बैडमिंटन खेल के नियम, फायदे, प्रक्रिया | Badminton Khel Ke Niyam

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भारत सहित दुनिया में कई तरह के खेल खेले जाते हैं। इसमें किसी देश में कोई खेल प्रसिद्ध होता है तो किसी देश (Badminton game rules in Hindi) में कोई। वैसे तो भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी है लेकिन भारत के सबसे प्रचलित खेल की बात की जाए तो उसमे क्रिकेट के नाम आता हैं। हालाँकि पिछले कुछ वर्षों में जिस खेल ने भारत सहित दुनिया में प्रसिद्धि बटोरी (Badminton ke rules in Hindi) है वह है बैडमिंटन का खेल।

बैडमिंटन का खेल एक ऐसा खेल है जो ना केवल घर के अंदर बल्कि घर के बाहर, कहीं भी सुरक्षित तरीके से खेला जा सकता हैं। इसे खेलते समय चोट इत्यादि लगने का डर (Badminton khel ke niyam in Hindi) भी बहुत कम होता हैं। ऐसे में यदि आप भी बैडमिंटन खेलते हैं और आप (Badminton khel par nibandh) इसके नियम जानना चाहते हैं तो आज के इस लेख में हम आपसे बैडमिंटन खेल के नियम के बारे में ही चर्चा करेंगे।

बैडमिंटन खेल के नियम (Badminton khel ke niyam)

यदि आप बैडमिंटन खेल के नियमो के बारे में जानना चाहते हैं तो पहले आपको इसके बारे में अच्छे से जानना आवश्यक हैं। यदि आपको बैडमिंटन खेल खेलने के बारे में ही नही पता होगा तो फिर आप इस खेल के नियम जानकर क्या करेंगे। इसलिए आइए पहले जानते हैं कि बैडमिंटन खेल क्या होता है और इसे कैसे खेला जा सकता है।

बैडमिंटन खेल के नियम, फायदे, प्रक्रिया | Badminton Khel Ke Niyam

बैडमिंटन कैसे खेलते है? (Badminton kaise khelte hain)

बैडमिंटन खेल एक तरह का खेल है जिसमें दो व्यक्ति या दो से अधिक व्यक्ति लेकिन जोड़े में खेल सकते हैं। हालाँकि यह सामान्यतया 2 या 4 व्यक्तियों के बेच में ही खेला जा सकता हैं। इसमें दोनों व्यक्ति एक दूसरे की ओर मुख करके अर्थात आमने सामने खड़े होते हैं। दोनों के हाथ में (Badminton khel kya hai) एक एक रैकेट होता हैं जिनकी सहायता से उन्हें खेलना होता हैं।

उन दोनों के बीच में एक नेट लगा होता है जो दोनों की सीमा का निर्धारण करता है। अब दोनों को एक शटलकॉक के साथ खेलना होता है जिसे आम भारतीय भाषा (Badminton game ke bare mein bataiye) में चिड़ी भी कह दिया जाता है। अब एक व्यक्ति उस चिड़ी को दूसरे के पाले में अपने रैकेट के जरिये फेंकता है और फिर दूसरा व्यक्ति उसे बिना नीचे गिराए अपने बल्ले की सहायता से दूसरे के पाले में फेंकता है।

जिस किसी की भी चिड़ी अपने पाले में गिर जाती हैं या जमीन को छू जाती हैं तो उसके विपक्षी खिलाड़ी को एक अंक मिल जाता हैं। इस तरह निर्धारित अंकों में जिस व्यक्ति के अंक पहले पूरे हो जाते हैं उसको विजयी घोषित कर दिया जाता है।

बैडमिंटन खेल में आवश्यक चीज़े व उनकी परिभाषा (Badminton game ke bare mein jankari)

अब यदि आप बैडमिंटन खेल खेल रहे हैं तो आपको इसमें इस्तेमाल होने वाली चीज़े या काम आने वाली चीजों के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी होनी चाहिए। आइए (Badminton game ke bare mein) एक एक करके इनके बारे में भी जाने।

