BJP कब अस्तित्व में आई? BJP का इतिहास क्या है? BJP Full Form In Hindi

यदि इस वक्त किसी राजनीतिक पार्टी की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वह BJP है। आलोचना कहिए या तारीफ, इस वक्त भगवा की धूम है। फिल्में भी इससे अछूती नहीं हैं। मशहूर अभिनेता अजय देवगन की हालिया फिल्म ‘तानाजी-द अनसंग वारियर’ को ही ले लीजिए। इसमें भी भगवा की धूम है। भगवा यानी केसरिया रंग को हिंदुत्व की राह चल रही भाजपा ने अपना रंग बनाया है। कांग्रेस की बुरी गत और भारतीय जनता पार्टी का प्रादुर्भाव किसी से छिपा नहीं है, जिसने उसे सत्ता के शीर्ष पर पहुंचा दिया।

लेकिन दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा या कहिए कि BJP की full form क्या है? इसकी स्थापना कब हुई? यानी यह कब अस्तित्व में आई? या आपको इस पार्टी के इतिहास के बारे में नहीं पता तो आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी देंगे। आइए, शुरू करते हैं –

BJP कब अस्तित्व में आई? BJP का इतिहास क्या है? BJP Full Form In Hindi

BJP Full Form क्या है? BJP Full Form In Hindi –

भाजपा या BJP की full form है -Bhartiya Janta Party यानी भारतीय जनता पार्टी। इसे भाजपा के नाम से भी पुकारा जाता है। इस पार्टी का चुनाव चिन्ह कमल का फूल है और ध्वज भगवा रंग का है । इस वक्त यही पार्टी NDA के गठबंधन तले देश की सत्ता पर काबिज है। नरेंद्र दामोदर मोदी सरकार के मुखिया यानी प्रधानमंत्री हैं।

BJP की स्थापना कब हुई?

अब हम आपको बताएंगे कि BJP की स्थापना कब हुई। लेकिन इसके लिए हमें पहले आवश्यक रूप से जनसंघ के बारे में जानना होगा। मित्रों, भारतीय जनसंघ की स्थापना आज से करीब 69 साल पहले सन् 1951 में हुई थी। इसके बाद सन् 1977 में जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हो गया। इसी जनता पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके तीन ही साल बाद सन् 1980 में जनसंघ के सदस्यों ने दोबारा मिलकर भारतीय जनता पार्टी बनाई।

इसकी स्थापना मुख्य रूप से देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेई और लालकृष्ण आडवाणी ने 6 अप्रैल, 1980 में की। और इस साल 6 अप्रैल को यह पार्टी अपनी स्थापना के 40 साल पूरे कर लेगी।

BJP का इतिहास – 1984 में दो सीटों से हुआ सफर –

आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा हिंदूत्व, राष्ट्रवाद के इर्द गिर्द घूमती है। संगठनात्मक रूप और विचारधारा के आधार पर देखें तो यह पार्टी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के नजदीक है। मित्रों, अब आपको पार्टी की प्रगति से अवगत कराते हैं। दरअसल, जब पार्टी ने 1984 में चुनाव लड़ा था तो उसकी केवल दो ही सीट आई थी, लेकिन धीरे-धीरे पार्टी ने खुद को मजबूत किया । हिंदुत्व का झंडा बुलंद किया और इस मुद्दे को हवा दी। यही वजह थी कि सन् 1992 में राम मंदिर आंदोलन के बाद भाजपा के पैर पूरी तरह से जम गए।

सन् 1996 में संसद में सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ही बनकर उभरी। यह अलग बात है कि निचले सदन में सरकार बहुमत साबित नहीं कर सकी और अटल बिहारी वाजपेई की सरकार गिर गई। आज की डेट में बात करें तो अधिकांश राज्यों में इस वक्त भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार है। अखिल भारतीय स्तर पर इसकी मौजूदगी है और पार्टी का कार्यालय भी नई दिल्ली में स्थित है।

