असिस्टेंट प्रोफेसर कैसे बनें? योग्यता, स्किल्स एवं सैलरी | How to become College Professor in India?

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टीचर का जाॅब हमारे समाज में सर्वाधिक सम्मानजनक माना जाता है। टीचर प्राथमिक स्कूल में हो, माध्यमिक में अथवा डिग्री कालेज में। ज्यादातर लोग टीचिंग से जुड़ना चाहते हैं एवं अधिकांश छात्राओं का तो सपना ही पढ़ाने की जाॅब हासिल करना होता है। डिग्री कालेज, विश्वविद्यालय में शिक्षण का कार्य असिस्टेंट प्रोफेसर के पद से शुरू होता है।

एक असिस्टेंट प्रो़फेसर (assistant professor) एसोसिएट प्रोफेसर (associate professor) के पद पर पदोन्नत होकर बाद में प्रोफेसर (professor) के पद तक पहुंचता है।

आज हम इस पोस्ट में आपको बताएंगे कि आप प्रोफेसर कैसे बन सकते हैं, इसके लिए किस योग्यता एवं स्किल (skils) की जरूरत है, एवं आपकी सैलरी क्या होगी। तो देर किस बात की, आइए शुरू करते हैं-

असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए आवश्यक योग्यता

आपको बता दें कि असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए किसी भी stream से मास्टर डिग्री 55 प्रतिशत अंकों के साथ होना आवश्यक है। अनुसूचित जाति (sc), अनुसूचित जनजाति (st) एवं अन्य पिछड़े वर्ग (obc) के अभ्यर्थियों के लिए 50 फीसदी अंक लाना आवश्यक किया गया है। इसके पश्चात उन्हें नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (national eligibility test) यानी नेट (NET) उत्तीर्ण करना होता है।

इसके पश्चात पीएचडी (PhD) करनी होती है। आपको बता दें कि नेट नामक यह अर्हता परीक्षा राष्ट्रीय स्तर (national level) पर होती है एवं देश भर के काॅलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए योग्य होने को पास करनी आवश्यक होती है।

असिस्टेंट प्रोफेसर कैसे बनें? योग्यता, स्किल्स एवं सैलरी | How to become College Professor in India?

इसके अलावा राज्य स्तर पर इस पद के योग्य बनने के लिए स्लेट (SLET) यानी स्टेट लेवल एलिजिबिलिटी टेस्ट (state level eligibility test) होता है। नाम से ही स्पष्ट है कि यही परीक्षाएं पास कर आप पढ़ाने के लिए अर्ह माने जाएंगे।

नेट की जिम्मेदारी एनटीए (NTA) के पास

आपको बता दें कि अमूमन यह परीक्षाएं जून एवं दिसंबर में आयोजित की जाती हैं। पहले नेट परीक्षा कराने का जिम्मा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (university grants commission) यानी यूजीसी (UGC) के पास था, लेकिन पिछले दो वर्षों से इस परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी एनटीए (NTA) यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (national testing agency) को सौंप दी गई। कोरोना (corona) की वजह से सत्र लेट हो गया है।

दिसंबर 2020 एवं जून 2021 की परीक्षा अब दिसंबर 2021 में जाकर कराई जा सकी है। आपको यह भी जानकारी दे दें कि असिस्टेंट प्रोफेसर बनने को नेट परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा एनटीए की ओर से निर्धारित नहीं की गई है। इसका अर्थ यह है कि आप किसी भी उम्र में यह टेस्ट दे सकते हैं।

नेट में कितने पेपर होते हैं?

यह एक महत्वपूर्ण जानकारी है। नेट में दो पेपर होते हैं। पेपर-1 एवं पेपर-2। आपको बता दें कि पेपर-1 सामान्य पेपर (general paper) होता है, जिसमें टीचिंग एवं एप्टीट्यूड (teaching and aptitude) पर आधारित सामान्य सवाल होते हैं। यानी परीक्षाथी की शिक्षण एवं शोध योग्यता (teaching and research skills) का आकलन किया जाता है।

इसमें जनरल अवेयरनेस (general awareness) के साथ ही रीजनिंग एबिलिटी (reasoning ability), कांप्रेहेंशन (comprehension) आदि से जुड़े प्रश्न आते हैं। वहीं पेपर-2 विषय आधारित पेपर होता है। इसमें आपके द्वारा चुने गए विषय में से प्रश्न आते हैं। आपकी आपके विषय की समझ संबंधी जानकारी का आकलन किया जाता है।

