ANI Full Form in Hindi | ANI News Agency क्या है?

आपने अक्सर न्यूज चैनलों पर ANI का लोगो लगी न्यूज़ चलते देखी होगी। या आपने देखा होगा कि जब भी कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है, तो ANI की माइक आईडी सामने रखी होती है। या कई सारे चैनल पर ANI की ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही होती है। अगर आप अखबार पढ़ने में दिलचस्पी रखते हैं तो आपने खबर के नीचे छोटा सा ANI लिखा कभी न कभी जरूर देखा होगा।

दोस्तों, ऐसे में आपके दिमाग में सवाल जरूर आता होगा कि आखिर चैनल आज तक का है तो ANI की खबर क्यों चल रही है? न्यूज़ अखबार की है तो नाम ANI का क्यों चल रहा है? मित्रों, आज हम आपको इस post के माध्यम से बताएंगे कि ANI क्या है? यह क्या करती है आदि बिंदुओं से जुड़ी सारी जानकारी। आइए जानते हैं।

ANI क्या है? ANI Full Form क्या है?

ANI की full form – Asian News International है। इसे हिंदी में एशियन न्यूज इंटरनेशनल पुकारा जाता है। आपको बता दें कि यह दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल न्यूज एजेंसी है। और साथ ही साथ यह भारत की भी सबसे बड़ी न्यूज़ एजेंसी है। इसके इस वक्त देश, विदेश में मिलाकर 100 ब्यूरो हैं। यह एजेंसी समय समय पर वेकेंसी निकालती है। जूनियर पदों पर भी यहां भर्ती के लिए विषय विशेषज्ञों को तरजीह दी जाती है।

ANI एजेंसी क्या करती है?

साथियों, जैसा कि स्पष्ट है कि यह न्यूज एजेंसी है। लिहाजा,यह मनोरंजन, जीवनशैली, व्यवसाय, राजनीति, विज्ञान, खेल या सामान्य समाचार की वीडियो फुटेज यह एनडीटीवी, सीएनएन, रिपब्लिक, आज तक, एबीपी, टाइम्स नाउ, जी, बीबीसी जैसी न्यूज कंपनियों को देती है। न केवल text, बल्कि picture, audio और video content भी यह मुहैया कराती है।

न्यूज़ चैनल यानी इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट ही नहीं बल्कि वेबसाइट और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर भी यह न्यूज़ फ़ीड provide करती है। उसके बदले यह अपने निर्धारित charge वसूलती है। अधिक ब्यूरो और संसाधन होने की वजह से ढ़ेरों consumers इसकी न्यूज़ फ़ीड का लाभ उठाते हैं।

ANI की सेवा न्यूज़ कंपनियां क्यों लेती हैं?

दोस्तों, आपके दिमाग में सवाल उठ रहा होगा कि जब न्यूज़ कंपनियां अपने संसाधन रखती हैं और उनके पास अपने न्यूज़ रिपोर्टर होते हैं तो वह ANI की सेवा क्यों लेते हैं? तो दोस्तों, इसकी वजह यह है कि न्यूज कंपनी के पास इतने सारे रिपोर्टर्स नहीं होते कि वह हर जगह की न्यूज कवर कर सके। इसलिए यह न्यूज कंपनियां न्यूज feed के लिए ANI न्यूज एजेंसी की मदद लेती हैं।

ANI की स्थापना कब हुई थी?

न्यूज़ एजेंसी ANI की स्थापना नौ दिसंबर, 1971 में हुई थी। इस तरह से आज यह न्यूज एजेंसी करीब पचास साल की होने वाली है। प्रेम प्रकाश, जो एक बड़े फोटो जर्नलिस्ट के रूप में नाम कमा चुके थे,वही इस न्यूज़ एजेंसी के संस्थापक थे। अगर आज की बात करें तो इस वक्त संजीव प्रकाश इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ हैं। वह एजेंसी के संस्थापक प्रेम प्रकाश के ही सुपुत्र हैं।

इन्हीं संजीव प्रकाश की धर्मपत्नी स्मिता प्रकाश इस एजेंसी की मुख्य संपादक यानी एडिटर इन चीफ हैं। इस एजेंसी का मुख्यालय इसकी स्थापना के वक्त से ही देश की यानी राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में है।

ANI किस किस को न्यूज बेचती है?

ANI Full Form in Hindi | ANI News Agency क्या है?

दोस्तों, यह ANI न्यूज एजेंसी किसी एक जगह से नहीं, बल्कि जगह जगह से न्यूज रिपोर्ट को कलेक्ट करती है। इसके बाद उस न्यूज को सब्सक्राइब करने वाली अपने संस्थाओं जैसे कि समाचार पत्र, पत्रिका, टेलीविजन ब्राडकास्टरों को बेच देती है। कई बड़े नेता भी अपनी बात सभी चैनलों और प्रसार माध्यमों तक पहुंचाने के लिए ANI की सेवा लेते हैं।

ANI के संस्थापक कौन हैं?

