कार्डियोलॉजिस्ट कैसे बने? Cardiologist Kaise Bane In Hindi

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कार्डियोलॉजिस्ट एक डॉक्टर होता है जिनका काम लोगों की हृदय संबंधी बीमारी का ईलाज करना होता है। कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए बहुत पढ़ना पड़ता हैं और मेहनत भी बहुत करनी पड़ती हैं। ऐसे में यदि आप भी कार्डियोलॉजिस्ट क्या है (Cardiologist kaise bante hain) और कार्डियोलॉजिस्ट कैसे बना जाता हैं, के बारे में सर्च कर रहे हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर आये है क्योंकि आज हम आपके साथ कार्डियोलॉजिस्ट के बारे में ही विस्तार से (Cardiologist banne ke liye kya kare) चर्चा करेंगे।

आज के इस लेख में आपको कार्डियोलॉजिस्ट के बारे में शुरू से लेकर अंत तक सब कुछ जानने को मिलेगा। इसमें आपको कार्डियोलॉजिस्ट किसे कहते हैं (How to become cardiologist in India in Hindi) व उसके क्या क्या कम होते हैं तथा कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए क्या क्या करना (Cardiologist kya hai) पड़ता हैं, इत्यादि सभी महत्वपूर्ण जानकारी जानने को मिलेगी। आइए जाने कार्डियोलॉजिस्ट के बारे में सब कुछ।

कार्डियोलॉजिस्ट क्या होता है? (Cardiologist kya hota hai)

सबसे पहली तो यह जान लेते हैं कि आखिरकार एक कार्डियोलॉजिस्ट होता क्या हैं। दरअसल हमें जब भी हृदय या दिल से संबंधित कोई बीमारी होती हैं तो हृदय संबंधी डॉक्टर के पास जाते हैं। अब एक होते हैं सामान्य डॉक्टर (Cardiologist kya hota h) जो मरीजो का सामान्य चेकअप करते हैं। अब दूसरे होते हैं विशेष डॉक्टर या किसी चीज़ के लिए स्पेशल डॉक्टर।

ऐसे में आगे से आप जब भी हृदय संबंधी डॉक्टर के पास जाएंगे तो उसके नाम के आगे या नीचे नोट कीजिए कि वहां क्या लिखा हुआ हैं। वहां पर आपको कार्डियोलॉजिस्ट लिखा हुआ मिल जाएगा और साथ ही डीएम भी लिखा होगा (Cardiologist ka matlab kya hai) जिसका अर्थ होगा डॉक्टरेट इन मेडिसिन।

इस तरह से जो डॉक्टर हृदय संबंधी बिमारियों का उपचार करता हैं और उनका विशेषज्ञ होता हैं उसे कार्डियोलॉजिस्ट कहा जाता हैं। एक कार्डियोलॉजिस्ट को कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए बहुत मेहनत करने की आवश्यकता (Cardiologist kya hota hai in Hindi) होती हैं क्योंकि लोगों की दिल संबंधी बीमारी का उपचार करना कोई सरल काम नही होता हैं। इसलिए हम इसके बारे में भी विस्तार से जानेंगे।

कार्डियोलॉजिस्ट कैसे बने? Cardiologist Kaise Bane In Hindi

कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर के काम (Cardiologist ka kya kam hota hai)

अब यदि आप कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर के बारे में अच्छे से जान गए हैं तो आपको उनके काम के बारे में भी पता होना चाहिए ताकि आप भी इसमें अपना करियर बना सके। दरअसल यदि आप सोच रहे हैं कि एक कार्डियोलॉजिस्ट का काम केवल (Cardiologist doctor kya hota hai) अपने मरीजों के हृदय संबंधी सामान्य चेकअप करना ही होता हैं तो आप गलत हैं।

एक कार्डियोलॉजिस्ट ना केवल अपने रोगियों का हृदय संबंधी उपचार कर सकता हैं बल्कि उसकी सर्जरी करने में भी सक्षम होता हैं। कार्डियोलॉजिस्ट हार्ट अटैक आने पर भी उसे संभाल सकता हैं।