बैडमिंटन खेल का मैदान (Badminton court size in feet)

सबसे पहले बात करते हैं बैडमिंटन खेल के मैदान की। किसी भी खेल को खेलने के लिए एक मैदान निर्धारित होता है। ठीक उसी तरह बैडमिंटन खेल का भी एक मैदान होता है। यह मैदान सामान्य होना चाहिए और इसमें बीच में कोई खुरदरी चीज़ या उबड़ खाबड़ नही होना चाहिए। साथ ही बैडमिंटन खेल के मैदान में कुछ रंगदार लाइन्स बनी होती हैं जो दोनों खिलाड़ियों की सीमा निर्धारित करती हैं।

इसे बैडमिंटन के मैदान को खेल की भाषा में बैडमिंटन कोर्ट का नाम दिया जाता है। इस कोर्ट की भी एक निर्धारित लम्बाई, चौड़ाई होती है। एक बैडमिंटन कोर्ट 44 फीट लंबा व 17 फीट चौड़ा होना आवश्यक होता है। हालाँकि यदि यह डबल में अर्थात चार व्यक्ति खेल रहे हैं तो इसकी चौड़ाई 17 फीट से बढ़कर 20 फीट हो जाती है।

इस बैडमिंटन कोर्स में दोनों खिलाड़ियों (Badminton court rules in Hindi) के मैदान में भी उसकी बाहरी ओर विभिन्न रंगों में पंक्तियाँ या लाइन्स बनाई जाती हैं जो उस खिलाड़ी की सीमा को प्रदर्शित करती हैं। यदि शटल इससे बाहर जाती हैं तो फिर जिसके पामे यह गिरी है, उस खिलाड़ी को एक अंक प्राप्त होता है। साथ ही यदि वह खिलाड़ी इससे बाहर जाकर मारता है या बाहर पैर रखता है तो उसका फाउल हो जाता है और सामने वाले खिलाड़ी को एक अंक मिल जाता है।

बैडमिंटन रैकेट या बल्ला (Badminton racket in Hindi)

अब बात करते हैं बैडमिंटन खेल में इस्तेमाल होने वाले बल्ले की। दरअसल बैडमिंटन जिस खेल से खेला जाता हैं और जिसे दोनों खिलाड़ी अपने हाथों में पकड़ते हैं उसे रैकेट या बल्ला कहा जाता है। यह आगे से अंडाकार रूप में जबकि पीछे से एक डंडे के रूप में होता है। इसका निर्माण हल्के धातु से किया जाता है ताकि यह ज्यादा भारी ना हो और आसानी से बैडमिंटन खेला जा सके।

बैडमिंटन रैकेट में अंडाकार जगह का निर्माण धागेनुमा प्लास्टिक से किया जाता हैं ताकि इससे शटल को स्ट्रोक किया जा सके। इसे चारों ओर से धातु से बांधा जाता है। नीचे धातु का बना डंडा होता है। अंत में इसे पकड़ने के लिए एक हैंडल होता है जिस पर कपड़े, प्लास्टिक या किसी अन्य चीज़ की परत चढ़ाई जाती है। खिलाड़ी इसी हैंडल को पकड़ कर शटल को स्ट्रोक करते हैं।

एक रैकेट का सामान्यतया वजन 70 से 100 ग्राम के बीच में होना चाहिए अन्यथा इसे पकड़ कर खेलना और शटल को स्ट्रोक करना मुश्किल हो सकता है। साथ ही बैडमिंटन बल्ले की उंचाई 600 मिलीमीटर के आसपास और चौड़ाई 250 मिलीमीटर के आसपास होनी चाहिए।

बैडमिंटन शटल या चिड़ी (Badminton shuttlecock in Hindi)

