कार्डिंग क्या है? | कार्डिंग कैसे करें? | Carding kya hoti hai

|| कार्डिंग क्या है? | Carding kya hoti hai | Carding kaise karte hai | Credit card kya hai | कार्डिंग से कैसे बचें? | Carding se kaise bache in Hindi hindi | कार्डिंग बिजनेस क्या है? ||

Carding kaise kare :- आज के समय में जब सब कुछ ऑनलाइन हो गया है तो ऑनलाइन धोखाधड़ी भी बहुत ज्यादा आम हो गयी है। हम में से बहुत से लोगों के पास अपना क्रेडिट कार्ड होगा जो हमें बैंक से मिलता है। अब डेबिट कार्ड तो सभी के पास ही होता है जिसे हम सामान्य भाषा में एटीएम कार्ड भी कह देते हैं लेकिन क्रेडिट कार्ड कुछ कुछ लोगों के पास ही होता है। विकसित देशों जैसे कि अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया इत्यादि में तो ज्यादातर सभी लोगों के पास क्रेडिट कार्ड की सुविधा है जबकि भारत में इसका इस्तेमाल तेजी के साथ बढ़ रहा (Carding kaise karte hai) है।

तो जिस तरह से हमें मिलने वाली सुख सुविधाओं में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है, उतनी ही तेजी के साथ खतरे भी बढ़ते चले जा रहे हैं। इन्हीं खतरों में से एक मुख्य खतरा है कार्डिंग का। अब आपने लोगों को ऑनलाइन चपत लगते हुए और फ्रॉड होते हुए देखा होगा जिसके कारण उनके खाते से पैसे उड़ जाते हैं या खरीदारी कर ली जाती है या ऐसा ही कुछ किया जाता है, तो इसी से मिलता झूलता एक फ्रॉड कार्डिंग का भी है जो क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किया जाता (Online credit card hacking se kaise bache) है।

ऐसे में यह कार्डिंग क्या होती है और इसे किस तरह से किया जाता है, यह आपको इस लेख में जानने को मिलेगा। इतना ही नहीं, इस लेख के माध्यम से हम आपको यह भी बताएँगे कि किस तरह से आप इस तरह की कार्डिंग से बचे रह सकते हैं। तो आइये जाने कार्डिंग के बारे में शुरू से लेकर अंत तक संपूर्ण (Carding kaise kare in Hindi) जानकारी।

कार्डिंग क्या है? (Carding kya hoti hai)

सबसे पहले तो आपको कार्डिंग क्या होती है, उसके बारे में समझना जरुरी है। तो कार्डिंग शब्द कार्ड से बना हुआ है और यहाँ कार्ड से मतलब क्रेडिट कार्ड से है। वैसे तो आप इसे किसी भी तरह का कार्ड कह सकते हैं फिर चाहे वह डेबिट कार्ड हो या आधार कार्ड क्योंकि यह किसी से भी संबंधित हो सकता है। हालाँकि यहाँ पर कार्डिंग को मुख्य तौर पर क्रेडिट कार्ड या बैंक की जानकारी के साथ ही जोड़ा जाता (Carding meaning in Hindi) है।

कार्डिंग क्या है कार्डिंग कैसे करें Carding kya hoti hai

यह एक तरह का अपराध होता है जिसे हम साइबर क्राइम या ऑनलाइन धोखाधड़ी कह सकते हैं। इसके तहत एक व्यक्ति आपके क्रेडिट कार्ड की कॉपी या नकल कर लेता है या फिर आपके बैंक की जानकारी को चुरा लेता है। फिर वह उस जानकारी के माध्यम से आपके क्रेडिट कार्ड से खरीदारी कर सकता है, किसी अपराधिक कार्य में पैसा लगा सकता है या कुछ अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़ा काम कर सकता (Carding kya hai) है।

कार्डिंग के माध्यम से वह व्यक्ति आपके पैसों का अनुचित इस्तेमाल अपने लाभ के लिए करता है और वह भी बिना आपकी अनुमति के। इस तरह से वह आपको ऑनलाइन फ्रॉड में फंसा लेता है और आपके पैसे निकाल लेता है। कार्डिंग करना हर देश में अपराध की श्रेणी में रखा जाता है और लोगों को इससे बचने की सलाह दी जाती (Carding explained in Hindi) है।

कार्डर क्या होता है? 