एक तरह से हृदय या दिल से संबंधित (Cardiologist kya h) छोटी से छोटी बीमारी से लेकर गंभीर बिमारियों का उपचार एक कार्डियोलॉजिस्ट के द्वारा ही किया जाता हैं। इस तरह से दुनिया में लोगों की हृदय संबंधी किसी भी बीमारी का ईलाज करने वाले डॉक्टर को कार्डियोलॉजिस्ट कहा जाता हैं।

हृदय रोग के प्रकार (Hriday rog ke prakar)

अब हमारा यह भी जानना आवश्यक हैं कि हमें दिल के किन रोगों या बिमारियों के लिए एक कार्डियोलॉजिस्ट के पास जाना पड़ सकता हैं (Hriday rog visheshagya)। तो आइए हृदय रोग के प्रकार भी जान लेते हैं।

  • हृदयाघात या हार्ट अटैक [heart attack or heart attack]
  • कोरोनरी आर्टरी डिजीज़ [coronary artery disease]
  • हार्ट फेल [heart failure]
  • हृदय की धड़कन का अनियमित हो जाना [irregular heartbeat]
  • हृदय के वाल्व में समस्या [heart valve problem]
  • दिल में छेद का होना [hole in heart]
  • एनजाइमा [Enzyme]
  • अरीथमिया [arrhythmia]
  • रक्त धमनी में समस्या [blood vessel problem]
  • हृदय में रक्त का सही से नही पहुंचना इत्यादि।

इस तरह से दिल से संबंधित छोटी से लेकर बड़ी बीमारी के ईलाज के लिए हमें कार्डियोलॉजिस्ट के पास जाना होगा। आइए अब जाने कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए क्या क्या करना पड़ता हैं।

कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए योग्यता (Cardiologist banne ke liye kya karen)

यदि आप कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर बन कर उसमे अपना भविष्य बनाना चाहते हैं तो इसके लिए आपके अंदर पहले से कुछ गुण होने चाहिए। यदि आपके अंदर यह विशेषताएं या योग्यताएं नही हैं तो फिर आप मुश्किल से ही कार्डियोलॉजिस्ट बन पाएंगे। इसलिए (Dil ka doctor kaise bane) आइए जाने कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए आपके अंदर क्या क्या योग्यताएं होनी चाहिए।

#1. दिल हो मजबूत

यदि आप कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखे कि आपका दिल मजुत हो। कहने का अर्थ यह हुआ कि ओरो के दिल का ऑपरेशन करते समय यदि आपका दिल ही कच्चा हो गया तो उनका दिल नही बचेगा। ऐसे में ऑपरेशन करने वाले एक डॉक्टर का दिल हमेशा मजबूत होना चाहिए और उसको अपने रोगी की स्थिति को देखकर घबराना नही चाहिए।

#2. बायोलॉजी में रुचि

यदि आप डॉक्टर बनना चाहते हैं तो केवल उसमे करियर और उसकी कमाई को ध्यान में रखकर ही इसका चुनाव ना करें। दरअसल आपके स्कूल में मेडिकल से संबंधित एक विषय छोटी कक्षा से ही पढ़ाया जाता हैं जिसे बायोलॉजी या जीव विज्ञान कहते हैं। आप यह देखे कि क्या आपका उसमे इंटरेस्ट बन पाता हैं या नही। साथ ही आपके उस विषय में कितने नंबर आ रहे हैं, इस बात पर भी ध्यान दे।

#3. लोगों को संभालने की क्षमता

यदि आप कार्डियोलॉजिस्ट के डॉक्टर बनना चाहते हैं तो आपको लोगों को मैनेज करना भी आना चाहिए। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि जब आप कार्डियोलॉजिस्ट बन जाएंगे तो आपके पास लोग सामान्य स्थिति में नही आएंगे बल्कि उन्हें दिल से जुड़ी कोई समस्या होगी तभी आपके पास आएंगे। ऐसी स्थिति में वे बहुत तनाव में होंगे और आपको डॉक्टर होने के नाते ना केवल उन्हें संभालना होगा बल्कि उनके साथ डील भी करनी होगी ताकि वे जल्द से जल्द स्वस्थ हो सके।

#4. बहुत सा पैसा

यदि आप डॉक्टर बनने जा रहे हैं तो एक बात समझ लीजिए कि चाहे आपका चयन सरकारी कालेज में हुआ हो या आप निजी कॉलेज से MBBS करने जा रहे हैं, इसमें आपका कम से कम 30 से 40 लाख आराम से लग जाएगा। इससे भले चाहे ज्यादा ही लगे। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि डॉक्टर बनने में आपके इतने पैसे तो लग ही जाएंगे।