अब बात करते हैं बैडमिंटन के खेल में जिसे इधर से उधर स्ट्रोक किया जाता है और एक दूसरे का फ़ाउल कर या अंक बटोर कर जीता जाता है, उस चिड़ी की। इसे खेल की भाषा में शटलकॉक या केवल शटल भी कह दिया जाता हैं। हालाँकि आम भारतीय भाषा में इसे चिड़ी कहकर संबोधित किया जाता है।

अब यह चिड़ी अपनी गुणवत्ता के अनुसार कई तरह से बनकर आती है। इसे प्लास्टिक से भी तैयार किया जाता है तो कागज से भी या फिर किसी अन्य धातु से भी। इसे बर्डी भी कह दिया जाता है। सामान्यतया यह एक बॉल का ही काम करती हैं लेकिन यह आगे से शकू के आकर में होती हैं जहाँ इसके पंख होते हैं। ऊपर से तो इसके पंख होते हैं जबकि नीचे की ओर रबड़ (Badminton chidi) या प्लास्टिक लगा हुआ होता हैं जो गोलाकार में होता है।

यह गोलाकार सामान्यतया पंख की अपेक्षा भारी होता हैं ताकि जब यह खिलाड़ी के पाले में आये तो वह भारी होपने के नीचे उसका मुहं ऊपर की ओर हो और रबड़ नीचे की ओर। अन्यथा पंख नीचे की ओर होंगे तो फिर वह शटल दूसरे पाले में जाने की बजाए उसी खिलाड़ी के रैकेट में फंस कर रह जाएगी। सामान्यतया यह शटल 70 मिलीमीटर लंबी होती है जिसका वजन 5 ग्राम के आसपास होता है।

बैडमिंटन नेट (Badminton net size in feet)

बैडमिंटन कोर्ट के बीच में एक जालीनुमा नेट लगा होता है जिसे उस बैडमिंटन खेल को खेलने के लिए आवश्यक रूप से लगाया जाता है। दरअसल इसी नेट की सहायता से दोनों खिलाड़ियों की सीमायें निर्धारित होती हैं। यह बैडमिंटन नेट कोर्ट के एकदम बीचों बीच दोनों खिलाड़ी के बीच में पार्टीशन करने के लिए लगाया जाता है।

इस नेट के दोनों ओर लोहे के दो बड़े डंडे लगे होते हैं और बीच में एक जाल बांधा हुआ होता है। यह जाल जालीनुमा होता है जिसके आर पार देखा जा सकता है और इसे ही नेट कहा जाता है। इस नेट के डंडो की ऊंचाई दोनों छोर से लगभग 1.55 मीटर ऊँची होनी चाहिए और जाल की ऊंचाई 1.52 मीटर होनी चाहिए। साथ ही किसी भी खिलाड़ी को शोर्ट सर्विस देते समय उस नेट से 2 मीटर दूर होना चाहिए।

बैडमिंटन खेल खेलने के नियम (Badminton game rules in Hindi)

अब हम बात करते हैं बैडमिंटन खेल खेलने के नियमो के बारे में। दरअसल अभी तक हमने जाना कि बैडमिंटन खेल की शुरुआत करते समय क्या क्या नियम होते हैं और उसके लिए किस तरह का कोर्ट होना चाहिए, एक आदर्श रैकेट व शटल का क्या साइज़ (Badminton game in Hindi) व वजन होना चाहिए इत्यादि। अब हम बात करेंगे कि बैडमिंटन खेल किन नियमों के अंतर्गत खेला जाता हैं।

बैडमिंटन खेल में सर्विस देने के नियम (Badminton service rules in Hindi)

अब यदि आप बैडमिंटन खेल खेल रहे हैं तो इसकी शुरुआत किसी खिलाड़ी के द्वारा दूसरे खिलाड़ी के पाले में अपने रैकेट की सहायता से शटल पहुँचाने (Badminton game ke rules) से होती है। यदि वह शटल ही सही तरीके से नही पहुंचाएगा तो फिर खेल शुरू ही कैसे होगा। ऐसे में बैडमिंटन खेल में सर्विस देने का तरीका कुछ इस प्रकार होता है:

  • जो खिलाड़ी सर्विस दे रहा हैं उसे शटल को अपनी कमर की ऊंचाई तक तो रखना ही चाहिए अर्थात वह उससे नीचे की ऊंचाई से सर्विस नही दे सकता है।
  • सर्विस देते समय वह शटल उस खिलाड़ी के बल्ले से एक बार ही टच हो। कहने का अर्थ यह हुआ कि यदि खिलाड़ी अपने बल्ले से दो बार टच करवा कर उस शटल को सामने वाले के पाले में भेजता हैं तो इससे सामने वाली खिलाड़ी को (Badminton me service kaise kare) एक अंक मिल जाता है।
  • शटल की सर्विस करते समय यदि वह शटल नेट से टच हो जाती हैं तो फिर चाहे वह सामने वाले के पाले में गिरे या उसके खुद के पाले में ही, अंक सामने वाले खिलाड़ी को ही मिलेगा।
  • यदि वह शटल सामने वाले खिलाड़ी (Badminton game ke niyam) के पाले में खिंची गयी रेखा के अंदर गिरती हैं तो वह सही मानी जाएगी। और यदि वह उस रेखा पर भी गिरती है तो भी वह सही मानी जाएगी लेकिन यदि वह उस रेखा के बार थोड़ा सा भी गिर जाए तो सामने वाले खिलाड़ी को एक अंक मिल जाएगा।

इस तरह से एक खिलाड़ी जो सर्विस दे रहा हैं उसे उस शटल को अपनी कमर की ऊंचाई से ऊपर, अपने रैकेट की सहायता से एक बार टच करवा कर उसे सामने वाले खिलाड़ी के पाले में बिना नेट से टच करवाए, भेजना होता है और वो भी बिना उसके पाले की लाइन को क्रॉस करवाए तो उसे सफल सर्विस माना जाता हैं।

बैडमिंटन खेल में स्कोर करने के नियम (Badminton ko kaise khelte hain)

अब जब आपने बैडमिंटन खेल की सर्विस करने के बारे में जान लिया हैं तो आपको यह भी जानना होगा कि आखिरकार बैडमिंटन खेल में स्कोर कैसे (Badminton kaise khelte hai) किया जाए। दरअसल किसी भी बैडमिंटन खेल की शुरुआत में खेल जितने के लिए एक निर्धारित स्कोर पॉइंट रखे जाते हैं जो कि खेल की अवधि के अनुसार कुछ भी हो सकते हैं। जैसे कि 5, 10, 11, 21 या कुछ ओर।

अब जो भी खिलाड़ी इन अंकों तक पहले पहुँच जाता हैं तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है। हालाँकि निर्धारित स्कोर से एक ज्यादा स्कोर पाना अनिवार्य होता है तभी उसे विजयी घोषित किया जाता है। जैसे कि आपको खेल खेलने के लिए 11 पॉइंट चाहिए तो इसका अर्थ यह नही कि जैसे ही आपके 11 पॉइंट हो गए तो आप विजयी हो गए। इसके लिए आपको 11 पॉइंट स्कोर करने के बाद एक और पॉइंट स्कोर करना होगा तभी आप विजयी माने (Badminton kaise khele in Hindi) जाएंगे।

इसी के साथ यह खेल 3 अवधियों में भी खेला जा सकता हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि तीन राउंड में। इसमें तीनो राउंड सामान ही होंगे और जो भी दो या दो से अधिक राउंड जीत जाता है उस खिलाड़ी को विजयी घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि आप पहला राउंड हार भी जाते हैं लेकिन यदि आप दूसरा व तीसरा राउंड जीत गए तो आप ही विजयी होंगे। ठीक उसी तरह यदि कोई खिलाड़ी पहले दो राउंड जीत लेता है तो ऐसे में तीसरा राउंड स्थगित कर दिया जाता है।