अब जो भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड की जानकारी को चुरा कर उसका अवैध रूप से इस्तेमाल करता है और अपने या अन्य किसी के नाम पर उस क्रेडिट कार्ड के माध्यम से शॉपिंग या अन्य वित्तीय गतिविधियाँ करता है और वो भी उस क्रेडिट कार्ड के मालिक की अनुमति के बिना, तो उस व्यक्ति को ही कार्डर कहा जाता है।

एक तरह से जो व्यक्ति कार्डिंग का काम कर रहा होता है, उसे ही हम कार्डर के नाम से जानते हैं। उस व्यक्ति के द्वारा लोगों के क्रेडिट कार्ड की जानकारी या फिर अन्य बैंकिंग जानकारी का दुरुपयोग करने का कार्य किया जाता है। इसके लिए उसे साइबर क्राइम के अंतर्गत कानूनन सजा मिल सकती है।

क्रेडिट कार्ड क्या है? (Credit card kya hota hai)

यहाँ पर आप कार्डिंग के बारे में इतना सब जान रहे हैं और उसे पढ़ कर आपको यह जानने को मिला कि कोई व्यक्ति या कार्डर आपके क्रेडिट कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग कर उसकी सहायता से कार्डिंग को अंजाम दे सकता है तो यहाँ आपका यह जानना भी जरुरी हो जाता है कि आखिरकार यह क्रेडिट कार्ड क्या होता है। तो अब हम आपको यह भी बता देते हैं कि यह क्रेडिट कार्ड क्या बला है।

तो क्रेडिट कार्ड एक ऐसा कार्ड होता है जो बैंक के द्वारा प्री रिचार्ज किया गया होता है। अब जो आपके पास एटीएम कार्ड या फिर डेबिट कार्ड है, उसका इस्तेमाल करने के लिए पहले आपको उसमे पैसे डलवाने होते हैं और फिर आप उसका इस्तेमाल कर पाते हैं। जबकि क्रेडिट कार्ड के साथ इसका उल्टा होता है। इसमें बैंक पहले से ही एक निश्चित सीमा तक अपनी ओर से पैसे डलवा कर रखता है और आप उसका इस्तेमाल कर सकते (Credit card kya hai) हैं। फिर आप बैंक को उस राशि को एक समय के बाद पुनः लौटा देते हैं।

तो बैंक के द्वारा दिया गया एक ऐसा कार्ड जिस पर आप राशि का समय से पहले ही इस्तेमाल कर पाने में सक्षम हो, उसे ही हम क्रेडिट कार्ड के नाम से जानते हैं। अब हैकर या कार्डर के द्वारा आपके इसी कार्ड का ही इस्तेमाल धोखाधड़ी में किया जाता है।

कार्डिंग कैसे करें? (Carding kaise kare)

अब आपको यह भी जान लेना चाहिए कि कार्डर के द्वारा कार्डिंग किस तरह से की जाती है और इसके क्या कुछ माध्यम होते हैं। तो यह कार्डिंग मुख्य तौर पर आपके क्रेडिट कार्ड की जानकारी की चोरी के माध्यम से ही सम्भव हो पाती है जिसमें आपके क्रेडिट कार्ड की पूरी जानकारी या जो जानकारी पेमेंट करने के लिए चाहिए होती है, वह किसी अन्य व्यक्ति को मिल (Carding kaise sikhe) जाए।

तो कार्डिंग करने के लिए एक कार्डर को किसी भी व्यक्ति के चलते हुए क्रेडिट कार्ड की जानकारी चाहिए होती है और उस जानकारी के माध्यम से वह आसानी से कार्डिंग को अंजाम दे सकता है और उस व्यक्ति को पैसों का चूना लगा सकता है। तो आइये जाने यह चोरी किस किस माध्यम से की जा सकती है।