और यदि आप कार्डियोलॉजिस्ट बनने का सोच रहे हैं तो इसमें तो आपका और भी पैसा खर्च होगा क्योंकि इसे करने में MBBS करने के बाद भी बहुत पैसा लगता हैं। ऐसे में यदि आप कार्डियोलॉजिस्ट का कोर्स करने का सोच रहे हैं तो आपके कम से कम 60 से 70 लाख खर्च हो जाएंगे और अधिकतम डेढ़ करोड़ के आसपास।

#5. समय देना पड़ेगा पूरा

आपने अभी तक जितने भी कोर्स सुने होंगे वे 2 साल, 3 साल, 4 साल या ज्यादा से ज्यादा 5 से 6 साल में ख़त्म हो जाते होंगे। यदि व्यक्ति अपनी ग्रेजुएशन के बाद 2 से 3 साल सीरियस होकर पढ़ भी ले तो वह आईएएस तक बन जाता हैं। तो कहने का तात्पर्य यह हुआ कि इस देश में आईएएस 5 से 6 साल में बना जा सकता हैं लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट नही।

कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए आपको कुल 11 से 12 वर्ष का समय लग सकता हैं और कभी कभार तो यह समय 13 से 14 वर्ष भी हो जाता हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि केवल MBBS करने में ही 5.5 वर्ष का समय लगेगा, उसके बाद MD की डिग्री में 3 वर्ष और फिर DM की डिग्री में 3 वर्ष ओर। ऐसे में आपका 11 से 12 वर्ष का समय कार्डियोलॉजिस्ट बनने में लग जाएगा।

कार्डियोलॉजिस्ट कैसे बने (Cardiologist kaise bane)

अब जब हमने कार्डियोलॉजिस्ट क्या है और उसका क्या काम होता है, के बारे में विस्तार से जान लिया हैं और आप यदि कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं तो आज हम आपके साथ कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए क्या करना चाहिए, विस्तार से साँझा करेंगे (Cardiologist doctor kaise bane)। इसे पढ़कर आप समझ पाएंगे कि कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए क्या क्या करना पड़ता हैं। आइए जाने कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए क्या करें।

#1. दसवीं के बाद ले मेडिकल

यदि आप कार्डियोलॉजिस्ट बनने को लेकर सीरियस हैं तो इसके लिए आपको अपनी दसवीं के बाद से ही मेहनत करनी शुरू कर देनी होगी। ना केवल दसवीं के बाद बल्कि आपको आपको अपनी दसवीं की कक्षा में भी अच्छे नंबर लेकर पास होना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि आपको दसवीं के बाद कार्डियोलॉजिस्ट की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मेडिकल विषय का चुनाव करना होगा।

इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपका 11वीं में मेडिकल में चयन हो तो आपको दसवीं में अच्छे नंबर लेकर आने होंगे अन्यथा आपको मेडिकल में प्रवेश नही मिलेगा। इसलिए पहले दसवीं में अच्छे नंबर लेकर आये और उसके बाद 11वीं कक्षा में मेडिकल का चुनाव करें।

#2. बारहवीं में पीसीबी लाये 50 प्रतिशत से अधिक अंक

अब जब आपने दसवीं के बाद मेडिकल का चुनाव कर लिया हैं तो उसमे आपको फिजिक्स’, केमिस्ट्री व बायोलॉजी के विषय पढ़ाये जाएंगे। आपको यह तीनों ही विषय सीरियस होकर पढ़ने होंगे खासकर बायोलॉजी जिसे हिंदी में जीव विज्ञान भी कहते हैं। इसके लिए आप मन लगाकर इन तीनों विषयों को पढ़िए क्योंकि आपको आगे बढ़ने में यही सहायक होंगे।

दरअसल बारहवीं के बाद आपको मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी में मिलाकर 50 प्रतिशत से अधिक अंक लेकर आये। यहाँ पर आप इन अंकों को बारहवीं के कुल अंक समझने की भूल ना करें। दरअसल कई छात्र पीसीबी में न्यूनतम अंक को बारहवीं कक्षा में न्यूनतम अंक समझ लेते हैनं जो कि गलत हैं।

कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि आपको अच्छे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश चाहिए तो आपको केवल पीसीबी में ही 50 प्रतिशत से अह्दिक अंक लाने होंगे। फिर चाहे आपके बारहवीं में कितने ही अंक क्यों ना आये हो। इसलिए अपना स्पेशल फोकस इन्हीं विषयों पर रखें।

#3. MBBS की तैयारी करें (MBBS ki taiyari kare)

अब यदि आप चाहते हैं कि बारहवीं के बाद आपका नीट के माध्यम से एक अच्छे सरकारी कॉलेज में MBBS के लिए चयन हो जाए तो उसके लिए आपको अपनी तीतरी को भी मजबूत रखना होगा। हर वर्ष लाखों की संख्या में बच्चे नीट की परीक्षा देते हैं और उनमे से कुछ हज़ार का ही छाया इसके लिए हो पाता हैं। ऐसे में आपको अपनी तैयारी पहले से ही मजबूत रखनी होगी।

इसके लिए आप किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट से भी जुड़ सकते हैं। वैसे पूरे भारत में राजस्थान का कोटा शहर मेडिकल व इंजीनियरिंग की तैयारी करवाने में प्रथम नंबर पर आता हैं। और बहुत से छात्र अपनी दसवीं के बाद ही वहां चले जाते हैं खाकसार मेडिकल की तैयारी करने वाले। ऐसे में अप चाहे तो आप भी वहां जा सकते हैं और कार्डियोलॉजिस्ट की तैयारी कर सकते हैं।

आप चाहे तो अपने शहर या अन्य किसी बड़े शहर से जहाँ पर नीट की अच्छे से तैयारी करवाई जाती हैं, उससे जुड़ सकते हैं। इसके अलावा आप बारहवीं के बाद नीट की तैयारी करने के लिए एक वर्ष का ड्राप भी ले सकते हैं।

#4. नीट की परीक्षा दे (NEET ka exam de)

अब जब आप कार्डियोलॉजिस्ट बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और आपके बारहवीं में पीसीबी में बी 50 प्रतिशत से अधिक अंक आ गए हैं तो आप नीट के लिए आवेदन कर दे। नीट का पूरा नाम नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (National Eligibility cum Entrance Test) है। हिंदी में इसे राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा कहा जाता है। यह परीक्षा भारत सरकार के द्वारा भारत के सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए आयोजित करवाई जाती हैं।

इसलिये आप नीट के लिए आवेदन करें और इसकी तैयारी कर नीट की परीक्षा दे। यह भी जान ले कि नीट की परीक्षा देने के लिए आपली न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए। साथ ही इसमें आपसे फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी से ही प्रश्न पूछे जाएंगे। नीट की परीक्षा में कुल 180 प्रश्न पूछे जाएंगे और इनके कुल अंक 720 होंगे। अर्थात प्रत्येक सही उत्तर के 4 अंक दिए जाएंगे।

इसके साथ ही यदि आपने गलत उत्तर दिया तो सके एक अंक काट लिए जाएंगे। इस तरह से नीट की परीक्षा में आपके अधिकतम 720 अंक आ सकते हैं जबकि न्यूनतम -180 अंक। यदि आपका पहली बार में नीट क्लियर नही होता हैं तो आप इसे फिर से भी दे सकते हैं। यह [परीक्षा हर वर्ष आयोजित करवाई जाती हैं ताकि भारत के मेडिकल कॉलेज में छात्रों का प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया जा सके।

#5. एमएमबीएस कॉलेज में प्रवेश ले (MBBS college me admission le)

अब जब आप कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं तो आपको MBBS की डिग्री लेनी होगी। हालाँकि यह कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए पहली डिग्री हैं लेकिन शुरुआत इसी से करनी होगी। इसलिए यदि आपके नीट में अच्छे नंबर आये हैं तो आपको एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिल जाएगा। यदि किसी कारणवश आपका नीट में सिलेक्शन नही हो पाता हैं तो आपके पास तीन विकल्प होते हैं:

  • आप एक वर्ष का ड्राप और ले और फिर से अगले साल नीट की परीक्षा के लिए तैयारी करें।
  • आप नीट के जरिये सरकारी मेडिकल कॉलेज में ना जाकर किसी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में प्रवेश ले लेकिन इसकी फीस बहुत ज्यादा होती हैं।
  • आप भारत से MBBS ना कर विदेश के किसी देश से यह डिग्री प्राप्त करें। कई देशों में भारत की तुलना में सस्ते में MBBS की डिग्री प्राप्त की जा सकती हैं।

इस तरह से आप MBBS करने के लिए कॉलेज में प्रवेश ले सकते हैं। यह पूर्ण रूप से आप पर ही निर्भर करता हैं कि आप कहांसे MBBS करेंगे। एक ओर जहाँ सरकारी मेडिकल कॉलेज में आपको 20 से 30 लाख का खर्चा करना पेड़गा तो वही प्राइवेट में यह खर्चा 60 लाख से एक करोड़ तक हो सकता हैं तो वही विदेश के कुछ देशों में 40 से 60 लाख के बीच MBBS हो जाती हैं।

#6. MBBS की डिग्री ले (MBBS ki degree le)

अब जब आपका MBBS कॉलेज में प्रवेश हो गया हैं तो अब आपको अगले साढ़े 5 वर्षों तक उसी कॉलेज में रहकर MBBS की तैयारी करनी होगी। सबसे पहले तो MBBS का पूरा नाम जान लीजिए। MBBS की फुल फॉर्म बैचलर ऑफ मेडिसिन, बैचलर ऑफ सर्जरी (Bachelor of Medicine, Bachelor of Surgery) होत्ती हैं। एक तरह से इसे डोक्टरी में बैचलर या स्नातक की डिग्री ही कहा जाएगा जो इसका शुरूआती चरण हैं।

इसमें आपको पहले 4.5 वर्ष तक तो कॉलेज में रहकर MBBS की पढाई करनी होती हैं। इसमें आपको कार्डियोलॉजिस्ट से संबंधित कई विषयों के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा। साथ ही डॉक्टर के अन्य पेशों से संबंधित कोर्स को भी पढ़ाया जाएगा। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि आपको MBBS में कार्डियोलॉजिस्ट के अलावा डॉक्टर की अन्य फील्ड से संबंधित विषय भी पढ़ने को मिलेंगे।

फिर जब आप 4.5 वर्ष की पढ़ाई पूरी कर लेंगे तब आपको एक वर्ष के लिए किसी हॉस्पिटल या मेडिकल संस्थान में ट्रेनिंग करनी होगी। इसे MBBS में एक वर्ष की इंटर्नशिप कहा जाता हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि डॉक्टर का काम कोई सरल काम नही होता हैं और उनके ऊपर अपने मरीज की जिंदगी निर्भर करती हैं।

इसलिए MBBS को पूरा करने के लिए पहले एक वर्ष की इंटर्नशिप अनिवार्य रूप से करनी होती हैं। इसे किसी डॉक्टर के सानिध्य में रहकर किया जाता हैं। इसमें उन्हें सिखाया जाता हैं कि किसी रोगी का उपचार किस तरह से किया जाए और उसके लिए क्या क्या ऊपर किये जा सकते हैं इत्यादि। इसे पूरा करने के बाद आपको MBBS की डिग्री मिल जाएगी।

#7. एमडी की डिग्री ले (MD ki degree le)

अब जब आपकी MBBS पूरी हो गयी हैं तो आपको कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए अभी आगे और भी पढ़ना पड़ेगा। इसके लिए आपको डॉक्टर में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री अर्थात मास्टरी हासिल करनी होगी। इसलिए कार्डियोलॉजिस्ट बनने की दिशा में अगली डिग्री जो आपको लेनी होगी उसका नाम हैं MD की डिग्री। MD की डिग्री को MBBS करने के बाद ही लिया जा (MD kya hota h) सकता हैं।

यदि बात MD की फुल फॉर्म की की जाए तो उसे डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (Doctor of Medicine) कहा जाएगा। इसमें आप अपने विषय से संबंधित कोर्स को चुन सकते हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि इसे करने के लिए यह आवश्यक नही कि आपको डॉक्टर के सभी विषय ही पढ़ने पढ़ें। इसलिए आप इसमें कार्डियोलॉजिस्ट से संबंधित विषयों का चुनाव कर उसमे पढ़ सकते हैं।