अब बैडमिंटन खेल में इन पॉइंट्स को पाने का या स्कोर करने का एक सिंपल सा नियम हैं। जब आप सफलतापूर्वक सर्विस दे दे या फिर सामने वाला आपको सर्विस दे दे तो आपको शटल को बिना गिरे सामने वाले पाले में स्ट्रोक करना हैं। अब वह शटल ऊपर बताये गए नियमों के अनुसार किसी के भी पाले में गिरेगी या नेट को टच करेगी या बाहर जाएगी तो उसका एक अंक खिलाड़ी को मिलेगा। आइए जाने कैसे:

  • यदि शटल आप मारते हैं और वह सामने वाले खिलाड़ी के पाले में बिना लाइन क्रॉस किये और बिना नेट को टच किये गिर जाती हैं तो आपको एक अंक मिलेगा। यही नियम सामने वाले पर भी लागू होगा जब वह आपके पाले में गिरेगी।
  • इसी तरह यदि आपके द्वारा मारी गयी शटल सामने वाले के पाले में लाइन को क्रॉस कर गिर जाए तो सामने वाले खिलाड़ी को एक अंक मिलेगा।
  • यदि आपके द्वारा मारी गयी शटल किसी तरह से आपके पाले में ही गिर जाए तो भी सामने वाले को एक अंक मिलेगा।
  • यदि आप शटल मारते समय उसे हाथ से टच कर ले या पकड़ ले तो भी सामने वाले को एक अंक मिल जाएगा।
  • यह जो भी नियम बताये गए हैं वह सामने वाले पर भी उसी तरह से लागू होंगे। साथ ही इसमें ऊपर बताये गए सर्विस देने के नियम भी लागू होंगे और उनके द्वारा भी स्कोर किया जा सकता है।

ऐसे में आपको शटल को बस अपने पाले में लाइन के अंदर गिरने से बचाना होगा और उसे रैकेट की सहायता से सामने वाले के पाले में पहुँचाना होगा। जैसे जैसे आपके पॉइंट बनते जाएंगे वैसे वैसे आप जीत की दिशा में आगे बढ़ते जाएंगे।

बैडमिंटन खेल के नियम – Related FAQs

प्रश्न: बैडमिंटन खेल कितने समय का होता है?

उत्तर: बैडमिंटन का खेल सामान्यतया आधे घंटे से लेकर 45 मिनट तक का होता है।

प्रश्न: बैडमिंटन में कितने प्रकार की सर्विस होती है?

उत्तर: बैडमिंटन खेल में दो तरह की सर्विस होती है, एक शोर्ट सर्विस और एक लॉन्ग सर्विस।

प्रश्न: बैडमिंटन का खेल कितने अंको का होता है?

उत्तर: सामान्यतया बैडमिंटन का खेल 11 या 21 अंकों का होता है।

प्रश्न: बैडमिंटन का भार कितना होता है?

उत्तर: बैडमिंटन में रैकेट का भार 70 से 100 ग्राम तो शटल का भार 5 ग्राम होता है।

प्रश्न: बैडमिंटन का पुराना नाम क्या था?

उत्तर: बैडमिंटन का पुराना नाम हिंदी में पूना था जबकि अंग्रेजी में इसे जेऊ दे वोलेंट।

प्रश्न: शटल कॉक में पंखुड़ियों की संख्या कितनी होती है?

उत्तर: शटल कॉक में पंखुड़ियों की संख्या 16 होती है।

तो बैडमिंटन खेल खेलने नियम होते हैं। आप इन नियमों का पालन करके इस खेल को सीख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं। इस तरह आज आपने जाना कि बैडमिंटन खेल कैसे खेला जाता है, उसको खेलने में किन किन चीजों का (Badminton kaise khelte hain) इस्तेमाल होता है और उसे खेलने के नियम क्या क्या है तथा किस तरह से बैडमिंटन के खेल को जीता जा सकता है।

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