ब्लॉकचेन क्या है? और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी इन हिंदी – अगर आप क्रिप्टो करेंसी में  इन्वेस्ट करते हैं या फिर आपने बिटकॉइन का नाम सुना होगा। तो आपने ब्लॉकचेन का नाम बहुत बार सुना होगा। आज के समय में ब्लॉकचेन का प्रयोग तेजी से होने लगा है। अमेरिका ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के अन्य देशों में गवर्नमेंट डॉक्यूमेंट या अन्य पुराने डाटा के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का प्रयोग करने की बात की जा रही है।

भविष्य में ब्लॉकचेन का काफी वृहद स्तर पर उपयोग होने वाला है। आप भी आए दिन बातों-बातों में ब्लॉकचेन के बारे में चर्चा जरूर सुनते होंगे। लेकिन यदि आपको ब्लॉकचेन के बारे में जानकारी नहीं है, तो आज के आर्टिकल में आपको ब्लॉकचेन के बारे में सारी जानकारी प्रदान करेंगे। यहां पर आपको ब्लॉक चैन की एक बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान की जा रही है –

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी क्या है?

दोस्तों आप सभी ने क्रिप्टो करेंसी का नाम तो सुना होगा क्रिप्टो करेंसी एक डिजिटल करेंसी है जो ब्लॉकचेन पर ही आधारित है। ब्लॉकचेन का निर्माण दो शब्दों से हुआ है ब्लॉक प्लस चैन। यहां पर ब्लॉक का अर्थ बहुत सारी जानकारी एक जगह बॉक्स में एकत्रित करना और चैन का अर्थ अलग-अलग बॉक्स को जोड़ने के लिए एक लंबी चैन का निर्माण करना है।

इसलिए इन दोनों को शब्दों को मिलाकर ब्लॉकचेन का निर्माण हुआ है। क्रिप्टो करेंसी का प्रयोग अलग-अलग बॉक्स में होता है इन दोनों बॉक्स को जोड़ने के लिए चैन का प्रयोग किया जाता है।

बीसवीं सदी में हम डॉक्यूमेंट को संभालने के लिए किसे अलमारी या किसी फाइल का सहारा लेते थे। लेकिन 21वीं सदी में दुनिया के सामने एक नया नाम आया। क्रिप्टो करेंसी को बनाने के लिए ब्लॉकचेन का प्रयोग हुआ है, क्रिप्टो करेंसी कोडिंग के आधार पर बनी हुई है।

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के माध्यम से हम किसी डॉक्यूमेंट को बनाकर उसका डिजिटल रूप में प्रयोग कर सकते हैं। और यह डाटा हमारे पास डिजिटल रूप से ही रहता है। ना तो इसे डिलीट किया जा सकता है और ना ही किसी और जगह पर जाकर समाप्त किया जा सकता है। आने वाले समय में ब्लॉकचेन पूरी दुनिया की टेक्नोलॉजी को बदल सकती है।

ब्लॉकचेन क्या है? और ब्लाकचैन टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?

ब्लॉकचेन कब अस्तित्व में आई?

2009 में जापान के एक व्यक्ति ने क्रिप्टोकरंसी नामक बिटकॉइन का निर्माण किया। और यह बिटकॉइन ब्लॉकचेन पर आधारित था। यानी कि कह सकते हैं कि ब्लॉकचेन का प्रयोग 2009 से किया जा रहा है। जापान में सबसे पहले ब्लॉकचेन का प्रयोग किया गया है। ब्लॉकचेन का प्रयोग मुख्य रूप से क्रिप्टो करेंसी बनाने के लिए किया जा रहा है। लेकिन आने वाले समय में ब्लॉकचेन का प्रयोग डिजिटल डॉक्यूमेंट के लिए भी किया जा सकता है।

ब्लॉकचेन के क्या-क्या फायदे हैं? [What are the benefits of Blockchain?]

आने वाले समय में हमें ब्लॉकचेन के बहुत सारे फायदे मिल सकते हैं जैसे डॉक्यूमेंट को सेव करने के लिए। आज के समय में हम डॉक्यूमेंट को किसी फाइल या किसी लॉकर में रख कर सेव करते हैं। अगर गलती से भी यह डॉक्यूमेंट लॉकर में खराब हो गई तो इनका प्रयोग दोबारा नहीं किया जा सकता है। फाइल में रखने से डॉक्यूमेंट के कई सारे नुकसान होते हैं।