साथ ही MD में कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए आपको नीट की तरह किसी परीक्षा को देने की आवश्यकता नही पड़ती हैं। जो भी कॉलेज MD की डिग्री करवाते हैं (MD Cardiologist) वे केवल आपके MBBS में आये अंकों के आधार पर ही आपको ले लेंगे। हालाँकि कुछ कुछ कॉलेज में इसके लिए एक लिखित परीक्षा ली जा सकती हैं या फिर इसके लिए इंटरव्यू लिया का सकता हैं जो कि उस कॉलेज के स्तर पर ही होगा।

MD का कोर्स करने में आपको लगभग 3 वर्ष का समय लगेगा। इसे करने में भी बहुत खर्चा आता हैं। एक सामान्य कॉलेज से MD का कोर्स करने में 10 से 20 लाख का खर्च (Doctor in medicine course fees) आता हैं। हालाँकि यह सरकारी कॉलेज में कम होता हैं जबकि प्राइवेट कॉलेज में ज्यादा।

#8. डीएम की डिग्री ले (DM ki degree le)

अब जब आप कार्डियोलॉजिस्ट बनने जा रहे हैं और लोगों का दिल से संबंधित बिमारियों का ईलाज करेंगे तो उसकी अनुमति आपको यूँ ही नही मिल जाएगी। इसके लिए सबसे पहले आपको इसमें मास्टरी के साथ साथ डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करनी होगी। उसके बाद ही आपको किसी अस्पताल में लोगों का ईलाज करने के लिए रखा जाएगा या फिर आप उनका ईलाज कर (DM cardiologist) पाएंगे।

इसलिए यदि आपने अपनी 5.5 वर्ष की MBBS और 3 वर्ष की MD की डिग्री ले ली हैं तो अब बारी हैं 3 वर्ष की एक और डिग्री DM करने की। अब यदि डीएम की फुल फॉर्म की बात की जाए तो वह होगी डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन (Doctorate of Medicine). एक तरह से यह कार्डियोलॉजिस्ट बनने की दिशा में पढ़ाई का आखिरी कदम होगा। इसके बाद आप एक कार्डियोलॉजिस्ट बन जाएंगे।

डीएम का कोर्स करने के लिए आपको बड़े मेडिकल संस्थानों के द्वारा एक प्रवेश परीक्षा देनी होगी। साथ ही इसमें इस बात का भी ध्यान रखे कि डीएम का कोर्स हर मेडिकल कॉलेज (Doctorate in medicine degree) में नही करवाया जाएगा। इसके लिए केवल भारत के चुनिंदा संस्थान ही डिग्री देते हैं जैसे कि एम्स। इसलिए आप डीएम की डिग्री लेने के लिए पहले प्रवेश परीक्षा दे और उसके बाद आपका इसके लिए चयन किया जाएगा।

इसके बाद आपको 3 वर्ष तक कार्डियोलॉजिस्ट से संबंधित विभिन्न तरह के विषय पढ़ने को मिलेंगे। इसको करने के बाद आप कार्डियोलॉजिस्ट बन जाएंगे क्योंकि इसमें आपको हृदय की बीमारी के बारेमे बारीकी से बताया जाएगा। साथ ही किसी रोगी के दिल का ईलाज किस प्रकार किया जाए, इसके बारे में विस्तार से पढ़ाया भी जाएगा और उस पर एक्सपेरिमेंट भी करवाए जाएंगे।

#9. मेडिकल लाइसेंस ले (Medical licence lena)

अब जब आपने कार्डियोलॉजिस्ट में डीएम की डिग्री ले ली हैं तो इसका अर्थ यह नही कि आप लोगों का उपचार करना शुरू कर सकते हैं। यदि आपने केवल डीएम की डिग्री लेकर लोगों का हृदय संबंधी उपचार शुरू कर दिया तो आपको भारतीय दंड सहिंता के अनुसार कारावास हो सकता हैं। इसी के साथ आप केवल डीएम की डिग्री के आधार पर किसी मेडिकल संस्थान में डॉक्टर की नौकरी भी नही कर पाएंगे।

