुल फार्म union territory goods and service tax है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, किसी भी सामान अथवा सेवा के सौदे में जीएसटी का जो हिस्सा केंद्र शासित प्रदेश वसूलते हैं, उसे यूजीएसटी पुकारा जाता है।

आपको बता दें कि 31 अक्तूबर, 2019 को दो राज्यों क्रमशः जम्मू-कश्मीर (jammu-kashmir) एवं लद्दाख (Ladakh) को केंद्र शासित राज्य का दर्जा दिया गया है। जब इन प्रदेशों में कोई लेन देन होता है तो सीजीएसटी एवं यूजीएसटी (CGST and UGST) मिलाकर वसूला जाता है। इस समय देश में केंद्र शासित राज्य इस प्रकार से हैं-

  • दिल्ली-एनसीआर (delhi-ncr)
  • जम्मू-कश्मीर (jammu-kashmir)
  • लद्दाख (Ladakh)
  • चंडीगढ़ (chandigarh)
  • अंडमान निकोबार (Andaman Nicobar)
  • दमन-दीव (daman diu)
  • दादरा-नागर हवेली (dadra and Nagar haveli)
  • लक्षद्वीप (Lakshadweep)
  • पुडुचेरी (Puducherry)

एसजीएसटी (SGST)

एसजीएसटी (SGST) की फुल फार्म state goods and service tax है। किसी भी सामान अथवा सेवा के लेन देन में टैक्स का जो हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वसूला जाता है, उसे एसजीएसटी पुकारा जाता है।

यह तो हम आपको बता ही चुके हैं कि जब बेचने वाला एवं खरीदार एक ही राज्य के पक्ष में हैं तो उसमें एसजीएसटी एवं सीजीएसटी वसूला जाता है। यहां एसजीएसटी उस राज्य का हिस्सा होता है।

आईजीएसटी (IGST)

आईजीएसटी (IGST) की फुल फार्म (integrated goods and service tax) है। जब विक्रेता एवं उपभोक्ता अलग अलग राज्यों में स्थित होते हैं यानी कोई लेन देन दो अलग अलग राज्यों के कारोबारियों के बीच होता है तो इस अंतरराज्यीय लेन देन पर केंद्र एवं राज्य दोनों का जीएसटी केवल केंद्र वसूलती है।

इसे बाद में बराबर बांट दिया जाता है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि मान लीजिए आंध्र प्रदेश के किसी कारोबारी ने महाराष्ट्र के किसी कारोबारी के साथ सामान की खरीद बिक्री की है तो इस पर पड़ने वाला जीएसटी केंद्र सरकार के पास जाएगा। बाद में वह राज्यों के साथ यह राशि बांट लेगी।

जीएसटी लागू होने से पहले क्या स्थिति थी (what was the condition before GST)

आइए, दोस्तों अब जान लेते हैं कि जीएसटी लागू होने से पूर्व क्या स्थिति थी। आपको बता दें मित्रों कि जीएसटी के लागू होने से पूर्व केंद्र एवं राज्य सरकारें अपनी सीमा में होने वाले व्यापार, कारोबार आदि पर टैक्स वसूलती थीं।

वसूली के तरीकों के हिसाब से इनके नाम अलग होते थे। जीएसटी लागू होने के पश्चात इन सभी टैक्स को जीएसटी में मिला दिया गया है। यह टैक्स कुछ इस प्रकार से हैं-

जीएसटी में मिलाए गए केंद्र सरकार के टैक्स-

  • सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (Central excise duty)।
  • सर्विस टैक्स (service tax)।
  • मेडिकल एवं टायलेट संबंधी उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी।
  • विशेष महत्व की वस्तुओं पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी।
  • टेक्सटाइल एवं इससे बने उत्पादों पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी।
  • एडिशनल कस्टम ड्यूटी।
  • स्पेशल एडिशनल कस्टम ड्यूटी (special additional custom duty)।
  • वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार पर लगने वाले केंद्र के सेस एवं सरचार्ज (cess and surcharge)।