आपको बता दें कि परीक्षार्थी को 81 विषयों में से अपने स्नातकोत्तर के विषय को चुनना होता है। अंक प्रतिशत संबंधी जानकारी तो हम आपको ऊपर दे ही चुके हैं।

प्रोफेसर बनने के लिए आवश्यक स्किल्स

जो स्किल्स प्रोफेसर बनने के लिए आवश्यक माने गए हैं, उनमें सबसे पहले है शिक्षण अभिरूचि। यानी पढ़ाने में उनकी दिलचस्पी। पढ़ाने के तरीकों को क्रिएटिव बनाने की समझ। साथ ही टाइम मैनेजमेंट की उनकी क्षमता। नेट एवं स्लैट के जरिए छा़त्र छात्राओं की इसी खूबी को जांचने की कोशिश की जाती है।

मसलन उनका टीचिंग एप्टीट्यूड क्या है? उनका प्राॅब्लम साॅल्विंग स्किल (problem solving skills) क्या है। जनरल एवेयरनेस के जरिए उनका सामान्य ज्ञान एवं दीन दुनिया की उनकी जानकारी को भी परखा जाता है। इसके अलावा आईसीटी (ICT) यानी इन्फाॅरमेशन एवं कम्युनिकेशन टेक्नोलाजी (information and communication technology) पर आधारित सवालों के माध्यम से सूचना एवं उसके नए उपकरणों के प्रति आपकी जानकारी को भी कसौटी पर परखा जाता है।

असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर तक की सैलरी कितनी

आम तौर पर एक नेट क्वालिफाइड (NET qualified) असिस्टेंट प्रोफेसर की औसत सैलरी 45 हजार रूपये से शुरू होती है। एक एसोसिएट प्रोफेसर के बतौर उन्हें 80 हजार, जबकि एक प्रोफेसर के रूप में उन्हें 82 हजार प्रतिमाह सैलरी मिल सकती है। वस्तुतः उनके अनुभव एवं इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुसार उनकी सैलरी निर्धारित होती है।

वहीं सरकारी नौकरी में यूजीसी द्वारा निर्धारित पे बैंड (pay band) के अनुसार उन्हें सैलरी प्रदान की जाती है। इसके अनुसार इतनी सैलरी निर्धारित की गई है-

  • 6000 एजीपी वाले असिस्टेंट प्रोफेसर-57,700
  • 7000 एजीपी वाले असिस्टेंट प्रोफेसर-68,900
  • 8000 एजीपी वाले असिस्टेंट प्रोफेसर-79,800
  • 9000 एजीपी वाले एसोसिएट प्रोफेसर-1,31,400
  • 10,000 एजीपी वाले प्रोफेसर-1,44,200
  • एचएजी स्केल वाले प्रोफेसर-1,82,00

(यहां एजीपी AGP से अर्थ एनुअल ग्रे पे (annual grade pay) से है)

सरकारी स्तर पर लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती

दोस्तों, आपको बता दें कि सरकारी स्तर पर लोक सेवा आयोग के यानी पब्लिक सर्विस कमीशन (public service commission) के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए भर्ती निकाली जाती है। यही परीक्षा (exam) एवं इंटरव्यू (interview) का आयोजन करता है।

आपको बता दें कि हर राज्य का अपना लोक सेवा आयोग होता है, जो इस परीक्षा का आयोजन करता है। मसलन उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी कालेजों के पदों पर भर्ती के लिए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग भर्ती निकालता है।

समय समय पर विभिन्न विश्वविद्यालय रिक्तियां निकालते हैं

समय समय पर विभिन्न विश्वविद्यालय असिस्टेंट, एसोसिएट एवं प्रोफेसर की भर्ती के लिए रिक्तियां निकालते हैं। प्रोफेसर की भर्ती के लिए अभ्यर्थी के लिए पीएचडी होना भी आवश्यक होगा। इसके अतिरिक्त उसे इस पद अनुभव की भी आवश्यकता होगी। वहीं, पीजी एवं नेट करने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के बतौर अप्लाई (apply) किया जा सकता है।

इसके बाद इंटरव्यू होगा। मेरिट के आधार पर आपकी नियुक्ति तय की जाएगी। अभ्यर्थियों को इन पदों पर नियुक्ति के लिए यूजीसी की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन करना होगा।