इसलिए सबसे पहले अपनी राज्य सरकार के द्वारा या केंद्र सरकार के द्वारा डॉक्टर को दिए जाने वाले मेडिकल लाइसेंस के लिए आवेदन करें। चाहे आपने अपनी कार्डियोलॉजिस्ट की पढ़ाई भारत से की हो या विदेश से, यदि आपको भारत में लोगों के दिल का डॉक्टर बनना हैं तो इसके लिए आपके पास मेडिकल लाइसेंस होना अनिवार्य हैं। यह मेडिकल लाइसेंस लेना कोई इतना मुश्किल काम भी नही होता हैं बेशक यदि आपने अपनी पढाई को अच्छे से किया हो।

इसलिए आप राज्य सरकार या केंद्र सरकार के द्वारा जारी किये जाने वाले मेडिकल लाइसेंस के लिए आवेदन कर दे। एक बार आपको मेडिकल लाइसेंस मिल गया तो समझ जाइये कि आप अब कार्डियोलॉजिस्ट बन चुके हैं और आप लोगों के हृदय संबंधी ईलाज करने के लिए वैध हैं।

#10. कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर के रूप में काम शुरू करें (Cardiologist doctor)

अब जब आपने कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए इतनी मेहनत की हैं तो अब बारी हैं इसमें काम करने की या नौकरी पाने की। तो आपको बता दे कि इसमें आपके पास दो तरह के विकल्प हैं। पहला हैं किसी मेडिकल संस्थान में नौकरी करना और दूसरा अपना खुद का क्लिनिक खोलना।

पगले विकल्प के अनुसार आप भारत के छोटे से लेकर बड़े मेडिकल संस्थान में कार्डियोलॉजिस्ट की नौकरी करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आपको वहां इंटरव्यू देने के लिए बुलाया जाएगा। यदि आप उस इंटरव्यू में सेलेक्ट हो जाते हैं तो आपका उसमे चयन हो जाएगा। हालाँकि एकदम से भारत के बड़े संस्थान में नौकरी पाना मुश्किल हो सकता हैं। इसलिए आप एक छोटे स्तर पर शुरुआत कर सकते हैं।

इसके अलावा यदि आपके पास पैसा हैं और संसाधन भी तो आप खुद का एक अस्पताल या क्लिनिक खोल सकते हैं। इसके लिए भी आपको पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी। जैसे ही आपको अपना खुद कला अस्पताल या क्लिनिक खोलने की अनुमति मिल जाए तो आप इसे आसानी से खोल सकते हैं। इसमें आप जो भी कमाएंगे वह आपका खुद का पैसा होगा।

कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए भारत के टॉप कॉलेज (Top cardiology colleges in India)

यदि आप कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए भारत के सर्वश्रेष्ठ मेडिकल कॉलेज के नाम जानना चाहते हैं तो वे हैं:

  • आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, नयी दिल्ली [All India Institute of Medical Science, New Delhi]
  • कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मणिपाल [Kasturba Medical College, Manipal]
  • जवाहर लाल इंस्टिट्यूट ओद मेडिकल साइंस, पोंडिचेरी [Jawahar Lal Institute of Medical Science, Pondicherry]
  • वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज, नयी दिल्ली [Vardhman Mahaveer Medical College, New Delhi]
  • श्री रामचंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, चेन्नई [Sri Ramachandra Institute of Medical Science, Chennai]
  • मद्रास मेडिकल कॉलेज, चेन्नई [Madras Medical College, Chennai]
  • आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे [Armed Forces Medical College, Pune]
  • इंदिरा गाँधी मेडिकल कॉलेज, शिमला [Indira Gandhi Medical College, Shimla]
  • गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कश्मीर इत्यादि। [Government Medical College, Kashmir etc.]