1998 के आम चुनाव के बाद बना NDA –

1990 के दशक से ही पार्टी ने पैर जमा लिए थे। उसके बाद पार्टी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सन् 1998 के आम चुनाव के बाद भाजपा की अगुवाई वाला गठबंधन NDA कहलाया। इसी के तहत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सरकार बनाई, जो एक साल चली। इसके बाद फिर चुनाव हुए और फिर वाजपेयी सरकार सत्ता में आई। इसने कार्यकाल पूरा किया। यह पहली ऐसा करने वाली पहली गैर कांग्रेसी सरकार थी। सन् 2004 के आम चुनाव में एनडीए को हार मिली। ऐसा सोचा नहीं गया था। अगले दस साल तक भाजपा संसद में प्रमुख विपक्षी पार्टी बनी रही।

लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी ने भाजपा को 2014 के आम चुनाव में बड़ी कामयाबी दिलाई। फरवरी, 2019 तक वह सरकार के मुखिया या कहिए प्रधानमंत्री रहे। इसके बाद 2019 के आम चुनाव भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लड़े गए और इस बार फिर से नरेंद्र मोदी भाजपा की बड़ी जीत के साथ सत्ता में लौटे। हालांकि इस दफा पहले के मुकाबले पार्टी को सीटें कम मिल पाईं थीं। नरेंद्र मोदी को फिर से बतौर प्रधानमंत्री सरकार की कमान सौंपी गई। इसी बार अमित शाह को उनके बेहतर प्रदर्शन का पुरस्कार मिला। उन्हें गृहमंत्री बना दिया गया।

पुराने और बड़े नेता किए गए दरकिनार –

भाजपा में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के अभ्युदय के साथ ही पुराने और बड़े नेताओं को दरकिनार किए जाने का सिलसिला शुरू हो गया। दो संस्थापकों समेत नेताओं की तिकड़ी, जिन्होंने पार्टी के लिए जी जान लगाई और उसे सींचा था यानी अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, उनको साइडलाइन कर दिया गया। पार्टी के साथ कुछ बुरा यह भी हुआ कि इसके कुछ नेताओं को बीमारी के चलते जान से हाथ धोना पड़ा। यह सिलसिला अटल बिहारी वाजपेई के साथ शुरू हुआ और इसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली, गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर, सुषमा स्वराज, प्रकाश पंत आदि इन नेताओं के जाने से भाजपा को निश्चित रूप से कहीं ना कहीं नुकसान जरूर पहुंचा है।

यह है भाजपा के आनुषंगिक संगठन –

तमाम राजनीतिक पार्टियों की ही तरह भाजपा के भी कुछ आनुषंगिक संगठन हैं। इनमें से कुछ अघोषित तरीके से भी काम करते हैं। हर पार्टी की तरह इसकी भी एक स्टूडेंट विंग है- जैसे कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी अभाविप। इसे ABVP भी पुकारा जाता है। इसको भाजपा की विद्यार्थी विंग माना जाता है। हालांकि इस बारे में कोई अधिकृत घोषणा नहीं की गई है। इसके अलावा भाजपा की युवा विंग को भारतीय जनता युवा मोर्चा यानी भाजयुमो के नाम से जाना जाता है।

भाजपा की मजदूरों से जुड़ी शाखा भारतीय मजदूर संघ कहलाती है। वहीं, किसानों से जुड़ी जो शाखा है, वह भाजपा किसान मोर्चा के नाम से जानी जाती है। दोस्तों, यह संगठन भाजपा के लिए ही काम करते हैं और चुनाव आते हैं तो यह संगठन संगठित रूप से भाजपा को जिताने के लिए जी जान लगा देते हैं।

BJP 180 मिलियन सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी –

भाजपा इस वक्त देश की सबसे बड़ी पार्टी है और प्राथमिक सदस्यता के आधार पर यह 180 मिलियन सदस्यों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। यह आंकड़ा 2019 में जारी किया गया था। भाजपा ने अपने तत्कालीन अध्यक्ष और वर्तमान में गृहमंत्री अमित शाह की अगुवाई में बेहतरीन प्रदर्शन किया। कुछ ही समय पहले हुए चुनाव में जेपी नड्डा को पार्टी की कमान स्थाई रूप से सौंप दी गई है।