दो साल के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में पीएचडी की बाध्यता समाप्त

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कुछ ही समय पूर्व यह महत्वपूर्ण घोशणा की है। उनके अनुसार कोरोना महामारी की वजह से पिछले दो साल से छात्र अपनी पढ़ाई सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। आलम यह है कि कई छात्र अपे शोध को भी पूरा नहीं कर सके। इसे देखते हुए दो साल के लिए पीएचडी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। यह छूट एक जुलाई, 2021 से शुरू की गई थी, जो अब जुलाई, 2023 तक जारी रहेगी।

इससे विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी को दूर किया जा सकेगा। समय पर शिक्षण कार्य पूरा होगा। इससे छात्र छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। इसके अलावा नेट उत्तीर्ण, किंतु पीएचडी न किए अभ्यर्थी विभिन्न विश्वविद्यालयों में केवल नेट के आधार पर भी नौकरी पाने की सहूलियत पा सकेंगे। इसके लिए अर्ह होंगे। सरकार के इस फेसले से हजारों छात्र छात्राओं को सुविधा मिलेगी।

तीन साल पहले 2018 में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए नेट संग पीएचडी को जरूरी किया गया था

मित्रों, आपको बता दें कि इससे पूर्व 2018 में यानी तीन साल पहले केंद्र सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए केवल नेट ही नहीं, बल्कि पीएचडी को भी अनिवार्य किया था। 2018 से पूर्व केवल नेट के आधार पर भी असिस्टेंट प्रोफेसर बना जा सकता था।

केंद्र के इस फेसले से हजारों ऐसे छात्र छात्राओं को धक्का लगा था, जिन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के सपने को पूरा करने के लिए अपने पोस्ट ग्रेजुएशन के पश्चात बहुत मेहनत कर नेट की परीक्षा को उत्तीर्ण किया था।

भारत का हायर एजुकेशन सिस्टम अमेरिका एवं चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा सिस्टम

दोस्तों, यह बात आपको निश्चित रूप से अपने देश पर गौरव करने को विवश करेगी कि अमेरिका एवं चीन के पश्चात भारत का उच्च शिक्षा तंत्र यानी हायर एजुकेशन सिस्टम (higher education system) विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सिस्टम है। यदि पिछले 50 वर्ष पर गौर करें तो देश में विश्वविद्यालयों की संख्या में 11.6 गुणा एवं कालेजों की संख्या में 12.5 गुणा की बढ़ोत्तरी हुई है।

वहीं, छात्र छात्राओं की संख्या में 60 गुणा, जबकि शिक्षकों की संख्या में 25 गुणा की बढ़ोत्तरी हुई है। यह तो आप जानते ही हैं कि उच्च शिक्षा के अंतर्गत विश्वविद्यालय (University), व्यावसायिक विश्वविद्यालय, कम्युनिटी कालेजेज (community Colleges), लिबरल आर्ट काॅलेज (liberal arts college) एवं टेक्नोलाजी संस्थान (technology institute) आदि प्रमुख तौर पर आते हैं।

हमारे देश में प्राइमरी एवं मिडिल के पश्चात यह शिक्षा का तीसरा चरण है। इसके तहत ग्रेजुएशन, पीजी एवं डाॅक्टोरल आदि की डिग्री को रखा गया है।

नई शिक्षा नीति से उच्च शिक्षा का स्वरूप बदलने की तैयारी

साथियों, यह तो आपको विदित ही है कि केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति यानी न्यू एजुकेशन पाॅलिसी (new education policy) अर्थात EP की घोषणा कर चुकी है। इसके माध्यम से उसकी तैयारी उच्च शिक्षा का स्वरूप बदलने की है। वह भारत को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वर्ल्ड स्टडी डेस्टिनेशन (world study destination) बनाने की इच्छुक है। साथ ही उसने आने वाले 2030 तक उच्च शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण (internationalisation) करने का लक्ष्य रखा है।

इसके लिए उसकी तैयारी दुनिया के 100 टाॅप के विश्वविद्यालयों में से कुछ को भारत में काम करने की अनुमति देने की भी है। ऐसी टाॅप यूनिवर्सिटीज (top universities) को भारत में प्रवेश करने एवं काम करने की अनुमति दी जाएगी। उनका प्रवेश आसान करने के लिए आवश्यक कानूनी सुधार (law reforms) करने की भी सहमति बनी है।