दोस्तों, आइए अब आपको बता दें कि इसके संस्थापक प्रेम प्रकाश कौन थे। साथियों, प्रेम प्रकाश ने अपना करियर फोटोग्राफी से शुरू किया था। इसके बाद इन्हें फोटो जर्नलिस्ट के रूप में विसन्यूज में जगह मिली। उन्होंने आजादी के बाद के बहुत से ऐतिहासिक घटनाक्रमों को कवर किया। 1970 के दौरान वह न्यूज और डाक्यूमेंट्री मेकिंग की दुनिया में एक अहम व्यक्ति थे। एक जाने माने नाम थे। विदेशी पत्रकारों के बीच भी उनका बहुत नाम था। उनके काम के लिए उन्हें एमबीई सम्मान भी दिया गया।

ANI का सफर किस तरह चला?

ANI आज बुलंदी पर है। इसका सफर उतार चढ़ाव भरा रहा है। आज जो स्मिता प्रकाश एजेंसी की मुख्य संपादक हैं, उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मास कम्युनिकेशन यानी आईआईएमसी से पढ़ाई की। 1986 के आस पास उन्होंने एएनआई में इंटर्नशिप शुरू की, जहां उन्हें बाद में स्थायी कर दिया गया। स्मिता सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पूर्व निदेशक आई राममोहन राव की पुत्री होने की वजह से एएनआई को सरकारी कार्यक्रमों के साथ आगे जाने में मदद मिली। वाह्य मामलों के मंत्रालय के एक्टरनरल पब्लिसिटी डिवीजन में एएनआई ने प्रभावी सेवाएं दीं। उन्होंने सेना का सकारात्मक पक्ष भी दिखाया।

कश्मीर में आतंकी दौर के चरम के दौरान एएनआई अकेली एजेंसी थी, जो वीडियो फुटेज जारी कर रही थी। राव उस वक्त राज्य के मीडिया सलाहकार थे। 1983 में राइटर्स ने एएनआई में हिस्सेदारी खरीदी। 2000 तक भारत में निजी 24-7 न्यूज चैनलों की बाढ़ आ गई थी। लेकिन अप्रभावी रिवेन्यू माडल की वजह से वह संपूर्ण देश में वीडियो रिपोर्टर हायर करने की क्षमता नहीं थी। भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती ताकत का सहारा मिलने के बाद एएनआई को घरेलू वीडियो प्राडक्शन क्षमता को बढ़ावा मिला। 2000 में ही एशियन फिल्म्स टीवी की स्थापना की गई। इसका मकसद न्यूज पेपर और पीरियाडिकल्स को फीड प्रदान करना था।

2005 के अंत तक एएनआई का बिजनेस माडल बहुत बेहतर नतीजा दे रहा था। इसका कार्यालय भी गोल मार्केट से हटाकर आरकेपुरम स्थित एक पांच मंजिला इमारत में शिफ्ट कर दिया गया था। एएनआई पर यूपीए सरकार का भी भरोसा कायम रहा। यहां तक कि स्मिता प्रकाश को वाह्य मामलों के मंत्रालय ने दो सदस्यीय भारतीय पत्रकारों के समूह का हिस्lसा बनाया था, जिन्होंने भारत और अमेरिकी प्रधानमंत्री की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ के सहयोगी के तौर पर भी अहम भूमिका निभाई।

क्या आरोपों से भी घिरी ANI?

जी हां दोस्तों, इस एजेंसी पर अलबत्ता प्रोपेगेंडा के तहत न्यूज देने का भी आरोप लगा। एकतरफा न्यूज़ देने का भी आरोप लगा। खास तौर पर कश्मीर के संदर्भ में। और सन् 2005 के बाद तो न्यूज चैनलों ने मुख्य रूप से बढ़े हुए चार्ज की वजह से एएनआई को अनसब्सक्राइब करना शुरू कर दिया।

क्या फिर बदली स्थिति –

जी हां,दोस्तों, एजेंसी की स्थितियां फिर बदलीं। आज से आठ साल पहले सन् 2011 में स्मिता के पुत्र ईशान प्रकाश ने ज्वाइन किया और लाइव यू लाए। यह ओबी वैन के ऊपर पायनियर तकनीक थी और अधिक पोर्टेबल थी। एजेंसी ने अपने ओवरसीज ब्यूरोज में भी विस्तार किया। विभिन्न राज्य सरकारों और विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों के साथ कांट्रेक्ट किए। एक बार फिर से एएनआई की मोनोपॉली हो गई और इनके ज्यादातर व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वी धराशायी हो गए।

आपको यह भी बता दें कि 2011 तक एएनआई ने राइटर्स की 99 प्रतिशत तक फीड दीं। और आपको जानकारी दे दें कि यह भी रिकार्ड है कि 2017-18 में ANI एजेंसी को अपनी न्यूज़ संबंधी सर्विस के लिए ढाई करोड़ रुपये से भी ज्यादा का भुगतान किया गया।

ANI और स्मिता प्रकाश चर्चा में क्यों रहे?