डेटाबेस को हैक करना (Hacking database)

तो इसमें सबसे पहले आते हैं वे लोग जिन्हें हम हैकर के नाम से भी जानते हैं। तो ये हैकर लोगों या कंपनियों के डेटाबेस में सेंधमारी करते हैं और उसे हैक कर लेते हैं। आपने भी कई बार न्यूज़ में सुना होगा कि कभी सरकार की वह वेबसाइट हैक हो गयी तो कभी निजी कंपनी का इतना डाटा चोरी हो (Carding kaise karte hain) गया। तो इसमें उन कंपनियों या लोगों की निजी जानकारियां ही चोरी होती है जो हैकर करते हैं। ऐसे में हैकर आपके क्रेडिट कार्ड की जानकारी को ऑनलाइन चुरा कर उसका इस्तेमाल कार्डिंग में कर सकता है।

फिशिंग (Phishing)

अब आपको कई बार स्पैम कॉल या ईमेल या अन्य कोई संदेश आये होंगे। कार्डर के द्वारा यह सब कुछ आपसे जानकारी लेने के लिए ही किया जाता है। वह आपको स्पैम कॉल कर सकते हैं, फ्रॉड ईमेल, मोबाइल मैसेज या व्हाट्सऐप मैसेज कर सकते हैं, नकली वेबसाइट बना सकते हैं, नकली ऐप बना सकते हैं या ऐसा ही कुछ कर सकते हैं और आपको किसी भी माध्यम से भ्रमित कर आपके क्रेडिट कार्ड या अन्य निजी जानकारी को चुरा कर उनका इस्तेमाल कार्डिंग में कर सकते (Carding kaise ki jati hai) हैं।

स्कीमिंग (Skimming)

आप कई जगह अपना क्रेडिट कार्ड स्वाइप करके पेमेंट करते होंगे तो अगली बार आप जब भी अपना क्रेडिट कार्ड स्वाइप करें तो उस पर ध्यान अवश्य दें। कार्डर के द्वारा बैंक की एटीएम मशीन पर एक चिप लगाई जा सकती है जो आपके क्रेडिट कार्ड की पूरी जानकारी को कॉपी कर लेती है। या फिर आप किसी स्टोर या अन्य जगह पर जाकर उनके क्रेडिट कार्ड रीडर में अपना कार्ड डालकर पेमेंट करते हैं तो उसका भी पूरा ध्यान रखें। वहां भी यह चिप लगी हो सकती है या मशीन में गड़बड़ हो सकती है। बेहतर यही रहेगा कि आप अपने मोबाइल से ऑनलाइन पेमेंट कर दें।

डाटा ब्रीच (Data breaches)

डाटा ब्रीच भी कुछ हद्द तक हैकिंग के समान ही है क्योंकि इसमें भी कंपनियों या लोगों के सिस्टम को हैक कर उसमें सेंधमारी की जाती है। हालाँकि इसे हम साइबर अटैक या वायरस अटैक भी कह सकते हैं। इसमें मुख्य वायरस मैलवेयर अटैक होता है जो सिस्टम में घुस जाता है और फिर धीरे धीरे करके वहां की पूरी जानकारी को निकाल लेता है जो कार्डिंग में इस्तेमाल की जाती है।

डाटा को खरीदना (Purchasing stolen data)

अब इसमें सबसे आखिर का तरीका किसी अन्य हैकर या कार्डर के द्वारा निकाले गए क्रेडिट कार्ड के डाटा को खरीदना होता है। आपको डार्क वेब पर या नॉर्मल इंटरनेट पर भी कई ऐसे लोग मिल जाएंगे जो लोगों के क्रेडिट कार्ड की जानकारी को कुछ पैसों के बदले में बेच रहे होंगे। यह जानकारी बहुत से कार्डर के द्वारा अपने निजी हितों के लिए खरीदी और बेची जाती है।

कार्डिंग क्यों करते हैं? (What is the purpose of carding in Hindi)