जीएसटी में मिलाए गए राज्य सरकार के टैक्स

  • सेंट्रल सेल्स टैक्स (Central sales tax)।
  • स्टेट वैट (State VAT)।
  • लग्जरी टैक्स (luxury tax)।
  • एंटरटेनमेंट टैक्स (entertainment tax)।
  • एडवरटाइजमेंट टैक्स (advertisement tax)।
  • एंट्री टैक्स (entry tax)।
  • स्टेट सरचार्ज एंड सेस (State surcharge and cess)।
  • लाॅटरी, सट्टे एवं जुएं पर टैक्स (tax on lottery, gambling etc.)।

सीजीएसटी क्या होता है?

किसी राज्य में विक्रेता एवं खरीदार के बीच वस्तुओं के लेन-देन अथवा किसी सेवा के इस्तेमाल पर लगने वाले जीएसटी का जो हिस्सा केंद्र सरकार वसूलती है, उसे सीजीएसटी कहा जाता है।

एसजीएसटी से क्या तात्पर्य है?

किसी राज्य के विक्रेता एवं खरीदार के बीच वस्तुओं के लेन-देन अथवा किसी सेवा के इस्तेमाल पर लगने वाले जीएसटी का जो हिस्सा राज्य सरकार वसूलती है, उसे एसजीएसटी पुकारा जाता है।

यूजीएसटी का क्या अर्थ है?

किसी केंद्र शासित प्रदेश में खरीदार एवं विक्रेता के बीच वस्तुओं के लेन देन अथवा किसी सेवा के इस्तेमाल पर लगने वाले जीएसटी का जो हिस्सा केंद्र शासित प्रदेश वसूलते हैं, उसे यूजीएसटी कहा जाता है।

आईजीएसटी क्या होता है?

दो राज्यों के कारोबारियों के बीच किसी वस्तु के लेन-देन अथवा सेवा के इस्तेमाल पर लगने वाले टैक्स को आईजीएसटी पुकारा जाता है। यह केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाता है, जिसे बाद में राज्य के साथ बराबर बांट दिया जाता है।

क्या जीएसटी के साथ पुराने टैक्स भी लग रहे हैं?

जी नहीं, सभी पुराने टैक्सों को जीएसटी में ही समाहित कर दिया गया है। अब पूरे देश में एक ही कर प्रणाली लागू है।

जीएसटी की दरें क्या क्या हैं?

विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं के नजरिए से जीएसटी की अलग अलग दरें निर्धारित की गई हैं। ये 0%, 5%, 12%, 18% एवं 28% हैं।

जीएसटी देश में कब लागू हुआ?

जीएसटी संपूर्ण देश जम्मू-कश्मीर को छोड़कर एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया।

जीएसटी लाने का क्या उद्देश्य है?

जीएसटी लाने का मुख्य उद्देश्य लोगों पर विभिन्न प्रकार के टैक्सों का बोझ कम करना एवं पूरे देश में एक तरह का टैक्स लागू करना है।

जीएसटी लागू करने वाला सबसे पहला राज्य कौन सा है?

जीएसटी लागू करने वाला सबसे पहला राज्य असम है। इसे जम्मू-कश्मीर में सबसे बाद में लागू किया गया है।

दुनिया के कितने देशों में जीएसटी लागू है?

दुनिया भर के 145 से अधिक देशों में जीएसटी लागू है।

दोस्तों, हमने आपको इस पोस्ट में सीजीएसटी, यूजीएसटी, एसजीएसटी एवं आईजीएसटी के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उम्मीद है कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी।

यदि आप इसी प्रकार की जानकारी वर्धक पोस्ट हमसे चाहते हैं तो नीचे दिए गए कमेंट बाक्स (comment box) में कमेंट करके अपनी बात हमसे शेयर कर सकते हैं। आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है। ।।धन्यवाद।।

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