Advantages Blockchain Technology In Hindi –

  • ब्लॉकचेन का प्रयोग डिजिटल रूप से इस्तेमाल इस प्रकार किया जा सकता है। किसी भी डॉक्यूमेंट का कोडिंग करके उसे एक सिस्टम में जाकर सेव कर दिया जाएगा। उसके बाद इस डॉक्यूमेंट को कभी भी देख सकते हैं। या आसानी से किसी दूसरे व्यक्ति को भी सेंड कर सकते हैं।
  • इंटरनेशनल विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लॉकचेन के माध्यम से बिजनेस कार्यप्रणाली में काफी बदलाव आ सकता है। ब्लॉकचेन से लोकतंत्र को सुरक्षित किया जा सकता है।
  • इंटरनेट में किसी बिना मध्यस्थता के दो पक्षों में आसानी से लेनदेन किया जा सकता है।
  • ब्लॉकचेन में डाटा को एक जगह सुरक्षित ना रखकर हजारों कंप्यूटर में डाटा को एकत्रित किया जाता है।
  • ब्लॉकचेन में डेटाबेस एन्क्रिप्टेड होता है जिसमें कई सालों के इतिहास को रखा जा सकता है।
  • ब्लॉकचेन में जब भी नया डाटा एकत्रित किया जाता है तो इसके लिए कंप्यूटर की परमिशन लेनी बहुत जरूरी होती है। बिना परमिशन के कोई भी टाटा ब्लॉकचेन पर ऐड नहीं किया जा सकता।
  • ब्लॉकचेन के माध्यम से व्यक्ति बिना बैंक के सीधा संपर्क कर सकते हैं।
  • ट्रांजैक्शन में बहुत कम समय हो जाता है।
  • जब दो देश पैसे ट्रांसफर करते हैं तो उसमें कम से कम समय लगेगा।
  • कागजी डॉक्यूमेंट की समाप्ति होगी।

अगर आने वाले समय में डॉक्यूमेंट के लिए ब्लॉकचेन का प्रयोग किया जाएगा। तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कागज डॉक्यूमेंट का महत्व कम हो जाएगा। कई पुराने डॉक्यूमेंट को 20 से 40 साल तक ब्लॉकचेन के माध्यम से आसानी से रख सकते हैं। ब्लॉकचेन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कागजी डॉक्यूमेंट के स्थान पर डिजिटल डॉक्यूमेंट का प्रयोग ज्यादा सरल और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए संभव है।

ब्लॉकचेन के क्या क्या नुकसान है? [What are the disadvantages of blockchain?]

जिस प्रकार ब्लॉकचेन के फायदे हैं, उसी प्रकार ब्लॉकचेन के कई सारे नुकसान भी हैं। आइए ब्लॉकचेन के नुकसान के बारे में भी कुछ जानकारी प्राप्त कर लेते हैं –

विकासशील देशों के लिए महंगी है?

ब्लॉकचेन प्रणाली का सबसे बड़ा नुकसान विकासशील देशों के लिए है। क्योंकि वहां की जनता इतनी शिक्षित नहीं होती है कि वह कोडिंग जैसी ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर सकें।

डॉक्यूमेंट डिलीट होने की डर

ब्लॉकचेन का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इससे कोई भी डॉक्यूमेंट को डिलीट कर सकता है। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का यह सबसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

महंगी टेक्नोलॉजी

ब्लॉकचेन को एक महंगी टेक्नोलॉजी माना जा रहा है। क्योंकि इसका प्रयोग करने के लिए ज्यादा से ज्यादा शिक्षित व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ेगी। जो हर देश के लिए संभव नहीं है।

बैंकिंग प्रणाली की समाप्ति

ब्लॉकचेन का सबसे बुरा प्रभाव बैंकिंग प्रणाली पर पड़ने वाला है। ब्लॉकचेन का प्रयोग होने से भारत में ही नहीं बल्कि कई देशों में बैंकिंग प्रणाली समाप्त हो सकती है।

ब्लाकचैन टेक्नोलॉजी का प्रयोग किस प्रकार होता है?

ब्लॉकचेन एक प्रकार की एक्सचेंज प्रोसेस होती है। एक डाटा ब्लॉक पर निर्धारित होती है। प्रत्येक ब्लॉक को एक एप्लीकेशन के द्वारा सुरक्षित किया जाता है। यह दोनों ब्लॉक आपस में इलेक्ट्रॉनिक के माध्यम से कनेक्ट किए जाते हैं। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का प्रयोग डॉक्यूमेंट टाइमस्लेप के लिए किया गया था।

हजारों लाखों ब्लॉक को जोड़ कर ब्लॉकचेन का निर्माण हुआ है। ब्लॉकचेन के माध्यम से किसी बिना मध्यस्थता के लेनदेन किया जा सकता है। ब्लॉकचेन का डाटा एक जगह केंद्रित नहीं होता है। यह अलग-अलग बॉक्सो में विभाजित होता है, इसलिए ब्लॉकचेन का डाटा विकेंद्रीकृत होता है।

ब्लाकचैन डेवलपर किसे कहा जाता है?