अब आपको साथ के साथ यह भी जान लेना चाहिए कि आखिरकार जो लोग कार्डिंग का काम करते हैं, उनके द्वारा ऐसा किस उद्देश्य के तहत किया जाता है। तो उनका उद्देश्य मुख्य रूप से तो पैसे चुराना ही होता है लेकिन किन किन माध्यम से। कहने का अर्थ यह हुआ कि वे पैसा किस चीज़ के लिए चुराते हैं या वह इसे किस तरह से चुरा सकते हैं, आइये जाने इसके बारे में।

  • एक कार्डर के द्वारा जिस भी व्यक्ति का पैसा चुराया जाता है, वह उसके माध्यम से ऑनलाइन शॉपिंग या खरीदारी को अंजाम देता है। मुख्य तौर पर ज्यादातर कार्डर कार्डिंग के माध्यम से ऑनलाइन महँगी शॉपिंग ही करते हैं।
  • इसके अलावा कुछ कार्डर के द्वारा यदि संभव हो तो वे इन पैसों को किसी अन्य कार्ड में भी ट्रांसफर करवा लेते हैं लेकिन यह जोखिमभरा हो सकता है क्योंकि अन्य कार्ड की डिटेल बैंक के पास पहुँच जाती है। तो वे इसके लिए क्रिप्टो करेंसी या ऐसी ही किसी चीज़ का सहारा लेते हैं।
  • कार्डर के द्वारा चोरी की गयी क्रेडिट कार्ड की डिटेल के माध्यम से पैसा बैंक जाकर निकाला भी जा सकता है और उसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • एक कार्डर उन पैसों को किसी अनुचित वित्तीय लेनदेन में भी इस्तेमाल कर सकता है। जैसे कि गलत जगह निवेश करना, हथियार या ड्रग्स खरीदना या आतंकवादी गतिविधियों या हवाला में इस्तेमाल करना इत्यादि।
  • कई बार यह भी देखने में आता है कि व्यक्ति के द्वारा अपनी निजी शत्रुता को अंजाम देने के लिए भी दूसरे को कार्डिंग का शिकार बनाया जाता है।

तो इसके पीछे कई तरह के कारण हो सकते हैं लेकिन जो भी मुख्य कारण थे जिनके लिए कार्डिंग की गतिविधि को अंजाम दिया जाता है, वह हमने आपके सामने रख दिए हैं।

कार्डिंग से कैसे बचें? (Carding se kaise bache in Hindi hindi)

अब अंत में आपको यह भी जान लेना चाहिए कि किस तरह से आप कार्डिंग जैसे साइबर क्राइम से खुद को बचाए रख सकते हैं। चूँकि ऑनलाइन अपराध अब बढ़ता ही जा रहा है और लोग इसमें फंसते जा रहे हैं, खासतौर पर बच्चे और बुजुर्ग तो इससे बचना बहुत ही ज्यादा जरुरी हो गया है। ऐसे में आप कार्डिंग से बचने के लिए क्या कुछ आवश्यक कदम उठा सकते हैं, आइये उनके बारे में जान लेते हैं।

  • सबसे पहले तो आप यह बात गाँठ बाँध लें कि जब कभी भी आप अपने क्रेडिट कार्ड या बैंक की कोई भी अन्य जानकारी किसी के भी साथ सांझा कर रहे होंगे फिर चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, उस समय पूरी सतर्कता बरती जानी जरुरी है। आप यूँ ही किसी को भी अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी बिल्कुल भी ना दें।
  • इसी के साथ ही आपके घर में जो बुजुर्ग, बच्चे या कम पढ़े लिखे या इस बात से अनजान व्यक्ति हैं जो क्रेडिट कार्ड का या बैंक से संबंधित अन्य चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं तो आप उन्हें भी इसके बारे में अवश्य सचेत कर दें।
  • ऑनलाइन कॉल, ईमेल, मैसेज इत्यादि के रूप में भेजे गए किसी भी लिंक या बात पर विश्वास ना करें क्योंकि यह सीधे सीधे कार्डिंग का जरिया बन सकता है।
  • आज के समय में लोग अपने का नाम लेकर या फिर अपने की ही आवाज में और यहाँ तक कि एआई के माध्यम से वीडियो कॉल में भी भ्रमित कर आपसे क्रेडिट कार्ड की जानकारी या ऑनलाइन पैसा माँग सकते हैं, तो ऐसे में सीधे ही उन्हें जानकारी देने या पैसे देने से पहले एक बार फोन काट कर, अपनी ओर से उस व्यक्ति को फिर से मिला लें और फिर कन्फर्म कर लें।
  • क्रेडिट कार्ड के माध्यम से जहाँ भी ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं, यह ध्यान रखें कि वह वेबसाइट सुरक्षित हो और वहां पर लोगों के द्वारा भुगतान किया जाता हो।
  • किसी दुकान या स्टोर पर भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें और देख लें कि जब आप उसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपके सिर के ऊपर ही कैमरा ना हो, मशीन एकदम ठीक हो और उस पर चिप ना लगी हो।
  • हो सके तो आप मॉल, स्टोर इत्यादि पर क्रेडिट कार्ड की बजाये ऑनलाइन भुगतान करें ताकि आप कार्डिंग से बचे रह सकें।