जेपी नड्डा के पास अब भाजपा को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है। उनकी अभी जिम्मेदारी है कि यह अपनी बेसलाइन हिंदू राष्ट्रवाद को बरकरार रखते हुए अपनी परफॉर्मेंस को बरकरार रखें। और साथ ही साथ आरएसएस के एजेंडे को भी पूरा करने का काम करें। करीब साल भर तक अमित शाह ने दोहरी जिम्मेदारी उठाई। गृहमंत्री रहते हुए ही अध्यक्ष पद का भी निर्वहन किया।

कैडर बेस्ड पार्टी है भारतीय जनता पार्टी

भारतीय जनता पार्टी को कैडर बेस्ड पार्टी कहा जाता है । और यह माना जाता है कि इसका क्या कैडर वोट बहुत मजबूत होता है। जो कभी भी इधर-उधर नहीं जाता। यही वजह है कि जब हाल ही में देश में आम चुनाव हुए थे तो सारे विपक्षी पार्टियां कांग्रेस के साथ एक साथ आ गई थी। जिसका खाली एक ही मकसद था कि किसी भी तरह नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने से रोकना, भारतीय जनता पार्टी को सत्तासीन होने से रोकना। यह अलग बात है कि इन तमाम पार्टियों की मंशा कामयाब नहीं हो सकी। और एक बार फिर से भाजपा ने भगवा लहराते हुए सत्ता पर परचम लहराया।

कई फैसलों की वजह से रही विवाद में –

सन्स 2019 के आम चुनाव के बाद भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार दोबारा सत्ता में लौटी। जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं।सत्ता में लौटने के बाद भारतीय जनता पार्टी अपने कई फैसलों की वजह से आलोचनाओं के केंद्र में रही। पहला फैसला था, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का। यह एक ऐसा कार्य था, जिसे कतई आसान नहीं माना जा सकता। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के तमाम विपक्षी नेताओं को हालात बिगड़ने और हिंसा की आशंका को देखते हुए नजर बंद कर दिया गया। इसके बाद अपने घोषणापत्र पर काम करते हुए पार्टी ने राम मंदिर मसले को सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ाए। नौ नवंबर को इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया और रामलला को उनका हक मिला।

अब सीएए, एनआरसी पर जारी है गतिरोध –

इस वक्त नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर अर्थात एनआरसी और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर को लेकर गतिरोध जारी है । नई दिल्ली का शाहीन बाग सीएए का विरोध करने वालों का अड्डा बना हुआ है। एक पखवाड़े से भी ज्यादा समय से वहां पर मुस्लिम समुदाय के लोग और एनआरसी का विरोध करने के लिए मौजूद है। देश भर में कहीं सीएए के समर्थन में तो कहीं सीएए के विरोध में प्रदर्शन चल रहा है। एक तरफ सरकार यह कह रही है कि सीएए की वजह से किसी की भी नागरिकता खतरे में नहीं आएगी। वही मुस्लिमों को इसके दायरे से बाहर रखे जाने पर मुस्लिम नाखुश हैं। उनका कहना है कि इसकी आड़ में उन्हें नागरिकता से वंचित कर दिया जाएगा। इसे लेकर गतिरोध चल रहा है।

धरने प्रदर्शनों का क्रम जारी है। अभी देखना है कि इस संबंध में ऊंट किस करवट बैठता है। हालांकि, सरकार ने अपने मंत्रियों को इस कवायद में उतार दिया कि वे देश के लोगों को इसके फायदों के प्रति जागरूक करें।

तो दोस्तों यदि भारतीय जनता पार्टी और उसके इतिहास से जुड़ी सूक्ष्म से सूक्ष्म जानकारी जो कि कोई भी जानना चाहेगा अगर आप इस विषय से संतुष्ट है तो अपनी राय हम तक नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पहुंचा सकते हैं इसके अलावा अगर किसी अन्य बिंदु के बारे में जानकारी चाहते हैं तो भी कमेंट बॉक्स में अपनी बात लिख कर आप अपनी बात हम तक भेज सकते हैं इसके अलावा किसी और विषय के बारे में जानने की इच्छुक हैं तो उस विषय के बारे में लिखकर हम तक अपना विषय पहुंचा सकते हैं इसके अलावा और कुछ सुझाव भी आप देना चाहते हैं तो भी आपको खुले दिल से स्वागत है इसी तरह से आप अपना सकते हमारी उम्मीद रहेगी कि आप करने की पूरी कोशिश करें।‌ धन्यवाद।।

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