बताया गया है कि ऐसी यूनिवर्सिटीज को प्रशासनिक स्तर (administrative level) पर विशेष दर्जा प्रदान किया जाएगा। इसके साथ देश की अन्य स्वायत्त शिक्षण संस्थाओं की तरह उन्हें छूट दी जाएगी।

भारत में उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना होगी

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत शिक्षा में सुधार के नाम पर कई नए कदम उठाए जा रहे हैं। आपको बता दें कि इसी के अंतर्गत भारत में उच्च शिक्षा आयोग यानी हायर एजुकेशन कमीशन (higher education commission) की स्थापना की जाएगी, जिनके माध्यम से विदेश के विश्वविद्यालयों को भी भारत में अपने पैर फैलाने का अवसर प्राप्त होगा।

आपको लगे हाथ यह भी जानकारी दे दें कि भारत से 26 प्रतिशत छात्र छात्राएं विदेश में उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करते हैं। इनमें से बहुतों को विदेश में शिक्षा का अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में यदि भारत में ही विदेशी यूनिवर्सिटी का कैंपस होगा तो उनका विदेशी विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त करने का सपना साकार हो सकेगा।

आपको बता दें कि एक अनुमान के अनुसार एजुकेशन सेक्टर (education sector) सर्वाधिक फलने फूलने वाला सेक्टर बनने जा रहा है। ऐसा होने से शिक्षण क्षेत्र से जुड़े लोगों को तो लाभ होगा ही, छात्र छा़त्राओं के सामने भी शिक्षा प्राप्त करने के वृहद एवं श्रेष्ठ विकल्प खुले रहेंगे। लेकिन यह भी फैक्ट है कि इसके लिए अभी समय एवं संसाधनों की आवश्यकता होगी।

सरकार ने इसके लिए कागजी स्तर पर तो काम पूरा कर लिया है। अब ग्राउंड पर उसकी तैयारी देखने की बारी है। यह आप भी जानते हैं कि उच्च शिक्षण संस्थान बढ़ेंगे तो असिस्टेंट प्रोफेसरों जैसे पद भी बड़ी मात्रा में सृजित होंगे, जिससे देश के ही उच्च शिक्षण के क्षेत्र में काम करना चाहने वाले नौजवानों का भला होगा।

असिस्टेंट प्रोफेसर की अर्हता के लिए कौन सी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी?

असिस्टेंट प्रोफेसर की अर्हता के लिए नेट यानी एनईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। इसकी फुल फाॅर्म नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा है।

प्रोफेसर बनने के लिए किन पदों को पार करना होता है?

असिस्टेंट प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर के बाद ही प्रोफेसर बना जा सकता है।

नेट एवं स्लेट में क्या अंतर होता है?

नेट करने के बाद देश भर के कालेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की अर्हता प्राप्त की जा सकती है, जबकि स्लेट स्टेट लेवल यानी राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा होती है।

असिस्टेंट प्रोफेसर की तनख्वाह कितनी होती है?

यूजीसी के नोटिफिकेशन के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर की तनख्वाह 57,700 रूपये से शुरू होती है।

निजी संस्थानों में तनख्वाह संबंधी गाइडलाइन को फाॅलो किया जाता है?

जी नहीं, ज्यादातर संस्थान इस गाइडलाइन को ताक पर रखकर तनख्वाह निर्धारित करते हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसर की अर्हता के लिए नेट करने को कितनी अधिकतम उम्र निर्धारित की गई है?

असिस्टेंट प्रोफेसर की अर्हता के लिए नेट करने को कोई भी अधिकतम उम्र निर्धारित नहीं की गई है। यानी कि आप किसी भी
उम्र में इस परीक्षा में बैठ सकते हैं।

मित्रों, हमने आपको प्रोफेसर के पद के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उम्मीद है कि प्रोफेसर बनने की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह पोस्ट बहुत उपयोगी साबित होगी। यदि आप भी प्रोफेसर बनने की इच्छा रखते हैं तो इस पोस्ट से लाभान्वित हो सकते हैं। पोस्ट आपको कैसी लगी? यदि इस संबंध में आपका कोई सवाल भी है तो आप हमें नीचे दिए गए कमेंट बाक्स में कमेंट करके भेज सकते हैं। आपकी प्रतिक्रियाओं का हमें इंतजार है। ।।धन्यवाद।।

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