दोस्तों, पिछले चार साल के दौरान ANI और इसकी मुख्य संपादक स्मिता प्रकाश चर्चा में रहे। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू सबसे पहले स्मिता प्रकाश ने ही लिया था। जहां जी न्यूज़ और इंडिया टीवी पर सत्ता के करीबी होने का आरोप लगता रहा है और अन्य कई चैनलों को भी जहां सत्ता के पक्ष में झुका करार दिया जाता है, वहीं स्मिता प्रकाश के निष्पक्ष इमेज का होने के चलते बताया जाता है कि मोदी को इसका बहुत फायदा मिला। अलबत्ता, कोई सख्त सवाल करने या इंटरव्यू के दौरान प्रति प्रश्न का जाल बिछाने में उन्होंने कतई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

राजनीति में ANI की भूमिका –

ANI की भूमिका आप इससे भी समझ सकते हैं कि 2019 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साक्षात्कार की जरूरत पड़ी तो उन्होंने सबसे पहले ANI को चुना। इस बार मोदी सरकार के लिए स्थितियां थोड़ी उलट थीं। सरकार पर राफेल में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे बेरोजगारी की दर बहुत ज्यादा बढ़ी हुई थी। उन्होंने एक बार फिर से ANI पर भरोसा जताया। इससे पहले स्मिता प्रकाश अपने रिपोर्ताज में मोदी के करिश्मे, उनके परिजनों की साधारण जीवनशैली का वर्णन कर चुकी थीं। इस बार फिर स्मिता ने पीएम से प्रश्न किए, लेकिन यह तमाम इस तरह पूछे गए, जिससे उन्हें अपने मनमुताबिक जवाब दिए जाने का मौका मिला। या उनसे पूछा कुछ गया और उन्होंने सवाल पर जवाब को हल्के से ट्विस्ट दे अपने मनचाहे अंदाज में मोड़ लिया।

जैसे महिला अपराध की ही बात की जाए तो जब उनसे महिला अपराध बढ़ने से जुड़े सवाल हुए तो उन्होंने सारी बात विपक्षी कांग्रेस पर डालते हुए अपना लंबा सा बयान उस पर दे डाला। कई लोगों ने अलबत्ता, सवालों को कमजोर और जवाबों को भरमाने वाला भी करार दिया। कुछ ने इंटरव्यू को इमेज बिल्डिंग का महज एक हिस्सा बताया तो कुछ के लिए इंटरव्यू महज एडवरटोरियल से ज्यादा हैसियत का नहीं था। लेकिन यह सरकार के लिए बेहतर साबित हुआ, इसमें दो राय नहीं है।

ANI के बड़ी एजेंसी का फायदा होना ही था। आपको यह भी बता दें कि कांट्रेक्ट के बाद एजेंसियां इमेज बिल्डिंग का भी काम मुस्तैदी से करती हैं। खास तौर पर चुनाव के वक्त इनकी भूमिका और काम में आशातीत वृद्धि हो जाती है। एजेंसी कई प्राडक्ट और सर्विस देती है। इनके क्लायंट जैसे कि हम ऊपर बता चुके हैं इलेक्ट्रॉनिक,प्रिंट, वेबसाइट, मोबाइल प्लेटफॉर्म आदि वाले सभी होते हैं, जो इनसे फ़ीड लेते हैं।

ANI News Agency In Hindi –

तो दोस्तों, यह थी ANI के बारे में पूरी जानकारी। उम्मीद है कि आपको ANI Full Form in Hindi | ANI News Agency क्या है? पसंद आई होगी। और आपको यहां दी गई जानकारी से फायदा पहुंचेगा। आप student हों या कहीं कार्यरत हों या फिर compition की तैयारी में जुटे हों। यह जानकारी आप ही के लिए है। दोस्तों, अगर इस post को पढ़कर अगर आपके दिमाग में आ रहा है कोई सवाल तो आप comment box में comment करके हम तक पहुंचा सकते हैं। हम आपको आपके सवाल का आपको माकूल जवाब देने की कोशिश करेंगे।

साथियों, अगर आप जानना चाहते हैं किसी अन्य विषय के बारे में तो भी हमसे संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए भी आप comment box में comment कर सकते हैं। मित्रों, अगर आपके पास हमारे लिए कोई सुझाव है तो भी आप उसे भी यहां अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर हमसे साझा कर सकते हैं। हम उसे अमली जामा पहनाने की पूरी कोशिश करेंगे। हमें आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा। जल्दी कीजिएगा। ।। शुक्रिया।।

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2 thoughts on “ANI Full Form in Hindi | ANI News Agency क्या है?”

  1. बहोत अच्छी मालूमात अपने दि है हमे बहोत सी जानकारी मिली। ऐसेही और जरुर जानकारी हमे पोहंचये। धन्यवाद

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