एक तरह से सभी तरह के सरकारी मेडिकल कॉलेज व मुख्यतया एम्स कॉलेज को कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए सबसे बढ़िया कॉलेज माना जाएगा।

कार्डियोलॉजिस्ट की नौकरी करने के लिए बेस्ट हॉस्पिटल (Top cardiology hospitals in India)

अब जब आप कार्डियोलॉजिस्ट बन जाएंगे तो आप यह भी जानना चाहेंगे कि आप भारत के किस अस्पताल में नौकरी कर सकते हैं या फिर आपकी कहां पर नौकरी लग सकती हैं। तो आइए जाने कार्डियोलॉजिस्ट बनने के बाद आप भारत के किन अस्पतालों में नौकरी कर सकते हैं।

  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान या एम्स [All India Institute of Medical Sciences or AIIMS]
  • अपोलो [Apollo]
  • फोर्टिस [fortis]
  • वेदांता [Vedanta]
  • केयर [care]
  • मैक्स [Max]
  • नारायणा [Narayana]
  • टाटा [Bye]
  • रिलायंस [reliance]
  • सह्याद्री [Sahyadri]
  • वसन [Vasan]
  • ग्लोबलपारस [globalparas]
  • मेडिका इत्यादि।

इस तरह से आप भारत के किसी भी बड़े अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की नौकरी कर सकते हैं। साथ ही भारत के जिन छोटे अस्पतालों में भी कार्डियोलॉजिस्ट से संबंधित पद खाली हैं, आप वहां भी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कार्डियोलॉजिस्ट की सैलरी (Cardiologist ki salary)

अब सबसे अंतिम व मुख्य बात और वह यह हैं कि आखिरकार एक कार्डियोलॉजिस्ट कितना कमा लेता होगा। एक तरह से डॉक्टर एक दिन में इतना कमा लेते हैं जितना अन्य नौकरी करने वाला एक महीने में भी ना कमा पाए। और यहाँ तो हम बात कार्डियोलॉजिस्ट की कर रहे हैं जिसने इसकी पढ़ाई करने में ही 11 से 12 वर्ष लगा दिए। इसलिए अपने द्वारा इतनी मेहनत किये जाने का परिणाम कार्डियोलॉजिस्ट बनने के बाद पता चलता हैं।

एक सामान्य कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर एक महीने के 1 से 3 लाख कमा लेता हैं जबकि एक सफल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर एक दिन का 1 से 2 लाख कमा लेता हैं। यह पूर्ण रूप से कार्डियोलॉजिस्ट के अनुभव के ऊपर काम करेगा क्योंकि जैसे जैसे उसके द्वारा किये गए काम व ऑपरेशन का अनुभव बढ़ता जाएगा वैसे वैसे ही उसकी पोस्ट व पैसा भी बढ़ता चला जाएगा। भारत के बड़े अस्पतालों के द्वारा अपने कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर को महीने का 20 से 50 लाख का वेतन दिया जाता हैं।

कार्डियोलॉजिस्ट क्या होता है – Related FAQs

प्रश्न: कार्डियोलॉजिस्ट का क्या काम होता है?

उत्तर: कार्डियोलॉजिस्ट का काम लोगों की हृदय संबंधी बिमारियों का उपचार करना और उनका ऑपरेशन करना होता है।

प्रश्न: कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए क्या करे?

उत्तर: कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए पहले आपको MBBS, फिर MD और अंत में DM की डिग्री लेनी होगी।

प्रश्न: कार्डियोलॉजी में किसका अध्ययन किया जाता है?

उत्तर: कार्डियोलॉजी में में हृदय संबंधी विषयों का विस्तार से अध्ययन किया जाता है ताकि उनसे संबंधित रोगों का उपचार किया जा सके।

प्रश्न: 12वीं के बाद कार्डियोलॉजिस्ट कैसे बनें?

उत्तर: 12वीं के बाद कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए सबसे पहले MBBS करें और उसके बाद MD व DM की डिग्री ले।

प्रश्न: कार्डियोलॉजिस्ट बनने में कितने साल लगते हैं?

उत्तर: कार्डियोलॉजिस्ट बनने में 11 से 12 साल लगते हैं।

तो आज के इस लेख में आपना जाना कि कार्डियोलॉजिस्ट होता क्या है, कार्डियोलॉजिस्ट का काम कता होता है, कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए क्या करना पड़ता है, कार्डियोलॉजिस्ट बनने के लिए क्या पढ़ाई करनी होती है, कार्डियोलॉजिस्ट बनने के बाद क्या किया जाता है (Cardiologist ka matlab kya hai), कार्डियोलॉजिस्ट के कॉलेज कौन कौन से हैं, कार्डियोलॉजिस्ट किन किन अस्पतालों में नौकरी कर सकता है, कार्डियोलॉजिस्ट की सैलरी कितनी होती है इत्यादि।

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