अब इस तरह से आप कार्डिंग की समस्या से बचे रह सकते हैं। हालाँकि बढ़ती हुई तकनीक के साथ रोजाना ही लोगों के साथ ऑनलाइन फ्रॉड करने के तरीके भी बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में हम आपको यही परामर्श देंगे कि आप जितने ज्यादा सतर्क रहेंगे, उतना ही आपके लिए सही रहेगा।

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कार्डिंग कैसे करें – Related FAQs

प्रश्न: कार्डिंग से आपका क्या मतलब है?

उत्तर: यह एक तरह का अपराध होता है जिसे हम साइबर क्राइम या ऑनलाइन धोखाधड़ी कह सकते हैं। इसके तहत एक व्यक्ति आपके क्रेडिट कार्ड की कॉपी या नकल कर लेता है या फिर आपके बैंक की जानकारी को चुरा लेता है।

प्रश्न: कार्डिंग बिजनेस क्या है?

उत्तर: इसके तहत एक व्यक्ति आपके क्रेडिट कार्ड की कॉपी कर लेता है या फिर आपके बैंक की जानकारी को चुरा लेता है। फिर वह उस जानकारी के माध्यम से आपके क्रेडिट कार्ड से खरीदारी कर सकता है या किसी अपराधिक कार्य में पैसा लगा सकता है इत्यादि।

प्रश्न: क्रेडिट कार्डिंग क्या है?

उत्तर: इसके तहत एक व्यक्ति आपके क्रेडिट कार्ड की कॉपी या नकल कर लेता है या फिर आपके बैंक की जानकारी को चुरा लेता है।

प्रश्न: कार्डिंग से कैसे बचें?

उत्तर: कार्डिंग से बचने के उपायों के बारे में जानकारी हमने ऊपर के लेख में विस्तार से दी है जो आपको पढ़नी चाहिए।

तो इस तरह से इस लेख के माध्यम से आपने कार्डिंग कोई कैसे करता है इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर ली है। साथ ही आपने जाना कि कार्डिंग क्या है कार्डर कौन होता है कार्डिंग क्यों की जाती है और कार्डिंग से कैसे बचा जा सकता है इत्यादि। आशा है कि जो जानकारी लेने के लिए आप इस लेख पर आए थे वह आपको मिल गई होगी। यदि कोई शंका आपके मन में शेष है तो आप हम से नीचे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं।

लविश बंसल
लविश बंसल
लविश बंसल वर्ष 2010 में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री ली। शुरुआत से ही इन्हें वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लेना या इससे संबंधित क्षेत्रों में भाग लेना अच्छा लगता था। इसलिए ये काफी समय से लेखन कार्य कर रहें हैं। इनके लेख की विशेषता में लेख की योजना बनाना, ग्राफ़िक्स का कंटेंट देखना, विडियो की स्क्रिप्ट लिखना, तरह तरह के विषयों पर लेख लिखना, सोशल मीडिया कंटेंट लिखना इत्यादि शामिल है।
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