ब्लॉकचेन डेवलपर उसे कहा जा सकता है, जो कोई समूह को जोड़ने में और ब्लॉक को आपस में मिलाने के लिए कोडिंग का प्रयोग करता हो। ब्लाकचैन डेवलपर को भी तीन भागों में बांटा गया है। ब्लॉकचेन सिस्टम डेवलपर, ब्लॉकचेन सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर डेवलपर।

ब्लॉकचेन का निर्माण करने के लिए कोडिंग की आवश्यकता पड़ती है। अगर किसी व्यक्ति के पास कोडिंग की जानकारी है, तो वह ब्लॉकचेन का निर्माण कर सकता है। ब्लाकचैन टेक्नोलॉजी का सर्वप्रथम प्रयोग 1901 में किया जा चुका है।

क्या ब्लॉकचेन प्रणाली सुरक्षित है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लॉकचेन प्रणाली सुरक्षित है। क्योंकि इसे हैक करने के लिए सभी कंप्यूटर और सिस्टम को हैक करना जरूरी होता है। एक सिस्टम को हैक करने से कुछ नहीं होता है। अगर आपको कुछ ट्रांजैक्शन हैक करना है तो आप अभी कंप्यूटर सिस्टम को हैक करना पड़ेगा जो संभव नहीं है।

ब्लॉकचेन में  बैंक जैसे सिस्टम को हैक करने से या फिर एक कंप्यूटर को हैक करने से कुछ नहीं होता है। अगर आपको हैकिंग करना है तो आपको पूरे ब्लॉकचेन के नेटवर्क को हैक करना पड़ेगा। बिटकॉइन के लिए ब्लॉकचेन बहुत ही यूनिक था। क्रिप्टो करेंसी में  ब्लॉकचेन सबसे ज्यादा प्रयोग किया जा रहा है।

ब्लॉकचेन में तीन टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाता है –

  1. Private key cryptography
  2. P2P network (peer-2-Peer)
  3. Program (The blockchain’s protocol)

भारत में पहला ब्लॉकचेन जिला कोन सा है?

भारत में भी ब्लॉकचेन प्रणाली का तेजी से विकास होने लग गया है। तेलंगाना राज्य में भारत का पहला ब्लॉकचेन जिला स्थापित किया गया है। तेलंगाना सरकार ने टेक महिंद्रा कंपनी के साथ ब्लॉकचेन के लिए केंद्र बनाने के लिए आपस में समझौता किया है।

भारत ब्लॉकचेन के लिए एक विशिष्ट प्रोटोकॉल निर्धारित करने वाला है। भारत में ब्लॉकचेन का प्रयोग सबसे पहले वर्चुअल कलेक्टर को तकनीक में काम कर रहे लोगों को आपस में जोड़ना है।

क्रिप्टो करेंसी की पीछे की टेक्निक को कैसे जाना जा सकता है?

क्रिप्टो करेंसी की टेक्निक को समझने के लिए सबसे पहले आपको ब्लॉक चैन को समझना होगा कि ब्लॉकचेन क्या है? ब्लॉकचेन कैसे काम करती है। ब्लॉकचेन में कोडिंग कैसे की जाती है। और सिस्टम को आपस में कैसा जोड़ा जाता है। क्रिप्टो करेंसी की पीछे की टेक्निक को समझना बहुत ही आसान हो गया है। 1901 में डॉक्यूमेंट को सेव करने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया था। और 2009 में बिटकॉइन ने ब्लॉकचेन का प्रयोग करके पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है।

क्या भारत में ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी सुरक्षित है?

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। और यहां ब्लॉकचेन जैसी टेक्नोलॉजी एकदम सुरक्षित है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी लोकतांत्रिक देशों के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित है। ब्लाकचैन टेक्नोलॉजी से भारत जैसे देश में भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है। और सरकारी टाटा को चोरी होने से भी रोका जा सकता है।

अगर कोई भी सरकारी डाटा को चोरी करने की कोशिश करता है तो पूरे नेटवर्क को हैक करना पड़ेगा। भारत में सरकारी कागजात के लिए नौकर और अलमारी का प्रयोग किया जाता है। लेकिन अब सरकारी डॉक्यूमेंट के लिए भारत में ब्लॉकचेन प्रणाली का प्रयोग करके सरकारी डॉक्यूमेंट को सेव किया जा सकता है।

ब्लॉकचेन के प्रत्येक ब्लॉक में क्या होता है?

ब्लॉकचेन के प्रत्येक ब्लॉक में ट्रांजैक्शन डीटेल्स होती है। साथ ही सेंडर – रिसीवर और अकाउंट एवं अन्य जानकारी भी इसमें सेव रहती हैं। इन डाटा ब्लॉक को क्रिप्टोग्राफी टेक्नोलॉजी के जरिए इनकोड किया जाता है। और यह छोटे-छोटे ब्लॉक एक दूसरे से जुड़कर एक बड़ी चैन बनाते हैं, जिसे ब्लॉकचेन के नाम से जानते हैं।

ब्लॉकचेन डेवलपर कैसे बने?

ब्लाकचैन डेवलपर बनाने के लिए ब्लॉकचेन कोर्स कई संस्थान और यूनिवर्सिटी द्वारा कराया जाता है। जिसमें आप एडमिशन लेकर सर्टिफाइड कोर्स कर सकते हैं। और ब्लॉकचेन डेवलपर के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं । 

भारत का पहला ब्लॉकचेन जिला कौन सा है?

तेलंगाना राज्य में भारत का पहला ब्लॉकचेन जिला स्थापित किया गया है।

तो दोस्तों ऊपर आपको ब्लाकचैन के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान की गई है। यदि आपको ब्लाकचैन से जुड़ा कोई भी सवाल हो तो आप नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं। साथ ही यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें। ताकि उन्हें भी ब्लाकचैन के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके।। धन्यवाद ।।

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